शहर की नौकरी छोड़ पहाड़ों में बसे पति-पत्नी! 4BHK मकान, फ्री पानी और ₹50 हजार के खर्च का ब्रेकडाउन वायरल

शहर की तेज रफ्तार जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच रहना सुनने में जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही दिलचस्प है यह जानना कि वहां रोजमर्रा की जिंदगी कितने खर्च में चलती है। हिमाचल प्रदेश के मनाली के पास रहने वाले दिव्या भट्ट और सौरभ यादव ने अपनी पहाड़ी जिंदगी की झलक सोशल मीडिया पर साझा की है। दोनों ने गजान गांव में अपना ठिकाना बनाया है और साथ ही होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने अपने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में रहते हुए उनका महीने का खर्च करीब ₹50 हजार आता है।

इस बजट में घर का राशन, बाहर खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च शामिल हैं। खास बात यह है कि आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती ही उनके लिए मनोरंजन का बड़ा जरिया है, इसलिए कई आउटिंग पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता। अब उनका यह सादा लेकिन खूबसूरत लाइफस्टाइल इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

मनाली के पास गांव में बसाया घर

दिव्या और सौरभ ने हिमाचल प्रदेश के गजान गांव को अपना ठिकाना बनाया है। यह गांव मनाली के पास हिमालयी इलाके में स्थित है। दोनों यहां रहते भी हैं और एक होमस्टे भी चलाते हैं। दिव्या ने इंस्टाग्राम पर ‘Living in the Mountains, Episode 1’ नाम से वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने पहाड़ों में अपनी जिंदगी और हर महीने होने वाले खर्च का हिसाब बताया।

1BHK का किराया करीब ₹15 हजार

कपल जिस 4BHK प्रॉपर्टी में रहता है, उसका इस्तेमाल उनके होमस्टे से भी जुड़ा है। इसलिए उनका रहने का खर्च सामान्य किरायेदार से अलग है। दिव्या के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ रहने के लिए मनाली के पास घर किराए पर लेना चाहता है, तो 1BHK का किराया करीब ₹15,000 और 2BHK का करीब ₹25,000 तक हो सकता है।

घर का खाना, फिर भी ₹15 हजार का फूड बजट

पहाड़ों में रहने के बावजूद कपल खाने पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करता। दोनों ज्यादातर खाना घर पर ही बनाते हैं। दिव्या के मुताबिक, उनकी महीने की ग्रॉसरी करीब ₹10,000 आती है। इसके अलावा बाहर खाने-पीने पर करीब ₹5,000 खर्च हो जाते हैं।

छोटी दूरी के लिए गाड़ी नहीं, पैदल सफर

गांव में रहने का एक फायदा यह भी है कि रोजमर्रा के कई छोटे काम पैदल ही हो जाते हैं। दिव्या ने बताया कि दोनों स्थानीय स्तर पर ज्यादातर जगह पैदल जाते हैं। इसके बावजूद गाड़ी के ईंधन पर करीब ₹3,000 प्रति महीने खर्च हो जाता है।

पानी का बिल जीरो, बिजली करीब ₹1,000

यूटिलिटी खर्च की बात करें तो कपल के लिए पानी पर कोई मासिक खर्च नहीं है। दिव्या के अनुसार, पानी मुफ्त है। वहीं बिजली का बिल करीब ₹1,000 प्रति महीने आता है।

पहाड़ों में घूमना भी बजट में शामिल

पहाड़ों में रहने का सबसे बड़ा फायदा शायद यही है कि घूमने के लिए महंगी जगहों की जरूरत नहीं पड़ती। आसपास प्रकृति आसानी से उपलब्ध है, इसलिए कपल की ज्यादातर आउटिंग मुफ्त ही होती हैं। फिर भी अपने छोटे-मोटे माउंटेन एडवेंचर पर करीब ₹3,000 महीने का खर्च हो जाता है।

करीब ₹50 हजार में पूरा महीना

दिव्या के मुताबिक, ग्रॉसरी, बाहर का खाना, ईंधन, बिजली और घूमने-फिरने जैसे खर्च जोड़ने पर दोनों का कुल मासिक खर्च करीब ₹50,000 बैठता है। हालांकि, उनका रहने का इंतजाम होमस्टे बिजनेस से जुड़ा है, इसलिए यह खर्च ऐसे व्यक्ति से अलग होगा जो सिर्फ अपने रहने के लिए घर किराए पर लेता है।

