लखनऊ में बुलडोजर एक्शन : जिस बिल्डिंग में 15 मौतें हुईं, उसे ढहाया जा रहा, अग्निकांड वाली बिल्डिंग पर LDA का एक्शन

लखनऊ की उस तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग को 32 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हादसे की दर्दनाक यादें आज भी ताजा हैं। शनिवार को बुलडोजरों की गड़गड़ाहट के साथ उस इमारत को गिराने का काम शुरू हुआ, जहां आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। इमारत गिराने के दौरान पूरे इलाके को सील कर दिया गया और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जिस इमारत को नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक माना जा रहा था, उसे एक-एक मंजिल और एक-एक दीवार तोड़कर ढहा दिया गया। हालांकि, इमारत गिरने के साथ एक बड़ा सवाल अब भी कायम है। जिस भवन के खिलाफ कथित अवैध निर्माण को लेकर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, वह आखिर कैसे चलता रहा और प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए, जिससे 15 लोगों की जान बचाई जा सकती थी?

अग्निकांड वाली बिल्डिंग पर LDA का एक्शन

22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के 32 दिन बाद प्रशासन ने आखिरकार उस इमारत को गिराने का काम शुरू कर दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद इमारत की मंजूरी, रिहायशी भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। इमारत गिराने की कार्रवाई कड़ी सुरक्षा के बीच की गई। पूरे इलाके को सील कर दिया गया और किसी भी तरह की भीड़ या अव्यवस्था से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। प्रशासन ने भारी मशीनों की मदद से उस इमारत को ढहा दिया, जिसमें कोचिंग सेंटर और कई अन्य व्यावसायिक संस्थान चल रहे थे।

बिल्डिंग में 15 मौतें हुईं

22 जून को लगी भीषण आग ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अंदर ही फंस गए। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली और इमारत में कथित नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गई। जांच में यह सवाल उठे कि क्या इमारत का निर्माण, नक्शा और इस्तेमाल अधिकारियों से मिली मंजूरी के अनुसार था। अधिकारियों का कहना है कि इमारत को रिहायशी उपयोग की मंजूरी मिली थी, लेकिन उसमें कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इसी वजह से यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या वहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम और आपातकालीन निकासी की सुविधाएं मौजूद थीं।

पहले नहीं हुई कार्रवाई

इस इमारत का पुराना रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, साल 2016 में कथित अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने इस इमारत के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, बाद में इसे गिराने का आदेश वापस ले लिया गया, जिसके बाद इमारत का इस्तेमाल जारी रहा। कई साल बाद यही इमारत लखनऊ के सबसे बड़े अग्निकांडों में से एक का केंद्र बन गई। आग लगने की घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इमारत के मालिकों को नोटिस जारी किया और भवन को गिराने का आदेश दिया। तय समय सीमा पूरी होने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इमारत को ढहा दिया। इस पूरी कार्रवाई के बाद एक बार फिर अवैध निर्माण, रिहायशी इमारतों के व्यावसायिक इस्तेमाल और भवन सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

इस दर्दनाक हादसे के बाद अब अधिकारियों की भूमिका और नियमों का पालन कराने में हुई कथित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। जांच सिर्फ आग लगने के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि पहले कार्रवाई होने और कथित नियमों के उल्लंघन के बावजूद इमारत का इस्तेमाल आखिर कैसे जारी रहा। आग की घटना के मामले में इमारत के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कहीं लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की वजह से 15 लोगों की मौत तो नहीं हुई। इमारत को ऐसे समय गिराया गया है, जब प्रशासन मंजूर नक्शे के विपरीत इस्तेमाल की जा रही इमारतों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है। इस हादसे के बाद कई संस्थानों की जांच भी तेज कर दी गई है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जिन 15 लोगों ने इस हादसे में अपने परिजनों को खोया है, उनके लिए सिर्फ इमारत गिरा देना काफी नहीं है। उन्हें अब भी इस सवाल का जवाब चाहिए कि आखिर यह हादसा होने से पहले इसे क्यों नहीं रोका गया।

