भारत के इलेक्शन सिस्‍टम के मुरीद हुए डोनाल्ड ट्रंप, CEC ज्ञानेश कुमार का जिक्र कर अमेरिका में वोटर आईडी कार्ड अनिवार्य करने की उठाई मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली और वोटर आईडी सिस्टम का हवाला देते हुए ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) अमेरिका एक्ट’ को पास करने की मांग दोहराई है। ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में अमेरिका में वोटर पहचान की जरूरतों के बारे में भारत के मुख्य चुनाव

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ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की:कहा- 64.6 करोड़ वोटर्स के पास फोटो आईडी, अमेरिका में भी हो जरूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि हर अमेरिकी मतदाता के लिए फोटो आईडी जरूरी होनी चाहिए, ताकि चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने ये बातें ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहीं। पंजीकरण के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी सेव अमेरिका एक्ट के तहत अमेरिका में वोटर के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा, पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू करने का प्रस्ताव है। इस कानून में डाक से वोट देने की प्रक्रिया को काफी सीमित करने की बात भी कही गई है। ट्रंप लगातार सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) यानी सेव अमेरिका एक्ट को पास कराने पर जोर दे रहे हैं और उनका दावा है कि इससे चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। सीनेट में आगे नहीं बढ़ी प्रक्रिया इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों पार्टी में मतभेद हैं। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट इस महीने की शुरुआत में कानून पास करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए बिना पांच हफ्ते के अवकाश पर चली गई। ————- ये खबर पढ़ें… ट्रम्प बोले- लेविट को मुझसे ज्यादा अपने बच्चे पसंद:व्हाइट हाउस में उनकी जगह लेना मुश्किल; लेविट का प्रेस सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के पद छोड़ने पर मजाक किया। पूरी खबर पढ़ें…

Hockey World Cup: इंग्लैंड से हारने के बाद सेमीफाइनल में कैसे पहुंचेगी टीम इंडिया, पाकिस्तान के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। एम्सटेलवीन के वैगनर स्टेडियम में खेले गए पूल D के इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत में एक गोल गंवाया, लेकिन दूसरे क्वार्टर में दो गोल कर 2-1 की बढ़त बना ली। इसके बाद इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे हाफ में तीन गोल दागे और मैच 4-2 से अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ने भारत को हराकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की और छह अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना ली।

वहीं भारत के खाते में दो मैचों से तीन अंक हैं और टीम पूल D की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर बनी हुई है। आइए जानते हैं भारत कैसे पहुंच सकता है सेमीफाइनल में

पाकिस्तान के खिलाफ मैच अहम

भारत के पास अभी भी FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल (दूसरे राउंड) में पहुंचने का मौका है। टीम का अगला मुकाबला 19 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ होगा। अगर हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम इस मैच में जीत हासिल कर लेती है, तो वह टूर्नामेंट के अगले दौर के लिए क्वालिफाई कर जाएगी। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारत के लिए बेहद अहम है। अगर भारत जीत जाता है तो वह इंग्लैंड के साथ दूसरे राउंड में पहुंच जाएगा। वहीं पाकिस्तान से हार मिलने पर भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। अगर मैच ड्रॉ रहता है, तो भी भारत के पास आगे बढ़ने का मौका रहेगा, लेकिन इसके लिए वेल्स को इंग्लैंड के खिलाफ जीत नहीं मिलनी चाहिए।

भारत-पाकिस्तान ड्रॉ हुआ तो कैसे होगा फैसला

अगर भारत और पाकिस्तान का मुकाबला ड्रॉ रहता है और वेल्स इंग्लैंड को हरा देता है, तो पूल D में भारत और वेल्स के बीच गोल डिफरेंस के आधार पर फैसला होगा। जिस टीम का गोल डिफरेंस बेहतर रहेगा, वह दूसरे स्थान पर रहकर अगले राउंड में पहुंचेगी। फिलहाल भारत का गोल डिफरेंस 0 है, जबकि वेल्स का -2 है। वेल्स को अपने पहले पूल D मुकाबले में भारत के खिलाफ 1-3 से हार मिली थी। अब भारत के अगले मुकाबले का नतीजा पूल D की तस्वीर तय करेगा।

पाकिस्तान ग्रुप में सबसे नीचे

अगर भारत पाकिस्तान से हार जाता है और वेल्स इंग्लैंड को नहीं हरा पाता, तो इंग्लैंड पूल में पहले स्थान पर रहेगा। वहीं पाकिस्तान चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचकर FIH मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे राउंड के लिए क्वालिफाई कर जाएगा। पाकिस्तान की टीम फिलहाल पूल D की अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर है। टीम ने अब तक दो मुकाबले खेले हैं, लेकिन उसे एक भी जीत नहीं मिली है। पहले मैच में पाकिस्तान को इंग्लैंड के हाथों 1-4 से हार मिली थी, जबकि वेल्स के खिलाफ उसका मुकाबला 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ। अब भारत के खिलाफ होने वाला मैच पाकिस्तान के लिए काफी अहम रहने वाला है।

नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी को हराकर आयुष शेट्टी ने किया बड़ा उलटफेर (Video Highlights)

