Video: ‘बूढ़ा हो गया हूं… नहीं कर सकता’, इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान वायरल हुआ धोनी का वीडियो

भारत और इंग्लैंड के बीच नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे वनडे में भारत को 125 रन से हार का सामना करना पड़ा। वहीं इस मैच में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की मौजूदगी से फैंस काफी एक्साईटेड थे। अपने 46वें जन्मदिन के मौके पर धोनी भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा मैच देखने स्टेडियम पहुंचे थे। जैसे ही पूर्व भारतीय कप्तान स्टेडियम पहुंचे, दर्शकों ने तालियों और नारों से उनका जोरदार स्वागत किया। धोनी ने भी मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर फैंस का अभिवादन स्वीकार किया।

वहीं इस दौरान धोनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंग्लैंड की जीत के बावजूद ट्रेंट ब्रिज में सबसे ज्यादा चर्चा महेंद्र सिंह धोनी की रही।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

वहीं इस दौरान उनका एक खास अंदाज कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। X पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी फैंस की ओर इशारा करते नजर आए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि, ‘अब वह बूढ़े हो गए हैं और अगर बल्लेबाजी करने उतरेंगे, तो विकेटों के बीच तेजी से दौड़ना उनके लिए आसान नहीं होगा।’

 

आईपीएल 2026 में एक भी मैच नहीं खेले थे धोनी

धोनी से आईपीएल 2026 में दमदार वापसी की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन फिटनेस से जुड़ी परेशानियों के कारण वह पूरे सीजन मैदान से दूर रहे। अब भी यह साफ नहीं है कि वह अगले आईपीएल सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेलते नजर आएंगे या नहीं। फैंस उनकी वापसी को लेकर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

कड़े सुरक्षा में स्टेडियम से बाहर निकाला गया

नॉटिंघम में महेंद्र सिंह धोनी की लोकप्रियता एक बार फिर देखने को मिली। मैच खत्म होने के बाद जब वह स्टेडियम से बाहर निकले, तो उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में फैंस जुट गए। कड़ी सुरक्षा के बीच धोनी भीड़ के बीच से आगे बढ़े, जबकि चारों ओर उनके नाम के नारे गूंज रहे थे। फैंस उनकी एक झलक पाने और उन्हें करीब से देखने के लिए उत्साहित नजर आए।

सबसे सफल कप्तान

महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिना जाता है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने आक्रामक बल्लेबाज के रूप में पहचान बनाई, जबकि बाद में वह मैच को अंत तक ले जाकर जीत दिलाने वाले बेहतरीन फिनिशर बन गए। कप्तान के तौर पर भी उन्होंने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने 2007 का टी20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा।

FII DII Data: क्या रिटेल निवेशकों ने घबराकर बेच दिए शेयर? FII और DII ने मार्केट क्रैश में की ₹2753 करोड़ की खरीदारी

FII DII Data: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दिखी। इसके बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखी। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 9 जुलाई को FIIs ने 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी खरीदारी के मूड में रहे और उन्होंने 790.16 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यानी दोनों ने मिलकर 2,753 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। ऐसे में बाजार की तेज गिरावट यह संकेत देती है कि अन्य निवेशक वर्गों, खासकर रिटेल निवेशकों की ओर से घबराहट में बिकवाली हुई होगी।

FII-DII ने कितना खरीदा, कितना बेचा

बुधवार के कारोबारी सत्र में FIIs ने कुल 17,463.95 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 15,501.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, DIIs ने 19,165.13 करोड़ रुपये की खरीदारी और 18,374.97 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

एक दिन पहले यानी 8 जुलाई को भी FIIs ने 393.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। हालांकि, उस दिन DIIs 383.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर रहे थे।

इस हफ्ते कैसा रहा FII-DII का रुख?

