Mini Noida: दिवाली पर गाजियाबाद में लॉन्च होंगे 2000 प्लॉट, दिल्ली-NCR में घर बनाने का शानदार मौका! जानिए सभी डिटेल्स

Harnandipuram Green Township Ghaziabad: दिल्ली-एनसीआर में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) करीब 20 साल के लंबे अंतराल के बाद एक विशाल और हाइटेक आवासीय टाउनशिप को धरातल पर उतारने जा रहा है। मधुबन बापूधाम योजना के बाद जीडीए की इस नई टाउनशिप का नाम ‘हरनंदीपुरम’ रखा गया है, जिसे इसकी भव्यता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ‘मिनी नोएडा’ भी कहा जा रहा है।

जीडीए की बोर्ड बैठक में ‘हरनंदीपुरम’ ग्रीन टाउनशिप के पहले चरण के लेआउट प्लान को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी हाउसिंग प्रोजेक्ट को इसी साल दिवाली 2026 के शुभ अवसर पर आम जनता के लिए आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा।

1997 बीघा में फैलेगी टाउनशिप, ऐसा है मास्टर प्लान

हरनंदीपुरम प्रोजेक्ट को कुल 501 हेक्टेयर (लगभग 1997 बीघा) की विशाल जमीन पर विकसित करने की योजना है।

2000 आवासीय प्लॉट्स: योजना के पहले चरण में 120 वर्ग मीटर से लेकर 500 वर्ग मीटर तक के आकार के लगभग 2,000 रिहायशी भूखंड जनता के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

ग्रुप हाउसिंग और EWS फ्लैट्स: स्वतंत्र प्लॉट्स के अलावा, बिल्डरों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज के लिए जमीन आरक्षित की जाएगी। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों के लिए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा।

वर्ल्ड क्लास सुविधाएं: इस टाउनशिप को पूरी तरह इको-फ्रेंडली और प्रीमियम लिविंग स्पेस के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। इसमें चौड़ी सड़कें, गोल्फ कोर्स, मॉडर्न फूड कोर्ट, अत्याधुनिक अंडरग्राउंड सीवरेज व ड्रेनेज नेटवर्क और पर्यावरण-अनुकूल ई-बस कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

गाजियाबाद के इन 8 गांवों की जमीन पर बसेगा नया शहर

जीडीए ने इस पूरी ग्रीन टाउनशिप के लिए गाजियाबाद के आसपास के 8 प्रमुख गांवों की जमीन को चिह्नित किया है:

  1. भोवापुर
  2. शाहपुर निज मोरटा
  3. मोरटा
  4. मथुरापुर
  5. शमशेर
  6. चंपत नगर
  7. भनेड़ा खुर्द
  8. नगला फिरोज मोहनपुर

जीडीए ने पहले चरण के विकास के लिए भोवापुर और शाहपुर निज मोरटा गांव की करीब 47.16 हेक्टेयर भूमि को प्राथमिकता के आधार पर चुना है, जहां से शुरुआती विकास कार्य और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।

15 मिनट में गाजियाबाद, 30 मिनट में दिल्ली-नोएडा

हरनंदीपुरम टाउनशिप की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी खास लोकेशन और दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख इलाकों से सीधी कनेक्टिविटी है। यह टाउनशिप दुहाई नमो भारत स्टेशन से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी, जिससे दिल्ली और मेरठ का सफर मिनटों में पूरा हो सकेगा। यह प्रोजेक्ट राजनगर एक्सटेंशन के ठीक पास स्थित है और दिल्ली-मेरठ रोड से सीधे जुड़ा हुआ है।

गाजियाबाद मुख्य शहर: मात्र 15 मिनट

नोएडा सेक्टर-62: लगभग 30 मिनट

दिल्ली बॉर्डर: महज 30 मिनट

अदाणी ग्रुप का पश्चिम बंगाल के लिए मास्टरप्लान! 2035 तक ₹1 लाख करोड़ के निवेश का ऐलान, पोर्ट से डेटा सेंटर तक क्या-क्या बनेगा?

