क्या लगातार खांसी फेफड़ों के कैंसर का संकेत है? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताए चेतावनी वाले ये लक्षण

भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण और बदलती जीवनशैली का असर हमारी सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर लोग रोजमर्रा की थकान या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खांसी भी ऐसी ही एक आम परेशानी है, जिसे लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं। लेकिन जब यही खांसी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कई शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग समय पर ध्यान नहीं दे पाते।

ऐसे में अपनी दिनचर्या, खानपान और शरीर में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। सही समय पर जांच और सावधानी से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लगातार रहने वाली खांसी हो सकती है शुरुआती चेतावनी

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ज्योति मेहता के अनुसार, लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। हालांकि हर पुरानी खांसी कैंसर नहीं होती, लेकिन कई हफ्तों तक इसे नजरअंदाज करने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है, जिससे इलाज के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्टर के मुताबिक, फेफड़ों में मौजूद कुछ कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बन सकता है और यही आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है।

सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता खतरा

आम धारणा है कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण जरूर है, लेकिन इसके अलावा कई दूसरी चीजें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • दूसरे लोगों के धुएं के संपर्क में आना (सेकेंड हैंड स्मोक)
  • बढ़ता वायु प्रदूषण
  • रेडॉन गैस
  • एस्बेस्टस जैसे खतरनाक पदार्थ
  • कुछ हानिकारक केमिकल्स

इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है या कुछ जेनेटिक बदलाव हैं, उनमें भी खतरा हो सकता है।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी
  • खांसी के साथ खून आना
  • सीने में लगातार दर्द रहना
  • सांस लेने में परेशानी या घरघराहट
  • बार-बार छाती में संक्रमण होना
  • बिना वजह वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
  • आवाज में भारीपन या बदलाव लंबे समय तक रहना

इनमें से कोई भी लक्षण दिखने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

इलाज में देरी से बढ़ सकता है खतरा

अगर फेफड़ों के कैंसर का समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग, हड्डियों, लीवर और एड्रिनल ग्लैंड तक फैल सकता है। इससे तेज दर्द, सांस लेने में ज्यादा परेशानी, हड्डियों में फ्रैक्चर और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

समय पर जांच से बच सकती है जिंदगी

मेडिकल क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण अब फेफड़ों के कैंसर के इलाज के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं
  • दूसरों के धुएं से बचें
  • प्रदूषण और खतरनाक केमिकल्स से बचाव करें
  • जरूरत पड़ने पर मास्क और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें
  • संतुलित भोजन लें
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें

एक सामान्य सी लगने वाली खांसी कभी-कभी शरीर का बड़ा संकेत हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच करवाना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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बॉयफ्रेंड से झगड़े के बाद 18वीं मंजिल से कूदी 20 साल की लड़की, चमत्कारिक तरीके से बची जान

चीन में एक 20 वर्षीय युवती से जुड़ी घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है। बॉयफ्रेंड के साथ हुए विवाद के बाद अपार्टमेंट से निकलने की कोशिश में वह 18वीं मंजिल की बालकनी से गिर गई। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसकी जान बच गई, जिसे डॉक्टरों ने बेहद असाधारण बताया। हालांकि, इस हादसे में युवती को कई गंभीर चोटें आईं और अब उसका इलाज अस्पताल में जारी है। घटना के बाद जहां उसकी जिंदगी बचाने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं परिवार के सामने इलाज का बढ़ता खर्च भी बड़ी चुनौती बन गया है। इस पूरे मामले ने रिश्तों में तनाव, भावनात्मक फैसलों और मुश्किल परिस्थितियों से निपटने को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।

रिश्ते से बाहर निकलना चाहती थी युवती

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशिंग शहर में हुई। युवती को रिपोर्ट में शियाओयी नाम से पहचाना गया है। वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ किराए के अपार्टमेंट में रहती थी। परिवार का कहना है कि शियाओयी कुछ दिन पहले ही इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला कर चुकी थी। उसने 10 जुलाई को अपने गृह नगर युन्नान लौटने के लिए ट्रेन टिकट भी बुक कर लिया था।

