दूसरे टी-20 में भारतीय बल्लेबाजी का सरेंडर, इंग्लैंड के खिलाफ मिली 125 रनों की शर्मनाक हार

ENGvsIND

ENGvsIND जॉश टंग (28 रन पर चार विकेट) और जोफ्रा आर्चर (29 रन पर तीन विकेट) ने घातक गेंदबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजी को ध्वस्त कर दिया और इंग्लैंड ने तीसरा टी 20 मंगलवार को 125 रन से जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली।फिल साल्ट (70) के शानदार अर्धशतक से इंग्लैंड ने सात विकेट पर 201 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया।

भारत को 114 ओवर में मात्र 76 रन पर ढेर कर दिया। भारत को 202 का लक्ष्य मिला था और एक धीमी पिच पर भारत के लिए यह लक्ष्य आसान नहीं रहने वाला था और इसकी झलक पावरप्ले में ही मिल गई जहां भारत ने इस प्रारूप में पहली बार पांच विकेट गंवा दिए।

 भारत ने इस प्रारूप का अपना दूसरा न्यूनतम स्कोर भी बनाया और भारत की ओर से सर्वाधिक स्कोर 13 रन का रहा जो वैभव सूर्यवंशी और इशान किशन ने बनाया। इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक चार विकेट जॉश टंग ने लिए और आर्चर को तीन विकेट मिले। स्पिनर जैक्स को एक और आदिल राशिद को दो विकेट हासिल हुए।

जोफ्रा आर्चर को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला।अभिषेक शर्मा 10, कप्तान श्रेयस अय्यर पांच, अक्षर पटेल 10 और तिलक वर्मा तीन रन बनाकर आउट हुए। भारत की तरफ से सिर्फ चार बल्लेबाज ही दहाई की संख्या में पहुंच सके।

इससे पहले टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरे इंग्लैंड को जोस बटलर (36) ने धमाकेदार शुरुआत दिलाई थी लेकिन प्रिंस यादव ने आते ही बटलर को अपना शिकार बनाया और कुछ आक्रामक शॉट्स खेलने के बाद हैरी ब्रूक (16) भी पवेलियन लौट गए। इसके बाद फ़िल सॉल्ट ने ज़िम्मेदारी संभाली और जैकब बेथेल (13) ने उनका साथ भी दिया। हालांकि हर्षित राणा ने वापसी करते हुए लगातार दो गेंदों पर बेथेल और टॉम बेंटन को अपना शिकार बनाया।

इसके बाद सैम करन (नाबाद 41) ने आने के बाद आक्रमण शुरू किया। सॉल्ट 44 गेंदों में सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से 70 रन बनाकर अक्षर पटेल का शिकार बने लेकिन करन ने प्रहार जारी रखा। हालांकि अंतिम दो ओवर में भारत ने मात्र 14 रन दिए। करन 24 गेंदों में चार चौकों की मदद से 41 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की तरफ से हर्षित राणा और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट लिए।

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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इन 8 ट्रेडिशनल गहने के बिना अधूरा है दुल्हन का सोलह श्रृंगार, भारत में नहीं होता पूरा ब्राइडल लुक!

भारत में गहने सिर्फ सजने-संवरने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये कल्चरल, ट्रेडिशन, इमोशन और आइडेंटिटी से जुड़े होते हैं। अलग-अलग राज्यों में पहने जाने वाली ज्वेलरी का अपना खास महत्व होता है। आइए जानते हैं महिलाओं द्वारा पहने जाने वाली ट्रेडिशनल इंडियन ज्वेलरी और उनके पीछे छिपे अर्थ के बारे में:

1. मंगलसूत्र – वैवाहिक रिश्ते की पहचान

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मंगलसूत्र भारतीय विवाहित महिलाओं के सबसे महत्वपूर्ण आभूषणों में से एक माना जाता है। इसके काले मोती और सोने के डिजाइन को कई परंपराओं में सुरक्षा, शुभता और पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती से जोड़ा जाता है। मंगलसूत्र सिर्फ एक गहना नहीं बल्कि विवाह के पवित्र बंधन और जीवनसाथी के प्रति प्रेम व विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