इस सप्ताह अब तक FIIs लगातार चारों कारोबारी सत्र में खरीदार रहे हैं। वहीं, DIIs ने भी चार में से तीन सत्रों में खरीदारी की है। इससे साफ है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद संस्थागत निवेशकों का भरोसा अभी बना हुआ है।

तारीखFII नेट फ्लोDII नेट फ्लो
9 जुलाई 2026₹1,962.80 करोड़₹790.16 करोड़
8 जुलाई 2026₹393.19 करोड़-₹383.43 करोड़
7 जुलाई 2026₹243.03 करोड़₹3,791.42 करोड़
6 जुलाई 2026₹1,355.33 करोड़-₹1,953.89 करोड़

भारी गिरावट के बावजूद जारी रही खरीदारी

विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। इससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया।

शेयर बाजार कितना गिरा

BSE Sensex 1,677 अंक टूटकर 76,504 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 517 अंक गिरकर 23,882 पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी 23,900 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।

बाजार में लगभग हर सेक्टर में बिकवाली रही। Nifty 50 के 50 में से 46 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty PSU Bank और Nifty Chemicals सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर रहे। वहीं, Nifty Bank 1,458 अंक गिरकर 56,743 और Nifty Midcap 963 अंक टूटकर 61,323 पर बंद हुआ।

रुपये पर भी बढ़ा दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती का असर रुपये पर भी दिखा। भारतीय रुपया 59 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.55 पर बंद हुआ। अमेरिका के ईरान पर नए हमलों और Hormuz Strait में बढ़े तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

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इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो के मैच से पहले संजू सैमसन को फिट करने जुटा टीम मैनेजमेंट

ENGvsIND इंग्लैंड दौरे से पहले, भारत एक ऐसी टीम लग रही थी जो अपनी टी 20 वर्ल्ड कप जीत के बाद और बेहतर करने को तैयार थी। पांच मैच बाद, जिसमें आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से टी 20 सीरीज़ हार भी शामिल है, श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज़ में 0-2 से पीछे है (पहला मैच बारिश की वजह से नहीं हो पाया था) और अब एक और सीरीज़ हारने के कगार पर है।

भारतीय टीम अब गुरुवार को ब्रिस्टल में इंग्लैंड के खिलाफ चौथा टी20 खेलने जा रही है। वे जानते हैं कि सिर्फ़ जीत ही मेज़बान टीम को साउथम्प्टन में एक मैच बाकी रहते हुए पांच मैचों की सीरीज़ जीतने से रोक सकती है।

ट्रेंट ब्रिज में 125 रन की बड़ी हार ने कई कमियों को उजागर किया, जिससे हेड कोच गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन को इस अहम मुकाबले से पहले काफी कुछ सोचने पर मजबूर होना पड़ा। हार के अंतर से ज़्यादा, पूरे दौरे के दौरान भारतीय टीम का इंग्लिश हालात के हिसाब से खुद को न ढाल पाना चिंता का विषय बना हुआ है।

सबसे बड़ी चर्चा टीम संयोजन को लेकर है, जिसमें संजू सैमसन को बाहर रखने का मुद्दा छाया हुआ है। विकेटकीपर-बल्लेबाज़, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में भारत की टी20 वर्ल्ड कप जीत में अहम भूमिका निभाई थी, उन्हें दूसरे और तीसरे टी20 से बाहर रखा गया क्योंकि टीम प्रबंधन ने 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका देने का फैसला किया।इस युवा खिलाड़ी ने कुछ अच्छी झलकियां दिखाई हैं लेकिन भारत के बाकी बल्लेबाज़ों की तरह वह भी कोई बड़ा असर नहीं डाल पाए हैं। सीरीज़ दांव पर लगी होने के कारण, गंभीर ने सैमसन की वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया है, जिससे अंतिम XI में बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है।

इंग्लैंड के बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ी अटैक के खिलाफ पूरी सीरीज़ में भारत की बल्लेबाज़ी संघर्ष करती रही है। जोफ्रा आर्चर और जोश टोंग ने अपनी गति, उछाल और मूवमेंट से लगातार मेहमान टीम को परेशान किया है, जबकि भारत का अनुभवी मिडिल ऑर्डर हालात के हिसाब से खुद को ढालने में नाकाम रहा है।

