Investment Tips: 40 के पहले निपटा लें ये 10 काम! बुढ़ापे में नहीं होगी पैसों की तंगी, जानें वेल्थ क्रिएशन का सही फॉर्मूला

Financial Planning Before Age 40: 30 से 40 वर्ष की आयु वित्तीय सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उम्र में आपके पास करियर की स्थिरता, नियमित आय और रिटायरमेंट से पहले एक लंबा इनवेस्टमेंट होराइजन होता है।

हालांकि, सफल निवेशक बनने का मतलब सिर्फ मार्केट रिटर्न के पीछे भागना नहीं है, बल्कि एक अनुशासित वित्तीय रणनीति बनाना है। यदि आपकी उम्र भी 40 वर्ष से कम है, तो वित्तीय रूप से मजबूत बनने के लिए आपको ये 10 स्मार्ट इनवेस्टमेंट मूव्स जरूर अपनाने चाहिए:

1. सबसे पहले अपने फाइनेंशियल गोल्स तय करें

बिना लक्ष्य के निवेश करना बिना पते की चिट्ठी भेजने जैसा है। निवेश शुरू करने से पहले तय करें कि आप पैसा किसलिए बचा रहे हैं जैसे- बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, या रिटायरमेंट। जब आपके लक्ष्य स्पष्ट होते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर फैसले लेने के बजाय आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं।

2. कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए जल्दी शुरुआत करें

निवेश में समय आपका सबसे बड़ा दोस्त होता है। जितनी जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपके पैसे को कंपाउंड (चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में बढ़ने) होने का उतना ही अधिक समय मिलेगा। छोटी-छोटी रकम से की गई शुरुआत भी लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बना सकती है।

3. निवेश से पहले इमरजेंसी फंड बनाएं

एक मजबूत वित्तीय योजना की नींव लिक्विडिटी पर टिकी होती है। किसी भी आपात स्थिति (जैसे- नौकरी छूटना या मेडिकल इमरजेंसी) से निपटने के लिए कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर राशि लिक्विड फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखें। इससे आपको अपनी लंबी अवधि के निवेश को असमय बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. सिंपल और आसान निवेश विकल्पों से शुरुआत करें

निवेश को बहुत पेचीदा बनाने की जरूरत नहीं है। नए निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड्स या डाइवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए शुरुआत करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़े, आप अन्य एसेट क्लासेस में कदम रख सकते हैं।

5. SIP के जरिए नियमित और अनुशासित निवेश करें

मार्केट को टाइम करने के चक्कर में पड़ने के बजाय सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता चुनें। SIP के जरिए हर महीने एक तय राशि ऑटोमैटिक निवेश होती रहती है, जिससे रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है और बाजार के जोखिम से बचाव होता है।

6. डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो तैयार करें

‘अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’ यह नियम निवेश पर पूरी तरह लागू होता है।अपने रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से पोर्टफोलियो को इक्विटी, फिक्स्ड इनकम, सोना और अन्य साधनों में बांटें। डाइवर्सिफिकेशन का मकसद सिर्फ ज्यादा रिटर्न पाना नहीं, बल्कि बाजार की मंदी में नुकसान को कम करना है।

7. बहुत ज्यादा फंड्स या स्ट्रेटेजीज के चक्कर में न पड़ें

बहुत सारे म्यूचुअल फंड्स इकट्ठा कर लेना या बार-बार अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी बदलना नुकसानदेह हो सकता है। अपने पोर्टफोलियो को सिंपल रखें। सीमित और अच्छे से रिसर्च किए गए फंड्स में लंबे समय तक बने रहना हमेशा बेहतर परिणाम देता है।

8. इनकम बढ़ते ही SIP का अमाउंट बढ़ाएं

जैसे-जैसे करियर में आपकी सैलरी या बिजनेस इनकम बढ़े, अपने निवेश की राशि को भी उसी अनुपात में बढ़ाएं। इसे स्टेप-अप SIP (Step-up SIP) कहते हैं। हर साल 10% से 15% निवेश बढ़ाने से आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को समय से काफी पहले हासिल कर सकते हैं।

9. ग्रोथ और स्टेबिलिटी में सही संतुलन बनाएं

लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी जरूरी है, तो पोर्टफोलियो को मजबूती देने के लिए फिक्स्ड इनकम (डेट फंड्स/पीपीएफ) और गोल्ड अनिवार्य हैं। अपनी उम्र, जोखिम सहने की क्षमता और वित्तीय जिम्मेदारियों के अनुसार सही एसेट एलोकेशन तय करें।

10. समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें

बदलते समय के साथ आपकी जिम्मेदारियां और आय का स्तर बदलता है। साल में कम से कम एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें। अगर कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है या आपका एसेट एलोकेशन बिगड़ गया है, तो उसमें आवश्यक रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन भले ही केंद्रीय राजनीति में बड़े बदलावों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ चर्चा में आए हों, लेकिन इसका जमीनी और सबसे व्यापक असर अब पूरे भारत के सरकारी स्कूलों में महसूस किया जा रहा है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और सकारात्मक दृश्य यह है कि अब स्कूली बच्चे खुद अपने बुनियादी अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े हो रहे हैं और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। वे पंखे, बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं और कक्षाओं में भारी शिक्षकों की कमी के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

1. राजस्थान: शिक्षकों की भारी कमी पर छात्रों का फूटा गुस्सा
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गाँव से एक ऐसा ही बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

धरना और प्रशासनिक कार्रवाई: छात्रों ने कई घंटों तक स्कूल के बाहर धरना दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत चार नए शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर बाकी बची तीन रिक्तियों को भी भरने का लिखित आश्वासन दिया।

छात्रों के मन की बात: एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा: “शिक्षा विभाग और सरकार से हमारी माँग है कि वे हमारी बात सुनें। यहाँ एक भी द्वितीय श्रेणी का शिक्षक नहीं है और प्रथम श्रेणी के भी केवल एक ही शिक्षक हैं—एक इतिहास के और दूसरे हिंदी के। इतिहास के शिक्षक के पास प्रधानाचार्य का भी प्रभार है, जिससे प्रशासनिक काम के बोझ के कारण पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। हमारी माँग है कि कक्षा 1 से 3 और एल1 व एल2 के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो हम स्कूल पर ताला लगा देंगे।”

2. बिहार (गया): पंखे, हैंडपंप और टूटी बेंचों के खिलाफ मोर्चा
बिहार के गया जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने पंखे, हैंडपंप और बैठने के लिए बेंच न होने के कारण भारी धरना-प्रदर्शन किया।

जिलाधिकारी (डीएम) को आना पड़ा मैदान में: शुरुआत में जिला प्रशासन ने छात्रों को शांत करने के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को भेजा, लेकिन छात्रों ने विरोध खत्म करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के इस कड़े रुख के बाद अंततः डीएम को खुद स्कूल पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं।
 
3. महाराष्ट्र (डहानू): अस्वच्छ शौचालय और बदहाल बुनियादी ढांचा
महाराष्ट्र के डहानू में छात्रों ने अपने स्कूलों में अस्वच्छ शौचालयों, असुरक्षित माहौल और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ बहादुरी से आवाज उठाई।

छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी केवल सरकारी निरीक्षणों के दौरान ही उपलब्ध कराई जाती है, बाकी दिनों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

4. उत्तर प्रदेश (फतेहपुर): सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन
अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के चलते अंततः स्कूल प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि छात्रों की सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी।

बुनियादी समानता और शिक्षा का अधिकार: एक बड़ा सवाल
इन चारों राज्यों में छात्रों की माँगें काफी हद तक एक जैसी और बेहद बुनियादी हैं: सुचारू कक्षाएँ, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित माहौल, पर्याप्त शिक्षक और पीने योग्य शुद्ध पानी।

इन विरोध प्रदर्शनों ने एक पुरानी और गंभीर विषमता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है: आसानी से मिलने वाली ये बुनियादी सुविधाएं जो शिक्षा का न्यूनतम स्तर होनी चाहिए, उनके लिए आज भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? बदलाव की यह बयार यह साबित करती है कि अब देश का युवा और छात्र अपनी शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो रहा है।

US ETFs: बच्चे की विदेश में पढ़ाई के लिए अमेरिकी ETFs क्यों हैं बेस्ट? जानिए सही करेंसी में बचत का फॉर्मूला

US ETFs for Overseas Education: बच्चों को विदेश की टॉप यूनिवर्सिटीज (US, UK या यूरोप) में पढ़ाना आज कई भारतीय माता-पिता का सपना है। इसके लिए अधिकांश पेरेंट्स सालों पहले से भारतीय म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुपए में की गई आपकी बचत डॉलर में बढ़ते कॉलेज फीस के खर्च के सामने कम पड़ सकती है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वित्तीय लक्ष्य डॉलर या विदेशी मुद्रा में है, तो निवेश भी उसी करेंसी में होना चाहिए। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेश में पढ़ाई के लिए US ETFs में सीधा निवेश क्यों सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

रुपए में बचत क्यों पड़ सकती है कम?

