मेलबर्न में PM मोदी ने किया भारत के GenZ का खास जिक्र, उनके बारे में इंडियन डायस्पोरा को ये अलग ही बात बता गए

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के बाद अब अपने दो दिन के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया में हैं। वहीं इस दौरे के पहले दिन पीएम मोदी ने मेलबर्न मीट्स मोदी प्रोग्राम में 30 हजार भारतीयों को संबोधित किया। उन्होंने कहा- मैं 12 साल में तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया आया हूं, यानी कि मेरी हैट्रिक हो गई है। मेरे आने और ऑस्ट्रेलिया-इंडिया के रिश्तों में सबसे बड़ी भूमिका आप लोगों की है। ये शो हाउसफुल है।

PM मोदी ने किया भारत के GenZ का खास जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों के भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के बदलते वैश्विक स्वरूप और विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प का संदेश दिया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने Gen Z जनरेशन का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि, भारत में आज कल भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड चल रहा है, इसको हमारी Gen Z ड्राइव कर रही है और यहां ऑस्ट्रेलिया में मैंने सुना है कि आपका वीकेंड आस्था और आध्यात्म से भरा रहता है। कहीं किसी के घर भगवान सत्यनारायण की कथा, कहीं गुरुद्वारे में अरदास, कहीं बच्चों द्वारा भांगडा या भरतनाट्यम की प्रस्तुति, कहीं कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए ये समझौते 

इससे पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को ऊर्जा सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ ऑस्ट्रेलिया से भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम के आयात का रास्ता साफ हो गया है। दोनों देशों के बीच कुल 18 समझौते किए गए हैं। पीएम मोदी ने कहा- ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम मिलने से भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मजबूती मिलेगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर भी विकसित करेंगे। कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाया जाएगा, जिससे भारत के गगनयान मिशन को मदद मिलेगी।

पीएम ने कहा, भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता क्रिकेट जैसा है। हमारी मुलाकातें क्रिकेट की तरह होती हैं। एजेंडे में वनडे जैसा फोकस है, फैसले टी-20 की तरह तेजी से होते हैं और हमारी साझेदारी टेस्ट मैच की तरह लंबी और मजबूत है।

बता दें कि, दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन (PACTS) पार्टनरशिप शुरू करने पर सहमति जताई है। इसके तहत दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल रेजिलिएंस जैसे क्षेत्रों में एकसाथ रिसर्च करेंगे।

महाराष्ट्र की उफनती नदी में बहे हजारों LPG सिलेंडर, ‘पुष्पा’ स्टाइल में जान पर खेलकर लूटने लगे लोग!

महाराष्ट्र में भारी मॉनसून बारिश के कारण एक चौंकाने वाली घटना हुई, जिसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बॉटलिंग प्लांट से हजारों LPG सिलेंडर बहकर पातालगंगा नदी में चले गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस घटना के वीडियो में दर्जनों लाल सिलेंडर पानी के बहाव के साथ बहते हुए दिख रहे हैं और स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

यह घटना रायगढ़ ज़िले में स्थित HPCL के पातालगंगा LPG बॉटलिंग प्लांट में हुई, जहां भारी बारिश के कारण प्लांट परिसर में पानी भर गया था। जिला अधिकारियों के अनुसार, प्लांट से लगभग 3,000 LPG सिलेंडर (जिनमें भरे हुए और खाली, दोनों तरह के सिलेंडर शामिल थे) बह गए और तेज बहाव के साथ पातालगंगा नदी में चले गए।

वायरल वीडियो में तेज बहाव वाले पानी में कई लाल सिलेंडर बहते हुए दिखाई दिए, और स्थानीय लोग उन्हें इकट्ठा करने की कोशिश में बाढ़ वाली नदी में उतरते हुए दिखे। X पर किए गए एक पोस्ट में, ज़िला कलेक्टर केशव जावले ने कहा, “भारी बारिश के कारण, HPCL पातालगंगा LPG बॉटलिंग प्लांट (चावने, पनवेल) से लगभग 3,000 LPG सिलेंडर (भरे हुए और खाली) बहकर पातालगंगा नदी में चले गए हैं।”