अगर सैमसन की वापसी होती है, तो टीम प्रबंधन को यह तय करना होगा कि शीर्ष पर सूर्यवंशी की भूमिका को प्रभावित किए बिना उन्हें बल्लेबाज़ी क्रम में कैसे फिट किया जाए। ईशान किशन की विकेटकीपिंग की वजह से उनकी जगह बनी रहने की उम्मीद है, जबकि बल्लेबाजी में खराब प्रदर्शन के बाद उप-कप्तान तिलक वर्मा पर दबाव बढ़ सकता है।

ENGvsIND

 टीम इस प्रकार है :

भारत: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, प्रसिद्ध कृष्णा, सूर्यांश शेडगे, वाशिंगटन सुंदर।

इंग्लैंड: हैरी ब्रूक (कप्तान), फिल साल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, सैम करन, विल जैक्स, जोफ्रा आर्चर, लियाम डॉसन, आदिल राशिद, जोश टंग, जॉर्डन कॉक्स, सोनी बेकर, ल्यूक वुड, साकिब महमूद, रेहान अहमद, जेम्स कोल्स।

समय: रात 10:00 बजे शुरू होगा। 
 

अमेरिका में कैसा होता है 6 करोड़ का मिडिल क्लास घर? भारतीय महिला के हाउस टूर ने इंटरनेट पर मचाई धूम

अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला का हाउस टूर वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दिखाया कि अमेरिका में 5-6 करोड़ रुपये की कीमत वाला एक मिडिल क्लास परिवार का घर कैसा होता है। वीडियो में दिखाए गए बड़े घर और खुली जगह को देखकर कई लोग हैरान रह गए। इसके बाद लोगों ने अमेरिका और भारत के महंगे रियल एस्टेट से तुलना शुरू कर दी, जिस पर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

साल 2023 में खरीदा था ये घर

इंस्टाग्राम वीडियो में सोनल चौधरी ने कहा, “आज मैं आपको दिखाऊंगी कि अमेरिका में एक मिडिल क्लास परिवार का घर कैसा दिखता है।” उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के साथ छह साल पहले अमेरिका चली गई थीं और साल 2023 में उन्होंने 4,40,000 डॉलर में ये घर खरीदा था। सोनल के अनुसार, अब इस घर की कीमत करीब 5 से 6 करोड़ रुपये है और ये एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर बना हुआ है।

लोगों को मिलती हैं अच्छी प्राइवेसी

वीडियो में घर के टूर की शुरुआत बाहर से की गई, जहां सोनल ने सबसे पहले सामने का लॉन, गैरेज और आसपास का इलाका दिखाया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में घर एक-दूसरे से काफी दूरी पर बने हैं, जिससे लोगों को अच्छी प्राइवेसी मिलती है। भारत के भीड़भाड़ वाले शहरों में रहने वाले कई लोगों के लिए ये खुला और शांत माहौल काफी अलग और आकर्षक लगा। सोनल ने अपने घर का पिछला हिस्सा भी दिखाया, जो काफी बड़ा और खुला है। उन्होंने बताया कि यहां उनके बच्चों के खेलने और बाहर समय बिताने के लिए भरपूर जगह है।

वीडियो में उन्होंने घर का डेक एरिया, धूप वाला कमरा जिसे उन्होंने होम जिम और बैठने की जगह बना रखा है, बच्चों का झूला और सर्दियों में इस्तेमाल होने वाली फायरप्लेस भी दिखाई।