वलसाड में 16 घंटे में 1100 मिमी बारिश, भारत के इतिहास की तीसरी सबसे ज्यादा, डूबी हुईं ये कारें दिखा रहीं भयावहता

Valsad Heavy Rain: गुजरात में गुरुवार को जारी मूसलाधार बारिश के कारण कई जिलों में भीषण बाढ़ की स्थिति बन गई है। इसमें वलसाड जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक वलसाड जिले के उमरगाम में गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में करीब 1100 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक वलसाड जिले के अन्य तालुकाओं में भी इसी अवधि में 600 मिमी से अधिक पानी बरसा है।

देश के इतिहास में 24 घंटे की तीसरी सबसे ज्यादा बारिश

IMD द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वलसाड जिले के उमरगाम में दर्ज यह बारिश देश के इतिहास में 24 घंटे के भीतर दर्ज की गई तीसरी सबसे अधिक बारिश है।

भारत में 24 घंटे की सबसे ज्यादा बारिश के शीर्ष रिकॉर्ड:

  • सोहरा: 16 जून 1995 को 1563.3 मिमी
  • अमीनीदिवी: 6 मई 2004 को 1168.5 मिमी
  • उमरगाम, वलसाड: 23 जुलाई 2026 को 1064 मिमी (करीब 1100 मिमी)
  • वलसाड जिले में लगातार दूसरे दिन यह असाधारण बारिश दर्ज की गई है। इससे ठीक एक दिन पहले, 22 जुलाई 2026 को वलसाड के कपराड़ा में 417 मिमी बारिश हुई थी।

वापी से सामने आया वायरल वीडियो, 50 से अधिक कारें डूबीं

वलसाड जिले के वापी कस्बे से तबाही की एक भयावह तस्वीर और वायरल वीडियो सामने आया है। किसी पास की इमारत की ऊपरी मंजिल से बनाए गए वीडियो में इलाके का भयानक मंजर देखा जा सकता है। एक रिहायशी इलाके के पार्किंग एरिया में पानी भरने से 50 से अधिक कारें लगभग पूरी तरह पानी में डूब गईं। बाढ़ का पानी इतना ज्यादा बढ़ गया कि खड़ी गाड़ियों की खिड़कियों तक पहुंच गया। आसपास की सड़कें और पूरा इलाका जलमग्न दिखाई दिया। यहां नीचे देखिए वो भयानक मंजर-

उफान पर नदियां, हजारों लोग शिफ्ट किए गए

भीषण बारिश की वजह से वलसाड की औरंगा, पार और दमन गंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने पर प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। एहतियात के तौर पर सूरत शहर के संवेदनशील इलाकों से 2,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

5 जिलों में रेड अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार और शुक्रवार को अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए वलसाड, नवसारी, डांग, सूरत और तापी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बारिश से प्रभावित जिलों में स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के साथ राहत कार्यों के समन्वय के लिए कई मंत्रियों को तैनात किया है।

Krishna Kaul: रोहित चंदेल को POCSO के तहत गिरफ्तार किए जाने के बाद कृष्णा कौल की शो में हुई एंट्री

Krishna Kaul: स्टार प्लस का शो ‘सैराब’ एक बड़े बदलाव के लिए तैयार है, क्योंकि इसमें लीड कास्ट में एक नया चेहरा शामिल होने वाला है। रोहित चंदेल की जगह कौन लेगा, इस पर हफ़्तों तक चर्चा के बाद अब यह पक्का हो गया है कि इस रोल के लिए कृष्णा कौल को चुना गया है। ‘कुमकुम भाग्य’ में अपनी एक्टिंग के लिए मशहूर कृष्णा अब मदिरक्षी मुंडले के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। हालांकि कास्टिंग पक्की मानी जा रही है, लेकिन कृष्णा ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया है।

शो से जुड़ने पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कृष्णा कौल ने कहा, “मैं ‘सैराब’ (Sairaab) की टीम का हिस्सा बनने को लेकर सच में बहुत उत्साहित हूं। दर्शकों ने इस शो को जो प्यार दिया है, वह कमाल का है। ऐसी कहानी का हिस्सा बनना, जो दर्शकों के दिलों को छू गई है, मेरे लिए रोमांचक भी है और एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी।”

