IND vs AFG: दिल्ली में होगी चौकों-छक्कों की बारिश! मैदान पर उतरेंगे वैभव सूर्यवंशी, जानें कहां पर देखें ये मुकाबला

IND vs AFG: भारत और अफगानिस्तान के बीच 3 मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। सीरीज का पहला मुकाबला 13 सितंबर,रविवार को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। वहीं इस मुकाबले में जसप्रीत बुमराह की वापसी हो रही है। वहीं मुकाबले से पहले जसप्रीत बुमराह ने नेट्स पर जमकर गेंदबाजी की है। प्रैक्टिस के दौरान बुमराह पूरी तरह से लय में नजर आ रहे थे। बुमराह का इस तरह प्रैक्टिस करना भारतीय टीम के लिए राहतभरी खबर है। इस मुकबाले में वैभव सूर्यवंशी भी खेलते हुए नजर आएंगे। आइए जानते हैं कब और कहां पर देखे सकते हैं ये मुकाबला

अफगानिस्तान होगा मेजबान

यह मुकाबला अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए काफी खास है। पहले अफगानिस्तान को अपने घरेलू मैच दूसरे देशों में खेलने पड़ते थे और भारत ने भी उसके कई मैचों की मेजबानी की थी। लेकिन अब अफगानिस्तान की स्थिति बदल गई है। भारत के खिलाफ यह सीरीज इसलिए भी खास है, क्योंकि पहली बार अफगानिस्तान अपने घर में भारत की मेजबानी कर रहा है। भारत भले ही ये मुकाबले अपने घर में खेल रही हो लेकिन अफनिस्तान इस सीरीज में मेजबान के तौर पर उतरेगी।

कब होगा पहला मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मुकाबलों की टी20 सीरीज का आगाज 13 सितंबर से होगा। सीरीज का पहला मैच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला शाम 7:30 बजे से शुरू होगा।

कहां पर देखें ये मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले पहले टी20 मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए अच्छी खबर है। भारत में इस मैच का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनलों पर किया जाएगा। ऐसे में दर्शक घर बैठे टीवी पर दोनों टीमों के बीच होने वाले इस मुकाबले का लाइव आनंद ले सकते हैं।

किस एप पर देखें मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच पहले टी20 मैच को अगर आप टीवी के बजाय मोबाइल या लैपटॉप पर देखना चाहते हैं, तो इसकी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग FanCode पर उपलब्ध होगी। भारतीय दर्शक FanCode की वेबसाइट या ऐप के जरिए इस मुकाबले को लाइव देख सकेंगे।

भारत और अफगानिस्तान की पूरी टीम

भारत की पूरी टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), संजू सैमसन (विकेट कीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी, यश ठाकुर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई

अफगानिस्तान की पूरी टीम: इब्राहिम ज़दरान (कप्तान), दरविश रसूली, नूर उल रहमान, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेट कीपर), सेदिकुल्लाह अटल, अज़मतुल्लाह उमरज़ई, राशिद खान, मोहम्मद नबी, गुलबदीन नायब, नांगेलिया खारोटे, अब्दुल्ला अम्हेदज़ई, फ़ज़लहक फ़ारूक़ी, नवीन-उल-हक, मुजीब उर रहमान, नूर अहमद

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Sun Transit in Virgo 2026: ग्रहों के राजा सूर्य करेंगे कन्या राशि में प्रवेश, इन 4 राशियों के लिए करियर, धन और सफलता में लगेंगे चार चांद

Sun Transit in Virgo 2026: ग्रहों के राजा सूर्य राशिचक्र की सभी 12 राशियों में लगभग एक महीने तक रहते हैं। इस तरह आत्मविश्वास, मान-सम्मान, यश व पद-प्रतिष्ठा के कारक सूर्य का हर माह राशि परिवर्तन होता है। वर्तमान समय में अपनी उच्च राशि सिंह में गोचर कर रहे सूर्य 17 सितंबर 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या राशि सूर्य के मित्र बुद्ध की राशि मानी जाती है। इसलिए यह समय मुख्य रूप से कार्यक्षेत्र में बौद्धिक क्षमता, व्यापार, प्रबंधन और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बदलाव लेकर आता है।

17 सितंबर 2026 को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश करना एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। इस गोचर को कन्या संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के इस परिवर्तन का गहरा प्रभाव माना जाता है। कन्या संक्रांति के साथ ही शरद ऋतु की आहट शुरू हो जाती है और मानसूनी गतिविधियों में बदलाव आता है। सूर्य की इस संक्रांति के आसपास पितृ पक्ष भी शुरू होता है, जिससे श्राद्ध और तर्पण कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। सूर्य के गोचर से राशिचक्र की सभी 12 राशियों प्रभावित होती हैं। 4 राशि वालों के लिए यह गोचर करियर और आर्थिक मामलों में लाभ के संकेत दे रहा है। जानते हैं सूर्य का कन्या राशि में गोचर इनके लिए कैसा रहने वाला है।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य गोचर काफी शुभ माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कारोबार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। सेहत भी सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है।

कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों के लिए यह गोचर शुभ परिणाम देने वाला रह सकता है। नौकरी में पद, प्रतिष्ठा और जिम्मेदारियों में वृद्धि हो सकती है। कारोबार करने वालों को नए संपर्क और अच्छे अवसर मिल सकते हैं। प्रॉपर्टी और आर्थिक मामलों में भी फायदा मिलने की संभावना है।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य गोचर अनुकूल रहने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में सफलता मिल सकती है। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा और कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है। धन और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में भी लाभ मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।

मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए सूर्य गोचर काफी सकारात्मक रह सकता है। नौकरी में तरक्की और नई जिम्मेदारियां मिलने के योग बन सकते हैं। कारोबारियों को भी अच्छे अवसर मिल सकते हैं और काम का विस्तार करने की दिशा में सफलता मिल सकती है। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में फायदा मिल सकता है।