भारत के आयुष शेट्टी ने सोमवार को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के शुरुआती दौर के रोमांचक मुकाबले में चीन के दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी शी यू की को हराकर तहलका मचा दिया जबकि महिला वर्ग में पीवी सिंधु ने आसान जीत हासिल की।रैंकिंग में 22वें स्थान पर मौजूद 21 वर्षीय भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपने डेब्यू मैच में 30 वर्षीय चीनी टॉप सीड खिलाड़ी के खिलाफ संयम बनाए रखा और 21-14, 13-21, 21-19 से शानदार जीत हासिल की।

आयुष इस मैच से पहले शी यू की के खिलाफ 0-3 के हेड-टू-हेड रिकॉर्ड के साथ उतरे थे, लेकिन उनमें से दो मुकाबले काफी कड़े रहे थे। पिछले साल इंडोनेशिया मास्टर्स में, शी यू की ने भारतीय खिलाड़ी को 21-19, 21-19 से हराया था, जबकि इस साल की शुरुआत में मलेशिया ओपन के राउंड ऑफ़ 16 में आयुष को हराने के लिए उन्हें तीन गेम और एक घंटा 10 मिनट का समय लगा था। हालांकि, उनकी सबसे हालिया भिड़ंत एकतरफा रही थी। अप्रैल में निंगबो में बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में शी यू की ने आयुष को 21-8, 21-10 से हराया था।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ, आयुष ने दिखाया कि अप्रैल की उस हार के बाद से उनमें काफी सुधार हुआ है। भारतीय खिलाड़ी ने मजबूत शुरुआत की और 8-3 की बढ़त बना ली। उन्होंने अपनी बढ़त को 13-6 तक पहुंचाया और फिर संयम बनाए रखते हुए पहला गेम 21-14 से जीत लिया।

दूसरे गेम में शी यू की ने वापसी की; दोनों खिलाड़ी 8-8 की बराबरी पर थे, जिसके बाद चीनी शटलर ने धीरे-धीरे गेम पर पकड़ बना ली। शी यू की 15-10 से पांच अंक आगे हो गए और फिर बढ़त को 17-13 तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने लगातार चार अंक जीतकर मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। आखिरी गेम में स्कोर 3-3 से बराबर था, लेकिन फिर आयुष ने लगातार तीन पॉइंट जीतकर बढ़त बना ली और इंटरवल तक 11-5 से आगे हो गए। इसके बाद, शी यू की की वापसी की कोशिशों के बावजूद आयुष ने अपना संयम बनाए रखा और दुनिया के नंबर 1 बैडमिंटन खिलाड़ी के खिलाफ शानदार जीत हासिल की।

वहीं, पीवी सिंधु ने आयरलैंड की सोफिया नोबल के खिलाफ सीधे गेम में जीत के साथ अपने महिला सिंगल्स अभियान की शुरुआत की। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट और पांच बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट, नौवीं वरीयता प्राप्त भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने दुनिया की 141वें नंबर की खिलाड़ी को 29 मिनट में 21-7, 21-13 से हराया। 2019 की वर्ल्ड चैंपियन सिंधु का अगला मुकाबला राउंड ऑफ़ 32 में कनाडा की वेन यू झांग से होगा।

इस भारतीय खिलाड़ी के नाम दो ब्रॉन्ज मेडल, दो सिल्वर मेडल और एक गोल्ड मेडल (जो उन्होंने 2019 में जीता था) दर्ज हैं। इस बड़े इवेंट में सेमीफाइनल में पहुंचने पर उनका कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो जाएगा और वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के इतिहास में छह मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी। केवल दो अन्य खिलाड़ियों ने पांच वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीते हैं — चीन के लिन डैन, जिनके नाम पांच मेन्स सिंगल्स गोल्ड हैं, और उनके देश के झाओ युनलेई, जिन्होंने तीन मिक्स्ड डबल्स और दो विमेंस डबल्स खिताब जीते हैं। सिंधु ने शुरू से ही अपनी कमज़ोर मानी जा रही प्रतिद्वंद्वी पर दबदबा बनाए रखा और 29 मिनट में आसानी से मैच जीत लिया।

इससे पहले दिन में, ट्रेसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने स्पेन की पाउला लोपेज़ और लूसिया रोड्रिग्ज़ के खिलाफ 21-9, 21-13 की शानदार जीत के साथ महिला डबल्स के दूसरे राउंड में जगह बनाई। भारतीय जोड़ी को राउंड ऑफ़ 64 के अपने मैच में जीत हासिल करने में सिर्फ़ 33 मिनट लगे। कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट जोड़ी का अगला मुकाबला राउंड ऑफ़ 32 में अमेरिका की लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली (16वीं वरीयता प्राप्त) से होगा।