2. नथ – सुंदरता और सम्मान का प्रतीक

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नथ भारतीय महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का एक खास हिस्सा है। खासकर शादी और त्योहारों के दौरान बड़ी नथ पहनने की परंपरा कई क्षेत्रों में आज भी देखने को मिलती है। महाराष्ट्र की नथ, राजस्थान की बड़ी नथ और उत्तर भारत की शादी वाली नथ अपने अलग-अलग डिजाइन के लिए पॉपुलर हैं।

3. चूड़ियां – खुशियों और सुहाग की निशानी

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चूड़ी भारतीय संस्कृति में चूड़ियों का विशेष महत्व है। लाल, हरी और अन्य रंगों की चूड़ियां अलग-अलग परंपराओं में शुभ मानी जाती हैं। चूड़ियों की खनक को घर में खुशियों से भी जोड़ा जाता है। शादी के समय दुल्हन के हाथों में चूड़ियां सजाना एक खास रस्म का हिस्सा होता है।

4. पायल – ब्यूटी और ट्रेडिशन की पहचान

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पायल पैरों में पहना जाने वाला ट्रेडिशनल गहना है। इसकी मधुर आवाज भारतीय संस्कृति में लंबे समय से अट्रैक्शन और स्त्री सौंदर्य से जुड़ी रही है। पुराने समय में पायल को घर में आने-जाने की हल्की आहट से भी जोड़ा जाता था। कई जगहों पर इसे शुभ माना जाता है। चांदी की पायल ज्यादा पॉपुलर रही है।

5. बिछिया – शादीशुदा महिला की पहचान

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बिछिया पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली अंगूठी होती है, जिसे विवाहित महिलाएं पहनती हैं। उत्तर भारत समेत कई क्षेत्रों में शादी के बाद बिछिया पहनने की परंपरा है। इसे पति-पत्नी के रिश्ते से जोड़ा जाता है। बिछिया चांदी की बनाई जाती है और शादी के बाद दुल्हन को पहनाई जाती है।

6. मांग टीका – सौभाग्य और सुंदरता का प्रतीक

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मांग टीका माथे के बीचों-बीच पहना जाने वाला यह गहना दुल्हन के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मांग टीका को भारतीय संस्कृति में स्त्री के ब्यूटी, कॉन्फिडेंस और वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत से जोड़ा जाता है। आजकल इसके कई मॉडर्न डिजाइन भी देखने को मिलते हैं, जो ट्रेडिशनल और मॉडर्न लुक दोनों देते हैं।

7. हार – समृद्धि और पारिवारिक विरासत

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हार भारतीय महिलाओं के श्रृंगार में हार का विशेष स्थान है। सोने के हार को कई परिवारों में समृद्धि और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत का प्रतीक माना जाता है। शादी और बड़े त्योहारों पर महिलाएं खास डिजाइन के हार पहनती हैं। कई बार गहने मां से बेटी या बहू को दिए जाते हैं, जिससे उनमें इमोशनल टच जुड़ जाता है।

8. कमरबंद – शाही श्रृंगार की पहचान

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कमरबंद कमर पर पहना जाने वाला ट्रेडिशनल ज्वेलरी है। यह खासतौर पर दुल्हन के श्रृंगार में देखा जाता है। कमरबंद को सुंदरता, शाही अंदाज और ट्रेडिशनल पहनावे का हिस्सा माना जाता है। सोने या चांदी से बने कमरबंद पुराने समय में राजघरानों के बीच भी पॉपुलर थे।

Inox India Share Price: मई से अब तक कंपनी को मिला ₹939 करोड़ का ऑर्डर, शेयर 5% चढ़ा

Inox India Share Price: बुधवार, 8 जुलाई को इनॉक्स इंडिया लिमिटेड (Inox India) के शेयर में 5% की तेजी देखने को मिली। जब कंपनी ने बताया कि उसे 21 मई से अब तक अपने बिजनेस सेगमेंट में ₹939 करोड़ के कई ऑर्डर मिले हैं।

ये ऑर्डर इंडस्ट्रियल गैस, LNG और क्रायो-साइंटिफिक सॉल्यूशंस बिज़नेस से जुड़े हैं। कुल ऑर्डर वैल्यू में से, ₹871 करोड़ इंडस्ट्रियल गैस सेगमेंट से, ₹44 करोड़ LNG से, ₹16 करोड़ क्रायो-साइंटिफिक सॉल्यूशंस से और ₹8 करोड़ बेवरेज केग ऑर्डर से आए।