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दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने नोएडा में की आत्महत्या, सुसाइड नोट बरामद

Rakesh Mehta Suicide: दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने नोएडा स्थित अपने घर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक, रिटायर्ड IAS अधिकारी का शव सेक्टर-82 की एक रिहायशी सोसायटी में स्थित उनके फ्लैट से बरामद हुआ।

सेंट्रल नोएडा की सहायक पुलिस आयुक्त दीक्षा सिंह ने बताया कि मेहता ने रविवार को आत्महत्या की। वहीं, जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी मिला है। जिसमें मेहता ने इस कदम को उठाने के पीछे लंबे समय से चल रही बीमारी को वजह बताया।

बता दें कि राकेश मेहता नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसायटी में किराए के मकान में अकेले रहते थे। उनकी पत्नी भी रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं और अपने बेटे और बेटी के साथ उनके पैतृक शहर देहरादून में रहती हैं।

पत्नी की राकेश मेहता से फोन पर नहीं हो पाई बात

पुलिस ने बताया कि रविवार को जब राकेश मेहता की पत्नी उनसे फोन पर बात नहीं कर पाई, तो उन्होंने कॉम्प्लेक्स के सिक्योरिटी ऑफिसर से उन्हें देखने के लिए कहा। बता दें कि उनकी आखिरी बातचीत शनिवार देर रात हुई थी। पुलिस के मुताबिक, उस बातचीत में कुछ भी असामान्य नहीं लगा।

पुलिस ने बताया कि उन्हें दोपहर 1:30 बजे फोन आया कि रिटायर्ड ऑफिसर घर पर मृत पाए गए हैं।

एक पुलिस ऑफिसर ने कहा, “मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि लंबी बीमारी की वजह से वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं और इसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं है।”

पुलिस ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया और आगे की जांच चल रही है।

कौन थे राकेश मेहता?

राकेश मेहता ने 2007 से 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में काम किया था। उस समय दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं।

मेहता 1981 बैच के IAS अधिकारी थे। उन्होंने प्रशासन में कई अहम पदों पर काम किया। इनमें दिल्ली नगर निगम (MCD) में वरिष्ठ पद भी शामिल थे।

उनके मुख्य सचिव के कार्यकाल के दौरान दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के प्रयासों के तहत लो-फ्लोर बसों की शुरुआत की गई थी।

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5 साल में इमारतें गिरने से देश भर में लगभग 8,000 मौतें : सिर्फ हादसों पर हंगामा नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत

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Building collapse deaths in India

Building collapse deaths in India: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर 2026) को हुई दर्दनाक दुर्घटना में पांच मंज़िला इमारत ढहने से सोमवार सुबह तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अवैध और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जाती है।

सत्य निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान इसलिए खींचती हैं क्योंकि ये छात्रों और युवाओं के पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़ी होती हैं। लेकिन इसके इतर दर्जनों ऐसी छिटपुट घटनाएं हैं जो मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दर्जनों और देश भर में सैकड़ों बेकसूरों की जान ले लेती हैं और सुर्खियों से गायब रह जाती हैं।

Building collapse deaths in India

दिल्ली : आबादी के अनुपात में मौतों की गंभीर स्थिति

2024 में मौतों की कुल संख्या (42) के आधार पर दिल्ली देश में 12वें स्थान पर थी, लेकिन जब इन मौतों का विश्लेषण प्रति दस लाख (Per Million) आबादी के अनुपात में किया जाता है, तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है:

  • 2022, 2023 और 2024 तीनों वर्षों में प्रति 10 लाख आबादी पर इमारतें ढहने से हुई मौतों के मामले में दिल्ली देश में दूसरे या तीसरे स्थान पर बनी रही।
  • 2025-2026 की स्थिति : यद्यपि 2025 की आधिकारिक ADSI रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के संकलन के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक 20 से अधिक घटनाओं में कम से कम 70 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया : तात्कालिक हड़बड़ी बनाम ढांचागत सुधार

सत्य निकेतन की घटना के बाद हमेशा की तरह जन-आक्रोश भड़कने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने घोषणा की है कि वह 5-मंज़िला या उससे ऊपर की सभी अवैध इमारतों को “तत्काल सील” करेगा।

क्यों विफल होता है सिस्ट्म?

  1. रिएक्टिव बनाम प्रोएक्टिव : नगर निकाय हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। नियमित ऑडिट और भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी का अभाव रहता है।
  2. सस्ते आवास की भारी मांग : दिल्ली जैसे बड़े शहरों में छात्रों और प्रवासियों की आमद लगातार बढ़ रही है। सस्ते आवास (Affordable Housing) की मांग के चलते अवैध और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
  3. सिर्फ सीलिंग समाधान नहीं : अचानक इमारतों को सील करने से किराएदार बेघर हो जाते हैं, लेकिन निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर-प्रशासनिक साठगांठ पर स्थायी लगाम नहीं लग पाती।
  4. स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और निगरानी का अभाव: स्थानीय जूनियर इंजीनियरों (JE) और पुलिस की मिलीभगत से अवैध निर्माण बिना रुकावट जारी रहता है। हादसे के बाद सीलिंग ड्राइव (Sealing Drive) चलाई जाती है, जो कि केवल एक रिएक्टिव (प्रतिक्रियात्मक) कदम है, प्रोएक्टिव नहीं।
  5. अपीलीय प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें : निगम द्वारा धारा 343/344 के तहत नोटिस जारी करने के बाद, मामला Appellate Tribunal for MCD (ATMCD) या अदालतों में चला जाता है, जहाँ स्टे (Stay Order) मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही वर्षों तक लटकी रहती है।

ऐसे हादसों को कैसे रोकें : सुधार हेतु आवश्यक कदम (Way Forward)