मदिराक्षी मुंडले के बारे में बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैं लंबे समय से मदिराक्षी मैम के काम की तारीफ करता रहा हूं। वह एक बेहतरीन कलाकार हैं। मैं उनके साथ स्क्रीन शेयर करने और ऐसे यादगार पल बनाने के लिए बहुत उत्साहित हूं जिन्हें दर्शक पसंद करेंगे। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि हर शो आपकी ज़िंदगी में किसी न किसी वजह से आता है, और एक एक्टर के तौर पर मेरे सफ़र में ‘सैराब’ अगला सही कदम लगता है। इस किरदार में कई परतें हैं, और मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ कि दर्शक इसमें मौजूद केमिस्ट्री, ड्रामा, रोमांस और बहुत कुछ देख सकें।”

रोहित चंदेल की गिरफ्तारी और शो से बाहर होने के कुछ ही समय बाद कृष्णा कौल के शो में आने की खबर है। ‘काशीबाई बाजीराव बल्लाल’ और ‘पांड्या स्टोर’ जैसे शो के लिए मशहूर इस टीवी एक्टर को मुंबई की घाटकोपर पुलिस ने तब गिरफ्तार किया, जब एक 16 साल की लड़की ने उन पर पीछा करने, परेशान करने और मारपीट करने का आरोप लगाया। लड़की की शिकायत के आधार पर, ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज’ (POCSO) एक्ट और ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि उसके मना करने के बावजूद रोहित अपने पर्सनल नंबर और कई दूसरे फ़ोन नंबरों से उससे संपर्क करते रहे। अपनी शिकायत में उसने यह भी कहा कि 5 जुलाई को एक्टर ने उसकी रिहायशी बिल्डिंग के पास उसे रोका, उसका पीछा किया, उससे बहस की, उसे अपशब्द कहे और उसके साथ मारपीट की।

शिकायत मिलने के बाद, पुलिस ने रोहित पर POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 78 (पीछा करने/स्टॉकिंग) और धारा 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाने) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच चल रही है।

रोहित चंदेल को शुक्रवार को दहिसर स्थित उसके घर से हिरासत में लिया गया और बाद में उसे POCSO मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया, क्योंकि अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।

गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए पुलिस अधिकारी ने कहा, “शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।” पुलिस ने यह भी पुष्टि की कि रोहित चंदेल और 16 साल की शिकायतकर्ता एक-दूसरे को जानते थे।

650 करोड़ की एलिवेटेड रोड से बदलेगा NCR का सफर! लाल कुआं-दादरी का 1 घंटे का रास्ता सिर्फ 20 मिनट में

गाजियाबाद के लाल कुआं और दादरी के बीच जीटी रोड पर रोजाना सफर करने वालों को लंबे समय से भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है, खासकर हफ्ते के दिनों में पीक आवर्स के दौरान। ऐसे में चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग वाले हिस्से पर अक्सर जाम लगने की वजह से यात्रियों, कमर्शियल गाड़ियों और स्थानीय निवासियों को लंबे समय तक फंसे रहना पड़ता है।

News18 के अनुसार, अब लाल कुआं और दादरी के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने का लंबे समय से लंबित प्रस्ताव एक कदम और आगे बढ़ गया है; अधिकारियों ने इस रूट पर 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है, जिससे जाम कम होने और यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड GT रोड के उस बड़े रीडेवलपमेंट प्लान का हिस्सा है जिसका मकसद गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। सेतु निगम ने इस कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और सर्वे का काम पूरा कर लिया है।

करोड़ों की नई परियोजनाओं को मिलेगी मंजूरी

लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्ताव को गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने आगे बढ़ाया था और अब इसे मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद, यह एलिवेटेड कॉरिडोर दादरी की ओर जाने वाले वाहनों को कई व्यस्त चौराहों और लोकल ट्रैफिक पॉइंट्स से बचाकर निकलने में मदद करेगा, जिसकी वजह से जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