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार, 24 सितंबर को कहा कि अदाणी ग्रुप 2035 तक पश्चिम बंगाल में पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, सड़कों और पुलों, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश करेगा। ₹1 लाख करोड़ के निवेश के इस रोडमैप में 2035 तक पूरे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

यह घोषणा गौतम अदाणी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा कोलकाता के न्यू टाउन में ग्रुप के प्रस्तावित 2,000-बेड वाले ‘अदाणी आरोग्य मंदिर’ की आधारशिला रखने के मौके पर की गई। अदाणी फाउंडेशन द्वारा विकसित किए जाने वाले इस हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में ₹4,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश होगा।

अपनी निवेश योजना के बारे में बात करते हुए गौतम अदाणी ने कहा, “हम पश्चिम बंगाल को पूर्व में अपनी कर्मभूमि मानते हैं।” उन्होंने ग्रुप के पूर्वी क्षेत्र के कामकाज में राज्य की भूमिका की तुलना गुजरात के मुंद्रा से की, जिसे उन्होंने ग्रुप के बड़े प्रोजेक्ट्स की नींव बताया।

अस्पताल में कैंसर के इलाज की होगी सुविधा

अदाणी आरोग्य मंदिर 51.75 एकड़ में फैला होगा और इसमें 2,000 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, एक मेडिकल कॉलेज, एक नर्सिंग कॉलेज और सहयोगी हेल्थकेयर व पैरामेडिकल शिक्षा के संस्थान शामिल होंगे।

इस हेल्थकेयर प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए गौत अदाणी ने कहा, “अडानी आरोग्य मंदिर एक नॉन-प्रॉफिट मेडिकल इंस्टीट्यूट होगा जिसमें 2,000 बिस्तर होंगे। इनमें से 1,000 बिस्तर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए होंगे, जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं।”

अस्पताल के पहले चरण में कैंसर के इलाज पर फोकस किया जाएगा और टर्शियरी और स्पेशलाइज़्ड हेल्थकेयर सर्विस दी जाएंगी। कैंपस में स्टेप-डाउन और ट्रांज़िशनल केयर की सुविधाएं, मरीज़ों के रिश्तेदारों के लिए रहने की जगह और हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स के लिए रिहायशी सुविधाएं भी होंगी।

मेडिकल कॉलेज में हर साल 150 अंडरग्रेजुएट छात्र, 100 से ज़्यादा पोस्टग्रेजुएट छात्र और 40 से ज़्यादा सुपर-स्पेशलिस्ट दाखिला ले सकेंगे। ग्रुप ने कहा कि बड़े हेल्थकेयर इकोसिस्टम से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट में जीनोमिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन, बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लिनिकल ट्रायल और बायोमेडिकल साइंस के दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी रिसर्च सुविधाएं भी शामिल होंगी।

ग्रुप की योजनाओं में राज्य की भूमिका के बारे में बात करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “हम बंगाल को पुनर्निमित करने में आपकी मौजूदगी की उम्मीद करते हैं। इसका अंतिम विज़न सिर्फ़ एक हॉस्पिटल कैंपस नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सिटी बनाना है।”

राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार और दुर्गा पूजा के लिए हुए करार

हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के साथ-साथ, अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ दो और समझौते (MoU) किए। एक समझौता राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार से जुड़ा है, जबकि दूसरा ग्रुप की ‘अदाणी पूजा प्रीव्यू’ पहल के ज़रिए कोलकाता के दुर्गा पूजा इकोसिस्टम को सहयोग देने से संबंधित है। अदाणी ग्रुप ने कुमारतुली घाट के कायाकल्प में सहयोग की भी घोषणा की।

 

 

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PB Fintech Share Price: Policybazaar के शेयरों पर अलर्ट, इस कारण दिख सकता है दबाव

PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार (Policybazaar) की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक के शेयरों में नियर टर्म में बिकवाली का दबाव दिख सकता है। ऐसा ब्रोकरेज फर्म बर्न्स्टीन का मानना है। 24 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में बर्न्स्टीन ने डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म पर इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का ड्राफ्ट पेपर सामने आने के बाद पॉलिसीबाजार पर इस दबाव की बात कही है। अभी इसके शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर यह 5% की बढ़त के साथ ₹1890.00 पर बंद हुआ था। अभी पिछले महीने यशिश दहिया के पद छोड़ने की अफवाहों पर इसके शेयरों में तेज हलचल दिखी थी, लेकिन यशिश ने इसका खंडन किया था।