कंपनी के अनुसार, इस ऑर्डर से ग्लोबल क्रायोजेनिक सॉल्यूशंस मार्केट में उसकी स्थिति मजबूत हुई है, जिसके कस्टमर भारत और विदेशों में हैं।डस्ट्रियल गैस बिज़नेस को स्पेस एक्सप्लोरेशन इंडस्ट्री से मिले एक बड़े ऑर्डर के साथ-साथ वेपोराइज़र और स्टोरेज टैंक के लिए कई छोटे ऑर्डर मिले।

LNG सेगमेंट में, कंपनी को स्टोरेज टैंक, डिस्पेंसर, सेमी-ट्रेलर और LNG फ्यूलिंग स्टेशन इक्विपमेंट के लिए कई ऑर्डर मिले। इस दौरान उसे ITER से भी एक छोटा ऑर्डर मिला।इसके अलावा, कंपनी को डिस्पोजेबल सिलेंडर, लिक्विड सिलेंडर, ट्रांसपोर्ट टैंक और बेवरेज केग के लिए कई ऑर्डर मिले।

ऑर्डर मिलने पर कमेंट करते हुए, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दीपक आचार्य ने कहा कि ये ऑर्डर कंपनी के क्रायोजेनिक सॉल्यूशंस की बढ़ती ग्लोबल डिमांड को दिखाते हैं, खासकर स्पेस सेक्टर से। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी इंजीनियरिंग इनोवेशन और इंडस्ट्रीज़ में मिशन-क्रिटिकल क्रायोजेनिक सिस्टम देने पर फोकस करती है।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

स्टॉक के परफॉर्मेंस पर नजर डालें तो शेयर इस साल अब तक 65.74 फीसदी चढ़ा है। जबकि 3 महीने में इसमें 52.55 फीसदी की तेजी आई। वहीं 1 साल में यह 53.45 फीसदी चढ़ा है। शेयर 11.50 बजे के आसपास एनएसई पर 84.30 रुपये यानी 4.58 फीसदी की बढ़त के साथ 1889.90 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।

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South Korea Share Market: दक्षिण कोरिया के बाजार में गिरावट जारी, ऑल-टाइम हाई से 20% फिसला कोस्पी

South Korea Share Market: दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में 8 जुलाई को भी बड़ी गिरावट दिखी। जून में अपने ऑल-टाइम हाई से 20 फीसदी गिरने के बाद यह बाजार अब बेयर मार्केट में प्रवेश कर गया है। 7 जुलाई को बाजार का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 8 फीसदी से ज्यादा गिर गया था। 8 जुलाई को भी कोस्पी पर दबाव दिखा। भारतीय समय के मुताबिक, 11 बजे यह 4.14 फीसदी गिरकर 7,329 अंक पर चल रहा था।

दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरावट ने बनाया दबाव

8 जुलाई को दिग्गज कंपनियों में गिरावट ने दक्षिण कोरिया के बाजार पर दबाव बढ़ाया। चिप बनाने वाली दोनों बड़ी कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हायनिक्स में बड़ी गिरावट दिखी। 11 बजे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर 5.41 नीचे चल रहा था। SK Hynix का शेयर 2.68 फीसदी नीचे था। Hyundai Motor का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहा था।

मध्यूपूर्व में फिर से तनाव बढ़ने का असर

मध्यूपूर्व में एक बार फिर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ा है। इसका असर भारत सहित दूसरे एशियाई बाजारों पर 8 जुलाई को देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड में उछाल का असर भी एशियाई बाजारों पर पड़ा। जापान, चीन और थाईलैंड के बाजारों में गिरावट दिखी। MSCI Asia Pacific Index करीब 1 फीसदी नीचे चल रहा था। इस साल दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई थी।

अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट का भी असर

7 जुलाई को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दिखी। सबसे ज्यादा गिरावट टेक्नोलॉजी शेयरों में आई थी। इससे नैस्डेक लाल निशान में बंद हुआ था। बाकी दोनों सूचकांक डाओ जोंस और एसएंडपी 500 भी गिरकर बंद हुए थे। इसका असर भी 8 जुलाई को एशिया में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दिखा। पिछले कुछ हफ्तों से टेक्नोलॉजी खासकर एआई से जुड़े शेयरों पर दबाव दिख रहा है।