अमेरिका में ज्यादातर घर लकड़ी से बने होते है

प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी देते हुए सोनल ने पोस्ट में लिखा, “अमेरिका में एक मिडिल क्लास परिवार का घर कुछ ऐसा दिखता है।” उन्होंने बताया, “हमने यह घर साल 2023 में 4,40,000 डॉलर में खरीदा था। एक बात जो लोगों को सबसे ज्यादा हैरान करती है, वह यह है कि यहां ज्यादातर घर कंक्रीट नहीं, बल्कि लकड़ी से बने होते हैं। अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग शहरों के बाहर बने रिहायशी इलाकों (सबर्ब्स) में रहते हैं।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस वीडियो का मकसद अमेरिका में एक आम परिवार की जिंदगी दिखाना था, लेकिन देखते ही देखते यह घरों की कीमतों पर बहस का विषय बन गया। कई लोग यह देखकर हैरान रह गए कि 5 से 6 करोड़ रुपये में इतना बड़ा घर और खुली जगह मिल सकती है। वहीं, कई यूजर्स ने इसकी तुलना भारत के बड़े शहरों से की, जहां इतनी ही रकम में अक्सर काफी छोटा घर या फ्लैट मिलता है।

लोगों ने किया कमेंट

वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट किया, “क्या इसे अमेरिका में मिडिल क्लास का घर माना जाता है?” वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा, “भारत में आज 5-6 करोड़ रुपये में सिर्फ एक 4BHK फ्लोर ही मिलता है।” एक अन्य व्यक्ति ने मुंबई के महंगे रियल एस्टेट का जिक्र करते हुए कहा, “मुंबई के जुहू और बांद्रा जैसे इलाकों में इतनी रकम में सिर्फ़ 2BHK फ्लैट ही मिल पाएगा।” वहीं, एक और यूजर ने लिखा, “तकनीकी रूप से देखा जाए तो भारत में प्रॉपर्टी की कीमतें अमेरिका से भी ज्यादा हैं।”

सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने संस्कृत छात्रों के लिए आयुर्वेद की पढ़ाई का नया रास्ता खोला, NEET-PA में प्रवेश के लिए करें

NEET-PA Applications 2026: शैक्षिक सत्र 2026-27 संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों के लिए बहुत खास होगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने इन छात्रों के लिए बड़ी और अहम पहल की घोषणा की है। संस्कृत शिक्षा को भारतीय ज्ञान व्यवस्था (IKS) के साथ जोड़ने और पारंपरिक चिकित्सा सेवा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, नई दिल्ली स्थित सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी (CSU) ने प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम प्रोग्राम में प्रवेश के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट प्री-आयुर्वेद (NEET-PA) की घोषणा की है।

यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। नोटिफिकेशन के अनुसार, जिन छात्रों ने किसी मान्यता प्राप्त संस्कृत बोर्ड या किसी अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा पास की है, वे नीट-पीए में हिस्सा लेने के योग्य होंगे। सफल उम्मीदवारों को दो साल के प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाएगा। यह कोर्स बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) पाठ्यक्रम करने का एक शुरुआती स्तर है। इस पाठ्यक्रम के बाद प्रशिक्षिक छात्र नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) के नियमों के अनुसार आयुर्वेद विशेषज्ञ के तौर पर क्वालिफाई कर सकेंगे।

सीएसयू के उप-कुलपति, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि इस प्रोग्राम को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (IKS) पहल के सोच के हिसाब से बनाया गया है। उन्होंने देखा कि संस्कृत छात्रों के पास प्राचीन आयुर्वेदिक साहित्य और संहिताओं को उनकी मूल भाषा में समझने के लिए एक मजबूत आधार होता है। गुरुकुल-आधारित एकेडमिक मॉडल से आयुर्वेद शिक्षा की प्रमाणिकता को मजबूत करने और इसकी राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान में योगदान देने की उम्मीद है।

जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

परीक्षा नियंत्रक, प्रो. पवन कुमार ने बताया कि नीट-पीए के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जुलाई 2026 के तीसरे हफ्ते में शुरू होगा। प्रवेश परीक्षा अगस्त के आखिरी हफ्ते या सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में देश भर के परीक्षा केंद्रों पर आयोजित करने का प्रस्ताव है। इंटीग्रेटेड प्रोग्राम का कुल समय 7.5 साल होगा, जिसमें दो साल का प्री-आयुर्वेद गुरुकुलम प्रोग्राम, उसके बाद 4.5 साल का बीएएमएस डिग्री प्रोग्राम और एक साल की जरूरी रोटेटरी इंटर्नशिप शामिल है।