फिलहाल अभी, GT रोड पर भारी ट्रैफिक के कारण लाल कुआं और दादरी के बीच सफर में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग सकता है। जबकि चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग के पास जाम की वजह से लोगों को लंबे समय तक रुकना पड़ता है।

ट्रैफिक होगा कम

अधिकारियों का मानना ​​है कि एलिवेटेड रोड से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए एक अलग रास्ता मिलने से सफर का समय घटकर लगभग 15 से 20 मिनट हो सकता है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना सफर करने वालों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दोनों तरफ सफर का समय कम करके उनके रोजाना लगभग एक घंटे बचा सकता है।

प्रस्तावित कॉरिडोर सीधे लाल कुआं से दादरी तक जाएगा और रास्ते में पड़ने वाले बड़े चौराहों से होकर नहीं गुजरेगा। दूर जाने वाला ट्रैफिक एलिवेटेड हिस्से से गुजरेगा, जबकि लोकल गाड़ियां नीचे वाली सड़क का इस्तेमाल करती रहेंगी।

अधिकारियों को उम्मीद है कि लोकल और लंबी दूरी के ट्रैफिक के अलग-अलग होने से आवागमन बेहतर होगा, चार प्रमुख सिग्नलों पर लगने वाला जाम कम होगा और इस रास्ते की सबसे बड़ी समस्या भी दूर होगी। दरअसल, अभी एक ही सड़क पर भारी कमर्शियल वाहन, औद्योगिक क्षेत्र का ट्रैफिक और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

बता दें कि GT रोड उन सबसे व्यस्त सड़क कॉरिडोर में से एक है जो दिल्ली को गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों से जोड़ता है। दिल्ली, सीलमपुर, साहिबाबाद, मोहन नगर और घंटा घर से आने वाला ट्रैफिक लाल कुआं की तरफ आता है, जिससे मौजूदा सड़क नेटवर्क पर काफी दबाव पड़ता है।

गौरतलब है कि लाल कुआं पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से आने वाली गाड़ियां, अलीगढ़ की ओर जाने वाली गाड़ियां और दादरी व सूरजपुर की ओर जाने वाले भारी इंडस्ट्रियल ट्रैफिक की वजह से जाम की समस्या बढ़ जाती है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पहले से मौजूद फ्लाईओवर ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है, लेकिन नीचे वाली सड़क पर अभी भी भारी ट्रैफिक रहता है, खासकर दादरी NTPC, कोट और आस-पास के इंडस्ट्रियल इलाकों में जाने वाले ट्रकों की वजह से।

उम्मीद है कि एलिवेटेड रोड से गाजियाबाद, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी रोड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही, इससे सूरजपुर, कोट और दादरी के इंडस्ट्रियल हब को भी फायदा होगा, क्योंकि माल की ढुलाई आसान हो जाएगी।

अधिकारियों को यह भी उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराएगा, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर ट्रैफिक का दबाव होगा।

इस प्रोजेक्ट का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ने की उम्मीद है। NCR में पहले भी देखा गया है कि जब किसी इलाके में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होता है, तो वहां घरों की मांग बढ़ने लगती है। माना जा रहा है कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का भी ऐसा ही असर देखने को मिल सकता है।

लाल कुआं, जिसे पहले मुख्य रूप से एक ट्रांजिट पॉइंट माना जाता था, धीरे-धीरे एक रिहायशी इलाके के तौर पर उभरा है क्योंकि यह वेव सिटी, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और राज नगर एक्सटेंशन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

वहीं, नोएडा में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण, कई घर खरीदार गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों में तुलनात्मक रूप से सस्ते घरों के विकल्प तलाशने लगे हैं।

एलिवेटेड रोड बनने के बाद दादरी, कोट गांव और रोजा-याकूबपुर क्षेत्र जैसे इलाकों की लोकप्रियता बढ़ सकती है, क्योंकि यहां से गाजियाबाद पहुंचना आसान हो जाएगा।