स्थिति पर नजर रख रही दक्षिण कोरिया की सरकार

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में बीते कुछ हफ्तों में आई गिरावट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वित्तमंत्री शेयर बाजारों के लिए रिस्क बढ़ाने वाले फैक्टर्स पर विचार करने के लिए तैयार हैं। सरकार ने 7 जुलाई को यह बताया।

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विदेशी निवेशक कर रहे बड़ी बिकवाली

दक्षिण कोरिया के वित्तमंत्री ने केंद्रीय बैंक के गवर्नर और फाइनेंशियल रेगुलेटर्स के प्रमुखों से भी मुलाकात की है। दक्षिण कोरिया स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक कोस्पी में चिप बनाने वाली दोनों कंपनियों की करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों शेयरों में विदेशी इनवेस्टर्स की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।

व्हाइट ब्यूटी की तलाश में जाएं भारत के इन 8 खूबसूरत वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन पर, जहां सफेद जानवरों का होगा दीदार!

भारत में वन्यजीवों की कई ऐसी प्रजातियां हैं जो अपनी अनोखी रंग-रूप की वजह से लोगों को अट्रैक्ट करती हैं। इनमें सफेद रंग के दुर्लभ जंगली जानवर सबसे ज्यादा रोमांच पैदा करते हैं। हालांकि जंगलों में इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है। भारत के कुछ नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ एरिया ऐसे हैं जहां इन दुर्लभ जीवों को देखने की संभावना रहती है।

1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क – सफेद हिरण और रेयर वाइल्ड लाइफ का एरिया

पानी में नहाते दिखा दुर्लभ सफेद हिरण, वीडियो हुआ वायरल - white Moose rare animal Population only 50 VIRAL VIDEO tsty - AajTak

उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट भारत के सबसे पुराने और पॉपुलर नेशनल पार्क में से एक है। यह जगह बाघ, हाथी, हिरण और कई पक्षियों के लिए जानी जाती है। समय-समय पर यहां सफेद रंग वाले दुर्लभ हिरण या अन्य वन्यजीवों के दिखाई देने की खबरें सामने आती रही हैं। घने जंगल, घास के मैदान और नदी क्षेत्र ऐसे वातावरण बनाते हैं जहां कई तरह के जीव रहते हैं। सफारी के दौरान दुर्लभ रंग वाले जानवर दिखना पूरी तरह किस्मत पर डिपेंड करता है।

 

2. केवलादेव नेशनल पार्क – सफेद पक्षियों का खूबसूरत संसार

सफेद मोर सुंदर पंख और प्रेमालाप प्रदर्शन के साथ एक राजसी पक्षी तस्वीर और मुफ्त डाउनलोड के लिए चित्र - Pngtree

राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्कदुनिया के पॉपुलर पक्षी अभयारण्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पक्षी आते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां कई प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में सफेद रंग के पक्षी जैसे बगुले, सारस और अन्य जलपक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं। झीलों, तालाबों और घास वाले एरिया के कारण यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है।

 

3. रणथंभौर नेशनल पार्क – सफेद बाघ की कहानियों से जुड़ा 

दुनिया में पीले टाइगर्स मौजूद थे तो सफेद बाघ कहां से आए? - Trending AajTak

रणथंभौर राजस्थान का पॉपुलर टाइगर रिजर्व है, जहां बाघों को खुले जंगल में देखने का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। यहां सफेद बाघ नियमित रूप से नहीं पाए जाते, लेकिन भारत में सफेद बाघों की ऐतिहासिक कहानी मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क जैसे क्षेत्रों से जुड़ी रही है। रणथंभौर में सफेद रंग के अन्य दुर्लभ जीव और पक्षी देखने को मिल सकते हैं।

 

4. काजीरंगा नेशनल पार्क – सफेद गैंडों की धरती

उत्तरी सफेद गैंडे: लॉन्गलीट के जानवर प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने में मदद करते हैं | आईटीवी न्यूज़ वेस्ट कंट्री