Policybazaar की PB Fintech पर Bernstein क्यों बेयरेश

बर्न्स्टीन ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर बीमा नियामक IRDA के प्रस्ताव का सबसे अधिक नुकसान पीबी फिनटेक को होगा क्योंकि इसके टेक-रेट्स यानी कमीशन पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकाल पाएगी।

इरडा ने बीमा की लागत कम करने, अंडरसर्व्ड लोगों तक इसका कवरेज बढ़ाने और इंश्योरेंस सेक्टर की टिकाऊ ग्रोथ को लेकर स्ट्रक्चरल रिफॉर्म का प्रस्ताव पेश किया है। इसमें मैनेजमेंट से जुड़े खर्चों को तार्किक बनाने, सेगमेंट के हिसाब से कमीशन की लिमिट फिर से तय करने, डार्क पैटर्न पर रोक लगाने यानी बिना पर्सनल डिटेल्स के प्रोडक्ट और कीमत की जानकारी देने, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स पर कमीशन की दर बताने और मोटर इंश्योरेंस की प्रक्रिया को आसान बताने की बात है। इसमें अन्य प्रस्ताव भी हैं जैसे कि बैंक कौन सी पॉलिसी और कैसे बेचें, एजेंटों को इंसेंटिव देने पर रोक, इंश्योरेंस बेचने के लिए MIIs (मल्टी-इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज) का इस्तेमाल कैसे हो, और क्रेडिट लाइफ जैसे इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इन प्रस्तावों से पीबी फिनटेक के मुनाफे का गणित बिगड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इरडा के प्रस्तावित कैप से कंपनियों की हेल्थ/टर्म इंश्योरेंस ग्रोथ पर कुछ असर पड़ेगा। हालांकि कम लागत और हायर एजेंसी-यूलिप मिक्स वाली कंपनियों जैसे कि एसबीआई लाइफ और एलआईसी पर इसका असर कम होगा। इरडा के प्रस्ताव के हिसाब से कोटेशन देने के लिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स नहीं मांगा जा सकता है जो बर्न्स्टीव के मुताबिक पीबी फिनटेक के लिए ग्राहक बनाने का एक मुख्य जरिया है। इसके अलावा बर्न्स्टीन के मुताबिक ड्राफ्ट पेपर में एडवाइजरी फीस और मार्केटिंग खर्च से जुड़े लूपहोल्स को भी खत्म किया जा रहा है जिसका हल पीबी फिनटेक को खोजना होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलिसीबाजार के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 9 दिसंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,963.00 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 3 ही महीने में यह 32.03% फिसलकर 2 मार्च 2026 को ₹1,334.20 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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OTT Releases This Week: हुंकार, शक से लेकर टॉक्सिक तक, इस हफ्ते ओटीटी पर ये फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज

OTT Releases This Week: सितंबर के आखिरी वीक में स्ट्रीमिंग कैलेंडर में बहुत सारी नई चीजें आ रही हैं। कोर्टरूम ड्रामा, साइकोलॉजिकल मिस्ट्री, गैंगस्टर कहानियां, टीनएज रोमांस और सच्ची घटनाओं पर आधारित क्राइम ड्रामा – ये सभी दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। यहां 22 सितंबर से 26 सितंबर के बीच आने वाली OTT फिल्मों और सीरीज की पूरी लिस्ट दी गई है।

हुंकार द रोर – JioHotstar, 25 सितंबर

‘सैयारा’ में शानदार काम करने के बाद अनीट पड्डा इस सोशल-कोर्टरूम थ्रिलर में एक बहुत ही गंभीर और डार्क किरदार निभा रही हैं। इसे प्रियंका चोपड़ा की ‘पर्पल पेबल पिक्चर्स’ ने ‘अप्लाज एंटरटेनमेंट’ और ‘बिड़ला स्टूडियोज’ के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है। पड्डा इसमें मीनू रावत का किरदार निभा रही हैं, जो 17 साल की है। फातिमा सना शेख फिल्म में एक सख्त पुलिस अफसर का रोल निभा रही हैं, जो इस केस में शामिल हो जाती हैं, जबकि मोहम्मद जीशान अय्यूब, अर्जुन माथुर, रघुबीर यादव और राम कपूर अहम किरदारों में हैं।

