पूरा देश घूमने के बराबर है इन शानदार लाइब्रेरीज का सफर करना, जहां मिलती है ज्ञान की अनमोल दुनिया!

भारत में लाइब्रेरी सिर्फ किताबों को रखने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये देश के इतिहास, संस्कृति, साहित्य और ज्ञान की धरोहर को संभालकर रखने वाले सेंटर हैं। कई लाइब्रेरी ऐसी हैं जो 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं और आज भी रिसर्चर, स्टूडेंट और हिस्ट्री लवर के लिए नॉलेज का बड़ा सोर्स बनी हुई हैं। आइए जानते हैं भारत की कुछ सबसे पुरानी और पॉपुलर लाइब्रेरी के बारे में:

1. रज़ा लाइब्रेरी, रामपुर

रज़ा लाइब्रेरी - विकिपीडिया

रज़ा लाइब्रेरी भारत की सबसे पॉपुलर ऐतिहासिक लाइब्रेरी में से एक है। इसकी स्थापना 1774 में रामपुर के नवाब परिवार द्वारा की गई थी। यहां अरबी, फारसी, उर्दू, संस्कृत और हिंदी भाषा की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां और किताबें सेफ रखी गई हैं।

इस लाइब्रेरी में इस्लामी आर्ट, भारतीय इतिहास, साहित्य, खगोल विज्ञान, गणित और दर्शन से जुड़ी दुर्लभ मटेरियल मौजूद है। यहां रखी कई पांडुलिपियां हाथ से लिखी हुई हैं और ऐतिहासिक नजर से बेहद जरुरी मानी जाती हैं।

रज़ा लाइब्रेरी अपनी खूबसूरत आर्किटेक्टर और दुर्लभ संग्रह के लिए दुनियाभर में जानी जाती है।

2. कोनेमारा पब्लिक लाइब्रेरी, चेन्नई

Chennai: Newly revamped Connemara Library offers better spaces for book lovers, researchers - The Hindu

कोनेमारा पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना 1896 में चेन्नई में हुई थी। यह भारत की चार राष्ट्रीय डिपॉजिटरी लाइब्रेरी में से एक है, जहां देश में पब्लिश्ड हर पुस्तक, समाचार पत्र और पत्रिका की एक सेफ रखी जाती है।

इस लाइब्रेरी में लाखों किताबों का विशाल संग्रह मौजूद है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, इतिहास, कला और कई अन्य विषय शामिल हैं। यहां दुर्लभ किताबों और पुराने डॉक्यूमेंट का भी बड़ा संग्रह है।

इसकी इमारत इंडो-सारासेनिक आर्किटेक्टर का सुंदर उदाहरण है। यह जगह न सिर्फ किताबों के लिए बल्कि अपनी ऐतिहासिक इमारत और शांत वातावरण के लिए भी पॉपुलर है।

3. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया, कोलकाता

National Library, Calcutta

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया भारत की सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है। इसकी शुरुआत 1836 में कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में हुई थी और बाद में इसे नेशनल लेवल की लाइब्रेरी का दर्जा मिला।

इस लाइब्रेरी में करोड़ों किताबें, पांडुलिपियां, समाचार पत्र और ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट मौजूद हैं। यहां भारतीय भाषाओं के साथ-साथ दुनिया की कई भाषाओं की किताबें अवेलेबल हैं।

यह लाइब्रेरी शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी कई दुर्लभ मटेरियल सेफ है।

4. इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी, प्रयागराज

Allahabad Public Library also known as Thornhill Mayne Memorial is a public library situated at Alfred Park in Prayagraj, India. Established in 1864, it is the biggest library in the state of

इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना 1863 में हुई थी। यह उत्तर भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक लाइब्रेरी में से एक है। इसे पहले थॉर्नहिल मेमोरियल लाइब्रेरी के नाम से भी जाना जाता था।

यहां हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और अन्य भाषाओं की हजारों किताबें अवेलेबल हैं। लाइब्रेरी में इतिहास, साहित्य, धर्म, विज्ञान और कला से संबंधित कई पुस्तकें मौजूद हैं।

इसकी इमारत विक्टोरियन और गोथिक शैली की वास्तुकला का उदाहरण है। ऐतिहासिक महत्व के कारण यह जगह किताब प्रेमियों और टूरिस्ट को भी अट्रैक्ट करता है।

5. स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी, बेंगलुरु

The State Central Library in Bengaluru, Karnataka

बेंगलुरु की स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी की स्थापना 1915 में हुई थी। यह कर्नाटक की सबसे सार्वजनिक लाइब्रेरी में से एक है। यह कब्बन पार्क के पास अपनी लाल रंग की खूबसूरत इमारत के लिए पॉपुलर है।

इस लाइब्रेरी में लाखों किताबों का कलेक्शन है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, इतिहास और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकें शामिल हैं। यहां स्टूडेंट और रिसर्चर बड़ी संख्या में आते हैं।

यह लाइब्रेरी लंबे समय से बेंगलुरु के लोगों के लिए ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