नीट-पीए के लिए योग्यता

किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड, स्टेट संस्कृत बोर्ड या किसी बराबर के मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा पास की है। इसमें जनरल कैटेगरी के एप्लिकेंट्स के कम से कम 50% अंक होने चाहिए। जबकि SC, ST, OBC और PwD श्रेणी के उम्मीदवार को कम से कम 40% अंक लाने होंगे। 31 दिसंबर 2026 तक परीक्षार्थी की उम्र 15 से 25 साल के बीच होनी चाहिए। प्रवेश नियमों के अनुसार, उम्र में कोई छूट नहीं मिलेगी।

चयन प्रक्रिया

नीट पीए प्रवेश परीक्षा 150 मिनट के समय के साथ ऑफलाइन (OMR-बेस्ड) मोड में होगी। इसमें 120 मल्टीपल-चॉइस सवाल (MCQs) होंगे, जिनमें से हर एक का एक नंबर होगा, और कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। क्वेश्चन पेपर संस्कृत, हिंदी और इंग्लिश में उपलब्ध होगा।

नीट पीए सिलेबस

यूनिवर्सिटी ने नीट पीए के लिए डिटेल्ड सिलेबस भी जारी किया है। सिलेबस में संस्कृत वाणमय (लिटरेचर), पुराण, इतिहास, व्याकरण और दर्शन शामिल हैं।

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₹65 की नौकरी से ₹20000 करोड़ की कंपनी तक, गणित में फेल स्टूडेंट ने ऐसे खड़ा किया आइसक्रीस साम्राज्य

RG Chandramogan Success Story: आरजी चंद्रमोगन के पास न तो कॉलेज की डिग्री थी और न ही कोई बड़ी विरासत। लेकिन उनके पास एक चीज थी, कुछ बड़ा करने का जज्बा। 65 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत करने वाले इस शख्स ने बाद में आइसक्रीम बेचनी शुरू की।

उसी कारोबार को आगे बढ़ाकर Hatsun Agro Products जैसी कंपनी खड़ी कर दी। आज यह भारत की सबसे बड़ी निजी डेयरी कंपनियों में शामिल है, जिसकी बाजार में वैल्यू करीब 20,000 करोड़ रुपये है।

एक असफल बिजनेस ने बदली सोच

चंद्रमोगन तमिलनाडु के साधारण परिवार में पैदा हुए। बचपन में देखा कि गांव का सबसे सम्मानित व्यक्ति एक कारोबारी था। तभी से उन्होंने भी बिजनेस करने का सपना देख लिया।

साल 1956 में उनके पिता चेन्नई आ गए और सेंट्रल स्टेशन के पास एक किराना दुकान खोली। लेकिन 1968 तक कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। परिवार को खाली हाथ गांव लौटना पड़ा। यहीं से चंद्रमोगन ने पहली बार समझा कि बिजनेस में सफलता जितनी बड़ी होती है, जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है।

गणित में फेल हुए, कॉलेज छोड़ना पड़ा

पढ़ाई भी उनके लिए आसान नहीं रही। उन्होंने पलायमकोट्टई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन गणित में फेल हो गए। इसके बाद पढ़ाई छूट गई।

बेटे के भविष्य की चिंता में उनके पिता ने विलुप्पुरम के एक लकड़ी गोदाम में उनकी नौकरी लगवा दी। वहां उन्हें सिर्फ 65 रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी। करीब एक साल तक उन्होंने वहां ऑर्डर संभाले, सामान उठाया और मेहनत की। लेकिन उन्हें एहसास हो गया कि पूरी जिंदगी 65 रुपये की नौकरी करके नहीं बिताई जा सकती।

पिता ने बेच दी पुश्तैनी जमीन

एक साल बाद चंद्रमोगन चेन्नई लौट आए। इस बार उन्होंने तय कर लिया था कि अब नौकरी नहीं, अपना कारोबार करेंगे।