असम का काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडों के लिए वर्ल्ड फेमस है। यहां सफेद रंग वाले गैंडे नहीं, बल्कि सामान्य रंग के भारतीय गैंडे पाए जाते हैं, जिन्हें कई लोग गलती से “सफेद गैंडा” कह देते हैं। इसके अलावा यहां हाथी, जंगली भैंसे, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां मिलती हैं। मानसून के बाद हरियाली से भरा यह पार्क बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

 

5. भितरकनिका नेशनल पार्क – सफेद मगरमच्छों की दुर्लभ झलक

 

Meet Pearl, one of the world's rare albino alligators | Natural World | Earth Touch News

ओडिशा का भितरकनिका नेशनल पार्क मैंग्रोव जंगलों और खारे पानी के मगरमच्छों के लिए पॉपुलर है। यहां दुर्लभ रंग वाले मगरमच्छों के दिखाई देने की घटनाएं सामने आई हैं। पार्क में सफेद या हल्के रंग के मगरमच्छ बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। इसके अलावा यहां कछुए, पक्षी और कई जलीय जीव भी पाए जाते हैं। यह एरिया भारत के सबसे जरुरी मैंग्रोव इको-सिस्टम में से एक है।

 

6. काबिनी वाइल्डलाइफ सेचुअरी – जंगलों में दुर्लभ नजारे

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कर्नाटक का काबिनी एरिया अपने खूबसूरत जंगलों, झील और वाइल्डलाइफ सफारी के लिए पॉपुलर है। यहां हाथी, बाघ, तेंदुए और कई प्रकार के हिरण पाए जाते हैं। काबिनी की खासियत यह है कि यहां जंगल और पानी का सुंदर ब्लेंड देखने को मिलता है, जिससे वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस और भी शानदार हो जाता है।

7. नागरहोल टाइगर रिजर्व – रेयर वाइल्डलाइफ का नेचुरल होम

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नागरहोल टाइगर रिजर्व कर्नाटक के सबसे जरुरी जंगल एरिया में से एक है। यहां बाघ, हाथी, गौर, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। घने जंगल और नदी क्षेत्र इसे वाइल्डलाइफ के लिए आइडियल प्लेस बनाते हैं। सफेद रंग वाले जानवरों को देखना यहां भी दुर्लभ घटना है, लेकिन सफारी के दौरान अलग-अलग प्रजातियों के अनोखे रूप देखने का मौका मिल सकता है।

 

8. पेरियार टाइगर रिजर्व – झील और जंगलों का अनोखा संगम

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केरल का पेरियार टाइगर रिजर्व अपनी खूबसूरत झील, हाथियों और हरे-भरे जंगलों के लिए पॉपुलर है। यहां कई प्रकार के पक्षी, हिरण और वाइल्डलाइफ पाए जाते हैं। सफेद रंग वाले दुर्लभ जीवों को देखना आसान नहीं होता, लेकिन इस क्षेत्र की बायोडाइवर्सिटी इसे खास बनाती है। नाव सफारी के दौरान जंगल और पानी के बीच वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस बेहद यादगार होता है।

भारत के जंगलों में सफेद रंग के दुर्लभ जानवरों को देखना एक रोमांचक लेकिन बेहद मुश्किल एक्सपीरियंस है। नेचर में ऐसे जीव बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं और इनका कंज़र्वेशन बेहद जरूरी है। इन नेशनल पार्क की ट्रिप केवल दुर्लभ जानवरों को देखने के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की यूनिक बायोडाइवर्सिटी और नेचुरल ब्यूटी को समझने का भी शानदार मौका देती है।

Video: शेर के कब्जे में 30 मिनट तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा शख्स, आखिर कैसे बची जान? खुद सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

गुजरात के एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां एक आम चरवाहे का सामना अचानक जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी से हो गया। हालात ऐसे थे कि एक छोटी सी गलती उसकी जान ले सकती थी, लेकिन उसने डर और घबराहट के बजाय धैर्य और हिम्मत का सहारा लिया। कई मिनट तक चले इस खौफनाक आमने-सामने में उसकी नजरें शेर से मिली रहीं और हर पल जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई जैसा महसूस हुआ। इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया कि आखिर कैसे एक इंसान ने इतने खतरनाक हालात में खुद पर काबू रखा। अब इस अनोखे मुकाबले की कहानी सोशल मीडिया से लेकर हर जगह चर्चा का विषय बन गई है।