6. खुदा बख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी, पटना

Visit Patna's Khuda Baksh Oriental Library | Incredible India

खुदा बख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी की स्थापना 1891 में पटना में हुई थी। इसकी शुरुआत खुदा बख्श खान ने अपने प्राइवेट कलेक्शन को सार्वजनिक रूप देकर की थी।

यहां अरबी, फारसी, उर्दू और इस्लामी साहित्य की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां सेफ हैं। इसके संग्रह में मुगलकालीन चित्र, ऐतिहासिक दस्तावेज और दुर्लभ किताबें भी शामिल हैं।

यह लाइब्रेरी एशिया की ओरिएंटल लाइब्रेरी में गिनी जाती है और दुनियाभर के रिसर्चर यहां स्टडी के लिए आते हैं।

7. डेविड ससून लाइब्रेरी, मुंबई

Old David Sassoon Library Stock Photos - Free & Royalty-Free Stock Photos from Dreamstime

डेविड ससून लाइब्रेरी की स्थापना 1870 में मुंबई में हुई थी। इसका नाम पॉपुलर बिजनेसमैन और समाजसेवी डेविड ससून के नाम पर रखा गया है।

यह लाइब्रेरी अपनी सुंदर गोथिक आर्किटेक्टर, लकड़ी की अलमारियों और पुराने जमाने के शांत एनवायरनमेंट के लिए पॉपुलर है। यहां साहित्य, इतिहास, कला और अन्य विषयों की हजारों किताबें मौजूद हैं।

मुंबई की विरासत इमारतों में शामिल यह लाइब्रेरी आज भी पाठकों और टूरिस्ट के अट्रैक्शन हब है।

8. सरस्वती महल लाइब्रेरी, तंजावुर

Saraswathi Mahal Library #Thanjuvur

सरस्वती महल लाइब्रेरी भारत की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में से एक है। इसकी शुरुआत तंजावुर के नायक और मराठा शासकों के समय हुई थी।

इस लाइब्रेरी में संस्कृत, तमिल, तेलुगु और मराठी भाषाओं की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां सेफ हैं। यहां आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, साहित्य, इतिहास और धर्म के मटेरियल सेफ है।

यह लाइब्रेरी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का अनमोल खजाना मानी जाती है और रिसर्चर के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

भारत की ये पुरानी लाइब्रेरी सिर्फ किताबों का कलेक्शन नहीं हैं, बल्कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन जगहों पर सेफ रेयर डॉक्यूमेंट और पांडुलिपियां आने वाली पीढ़ियों को भारत के ज्ञान और इतिहास से जोड़ने का काम करती हैं।

संजू सैमसन की विदाई पर गर्माते विवाद के बीच आया गंभीर का यह बयान

भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कहा कि संजू सैमसन को टीम में उनकी भूमिका के बारे में स्पष्टीकरण दे दिया गया है और उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ चल रही T20I श्रृंखला में इस विकेटकीपर-बल्लेबाज की वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया।

सैमसन को आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम से बाहर कर दिया गया है। गंभीर ने कहा कि यह सीनियर खिलाड़ी पांच मैचों की मौजूदा श्रृंखला में भारत की योजनाओं में शामिल हैं, जिसमें मेहमान टीम दो हार और बारिश के कारण रद्द हुए एक मैच के बाद 0-2 से पीछे है।

गंभीर ने मंगलवार को यहां तीसरे टी20 मैच में भारत की 125 रन से हार के बाद कहा, ‘‘संजू सैमसन को जो स्पष्टता दी जानी चाहिए थी, वह उन्हें मुझसे मिल गई है। यह बातचीत मुख्य कोच और खिलाड़ी के बीच होती है। इसे मैं आपके साथ साझा नहीं कर सकता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ संजू ने विशेष कर विश्व कप में जिस तरह का प्रदर्शन किया वह असाधारण था लेकिन कभी-कभी आपको खिलाड़ी की फॉर्म पर भी गौर करना पड़ता है। ऐसा कोई अटल नियम नहीं है कि वह इस श्रृंखला में वापसी नहीं कर सकता।’’

सैमसन को इस साल के शुरू में खेले गए विश्व कप में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था लेकिन आयरलैंड के खिलाफ दो मैच और इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में कुल मिलाकर वह केवल छह रन ही बना पाए इसके बाद उन्हें अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल किया गया।

इस 31 वर्षीय खिलाड़ी को जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए टीम से भी बाहर कर दिया गया था, क्योंकि चयनकर्ताओं ने पंजाब किंग्स के लिए आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रभसिमरन सिंह को प्राथमिकता दी थी।

गंभीर ने कहा कि टीम का चयन मौजूदा फॉर्म और उस संयोजन के आधार पर किया जाएगा जो भारत को जीतने का सबसे अच्छा मौका देता है।उन्होंने कहा, ‘‘आखिर में जीत महत्वपूर्ण होती है और हम उस संयोजन के साथ उतरेंगे जिसको लेकर हमें लगता है कि वह हमें जीत दिला सकता है। मेरा शुरू से मानना है कि प्रत्येक खिलाड़ी को टीम में अपनी जगह बनानी पड़ती है।’’