एमआर अर्जुन और हरिहरन अमसाकरुणन पुरुष डबल्स में आगे बढ़े, क्योंकि उनके आयरिश प्रतिद्वंद्वी स्कॉट गिल्डिया और पॉल रेनॉल्ड्स शुरुआती राउंड के मैच के दौरान चोट के कारण हट गए। दुनिया में 24वें नंबर की भारतीय जोड़ी ने पहला गेम 21-16 से जीता था और दूसरे गेम में 6-4 से आगे चल रही थी, तभी दुनिया के 102वें नंबर की आयरिश जोड़ी आगे नहीं खेल पाई। इस नतीजे के साथ भारतीय जोड़ी राउंड ऑफ़ 32 में पहुंच गई है, जहां उनका मुकाबला 15वीं वरीयता प्राप्त रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया की जोड़ी कांग मिन ह्युक और की डोंग जू से होगा।

पुरुष डबल्स की स्टार जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, जो पांचवीं वरीयता प्राप्त हैं, को दूसरे दौर में सीधे प्रवेश मिला है, जहां उनका सामना स्कॉटलैंड के अलेक्जेंडर डन और एडम प्रिंगल से होगा।

16 साल की उम्र में CA बनकर रचा इतिहास, ब्रिलियंट स्टूडेंट लक्ष्मणन मय्यप्पन की पूरी सक्सेस जर्नी जानिए

16 साल की उम्र में ज्यादातर युवा अपनी पढ़ाई और भविष्य के करियर को लेकर तैयारी कर रहे होते हैं। उसी उम्र में लक्ष्मणन मय्यप्पन ने इतिहास रच दिया है। दुबई में रहने वाले लक्ष्मणन मय्यप्पन ने महज 16 साल और 141 दिन की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने लक्ष्मणन मय्यप्पन को ‘दुनिया का सबसे कम उम्र का पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट’ घोषित किया है। ये उनकी कम उम्र में हासिल की गई बड़ी उपलब्धि है। आइए जानते हैं कौन है लक्ष्मणन मय्यप्पन और कैसे की शुरुआत

चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसी प्रोफेशनल पढ़ाई आमतौर पर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद की जाती है। लेकिन मय्यप्पन ने 10वीं कक्षा पूरी करने के तुरंत बाद ही अकाउंटिंग की पढ़ाई शुरू कर दी थी। कम उम्र में इस क्षेत्र में कदम रखकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह बड़ी कामयाबी हासिल की।

बहुत कम उम्र में शुरू की तैयारी

भारत और दुबई से जुड़े फाइनेंस प्रोफेशनल लक्ष्मणन मय्यप्पन ने बहुत कम उम्र में ACCA की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने 15 साल की उम्र में कोविड-19 महामारी के दौरान इस प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन की ट्रेनिंग ली, जिसे पूरा करने में करीब एक साल लगा। इसके बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर आधिकारिक मान्यता दी।

मां से मिला प्रेरणा

लॉकडाउन के दौरान लक्ष्मणन मय्यप्पन की अकाउंटिंग में दिलचस्पी बढ़ी। उनकी मां ACCA प्रोफेशनल हैं और उन्होंने ही उन्हें अकाउंटिंग की शुरुआती बातें समझाईं। इसके बाद मय्यप्पन की रुचि फाइनेंस के क्षेत्र में बढ़ती गई। 10वीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ACCA करने का फैसला लिया और कम उम्र में ही इसकी तैयारी शुरू कर दी। ACCA की पढ़ाई पूरी करने के बाद लक्ष्मणन मय्यप्पन ने फाइनेंस के क्षेत्र में अपनी आगे की पढ़ाई और करियर जारी रखा। वह CFA चार्टर होल्डर भी बन चुके हैं और फिलहाल फाइनेंस में MSc की पढ़ाई कर रहे हैं।

इसके साथ ही वह दुबई की सेंचुरी फाइनेंशियल कंपनी में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। उनके काम में निवेश से जुड़ी रिसर्च, वित्तीय विश्लेषण और सही फैसले लेने में मदद करना शामिल है।

हमेशा कुछ नया सीखा

लक्ष्मणन मय्यप्पन ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ नौकरी करना नहीं था। वह कम उम्र में ज्यादा से ज्यादा प्रोफेशनल पढ़ाई पूरी करना चाहते थे। साथ ही, वह वित्तीय कामकाज को करीब से समझना चाहते थे। उनका मानना है कि ऐसी स्किल्स सीखनी चाहिए, जो लंबे समय तक काम आएं। इसी वजह से उन्होंने हमेशा कुछ नया सीखने और अपनी जिज्ञासा को बनाए रखने पर ध्यान दिया। लक्ष्मणन मय्यप्पन की कहानी से पता चलता है कि, अगर कम उम्र में अपनी रुचि पहचानकर मेहनत की जाए तो बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आज वह दुबई में पढ़ाई के साथ फाइनेंस रिसर्च और प्रोफेशनल काम भी कर रहे हैं।

Maruti Baleno Facelift: 5 सितंबर को आ रही है नई मारुति सुजुकी बलेनो फेसलिफ्ट, जानें संभावित कीमत और इसके फीचर्स

मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय कार बलेनो का नया अपडेटेड मॉडल जल्द भारतीय बाजार में उतार सकती है। कंपनी इसे 5 सितंबर को लॉन्च करने की तैयारी में है। नई बलेनो में मौजूदा पेट्रोल और CNG इंजन के विकल्प जारी रहने की उम्मीद है, जबकि कार के डिजाइन और फीचर्स में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए अपडेट के साथ कंपनी ग्राहकों को पहले से बेहतर और आकर्षक अनुभव देने की कोशिश करेगी।