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट का अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण : 15 वर्ष से पुरानी या 3 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों के लिए हर 5 साल में थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) अनिवार्य किया जाए और उसका डेटा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Individual Accountability) : यदि किसी इलाके में अवैध निर्माण के दौरान हादसा होता है, तो केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संबंधित नगर निगम इंजीनियर और बीट कांस्टेबल को भी कानूनी रूप से सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए।
  • सस्ते और सुरक्षित छात्र आवास का नियमन : सरकार को निजी PG और हॉस्टलों के संचालन के लिए एक पारदर्शी और सख्त नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना चाहिए, ताकि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सस्ते आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

हाल ही में हुआ सत्य निकेतन हादसा और देश भर में 5 वर्षों में हुई लगभग 8,000 मौतें यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि भारत में शहरी विकास का ढाँचा और भवन सुरक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है।

भारत में शहरी आवास सुरक्षा नियम, दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज (Unified Building Bye-Laws) और अवैध निर्माण पर लागू वैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का विस्तृत विश्लेषण:

 

Building collapse deaths in India

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MCD के मुख्य बिल्डिंग बाय-लॉज और सुरक्षा मानक

MCD के नियमों के अनुसार किसी भी इमारत के निर्माण से लेकर उसके उपयोग तक निम्नलिखित कड़े नियमों का पालन अनिवार्य है:

(A) फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई की सीमा

  • भूखंड (Plot Size) के आकार के आधार पर यह तय होता है कि उस पर कितना निर्माण हो सकता है।
  • रिहायशी इलाकों में अतिरिक्त मंजिलें (जैसे 3 मंजिल के ऊपर 4था या 5वां फ्लोर बनाना) बिना FAR और स्ट्रक्चरल परमिशन के पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं।

(B) स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट (Structural Safety Certificate)

  • किसी भी इमारत का नक्शा पास कराने के लिए एक पंजीकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Structural Engineer) से यह प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है कि इमारत भूकंप, हवा के दबाव और वजन को सहने में सक्षम है।
  • ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) / कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) : निर्माण पूरा होने के बाद MCD इंस्पेक्टर और इंजीनियर मौके का निरीक्षण करते हैं। इसके बिना इमारत में किसी को रहने या किराए (PG) पर देने की अनुमति नहीं होती।

(C) यूसेज परिवर्तन (Commercial vs Residential)

  • आवासीय परिसरों (Residential Plots) का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे बिना अनुमति के पेइंग गेस्ट (PG), व्यावसायिक हॉस्टल या कोचिंग सेंटर चलाने के लिए करना बाय-लॉज का सीधा उल्लंघन है।

Building collapse deaths in India

  • धारा 343 (DMC Act, 1957) – ध्वस्तीकरण का आदेश (Order of Demolition) : यदि कोई निर्माण बिना पास नक्शे के या पास नक्शे का उल्लंघन करके किया गया है, तो निगम नोटिस जारी कर निर्माण को गिराने (Demolish) का आदेश दे सकता है।
  • धारा 344 – काम रोकने और सील करने की शक्ति (Stop Work / Sealing Notice) : निगम अधिकारियों को अधिकार है कि वे निर्माणाधीन अवैध इमारत पर 'स्टॉप वर्क' का नोटिस दें या पुलिस बल की मदद से साइट को तुरंत सील कर दें।
  • धारा 348 – खतरनाक इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण (Unsafe Buildings): यदि कोई पुरानी इमारत जीर्ण-शीर्ण (Dilapidated) स्थिति में है और गिरने के कगार पर है, तो निगम मकान मालिक को नोटिस जारी कर उसे खाली कराने, मरम्मत कराने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मामला : हादसे की स्थिति में मकान मालिक, बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर BNS धारा 106 (गैर-इरादतन हत्या/लापरवाही से हुई मौत – पूर्व में IPC धारा 304A) और धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है।

Bhaum pradosh vrat 2026: भौम प्रदोष व्रत आज, मंगल दोष से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव को अर्पित करें ये खास चीजें

Bhaum pradosh vrat 2026: प्रदोष हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से उपवास करने वाले भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का विधान है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। वहीं, त्रयोदशी तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ‘भौम’ का अर्थ मंगल ग्रह (या मंगलवार) से है। यह व्रत भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने तथा कर्ज एवं मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव को कुछ खास चीजें अर्पित करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।

सितंबर 2026 भौम प्रदोष व्रत एवं मुहूर्त

तिथि : मंगलवार, 8 सितंबर 2026

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 8 सितंबर 2026, दोपहर 02:42 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त : 9 सितंबर 2026, दोपहर 12:30 बजे

प्रदोष पूजा मुहूर्त : शाम 06:43 बजे से रात 09:01 बजे तक

मंगल दोष मुक्ति के लिए भौम प्रदोष पर करें ये उपाय

शिवलिंग पर लाल चीजें अर्पित करें: प्रदोष काल में शिवलिंग पर शुद्ध जल व दूध अर्पित करने के बाद लाल चंदन, लाल कनेर के फूल या गुलाल चढ़ाएं। भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री राम’ लिखकर अर्पित करें।

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ : पूजन के दौरान ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या ‘मंगलाष्टक’ का पाठ करें। इससे मंगल के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं।

हनुमान जी की उपासना : भौम प्रदोष पर हनुमान जी को चमेली का तेल और सिंदूर (चोला) चढ़ाएं। उन्हें गुड़, भुने चने या बूंदी का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ करें।

मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप : मंगल दोष शांति के लिए कम से कम 108 बार `ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः` या `ॐ अं अंगारकाय नमः` मंत्र का जाप करें।

दान कार्य : पूजा के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को लाल रंग की वस्तुएं दान करें, जैसे— मसूर की दाल, गुड़, तांबे का बर्तन, लाल वस्त्र या अनार।

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके लाल या स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • सूर्यास्त के समय पुन: स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन से अभिषेक करें।
  • हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएं और ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी और हनुमान जी की आरती करें।