अचानक हुआ शेर से आमना-सामना

कालू परमार ने बताया कि घटना सोमवार सुबह की है। वह अपने घर के आंगन में गाय बांधने के बाद अंदर जाने वाले थे। तभी पीछे से किसी जानवर ने उन पर हमला कर दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ। कुछ सेकंड बाद पता चला कि वह शेर था और मैं जमीन पर गिर चुका था।”

हमले के बाद शेर ने उनका हाथ अपने मुंह में पकड़ लिया। उस समय उनके पास बचने के लिए कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

शेर को शांत करने के लिए अपनाई अनोखी रणनीति

परमार ने बताया कि उस खतरनाक पल में उन्होंने शेर से लड़ने के बजाय खुद को शांत रखने का फैसला किया। उन्होंने धीरे-धीरे शेर के सिर और गर्दन पर हाथ फेरना शुरू किया।

उनका मानना था कि इससे शेर को महसूस होगा कि वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। उन्होंने लगातार शेर की आंखों में देखते हुए खुद को शांत रखा।

करीब 30 मिनट तक दोनों के बीच एक अजीब सा सामना चलता रहा और आखिरकार शेर ने उनका हाथ छोड़ दिया।

आंखों के सामने घूम रहा था परिवार का चेहरा

परमार ने बताया कि उन 30 मिनटों में उन्हें अपनी पत्नी, पांच बेटियों और बेटे की याद आ रही थी। उन्हें लग रहा था कि शायद उनकी जिंदगी का यह आखिरी पल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से शेर ने उन्हें छोड़ दिया और वह सिर्फ पंजों की चोट के साथ बच गए।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी की सलाह

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि शेर के हमले के दौरान कोई एक तरीका हमेशा काम करेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। जानवर का व्यवहार, परिस्थिति और आसपास का माहौल नतीजे को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शेर को छूना या उसके करीब जाना आमतौर पर जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि परमार के मामले में उनका शांत रहना और घबराहट से बचना मददगार साबित हुआ।

बीमारी से उबरने के बाद हुआ हमला

दिलचस्प बात यह है कि परमार हाल ही में बीमारी से ठीक हुए थे। घटना से सिर्फ 10 दिन पहले ही वह फ्लू के इलाज के बाद अस्पताल से घर लौटे थे।

उन्होंने बताया कि गांव के लोग आसपास के जंगल में शेरों की आवाज सुनते रहते हैं, लेकिन गांव के अंदर किसी शेर को देखना उनके लिए पहली बार था।

वन विभाग ने शुरू किया शेर की तलाश अभियान

वन विभाग ने साफ किया है कि परमार पर हमला करने वाला जानवर शेर था, न कि शेरनी जैसा पहले बताया जा रहा था।

शेर को ढूंढने और सुरक्षित पकड़ने के लिए 32 सदस्यीय टीम को लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के कारण शेर आसपास के जंगल क्षेत्र में चला गया है।

वन विभाग के अधिकारी चिराग अमीन ने बताया कि टीम शेर की पहचान करने के साथ यह भी जांच रही है कि क्या उसे पहले कभी पकड़ा गया था। जरूरत पड़ने पर उसे दूसरे स्थान पर भी शिफ्ट किया जा सकता है।

Video: भारतीयों की सेविंग्स की आदत के पीछे क्या है असली वजह, यूरोप में 10 साल रहे शख्स ने बताए 4 बड़े कारण

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भारत में बचत करना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। ज्यादातर परिवार बचपन से ही बच्चों को पैसे संभालकर खर्च करने और भविष्य के लिए बचत करने की सीख देते हैं। नौकरी लगने के बाद भी लोगों की पहली प्राथमिकता अक्सर सेविंग्स बढ़ाना और आने वाले समय के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना होती है। वहीं, यूरोप के कई देशों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली इससे काफी अलग नजर आती है। वहां लोग भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान में खुलकर खर्च करते हुए दिखाई देते हैं।

आखिर दोनों जगहों की सोच में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या इसकी वजह सिर्फ लोगों की मानसिकता है या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है? इसी सवाल का जवाब यूरोप में लंबे समय से रह रहे एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने अपने अनुभव के आधार पर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