अगर आपका लक्ष्य डॉलर में है, तो सिर्फ रुपए में कंपाउंडिंग करना मुश्किल हो सकता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1- ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी: विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस हर साल 5% से 8% की दर से बढ़ती है।

2- रुपए की कमजोरी: ऐतिहासिक रूप से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हर साल औसतन 4% से 5% टूटता है।

एक उदाहरण से समझे तो जैसे आज किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी की 4 साल की फीस $2,00,000 है, तो अगले 10 साल बाद रुपए के अवमूल्यन और महंगाई को मिलाकर यह बिल ₹3.5 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।

भारतीय इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स के बजाय Direct US ETFs क्यों बेहतर?

पहले पेरेंट्स भारतीय फंड हाउसेज के ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिए विदेश में निवेश करते थे। लेकिन अब Direct US-listed ETFs एक बेहतर विकल्प बन गए हैं:

SEBI ओवरसीज कैप की सीमा नहीं: भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर SEBI द्वारा लगाई गई विदेशी निवेश की लिमिट (करीब $7 बिलियन) बार-बार पूरी हो जाती है, जिससे फंड्स को अपनी SIP बार-बार रोकनी पड़ती है।

LRS के जरिए सीधा निवेश: RBI की लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर भारतीय नागरिक (नाबालिग सहित) को हर साल $2,50,000 तक विदेश भेजने और सीधे US ETFs में निवेश करने की पूरी छूट मिलती है।

कम एक्सपेंस रेशियो: डायरेक्ट US ETFs (जैसे- Vanguard या iShares) का एक्सपेंस रेशियो बेहद कम (0.03% से 0.09%) होता है, जबकि घरेलू इंटरनेशनल फंड्स में यह 1.25% से 1.75% तक हो सकता है।

ऐतिहासिक रिटर्न का गणित

अगर पिछले 10 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें, तो S&P 500, Nasdaq 100 और ग्लोबल इक्विटीज के 60/20/20 पोर्टफोलियो ने डॉलर (USD) टर्म में 13% से 14% वार्षिक रिटर्न दिया है। जब इसमें रुपए की 4-5% सालाना गिरावट को जोड़ दिया जाता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए यह सालाना रिटर्न रुपए के टर्म में 17% से 19% के करीब बैठता है। यानी डॉलर में निवेश करना फायदे वाला सौदा रहा है।

निवेश शुरू करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान

अमेरिकी ETFs में ऐप या ब्रोकरेज के जरिए निवेश करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं को न भूलें:

Micro-SIP से बचें: हर महीने ₹1,000 या ₹2,000 जैसी छोटी SIP पर बैंक वायर चार्ज और फॉरेक्स स्प्रेड का खर्च भारी पड़ सकता है। इसलिए पैसे को रुपए में इकट्ठा करें और हर 3 या 6 महीने में एक बार में रेमिटेंस करें।

TCS के नियम: एक वित्त वर्ष में ₹10 लाख तक के रेमिटेंस पर अतिरिक्त टीसीएस नहीं लगता। ₹10 लाख से ऊपर 20% TCS कटता है, जिसे आप अपने वार्षिक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में एडजस्ट या रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

Schedule FA रिपोर्टिंग: विदेश में शेयर या ETF खरीदते ही ITR-2 या ITR-3 भरते समय Schedule FA में उसका ब्योरा देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ‘ब्लैक मनी एक्ट’ के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

टारगेट तक पहुंचने की सही रणनीति

जैसे-जैसे आपके बच्चे के कॉलेज एडमिशन का समय करीब आए, आपको अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना चाहिए:

Build Phase (शुरुआती 5-10 साल): इक्विटी ETFs (जैसे S&P 500 / Nasdaq) में आक्रामक तरीके से निवेश करें।