विवाद के बाद बिगड़े हालात

परिवार के अनुसार, 11 जुलाई की रात दोनों के बीच फिर से विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान बॉयफ्रेंड ने युवती का मोबाइल फोन और पहचान पत्र अपने पास रख लिया और अपार्टमेंट का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे वह बाहर नहीं निकल सकी। युवती के चाचा ली ने बताया कि कई घंटे तक चले विवाद के बाद शियाओयी खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही थी। उस समय उसकी प्राथमिकता सिर्फ वहां से बाहर निकलना थी।

गिरने के बाद भी बची जान

बताया गया कि युवती 18वीं मंजिल की बालकनी से गिर गई। हालांकि, गिरते समय एक पेड़ ने उसकी रफ्तार कम कर दी और नीचे मौजूद घनी झाड़ियों ने भी असर को कम किया। इसी वजह से वह गंभीर स्थिति में होने के बावजूद बच गई।

अस्पताल में चल रहा गंभीर इलाज

घटना के बाद युवती को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके बॉयफ्रेंड ने इलाज के लिए शुरुआती तौर पर 20 हजार युआन (करीब 3 हजार डॉलर) जमा किए। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवती के सिर, फेफड़ों, लीवर और तिल्ली में गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा उसकी पेल्विस, प्यूबिक बोन और दोनों पैरों में फ्रैक्चर भी हुआ है। युवती की अब तक दो बड़ी सर्जरी हो चुकी हैं और आगे भी इलाज जारी है।

होश आने के बाद जताया पछतावा

परिवार के मुताबिक, होश में आने के बाद शियाओयी ने अपने इस फैसले पर पछतावा जताया। उसने माना कि यह कदम भावनात्मक स्थिति में उठाया गया था।

इलाज का खर्च बना परिवार की बड़ी चिंता

अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज का खर्च है। युवती के चाचा ने बताया कि परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में था। साल 2022 में शियाओयी की मां को कैंसर का पता चला था, जिसके इलाज में परिवार की बचत खत्म हो गई और उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा। युवती के इलाज का खर्च 1 लाख युआन (करीब 15 हजार डॉलर) से अधिक पहुंच चुका है। परिवार पर अस्पताल का लगभग 60 हजार युआन बकाया है। इलाज जारी रखने के लिए परिवार ने ऑनलाइन क्राउडफंडिंग के जरिए करीब 90 हजार युआन जुटाए हैं, लेकिन आगे की सर्जरी और रिकवरी के खर्च को लेकर उनकी चिंता अभी भी बनी हुई है।

Share Market Crash: डे-हाई से 700 प्वाइंट्स टूटा Sensex, 5 वजहों से Nifty आया 24500 के नीचे

Share Market Crash: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के नए सिस्टम को लेकर मार्केट में काफी अनिश्चितता फैली है। ब्रोकरेजेज ने भी रिटेलर्स को सतर्क किया है। इसका असर आज मार्केट में दिखा और कच्चे तेल के भाव में उछाल ने इस दबाव को और बढ़ाया। इस दबाव में सेंसेक्स इंट्रा-डे हाई से 700 प्वाइंट्स से अधिक फिसल गया तो भी निफ्टी भी टूटकर 24500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का तेज दबाव दिखा और स्मॉलकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी फिसल गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 01:07 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 249.56 प्वाइंट्स यानी 0.32% की गिरावट के साथ 78,389.47 और निफ्टी (Nifty) 283.30 प्वाइंट्स यानी 1.14% की फिसलन के साथ 24,491.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 504.12 प्वाइंट्स उछलकर 79,143.15 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 781.36 प्वाइंट्स टूटकर 78,361.79 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी 291.10 प्वाइंट्स गिरकर 24,483.20 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

CAS सिस्टम

कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि जब तक नए मैकेनिज्म CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3:00 PM और 3:05 PM के बीच बंद कर दें। इससे मार्केट में बेयरेश माहौल बना है क्योंकि एक तरह से शेयरों के लेन-देन का समय कम हुआ है।