लोगों को पसंद आई पहाड़ों वाली जिंदगी

वीडियो सामने आने के बाद लोगों का ध्यान सिर्फ ₹50 हजार के बजट पर नहीं गया, बल्कि कपल की शांत जिंदगी ने भी खूब आकर्षित किया। एक यूजर ने पहाड़ों के नजारे को जिंदगी का ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ बताया। वहीं कई लोगों ने कहा कि असली लग्जरी पैसा नहीं, बल्कि ऐसी जगह मिलने वाला सुकून और शांति है।

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2026 Hyundai Exter Knight edition launched at Rs 8.14 lakh

2026 Hyundai Exter Knight edition launched at Rs 8.14 lakh
2026 Hyundai Exter Knight edition front quarter static

Hyundai has launched the 2026 Exter Knight edition, with prices starting from Rs 8.14 lakh (ex-showroom). It is available with all petrol and CNG variants of the HX 6, and the petrol-AMT variant of the HX 10 trim. The Exter Knight gets additional black exterior design elements and an all-black cabin at an additional Rs 15,000.

  1. Sports black logos and alloys, and red front brake callipers
  2. Gets an all-black cabin with black fabric seat upholstery
  3. Available in five exterior colour options

Notably, the Knight edition is not new to the Exter, having first been introduced in July 2024. This time around, however, Hyundai is offering the Knight edition with the facelifted Exter, which was launched in March 2026.

2026 Hyundai Exter Knight edition: Prices

Knight edition costs Rs 15,000 more than the standard variants

2026 Hyundai Exter Knight edition prices compared with standard model

Variant

Knight edition price

Standard model price

Difference

HX 6 petrol MT

Rs 8.14 lakh

Rs 7.99 lakh

+ Rs 15,000

HX 6 petrol AMT

Rs 8.74 lakh

Rs 8.59 lakh

+ Rs 15,000

HX 6 CNG MT

Rs 9.10 lakh

Rs 8.95 lakh

+ Rs 15,000

HX 10 petrol AMT

Rs 9.61 lakh

Rs 9.46 lakh

+ Rs 15,000

The Hyundai Exter Knight edition costs Rs 15,000 more than the standard variants, like the dual-tone Ranger Khaki colour option offered with the SUV.

2026 Hyundai Exter Knight edition: What’s new?

Gets some black and dark grey elements outside

While the overall silhouette of the Exter Knight edition is identical to the standard model, Hyundai has added dark elements to give a sportier look to the SUV. These include blacked-out Hyundai logos and Exter lettering at the front and rear, and dark grey garnish on the front and rear bumpers. The Exter Knight gets the same 15-inch rims, but with a black or dark grey finish, depending on the variant. To add contrast, Hyundai has equipped it with red brake callipers on the front wheels. At the rear, it gets a ‘Knight’ badge on the tailgate.

The Exter Knight edition is available in five exterior shades: Titanium Black, Atlas White, Starry Night, Titan Grey and Golden Bronze. Notably, it is not available in the Ranger Khaki colour option, which is offered with the standard model.

Gets an all-black cabin theme with brass accents

Inside, the Exter Knight’s dashboard design is the same as the standard model, but it gets an all-black finish with brass-coloured accents, compared to the standard model’s navy and grey interior theme. It also gets amber-coloured footwell lighting, which is blue on the standard variants. The seats on the Knight edition feature black fabric upholstery. 

Standard Exter’s dashboard is shown for representational purposes only. 

The feature suite is the same as the corresponding variants – the HX 6 gets an 8-inch touchscreen infotainment system, a single-pane sunroof, powered outside rearview mirrors (ORVMs), automatic climate control with rear vents, and a rear parking camera with sensors. The HX 10 adds a wireless phone charger, a cooled glovebox, connected car technology, and a rear wiper and washer to the feature mix. 

Available with the same 83hp petrol and 69hp CNG engine options

As mentioned earlier, the Exter Knight is offered with a 1.2-litre petrol engine that produces 83hp and 114Nm, and a CNG option that puts out 69hp and 95Nm. The petrol engine gets an option between a 5-speed manual and a 5-speed automated manual transmission (AMT), while the CNG is available only with the manual gearbox. 

FSSAI bans plastic: पान मसाला और गुटखा छोटे प्लास्टिक पाउच में नहीं आएगा! नया नियम लागू होने पर जानें कैसे बिकेगा माल

FSSAI bans plastic: पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के लिए पैकेजिंग को लेकर सरकार की तरफ से एक बड़ा बदलाव किया गया है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक, एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। नए नियमों के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़ेगा। FSSAI ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026’ का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसी के साथ अब ये नियम लागू हो गए हैं।

नए नियमों के तहत पान मसाला को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018 की शेड्यूल 4 में शामिल किया गया है। यह शेड्यूल अलग-अलग खाद्य उत्पादों के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली अनुमत पैकेजिंग सामग्री तय करता है।

अब किन चीजों से पैक हो सकेगा पान मसाला?