Protect Phase (3-4 साल पहले): जब एडमिशन में 3-4 साल बचें, तो धीरे-धीरे इक्विटी से पैसा निकालकर US डेट/बॉन्ड फंड्स में शिफ्ट करें।

Deploy Phase (आखिरी 1-2 साल): फीस भुगतान से 1-2 साल पहले फंड को USD कैश या लिक्विड बकेट में रखें, ताकि शेयर बाजार में किसी तात्कालिक गिरावट से आपकी फीस का बजट प्रभावित न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UP Board Improvement Exam 2026: यूपी बोर्ड डाक विभाग को दे सकता है परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा का जिम्मा, कंपार्टमेंट परीक्षा में लॉन्च किया पायलट प्रोजेक्ट

UP Board Improvement Exam 2026: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से कराने के साथ-साथ आयोजक संस्था की जिम्मेदारी बिना धांधली के कॉपियों की सुरक्षा की भी होती है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) भविष्य में होने वाली यूपी बोर्ड की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा में बड़ा बदलाव कर सकता है। इस संबंध में परिषद ने हाल ही में संपन्न हुई यूपी बोर्ड कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षा 2026 में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है।

परीक्षा सामग्री की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नए कदम के तहत यूपीएमएसपी ने जिला कलेक्शन सेंटर से राज्य के प्राइमरी हब तक आंसर शीट पहुंचाने के लिए भारतीय डाक विभाग के साथ पार्टनरशिप की है। यह पायलट प्रोजेक्ट 28 जुलाई को हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के दौरान लॉन्च किया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स समूह में प्रकाशित खबर के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत सभी 75 जिलों से आंसर शीट शुरू में उनके संबंधित कलेक्शन सेंटर पर भेजी गईं। जिन जिलों में कई परीक्षा केंद्र थे, वहां टीचर और डिपार्टमेंट के कर्मचारी इन जिला हब तक आंसर शीट पहुंचाने का काम मैनेज करते रहे। बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि डाक विभाग ने जिला हब से राज्य के मुख्य कलेक्शन सेंटर, सरकारी इंटर कॉलेज (GIC), प्रयागराज तक सामान पहुंचाने का काम संभाला।

इस पहल की पुष्टि करते हुए, UP बोर्ड के सेक्रेटरी भगवती सिंह ने बताया कि यह पहली बार था जब डाक विभाग ने आंसर शीट के एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसपोर्ट का काम संभाला था। सिंह ने कहा, “पायलट पर रिपोर्ट मांगी गई है। अगर यह काम सफल रहा, तो हम अगले साल से सालाना हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए इस व्यवस्था को और बड़े पैमाने पर लागू करेंगे।”

परीक्षार्थियों की आंसर शीट को डिजिटल रूप में आगे भेजने से पहले जीआईसी प्रयागराज में स्कैन किया गया। इसके बाद इन्हें प्रयागराज, मेरठ और वाराणसी के मूल्यांकन केंद्रों पर भेजा जाएगा, जहां उनका मूल्यांकन किया जाएगा और अंक इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से एक जिले से दूसरे जिले में जाने के दौरान आंसर शीट के खोने या चोरी होने का खतरा कम हो जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन के लिए शिक्षक, विभाग के स्टाफ और सिक्योरिटी वालों को लगाने से जुड़े खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

यह पहल मौजूदा ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करती है। मार्च 2024 में, मुजफ्फरनगर में यूपी बोर्ड की आंसर शीट ले जा रहे एक टीचर की कथित तौर पर पुलिस एस्कॉर्ट ने हत्या कर दी थी। इस साल की शुरुआत में, ऐसी खबरें आईं कि स्टाफ बिना पूरी सुरक्षा के ई-रिक्शा, मोटरसाइकिल और स्कूटर से आंसर शीट ले जा रहे थे, जबकि सरकारी निर्देशों में खास सेफ्टी प्रोटोकॉल जरूरी थे।

28 जुलाई की कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षाओं के लिए कुल 42,078 कैंडिडेट ने पंजीकरण किया था, जिनमें से 39,543 शामिल हुए और 2,535 अनुपस्थित रहे। इसकी तुलना में, सालाना यूपी बोर्ड कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं में लगभग 8,000 केंद्रों पर 50 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं।

NEET PG 2026 Edit Window: एनबीईएमएस ने खोली फॉर्म में सुधार करने की विंडो, फॉर्म में अपनी फोटो या अन्य बदलावों के लिए 10 अगस्त तक मौका