आईटी और प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में दबाव

मार्केट पर आज आईटी और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स ने काफी दबाव बनाया जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी कमजोर हुए। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी में 1% से अधिक तो ऑटो और सरकारी बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी की गिरावट है।

कच्चे तेल में उछाल

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $85 के करीब पहुंचा तो मार्केट पर इसकी आंच महसूस हुई।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 2.41% के उछाल के साथ 12.21 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

Nifty की एक्सपायरी

आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है जिसके चलते मार्केट में तेज उठा-पटक दिख रही है।

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10 अगस्त को आ रहा है एक और धमाकेदार IPO! टेमासेक-मोतीलाल ओसवाल का सपोर्ट, जानें पूरी डिटेल्स

Molbio Diagnostics IPO: मेडिकल डायग्नोस्टिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मोल्बियो आईपीओ बाजार में दांव लगाने का बड़ा मौका लेकर आ रही है। दिग्गज ग्लोबल निवेशक टेमासेक और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के समर्थन वाली इस कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है।

कंपनी का आईपीओ आम जनता के लिए 10 अगस्त 2026 को खुलेगा। इसी दिन धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ भी दस्तक दे रहा है, जिससे 10 अगस्त को प्राइमरी मार्केट में दो बड़े मेनबोर्ड इश्यू के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

Molbio Diagnostics IPO: टाइमलाइन और महत्वपूर्ण तारीखें

एंकर बुक ओपनिंग: 7 अगस्त 2026

पब्लिक इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 10- 12 अगस्त 2026

शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 13 अगस्त 2026

लिस्टिंग की तारीख: 17 अगस्त 2026

इश्यू का साइज और OFS की डिटेल्स

फ्रेश इश्यू: ₹200 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी किए जाएंगे।

ऑफर फॉर सेल (OFS): मौजूदा शेयरधारक और प्रमोटर्स 91.66 लाख शेयरों की बिक्री करेंगे।

OFS साइज में कटौती: इससे पहले अगस्त 2025 में दाखिल DRHP में 1.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी, जिसे अब घटाया गया है। सेबी ने दिसंबर 2025 में इसके आईपीओ पेपर्स को मंजूरी दी थी।

शेयरहोल्डिंग पैटर्न: प्रमोटर्स एक्सोरा ट्रेडिंग और डॉ. चंद्रशेखर भास्करन नायर के पास 46.65% हिस्सेदारी है। बाकी 53.35% हिस्सेदारी टेमासेक की सहायक कंपनी ‘V Sciences Investments’ और मोतीलाल ओसवाल के ‘India Business Excellence Fund’ जैसे निवेशकों के पास है।

जुटाए गए फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रोसीड्स का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

  • R&D और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (₹105.5 करोड़): पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘Bigtec’ द्वारा संचालित रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में।
  • प्लांट व मशीनरी (₹72.2 करोड़): गोवा यूनिट I, गोवा यूनिट II और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए नए प्लांट, उपकरण और मशीनरी की खरीद में।
  • कॉर्पोरेट उद्देश्य: शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

बिजनेस मॉडल और पेटेंट टेक्नोलॉजी

अक्टूबर 2000 में शुरू हुई मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। कंपनी ने ‘Truenat’ नामक पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के माध्यम से यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है।

कंपनी का फाइनेंशियल प्रदर्शन

मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स का वित्तीय प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में मजबूत रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 14.8% बढ़कर ₹166.6 करोड़ पर पहुंच गया। राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कुल राजस्व 41.7% की जोरदार बढ़त के साथ ₹1,445.7 करोड़ रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Renault Kiger discounts go up to Rs 68,000 in August 2026

2026 Renault Kwid showroom shot

Renault has announced various discount schemes for customers in August 2026, including cash offers, exchange or scrappage incentives, and corporate benefits. All Renault models (except the Duster) are available this month with a discount. The benefits mentioned here are applicable for bookings made between August 1 and August 31, 2026.

  • Kiger gets highest discounts; Kwid gets the lowest
  • Kiger and Triber offered with loyalty and corporate benefits

Disclaimer: Offers/benefits may vary by city and are subject to stock availability. Buyers are advised to check with their local dealer for exact figures.