रिपोर्टों से पता चलता है कि इस इलाके में अभी दादरी की तरफ 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK घरों की मांग है, जबकि लाल कुआं और क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में खरीदार 65 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK और 3BHK अपार्टमेंट देख रहे हैं।

फिलहाल यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जैसे ही इसे हरी झंडी मिलेगी, अधिकारी जमीन से जुड़े काम, अतिक्रमण हटाने और बिजली-पानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं (यूटिलिटी) को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आमतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में यही चरण सबसे ज्यादा समय लेते हैं।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल कुआं से न्यू बस स्टैंड तक के एलिवेटेड सेक्शन की लागत लगभग 650 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि दादरी की ओर जाने वाले पूरे 12 किलोमीटर के कॉरिडोर को चरणों में विकसित किए जाने की उम्मीद है। अगर मंजूरी और शुरुआती काम योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो अगले साल तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है, जिससे NCR के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर यात्रा करने वाले लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

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नए T20I कोच VVS लक्ष्मण के साथ जिम्बाब्वे पहुंची टीम इंडिया (Video)

पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने अपने करियर में एक भी T-20I अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है लेकिन वह इस बार 3 मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए युवा भारतीय टीम के साथ जिम्बाब्वे पहुंचे।गौरतलब है कि टी-20 विश्व विजेता टीम भारत का इस छोटे प्रारुप में सफर बहुत खास नहीं रहा है। टीम को लगातार 6 टी-20 मैच गंवाने पड़े थे इसमें से 2 मैच आयरलैंड और 4 इंग्लैंड के खिलाफ आए थे।

लेकिन फिलहाल युवा टीम के साथ वह जिम्बाब्वे पहुंच चुके हैं। इससे पहले भी लक्ष्मण ने टी-20 टीम की कोचिंग दक्षिण अफ्रीका दौरे पर की थी। इस दौरे पर टीम के नियमित कोच गौतम गंभीर टीम के साथ नहीं जा रहे हैं।

गौरतलब है कि चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए कड़े फैसले लेना जारी रखा है और इसी क्रम में विश्व कप जीतने वाली टीम के बल्लेबाज संजू सैमसन को इस महीने के आखिर में जिम्बाब्वे में होने वाली तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किया है।

भारतीय टीम 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20 मैच खेलेगी।चयनकर्ताओं ने पहली बार तेज गेंदबाजों यश ठाकुर और अशोक शर्मा को टीम में जगह दी है। आईपीएल 2026 में अशोक ने गुजरात टाइटन्स की ओर से कुछ मुकाबलों में प्रभावित किया था।हाल में अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाले बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे को भी पहली बार 15 सदस्यीय टी20 टीम में जगह मिली है।

सैमसन की जगह विकेटकीपर-बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को टीम में शामिल किया गया। प्रभसिमरन ने आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था और यह दाएं हाथ का बल्लेबाज हांगझोऊ में हुए 2023 एशियाई खेलों के लिए भी भारतीय टीम का हिस्सा था।

इंग्लैंड में चल रही पांच मैच की टी20 श्रृंखला के दूसरे मैच में सैमसन की जगह वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम में चुना गया। सैमसन आयरलैंड के खिलाफ दोनों टी20 और इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में नाकाम रहे थे। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज को टी20 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। सैमसन के अलावा प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, वाशिंगटन सुंदर और रवि बिश्नोई को भी टीम में शामिल नहीं किया गया।

निचले क्रम के बल्लेबाज रिंकू सिंह और तेज गेंदबाज मयंक यादव की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी हुई है।मयंक 2024 के बाद पहली बार टीम में लौटे हैं।

भारतीय टीम :श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, ईशान किशन , शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरूण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, प्रभसिमरन सिंह

नोएडा में यमुना-हरनंदी दोआब के किनारे बनेगा 500 करोड़ का 4 लेन रिवरफ्रंट रोड, अथॉरिटी ने दी मंजूरी जानिए सारी डिटेल