उन्होंने लोगों से यह भी अपील करते हुए कहा कि वे बहाव की दिशा में मिलने वाले किसी भी सिलेंडर को न छुएं और न ही इकट्ठा करें। पोस्ट में कहा गया, “अगर नागरिकों को ऐसे सिलेंडर मिलें, तो उन्हें अपने पास न रखें और न ही उनका इस्तेमाल करने की कोशिश करें। उन्हें तुरंत HPCL, सबसे नजदीकी HPCL डीलर, तहसीलदार ऑफिस (खालापुर/पेन) या सब-डिविजनल ऑफिसर (पेन) के ऑफिस में जमा कर देना चाहिए।”

ये वीडियो तेजी से वायरल हो गए और कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस घटना पर हैरानी जताई। एक यूजर ने कहा, “होरमुज़ के बंद होने की वजह से भारत में गैस की कोई कमी नहीं है। गैस तो बाढ़ में बहती नदी की तरह बह रही है।” किसी ने लिखा, “तैयारी न होने की हालत।” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “बिल्कुल ‘पुष्पा’ फिल्म जैसा सीन है, बस फ़र्क इतना है कि इसमें चंदन की लकड़ी नहीं, बल्कि LPG सिलेंडर हैं।”

एक और यूज़र ने कहा, “आप सोच भी नहीं सकते कि भारत में क्या-क्या हो सकता है।” एक व्यक्ति ने कहा, “ऐसे समय में जब कई परिवार LPG की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंतित हैं, हजारों सिलेंडरों को बहते हुए देखना अविश्वसनीय लगता है।” इस बीच, एक व्यक्ति ने कहा, “यह नीचे की ओर बसे गांवों के लिए सुरक्षा का बहुत बड़ा खतरा है। रिकवरी का काम बहुत मुश्किल और परेशानी भरा होगा।” एक और व्यक्ति ने कहा, “ये सिलेंडर खतरनाक हैं। लोगों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे इन गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल न करें।”

Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?

The picture shows Avatar Meher Baba, who observed silence continuously for 44 years

Spiritual Guru Merwan Sheriar Irani: अवतार मेहेर बाबा 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और गुरु थे। उनका वास्तविक नाम मेरवान शेरियार ईरानी था। वे प्रेम, करुणा, सेवा और मानव एकता का संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। मेहेर बाबा का सबसे अनूठा संकल्प था कि उन्होंने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया और फिर कभी बोलकर संवाद नहीं किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व/ Silence Day मनाया जाता है।ALSO READ: कब है गुरु पूर्णिमा 2026 में? जानें तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

 

अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

जन्म और मूल नाम: उनका जन्म 25 फरवरी 1894 को पुणे में एक पारसी (ईरानी) परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम मेरवान शेरियर इरानी था। 'मेहेर बाबा' नाम उन्हें उनके शुरुआती शिष्यों ने दिया, जिसका अर्थ है 'दयालु पिता'।

 

आध्यात्मिक यात्रा: जब वे 19 वर्ष के थे, तब उनकी मुलाकात एक प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बाबाजान से हुई, जिन्होंने मेरवान के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत की। इसके बाद वे शिरडी के साईं बाबा, उपासना महाराज, नारायण महाराज और ताजुद्दीन बाबा जैसे महान आध्यात्मिक गुरुओं के संपर्क में आए।ALSO READ: Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होंगे चातुर्मास, 4 महीने के लिए लग जाएगी मंगल कार्यों पर रोक

 

कार्य: उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास 'मेहेराबाद' को अपना मुख्य केंद्र बनाया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों, गरीबों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों, जिन्हें वे 'मस्त' कहते थे की सेवा के लिए कई औषधालय, स्कूल और आश्रम खोले।

 

प्रसिद्ध संदेश: उनका सबसे प्रसिद्ध कथन है: 'I have come not to teach, but to awaken' (उन्होंने अपने प्रसिद्ध 'यूनिवर्सल मैसेज'/ Universal Message में कहा था, मैं यहां सिखाने नहीं, बल्कि जगाने आया हूं) और उनका एक सार्वभौमिक नारा है— 'Don't worry, be happy' (चिंता मत करो, खुश रहो)। 31 जनवरी 1969 को मेहराबाद, अहमदनगर (महाराष्ट्र) में उन्होंने महासमाधि ली। 

 

मौन पर्व (Silence Day) कब मनाया जाता है?