RBI ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट्स पर डिफरेंशियल इंटरेस्ट रेट ऑफर करने की इजाजत दी, जानिए क्या है इसका मतलब

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग इंटरेस्ट रेट ऑफर करने की इजाजत दे दी है। यह लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) फ्रेमवर्क के तहत बैंक के स्पेशिफिक रन-ऑफ रेट्स पर आधारित होगा।

RBI ने इस बारे में 30 जुलाई को एक नोटिफिकेशन इश्यू किया है। इसमें कहा गया है कि यह नियम घरेलू डिपॉजिट यानी रुपये में होने वाले डिपॉजिट के साथ ही NRI डिपॉजिट पर लागू होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट्स से दूसरे नियम पहले की तरह होंगे।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि बैंक को अपनी सभी शाखाओं में एक समान इंटरेस्ट रेट्स ऑफर करने होंगे। बैक को ग्राहकों के साथ किसी तरह का भेदभाव करने की इजाजत नहीं होगी। आरबीआई के नियम के मुताबिक, हर बैंक को रोजाना सुबह 10 बजे तक बल्क डिपॉजिट के इंटरेस्ट रेट ब्रांच में डिस्प्ले करने होंगे।

एचडीएफसी बैंक के हाल में एक ग्राहक को बल्क डिपॉजिट पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करने से विवाद खड़ा हो गया था। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ने महाराष्ट्र स्टेट रोड एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) को ‘मार्केटिंग स्पेंड्स’ के तहत कथित रूप से 45 करोड़ रुपये का पेमेंट किया था। उसने बल्क डिपॉजिट हासिल करने के लिए ऐसा किया था।

HDFC Bank ने MSRDC को बल्क डिपॉजिट पर 6.01 इंटरेस्ट रेट ऑफर किया था। यह रेगुलर सेविंग्स डिपॉजिट पर मिलने वाले 3.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट से काफी ज्यादा था। मामले की जांच के बाद एचडीएफसी बैंक ने अपने कुछ टॉप अधिकारियों को वार्निंग लेटर इश्यू किए। उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

आरबीआई के नियम में बदलाव करने के बाद बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करने का रास्ता खुल गया है। इससे बैंकों को डिपॉजिट अट्रैक्ट करने में आसानी होगी। आरबीआई के नियम के मुताबिक, अलग-अलग कैटेगरी के बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट की परिभाषा अलग है।

शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए 3 करोड़ और इससे ज्यादा के डिपॉजिट बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में आते हैं। रीजनल रूरल बैंक और को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए 1 करोड़ और इससे ज्यादा अमाउंट के डिपॉजिट बल्क श्रेणी में आते हैं।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

Thermax Share Price: Q1 नतीजों के बाद स्टॉक क्रैश, 15% टूटा शेयर, कमजोर नतीजों का दिखा असर

Thermax Share Price: कैपिटल गुड्स सेक्टर की कंपनी थर्मेक्स (Thermax) के शेयर में भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर आज 15 फीसदी टूटा। स्टॉक में यह गिरावट जून तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद देखने को मिली है। कंपनी का मुनाफा ₹25.24 करोड़ रहा, जो ₹151 करोड़ के बाज़ार अनुमान से 83.28% कम था। यह पिछले साल के ₹152.4 करोड़ से भी 83.44% कम था।

इसका ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹2,303 करोड़ रहा, जो CNBC-TV18 के ₹2,433 करोड़ के अनुमान से 5.34% कम था। यह पिछले साल के ₹2,157 करोड़ से 6.77% ज़्यादा था।

कंपनी का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई) ₹69.5 करोड़ रहा, जो ₹219 करोड़ के बाज़ार अनुमान से 68.26% और पिछले साल के ₹224.8 करोड़ से 69.08% कम था।

वहीं EBITDA मार्जिन एक साल पहले की समान अवधि के 10.42% से घटकर तेज़ी से 3.02% हो गया और यह 9% के बाज़ार अनुमान से भी कम था।

हालांकि कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो में 2% की बढ़ोतरी हुई और यह पिछले साल के ₹2,748 करोड़ से बढ़कर ₹2,809 करोड़ हो गया। 30 जून तक इसकी कुल ऑर्डर बुक 23% बढ़कर ₹14,045 करोड़ हो गई।