Shardiya Navratri 2026: अक्टूबर में शारदीय नवरात्रि इस दिन होगी शुरू, नोट करें नवरात्रि की सभी तिथियां और कलश स्थापना का मुहूर्त

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

Why honor the nation-building teacher on just one day

शिक्षक दिवस राष्ट्र निर्माता शिक्षकों के नमन का दिन है जो ज्ञान की रोशनी से विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। जो अपने विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए निस्वार्थ भाव से अपना वर्तमान समर्पित कर देते हैं। वे जो वर्तमान पीढ़ी के व्यक्तित्व को परिष्कृत कर राष्ट्र के भविष्य को स्वर्णिम बनाते हैं।

वे शिक्षक जो जीवन संग्राम मैॅ आने वाली चुनौतियों का सामना करने की सामर्थ्य अपने विद्यार्थियों में सृजित करते हैं। इन्हीं शिक्षकों की गरिमा और यश  को गौरान्वित करने का दिवस है शिक्षक दिवस।

शिक्षकों के श्रेष्ठतम कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सार्वजनिक रूप से  अलंकृत करने का संकल्प दिवस है शिक्षक दिवस। निसंदेह किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव राष्ट्र निर्माता शिक्षक ही होते हैं। इसीलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षकों को परमेश्वर से भी पहले सम्मान दिया गया है क्योंकि शिक्षक अपने विद्यार्थियों के हृदय में शुभ संस्कारों के सर्जक के नाते ब्रह्मा हैं। उनके रक्षण वर्धन के नाते विष्णु और अशुभ संस्कारों,  अन्तरविकारों को नष्ट करने के कारण शिव है अर्थात ब्रह्मा विष्णु और महेश के समन्वित स्वरूप का दूसरा नाम ही गुरु है। जिस प्रकार कुम्हार बाहर से घड़े को ठोकता पीटता है तथा भीतर से हाथ का सहारा देकर खोट निकालकर लोकोपयोगी घट का निर्माण करता है। उसी प्रकार आदर्श शिक्षक भीतर से अपनी सहानुभूति का सहारा देता हुआ ऊपर से  आवश्यकतानुसार चोट मारकर गढ गढ कर  अपने शिष्य का शुभ निर्माण करता है।

कबीरदासजी कहते हैं “गुरु कुम्हार सिख कुंभ है, गढि गढ़ि काढै खोट। अंतर हाथ सहारे दै, बाहर- बाहर चोट।” ऐसे सुनिर्मित विद्यार्थी ही राष्ट्र के भावी कर्णधार और होते हैं। यदि शिक्षक अपने छात्रों का निर्माण ठीक से न करें तो उसकी गलती राष्ट्र के भविष्य में झलकती है। महर्षि अरविंद कहते हैं कि अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुरमाली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को भी यह समझ लेना चाहिए की “यह तन विष की बैलरी गुरु अमरित की खान, सीस दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान।

   
डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान दार्शनिक, शिक्षक और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति थे। इन्होंने कबीरदास की भांति शिक्षकों की महिमा को मंडित करने के लिए अपने प्रशंसकों द्वारा उनका जन्मदिवस  सार्वजनिक रूप से मनाने के आग्रह पर अपना जन्मदिवस शिक्षकों के नाम समर्पित कर दिया और 1962 से प्रति वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा। 

       
किसी भी राष्ट्र के सर्वांगीण  विकास में शिक्षकों की भूमिका  अप्रतिम होती है जैसा कि चाणक्य कहते हैं कि ' शिक्षक कभी साधारण नहीं होता प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं।' डॉ. राधाकृष्णन का मत है कि शिक्षक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को बौद्धिक परंपराएं और तकनीकी कौशल पहुंचाने का केंद्र है। हेनरी ब्रुक्स एडम्स कहते हैं कि 'एक शिक्षक अनंत काल को प्रभावित करता है,वह कभी नहीं बता सकता कि उसका प्रभाव कहां रुकता है।'

डॉ.भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव, अधिकार प्राप्ति और मुक्ति का सबसे शक्तिशाली साधन माना। उनकी दृष्टि में शिक्षक राष्ट्र रूपी रथ का सारथी है नौकरी करने वाला मास्टर नहीं। शिक्षा केवल किताबों से ही नहीं मिलती, वह शिक्षक के आचरण और व्यवहार से भी मिलती है। इसलिए शिक्षक में करुणा, समता और बंधुता का भाव होना चाहिए। वह प्रज्ञावान शीलवान और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाला योग्य शिक्षक होना चाहिए। 

             
जिस धरा पर कबीर ने गुरु की महिमा को गोविंद से  पहले ये कह कर मंडित किया कि 'हरि रूठै गुरु ठौर है, गुरु रूठै नहीं ठौर, उसी धरा पर क्या शिक्षकों की गरिमा का सम्मान सिर्फ एक दिन होना चाहिए? क्या ये संभव नहीं है कि शिक्षक जो न केवल राष्ट्र निर्माता चरित्र निर्माता हैं उसकी महिमा का सम्मान निरंतर करें क्योंकि राष्ट्र का निर्माण सिर्फ एक दिन में नहीं होता है, वरन उसके लिए अनवरत साधना होती है और शिक्षक भी किसी एक दिन में ही अपने विद्यार्थियों को संपूर्ण नहीं बना देते, वरन वे प्रतिदिन इस दिशा में समर्पण भाव से क्रियाशील रहते हैं। अतः ऐसे आदर्श शिक्षक ही वर्ष में सिर्फ एक दिन नहीं वरन प्रतिदिन प्रतिपल प्रतिक्षण  सम्मान के पात्र होते हैं।

 