नए नियमों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। इन प्राकृतिक या कागज आधारित सामग्रियों में किसी भी तरह का प्लास्टिक मौजूद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा पैकेजिंग में एल्युमिनियम फॉयल या किसी भी तरह की मेटलाइज्ड लेयर भी नहीं हो सकती। यानी केवल बाहर से कागज दिखाई देने वाली पैकेजिंग भी नियमों के दायरे से बाहर नहीं होगी। अगर उसके अंदर प्लास्टिक या धातु की छिपी हुई परत लगी है तो ऐसी पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी।

पॉलीथीन से लेकर PVC तक पर रोक

FSSAI ने प्रतिबंध को काफी व्यापक रखा है। पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और अन्य सिंथेटिक पॉलिमर, कोपॉलिमर या लैमिनेट जैसी सामग्रियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा असर उन पैकेजिंग फॉर्मेट पर पड़ेगा जिनमें कई परतों वाली प्लास्टिक या मेटल-कोटेड सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसी पैकेजिंग का इस्तेमाल आम तौर पर उत्पाद को नमी से बचाने, उसकी खुशबू बनाए रखने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब पान मसाला उद्योग को इन सुविधाओं के लिए प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।

टिन और कांच के डिब्बे बनेंगे विकल्प

FSSAI ने पान मसाला के लिए टिन और कांच के कंटेनर के इस्तेमाल की भी अनुमति दी है। इस बदलाव के बाद कंपनियों को अपनी पैकेजिंग तकनीक और डिजाइन पर दोबारा काम करना पड़ सकता है। इस तरह कंपनियों के सामने अब मुख्य रूप से दो तरह के विकल्प होंगे:-

  • पहला पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त प्राकृतिक सामग्री से बनी पैकेजिंग
  • जबकि दूसरा टिन या कांच के कठोर कंटेनर में हुई पैकेजिंग

कागज की पैकिंग में भी छिपा प्लास्टिक नहीं चलेगा

नए नियमों में पैकेजिंग के एक ऐसे तरीके को भी स्पष्ट किया गया है, जो लंबे समय से उद्योग में इस्तेमाल होता रहा है। कई उत्पादों की पैकिंग ऊपर से कागज जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या एल्युमिनियम की परत लगी होती है। अब ऐसी कंपोजिट पैकेजिंग की अनुमति नहीं होगी, अगर उसमें प्रतिबंधित सामग्री मौजूद है। यानी केवल पैकेजिंग का बाहरी हिस्सा कागज का होना पर्याप्त नहीं होगा। पूरी पैकेजिंग को निर्धारित मानकों के अनुरूप होना पड़ेगा।

छोटे निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती

नए नियमों का सबसे बड़ा असर उन निर्माताओं पर पड़ सकता है जो लंबे समय से फ्लेक्सिबल और मल्टी-लेयर पैकेजिंग पर निर्भर हैं। कंपनियों को अब अपनी सप्लाई चेन, पैकेजिंग सामग्री की खरीद, डिजाइन और पैकेजिंग तकनीक की समीक्षा करनी होगी। विशेष रूप से छोटे निर्माताओं के लिए प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग की ओर बदलाव करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें नई सामग्री और पैकेजिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पड़ेगी।

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम भी जोड़े गए

FSSAI के संशोधन में स्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से जुड़े प्रावधानों को भी फूड पैकेजिंग व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन प्रावधानों के तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को रखने, पैक करने या बेचने के लिए प्लास्टिक के सैशे के इस्तेमाल पर पहले से लागू प्रतिबंधों को मजबूत किया गया है। नियमों में इन उत्पादों के लिए किसी भी रूप में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को भी दोहराया गया है। इस तरह, सरकार ने पान मसाला की पैकेजिंग से जुड़े पर्यावरण नियमों के साथ फ़ूड सेफ़्टी के नियमों को भी एक जैसा कर दिया है।

अप्रैल में शुरू हुई थी नियम बदलने की प्रक्रिया

इन बदलावों की प्रक्रिया इसी साल अप्रैल में शुरू हुई थी। 28 अप्रैल को FSSAI ने प्रस्तावित संशोधनों का ड्राफ्ट जारी किया था। इस ड्राफ्ट में पान मसाला को शेड्यूल 4 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से पैकेजिंग की अनुमति देने की बात कही गई थी।