शक ट्रस्ट नो वन – नेटफ्लिक्स, 24 सितंबर

परिणीति चोपड़ा एक ऐसी मिस्ट्री-सीरीज से अपना डेब्यू कर रही हैं, जो हर माता-पिता के सबसे बुरे सपने और एक दर्दनाक सवाल पर आधारित है। क्या होता है जब उम्मीद ही शक की वजह बन जाए? फिल्म में जेनिफर विंगेट, ताहिर राज भसीन, सोनी राजदान, सुमीत व्यास, अनूप सोनी और हरलीन सेठी भी चोपड़ा के साथ इस बड़ी कास्ट का हिस्सा हैं।

टॉक्सिक अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स – जी5, 25 सितंबर

गीतू मोहनदास ‘टॉक्सिक अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ के साथ आजादी के बाद के गोवा की अंधेरी अंडरवर्ल्ड दुनिया में ले जाती हैं। यह यश की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है। यश राया और रूमी की दोहरी भूमिकाओं में नजर आते हैं और नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे बड़े कलाकारों की टीम को लीड करते हैं।

डोंट बी शाई – प्राइम वीडियो, 25 सितंबर

आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट का प्रोडक्शन हाउस ‘इटर्नल सनशाइन प्रोडक्शंस’ इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म के जरिए चार नए युवा एक्टर्स को पेश कर रहा है। यह फिल्म दिखाती है कि जिंदगी अक्सर हमारी बनाई योजनाओं के हिसाब से नहीं चलती और यह बात कितनी अजीब और दिलचस्प हो सकती है। आरुषि बजाज, पीयूष खटी, अंश दुग्गल के अलावा फिल्म में कुणाल रॉय कपूर, अनुराग बसु, नेहा धूपिया और अंजू अल्वा नाइक भी नजर आएंगे।

राइज एंड फॉल सीजन 2 – प्राइम वीडियो, 26 सितंबर

‘राइज एंड फॉल’ का दूसरा सीजन आ रहा है, जिसे पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग होस्ट करेंगे। इस रियलिटी कॉम्पिटिशन में 15 कंटेस्टेंट को एक ऐसे सोशल स्ट्रक्चर में रखा जाता है, जो जानबूझकर अस्थिर होता है और जहां किसी की भी पोजिशन पक्की नहीं होती। पार्टिसिपेंट्स को एक ऐसे फॉर्मेट में खेलना होता है जहां पावर कभी भी बदल सकती है।

कांग्रेस अपने कारणों से हारी है

बहुत आदर्श स्थितियों के बावजूद दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन यानी डूसू का चुनाव कांग्रेस हार गई। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को सेंट्रल पैनल की चार में से एक भी सीट नहीं मिली। पिछले साल के चुनाव में एनएसयूआई ने एक सीट जीती थी और उससे पहले दो सीटें मिली थीं। यानी दो से एक पर और फिर शून्य पर आ गई। उपाध्यक्ष के पद पर कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय लड़े दीपांशु शौकीन सबसे ज्यादा वोट पाकर सबसे ज्यादा वोट से जीते। उनको 30 हजार से ज्यादा वोट आए, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार वीर चतरथ को चार हजार से कुछ ज्यादा वोट आया, जो नोटा से भी कम है।

सबसे ज्यादा चर्चा इसी सीट की हो रही है। मीडिया से लेकर राजनीतिक बिरादरी में सब कांग्रेस की और खास कर एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार की धुनाई कर रहे हैं कि इतने मजबूत उम्मीदवार दीपांशु शौकीन को उन्होंने टिकट नहीं दी, जो निर्दलीय लड़ कर 30 हजार वोट लाया और जिसको टिकट दी उसे चार हजार वोट मिले। सवाल है कि क्या कन्हैया ने वीर चतरथ को टिकट दी? वीर के पिता मनीष चतरथ हैं, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं और कांग्रेस मुख्यालय के प्रभारी हैं। उनके बेटे की टिकट भला कौन रोक सकता था! उपाध्यक्ष की टिकट पहले से तय थी। तभी जब दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट मांगी तो कांग्रेस को मना करना पड़ा।