भारत की सांस्कृतिक चेतना में शिक्षा और समाज का शाश्वत संबंध रहा है। सभ्यता के प्रारंभ से ही वैविध्यपूर्ण भारतीय समाज में वेदों उपनिषदों पुराणों के जीवन दर्शन और धर्म की शिक्षा पर स्पष्ट छाप रही है । नालंदा,तक्षशिला, विक्रमशिला  भारतीय शिक्षा पद्धति के गौरवशाली बौद्धिक स्मारक हैं। गुरु और शिष्य का आदर्शात्मक संबंध अलौकिक था।नगर के कोलाहल से दूर गुरुकुल व्यवस्था में संघर्षों से मुक्त बौद्धिक शक्ति, चरित्र बल और आध्यात्मिक चेतना से संपन्न हो कर सांसारिक जीवन में उनका प्रवेश अर्थ धर्म काम और मोक्ष के पुरुषार्थ की सिद्धि में सहायक होकर पूर्ण मनुष्य का निर्माण करने वाली थी।

किन्तु मध्यकालीन भारतीय समाज में शिक्षा प्रदान करने के प्रमुख माध्यम मकतबा और मदरसे बने रहे जिसके कारण शिक्षा का क्षेत्र बहुत सीमित हो गया। इसके पश्चात आए अंग्रेजों ने  शिक्षा के रहे सहे अस्तित्व को भी विकृत कर दिया। अंग्रेज भारतीयों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी शिक्षा देने के पक्ष में नहीं थे। सन 1835 में मैकाले ने कहा कि हमें एक ऐसा वर्ग पैदा करना चाहिए जो हमारे और करोड़ों लोगों के बीच जिन पर हम शासन करते हैं, दुभाषिये का काम कर सके। ऐसे व्यक्तियों का वर्ग जो रंग और रक्त से भारतीय हो किन्तु  रुचियों, विचारों, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज हों।  

             
आज़ादी के बाद देश में शिक्षा के बहु आयामी विकास के लिए अनेक स्तरों पर पहल की गई, किंतु मुख्य प्राथमिकता गुणात्मक शिक्षा के स्थान पर परिमाणात्मक विकास पर केंद्रित होने से शिक्षा का चरित्र उपनिवेशवादी  बना रहा।

आधुनिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की आत्मा और भारतीयता की उद्घोषणा है। यह ऐसी प्रथम शिक्षा नीति है जो भारतीय व्यक्तियों के विचारों के अनुकूल है। हमारे होनहार बच्चों में ज्ञान विज्ञान के मूल स्रोत को जागृत करना इस नीति का मुख्य ध्येय है।यह अंग्रेजों की उस साजिश को भी समाप्त करने का कार्य करती है जिसमें उन्होने भाषा के आधार पर भारतीयों में हीन भावना पैदा करने का प्रयास किया था। यह नागरिक आकांक्षाओं का प्रतिबिंब और भविष्य के भारत की नींव है।

       
शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहने भर से राष्ट्र का निर्माण नहीं होता जब तक कि शिक्षक को अपने दायित्व निर्वहन में पूरी आज़ादी न दी जाए। शिक्षकों के सामाजिक आर्थिक  शैक्षणिक उत्थान के बिना राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। शिक्षक यदि तनाव से मुक्त आनन्द से युक्त और व्यर्थ की गुलामी से मुक्त है , राजनीति के विषैले वातावरण से ग्रस्त नहीं है,प्रशासन के अनावश्यक हस्तक्षेप से मुक्त है, विद्यालय में प्रवेश के लिए संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है, कोचिंग संस्थानों पर प्रतिबंध है, प्रेरणा और प्रोत्साहन का वातावरण है तभी वह शिक्षा को सही अर्थों में घटित कर सकता है। अन्यथा वह अपने शिक्षकीय दायित्व के साथ न्याय नहीं कर सकेगा।यह कटु सत्य है कि शिक्षक यदि भूखा है तो समझिए ज्ञान का सागर भी सूखा है।

           
मेरी दृष्टि में शिक्षकीय दायित्व बहुत पवित्र किन्तु कठिन है। गगन को चूमती हुई अट्टालिकाओं को निर्मित करना सरल है। उफनती नदी के वेग को नियंत्रित कर नहरें निर्मित करना भी  सरल है। चट्टानों के सीने चीर कर सड़कें बनाना भी सरल है, किंतु राष्ट्र के लिए एक आदर्श और उपयोगी पीढ़ी को निर्मित करना बहुत कठिन है।यह कठिन दायित्व हमारे प्रथम गुरु पूज्य माता और पिता के बाद शिक्षक निभा रहे हैं।


हमारे हाथों की उंगलियां एक जैसी नहीं होती। किसी तालाब में कुछ गंदी मछलियाँ हों तो वह पूरा तालाब गंदा नहीं हो जाता। शिक्षकीय समुदाय संख्या की दृष्टि से बहुत विशाल है। हो सकता है कि कुछ शिक्षक अपने निजी स्वार्थ के लिए राजनीति के विषैले माहौल में रहते हों। कुछ शिक्षक निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन भी नहीं करते। समय पर विद्यालय नहीं आते। कुछ साधारण शिक्षक हैं जो पढ़ाते हैं। कुछ श्रेष्ठ शिक्षक हैं जो व्याख्या करते हैं और कुछ उत्कृष्ट शिक्षक भी हैं जो छात्रों के मन में सीखने की जिज्ञासा पैदा करते हैं ।अतः हम समग्र शिक्षक समुदाय को लांछित नहीं कर सकते। वे शिक्षक जो अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई के प्रावधानों से ठीक किया जा सकता है।