  1. इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता

मुकुल के मुताबिक, यूरोप में लोग टैक्स और सोशल सिक्योरिटी के जरिए हेल्थकेयर का लाभ लेते हैं। किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें इलाज के खर्च की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती।

वहीं भारत में कई परिवारों को अस्पताल का खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पैसे बचाकर रखते हैं।

  1. बच्चों की पढ़ाई पर होता है भारी खर्च

उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों में सरकारी स्कूलों में अच्छी और मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली शिक्षा मिल जाती है। जहां भारत में बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, जहां फीस और दूसरे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से बचत करना जरूरी माना जाता है।

  1. रिटायरमेंट के लिए खुद बनाना पड़ता है सहारा

मुकुल का कहना है कि यूरोप में सोशल सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लोगों को भविष्य को लेकर कुछ राहत देती हैं।

जबकि भारत में अधिकतर लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए खुद ही पैसा जोड़ते हैं। नौकरी के दौरान लगातार बचत करने की यही एक बड़ी वजह है।

  1. शादियों पर होता है लाखों का खर्च

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि बड़ा पारिवारिक आयोजन होती है। कई परिवार शादी पर अपनी सालों की बचत खर्च कर देते हैं।

यूरोप में आमतौर पर शादियां काफी सादगी से होती हैं, इसलिए वहां लोगों पर ऐसा आर्थिक दबाव कम होता है।

लोगों ने क्या कहा?

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी।

एक यूजर ने लिखा, “आपकी बातें हमेशा जानकारी बढ़ाने वाली होती हैं।”

दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। खासकर 90 के दशक की पीढ़ी पर ये दबाव ज्यादा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “आपके सभी पॉइंट सही हैं।”

वहीं एक यूजर का कहना था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसकी एक अहम वजह है, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं देना आसान नहीं है।

बचत की आदत के पीछे सिर्फ सोच नहीं, व्यवस्था भी

मुकुल आनंद का मानना है कि भारत और यूरोप के लोगों की बचत की आदत में सबसे बड़ा फर्क उनके देश की व्यवस्था से आता है। जहां यूरोप में कई जरूरी खर्चों का बोझ सरकार और सोशल सिक्योरिटी सिस्टम संभाल लेते हैं, वहीं भारत में लोगों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद पहले से आर्थिक तैयारी करनी पड़ती है।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच 8 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में’गैप-डाउन’ओपनिंग होने की संभावना है। GIFT निफ्टी भी सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। शुरुआती कारोबार में यह इंडेक्स 24,251.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू बाजार के लिए निगेटिव शुरुआत का संकेत है।यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

7 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और लगातार चार सेशन से चली आ रही तेजी का सिलसिला टूट गया। कारोबार के अंत में ये मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच कल बाजार मजबूत शुरुआत के साथ खुला और सेशन के पहले हिस्से में बढ़त बनाए रखी। हालांकि,सेशन के दूसरे हिस्से में प्रॉफिट बुकिंग के कारण दिन भर की सारी बढ़त खत्म हो गई और बाजार बंद होने तक बेंचमार्क इंडेक्स नेगेटिव दायरे में आ गए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 104.35 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 78,180.72 पर और निफ्टी 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 24,398.70 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,251.50 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजार मिले-जुले रुख के साथ कारोबार कर रहे हैं। जापान के निक्केई में 0.43 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.65 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग भी 1.44 फीसदी की बढ़त दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 0.35 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है। कोस्पी 2 फीसदी नीचे दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.09 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

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अमेरिकी बाजार

मंगलवार को वॉल स्ट्रीट की AI के दम पर आई तेजी के बने रहने को लेकर बढ़ते शक के कारण माइक्रोन टेक्नोलॉजी और दूसरी चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई,जिससे नैस्डैक में भारी गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 में 0.45% की गिरावट आई और यह 7,503.85 अंक पर बंद हुआ। नैस्डैक 1.16% गिरकर 25,818.69 अंक पर आ गया,जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.25% गिरकर 52,925.15 अंक पर बंद हुआ। गिरावट से पहले,डॉव ने सेशन के दौरान कुछ समय के लिए रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी।