नोएडा अथॉरिटी ने यमुना-हरनंदी दोआब के किनारे 29 किलोमीटर लंबी चार-लेन वाली सड़क बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह सड़क नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का एक विकल्प होगी और इसका मकसद इलाके में ट्रैफिक जाम को कम करना है। News 18 की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित कॉरिडोर से यात्रा का समय कम होगा, कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ग्रेटर नोएडा की 75 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, 25 सेक्टरों और 20 गांवों में रहने वाले लगभग पांच लाख लोगों को सीधा फायदा होगा।

नोएडा अथॉरिटी के CEO कृष्णा करुणेश ने कहा, “नोएडा अथॉरिटी इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह एक्सप्रेसवे यात्रियों को काफी राहत देगा और नदी के किनारे सुनियोजित विकास में मदद करेगा।”

25 सेक्टर, 20 गांव लाभान्वित होंगे

अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्रोजेक्ट से नोएडा के कई रिहायशी सेक्टरों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें सेक्टर 94, 124, 125, 126, 127, 128, 129, 130, 131, 132, 133, 134, 135, 150, 151, 152, 153, 154, 155, 158, 159, 163, 164 और 168 शामिल हैं।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन गांवों को फायदा होने की उम्मीद है उनमें रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर जहांगीर, सुल्तानपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, शाहपुर गढ़ी, नंगला नंगली, रोहिल्लापुर, नंगला वाजिदपुर, छपरौली, मंगरौली, मोहियापुर, बदौली, झट्टा, दल्लूपुरा, गुजरान डेरिन, कमबक्शपुर, याकूतपुर, गुलावली और मोमनाथल शामिल हैं।

मौजूदा सड़क को अपग्रेड किया जाएगा

अधिकारियों ने बताया कि यमुना तटबंध के किनारे 11.2 किलोमीटर लंबी मौजूदा फोर-लेन सड़क का नवीनीकरण पहले से ही 34 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है, जिसमें से अब तक 11 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

नए प्रस्ताव के तहत, यमुना दोआब वाले हिस्से को चौड़ा करके फोर-लेन सड़क बनाई जाएगी, जबकि हरनंदी दोआब के किनारे 17 किलोमीटर लंबा नया फोर-लेन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

यह कॉरिडोर सेक्टर 150 तक जाएगा, जहां यह कोंडली-बांगर की तरफ से आने वाली मौजूदा 75 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़ेगा, जिससे यात्रियों के लिए एक लगातार वैकल्पिक रास्ता बन जाएगा।

बहुत कम जमीन अधिग्रहण की उम्मीद

अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े स्तर पर जमीन अधिग्रहण की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास पहले से ही दोआब क्षेत्र में 22 से 28 मीटर चौड़ी जमीन उपलब्ध है।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध जमीन फोर-लेन कॉरिडोर बनाने के लिए काफी होने की उम्मीद है, जिससे किसानों से कृषि भूमि अधिग्रहण करने की जरूरत कम हो जाएगी।

CEO कृष्णा करुणेश ने यह भी कहा कि जिन जगहों पर जमीन के मालिक सहमत होंगे, वहां तटबंध (embankment) को और बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “जहां किसान सहमत होंगे, हम उनकी मंजूरी से तटबंध को बाहर की ओर बढ़ा सकते हैं। अथॉरिटी किसी भी जमीन के अधिग्रहण के लिए मुआवजा देने को तैयार है।”

व्यस्त एक्सप्रेसवे पर दबाव कम करने की तैयारी

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर अभी लगभग 10 लाख गाड़ियां चलती हैं, जिससे पीक आवर्स (सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले समय) में बहुत ज्यादा जाम लगता है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित रिवरफ्रंट रोड और सैद्धांतिक रूप से मंजूर किए गए अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मौजूदा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।

बता दें कि यह नया कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे यमुना-हरनंदी दोआब क्षेत्र के भविष्य के शहरी विकास में भी मदद करेगा। इस इलाके में स्पोर्ट्स सिटी और जेपी विश टाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण रिहायशी इलाकों का विस्तार तेजी से हो रहा है।

न्यूज 18 के अनुसार, कृष्णा करुणेश ने कहा, “तटबंध के विस्तार से न केवल ट्रैफिक की समस्याएं हल होंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय निवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी और इलाके की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।”