अब सवाल है कि दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट क्यों मांगी? यह सचमुच हैरान करने वाली बात है। इतना लोकप्रिय छात्र नेता, जो सत्य निकेतन की बिल्डिंग गिरने के बाद छात्रों की सुरक्षा की गारंटी होने तक खाली पैर घूम रहा हो और अपार समर्थन हासिल कर रहा हो वह उपाध्यक्ष की टिकट क्यों मांगेगा? उसे तो अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहिए! हकीकत यह है कि कांग्रेस ने दीपांशु का अध्यक्ष की ही टिकट ऑफर की थी। लेकिन चूंकि अध्यक्ष पद के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने यश डबास को टिकट दे दी थी इसलिए बताया जा रहा है कि दीपांशु ने यह कहते हुए अध्यक्ष की टिकट से इनकार किया कि यश डबास उसी की गोत्र का जाट है। जाट के खिलाफ जाट कैसे लड़े इसी सोच में दीपांशु ने उपाध्यक्ष की टिकट मांगी और नहीं मिली तो निर्दलीय लड़ा।

दीपांशु के इनकार के बाद कांग्रेस ने विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष की टिकट दी। अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को अध्यक्ष की टिकट देना बड़ा फैसला था। विजय शंकर ने एबीवीपी के यश डबास को कड़ी टक्कर दी और अंतिम फैसला सिर्फ दो हजार वोट से हुआ। कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग प्रचार कर रहे हैं कि एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मीणा को टिकट दिलाई। यानी उसमें एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया का रोल नहीं है। सोचें, क्या चुनिंदा व्याख्या है! अध्यक्ष का उम्मीदवार अच्छा लड़ा तो टिकट विनोद जाखड़ ने दिलाई और उपाध्यक्ष का उम्मीदवार, जो कांग्रेस के एक बड़े नेता का बेटा है वह खराब लड़ा तो उसकी टिकट कन्हैया ने कराई! असल में यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की समस्या है, जहां नेताओं के बच्चे लायक हों या नहीं उनको टिकट देने का चलन है। इसलिए वीर चतरथ को टिकट मिली। दूसरे, दिल्ली यूनिवर्सिटी की जाट राजनीति के कारण एनएसयूआई के मजबूत जाट नेता ने टिकट से इनकार किया। अगर कांग्रेस को चतरथ को टिकट देने की मजबूरी नहीं होती और दीपांशु को टिकट देती तो हो सकता है कि वह अध्यक्ष औऱ उपाध्यक्ष दोनों पद जीत जाती।

जंतर मंतर बेअसर नहीं रहा है

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी डूसू के चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के बुरी तरह से हारने और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के चार में से तीन सीटों पर जीत जाने के बाद ऐसी व्याख्या की जा रही है, जैसे जंतर मंतर पर हुआ छात्रों का आंदोलन बेअसर रहा और देश का ‘जेन जी’ भाजपा और संघ के साथ है। लेकिन यह असली तस्वीर नहीं है। जंतर मंतर का आंदोलन बेअसर नहीं हुआ है और न छात्रों का गुस्सा शांत हुआ है। उन्होंने अलग तरह से अपने गुस्से को जाहिर किया है। यह साफ दिख रहा है कि एबीवीपी के लिए कोई लहर नहीं थी। वह प्रबंधन और विपक्ष के वोटों के बंटवारे की वजह से जीत गई। यह कोई निर्णायक जीत नहीं है। अगर कोई लहर होती तो ऐसा नहीं होता कि उपाध्यक्ष के पद पर उसका उम्मीदवार 16 हजार वोट से हारता। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव भी गिर पड़ के जैसे तैसे ही जीता है।

तभी इस पूरे मामले में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। अगर विपक्ष ने तालमेल कर लिया होता और एक होकर लड़ते तो डूसू की सभी चार सीटों पर विपक्ष की जीत होती। सोचें, कांग्रेस के सुप्रीम लीडर राहुल गांधी इन दिनों ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कर रहे हैं लेकिन देश की छात्र राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में दिलचस्पी नहीं ली। उन्होंने सीपीआई माले के छात्र संगठन आईसा की नेहा बोरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उनसे तालमेल की बात वे कर सकते थे। वे सीधे दीपांकर भट्टाचार्य से भी बात कर सकते थे। लेकिन लेफ्ट को गठबंधन बना कर अलग लड़ने दिया गया। तभी खराब माहौल के बावजूद एबीवीपी जीती।