Ram Mandir Trust Wealth: राम मंदिर के पास कितना सोना, चांदी और कितने रुपये? FY26 की बैलेंस शीट से निकली ये जानकारी

राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार अपने आय-व्यय और फंड का लेखा-जोखा जारी किया है। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर को 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का दान मिला। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में राम मंदिर ट्रस्ट की आय 250.04 करोड़ के करीब रही। वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कमाई का सबसे बड़ा जरिया अब लोगों का दान नहीं, बल्कि निवेश पर मिलने वाला ब्याज बन गया है।

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के ट्रस्ट के बिना ऑडिट किए गए खातों के मुताबिक, निवेश पर ट्रस्ट को 151.80 करोड़ रुपये का ब्याज मिला। वहीं, श्रद्धालुओं से स्वैच्छिक दान के रूप में 149.36 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इन आंकड़ों से साफ है कि ट्रस्ट को अब अपने निवेश से मिलने वाली कमाई, नए दान से भी अधिक हो गई है।

ट्रस्ट के खातों के अनुसार, उसके पास कुल 1,876.30 करोड़ रुपये की राशि जमा है। इसमें से 1,771.22 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश किए गए हैं, जो कुल फंड का करीब 94 प्रतिशत है। इसके अलावा ट्रस्ट के पास 2.57 एकड़ जमीन, 323 किलोग्राम सोना, 751.98 किलोग्राम चांदी और वित्त वर्ष के अंत तक 7.74 लाख रुपये नकद भी मौजूद थे। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब राम मंदिर में मिले दान में कथित गड़बड़ी की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।

जांच कर रहे SIT के अधिकारियों ने पाया है कि अयोध्या के राम मंदिर में हर दिन मिलने वाले दान की रकम में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच शुरू होने के बाद देखने को मिली है। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि मामला सामने आने से पहले दान के रखरखाव और जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक, कथित चोरी का मामला सामने आने से पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में हर दिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये का दान जमा होता था। लेकिन एसआईटी की जांच शुरू होने के बाद यह राशि बढ़कर रोजाना करीब 24 से 26 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

रोजाना दान की रकम में 6 से 8 लाख रुपये की यह बढ़ोतरी अब जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गई है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या यह अंतर पहले दान में किसी तरह की गड़बड़ी या रकम के गलत इस्तेमाल का संकेत देता है। ट्रस्ट के खातों के अनुसार, वित्त वर्ष के दौरान उसे सभी स्रोतों से कुल 398.24 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें 149.36 करोड़ रुपये दान पेटियों, ऑनलाइन दान और श्रद्धालुओं के चढ़ावे से मिले। वहीं, निवेश पर मिले ब्याज से 151.80 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके अलावा बाकी राशि अनुदान और अन्य स्रोतों से प्राप्त हुई।

ट्रस्ट ने अपनी बड़ी राशि अलग-अलग बैंकों में निवेश कर रखी है। इसके तहत पंजाब नेशनल बैंक में 562.88 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा में 327.30 करोड़ रुपये और भारतीय स्टेट बैंक में 791.04 करोड़ रुपये जमा हैं। इसके अलावा 90.10 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए हैं, जबकि 24.77 करोड़ रुपये बचत खातों में रखे गए हैं। ट्रस्ट का सबसे बड़ा खर्च राम मंदिर का निर्माण है। वित्त वर्ष 2025-26 में निर्माण कार्य पर कुल 237.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें मुख्य मंदिर के निर्माण पर 42.42 करोड़ रुपये, जमीन खरीदने पर 38.81 करोड़ रुपये, परिक्रमा मार्ग और अस्थायी ढांचों पर 21.52 करोड़ रुपये तथा मंदिर परिसर के अन्य विकास कार्यों पर भी बड़ी राशि खर्च की गई।

मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ ट्रस्ट का खर्च भी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर परिसर के रखरखाव पर कुल 91.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें सुरक्षा व्यवस्था पर 31.48 करोड़ रुपये, सफाई और स्वच्छता पर 17.49 करोड़ रुपये, बिजली पर 23.08 करोड़ रुपये और श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र चलाने पर 8.96 करोड़ रुपये खर्च हुए। ट्रस्ट ने मंदिर के आसपास अपनी जमीन भी बढ़ाई है। साल भर में 14 खरीद समझौतों और 8 दान पत्रों के माध्यम से आसपास की संपत्तियां खरीदी गईं। इन जमीनों की खरीद पर ट्रस्ट ने कुल 15.74 करोड़ रुपये खर्च किए।

IND vs ENG: इंग्लैंड के सामने टीम इंडिया का फ्लॉप शो, 20 साल में पहली बार 100 से ज्यादा रन से हारी

IND vs ENG: इंग्लैंड ने नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारत को 125 रन के बड़े अंतर से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 201 रन बनाए। टारगेट का पीछा करने उतरी भारतीय टीम पूरी तरह बिखर गई और सिर्फ 76 रन पर सिमट गई। इस शानदार जीत के साथ इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। नॉटिंघम में मिली 125 रन की करारी हार भारतीय टीम ने एक बेहद खराब रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है।