2026 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट को त्योहारी सीजन में बाजार में उतारा जाएगा। इस दौरान आमतौर पर कारों की खरीदारी बढ़ जाती है, ऐसे में कंपनी को नई बलेनो से अच्छी बिक्री की उम्मीद हो सकती है। इसकी लॉन्चिंग 5 सितंबर को होने की बात कही जा रही है। हालांकि, कार की बुकिंग कब शुरू होगी, कितने वेरिएंट आएंगे और इसकी कीमत क्या होगी, इसकी जानकारी लॉन्च के नजदीक सामने आने की उम्मीद है।

नई मारुति बलेनो को सड़कों पर टेस्टिंग के दौरान देखा जा चुका है। सामने आई तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि कार के आगे वाले हिस्से में कुछ नए बदलाव किए जा सकते हैं। इसमें नया फ्रंट ग्रिल, बदला हुआ बंपर और नए डिजाइन के अलॉय व्हील्स मिलने की उम्मीद है। वहीं कार के पीछे बड़े बदलाव की संभावना कम है। कंपनी मौजूदा बलेनो के डिजाइन को बरकरार रखते हुए रियर बंपर और लाइट्स में हल्के बदलाव कर सकती है।

नई बलेनो फेसलिफ्ट में ग्राहकों को कुछ नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। इसमें नई सीट अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंट लाइटिंग और सिंगल-पेन सनरूफ दिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, डैशबोर्ड का डिजाइन पहले जैसा ही रह सकता है। कार में मौजूदा 9 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, हेड-अप डिस्प्ले, 360 डिग्री कैमरा और छह स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम भी मिल सकता है। कंपनी ने अभी तक नई बलेनो के सभी फीचर्स की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

नई बलेनो फेसलिफ्ट में मौजूदा 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन को बरकरार रखा जा सकता है। यह इंजन करीब 89.7 PS की पावर और 113 Nm का टॉर्क दे सकता है। इसके साथ 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल गियरबॉक्स मिलने की उम्मीद है।

वहीं CNG मॉडल में 77.5 PS की पावर और 98.5 Nm का टॉर्क देने वाला इंजन जारी रह सकता है, जिसे 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ पेश किया जा सकता है। मौजूदा मारुति बलेनो की एक्स-शोरूम कीमत 5.99 लाख रुपये से 9.10 लाख रुपये के बीच है। नए फेसलिफ्ट मॉडल में अतिरिक्त फीचर्स और बदलाव किए जाने की वजह से इसकी कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। बाजार में नई बलेनो का मुकाबला टाटा अल्ट्रोज, हुंडई i20 और टोयोटा ग्लैंजा जैसी प्रीमियम हैचबैक कारों से होगा।

विश्वकप में भारतीय हॉकी टीम को इंग्लैंड ने 2-4 से हराकर चौंकाया

भारत को FIH पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के पूल डी मैच में इंग्लैंड के हाथों सोमवार को 2-4 से हार का सामना करना पड़ा।मैच की शुरुआत में पहले क्वार्टर में निक बांडुरक ने गोल करके इंग्लैंड को बढ़त दिलाई, लेकिन दूसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह के गोल की बदौलत भारत ने जोरदार वापसी की।

हालांकि, आखिरी दो क्वार्टर में इंग्लैंड ने भारत को पीछे छोड़ दिया। तीसरे क्वार्टर में स्टुअर्ट रशमेयर और हेनरी क्रॉफ्ट ने गोल करके इंग्लैंड को बढ़त दिलाई, जबकि बांडुरक ने एक और गोल करके इंग्लैंड की जीत पक्की कर दी।

इस नतीजे का मतलब है कि अगले दौर में जगह पक्की करने के लिए भारत को पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी पूल मैच जीतना होगा। क्वालिफिकेशन पक्का करने के लिए भारत को जीतना ज़रूरी है, लेकिन अगर मैच ड्रॉ होता है तो उनके बाहर होने का खतरा रहेगा। हारने पर वे वर्ल्ड कप से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे।19 अगस्त को होने वाले इस बड़े मुकाबले पर सबकी नज़रें टिकी हैं!

दूसरे क्वार्टर में दो गोल करने वाली भारतीय टीम ने आखिरी 30 मिनट में इंग्लैंड को डिफेंस में सेंध लगाने का मौका दे दिया । इंग्लैंड के लिये निकोलस बेंडारूक ने (14वें और 55वें मिनट ) दो गोल किये जबकि स्टुअर्ट रशमेयेर ने 39वें और हेनरी क्रोफ्ट ने 43वें मिनट में गोल दागा । भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (17वां ) और दिलप्रीत सिंह (25वां ) ने गोल किये।

पूल डी में दोनों मैच जीतकर इंग्लैंड शीर्ष पर है जबकि एक जीत और एक हार के बाद भारत दूसरे स्थान पर है । वेल्स से ड्रॉ खेलने के बाद पाकिस्तान एक हार और एक ड्रॉ के साथ तीसरे और वेल्स गोल औसत के आधार पर आखिरी स्थान पर है।