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 और विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। यश 2,053 वोट से जीते, जबकि लेफ्ट की अनन्या रतूड़ी को 5,377 वोट मिले। सचिव पद पर एबीवीपी की जीत सात हजार के करीब वोट से हुई है, जबकि लेफ्ट को 87 सौ वोट मिला। ऐसे ही संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी ने सपा के विशेष यादव को 837 वोट से हराया। एबीवीपी उम्मीदवार को 16,615 वोट मिले, जबकि कांग्रेस, सपा और लेफ्ट को मिला कर इसके दोगुने से ज्यादा करीब 37 हजार वोट मिले।

जाटों ने दिखाया कि कैसे राजनीति होती है

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी डूसू के चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जाट जीते हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के यश डबास अध्यक्ष तो निर्दलीय दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष बने हैं। आमतौर पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जाति का गणित ज्यादा देखा जाता है। लेकिन दिल्ली छात्र संघ के चुनाव में जाति और क्षेत्र का गणित किस तरह से काम करता है इसका उदाहरण है इस बार का चुनाव। दीपांशु शौकीन इसलिए अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़े क्योंकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यश डबास को उम्मीदवार बना दिया। दोनों एक जाति और एक गोत्र के हैं। दीपांशु नहीं लड़े तो जाट वोट एबीवीपी के पक्ष में एकजुट हुआ और फिर उपाध्यक्ष के लिए वह पूरा वोट दीपांशु के पक्ष में शिफ्ट हो गया।

यह पूरी राजनीति इतने कोऑर्डिनेटेड तरीके से हुई, जिसकी मिसाल बड़े चुनावों में नहीं मिलेगी। दोनों सीटों पर जाट जीतें, यह सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के सबसे बड़े जाट नेता यानी भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने चुनाव से दूरी रखी। दीपेंद्र आमतौर पर डूसू के चुनाव में प्रचार के लिए जाते हैं। लेकिन इस बार नहीं गए। कहा जा रहा है कि उनके हिसाब से टिकट नहीं दी गई। लेकिन असल कारण अध्यक्ष पर जाट बनाम आदिवासी का मुकाबला होना है। जाट के मुकाबले आदिवासी को जिताने की अपील करने दीपेंद्र हुड्डा नहीं जा सकते थे। हालांकि कांग्रेस के इस प्रयोग को काफी हद तक कामयाब माना जा रहा है। पहली बार कोई आदिवासी छात्र नेता डूसू के अध्यक्ष पद के इतने करीब पहुंचा था। इसके बाद कांग्रेस बहुजन राजनीति और आगे बढ़ाएगी।

मॉस्को पर भीषण ड्रोन अटैक! जेलेंस्की ने इस खास मौके पर कर दिया बड़ा धमाका

Ukraine Drone Attack On Moscow: रूस में संसदीय चुनावों के आखिरी दिन राजधानी मॉस्को और उसके आसपास का इलाका भीषण ड्रोन हमलों से थर्रा उठा। रविवार को हुए इस बड़े ड्रोन हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है।

रूस का दावा है कि उसने 1,600 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिनमें से 450 ड्रोन सीधे राजधानी मॉस्को को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता को मजबूती देने वाले इस तीन दिवसीय चुनाव को बाधित करने का आरोप लगाया है।

हमले में 2 लोगों की मौत

मॉस्को के क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर हुए हमलों में दो नागरिकों की जान चली गई। मृतकों में एक 44 वर्षीय महिला और एक बुजुर्ग पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा एक ड्रोन के 21 मंजिला रिहायशी इमारत से टकराने के बाद भीषण आग लग गई, जिसके चलते एहतियातन 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।

मॉस्को ऑयल रिफाइनरी को भारी नुकसान

यूक्रेन ने पिछले कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाकर अपने लंबे समय के ड्रोन अभियान को तेज कर दिया है। मॉस्को के मेयर ने पुष्टि की है कि हमले में ‘मॉस्को ऑयल रिफाइनरी’ के एक परिसर को नुकसान पहुंचा है।