उनके पिता ने भी बड़ा फैसला लिया। उन्होंने 13,000 रुपये जुटाने के लिए परिवार की पुश्तैनी जमीन बेच दी। यही रकम चंद्रमोगन के पहले बिजनेस की पूंजी बनी।

250 वर्गफुट से शुरू किया कारोबार

साल 1970 में उन्होंने चेन्नई के रायापुरम इलाके में 250 वर्गफुट की छोटी-सी जगह किराए पर ली। एक साधारण आइस बनाने वाली मशीन खरीदी और चार कर्मचारियों के साथ काम शुरू कर दिया। फैक्ट्री में रोज करीब 10,000 आइसक्रीम बन सकती थीं। उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘Arun’ रखा।

शुरुआत में मुनाफा बहुत कम था। कई बार चंद्रमोगन खुद ठेले पर आइसक्रीम बेचने निकल जाते थे। उस समय उनका मकसद सिर्फ कारोबार को जिंदा रखना था।

आइसक्रीम से डेयरी बिजनेस तक

करीब 10 साल तक उन्होंने सिर्फ आइसक्रीम का कारोबार किया। लेकिन इसी दौरान उन्हें एक बड़ी बात समझ आई। उन्होंने देखा कि आइसक्रीम का कारोबार मौसम पर निर्भर है, जबकि दूध हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है। उस समय भारत का डेयरी बाजार काफी बिखरा हुआ था। चंद्रमोगन को इसमें बड़ा मौका नजर आया।

1980 के दशक में उन्होंने दूध प्रोसेसिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे कंपनी ने दूध, दही, घी और मक्खन जैसे उत्पाद भी बेचने शुरू कर दिए। अब Arun सिर्फ आइसक्रीम का नहीं, बल्कि डेयरी उत्पादों का बड़ा ब्रांड बन चुका था।

उन्होंने जल्दबाजी में विस्तार नहीं किया। पहले किसानों का मजबूत नेटवर्क बनाया, सप्लाई चेन तैयार की और रिटेल नेटवर्क खड़ा किया। यही रणनीति आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

आज 20,000 करोड़ की कंपनी

आज Hatsun Agro Products शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। जुलाई 2026 तक इसका मार्केट कैप 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। Forbes के मुताबिक, आरजी चंद्रमोगन की नेटवर्थ करीब 1.6 अरब डॉलर है। उन्हें 2018 में भारतीय डेयरी उद्योग में योगदान के लिए Indian Dairy Association का प्रतिष्ठित Patronage Award भी दिया गया।

चंद्रमोगन की कहानी सिर्फ एक सफल कारोबारी बनने की नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जो गणित में फेल हुआ लेकिन कारोबार के इम्तिहान में अव्वल नंबरों से पास होकर दिखा दिया।

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Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ शुक्ल एकादशी को होगा देवशयनी एकादशी व्रत और शुरू होंगे चतुर्मास, जानें क्या है और क्यों लगता है चतुर्मास

Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस संसार के संचालक भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इसे देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन के बाद से चतुर्मास शुरू होते हैं और अगले चार माह तक मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। यानी इस दौरान शादी, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्यो के मुहूर्त नहीं होते। चतुर्मास देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक की अवधि को कहा जाता है। आइए जानें इस साल हरिशयनी एकादशी कब है और इसका धार्मिक/आध्यात्मिक महत्व क्या है?

कब है देवशयनी एकादशी 2026?

देवशयनी एकादशी : शनिवार, 25 जुलाई, 2026

देवशयनी एकादशी तिथि का प्रारम्भ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई, सुबह 05:39 बजे से सुबह 08:22 बजे तक

26 जुलाई 2026 द्वादशी समापन : दोपहर 01:57 बजे

देवशयनी एकादशी 2026: धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी के बाद से चतुर्मास प्रारंभ होता है। देवशयनी एकादशी तिथि और चतुर्मास का बहुत गहरा धर्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। इसे समझने के लिए आइए जानें ये 3 कारण