करीब 20 साल के टी20 इंटरनेशनल इतिहास में ये पहला मौका है, जब भारतीय टीम को किसी मैच में 100 से अधिक रन के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने टीम के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज कर दिया, जिसे वह कभी याद नहीं रखना चाहेगी।

लगातार चार मैच हारी भारतीय टीम

मार्च 2026 में लगातार तीसरी बार टी20 विश्व कप जीतने के बाद से भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। टीम अपने पिछले पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में चार हार चुकी है और अब भी पहली जीत की तलाश में है। नॉटिंघम में इंग्लैंड से मिली 125 रन की हार भारत की टी20 इतिहास की सबसे बड़ी हार बन गई। इससे पहले भारत की सबसे बड़ी हार 80 रन की थी, जब फरवरी 2019 में वेलिंगटन में न्यूजीलैंड ने उसे बड़े अंतर से हराया था।

सबसे बड़ी हार किसने नाम दर्ज है

इंग्लैंड में भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में इससे पहले सबसे बड़ी हार 17 रन की थी, जो 10 जुलाई 2022 को नॉटिंघम में मिली थी। वहीं, टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बड़ी हार का रिकॉर्ड अफ्रीकी देश गाम्बिया के नाम दर्ज है। गाम्बिया की टीम को 23 अक्टूबर 2024 को नैरोबी के रुआराका मैदान पर जिम्बाब्वे ने 290 रन के विशाल अंतर से हराया था, जो अब तक का सबसे बड़ा हार का रिकॉर्ड है।

इंग्लैंड का रिकॉर्ड

भारत पर 125 रन की बड़ी जीत इंग्लैंड की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 से अधिक रन के अंतर से मिली पांचवीं जीत है। इससे पहले भी इंग्लैंड दक्षिण अफ्रीका को 146 रन, वेस्टइंडीज को 137 रन, अफगानिस्तान को 116 रन और ऑस्ट्रेलिया को 100 रन से हराकर ऐसे बड़े अंतर की जीत दर्ज कर चुका है।

भारत की बल्लेबाजी रही फ्लॉप

भारत की बल्लेबाजी इस मुकाबले में पूरी तरह फ्लॉप रही। टीम की ओर से सबसे ज्यादा 13 रन वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 5 गेंदों में बनाए, जबकि ईशान किशन भी 13 रन ही बना सके। इनके अलावा केवल अभिषेक शर्मा और अक्षर पटेल ही 10-10 रन तक पहुंच पाए। वहीं, नॉटिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ मिली इस हार के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में भारत को चौथी हार झेलनी पड़ी। इंग्लैंड की जीत में जोफ्रा आर्चर ने तीन विकेट लिए, जबकि जोश टंग ने चार भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

बांग्लादेश में होगा Asia Cup 2027 का आयोजन! टी20 नहीं वनडे फॉर्मेट में होगा टूर्नामेंट, शेड्यूल आया सामने

ट्रंप के सीजफायर खत्म होने के ऐलान से शेयर बाजार धड़ाम, 1600 फिसला सेंसेक्स

भारतीय शेयर बाजारों में दोपहर बाद अचानक बड़ी गिरावट आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो चुका है। इससे बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी क्रैश कर गए। 2 बजे निफ्टी 1.84 फीसदी यानी 434 अंक गिरकर 23,971 पर आ गया। सेंसेक्स 1.84 यानी 1500 अंक गिरकर 76,740 पर आ गया। बैंक शेयरों में भी बड़ी गिरावट दिखी, जिससे बैंक निफ्टी 1.96 फीसदी क्रैश कर गया।

Samsung Galaxy Unpacked 2026 की तारीख तय, Z Fold 8 Ultra से लेकर Flip 8 तक होंगे लॉन्च, जानें लाइव डिटेल

Samsung Galaxy Unpacked 2026: Samsung ने आधिकारिक तौर पर अपने अगले Galaxy Unpacked इवेंट की तारीख की घोषणा कर दी है। इस इवेंट में दक्षिण कोरिया की यह टेक कंपनी अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करेगी। बता दें कि इस बार का इवेंट पहले से बड़ा हो सकता है, क्योंकि सैमसंग इस बार आमतौर पर लॉन्च किए जाने वाले दो फोल्डेबल फोन की जगह तीन नए फोल्डेबल स्मार्टफोन पेश कर सकता है। इसके साथ ही कंपनी नए स्मार्टवॉच और लंबे समय से चर्चा में चल रहे Android XR स्मार्ट ग्लासेस भी लॉन्च कर सकती है।

इवेंट की जानकारी देते हुए Samsung ने कहा कि Galaxy के नए डिवाइस ज्यादा पर्सनल और बेहतर अनुभव देने वाले होंगे और AI के दौर में एक नया मानक तय करेंगे। आइए जानते हैं Samsung के आने वाले Galaxy Unpacked इवेंट से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी।

Samsung Galaxy Z Fold 8 Ultra, Flip 8 और अन्य डिवाइस हो सकते हैं लॉन्च

दक्षिण कोरिया की टेक कंपनी सैमसंग इस इवेंट में Galaxy Z Fold 8, Galaxy Z Flip 8 और एक नए मॉडल Galaxy Z Fold 8 Ultra को पेश कर सकती है। अगर ये रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो यह पहली बार होगा जब Samsung कोई Ultra ब्रांड वाला फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करेगी।