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लेकिन शर्त थी कि इनमें प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर या मेटल की परत नहीं होनी चाहिए। ड्राफ्ट में टिन और कांच को भी पैकेजिंग के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद संबंधित पक्षों और उद्योग से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद FSSAI ने 10 अगस्त को अंतिम संशोधन अधिसूचित कर दिए।

Yokohama launches Geolandar X-CV tyre range

Yokohama launches Geolandar X-CV tyre range
Yokohama

Yokohama India has launched the Geolandar X-CV tyre range for crossover and premium SUVs. Originally developed for larger luxury SUVs, the locally manufactured Geolandar X-CV is now being offered in 16-inch wheel sizes for the first time, expanding its reach to compact and midsize SUVs. The range will eventually be available in 32 sizes spanning 16 to 20 inches, with 17 sizes available immediately and the remaining 15 sizes set to be introduced over the next two to three months. Yokohama claims the new tyre delivers 20 percent better wet grip and 10 percent longer tyre life than its conventional tyre, based on the company’s internal testing.

  1. Available in 32 sizes from 16-20 inches
  2. Claimed 20 percent better wet grip and 10 percent longer tyre life
  3. 17 sizes available now; remaining to follow 

Yokohama Geolandar X-CV: what does it fit?

The Geolandar X-CV has been developed for a wide range of crossover and premium SUVs. Yokohama says it is suitable for compact and midsize models such as the Maruti Suzuki Brezza, Kia Sonet, Tata Nexon EV, Harrier EV, Mahindra XUV700 and Kia Seltos, while also catering to luxury SUVs including the BMW X5, Porsche Cayenne, Volvo XC90, Mercedes-Benz GLS, Audi Q7 and Range Rover models.

Yokohama Geolandar X-CV: features

According to Yokohama, the Geolandar X-CV has been developed to meet the requirements of crossover SUVs and electric vehicles. It features an asymmetric tread pattern, four wide circumferential grooves, Micro Silica compound, 2D and 3D sipes, five-pitch variation technology, a reinforced two-ply sidewall and a full nylon cover. The company says these technologies are designed to improve wet grip, cornering stability, braking performance, wear characteristics, durability, high-speed stability and cabin refinement.

The tyre is also EV-compatible, with its construction designed to handle the higher weight and instant torque characteristics of electric SUVs while maintaining durability and driving refinement. The Geolandar X-CV will be available from August 2026 through Yokohama Club Network outlets and select authorised dealers, with a no-cost EMI offer available at launch.

Yamaha R2 pre-bookings now open

Yamaha R2 pre-bookings now open
Yamaha R2 pre-bookings now open

Yamaha has started accepting pre-bookings for an amount of Rs 10,000, for its much anticipated R2 supersport that is slated to launch on August 27. Here’s a rundown of all the things we know so far about the newest Yamaha on the block

  1. Yamaha R2 could be priced between Rs 2 lakh – 2.20 lakh
  2. To be powered by a 200-220cc engine
  3. Will sit above the R15 M in Yamaha’s lineup

Yamaha R2: What to expect?

Will rival the Hero Karizma XMR and KTM RC 200

We exclusively reported early this year that the R2 will be launched in India. It will carry forth the same spirit of its younger sibling – the R15 – in terms of its riding experience. Which means, it’s safe to say that it will be powered by a high-revving, higher displacement, single-cylinder engine that will punch well above its weight, much like the R15’s, delectable 155cc engine does. 

Details on the exact engine capacity are not yet clear, but we expect it to be slightly over 200cc, likely in the 200-220cc range. Power figures are also yet to be confirmed, although sources suggest performance should be on par with, if not better than, its key rivals. The Yamaha will go up against the KTM RC 200 and Hero Karizma XMR, both of which produce around 25hp, suggesting the Yamaha could offer a similar output. 

Where the R15 also holds an advantage, and where the R2 is likely to as well, is kerb weight. It is expected to be lighter than its rivals, which should give it an advantage in terms of agility and power-to-weight ratio. For example, the KTM weighs 160kg, the Karizma 163.5kg, while the current Yamaha R15 V4 weighs in at just 141kg.

As mentioned earlier, the Yamaha R2 will not replace the Yamaha R15. That said, the current R15 line-up will be streamlined, and we expect that the range topping M will be discontinued to make way for the R2. It’s also possible that the current R15 S (which is based on the gen-3 R15) will also be discontinued.