Renault Kiger offers in August 2026

Benefits up to Rs 68,000

Renault Kiger front quarter

Depending on the trim level, the 2026 Renault Kiger is being offered with benefits of up to Rs 68,000 across India (except Kerala and Gujarat). This includes a cash discount of Rs 20,000, exchange or scrappage benefits of up to Rs 25,000 and loyalty incentives worth up to Rs 18,000. There’s also a corporate discount of Rs 5,000.

For those residing in Kerala and Gujarat, the loyalty benefit and corporate discount remain the same but cash offers and exchange incentives can now be up to Rs 50,000 each. The price of the Renault Kiger is between Rs 5.81 lakh and Rs 10.40 lakh.

Renault Triber offers in August 2026

Benefits up to Rs 60,000

Apart from Kerala and Gujarat, the 2026 Renault Triber MPV is available with benefits amounting to Rs 60,000. Buyers will be offered a cash discount of Rs 15,000, scrappage incentives worth up to Rs 25,000 or an exchange offer of Rs 15,000, and a corporate discount of Rs 5,000.

Renault Triber front quarter

While the scrappage and corporate offers are unchanged, residents of Kerala and Gujarat get cash discounts of up to Rs 30,000 and exchange benefits worth up to Rs 30,000. The 2026 Renault Triber is priced from Rs 5.81 lakh to Rs 8.53 lakh.

Renault Kwid offers in August 2026

Benefits up to Rs 40,000

Renault Kwid rear quarter

The 2026 Renault Kwid is being offered with a cash discount of up to Rs 15,000 and a scrappage incentive worth up to Rs 25,000 in most states in India. However, this offer is not applicable for buyers in Kerala, Assam, Karnataka, Odisha, Uttarakhand, Telangana, Chhattisgarh, Arunachal Pradesh and Andhra Pradesh. Buyers here can get the Kwid with cash discounts amounting to up to Rs 30,000, while the scrappage benefit remains unchanged. The 2026 Renault Kwid is priced between Rs 4.53 lakh and Rs 5.61 lakh.

All prices are ex-showroom, India.

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देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।

इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग

गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।

बदला खरीदारी का तरीका

ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।

बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।

बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।

गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।

सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

EPF Account: रिटायरमेंट के तुरंत बाद PF का पूरा पैसा निकालना बड़ी भूल!

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जहरीले कॉरपोरेट जॉब की तरह बन गई थी लखनऊ, राहुल ने खोला गुबार (Video)

दिल्ली कैपिटल्स के बल्लेबाज केएल राहुल कुछ समय पहले लखनऊ सुपर जाएंट्स के कप्तान थे। लखनऊ सुपर जाएंट्स के  मालिक संजीव गोयनका ने साल 2024 के बाद केएल राहुल को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मिली हार पर मैदान में ही खूब खरी खोटी सुनाई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ था।उस दौर की कहानी केएल राहुल ने एक पॉडकॉस्ट में बयान की है।

केएल राहुल ने कहा “IPL कप्तान के तौर पर मुझे सबसे मुश्किल काम लगा—मालिकाना स्तर पर होने वाली ढेर सारी बैठक, रिव्यू और सफाइयां देना। यह मानसिक रूप से बहुत थका देने वाला था। IPL सीज़न के आखिर तक, मैं 10 महीने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के मुकाबले कहीं ज़्यादा मानसिक और शारीरिक रूप से थका हुआ महसूस करता था। आपसे लगातार पूछा जाता है कि आपने कुछ खास फैसले क्यों लिए, किसी खिलाड़ी को क्यों चुना, या टीम का प्रदर्शन खराब क्यों रहा।

उन्होंने आगे कहा “अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में, आपको कोच और चयनकर्ता को जवाब देना होता है जो खेल की बारीकियों को समझते हैं। आप चाहे कुछ भी करें या कितनी भी ज़रूरी चीज़ें पूरी कर लें, खेल में जीत की कोई गारंटी नहीं होती। गैर-खेल पृष्ठभूमि वाले लोगों को यह बात समझाना सबसे मुश्किल होता है, क्योंकि वे अक्सर हर फैसले का पक्का नतीजा चाहते हैं।”