ये रिफाइनरियां और तेल डिपो क्रेमलिन के लिए युद्ध का खर्च निकालने का मुख्य वित्तीय जरिया हैं। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रूस और यूक्रेन आपस में एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला न करने के लिए सहमत हुए हैं।

‘क्रेमलिन की वॉर मशीन पर बड़ा प्रहार’

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस सफल ड्रोन हमले की तारीफ की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘बीती रात मॉस्को क्षेत्र में हमारी लंबी दूरी की जवाबी कार्रवाई का बहुत बड़ा असर हुआ है। रूस के एक प्रमुख तेल उद्योग और लॉजिस्टिक्स ठिकाने को निशाना बनाया गया है। ये वही अरबों डॉलर हैं जो रूस की युद्ध मशीन को हवा देते हैं।’

चुनाव के बीच पुतिन की साख पर हमला

रूस में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है। शुक्रवार से रविवार तक चले इस 3-दिवसीय मतदान में जीत पूरी तरह से पुतिन की ‘युनाइटेड रसिया’ पार्टी के पक्ष में तय मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव में केवल उन्हीं पार्टियों को उतरने की इजाजत दी गई है जो पुतिन और उनके युद्ध का समर्थन करती हैं।

पुतिन जहां इस चुनाव के जरिए जनता के समर्थन का संदेश देना चाहते थे, वहीं यूक्रेन ने ठीक वोटिंग के आखिरी दिन मॉस्को पर हमला करके उनकी सुरक्षा व्यवस्था और दावों की हवा निकाल दी है। हालांकि, मेयर सोबयानिन का कहना है कि दुश्मन अपने मकसद नाकाम रहा।

यूक्रेन द्वारा मॉस्को की सीमा के भीतर घुसकर इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन दागना और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अब युद्ध केवल फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रह गया है। रूस के आर्थिक स्तंभों पर चोट पहुंचाकर यूक्रेन, मॉस्को पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में रूस की ओर से इसका कड़ा और आक्रामक पलटवार देखने को मिल सकता है।

डीयू में एबीवीपी को मिली जीत

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन के बाद युवाओं व छात्रों की नाराजगी के बीच सबकी नजर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू के चुनावों पर थी। शनिवार को आए नतीजों में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बाजी मारी है। कांटे की टक्कर में एबीवीपी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर उसके यश डबास जीते। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली। लेफ्ट का गठबंधन भी नाकाम रहा।

अध्यक्ष पर पर एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के जितेंद्र कुमार मीणा को दो हजार के करीब वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने रिकॉर्ड बनाया। 17 साल के बाद डूसू के सेंट्रल पैनल में किसी पद पर निर्दलीय की जीत हुई है। शौकीन को 30 हजार से ज्यादा वोट मिले। एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद वे निर्दलीय लड़े थे। सबसी बड़ी जीत उनकी है। इससे पहले 2009 में निर्दलीय मनोज चौधरी और 1991 में निर्दलीय राजीव गोस्वामी डूसू के अध्यक्ष बने थे।

एबीवीपी की रिया छावड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर जीत मिली। गौरतलब है कि डूसू चुनाव के लिए शुक्रवार को 52 कॉलेजों में मतदान हुआ था। इसमें 40.46 फीसदी वोटिंग हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के 1,51,519 छात्रों में से 61,312 ने मतदान किया।

चुनाव नतीजे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा, ‘दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं, यहां देश के हर कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। आज एबीवीपी को मिली शानदार जीत उन राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। देश का युवा आज राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है’।

एबीवीपी ने डूसू के तीन पदों पर जीत दर्ज की: निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन बने उपाध्यक्ष

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार पद में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) केंद्रीय पैनल के चार पद में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं कर सका। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।

अध्यक्ष पद के चुनाव में 24,576 वोट हासिल करने वाले एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों के अंतर से हराया।

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निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। शौकीन को एनएसयूआई ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

सचिव पद के लिये चुनाव में एबीवीपी उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल किए, जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले।

संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 वोट मिले।

पिछले साल एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया था।

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