With current R15 prices starting at Rs 1.57 lakh for the S and going up to Rs 1.98 lakh for the top M variant, we expect that the R2 range could start at around Rs 2-2.2 lakh, depending on how aggressive Yamaha plans to be. The R2 will be manufactured entirely in India and will also be exported from here to other global markets.

The pre-booking amount of Rs 10,000 is fully refundable, although refunds will only be processed after September 5. The bike is slated to launch on August 27, with Yamaha giving priority to customers who pre-book before the launch.

Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

HDFC Bank Share Price : स्टॉक ने हिट किया 52 हफ्तों का नया लो, जानिए कब तक कायम रहेगा यह दबाव

HDFC Bank Share Price : एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज भी गिरावट देखने को मिल रही है। आज के कारोबारी सत्र में इसने 52 वीक का नया लो बनाया है। फिलहाल 12.45 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 6.15 रुपए यानी 0.84 फीसदी की कमजोरी के साथ 722 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 722 रुपए है। आज यह शेयर 729 रुपए पर खुला था। वहीं, कल की इसकी क्लोजिंग भी 729 रुपए ही थी। टेक्निकल नजरिए से देंखें तो इस स्टॉक में नेगेटिव प्राइस ब्रेकआउट देखने को मिला है। यह अभी अपने दूसरे सपोर्ट लेवल (S2) से नीचे ट्रेड कर रहा है। इसका दूसरा सपोर्ट लेवल ₹733.10 पर है।

एक्सचेंज पर उपलब्ध आंकड़ो से पता चलता है कि HDFC बैंक के शेयर अपने पिछले निचले स्तर ₹726.75 से भी नीचे गिर गए हैं, जो इसने 2 अप्रैल, 2026 को छुआ था। यह स्टॉक मई 2024 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसने 23 अक्टूबर, 2025 को ₹1,020.35 का 52-हफ़्ते का हाई छुआ था।

कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक, BSE सेंसेक्स में 8.2 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, इसी अवधि में HDFC बैंक में 27 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे में इसका प्रदर्शन बाजार के मुकाबले कमजोर रहा है।

FPIs ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाई

एचडीएफसी बैंक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने लगातार पांचवीं तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम की है। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2026 तिमाही के आखिर में HDFC बैंक में FPI की हिस्सेदारी घटकर 41.83 फीसदी हो गई, जो मार्च 2026 तिमाही के आखिर में 44.05 फीसदी थी। दिसंबर 2025 तिमाही में इस प्राइवेट सेक्टर के बैंक में FPI की हिस्सेदारी 47.67 फीसदी थी और सितंबर 2025 तिमाही के आखिर में यह 48.39 फीसदी थी।

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बढ़ाई हिस्सेदारी

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जून तिमाही में HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 41.9 फीसदी कर दी। ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तिमाही के अंत में उनकी हिस्सेदारी 36.3 फीसदी थी। इंडिविजुअल पब्लिक शेयरहोल्डरों ने भी HDFC बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इनकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 15.6 फीसदी और दिसंबर 2025 तिमाही के अंत के 15.1 फीसदी से बढ़कर 16.3 फीसदी हो गई है।

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स्टॉक में क्यों आ रही गिरावट?

बैंक के मार्जिन पर शॉर्ट-टर्म दबाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से इस शेयर पर दबाव बना है। इस साल अब तक यह स्टॉक में 27 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। बाजार जानकारों का कहना है कि बैंक के NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) में रिकवरी और फंड की लागत कम होने पर ही इसमें फिर से तेजी आ सकती है। DII की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी से FPI की बिकवाली को कुछ हद तक संतुलित करने में सहायता मिली है। लेकिन स्टॉक में हो रही गिरावट को रोकने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। अगर बैंक के मार्जिन पर दबाव बना रहता है और फंड की लागत कम नहीं होती तो आगे भी स्टॉक पर दबाव बना रहेगा।

शेयर की चाल पर एक नजर

इस स्टॉक में लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दोनों ही नजरिए से बाजार को निराश किया है। पिछले 1 हफ्ते में इसमें 1.57 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं, 1 महीने में यह शेयर 12.30 फीसदी टूटा है। 3 महीने में इसमें 3.6 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है। वहीं, इस साल अब तक इसमें 27 फीसदी की गिरावट आई है। 1 साल में यह शेयर 26.53 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसमें 10.62 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है।

RPSC 1st Grade Result 2026: आरपीएससी ने कॉमर्स और इंग्लिश विषयों का 1st ग्रेड टीचर रिजल्ट जारी कर दिया है, वेबसाइट पर देखें मेरिट लिस्ट