राहुल की कप्तानी में एलएसजी 2022 और 2023 सत्र में प्ले ऑफ में पहुंच गया था। हालांकि 2024 सत्र में लखनऊ की टीम सातवें स्थान पर रही थी। पिछले साल एलएसजी के मालिक संजीव गोयनका (Sanjiv Goenka) के साथ राहुल के रिश्ते भी खराब हो गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में गोयनका को हार के बाद लखनऊ के पूर्व कप्तान को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते देखा गया था। कुछ महीने बाद 33 वर्षीय खिलाड़ी को बड़ी नीलामी से पहले फ्रेंचाइजी ने रिलीज (अपने साथ बरकरार नहीं रखना) कर दिया था।


NEET UG 2026 Merit List: नीट यूजी चॉइस फिलिंग और रजिस्ट्रेशन कल, पुडुचेरी ने जारी की राज्यवार मेरिट लिस्ट

NEET UG 2026 Merit List: चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्र अब नीट यूजी काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के जरिए स्नातक स्तरीय (UG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया 5 अगस्त से शुरू होने वाली है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों के लिए नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई है। पुडुचेरी के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर सर्विसेज विभाग ने भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट health.py.gov.in पर स्टेट मेरिट लिस्ट जारी कर दी है।

पुडुचेरी मेरिट लिस्ट में एक अनोखी बात सामने आई है जिसने कैंडिडेट्स का ध्यान खींचा है। सबसे ज़्यादा रैंक वाले कैंडिडेट को 670 मार्क्स मिले हैं, लेकिन लिस्ट में ऐसे कैंडिडेट्स भी शामिल हैं जिन्हें -1 से -23 मार्क्स मिले हैं। इन कैंडिडेट्स के शामिल होने से छात्रों में उत्सुकता बढ़ गई है, भले ही मेरिट लिस्ट में उनके नाम होने से एमबीबीएस सीट की गारंटी नहीं है।

कुल 10 छात्रों को नीट यूजी परीक्षा में नेगेटिव मार्क्स मिले हैं। नेगेटिव मार्क्स में -1, -3, -6, -7, -9, -11, -14, -15, -16 और -23 शामिल हैं। इन कैंडिडेट्स की रैंक 4707 और 4716 के बीच है। कृष्णाथ अभिनव एम 670 अंक और एआईआर 553 के साथ राज्य की मेरिट लिस्ट में टॉप पर हैं। दूसरे नंबर पर प्रवीण ए हैं, जिन्होंने 646 अंक और ओवरऑल रैंक 1721 हासिल की है, और लिस्ट में तीसरे नंबर पर रामानीश्वर ए हैं, जिन्होंने 646 मार्क्स और ओवरऑल रैंक 1756 हासिल की है।

जिन छात्रों को जारी मेरिट लिस्ट पर आपत्ति है, वे 5 अगस्त, 2026 तक ऑब्जेक्शन दर्ज करा सकते हैं। वे अपने ऑब्जेक्शन DMS@PY.GOV.IN पर ईमेल के जरिए भेज सकते हैं।

नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट: रैंक लिस्ट कैसे चेक करें

  • मेरिट लिस्ट चेक करने के लिए, कैंडिडेट्स नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं।
  • ऑफिशियल वेबसाइट health.py.gov.in पर जाएं।
  • होम पेज पर मौजूद NEET UG 2026 मेरिट लिस्ट लिंक पर क्लिक करें।
  • एक नया पेज खुलेगा जहां कैंडिडेट अपनी रैंक चेक कर सकते हैं।
  • आगे इस्तेमाल के लिए फाइल डाउनलोड करें।

नीट यूजी काउंसलिंग पंजीकरण कल, 5 अगस्त, 2026 से शुरू होगा। आवेदन करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त, 2026 है। चॉइस फिलिंग 6 अगस्त से शुरू होगी और 13 अगस्त, 2026 को बंद हो जाएगी। सीट आवंटन रिजल्ट 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा। जिन छात्रों को सीट आवंटित होगी, वे 18 अगस्त से 22 अगस्त, 2026 तक इंस्टीट्यूट में रिपोर्ट कर सकते हैं।