मेहेर बाबा के अनुयायियों और प्रेमियों द्वारा हर साल 10 जुलाई को 'मौन पर्व' के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक गुरु मेहेर बाबा के अनुयायियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया था, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जुलाई को 'मौन दिवस' मनाया जाता है।

 

मौन पर्व क्यों मनाया जाता है?

मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था, जो उनके जीवन के अंत (1969 में देहत्याग) तक यानी 44 वर्षों तक लगातार जारी रहा। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है। 

 

बाबा के मौन रहने और इस पर्व को मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

शब्दों से परे संवाद: मेहेर बाबा का मानना था कि ईश्वर अनादि काल से मौन रहकर काम कर रहा है। इंसानों ने ईश्वर की वाणी यानी शब्दों को समझने के बजाय उन पर विवाद करना शुरू कर दिया। इसलिए उन्होंने कहा कि वे वाणी से नहीं, बल्कि सीधे लोगों के 'हृदय' से संवाद करेंगे।

 

आध्यात्मिक अनुशासन: जब बाबा मौन थे, तो वे शुरू में एक 'अल्फाबेट बोर्ड'/ अक्षर पट्टिका की मदद से और बाद में केवल हाथ के इशारों से बात करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों को सिखाया कि जीभ का मौन दरअसल मन को शांत करने और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने की पहली सीढ़ी है।

 

प्रेम की गहराई: बाबा के शिष्यों के अनुसार, बाबा का कहना था कि जब दो लोग गुस्से में होते हैं तो उनके दिलों की दूरी बढ़ जाती है, इसलिए वे चिल्लाते हैं। लेकिन जब दो लोग गहरे प्रेम में होते हैं, तो वे बहुत धीरे बोलते हैं, और जब प्रेम पराकाष्ठा पर होता है, तो शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ती; केवल मौन ही काफी होता है।

 

मौन पर्व कैसे मनाया जाता है?

हर साल 10 जुलाई को मेहेर बाबा के अनुयायी स्वेच्छा से 24 घंटे (9 जुलाई की आधी रात से 10 जुलाई की आधी रात तक) का पूर्ण मौन व्रत रखते हैं। आज भी इस दिन वे अपनी सामान्य दिनचर्या के काम करते हुए भी किसी शब्द का उच्चारण नहीं करते और ईश्वर के नाम का मानसिक स्मरण करते हैं। उनका प्रमुख आश्रम मेहराबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) में स्थित है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उनके अनुयायी भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में भी बड़ी संख्या में हैं। 

 

अवतार मेहेर बाबा मौन पर्व- FAQs

 

1. अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

वे 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने प्रेम, सेवा और मानव एकता का संदेश दिया।

 

2. मौन पर्व कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है।

 

3. मेहेर बाबा ने मौन कब धारण किया था?

उन्होंने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था।

 

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Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ ने ग्रीन कार्ड वाले जोक की आड़ में US सिटिजनशिप के सवाल को किया इग्नोर, बोले- ‘मैं कुछ नहीं कह रहा’

Diljit Dosanjh: हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, जब एक फैन ने दिलजीत दोसांझ को US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का सुझाव दिया, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। यह कमेंट उस रिपोर्ट के कुछ महीनों बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि एक्टर-सिंगर 2022 से US के नागरिक हैं – एक ऐसा दावा जिसकी न तो दिलजीत ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है और न ही इसका खंडन किया है।

लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद पर बात कर रहे थे, जिसे रिलीज़ होने के 48 घंटों के भीतर ही Zee5 इंडिया से हटा दिया गया था। हालांकि, जब एक फैन ने उन्हें US ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने को कहा, तो दिलजीत ने नागरिकता से जुड़ी अटकलों का सीधे जवाब देने के बजाय उस पल को मजाक में बदल दिया।

प्रशंसक के सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “मैं एक कार्ड लूंगा और उसे हरे रंग से रंग दूंगा।”उन्होंने आगे कहा, “मैं कुछ नहीं कह रहा। सब छोड़कर ये खबर बन जाएगी। ऐसा नहीं होता। दुनिया का नाटक कभी खत्म नहीं होगा। लेकिन मेरा मानना ​​है कि हर किसी को बिना वीजा के किसी भी देश की यात्रा करने की अनुमति होनी चाहिए। पूरी दुनिया को एक हो जाना चाहिए। मैं ठीक हूं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है, है ना?”

यह बात इसलिए खास थी क्योंकि यह दिलजीत की नागरिकता के स्टेटस को लेकर चल रही अटकलों के बीच कही गई थी। इस साल की शुरुआत में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया था कि दिलजीत ने 2022 में अमेरिकी नागरिकता ले ली थी और 1 सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे हैं। एक्टर-सिंगर ने इस रिपोर्ट पर सार्वजनिक रूप से कोई बात नहीं की है।

फैन ने दिलजीत से डोनाल्ड ट्रंप से बात करने को कहा। एक और लाइव सेशन में, एक फैन ने मजाक में दिलजीत से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने और सभी को अमेरिकी नागरिकता दिलाने में मदद करने को कहा। इस सुझाव पर हंसते हुए दिलजीत ने जवाब दिया, “आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं? मैं तो बस एक आर्टिस्ट हूं। मैं उनसे नागरिकता के मुद्दों को हल करने के लिए कैसे कह सकता हूं? उनकी बेटी मुझे फोलो करती है, लेकिन मैंने कभी उनसे भी बात नहीं की है। मैं कभी किसी से कोई फेवर नहीं मांगता। अगर कुछ होना होता है, तो वह होता है। अगर नहीं होना होता, तो नहीं होता।”

दिलजीत के हल्के-फुल्के जवाब ने एक बार फिर नागरिकता की अफवाहों पर सीधे बात करने से बचा लिया, साथ ही यह भी साफ कर दिया कि वह नहीं चाहते थे कि यह बातचीत कोई और हेडलाइन बने। मई में, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट किया कि दिलजीत दोसांझ 2022 में अमेरिकी नागरिक बन गए थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई में जारी किया गया था और वे 1 सितंबर, 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि दिलजीत की पत्नी, संदीप कौर, अमेरिकी नागरिक हैं। अमेरिकी नागरिकता लेने के समय, दिलजीत ने कैलिफ़ोर्निया के एक पॉश इलाके में स्थित पांच बेडरूम वाले बंगले को लिया था। अमेरिकी ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को ‘कानूनी तौर पर स्थायी निवासी’ का दर्जा देता है, जिससे वे बिना किसी अस्थायी वीजा या नियोक्ता (employer) की स्पॉन्सरशिप के, अमेरिका में कहीं भी अनिश्चित काल तक रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और पढ़ाई कर सकते हैं। पात्रता की शर्तें पूरी करने के बाद, यह अमेरिकी नागरिकता पाने का एक जरिया भी बन सकता है।

हालांकि, जो व्यक्ति पहले से ही अमेरिकी नागरिक है, उसे ग्रीन कार्ड की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से, चल रही अटकलों के बीच फैन का सुझाव और दिलजीत का मजाकिया जवाब चर्चा का विषय बन गया। दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ के बारे में बात करने के लिए लाइव आए थे।

OTT पर रिलीज होने से पहले, सेंसर की आपत्तियों के कारण यह फिल्म अटकी हुई थी। दिलजीत ने लोगों से यह फिल्म देखने की अपील की और इसे पंजाब और भारत के इतिहास की एक अहम कहानी बताया। ‘सतलुज’ जसवंत सिंह खालरा की कहानी है। उन्होंने उस दौर में अमृतसर और उसके आस-पास हजारों शवों के कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से अंतिम संस्कार किए जाने का दस्तावेजीकरण किया था, जब पंजाब में उग्रवाद चरम पर था। बाद में खालरा का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई।