RPSC 1st Grade Result 2026: राजस्थान में स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने स्कूल लेक्चरर भर्ती 2025 के तहत अंग्रेजी और कॉमर्स विषयों का रिजल्ट जारी कर दिया है। आयोग की ओर से आयोजित 1st ग्रेड टीचर भर्ती परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मेरिट लिस्ट और कटऑफ देख सकते हैं। आयोग ने 10 अगस्त, 2026 को स्कूल लेक्चरर (स्कूल एजुकेशन) 2025 भर्ती परीक्षा का रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है।

यह रिजल्ट विज्ञापन संख्या 06/2025 के तहत जारी किया गया है। जो परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर रिजल्ट देख सकते हैं। आयोग द्वारा जारी रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में है। मेरिट लिस्ट में उन कैंडिडेट्स के रोल नंबर हैं जो भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के लिए सफल हुए हैं। आरपीएससी ने अंग्रेजी और कॉमर्स के लिए अलग-अलग रिजल्ट डॉक्यूमेंट जारी किए हैं। मेरिट लिस्ट के साथ, संबंधित कट-ऑफ अंक भी जारी किए गए हैं।

रिजल्ट डॉक्यूमेंट को योग्यता जांचने के लिए अस्थायी सूची बताया गया है। जिन कैंडिडेट्स के रोल नंबर संबंधित मेरिट लिस्ट में हैं, उन्होंने लिखित परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया है। इसके आगे उनकी नियुक्ति डॉक्यूमेंट्स सत्यापन के अधीन है। आयोग ने दोनों विषयों के लिए असफल करार दिए गए उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की है।

बाकी विषयों के रिजल्ट अलग से जारी होने की उम्मीद है। जिन कैंडिडेट ने उन सब्जेक्ट के लिए अप्लाई किया था, उन्हें आगे की अनाउंसमेंट के लिए रेगुलर तौर पर ऑफिशियल RPSC वेबसाइट चेक करते रहना चाहिए।

आरपीएससी 1st ग्रेड रिजल्ट 2026: स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के स्टेप्स

कैंडिडेट ऑफिशियल वेबसाइट पर आरपीएससी 1st ग्रेड 2026 डाउनलोड करने के लिए यहां बताए गए स्टेप्स को फ़ॉलो कर सकते हैं :

  • ऑफिशियल आरपीएससी की वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर रिजल्ट सेक्शन खोलें।
  • स्कूल लेक्चरर (स्कूल एजुकेशन) – 2025 रिजल्ट लिंक देखें।
  • इंग्लिश या कॉमर्स के लिए, जैसा लागू हो, रिजल्ट चुनें।
  • रिजल्ट PDF खोलें।
  • अपना रोल नंबर ढूंढने के लिए PDF में सर्च ऑप्शन का इस्तेमाल करें।
  • आगे के रेफरेंस के लिए रिजल्ट डाउनलोड करें और सेव करें।

कैंडिडेट को सलाह दी जाती है कि वे आरपीएससी ग्रेड 1 रिजल्ट की पूरी जानकारी पाने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर बने रहें।

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गुजरात लौटना चाहते थे हार्दिक, लेकिन रख दी ऐसी शर्त कि GT ने कर दिया साफ इनकार!

IPL 2027 से पहले हार्दिक पंड्या के भविष्य को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के कप्तान हार्दिक पंड्या ने अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) में वापसी की संभावनाएं तलाशीं, लेकिन उनकी एक शर्त ने इस संभावित ट्रेड का रास्ता रोक दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हार्दिक गुजरात लौटने के लिए तैयार थे, लेकिन वह कप्तानी की भूमिका भी वापस चाहते थे। गुजरात टाइटंस ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया और बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, हार्दिक के प्रवक्ता ने साफ किया है कि उन्होंने किसी फ्रेंचाइजी से सीधे Trade या ट्रांसफर को लेकर बातचीत नहीं की है। 

 

गुजरात को हार्दिक की वापसी से ऐतराज नहीं था, लेकिन कप्तानी पर अटक गई बात

 

रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात टाइटंस हार्दिक को दोबारा टीम में शामिल करने के विचार के खिलाफ नहीं थी। यहां तक कि मौजूदा कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) से भी इस संभावित वापसी को लेकर चर्चा की गई थी और वह भी ट्रेड के रास्ते हार्दिक की वापसी के लिए तैयार बताए गए। लेकिन जैसे ही कप्तानी को हार्दिक की वापसी की शर्त के तौर पर रखा गया, फ्रेंचाइजी ने पीछे हटने का फैसला किया। यानी खिलाड़ी की वापसी पर समस्या नहीं थी, असली पेंच नेतृत्व की जिम्मेदारी को लेकर फंसा। 