माना जा रहा है कि स्टैंडर्ड Galaxy Z Fold 8 का डिजाइन ज्यादा चौड़ा और पासपोर्ट जैसा होगा ताकि इसे इस्तेमाल करना आसान हो, जबकि Ultra मॉडल में Samsung का अब तक का सबसे एडवांस्ड फोल्डेबल हार्डवेयर होने की उम्मीद है।

स्मार्टफोन के अलावा, कंपनी नई Galaxy Watch 9 सीरीज भी लॉन्च कर सकती है। इसके साथ ही ऐसी चर्चा है कि सैमसंग अपने आने वाले Android XR आधारित स्मार्ट ग्लासेस की पहली झलक भी दिखा सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक स्मार्ट ग्लासेस को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Samsung Galaxy Unpacked: तारीख, समय और भारत में इसे लाइव कैसे देखें

Samsung ने कन्फर्म किया है कि अगला Galaxy Unpacked इवेंट 22 जुलाई को सुबह 9:00 AM EDT (भारत में शाम 6:30 PM IST) पर होगा। इस लॉन्च इवेंट की लाइव-स्ट्रीमिंग Samsung.com, Samsung Newsroom और Samsung के ऑफिशियल YouTube चैनल पर दुनिया भर में की जाएगी।

लॉन्च से पहले, Samsung ने भारत में अपने आने वाले Galaxy डिवाइस के लिए प्री-रिजर्वेशन भी शुरू कर दिए हैं। इसके तहत कस्टमर 999 रुपये में डिवाइस रिजर्व कर सकते हैं और कई फायदों के लिए एलिजिबल हो सकते हैं, जिसमें 2,799 रुपये का वाउचर और लॉन्च के समय मिलने वाले दूसरे ऑफर्स शामिल हैं, जिनके बारे में कंपनी बाद में जानकारी देगी।

हमेशा की तरह, नए डिवाइस के हार्डवेयर से जुड़ी ज्यादातर जानकारी लीक और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स पर आधारित है। उम्मीद है कि Samsung 22 जुलाई को Galaxy Unpacked की-नोट के दौरान पूरे स्पेसिफिकेशन्स, कीमत और उपलब्धता के बारे में जानकारी देगा।

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इंग्लैंड के खिलाफ 125 रनों की हार में कितने अनचाहे रिकॉर्ड बना गई टीम इंडिया

दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 125 रनों की हार के बाद भारतीय टीम ने बहुत सारे अनचाहे रिकॉर्ड बना लिए हैं। यह पहली बार है जब भारतीय टीम इस प्रारुप में 100 से ज्यादा रनों से हारी हो। भारतीय टीम 76 रनों पर सिमट गई और जैसे तैसे इस प्रारुप में अपने न्यूनतम स्कोर से एक कदम आगे आ पाई।

202 रनों का पीछा करते हुए भारत के पांच विकेट पांच ओवर में 52 रन पर गिर गए थे। भारतीय बल्लेबाजों ने गैर जिम्मेदाराना शॉट खेले और जीत के लिये कोई प्रयास भी नहीं किया। यह पहली बार है जब एक पॉवरप्ले में भारत ने 5 विकेट गंवाए हों। श्रेयस अय्यर का बतौर कप्तान हार का सिलसिला अब पांच मैचों का हो गया है ।यह पहली बार है जब भारत लगातार 5  टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में से एक भी जीतने में नाकामयाब रहा।

भारतीय बल्लेबाजी पर नाराज हुए श्रेयस अय्यर

भारत के कप्तान श्रेयस अय्यर ने तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड से 125 रन की करारी हार के बाद अपनी टीम के प्रदर्शन को ‘‘बेहद खराब’’ करार दिया और कहा कि इस तरह का प्रदर्शन कतई स्वीकार्य नहीं है।अय्यर की कप्तानी में भारत ने अभी तक एक भी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं जीता है। मंगलवार को खेले गए मैच में तो उसका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा जब टीम 202 रन की लक्ष्य का पीछा करते हुए केवल 11.4 ओवर में 76 रन पर आउट हो गई और उसे रन के लिहाज से सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा।

अय्यर ने मैच के बाद कहा, ‘‘यह बेहद निराशाजनक था, इतने बड़े अंतर से हारना स्वीकार्य नहीं है। सबसे पहले हमें हार को स्वीकार करना होगा और नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।’’इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। गुरुवार को ब्रिस्टल में चौथा टी20 मैच और शनिवार को साउथेम्प्टन में अंतिम मैच खेला जाएगा। पहला मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था।

अय्यर का मानना ​​था कि ट्रेंट ब्रिज की इस पिच पर गेंदबाजों को 200 रन नहीं देने चाहिए थे।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह 200 विकेट वाली पिच थी। हमने पावरप्ले में चार विकेट गंवा दिए और इसी वजह से हम पिछड़ गए। आप कितनी भी योजना बना लें, लेकिन मैदान पर उतरने के बाद आपको परिस्थितियों के अनुसार ढलना पड़ता है। मुझे लगा कि हार्ड लेंथ पर शॉट लगाना मुश्किल था और हम उसे ठीक से अंजाम नहीं दे पाए।’’

भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘हमें अब अतीत के बारे में नहीं सोचना होगा और मजबूत वापसी करनी होगी। हमारे प्रत्येक खिलाड़ी को इस पर विचार करना होगा कि वह किस तरह से योगदान दे सकता है।’’

गौतम ने कहा गंभीरता से खेले टीम इंडिया

गंभीर ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘हम अच्छा नहीं खेले। टी20 विश्व कप फाइनल खेलने वाली टीम में बहुत बदलाव हुए हैं। चाहे कप्तान हो या सलामी बल्लेबाज। टीम में न तो हार्दिक पंड्या हैं और न ही जसप्रीत बुमराह हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप टीम का पुनर्गठन (रिसेट) करते हैं तो थोड़ा समय लगता है। अगर आप देखें, तो 15 साल का खिलाड़ी (वैभव सूर्यवंशी) पारी का आगाज कर रहा है, प्रिंस यादव अपना दूसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय खेल रहे हैं, हर्षित राणा चोट से वापसी कर रहे हैं। हम अंत में सिर्फ नतीजों को देखते हैं और इसमें कोई शक नहीं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नतीजे अहम हैं, लेकिन हमें व्यावहारिक भी होना होगा। ’’

गंभीर ने जोर देकर कहा कि कई झटकों के बावजूद भारत महज चार मैच के नतीजे के आधार पर खराब टीम नहीं बन जाता।उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी प्रतिद्वंद्वी टीम आपसे बेहतर खेलती है। कभी-कभी आप हालात का सही अंदाजा नहीं लगा पाते और उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते। खेल को समझना भी उतना ही जरूरी है। आयरलैंड के बाद से हमने ऐसा नहीं किया है। ’’

गंभीर ने कहा, ‘‘हम हालात के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाए हैं। चाहे आयरलैंड हो या इंग्लैंड, सच्चाई यही है। अगर हमने बेहतर ढंग से खुद को ढाला होता और बेहतर क्रिकेट खेला होता, तो हम लगातार चार मैच नहीं हारते। ’’

August 2026 eclipse: अगस्त में 15 दिनों के अंतर पर लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, तारीख और सूतक काल

August 2026 eclipse: इस साल का अगला महीना अगस्त का होगा, जो दो बड़ी खगोल घटनाओं का गवाह बनेगा। इस माह में साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के एक सीधी रेखा में आ जाने पर लगता है। लेकिन यह धार्मिक और ज्योतिष रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण 15 दिनों के अंतराल पर लगेंगे। यह खगोलीय घटना सावन के महीने लगने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

सूर्य ग्रहण जहां 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन के दिन लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल लग जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। सूतक काल खत्म होने के बाद ही दोबारा मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ आदि धार्मिक कार्य शुरू होते हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है और विशेषज्ञ ग्रहण के प्रभावों का अध्ययन करते हैं।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त सावन अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा।

अगस्त 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण

अगस्त 2026 में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण, श्रावण मास की पूर्णिमा पर 28 अगस्त 2026 को लगेगा। इस दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार अप्रभावित रहेगा।

सूतक काल के नियम

सावन के माह में लगने वाले साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे और इनका सूतक भी नहीं रहेगा। इसलिए इन दोंनों दिनों के पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि इसके ज्योतिषीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

  • सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।
  • ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

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Kalyan Jewellers Shares: 7% चढ़े शेयर, फीके बिजनेस अपडेट के बावजूद इस कारण टूटे पड़े निवेशक

Kalyan Jewellers Share Price: दिग्गज ज्वैलरी कंपनी कल्याण ज्वैलर्स के शेयर आज तूफानी स्पीड से ऊपर चढ़े और वह भी ऐसे माहौल में, जब सेंसेक्स-निफ्टी औंधे मुंह गिर पड़े। ब्रोकरेज फर्म सिटी ने जब इस पर तगड़ा बुलिश रुझान दिखाया और उम्मीद जताई कि इसके शेयर मौजूदा लेवल से डबल से अधिक ऊपर चढ़ सकते हैं। इसने कल्याण ज्वैलर्स के शेयरों की चमक बढ़ा दी। बिकवाली के माहौल का इस पर भी असर पड़ा लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 6.72% की बढ़त के साथ ₹378.75 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 7.07% उछलकर ₹380.00 तक पहुंच गया था।

Kalyan Jewellers पर क्यों है City बुलिश

जून तिमाही के बिजनेस अपडेट पर कल्याण ज्वैलर्स के शेयर एक कारोबारी दिन पहले करीब 7% टूट गए थे लेकिन आज सिटी के बुलिश रुझान ने इसे रॉकेट बना दिया। सिटी ने इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है और टारगेट प्राइस ₹750 फिक्स किया है यानी मौजूदा लेवल से दोगुने से भी अधिक। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि जून तिमाही में कंपनी का कंसालिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 38% की रफ्तार से बढ़ा जोकि उम्मीद से कम रही। जून तिमाही में भारतीय कारोबार से 38% अधिक रेवेन्यू मिला जिसे 28% के SSSG (सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ) से सपोर्ट मिला।