गाइडेंस

Thermax मैनेजमेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CNBC-TV18 को बताया कि कंपनी को पहली तिमाही में एक खास प्रोजेक्ट पर लागत बढ़ने के कारण ₹91 करोड़ का एकमुश्त नुकसान उठाना पड़ा। खाड़ी युद्ध के कारण आई रुकावटों की वजह से इसकी डिलीवरी लक्ष्य से कम रही।

मैनेजमेंट ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि Thermax की दूसरी तिमाही पहली तिमाही से बेहतर होगी और कंपनी के मार्जिन इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही तक पुराने स्तर पर वापस आ जाएंगे।

कंपनी के अनुसार, उसके क्लाइंट्स बनाए गए इक्विपमेंट नहीं ले पाए, जिसके कारण पहली तिमाही में ₹300 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज नहीं किया जा सका। दूसरी तिमाही में कच्चे माल की ज़्यादा लागत का कुछ असर दिख सकता है। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि नए ऑर्डर की कीमतें अब इन बढ़ी हुई लागतों को ध्यान में रखकर तय की जा रही हैं।

थर्मैक्स के मामले में, स्टॉक पर “BUY” (खरीदने) की सलाह देने वाले एनालिस्ट्स की तुलना में “sELL” (बेचने) की सलाह देने वाले एनालिस्ट्स ज़्यादा हैं। 22 एनालिस्ट्स में से 5 ने “BUY” रेटिंग दी है, 9 ने “HOLD” (बनाए रखने) की सलाह दी है, जबकि 8 ने स्टॉक पर “SELL” रेटिंग दी है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI Lakhpati Scheme: रोजाना महज ₹20 बचाकर बनेंगे लखपति! जानिए एसबीआई की इस खास आरडी स्कीम का पूरा गणित

SBI Har Ghar Lakhpati Scheme Details: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने छोटे और मध्यम आय वर्ग के बचतकर्ताओं के लिए एक शानदार योजना शुरू की है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ (Har Ghar Lakhpati Scheme) है। यह बेसिकली एसबीआई की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) का एक कस्टमाइज्ड गोल-बेस्ड वेरिएंट है।

इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य देश के हर परिवार को छोटी-छोटी मासिक बचत के जरिए ₹1 लाख या उससे अधिक का गारंटीड फंड तैयार करने में मदद करना है। अगर आप भी जोखिम रहित और सुरक्षित तरीके से ₹1 लाख की बचत करना चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए मुफीद साबित हो सकती है।

क्या है एसबीआई की ‘हर घर लखपति’ योजना?

‘हर घर लखपति’ एसबीआई की एक विशेष आवर्ती जमा (RD) योजना है। इसमें ग्राहक को हर महीने एक निश्चित समय अवधि के लिए एक तय राशि जमा करनी होती है। इस स्कीम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मैच्योरिटी पूरी होने पर निवेशक को सीधे ₹1 लाख या इसके मल्टीपल जैसे ₹2 लाख, ₹3 लाख का एकमुश्त कॉर्पस मिलता है। चूंकि यह भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक की योजना है, इसलिए इसमें जमा आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और ब्याज दरें तय रहती हैं।

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

आप अपनी सहूलियत और बजट के हिसाब से 3 साल से लेकर 10 साल तक का कार्यकाल चुन सकते हैं। चुने गए साल के हिसाब से आपकी महीने की किस्त तय होती है:

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

 

नोट: ब्याज दरों में समय-समय पर होने वाले बदलाव के अनुसार मासिक किस्त की राशि में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है।

ब्याज दरें और सीनियर सिटीजन्स को एक्स्ट्रा फायदा

एसबीआई इस स्कीम पर अपनी सामान्य आरडी के बराबर ब्याज दरें देता है, जिसमें ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंड की जाती है।

सामान्य नागरिकों के लिए: अवधि के अनुसार ब्याज दर 6.50% से 6.75% प्रति वर्ष तक मिलती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए: बुजुर्गों को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50% (50 बीपीएस) अधिक ब्याज मिलता है। यानी वरिष्ठ नागरिक हर महीने थोड़ा कम प्रीमियम जमा करके भी ₹1 लाख का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

खाता कैसे खोलें और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

‘हर घर लखपति’ खाता खोलना बेहद आसान है। इसके लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