Zee5 से फ़िल्म को अचानक हटाए जाने के बाद सेंसरशिप, इतिहास और इस बात पर बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या मानवाधिकारों से जुड़े दस्तावेज़ी मुद्दों पर आधारित कहानियों को भारतीय दर्शकों तक पहुंचने दिया जा रहा है।

₹5 लाख करोड़ की बारिश, Sensex में लौटी तेजी, Nifty उछलकर 24135 पर बंद

Sensex-Nifty closes green: एक कारोबारी दिन पहले ढहते मार्केट में जब सेंसेक्स और निफ्टी 2% से अधिक टूटे थे तो विदेशी निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी दिन ताबड़तोड़ खरीदारी की थी। आज इसका मार्केट पर पॉजिटिव असर दिखा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स इंट्रा-डे में 800 प्वाइंट्स से अधिक उछल गया तो निफ्टी भी 24100 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी आज मार्केट में अच्छी रौनक दिखी और निफ्टी मिडकैप 100 में 1% से अधिक तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में डेढ़ फीसदी से अधिक की तेजी आई।

इस माहौल में ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹5 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹5 लाख करोड़ से अधिक की तेजी आई है।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 238.22 प्वाइंट्स यानी 0.31% की बढ़त के साथ 76,741.82 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 80.75 प्वाइंट्स यानी 0.34% की मजबूती के साथ 23,962.80 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 823.05 प्वाइंट्स उछलकर 77,326.65 और निफ्टी 252.65 प्वाइंट्स चढ़कर 24,134.70 तक आ गया था।

₹5.67 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 08 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,70,67,521.74 करोड़ था। आज यानी 09 जुलाई 2026 को यह घटकर ₹4,76,34,922.98 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹5,67,401.242 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से 20 आज ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज सन फार्मा, बजाज फिनसर्व और भारती एयरटेल में आई। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज मारुति, इंफोसिस और एनटीपीसी में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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111 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4416 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2915 शेयर आज मजबूत हुए तो 1323 में गिरावट रही जबकि 178 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 111 शेयर एक साल के हाई और 79 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

(यह स्टोरी अभी अपडेट हो रही है)

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आज इन वजहों से मार्केट में छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा

Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।

क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को ‘खत्म’ घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर

जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।

US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।

क्या हैं सोने के नए टार्गेट?

डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:

तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।

मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।

भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने का आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि ‘निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।’ शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

राम मंदिर के बाद अब विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर का चढ़ावा गायब? आरोप लगे तो कलेक्टर प्रीति यादव ने उठाया ये कदम

अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े विवाद के बीच अब मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी शक्तिपीठ में भी दान और चढ़ावे के कथित गबन का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद आगर-मालवा कलेक्टर प्रीति यादव ने जांच कमेटी बना दी। 7 दिन में कमेटी रिपोर्ट पेश करेगी कि गड़बड़ी कहां, कितने की और कैसे की गई? जानकारी के मुताबिक, सरकारी समिति होने के बावजूद अफसरों की मिलीभगत से साल 2024 में फर्जी तरीके से एक प्राइवेट समिति बना दी गई। जिसका नाम रखा- ‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’।

सामने आया एक और दान घोटाला

वहीं मां बगलामुखी मंदिर में सामने आए कथित दान घोटाले की जांच के लिए प्रशासन ने एक जांच समिति बनाई है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर में दान लेने के नाम पर गड़बड़ी और पैसों के गलत इस्तेमाल के आरोपों की जांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि मंदिर का संचालन एक सरकारी समिति करती है, लेकिन आरोप है कि मंदिर परिसर में एक अनधिकृत समिति भी काम कर रही थी। यह समिति नकली रसीदें देकर श्रद्धालुओं से नकद और कीमती गहनों के रूप में दान ले रही थी।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अयोध्या के राम मंदिर में मिले दान की कथित चोरी को लेकर भी विवाद चल रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी पर लगातार सवाल उठा रही है।

जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति

आगर मालवा की जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने 7 जुलाई 2026 को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) बी. एस. सोलंकी करेंगे। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर के आदेश के अनुसार, शिकायत मिली है कि एक गैर-सरकारी समिति मंदिर की आधिकारिक समिति से अलग श्रद्धालुओं से दान इकट्ठा कर रही थी। आरोप है कि इस समिति ने दान की रकम निजी बैंक खातों में जमा की और वित्तीय गड़बड़ी की। जांच समिति यह पता लगाएगी कि अनधिकृत लोगों ने कितना नकद और कितने कीमती गहने दान के रूप में लिए। साथ ही यह भी जांच होगी कि इस कथित गड़बड़ी में मंदिर प्रशासन का कोई कर्मचारी या अधिकारी शामिल था या नहीं।

बड़ी रकम की आशंका, सरकार ने सख्त कार्रवाई के दिए संकेत

अधिकारियों के मुताबिक, इस कथित दान घोटाले में कितनी रकम की गड़बड़ी हुई है, इसका अभी पूरा हिसाब नहीं लगाया गया है। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला काफी बड़ा हो सकता है, क्योंकि यह पूरी तरह संगठित तरीके से चल रहा था। आरोप है कि नकली रसीदें और अलग काउंटर बनाकर श्रद्धालुओं से नकद और गहनों के रूप में दान लिया जा रहा था। मध्य प्रदेश के संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि उन्हें 7 जुलाई 2026 को इस मामले की जानकारी मिली थी। इसके बाद उनके कार्यालय ने जिला कलेक्टर को तुरंत जांच के निर्देश दिए।

धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि कुछ लोग, जिनका मंदिर प्रशासन से कोई संबंध नहीं था, मंदिर के नाम पर रसीदें छपवाकर श्रद्धालुओं से अवैध तरीके से पैसे वसूल रहे थे। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी।

गौतम गंभीर की कोचिंग के 2 साल पूरे हुए, क्या खोया क्या पाया?

गौतम गंभीर जबसे टीम  इंडिया के कोच बने तबसे वह आलोचना और तारीफ दोनों को पा रहे हैं। वह कभी भी सुर्खियों से गायब नहीं हुए। आज ही 2 साल पहले गौतम गंभीर भारतीय टीम के मुख्य कोच बने थे। इन 2 सालों में काफी कुछ बदला है। नजर डालते हैं गौतम गंभीर की उपलब्धियों और नाकामियों पर –

सफेद गेंद के सफलतम भारतीय कोच

गौतम गंभीर पहले ऐसे भारतीय कोच हो गए हैं जिनकी कोचिंग में भारत ने 2 आईसीसी खिताब अपने नाम किए। पहले चैंपियन्स ट्रॉफी 2025 और अब टी-20 विश्वकप 2026। भारत ने इस साल टी-20 विश्वकप के फाइनल में  में बेजोड़ प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर अपना तीसरा टी20 विश्व कप खिताब जीता।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ ही भारतीय टीम ने दुबई में खेले गए चैंपियन्स ट्रॉफी 2025 फाइनल में जीत हासिल की थी। तब भी कोच गौतम गंभीर ही थे। हालांकि उन्हें सिर्फ 6 महीने से ज्यादा का समय हुआ था।लेकिन खास बात यह थी कि टीम ने बिना कोई मैच गंवाई चैंपियन्स ट्रॉफी जीती थी। चैंपियन्स ट्रॉफी से पहले टीम इंडिया ने इंग्लैंड को भी 3-0 से अपने घर पर हराया था।

हालांकि इस सिक्के के कुछ पहलू भी है। गौतम गंभीर ने रोहित शर्मा से लेकर शुभमन गिल और सूर्यकुमार यादव से लेकर श्रेयस अय्यर की कप्तानी में कोचिंग की। गौतम गंभीर ने श्रीलंका दौरे से शुरुआत की जहां टीम इंडिया टी-20 सीरीज तो 3-0 से जीती लेकिन 27 साल बाद पहली बार 2-0 से श्रीलंका से एकदिवसीय सीरीज हार गई। भारत को इसकेे बाद दक्षिण अफ्रीका से एकदिवसीय सीरीज में जीत मिली।