BrahMos और Agni-V में कौन ज्यादा ताकतवर? दोनों मिसाइलों का काम बिल्कुल अलग, समझिए फर्क

भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक मिसाइल है। जिसकी गति और मारक क्षमता देखकर पूरी दुनिया हैरान रहती है। भारत के इन मिसाइलों का एक नजारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में दिखा था।  पिछले 40 साल में भारत ने मिसाइल तकनीक विकसित करने की शुरुआत से लेकर आधुनिक और बेहद ताकतवर मिसाइल सिस्टम तैयार करने तक लंबा सफर तय किया है। आज देश जमीन, समुद्र और हवा से होने वाले खतरों का मुकाबला करने की अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। इस सफर में ब्रह्मोस और अग्नि-5 भारत की मिसाइल ताकत के दो बड़े उदाहरण हैं।

हालांकि ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही भारत की ताकतवर मिसाइलों में शामिल हैं, लेकिन इन्हें एक-दूसरे से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। दोनों का काम और इस्तेमाल अलग है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, अग्नि-5 भारत की रणनीतिक सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन को किसी बड़े हमले से रोकना और भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना उनकी ताकत के आधार पर करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों मिसाइलें अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से दोनों का अपना अलग और महत्वपूर्ण स्थान है।

अलग-अलग मिशन तय करते हैं दोनों मिसाइलों की भूमिका

ब्रह्मोस और अग्नि-5 के बीच अंतर समझने का सबसे आसान तरीका यह जानना है कि दोनों को किस मकसद से बनाया गया है। दोनों आधुनिक और ताकतवर मिसाइलें हैं, लेकिन युद्ध में उनका इस्तेमाल अलग-अलग काम के लिए होता है।

ब्रह्मोस नाम ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदियों के नाम से लिया गया है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित की है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, यानी यह आवाज की रफ्तार से भी कई गुना तेज उड़ सकती है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें युद्धपोत, एयरफील्ड, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर जैसे लक्ष्य शामिल हो सकते हैं। यह मिसाइल भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल है और भारत की प्रमुख स्ट्राइक मिसाइलों में से एक है।

वहीं, अग्नि-5 एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे डीआरडीओ ने भारत की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता मजबूत करने के लिए विकसित किया है।

ब्रह्मोस के विपरीत अग्नि-5 का इस्तेमाल आम युद्ध के मैदान में किसी ठिकाने पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी से आने वाले बड़े खतरों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है। यह भारत की परमाणु प्रतिरोध नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल अलग-अलग तरीके से काम करती हैं

ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही मिसाइलें हैं, लेकिन इनके उड़ने और टारगेट तक पहुंचने का तरीका बिल्कुल अलग है। इसी वजह से दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग काम के लिए किया जाता है।

ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है। यह वायुमंडल के अंदर एक विमान की तरह उड़ते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसमें रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे बहुत तेज गति से उड़ने में मदद करता है। यह कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे समय रहते पहचानना और रोकना मुश्किल हो सकता है।

वहीं, अग्नि-5 एक बैलिस्टिक मिसाइल है। यह ब्रह्मोस से बिल्कुल अलग तरीके से लक्ष्य तक पहुंचती है। लॉन्च होने के बाद यह बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर तेज गति से नीचे आते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इस तरह यह लॉन्च वाली जगह से हजारों किलोमीटर दूर तक स्थित लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होती है।

आसान शब्दों में कहें तो ब्रह्मोस तेज गति से कम ऊंचाई पर उड़कर सटीक हमला करने वाली मिसाइल है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता को मजबूत करना है।

स्पीड और रेंज

ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के लिए जानी जाती है। यह करीब मैक 3 की गति से उड़ सकती है। इतनी तेज गति के कारण यह कुछ ही समय में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। कम ऊंचाई पर उड़ने और लक्ष्य के करीब पहुंचने के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के कारण इसे रोकना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, अग्नि-5 को लंबी दूरी के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। इसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में तुरंत हमला करने के बजाय भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

आसान भाषा में समझें तो ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी रफ्तार और सटीक हमला करने की क्षमता है, जबकि अग्नि-5 की खासियत उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक भूमिका है।

कौन सी मिसाइल ज्यादा ताकतवर है?

ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना करते समय अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि दोनों में से कौन ज्यादा ताकतवर है। लेकिन इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों मिसाइलों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बनाया गया है। इसलिए इनकी ताकत का आकलन मिशन के हिसाब से करना ज्यादा सही होगा।

अगर लक्ष्य दुश्मन के युद्धपोत, एयरबेस या सैन्य कमांड सेंटर पर तेजी से हमला करना है, तो ब्रह्मोस ज्यादा उपयोगी है। इसकी तेज रफ्तार, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता इसे एक प्रभावी क्रूज मिसाइल बनाती है।

वहीं, अगर बात लंबी दूरी की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को बड़े हमले से रोकने की है, तो अग्नि-5 की भूमिका अहम हो जाती है। इसकी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता भारत की रणनीतिक मिसाइल ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भूमिका में मिसाइल की रफ्तार से ज्यादा उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक क्षमता मायने रखती है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी कहना सही नहीं होगा। ब्रह्मोस भारत की तेज और सटीक पारंपरिक हमला करने की क्षमता को मजबूत करती है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करती है। दोनों की भूमिकाएं अलग हैं और इसी वजह से दोनों भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