 

हार्दिक और गुजरात टाइटंस का रिश्ता वैसे भी IPL की सबसे खास कहानियों में से एक रहा है। 2022 में हार्दिक ने पहली बार गुजरात की कप्तानी संभाली और फ्रेंचाइजी ने अपने डेब्यू सीजन में ही IPL ट्रॉफी जीत ली। इसके बाद 2023 में भी गुजरात फाइनल तक पहुंची। हार्दिक के नेतृत्व में टीम ने लगातार दो सीजन में शानदार प्रदर्शन किया था। ऐसे में गुजरात में उनकी वापसी सिर्फ एक ट्रेड नहीं, बल्कि एक पुराने सफल कप्तान की घर वापसी होती लेकिन कप्तानी का सवाल इस संभावित रीयूनियन के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन गया।

 

2024 में MI लौटे थे हार्दिक, अब फिर बदल सकता है ठिकाना

 

हार्दिक ने 2023 सीजन के बाद गुजरात का साथ छोड़ा और 2024 में मुंबई इंडियंस में वापसी की। उनकी वापसी के साथ ही उन्हें टीम की कप्तानी भी सौंप दी गई और लंबे समय से टीम की कमान संभाल रहे रोहित शर्मा की जगह हार्दिक को कप्तान बनाया गया। इस फैसले पर MI फैंस की तरफ से काफी नाराजगी देखने को मिली और 2024 सीजन में हार्दिक को मैदान पर हूटिंग का भी सामना करना पड़ा। 2025 में टीम के प्रदर्शन में कुछ सुधार से माहौल थोड़ा बेहतर हुआ, लेकिन 2026 सीजन ने फिर उनकी स्थिति को सवालों के घेरे में ला दिया।

 

मुंबई इंडियंस ने IPL 2026 में 14 में से सिर्फ 4 मुकाबले जीते और 9वें स्थान पर रही, जिसके बाद टीम में हार्दिक की भूमिका और कप्तानी को लेकर अटकलें तेज हो गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, MI मैनेजमेंट उनकी कप्तानी जारी रखने को लेकर आश्वस्त नहीं था और टीम में उनकी भूमिका का भी मूल्यांकन किया जा रहा था। 

 

IPL 2026 में कैसा रहा Hardik का प्रदर्शन?

 

हार्दिक के लिए 2026 सीजन व्यक्तिगत तौर पर भी बहुत खास नहीं रहा। उपलब्ध MI आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 10 मैचों में 9 पारियों में 64 रन बनाए और गेंदबाजी में 4 विकेट लिए। उनका बल्लेबाजी स्ट्राइक रेट करीब 11.42 रहा, जबकि गेंदबाजी में उनका इकॉनमी रेट 9.18 के आसपास रहा। 

 

पूरे IPL करियर की बात करें तो हार्दिक ने अब तक 162 मैचों में 2,955 रन बनाए हैं, जिसमें 10 अर्धशतक शामिल हैं। गेंद से भी वह टीमों के लिए उपयोगी रहे हैं और उनके नाम IPL में 64 विकेट दर्ज हैं। 

 

यानी हार्दिक का overall IPL रिकॉर्ड उन्हें अभी भी एक बड़े ऑलराउंडर के तौर पर स्थापित करता है, लेकिन 2026 में उनके आंकड़े और MI का प्रदर्शन उस स्तर के नहीं रहे, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।

 

 हार्दिक ने सीधे किसी फ्रेंचाइजी से बात की? प्रवक्ता ने दिया बड़ा बयान

 

इस पूरी कहानी में एक अहम ट्विस्ट हार्दिक पंड्या के प्रवक्ता का बयान है। उन्होंने इन रिपोर्ट्स को अलग तरीके से पेश करते हुए कहा कि हार्दिक ने किसी भी फ्रेंचाइजी से सीधे ट्रांसफर, ट्रेड या किसी अन्य तरीके से बातचीत नहीं की। उनके मुताबिक, अगर हार्दिक को लेकर किसी फ्रेंचाइजी की तरफ से कोई संपर्क हुआ भी है, तो वह मुंबई इंडियंस के माध्यम से हुआ है। गुजरात टाइटंस के प्रतिनिधि ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। 

 

अब आगे क्या? KKR और CSK की भी नजर!