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन पुरस्कार चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

चीन में डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:खाना पहुंचाते हुए लिखी कई कविताएं, ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है- किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है। कस्टमर से मिली फटकार के बाद लिखी कविता- वायरल हुई वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता की एक पंक्ति है- सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

Tanishk Bagchi: तनिष्क बागची ने 8 लाख अनपेड रॉयल्टी वाली पोस्ट की डिलेट,वाईआरएफ ने किया था कमेंट

Tanishk Bagchi: ‘सैयारा’ के बॉक्स ऑफिस पर छाने और उसके टाइटल ट्रैक के साल के सबसे बड़े म्यूजिकल हिट्स में से एक बनने के एक साल बाद, यह फिल्म एक विवाद में फंस गई है। फ़िल्म की पहली सालगिरह पर, म्यूज़िक कंपोज़र तनिष्क बागची ने दावा किया कि वह अभी भी इस सुपरहिट गाने के लिए 8 लाख की रॉयल्टी मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं। यह पोस्ट जल्द ही ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया, लेकिन यश राज फ़िल्म्स (YRF) के यह कहने पर कि तय कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार सभी पेमेंट कर दिए गए हैं। इसके बाद बागची ने इंस्टाग्राम से अपना बयान हटा दिया।

ऑनलाइन तनिष्क बागची के दावों पर ध्यान दिए जाने के बाद, यश राज फिल्म्स ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि हर सहयोगी को उनके एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार भुगतान किया गया था।

प्रवक्ता ने कहा- “’सैयारा’ टाइटल ट्रैक तीन संगीतकारों (तनिष्क बागची के साथ फहीम अब्दुल्ला और अर्सलान निज़ामी) के बीच एक शानदार सहयोग था। हम एक ऐसा सदाबहार गाना बनाने में उनके बेहतरीन काम के लिए बहुत आभारी हैं, जिसने लाखों लोगों के दिलों को छू लिया है। टाइटल ट्रैक की रॉयल्टी तीनों संगीतकारों के बीच YRF द्वारा समान रूप से बांटी गई है और आगे भी बांटी जाती रहेगी, जैसा कि तनिष्क सहित सभी ने कॉन्ट्रैक्ट के तहत सहमति जताई थी। YRF ने कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार, आपसी सहमति वाली शर्तों और समय-सीमा के भीतर हर सहयोगी को उनका बनता हुआ भुगतान कर दिया है,”।

YRF के स्पष्टीकरण के कुछ ही समय बाद, तनिष्क ने अपना इंस्टाग्राम पोस्ट हटा दिया, जिसे 18 जुलाई को पोस्ट किया गया था। शनिवार को तनिष्क बागची ने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने बताया कि फिल्म का टाइटल ट्रैक साल के सबसे बड़े गानों में से एक बनने के बावजूद उन्हें निराशा क्यों हुई। उन्होंने साफ़ किया कि वह सहानुभूति नहीं चाहते थे, बल्कि इस गाने पर काम करने के अपने अनुभव के बारे में बात करना चाहते थे।

उन्होंने लिखा, “@yrfentertainment @yrfmusic के साथ यह मेरी पहली फ़िल्म थी… मैंने हर बात मान ली क्योंकि मुझे संगीत पर भरोसा था। मैंने इस गाने में अपनी पूरी जान लगा दी। प्रोडक्शन से लेकर कंपोज़िशन तक, गीतकार और गायकों के साथ काम करना, रिकॉर्डिंग, वोकल ट्यूनिंग, साउंड, अरेंजमेंट – हर छोटी-बड़ी बात मेरे लिए मायने रखती थी। मैंने इसे अपना ही समझकर काम किया।”

तनिष्क ने आगे कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें जो पैसे मिले थे, वे सभी गाने को बनाने में ही खर्च हो गए। उन्होंने कहा, “YRF ने मुझे जो भी मामूली रकम दी थी, वह सब लाइव और मिक्सिंग में खर्च हो गई… आखिर में कुछ नहीं बचा, हां। इतने बड़े गाने से मैंने बस यही कमाया।”