श्री हरि ने दिया था दानवीर राजा बलि को वचन

वामन अवतार में भगवान विष्णु ने दानवीर दैत्यराज बली से तीन पग में तीनों लोक नाप लिए थे। तब बली की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्होंने बली को पाताल लोक का राजा बना दिया और खुद भी उसके साथ पाताल चलने का वचन दे दिया। इससे चिंतित माता लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनसे उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग लिया। लेकिन भगवान विष्णु अपने भक्त बली को निराश नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बली को वरदान दिया कि वे हर साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल लोक में रहकर राजा बली के महल का पहरा देंगे। इसी समय को भगवान विष्णु का शयनकाल माना जाता है।

चतुर्मास का वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण

चातुर्मास का आरंभ आषाढ़ महीने के अंत में होता है, जब बारिश का मौसम होता है। बारिश के कारण हवा और पानी में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से पनपती हैं। हमारी पाचन शक्ति भी इस दौरान कमजोर हो जाती है। इस मौसम में नदियां भी उफान पर होती हैं और रास्ते बंद हो जाते हैं। इसलिए पहले के समय में साधु-संतों और लोगों को एक ही स्थान पर रुककर ईश्वर भक्ति करने की सलाह दी गई, ताकि वे सुरक्षित रह सकें।

मांगलिक कार्यों पर रोक का कारण

माना जाता है कि चतुर्मास में ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मौसम में काफी बदलाव होते हैं। सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का प्रभाव इस दौरान आंतरिक साधना की ओर मुड़ जाता है, इसलिए शादी, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं।

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GIFT Nifty Today: क्रैश के बाद 9 जुलाई को मार्केट में होगी रिकवरी? GIFT Nifty ने दिए तेजी के संकेत

GIFT Nifty Today: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के बाद गुरुवार के लिए राहत के संकेत मिल रहे हैं। GIFT Nifty शाम 6:30 बजे 119 अंक यानी 0.48% की बढ़त के साथ 23,992 पर कारोबार कर रहा था। इससे संकेत मिलता है कि 9 जुलाई को घरेलू बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हो सकती है।

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली देखने को मिली।

इसी दबाव में निफ्टी 50 2.12% टूटकर 23,882.05 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 2.15% गिरकर 76,503.60 पर आ गया। यह दोनों इंडेक्स का तीन महीने में सबसे खराब कारोबारी सत्र रहा।

ग्लोबल मार्केट पर भी दिखा असर

ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स भी दबाव में आ गए। S&P 500 Futures करीब 0.8% गिर गए। वहीं ब्रेंट क्रूड करीब 5% उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। हालांकि, सोने की कीमतों में गिरावट आई और डॉलर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

निफ्टी के लिए अहम स्तर कौन से?

Religare Broking के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, निफ्टी अब 24,000-24,150 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे फिसल चुका है। इससे निकट अवधि की तकनीकी तस्वीर कमजोर हुई है।

उन्होंने कहा कि अब 23,650-23,800 का स्तर अगला मजबूत सपोर्ट होगा। वहीं, अगर बाजार में रिकवरी आती है तो 24,150-24,300 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

उनका कहना है कि India VIX में तेज उछाल यह दिखाता है कि अगले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में फिलहाल सतर्क रहने, चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सख्त जोखिम प्रबंधन अपनाने की जरूरत है।

Bajaj Broking ने क्या कहा?

Bajaj Broking के मुताबिक, निफ्टी ने बुधवार को बड़ा बेयरिश कैंडल बनाया। साथ ही हाल की पूरी तेजी भी गंवा दी। कारोबार के दौरान इंडेक्स 24,250 के सपोर्ट के नीचे फिसल गया और दिन में 23,800 तक पहुंच गया।

ब्रोकरेज का कहना है कि अगर निफ्टी 23,800 के नीचे बंद होता है, तो अगले कुछ सत्रों में यह 23,500-23,600 तक फिसल सकता है। हालांकि, अगर 23,800 का स्तर बचा रहता है, तो निफ्टी 23,800 से 24,350 के दायरे में कुछ समय तक कारोबार कर सकता है। फिलहाल 24,350 के नीचे बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है।