SBI YONO App / Net Banking: अगर आप एसबीआई के मौजूदा ग्राहक हैं, तो आप YONO ऐप में जाकर ‘Deposits’ > ‘e-RD’ सेक्शन में जाकर ‘Har Ghar Lakhpati’ विकल्प चुनकर घर बैठे खाता खोल सकते हैं।

शाखा में जाकर: अपने नजदीकी एसबीआई ब्रांच में जाकर आवेदन फॉर्म भरें।

आवश्यक दस्तावेज: पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और एसबीआई का सेविंग्स अकाउंट।

लोन सुविधा और पेनाल्टी के नियम

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशक जमा राशि के 90% तक का लोन या ओवरड्राफ्ट (OD) भी ले सकते हैं।

किस्त चूकने पर जुर्माना: अगर आप किसी महीने की किस्त समय पर नहीं भर पाते हैं, तो एसबीआई नियमानुसार मामूली पेनाल्टी वसूलता है। लगातार किस्तें मिस होने पर अकाउंट बंद भी हो सकता है।

टैक्स नियम (TDS): एक वित्त वर्ष में मिलने वाला कुल ब्याज अगर ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो टीडीएस लागू होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बैंक में जमा किए गए रुपये को लेकर RBI ने दिया बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा ये नया नियम

RBI New Rules on Bank Deposit Rates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के सभी कमर्शियल बैंकों के लिए जमा पर मिलने वाले ब्याज से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। रिजर्व बैंक ने बैंकों से साफ कह दिया है कि वे अपनी सभी शाखाओं में एक ही दिन जमा की जाने वाली समान राशि पर ग्राहकों को एक जैसी ही ब्याज दरें प्रदान करें। किसी भी ब्रांच में ब्याज दरों को लेकर भेदभाव या अंतर करने की इजाजत नहीं होगी।

आरबीआई का यह नया आदेश ‘भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक- जमाओं पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026’ के तहत जारी किया गया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

एक दिन, एक रकम तो ब्याज भी होगा बिल्कुल एकसमान

केंद्रीय बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक, बैंकों को अपने जमा पर वही ब्याज देना होगा जो उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर पहले से तय और घोषित है। अगर कोई ग्राहक देश की किसी भी शहर या ब्रांच में एक ही दिन समान रकम जमा करता है, तो बैंक उसे अलग-अलग ब्याज दर नहीं दे सकते।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि एक ही दिन स्वीकार किए गए समान अमाउंट के डिपॉजिट पर अलग-अलग दरें देना पूरी तरह से अस्वीकार्य और नियमों के खिलाफ होगा।

रोज सुबह 10:10 बजे तक अपडेट करनी होंगी थोक जमा दरें

पारदर्शिता को और बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ने बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को सार्वजनिक करने का समय भी तय कर दिया है:

समय सीमा: सभी बैंकों को हर कारोबारी दिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी वेबसाइट पर थोक जमा की नई ब्याज दरें पब्लिश करनी होंगी।

10 मिनट की छूट: आरबीआई ने इसमें अधिकतम 10 मिनट की रियायत दी है, यानी बैंकों को हर हाल में सुबह 10:10 बजे तक अपनी ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट कर देनी होंगी।

LCR फ्रेमवर्क के तहत सीमित छूट की शर्त

आरबीआई ने बैंकों को लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) ढांचे के तहत थोक जमा पर ब्याज दरों में मामूली या सीमित अंतर रखने की छूट दी है। लेकिन यह छूट तभी मान्य होगी जब इसका आधार कोई ठोस और वैध वित्तीय मानक होगा, न कि बैंक की मनमर्जी।

1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे नए नियम

आरबीआई के अनुसार, यह नया ड्राफ्ट जून में जारी किए गए ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर बैंकिंग स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से मिली प्रतिक्रियाओं का गहराई से अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस नियम से बैंक ग्राहकों को अपनी जमा राशि पर पारदर्शी और सही रिटर्न मिलेगा।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : आज बाजार के लिए ग्बोबल और घरेलू संकेत अच्छे हैं। गिफ्टी निफ्टी करीब 70 अंक ऊपर कारोबार कर रहा है। FIIs ने कैश और वायदा में मिलाकर करीब 4700 करोड़ की खरीदारी की है। इंडेक्स में दो दिनों में करीब 19000 नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट कवर किए गए हैं। क्रूड में भी नरमी है। यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