सोशल मीडिया, इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के चमत्कारी  दौर में भी शिक्षक अनेक चुनौतियों और विषमताओं के बावजूद ज्ञान की रश्मियों से अपने विद्यार्थियों को आलोकित कर रहे हैं ।उनमें जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने का जीवट सृजित कर रहे हैं। उनके चिंतन के क्षितिज का विस्तार कर उनके विचारों के वैभव को निखार रहे हैं। तभी तो यह देश आगे बढ़ रहा है प्रगति कर रहा है। आज हमारे देश में विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर उपलब्धियों के जो नित नए आयाम स्थापित हो रहे हैं  उसकी बुनियाद में कहीं न कहीं हमारे शिक्षकों का समर्पण भी है। तो ऐसी स्थिति में शिक्षकों का सम्मान सिर्फ एक दिन ही क्यों। वर्ष के बाकी 364 दिन क्यों नहीं होना चाहिए।


हमारे देश में ऐसे आदर्श शिक्षकों की कमी नहीं है जिनका जीवन प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रकाश स्तम्भ है। 

एक विद्यालय तीन विद्यार्थी विलंब से पहुंचे, तब तक प्रार्थना समाप्त हो चुकी थी। स्कूल के प्राचार्य ने इन चारों को  स्कूल के मैदान में तीन चक्कर लगाने की सजा दी। तीनों विद्यार्थी प्राचार्य के आदेश के पालन में मैदान के चक्कर लगाना शुरू कर दिए। दो चक्कर लगाने के बाद उन्होंने देखा कि उनके पीछे पीछे प्राचार्य जिनकी उम्र लगभग पचपन वर्ष की रही होगीभी हांफते हुए दौड़ रहे हैं। छात्रों ने रुककर प्राचार्य से पूछा सर आप किस लिए दौड़ रहे हैं? तब प्राचार्य ने जो उत्तर दिया वह उनके आदर्श चरित्र की पराकाष्ठा है।

प्राचार्य ने कहा कि मेरी तमाम कोशिशों के बाद भी यदि मैं छात्रों को अनुशासन और समय की महत्ता नहीं समझा सका तो इसका अर्थ है कि मेरे प्रयासों में ही कहीं त्रुटि है। इसलिए जितनी गलती आपकी है उससे ज्यादा मेरी गलती है। चूंकि मुझे कोई सजा नहीं दे सकता इसलिए मैंने अपनी सजा खुद ही तय कर दी है और जब तक मैं इस स्कूल के विद्यार्थियों को समय का अनुशासन नहीं समझा पाऊंगा तब तक मैं भी उनके साथ मैदान के चक्कर लगाऊंगा। क्या ऐसे आदर्श शिक्षक के सम्मान में हमें श्रद्धावनत नहीं होना चाहिए।

Taapsee Pannu: हम और पैसे कैसे कमाएंगे? फिल्मों में महिलाओं को ‘ऑब्जेक्ट’ की तरह दिखाए जाने पर बोलीं तापसी पन्नू

Taapsee Pannu: तापसी पन्नू ने भारतीय सिनेमा में महिलाओं के किरदारों को लेकर हो रही चर्चा पर अपनी राय रखी है। हाल ही में राम चरण की ‘पेड्डी’ और यश की ‘टॉक्सिक’ जैसी दो बड़े बजट की फिल्मों में महिला किरदारों को दिखाए जाने के तरीके की ऑनलाइन काफी आलोचना हुई। इस विवाद पर बात करते हुए तापसी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री अक्सर यह कहकर आलोचना से बचती है कि ऐसा कंटेंट सिर्फ दर्शकों की मांग पर बनाया जाता है।

जूम टीवी के साथ बातचीत में तापसी ने बताया कि इंडस्ट्री अक्सर ऐसे किरदारों के लिए दर्शकों को जिम्मेदार ठहराती है और इसे एक ऐसी लड़ाई बताया जिसे एक्टर्स दर्शकों के सपोर्ट के बिना नहीं जीत सकते। “आप चाहे कितना भी शोर मचा लें, आपको सोशल मीडिया पर उतने ही लोग मिल जाएंगे जो वही तस्वीर इस्तेमाल कर रहे होंगे, उसे जूम कर रहे होंगे, अजीब एंगल से अलग-अलग तरह के वीडियो और तस्वीरें बना रहे होंगे और उसे वायरल कर रहे होंगे। तो सोशल मीडिया पर इसके लिए दर्शक मौजूद हैं।”

इस पूरी प्रक्रिया को “मांग और आपूर्ति” (demand and supply) बताते हुए तापसी ने कहा, “लोगों को लगता है कि जनता मांग रही है तो हमें देना चाहिए, वरना हम पैसे कैसे कमाएंगे? इसलिए कला पीछे छूट जाती है, हुनर ​​पीछे छूट जाता है। कोविड से पहले हमने काफी तरक्की की थी और हम बेहतरीन फिल्मों के स्तर तक पहुंच रहे थे। लेकिन अब हम फिर से पीछे छूट रहे हैं। सभी मेकर्स दर्शकों पर दोष मढ़ देंगे और यहीं पर हम सभी एक्टर्स कोई ठोस जवाब नहीं दे पाते। यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे हम हार जाएंगे, और सिर्फ दर्शक ही हमें इसे जीतने में मदद कर सकते हैं।”

तापसी की ये बातें ‘पेड्डी’ और ‘टॉक्सिक’ दोनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच सामने आईं। फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार के बहुत ज़्यादा hypersexualised चित्रण की आलोचना हुई। सोशल मीडिया यूज़र्स ने कैमरा वर्क, रोमांटिक सीन और जाह्नवी के किरदार की असलियत के बजाय उसके शारीरिक दिखावे पर ज़्यादा ज़ोर देने को लेकर सवाल उठाए। बाद में डायरेक्टर ने फ़िल्म से ये सीन हटा दिए और माफ़ी भी मांगी।

दूसरी ओर, ‘टॉक्सिक ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में महिलाओं के चित्रण को लेकर फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले ही बहस शुरू हो गई थी। रिलीज़ के बाद आलोचना और बढ़ गई। कुछ दर्शकों ने मेकर्स पर महिला किरदारों को सिर्फ़ एक ‘वस्तु’ (object) की तरह दिखाने और उन्हें सिर्फ़ ग्लैमर, कामुकता और मुख्य पुरुष किरदार के साथ उनके रिश्तों के ज़रिए पेश करने का आरोप लगाया।