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PRAGATI Scheme: 8 राज्यों के 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी एग्री-बिजनेस की मुफ्त ट्रेनिंग, जानिए क्या है ये प्रगति स्कीम

ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और किसानों को आधुनिक खेती से अवगत कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। सरकार ने प्रगति योजना (PRAGATI Scheme) को लॉन्च किया है। इस स्कीम में देश के आठ राज्यों के करीब 20000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव के स्तर पर ही प्रशिक्षित पेशेवरों का एक नेटवर्क तैयार करना है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को तकनीकी सहायता दी जा सके, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच में सुधार लाया जा सके और किसानों और बाजारों के बीच के संबंध को मजबूत किया जा सके। इस पहल से कृषि क्षेत्र को ज्यादा फायदेमंद और टेक्नोलॉडी ड्रिवेन बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है प्रगति (PRAGATI) स्कीम?

प्रगति योजना को कृषि क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं के बीच स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। इस योजना के तहत युवाओं को काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। प्रशिक्षित प्रतिभागी अपने ही गांवों में कृषि-उद्यमी के रूप में काम करेंगे। ये युवा किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, वित्तीय सहायता और विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे। यह कार्यक्रम किसानों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बीच की दूरी को पाटने के साथ-साथ टिकाऊ और कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।

पहले चरण में 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

प्रगति योजना के पहले चरण में देश के आठ राज्यों के गांवों से करीब 20000 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन आठ राज्यों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। सरकार की योजना आने वाले चरणों में इस कार्यक्रम का विस्तार अन्य राज्यों में भी करने की है। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये कृषि-उद्यमी किसानों के साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देंगे और आवश्यक कृषि संसाधनों तक उनकी पहुंच को आसान बनाएंगे।

गांवों में क्या भूमिका निभाएंगे ये कृषि-उद्यमी?

ट्रेनिंग प्राप्त युवा गांवों में रहकर किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं और सहायता प्रदान करेंगे-

  • मृदा परीक्षण: मिट्टी की जांच करने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायता करना।
  • आधुनिक तकनीक: आधुनिक खेती के तरीकों और तकनीकों के बारे में जानकारी देना।
  • कृषि उपकरण: किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी और उपकरण प्राप्त करने में मदद करना।
  • वित्तीय सहायता: किसानों को बैंकों, क्रेडिट सुविधाओं और वित्तीय सहायता से जोड़ना।
  • बाजार तक पहुंच: कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच का समर्थन करना ताकि फसलों की सही कीमत मिल सके।
  • योजनाओं के प्रति जागरूकता: सरकारी कृषि योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना।

इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को इन सभी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े बल्कि ये सारी सुविधाएं उन्हें उनके अपने गांव के भीतर ही मिल जाएं।

इस स्कीम से किसानों को कैसे होगा फायदा?

सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से जमीनी स्तर पर कृषि सहायता सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी। किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण में सहायता और आधुनिक खेती के तरीकों की सटीक जानकारी मिलेगी। मशीनरी, वित्तीय सहायता और बाजारों तक बेहतर पहुंच होने से खेती की उत्पादन लागत में कमी आएगी। बेहतर तौर-तरीकों से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर दाम सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण भारत में रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

खेती के तरीकों में सुधार करने के साथ-साथ प्रगति योजना को विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। युवाओं को कृषि सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रशिक्षित करके यह कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यह पहल पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय कृषि को अधिक इनोवेटिव, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख बनाने के हिसाब से डिजाइन है।

सरकार का विजन: केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक प्रगति योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने इसे कृषि का कायाकल्प करने के एक बड़े मिशन के रूप में बताया है। कृषि मंत्री के मुताबिक यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेवाओं और मजबूत बाजार संपर्कों का लाभ उठाने में मदद करेगी। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो यह योजना ग्रामीण भारत के हजारों युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर कृषि सहायता प्रणालियों को बेहद मजबूत कर सकती है।