2017 के पहले सपाई हड़प लेते थे गरीबों का राशन कार्ड, अब 15 करोड़ लोगों को निरंतर निशुल्क मिल रहा राशन : CM योगी

CM Yogi Adityanath

UP Free Ration Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी राशन वितरण के उचित दर विक्रेताओं से अपील की कि वह कार्य करिए, जिसमें सम्मान हो। जिसमें सम्मान न हो, वह कार्य कभी नहीं करना चाहिए। इससे पीढ़ियां खराब होती हैं, उन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने 2017 के बाद आए बदलाव का जिक्र किया और कहा कि अब कोई आप पर अंगुली नहीं उठा सकता। 2017 के पहले सपाई गरीब का राशन कार्ड अपने घर में रख लेता था, जिससे वह भूख से मरता था परंतु अब ऐसी स्थिति नहीं है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को लगातार निःशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रितों/दिव्यांगों का राशन घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। 2 करोड़ परिवारों को फ्री में रसोई गैस के कनेक्शन, 1.53 करोड़ परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। राशन की 10 हजार दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में स्थापित किया गया है। यह परिणाम राज्य की उन्नति को बताते हैं। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार की शुभकामना दी और राशन कोटेदारों की आस पूरी करते हुए सोमवार को लोकभवन में सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया। सीएम ने बटन दबाकर उत्तर प्रदेश के 78 हजार से अधिक उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में हुई वृद्धि (90 रुपए से बढ़ाकर 125 रुपए प्रति क्विंटल) का उपहार दिया। सीएम ने कहा कि मार्जिन मनी में 35 रुपए की वृद्धि (10 रुपए केंद्र सरकार व 25 रुपए राज्य सरकार) से आपने लंबी छलांग लगाई है। हमने 25 रुपए और बढ़ाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। समय लगेगा, लेकिन यह कार्य हो गया तो आपके लिए और भी अच्छी व्यवस्था होगी।

शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं फेयरप्राइस शॉप के संचालक

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति काम करके आजीविका चलाता है, लेकिन उचित मूल्य विक्रेता निराश्रित, गरीब, दिव्यांगजन समेत समाज के अन्य जरूरतमंदों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें शासन की योजना से जोड़ रहे हैं। उचित मूल्य विक्रेता से जुड़े फेयरप्राइस शॉप के संचालक दुनिया की सबसे बड़ी योजना (राशन वितरण) के जरिए शासन व जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। 

वर्ष 2017 के पहले कोटेदार नाम से लोगों को होती थी चिढ़ 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले उचित दर मूल्य के विक्रेताओं का दर्द बयां किया। कहा कि आप तब भी मेहनत करते थे लेकिन शासन राशन नहीं भेजता था तो गाली आपको खानी पड़ती थी। उनकी लूट का खामियाजा आपको भुगतना पड़ता था। लोग शक की निगाहों से देखते थे। कोटेदार शब्द से ही लोगों को चिढ़ सी होने लग गई थी। गलती आपकी नहीं थी। पाप कोई करता था, भुक्तभोगी कोई और होता था। 

 

योगी ने कहा कि उस समय सत्तासीन लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से चाहकर भी आप स्वयं को बचा नहीं सकते थे, जिससे उस समय यूपी की 20-22 करोड़ की आबादी शक की निगाहों से देखी जाती थी। नौजवान, व्यापारी, बेटियां समेत आमजन अन्य प्रदेश में जाते थे तो कोई सम्मान नहीं करता था। 2017 के पहले जो लोग यूपी से दूरी बनाते थे, पिछले साढ़े 9 वर्ष के भीतर वही लोग अब यूपीवालों को गले लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के बारे में ओवरऑल धारणा बदली है। यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की ताकत है, जिसे पीएम मोदी जी के नेतृत्व/मार्गदर्शन में प्रदेश ने सामूहिक रूप से अर्जित किया है। 

CM yogi

वीडियो बनाने की धमकी देने वाले स्कूलों में जाकर देखें सकारात्मक बदलाव 

सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद का जिक्र किया। कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल का वीडियो बनाएंगे, अरे! जरूर बनाओ। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से हर स्कूल की अच्छी फ्लोरिंग कराई। सरकार बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, 1.60 करोड़ बच्चों को बैग, किताबें, दो यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। साल 2017 के पहले स्कूल का भवन नहीं होता था। यदि भवन था तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं। पेयजल, टॉयलेट न होने से सत्र पूरा होने से पहले ही आधे बच्चे पहले ही स्कूल छोड़कर चले जाते थे। अब निपुण भारत अभियान के तहत यूपी के स्कूली बच्चे अक्षर ज्ञान के साथ ही वाक्य विन्यास में भी पारंगत हुए हैं। विज्ञान, अंग्रेजी, गणित की शिक्षा भी स्कूल में लेते हैं। बच्चे अब अच्छा कर रहे हैं। 