तापसी पन्नू हाल ही में नेटफ़्लिक्स फ़िल्म ‘गांधारी’ में नज़र आईं। देवाशीष मखीजा की डायरेक्ट की गई इस एक्शन थ्रिलर फ़िल्म में इशवाक सिंह, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी और मीता वशिष्ठ भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फ़िल्म अभी नेटफ़्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।

Janmashtami 2026: ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करें यशोदा मैया…’, इन हिंदी गानों के साथ मनाए जन्माष्टमी

Janmashtami 2026: पूरे देश में जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है। इस खास मौके पर देशभर के मंदिरों को और घरों को झाकी के साथ सजाया जाता है। दही हांडी आयोजित होती है। इस दौरान बॉलीवुड के कई मशहूर सुनने को मिलते हैं। ऐसे में हम आपके लिए बॉलीवुड गानों की लिस्ट लाए हैं, जो भगवान कृष्ण के इस त्योहार का मजा बढ़ा देंगे।

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया…

फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया..’ दिल को छूता है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया है, आनंद बक्शी से इसके बोल लिखे हैं। जबकि आर.डी. बर्मन का संगीत है। जन्माष्टमी के खास मौके पर सोशल मीडिया पर भी ये खूब ट्रेंड होता है।

गो गो गोविंदा

जबरदस्त बीट्स और जोश भरी कोरियोग्राफ़ी वाला यह सुपरहिट गाना, जिसमें प्रभु देवा और सोनाक्षी सिन्हा हैं, पारंपरिक दही-हंडी सेलिब्रेशन के कॉम्पिटिशन वाले जोश, खुशी और असली उत्साह को बखूबी दिखाता है।

राधा कैसे न जले

ए.आर. रहमान का ये गाना यह सदाबहार गाना राधा और भगवान कृष्ण के बीच की चंचल, रोमांटिक नोक-झोंक और हल्की-फुल्की जलन को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो इसे किसी भी त्योहार की शाम के लिए एक ज़रूरी और शानदार गाना बनाता है।

‘वो किसना है’

बांसुरी की दिल को छू लेने वाली धुन और सुखविंदर सिंह की दमदार आवाज़ से सजी यह शानदार गाना भगवान कृष्ण के बारे में बताता है। यह आपकी प्लेलिस्ट में एक गहरा और उत्साह बढ़ाने वाला आध्यात्मिक एहसास जोड़ता है।

राधे-राधे

तेज लोक संगीत की धुनों और जोश भरे आधुनिक रिदम वाला यह एनर्जेटिक गाना मथुरा और गोकुल की जीवंत गलियों से प्रेरित है। यह गाना घर पर होने वाले जश्न में हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर देगा।

मच गया शोर

अमिताभ बच्चन अभिनीत यह सदाबहार रेट्रो गाना, त्योहारों के दौरान होने वाले मेल-जोल, खुशी-खुशी गाए जाने वाले गीतों और सड़कों पर होने वाले उत्सव के उस जादुई माहौल को दर्शाता है, जिसने पीढ़ियों से भारतीय त्योहारों की पहचान बनाई है।

मैया यशोदा

यह प्यारा ग्रुप डांस गाना मैया यशोदा से नटखट शिकायतों के ज़रिए छोटे कान्हा की शरारतों भरी बचपन की हरकतों को खूबसूरती से दिखाता है। यह आपके त्योहार के माहौल में अपनापन, परिवार का जुड़ाव और भारतीय संस्कृति की क्लासिक खूबसूरती लाता है।

चांदी की दाल पर

90 के दशक के जोशीले डांस म्यूज़िक वाले इस मज़ेदार और चंचल गाने से प्लेलिस्ट में एक हल्की-फुल्की और शरारती रौनक आ जाती है। यह गाना कृष्ण के मशहूर शरारती अंदाज़ को बॉलीवुड के मज़ेदार और एंटरटेनिंग रूप में पेश करता है।

कान्हा सो जा ज़रा

ज़बरदस्त एनर्जी वाले डांस गानों के बीच एक सुकून देने वाला बदलाव पेश करने वाला यह शानदार और बेहतरीन ढंग से रचा गया लोरी-नुमा गीत, एक शांत और सुकून भरा माहौल बनाता है। यह देर रात मंदिर की प्रार्थनाओं और आधी रात की दिव्य आरती की रस्मों के लिए एकदम सही है।

बिना किसी बड़े स्टार और PR के नीम करोली बाबा पर मूवी बना 60 करोड़ पार! जानिए कौन हैं हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी

राइटर-डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफ़िस सरप्राइज़ फ़िल्मों में से एक बनकर उभरी है। 7 अगस्त को सिर्फ़ 10 लाख रुपये की ओपनिंग के बावजूद, यह स्पिरिचुअल ड्रामा फ़िल्म – जिसे लगभग 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था – भारत में 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करने में सफल रही।

इस फ़िल्म ने 41,245 शो में कुल मिलाकर 72.97 करोड़ रुपये और नेट कलेक्शन के तौर पर 61.88 करोड़ रुपये कमाए हैं। अपने 26वें दिन, ‘हनुमान अंश’ ने 8.50 करोड़ रुपये (नेट) कमाए, जिससे इसने यश की फ़िल्म ‘टॉक्सिक’ की 8.20 करोड़ रुपये की कमाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

फ़िल्म की लगातार अच्छी रफ़्तार को देखते हुए अब यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि क्या ‘हनुमान अंश’ 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच पाएगी। इस बड़ी हिट के बाद, फ़ैंस यह जानना चाहते हैं कि विशाल चतुर्वेदी कौन हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के अनुसार, विशाल चतुर्वेदी एक फ़िल्ममेकर और ‘स्वंभू मीडिया नेटवर्क’ के फ़ाउंडर हैं।