30 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे ट्रेडिंग सेशन के बाद भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। IT शेयरों में आई तेजी का असर रियल्टी,कैपिटल गुड्स,हेल्थकेयर और कुछ बड़े शेयरों में आई कमजोरी से संतुलित हो गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 273.55 अंक या 0.35 प्रतिशत बढ़कर 77,928.15 पर और निफ्टी 66.95 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 पर बंद हुआ। ब्रॉडर इंडेक्स का प्रदर्शन मुख्य इंडेक्स के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

विदेशी निवेशकों के रुझान पर एक नजर

30 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,623 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे। इससे घरेलू बाजार में उनका भरोसा बना रहने का संकेत मिलता है। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार पांच सेशन से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और वे नेट सेलर बन गए,क्योंकि उन्होंने ₹1,864 करोड़ के शेयर बेचे।

कमोडिटी न्यूज

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से कुछ जहाज निकलने की खबरों से क्रूड में थोड़ी नरमी आई है। ब्रेंट 89 डॉलर के पास पहुंच गया है। इधर US में दरें ना बढ़ने से सोना 4100 डॉलर के पार चला गया है। चांदी भी 2.5 फीसदी उछली है।

चिप शेयरों में दिखी जोरदार तेजी

अमेरिका में कल चिप शेयरों में जोरदार रिबाउंड दिखा। मैक्रॉन,वेस्टर्न डिजिटल,सैनडिस्क और SK HYNIX ADR में 15 से 26% तक का उछाल आया। वहीं सॉफ्टवेयर कंपनियों पर दबाव दिखा। Accenture और Cognizant पांच से छह परसेंट फिसले। इंफोसिस का ADR भी 5% नीचे आय।

Market cues : निफ्टी 24500-24600 पर स्थित अगले रेजिस्टेंस की और बढ़ने को तैयार, आज इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

एशियाई बाजारों में रौनक

चिप शेयरों में जोरदार खरीदारी से एशियाई बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। निक्केई 5% तो कॉस्पी 16% दौड़ा है। कॉस्पी में सैमसंग 20% तो SK HYNIX 30% तक दौड़े हैं। उधर अमेरिकी बाजारों में भी कल शानदार तेजी दिखी। नैस्डैक करीब तीन परसेंट उछला। वहीं, डाओ जोंस भी तेजी के साथ बंद हुआ।

टाटा स्टील का Q1 मुनाफा 12% बढ़ा, 24% बढ़ा वेदांता का मुनाफा,मार्जिन में सुधार

पहली तिमाही में टाटा स्टील के नतीजे अनुमान के करीब रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 12 परसेंट तो आय में 14 परसेंट की बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्जिन में भी एक फीसदी की बढ़त हुई है। करीब 33,900 करोड़ के कैपेक्स को बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। वहीं वेदांता का मुनाफा 24% बढ़ा है। मार्जिन में भी सुधार दिखा है।

10% बढ़ा LIC हाउसिंग का मुनाफा, टोरेंट फार्मा का मुनाफा बढ़ा

पहली तिमाही में LIC हाउसिंग फाइनेंस का मुनाफा 10% बढ़ा है। हालांकि इसकी ब्याज से होने वाली कमाई करीब एक परसेंट बढ़ी है। दूसरी ओर टोरेंट फार्मा का मुनाफा 3% बढ़ा है। इसके मार्जिन में भी सुधार दिखा है।

अनुमान से कमजोर रहे स्विगी के नतीजे, फूड डिलिवरी,इंस्टामार्ट ग्रोथ कमजोर

स्विगी के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे हैं। पहली तिमाही में कंपनी का घाटा कम हुआ है। इसकी आय में 37 फीसदी का उछाल दिखा है। लेकिन फूड डिलिवरी का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू और इंस्टामार्ट का नेट ऑर्डर वैल्यू अनुमान से कम रहा है।

निफ्टी की चार कंपनियों के नतीजे आज

नतीजों के लिहाज से आज बेहद अहम दिन है। आज निफ्टी की चार कंपनियों,ITC, MARUTI,सन फार्मा और बजाज फिनसर्व के रिजल्ट आएंगे। ITC का मुनाफा 12% घट सकता है ,मार्जिन पर भी दबाव संभव है। सिगरेट की वॉल्यूम ग्रोथ निगेटिव हो सकती है। वहीं डिक्सन,गेल,ABB समेत वायदा की 9 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।