 

हार्दिक के भविष्य को लेकर गुजरात के अलावा दूसरी फ्रेंचाइजियों के नाम भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स में कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स जैसी टीमों की दिलचस्पी का जिक्र आया है, हालांकि फिलहाल किसी ट्रेड को लेकर कोई आधिकारिक डील सामने नहीं आई है। हार्दिक के लिए अगला सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वह मुंबई में रहेंगे या नहीं, बल्कि यह भी है कि अगर टीम बदलते हैं तो क्या उन्हें फिर से कप्तानी की जिम्मेदारी मिलेगी। 

 

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि हार्दिक पंड्या का IPL 2027 से पहले कप्तानी वाला चैप्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला है। गुजरात में जिस कप्तान ने टीम को डेब्यू सीजन में चैंपियन बनाया था, उसी कप्तान की वापसी का रास्ता अब नेतृत्व की शर्त पर अटक गया है।

हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते… हर्ष गोयनका की पोस्ट ने छेड़ी बहस, क्यों चर्चा में है ये मशहूर नेशनल पार्क, क्या करने जा रही सरकार?

Kaziranga National Park: असम सरकार अगले दो महीनों में केंद्र सरकार से काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की मौजूदा 10 किलोमीटर की डिफॉल्ट सीमा को घटाकर 1 किलोमीटर करने की मांग करने की योजना बना रही है। ‘असम ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि इस कदम का मकसद नेशनल पार्क के पास, जिसमें बोकाखाट भी शामिल है, विकास परियोजनाओं पर लगी उन पाबंदियों को हटाना है जिन्हें राज्य सरकार अनावश्यक मानती है।

शर्मा ने कहा, “बोकाखाट में विकास से जुड़ी कई चुनौतियां हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं, जिनमें स्टेडियम का निर्माण, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार और अन्य अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर शुरुआती बातचीत पहले ही हो चुकी है। काजीरंगा को अंतिम ESZ नोटिफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार केंद्र के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी।

उन्होंने आगे कहा, “चूंकि काजीरंगा के लिए अभी तक अंतिम नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए डिफॉल्ट रूप से इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का है। नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम वैज्ञानिक रूप से तय 1 किलोमीटर के इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव रखेंगे।”

शर्मा ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव से बोकाखाट में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही काजीरंगा के वन्यजीवों और पर्यावरण का संरक्षण भी जारी रहेगा।

पर्यावरणविदों ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया?

वहीं, पर्यावरणविदों ने असम सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट, काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को कम करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सुरक्षित बफर जोन को कम करने से पार्क पर दबाव बढ़ सकता है और वहां के वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पार्क और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर विकास की अनुमति दी जानी चाहिए।

गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने The Federal को बताया कि ESZ (इको-सेंसिटिव जोन) को कम करने से काजीरंगा में वन्यजीवों, खासकर एक सींग वाले गैंडे के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जिसे असम का प्रतीक माना जाता है।

धेकियाजुली के एक और पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने कहा कि प्रस्तावित कटौती इको-सेंसिटिव जोन पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के खिलाफ भी हो सकती है। नाथ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो अहम बातों पर आधारित था – जानवरों को प्रजनन के लिए पर्याप्त जगह देना और उन घास के मैदानों की रक्षा करना जो उनके लिए भोजन का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार ESZ का दायरा कम करती है, तो घास के मैदान कम हो जाएंगे और जानवरों की संख्या भी घट जाएगी। अगर वे इस कदम को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।”

‘दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते…’

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, “असम एक स्टेडियम और दूसरे विकास कार्यों के लिए काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करना चाहता है। लेकिन हर मॉनसून में बाढ़ के कारण हाथी और गैंडे इन्हीं रास्तों से ऊंचे इलाकों की ओर जाने को मजबूर होते हैं।”

उन्होंने कहा, आइए स्टेडियम कहीं और बनाएं, क्योंकि हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर लंबे समय से अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी कहा था कि असम सरकार की ओर से केंद्र को न तो ESZ की अंतिम अधिसूचना भेजी गई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा गया है। नतीजतन, 10 किलोमीटर के दायरे वाला नियम अभी भी लागू है।

वहीं, असम सरकार का कहना है कि मौजूदा 10 किलोमीटर के जोन की वजह से बोकाखाट में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास रुका हुआ है। इन पाबंदियों के कारण कई प्रोजेक्ट्स, जिनमें एक आधुनिक स्टेडियम और दूसरे नागरिक विकास के काम शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

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