रेवेन्यू के मोर्चे पर चूकने के बावजूद सिटी इसकी लॉन्ग-टर्म संभावनाओं के चलते बुलिश है। सिटी का मानना है कि फ्रेंचाइजी के जरिए विस्तार की रणनीति इसके लिए सबसे अहम ग्रोथ ड्राइवर है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि विस्तार मॉडल से इसकी अर्निंग्स ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा तो RoCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड) में भी सुधार होगा। सिटी ने कल्याण ज्वैलर्स के डिजिटल-फर्स्ट ज्वैलरी बिजनेस कैंडेरे (Candere) के शानदार प्रदर्शन का भी जिक्र किया, जिसका रेवेन्यू जून तिमाही में सालाना आधार पर 112% बढ़ा। कंपनी ने जून तिमाही में पांच कैंडेरे स्टोर खोले।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

कल्याण ज्वैलर्स ने पोर्टफोलियो की चमक तेजी से कम की है। पिछले साल 24 जुलाई 2025 को बीएसई पर यह ₹617.30 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में ही यह 47.00% टूटकर पिछले महीने 11 जून 2025 को ₹327.15 के भाव पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते पर भारत का सबसे बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र, 15 पॉइंट में समझिए पाकिस्तान क्यों मुंह की ही खाएगा

Indus Waters Treaty Legal points: भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच कानूनी मोर्चे पर भारत का पक्ष मजबूत है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) के पूर्व अतिरिक्त सचिव और कानूनी सलाहकार डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने एक डिटेल्ड लीगल एनालिसिस किया है।

पीटीआई पर मौजूद इस एनालिसिस से साफ है कि अगर पाकिस्तान इस समझौते के नियमों का उल्लंघन कर एकतरफा कोई कदम उठाता है तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के पास उसे करारा जवाब देने का एक बड़ा कानूनी ब्रह्मास्त्र मौजूद है। यहां नीचे 15 पॉइंट में समझिए कि इस समझौते का कानूनी ढांचा क्या है और पाकिस्तान इसमें कैसे मुंह की खाएगा-

1- सिंधु नदी प्रणाली का विशाल दायरा

सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है। इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं जबकि पूर्वी सहायक नदियां (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) कुल मिलाकर 2800 मील से अधिक लंबी हैं। यह पूरा सिस्टम 450000 वर्ग मील क्षेत्र को कवर करता है। ये इसे दुनिया की सबसे बड़े नदी प्रणालियों में से एक बनाता है। इसका अधिकांश हिस्सा भारत और पाकिस्तान में स्थित है।

2- बंटवारे के बाद विवाद और दिल्ली समझौता

अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के साथ ही सिंधु जल विवाद भी पैदा हो गया। दोनों देशों के बीच पानी के नियमन को लेकर पहला समझौता 4 मई 1948 को हुआ। इसे ‘इंटर-डोमिनियन एग्रीमेंट’ या ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें यह माना गया था कि पश्चिम पंजाब (पाकिस्तान) पूर्वी पंजाब (भारत) के पानी पर अधिकार के रूप में कोई दावा नहीं कर सकता। हालांकि पाकिस्तान ने बाद में 23 अगस्त 1950 को इस समझौते को मानने से इनकार कर दिया था।

3- वर्ल्ड बैंक की एंट्री और 1960 की संधि

1951 में टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंटथल ने वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों को संयुक्त रूप से सिंधु बेसिन विकसित करने का प्रस्ताव दिया। वर्ल्ड बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया। इसे दोनों ने स्वीकार किया। बेहद उतार-चढ़ाव और टूटने की कगार पर पहुंचने के बावजूद आखिरकार 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर हो सके।

4- संधि की कानूनी संरचना और वर्ल्ड बैंक की भूमिका

सिंधु जल समझौते पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे। यह 12 जनवरी 1961 को लागू हुआ लेकिन इसे 1 अप्रैल 1960 से ही लागू माना गया। इस संधि में 12 अनुच्छेदों के तहत कुल 79 पैराग्राफ और 8 एनेक्सचर शामिल हैं। वर्ल्ड बैंक ने सिर्फ विशिष्ट अनुच्छेदों (Articles V, X) और एनेक्सचर (F, G, H) के उद्देश्यों के लिए इस पर हस्ताक्षर किए थे।

5- नदियों का आवंटन और कानूनी मिसाल

इस संधि के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी कुछ अपवादों को छोड़कर पाकिस्तान को आवंटित किया गया है। इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि इस संधि की किसी भी बात को कानून का कोई सामान्य सिद्धांत या मिसाल नहीं माना जाएगा।

6- संधि का मुख्य उद्देश्य: सद्भावना और सहयोग

संधि की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान सरकार सिंधु नदी प्रणाली के पानी का पूर्ण और संतोषजनक उपयोग करने की समान इच्छा रखती हैं। इसके तहत दोनों देशों को सद्भावना, मित्रता और सहयोग की भावना के साथ एक-दूसरे के अधिकारों और दायित्वों को तय करना था और भविष्य में उठने वाले किसी भी सवाल का निपटारा करना था।