उन्हें कंटेंट प्रोडक्शन, फ़िल्ममेकिंग और पाक कला (culinary arts) में 14 साल से ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने ‘सेतु’ (2023) और ‘रब करे तू भी’ (2021) में राइटर के तौर पर काम किया है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित है, जिसे चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है।

लोगों के बीच फ़िल्म की तारीफ़ (word-of-mouth) ने 10 लाख रुपये की ओपनिंग वाली इस फ़िल्म की किस्मत बदल दी और आख़िरी हफ़्तों में इसकी कमाई में ज़बरदस्त उछाल आया। यह फ़िल्म इस साल की सबसे चौंकाने वाली थिएटर सक्सेस स्टोरीज़ में से एक है और चौथे हफ़्ते में इसका प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अब ‘हनुमान अंश’ को ‘होम्बले फ़िल्म्स’ द्वारा दुनिया भर में रिलीज़ किया जा रहा है। यह फ़िल्म अब 11 सितंबर को दुनिया भर में रिलीज़ होगी।

Taapsee Pannu: ‘ऐसी फिल्में करने से पहले रिटायर हो जाऊंगी’, तापसी पन्नू ने कसा कियारा आडवाणी की ‘टॉक्सिक’ पर तंज?

Taapsee Pannu: हाल ही में एक इंटरव्यू में तापसी पन्नू ने यश और कियारा आडवाणी की बड़ी फिल्म ‘टॉक्सिक’ पर इशारों-इशारों में तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में रिलीज हुई “ऐसी फिल्में” करने के बजाय वह रिटायर होना पसंद करेंगी। हालांकि तापसी ने किसी फ़िल्म या एक्टर का नाम नहीं लिया, लेकिन यूजर्स का मानना ​​है कि उनकी बात ‘टॉक्सिक’ के बारे में थी।

सुचिन मेहरोत्रा ​​के साथ बातचीत में तापसी ने कहा कि वह खुद को “खुशनसीब” मानती हैं कि उन्होंने अपना करियर एक दशक पहले शुरू किया था, जब हिंदी की मेनस्ट्रीम फ़िल्में अलग तरह की होती थीं और “एक ही तरह” की नहीं होती थीं। उन्होंने कहा, “अगर आज के समय में सिर्फ़ इसी तरह की फ़िल्में बन रही होतीं, तो मुझ जैसे इंसान का करियर शायद बन ही नहीं पाता।”

‘गंधारी’ फ़िल्म की एक्ट्रेस ने बताया कि हाल ही में अपने परिवार के साथ पिछले कुछ महीनों में रिलीज़ हुई कुछ फ़िल्में देखते हुए उन्होंने इस बारे में बात की थी। तापसी ने साफ़ किया कि एक एक्टर के तौर पर वह आजकल बन रही इस तरह की फ़िल्मों का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं।

एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने सोचा कि क्या अब मेरे रिटायर होने का समय आ गया है।”तापसी ने साफ़ किया कि वह समझती हैं कि ऐसी फ़िल्मों के लिए दर्शक होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह खुद ऐसी फ़िल्में करना चाहेंगी। मुझे अपना काम पसंद है, लेकिन इतना भी नहीं कि मैं आंख बंद करके कुछ भी करूं। मैं अपने काम से इतना अंधा प्यार नहीं करती कि वैसी फ़िल्में करती रहूं।”

अपने फ़िल्मी सफ़र पर बात करते हुए तापसी ने कहा कि वह ऐसी फ़िल्मों की लिस्ट बनाना चाहती हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरें। पन्नू ने कहा, “और मेरा पक्का मानना ​​है कि एक फ़िल्मोग्राफ़ी होती है, है ना? समय बदलेगा, लेकिन फ़िल्मोग्राफ़ी नहीं बदलेगी।” तापसी ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि सालों बाद जब वह अपने काम को देखें, तो उन्हें अपने फैसलों पर शर्मिंदगी महसूस न हो। उन्होंने कहा, “आज से 10 साल बाद, शायद जॉनर बदल जाए, जैसा कि मैंने कहा, लेकिन मेरी फ़िल्मोग्राफ़ी वैसी ही रहेगी।”

इंटरनेट का रिएक्शन

जैसे ही यह क्लिप वायरल हुई, इंटरनेट पर लोगों ने कमेंट करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि तापसी ने कियारा आडवाणी की फिल्म ‘Toxic’ पर तंज कसा है। एक यूज़र ने कहा, “असल में तापसी पन्नू ने अपने करियर की शुरुआत में ही वे सभी फिल्में कर ली थीं। इसलिए अब उनके पास देने के लिए कुछ खास नहीं बचा है। अब रोना बंद करो @taapsee, कियारा आडवाणी का करियर बहुत शानदार है।”

एक और कमेंट में लिखा था, “कियारा ने तो कम से कम फिल्म में काम किया… आपकी तो OTT पर ‘हसीन दिलरुबा’ आई थी… जो दिखाना था, आपने दिखा दिया।” एक और कमेंट में कहा गया, “तो उनसे कहिए कि रिटायर हो जाएं और अगर वह ‘अपनी ज़िंदगी, अपने नियम’ वाली बात करती हैं, तो यही बात दूसरी अभिनेत्रियों पर भी लागू होती है।”

‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups’ को KVN प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के तहत वेंकट के. नारायण और यश ने प्रोड्यूस किया है। कन्नड़ और अंग्रेज़ी में लिखी और शूट की गई इस फिल्म के हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम डब वर्जन भी रिलीज हुए हैं। गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई इस फिल्म में नयनतारा, हुमा कुरैशी, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे शानदार कलाकार हैं। फिल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले। फिल्म ने अब तक उतनी कमाई नहीं की है जितनी उम्मीद की जा रही थी।