जो कुछ नहीं कर पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं 

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना निशाना साधा। कहा कि जो लोग कुछ कर नहीं पाए, वे आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं। ऐसे लोग परिवर्तन को नकारात्मकता में बदलना चाहते हैं। यही स्थिति आप सभी के साथ भी हुई। उचित दर विक्रेताओं के बारे में लोगों की धारणा ठीक हो, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीन लगाना शुरू किया। हमने कहा कि सिंगल डोर स्टेप होगा यानी एफसीआई के गोदाम से सीधे फेयरप्राइस शॉप तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार व उचित मूल्य विक्रेता के बीच में कोई बैरियर नहीं रहेगा। हम सीधे संवाद बनाएंगे, इससे परिणाम भी सकारात्मक आए। 

39 प्रकार के आइटम की कर सकते हैं बिक्री

सीएम ने कहा कि पारदर्शिता आई तो अब गांव में लोग आपका सम्मान भी करते हैं और आपके सुख-दुख में खड़े होते हैं। आपके प्रति विश्वास में वृद्धि हुई। पीएम के आदेश पर उचित दर विक्रेता से जुड़ी दुकान को अन्नपूर्णा भवन के रूप में निर्मित किया जा रहा है। इस वर्ष इस मद में 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं। वहां दुकान व गोदाम की भी व्यवस्था होगी। पहले आप केवल राशन की ही बिक्री कर पाते थे, लेकिन अब 39 ऐसे आइटम हैं, जिन्हें आप अपनी दुकानों से बेच सकते हैं बशर्ते वह नशीले/ज्वलनशील पदार्थ या देश/समाज के प्रतिकूल आचरण से जुड़े सामान न हों। 

2017 में जनता दर्शन में 1000 में से 300 शिकायतें राशन से जुड़ी आती थीं, अब एक भी नहीं आतीं 

सीएम ने कहा कि पहले सरकार ही लूट मचाती थी तो परिवर्तन कैसे हो पाता। फेयर प्राइस शॉप संचालकों को कोसने भर से परिवर्तन नहीं होता। प्रदेश में अब खाद्य व रसद विभाग में भी व्यापक रिफॉर्म हुआ है। 2017 में जनता दर्शन में यदि हजार प्रार्थना पत्र आते थे तो इसमें से लगभग 300 अप्लीकेशन राशन से जुड़ी विसंगतियों को लेकर होती थी लेकिन अब राशन वितरण की एक भी शिकायत नहीं आती है। यही आपका सम्मान है। अब आपको कोई कटघरे में नहीं खड़ा कर सकता और न ही कोई ऊल-जुलूल बातें करता है। 

कोरोना के दौरान भी कोटेदारों की नहीं आई एक भी शिकायत

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की स्कीम को आपने धऱातल पर उतारने का कार्य किया। हमें प्रसन्नता होती है कि हमने गरीब के लिए जो चीज उपलब्ध कराई थी, वह उस तक पहुंच गई है। सीएम ने कोटेदारों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी आप राशन वितरित कर रहे थे। जब सारा काम-धंधा बंद हुआ तो हमने दाल, नमक और तेल का वितरण शुरू किया। सभी जगह सुचारु वितरण हुआ, कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई और हर गरीब तक सामान पहुंचा। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकार की नीयत खराब थी। वे आपका इंसेंटिव भी नहीं बढ़ाते थे।  

मुख्यमंत्री ने फेयर प्राइस शॉप संचालकों की हौसलाअफजाई की

सीएम ने कहा कि औसतन हर विक्रेता को 100 कुंतल अनाज का आवंटन होता है। अब तक 90 रुपए के हिसाब से फेयरप्राइस शॉप के संचालक की प्रतिमाह आय लगभग 12,750 होती थी। अब 125 रुपए की दर से 100 कुंतल वितरण पर 16,250 रुपए प्राप्त होंगे। इसके अलावा दुकान का मुनाफा अलग से है। जो जितना अधिक बिक्री करेगा, उतना अधिक लाभांश कमाएगा। उचित मूल्य के विक्रेताओं के लिए पहली बार 30 प्रतिशत की मार्जिन मनी की बढ़ोतरी हो रही है। 

2017 के पहले किसानों से खरीदे जाने वाले खाद्यान्न में भी होती थी व्यापक हेराफेरी

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसानों से लिए जाने वाले खाद्यान्न में व्यापक हेराफेरी होती थी। सीधे किसान से खरीदारी नहीं होती थी, बिचौलिए के कारण किसान को एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाता था। 2017 से हम किसानों से सीधे धान, गेहूं, दलहन-तिलहन, मिलेट्स आदि की खरीद कर रहे हैं। डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पैसा जा रहा है। किसान, नौजवान, महिला समेत हर तबके का व्यक्ति सीधे शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है। सीएम ने कहा कि यदि बीच की दीवार हट गईं तो बहुत सी चीजें पारदर्शी हो जाएंगी, जो विश्वास का कारक भी बनती हैं और लोकतंत्र विश्वास के कारण मजबूत होता है। 