विवाद निपटारे का त्रि-स्तरीय तंत्र

7- स्थायी सिंधु आयोग

संधि के तहत विवादों और मतभेदों के निपटारे के लिए एक स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया है। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसकी भूमिका मुख्य रूप से प्रशासनिक और परामर्शी होती है।

8- संधि में सवाल, मतभेद और विवाद में अंतर

अनुच्छेद IX विवाद निपटान ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किसी मुद्दे को तीन श्रेणियों में बांटता है, सवाल, मतभेद और विवाद, किसी भी सवाल की जांच सबसे पहले आयोग करता है। अगर आयोग में सहमति नहीं बनती तो उसे मतभेद माना जाता है। फिर इसे एक निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है। कोई मुद्दा विवाद तभी बनता है जब वह निष्पक्ष विशेषज्ञ के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो या विशेषज्ञ खुद आयोग को इसकी जानकारी दे।

9- मध्यस्थता अदालत के लिए कड़ी शर्तें

कोई भी मतभेद विवाद की श्रेणी में तभी आ सकता है जब आयोग के दोनों कमिश्नर इस पर सहमत हों। जब विवाद खड़ा हो जाता है तो आयोग दोनों सरकारों को रिपोर्ट करता है। इसके बाद मध्यस्थों की मदद ली जा सकती है। किसी मध्यस्थता अदालत का गठन सिर्फ दोनों देशों की आपसी सहमति या बातचीत और मध्यस्थता के पूरी तरह विफल होने के बाद ही किया जा सकता है।

पाकिस्तान क्यों खाएगा मुंह की? भारत का कानूनी पक्ष

10- एकतरफा अदालत जाने का कोई अधिकार नहीं

एनेक्सचर G (मध्यस्थता अदालत) की शुरुआती भाषा बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें लिखा है कि, ‘अगर आवश्यकता पैदा होती है तो…’ इसका मतलब यह है कि यह चरण तभी आएगा जब सभी आवश्यक शर्तें पूरी होंगी। कोई भी पक्ष अपनी मर्जी से किसी भी सवाल को सीधे मध्यस्थता अदालत में नहीं घसीट सकता। इसके लिए पहले आपसी बातचीत और निष्पक्ष विशेषज्ञ के चरणों से गुजरना अनिवार्य है।

11- एकतरफा कदम पूरी तरह अवैध

कोई भी कमिश्नर मतभेद को निष्पक्ष विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए एकतरफा पहल तो कर सकता है लेकिन किसी मतभेद को विवाद घोषित करने या मध्यस्थता अदालत की प्रक्रिया को एकतरफा शुरू करने का कोई प्रावधान इस संधि में नहीं है। द्विपक्षीय संधियों में हमेशा आपसी निर्धारण का प्रावधान होता है और यही बात सिंधु जल समझौते पर भी लागू होती है।

12- पाकिस्तान की एकतरफा जिद संधि का उल्लंघन

अगर संधि के नियमों के तहत कोई विवाद आधिकारिक रूप से खड़ा ही नहीं हुआ है और उसके बिना ही पाकिस्तान मध्यस्थता अदालत गठित करने के लिए एकतरफा प्रक्रिया शुरू करता है तो यह संधि का सीधा उल्लंघन माना जाएगा और यह पूरी तरह से अवैध होगा। ऐसे में भारत के पास इसके खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने के कानूनी विकल्प मौजूद हैं।

13- वियना कन्वेंशन का कानूनी आधार

अंतरराष्ट्रीय कानून में जब कोई एक पक्ष संधि के किसी महत्वपूर्ण हिस्से का उल्लंघन करता है तो वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 को जरूरी डॉक्यूमेंट के रूप में देखा जाता है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस कन्वेंशन के पक्षकार नहीं हैं और सिंधु जल समझौता इससे पहले का है लेकिन इसके नियम अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून को दर्शाते हैं।

14- मटेरियल ब्रीच का नियम

वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 60 संधि के उल्लंघन के परिणामों को स्पष्ट करता है। इसके तहत संधि के उद्देश्य या प्रयोजन को पूरा करने के लिए आवश्यक किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करना मटेरियल ब्रीच यानी गंभीर उल्लंघन माना जाता है। यह भारत के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है।

15- आतंकवाद के कारण भारत सस्पेंड कर सकता है संधि

डॉ विष्णु दत्त शर्मा के निष्कर्ष के मुताबिक इस पूरी संधि की मूल भावना सद्भावना और मित्रता पर आधारित है। ऐसे में यह दलील दी जा सकती है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना संधि के तहत उसके दायित्वों को पूरा करने में विफलता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा यह कृत्य एक मटेरियल ब्रीच का रूप लेता है। इस आधार पर भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून के तहत यह पूरा अधिकार है कि वह सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दे। अगर पाकिस्तान जरूरी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर भारत को एकतरफा मध्यस्थता अदालत में खींचने की कोशिश करता है तो वह खुद अपनी ही चाल में फंसकर मुंह की खाएगा।