डॉलर इंडेक्स

बुधवार को एशिया में ट्रेडिंग की शुरुआत में डॉलर अधिकांश दूसरी करेंसी के मुकाबले इस हफ्ते के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बना रहा। अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले किए,जिससे जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ गया और तेल की कीमतें ऊपर चली गईं हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.13 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है। ये क्रमशः 4.55% और 4.18% पर हैं।

एशियन करेंसी

US डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी कमजोर हुईं हैं। डॉलर की नई मांग का असर क्षेत्र की दूसरी करेंसी पर पड़ा हैं। मलेशियन रिंगित सबसे कमजोर दिख रही है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद फिलीपीन पेसो,जापानी येन और थाई बहत का नंबर है। वहीं,इंडोनेशियाई रुपिया ने डॉलर के मुकाबले 0.08 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है।

कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका द्वारा ईरान में नए हवाई हमले करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के बाद ईरान को वैश्विक स्तर पर तेल बेचने की अनुमति देने वाली छूट को रद्द करने के बाद,ब्रेंट क्रूड 2% बढ़कर $76 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

गोल्ड

सोने की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। ईरान पर अमेरिका के नए हवाई हमलों ने उस अंतरिम समझौते को खतरे में डाल दिया है जिसका मकसद युद्ध खत्म करना था। इस युद्ध ने महंगाई बढ़ाई है और ब्याज दरें बढ़ने की संभावना पैदा की है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.08 फीसदी की मामूली तेजी आई है। वहीं,चांदी में 0.16 फीसदी की हल्की बढ़त है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

7 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और 393 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने 383 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

लारेंस-गोल्डी गैंग पर FBI का पहली बार बड़ा एक्शन:अमेरिका-कनाडा समेत कई देशों में 50 जगह रेड, 24 अरेस्ट, ड्रग-आर्म्स बरामद

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने पहली बार गैंगस्टर लॉरेंस, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया पर बड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार को अमेरिका, कनाडा और यूरोप में संयुक्त एक्शन के दौरान भारत से जुड़े गैंगस्टर्स के 24 साथियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 37 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं, गैंगस्टर लॉरेंस और गोल्डी बराड़ को खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का आरोपी बनाया गया। आरोप है कि दोनों ने मिलकर साजिश रची थी। दावा है कि आरोपियों में रोहित गोदारा और अन्य सहयोगियों के नाम भी शामिल है। आरोप पत्र में बताया गया कि लॉरेंस भारत में जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क को चलाता है और उसके सहयोगी भारत अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप में टारगेट किलिंग और ड्रग तस्करी को अंजाम देते हैं। यूएस फेडरल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वो जल्द ही भारतीय सरकार से लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और एक्टिव पुलिस चीफ पुंदरप्रीत सिंह के औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करेंगे। इसके अलावा एफबीआई ने गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर का इनाम घोषित किया है। FBI ने और क्या खुलासे किए…. 50 जगह रेड, ड्रग्स-हथियार सीज अमेरिकी फेडरल अथॉरिटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अहम खुलासे किए। बताया कि वे इंडिया बेस्ड ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप के खिलाफ कई सालों से इंटरकॉन्टिनेंटल जांच कर रहे थे। इसके तहत उन्होंने कम से कम 2 दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां यूएस, कनाडा और यूरोप में हुई हैं। आरोपियों के खिलाफ कम से कम 50 सर्च वारंट लागू किए गए थे, जिसके बाद हजार किलो नारकोटिक्स ड्रग्स और दर्जनों हथियार सीज किए गए हैं। गैंगस्टर लॉरेंस जेल से चला रहा गैंग यूएस फेडरल सरकार और लॉस एंजेल्स के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी जनरल के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पूरे इंडियन बेस्ड क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क को इंडिया की जेल में बैठा गैंगस्टर लॉरेंस हेड कर रहा है। नॉर्थ अमेरिका में इसके ऑपरेशन गोल्डी बराड़ लीड कर रहा था और यूरोप में सारा काम रोहित गोदारा द्वारा संभाला जा रहा था। माना जाता है कि इन तीनों गैंग लीडरों के बीच अब फूट पड़ गई है और ये एक-दूसरे के विरोधी बन चुके हैं, लेकिन यूएस अथॉरिटीज का कहना है कि ये तीनों अब तक मिलकर काम करते आए हैं।