विदेश जाने वाले पैसे का एक हिस्सा भारत के अस्थिर करने में होता है खर्च 

सीएम ने अपील की कि उचित मूल्य विक्रेता भी विश्वास के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। आप सभी अन्नपूर्णा भवन के निर्माण की कार्रवाई तेजी से बढ़वाइए। सरकार धनराशि आवंटित करेगी। अच्छे भवन, वेयरहाउस अच्छे बनेंगे। राशन वितरण 7-10 दिन करेंगे, शेष 20 दिन वेयरहाउस का उपयोग अन्य कार्यों के लिए करके अतिरिक्त आय भी कर सकते हैं। ओडीओपी के सामान रखकर होली-दीवाली समेत अन्य त्योहारों पर भी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता देंगे तो स्थानीय कारीगर, हस्तशिल्पी भी प्रोत्साहित होगा। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

 

उन्होंने कहा कि जब हमारा धन विदेशों में जाता है तो उसका एक हिस्सा हमारे खिलाफ ही आतंकवाद को भड़काने और भारत को अस्थिर करने में खर्च होता है। सीएम ने अपील की कि स्वदेशी को प्राथमिकता दें, लोकल को ग्लोबल बनाने की दिशा में प्रयास करें। यह अभियान गांव में भी प्रारंभ हो सकता है। सीएम ने कहा ग्राम पंचायत का जो अन्नपूर्णा भवन बनेगा, वहां उचित मूल्य संचालकों (अन्नपूर्णा भवन संचालक) को मिला सम्मान आपके कार्यों, परिश्रम व प्रयासों का परिणाम है। 

 

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, खाद्य व रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री को सौंपा धन्यवाद पत्र 

इस उपहार के लिए कोटेदारों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मेहरोत्रा, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राजेश तिवारी, आदर्श कोटेदार कमलेश कुमार मिश्र, उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद पत्र प्रदान किया तो सीएम ने भी मंच से आभार जताया।

El Nino Impact On Monsoon: अल-नीनो के साये में मानसून, समझिए कम बारिश से इकॉनमी पर पड़ सकता है कैसा असर

भारत में मानसून पर मंडराते अल-नीनो के खतरे ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से मानसूनी बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वसे एजेंसी का यह भी मानना है कि अगर मौसम का यह झटका बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता है तो भारत की समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

एसएंडपी के मुताबिक भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन इकॉनमी (जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस) में शामिल है, जहां के लोग कीमतों में होने वाले उछाल के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन देशों में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है और कृषि काफी हद तक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करती है।

12% कम हुई बारिश, अगस्त में भी सुस्त रह सकता है मानसून

भारत के मानसूनी बारिश की स्थिति फिलहाल अच्छी नजर नहीं आ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अगस्त तक 2026 के मानसून सीजन के दौरान बारिश औसत से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके अलावा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में मानसून और कमजोर हो सकता है।

भारत में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से ही मिलता है। ये खेती-किसानी के लिए बेहद जरूरी है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि में सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे अधिकांश फसलें नियमित बारिश पर ही निर्भर रहती हैं।

दालों, सोयाबीन और मक्के की पैदावार पर पड़ सकता है असर

अगर बारिश में कमी का यह दौर लंबा खींचता है तो इससे दालों, सोयाबीन, कपास और मक्के जैसी फसलों की पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस सीजन में किसानों को पहले से ही असमान बारिश का सामना करना पड़ा है। हालांकि जुलाई में हुई बेहतर बारिश ने शुरुआती सुस्त मानसून से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की थी, लेकिन अब फिर से जोखिम बढ़ गया है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। विभाग ने अगस्त महीने में औसत से कम बारिश होने का अंदेशा जताया है जबकि इसी दौरान अल-नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो भारत में अल-नीनो का संबंध कमजोर या अनिश्चित मानसूनी बारिश से रहा है।

बिजली आपूर्ति और जलाशयों पर भी पड़ेगा प्रभाव

कम बारिश का असर सिर्फ भोजन और फसलों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से देश के प्रमुख जलाशय खाली रह सकते हैं, जिससे हाइड्रो पावर प्रोडक्शन में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है।

सबसे बड़ा जोखिम आम परिवारों के बजट पर है। कृषि उत्पादन में कमी आने से बाजार में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति घट जाएगी और कीमतें ऊपर चढ़ जाएंगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर तब जब रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी।

भारत के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक, लेकिन चुनौतियां बरकरार

तमाम जोखिमों के बावजूद भारत के पास खाद्य आपूर्ति के बड़े झटके से निपटने के लिए कुछ मजबूत सुरक्षा चक्र मौजूद हैं। देश के पास वर्तमान में चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पिछले अल-नीनो दौर की तुलना में भारत की खेती के तरीकों, सिंचाई सुविधाओं और फसल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है। इससे भी देश की खाद्य उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।

एसएंडपी का कहना है कि मौसम से जुड़ी अस्थायी रुकावट का मतलब यह नहीं है कि इकॉनमी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान पहुंचेगा। नुकसान का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि मौसम कितना प्रतिकूल होता है और सरकार इससे निपटने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तत्काल चिंता यही है कि अगर बारिश और कमजोर होती है तो रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यह दबाव कितने समय तक रहेगा, यह काफी हद तक मानसून, फसल उत्पादन और आने वाले महीनों में अल-नीनो की ताकत पर निर्भर करेगा।