बता दें, नीट यूजी री-एग्जाम रिजल्ट 16 जुलाई, 2026 को अनाउंस किया गया था। एग्जाम 21 जून, 2026 को हुआ था। स्टेट मेरिट लिस्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए, कैंडिडेट डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सर्विसेज, पुडुचेरी की ऑफिशियल वेबसाइट देख सकते हैं।

CLAT 2027: देश की लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, 31 अक्टूबर तक दाखिले के लिए भरें फॉर्म

CLAT 2027: देश की लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, 31 अक्टूबर तक दाखिले के लिए भरें फॉर्म

CLAT 2027: कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक देश के युवाओं के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) के कंसोर्टियम ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन लिंक एक्टिवेट कर दिया है। क्लैट 2026 के जरिए छात्र देशभर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लॉ पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। प्रवेश के इच्छुक छात्र अब आधिकारिक प्रवेश पोर्टल के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

पंजीकरण विंडो 31 अक्टूबर, 2026 तक खुली रहेगी। क्लैट 2027 परीक्षा 6 दिसंबर, 2026 को दोपहर 2.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक होनी है। कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया है कि आने वाले प्रवेश चक्र के लिए परीक्षा के सिलेबस या स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्लैट 2027: जरूरी तारीखें

इवेंट तारीख

रजिस्ट्रेशन शुरू : 3 अगस्त, 2026 (सुबह 10.00 बजे IST)

अप्लाई करने की आखिरी तारीख : 31 अक्टूबर, 2026

क्लैट 2027 परीक्षा : 6 दिसंबर, 2026 (दोपहर 2.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक)

क्लैट 2027 के लिए कैसे करने आवेदन

रजिस्टर करें : एक वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस का इस्तेमाल करके अकाउंट बनाएं।

एप्लीकेशन फॉर्म भरें : पर्सनल, एकेडमिक और कॉन्टैक्ट डिटेल्स डालें।

प्राथमिकता चुनें : पसंदीदा परीक्षा शहर चुनें और एनएलयू प्राथमिकता बताएं।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें : पासपोर्ट साइज का फोटो, सिग्नेचर और कैटेगरी सर्टिफिकेट, अगर लागू हो, अपलोड करें।

आवेदन शुल्क का भुगतान करें : ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें और एप्लीकेशन फॉर्म सबमिट करें।

योग्यता और परीक्षा पैटर्न

अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम के लिए आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों को कम से कम 45% अंकों के साथ कक्षा 12 या उसके बराबर की परीक्षा पास करनी होगी। एससी और एसटी परीक्षार्थियों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक 40% हैं। फरवरी 2027 में अपना क्वालिफाइंग एग्जाम देने वाले छात्र भी आवेदन करने के योग्य हैं।

पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम के लिए, आवेदकों के पास कम से कम 50% अंकों के साथ एलएलबी डिग्री या उसके बराबर की योग्यता होनी चाहिए। एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग रिक्वायरमेंट 45% है।

क्लैट परीक्षा इस साल भी मौजूदा ऑफलाइन फॉर्मेट में जारी रहेगी। इसमें कॉम्प्रिहेंशन-बेस्ड मल्टीपल-चॉइस सवाल होंगे। अंडरग्रेजुएट पेपर में इंग्लिश लैंग्वेज, जनरल नॉलेज सहित करंट अफेयर्स, लीगल रीजनिंग, लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव टेक्नीक शामिल होंगे।

क्लैट 2027 में हिस्सा लेंगी 27 एनएलयू

क्लैट 2027 में देश की 27 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हिस्सा लेंगी। अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में लगभग 3,952 से 4,100 सीटें हैं, जबकि पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए लगभग 1,590 सीटें हैं। आवेदक पूल में 57% महिला परीक्षार्थी हैं, जबकि अंडरग्रेजुएट कैंडिडेट कुल रजिस्ट्रेशन में 80% से ज्यादा हिस्सा लेते हैं। कुल चयन दर 6% से कम रहने के कारण, सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा रहने की उम्मीद है।

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US New Tariffs Row: भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का भारी विरोध, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा

US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।