हाल ही में भारत को ऑस्ट्रेलिया से एकदिवसीय सीरीज 2-1 से गंवानी पड़ी वहीं न्यूजीलैंड से घर पर भारत को 2-1 से सीरीज गंवानी पड़ी।

3 साल बाद यह भारत को घरेलू धरती पर सीरीज गंवानी पड़ी। इसमें अंतिम मैच इंदौर में था जहां पहली बार भारत एकदिवसीय मैच हारा। वहीं हाल फिलहाल में आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से भारत ने सीरीज गंवाई। आयरलैंड से सीरीज गंवाने वाले गौतम गंभीर पहले भारतीय कप्तान बने।

एकदिवसीय मैचों में उनका जीत प्रतिशत 67 प्रतिशत है। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने 15 मुकाबले जीते और 7 हारे। इनमें से एक का नतीजा नहीं आया था। वहीं टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में गंभीर का प्रदर्शन लाजवाब रहा है। टीम ने 50 मैचों में से 37 जीते हैं और सिर्फ 10 हारे हैं। एक मैच का नतीजा नहीं आया था। इस कारण गंभीर का जीत प्रतिशत टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 77 का रहा है।

भारतीय टेस्ट टीम 2 बार हुई वाइटवॉश, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल चूकी

पिछले साल दक्षिण अफ्रीका ने गुवाहाटी में भारत को 2-0 से हराकर टेस्ट श्रृंखला अपने नाम की जिससे मेजबान टीम को मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में तीसरी टेस्ट श्रृंखला में हार का मुंह देखना पड़ा। इस तरह गंभीर का 16 महीने का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा।

इस दौरान भारत को घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड से 0-3, ऑस्ट्रेलिया से उसकी सरजमीं पर 1-3 से और अब घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका से 0-2 से हार मिली।इंग्लैंड दौरे पर जरूर मिंया मैजिक के कारण सीरीज बराबर हुई लेकिन वहां भी टीम इंडिया 2 टेस्ट मैच हारी।

इससे गंभीर का बतौर कोच टेस्ट कोचिंग रिकॉर्ड 19 मैच में सात जीत, 10 हार और दो ड्रॉ है जिसमें जीत का प्रतिशत महज 36.82 है।वह केवल डंकन फ्लेचर से आगे हैं जिनकी जीत का प्रतिशत 33.33 (39 टेस्ट में 13 जीत, 17 हार, 9 ड्रॉ) रहा है।वहीं 21वीं सदी में भारतीय जमीन पर उनका बतौर टेस्ट क्रिकेट कोच सबसे खराब रिकॉर्ड हो चुका है। वह इस दौरान पहले ऐसे कोच हैं जिनकी हार ज्यादा है और जीत कम है।

IMD का बारिश पर बड़ा अलर्ट: यूपी-उत्तराखंड 2 दर्जन से ज्यादा राज्यों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी, 15 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weather Update: इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून के असर की वजह से जबर्दस्त बारिश हो रही है। मूसलाधार बारिश ने कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं और कई लैंडस्लाइड देखने को मिली हैं। इस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ते हुए आज 9 जुलाई को उत्तरी अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों को पूरी तरह कवर कर लिया है। इसके साथ ही मानसून ने सामान्य तिथि (8 जुलाई) से महज 1 दिन की देरी से 9 जुलाई को पूरे देश में अपनी दस्तक दे दी है। पूरे भारत में मानसून के सक्रिय होने के चलते भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत दो दर्जन से अधिक राज्यों के लिए 15 जुलाई तक भारी से बेहद भारी बारिश और आंधी-तूफान का बड़ा अलर्ट जारी किया है।

इन राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का हाई अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटों के भीतर कुछ राज्यों में बादलों का सबसे रौद्र रूप देखने को मिलेगा। यहां अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है:

  1. उत्तराखंड: 9 और 10 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट।
  2. पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 9 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट।
  3. देश भर के राज्यों का विस्तृत क्षेत्रीय पूर्वानुमान (9 से 15 जुलाई)
  4. उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-उत्तराखंड में लगातार बरसेंगे बादल

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 9 से 11 जुलाई और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 9 से 13 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। पश्चिमी यूपी में 9 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 10 जुलाई को बहुत भारी और 11 जुलाई को भारी बारिश होगी। पूर्वी यूपी में 9 से 11 जुलाई तक बहुत भारी बारिश और 12-13 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। 9 जुलाई को दोनों हिस्सों में बिजली कड़कने की चेतावनी है।

  • उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 9 से 15 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तराखंड में 9-10 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश के बाद 11 से 15 जुलाई तक लगातार भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है।
  • दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 9-10 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। यहां 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 10 से 13 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है। पंजाब में 9 जुलाई को व्यापक बारिश के साथ ही 9 जुलाई और 11-12 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है।
  • जम्मू-कश्मीर और राजस्थान: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 9-12 जुलाई तक व्यापक बारिश, भारी बारिश (11-12 जुलाई) और 15 जुलाई तक 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है। पूर्वी राजस्थान में 9 जुलाई को भारी बारिश और 9-10 जुलाई को गरज-चमक की स्थिति रहेगी।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आंधी-तूफान का अलर्ट

मध्य प्रदेश: पश्चिमी मध्य प्रदेश में 9 जुलाई को और पूर्वी मध्य प्रदेश में 9-10 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। इन दोनों क्षेत्रों में 9 से 13 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है। पश्चिमी हिस्से में 9 जुलाई को और पूर्वी हिस्से में 9-10 जुलाई को भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 9 जुलाई और फिर 13-15 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा होगी जबकि 9 जुलाई को भारी बारिश और 9-13 जुलाई तक बिजली चमकने का अलर्ट है। विदर्भ में 9 जुलाई और 14-15 जुलाई को व्यापक बारिश होने के आसार हैं।

पूर्वी भारत: बिहार और बंगाल में बहुत भारी बारिश की मार

बिहार: बिहार में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 10 से 11 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी, जिससे 10-12 जुलाई के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 9-10 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 11-15 जुलाई को भारी बारिश होगी। गांगेय पश्चिम बंगाल में 9 से 13 जुलाई तक भारी बारिश और 9-10 जुलाई को तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

झारखंड और ओडिशा: झारखंड में 12-15 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी, जबकि 13 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। ओडिशा में 13-14 जुलाई के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है।

पूर्वोत्तर भारत: असम और अरुणाचल में 15 जुलाई तक आफत

असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 9 और 10 जुलाई को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इसके बाद 11 से 15 जुलाई के दौरान इन क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन राज्यों में 9 से 15 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी, जिसमें 9 से 11 जुलाई के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

पश्चिमी भारत: कोंकण और गोवा में मूसलाधार जारी

कोंकण और गोवा: इस क्षेत्र में 9 से 15 जुलाई तक लगातार व्यापक और भारी बारिश का दौर बना रहेगा। यहां 9 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है।

मध्य महाराष्ट्र और गुजरात: मध्य महाराष्ट्र में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 10 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। गुजरात क्षेत्र, मारूवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में 15 जुलाई तक छिटपुट से लेकर व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तेलंगाना में थंडरस्कॉल का अलर्ट

तेलंगाना: तेलंगाना में 9 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से भयानक आंधी-तूफान आने की चेतावनी दी गई है। 10 से 15 जुलाई तक यहां तेज हवाएं चलेंगी।

केरल और कर्नाटक: केरल व माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 9 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 10 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। तटीय कर्नाटक में 9-15 जुलाई तक व्यापक बारिश और 9-10 जुलाई को भारी बारिश होगी। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 9 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है।

तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल: यहां 9-10 जुलाई को भारी बारिश होगी और 9-10 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।