कंपोज़र ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता रॉयल्टी की रकम को लेकर है, जो उनके मुताबिक अभी भी बकाया है। उन्होंने आगे कहा, “सबसे ज़्यादा दुख इस बात का है कि रॉयल्टी स्टेटमेंट के अनुसार, मुझे उस गाने के लिए सिर्फ़ 8 लाख की रॉयल्टी मिलनी बाकी है, जिसे अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म पर लाखों बार सुना और देखा गया है। सच कहूं तो, इस गाने में मैंने जितना काम, समय और जुनून लगाया है, उसके हिसाब से 8 लाख बहुत कम लगते हैं। मुझे सच में लगा था कि इतने बड़े लेवल पर पहुंचे गाने से कहीं ज़्यादा कमाई हुई होगी।”

तनिष्क ने यह भी कहा कि इस घटना ने म्यूज़िक इंडस्ट्री के बारे में उनके नज़रिए को बदल दिया है। उन्होंने लिखा, “मैं यह सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिख रहा हूं। मैं यह इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मुझे पता है कि मैंने इस गाने के लिए कितनी मेहनत की है और इसे बनाने के लिए मैंने क्या-क्या कुर्बानियां दी हैं… इस अनुभव ने इंडस्ट्री के बारे में मेरा नज़रिया बदल दिया है। अब से, मैं सिर्फ़ उन्हीं प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के साथ काम करूंगा जो क्रिएटिविटी, ईमानदारी और अपना म्यूजिक बनाने वाले लोगों की कद्र करते हैं।”

अपनी बात खत्म करते हुए, कंपोज़र ने गाने की कामयाबी के बाद निराशा महसूस करने का ज़िक्र किया और साथ ही डायरेक्टर मोहित सूरी और गीतकार इरशाद कामिल का शुक्रिया अदा किया। “एक बात जो मैंने सीखी है, वह यह है कि कभी-कभी आप लोगों को अपना सब कुछ दे देते हैं, और जब कामयाबी मिलती है, तो वे भूल जाते हैं कि मुश्किल समय में कौन उनके साथ खड़ा था। खैर, बाकी सब मैं भगवान पर छोड़ता हूं। समय हर कहानी बयां करता है और कर्म हर हिसाब-किताब बराबर कर देता है। इस पूरी फ़िल्म में मैं सिर्फ़ @mohitsuri की इज़्ज़त करता हूं… उन्हीं की वजह से मैंने यह फ़िल्म की थी… और @irshadkamilofficial की भी।”

तनिष्क बागची, फहीम अब्दुल्ला और अर्सलान निज़ामी द्वारा कंपोज़ किया गया, इरशाद कामिल के लिखे और फहीम अब्दुल्ला की आवाज़ वाला ‘सैयारा’ टाइटल ट्रैक, रिलीज़ से पहले ही फ़िल्म के सबसे खास गानों में से एक बन गया था। मोहित सूरी के निर्देशन में बनी और अहान पांडे व अनीट पड्डा की मुख्य भूमिकाओं वाली इस रोमांटिक ड्रामा फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर ज़बरदस्त सफलता हासिल की। ​​इसने दुनिया भर में ₹577 करोड़ की कमाई की और सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय रोमांटिक फ़िल्म बन गई।

फ़िल्म की पहली सालगिरह के मौके पर, अहान पांडे और अनीट पड्डा ने हाल ही में ‘सैयारा’ LP विनाइल का एक खास ‘टू-डिस्क कलेक्टर एडिशन’ लॉन्च किया। इसमें फ़िल्म के म्यूज़िक के साथ-साथ हाथ से लिखे डायरी नोट्स भी शामिल हैं, जो वेम्बली स्टेडियम में उनके सफ़र की झलक दिखाते हैं।

दुनिया का सबसे सस्ता शहर बनी दिल्ली! डेट से लेकर इंटरनेट तक सब सस्ता, लेकिन सैलरी ने चौंकाया

दिल्ली में दुनिया का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी मिल भी मिलता है और 3 BHK फ्लैट का मासिक किराया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रॉपर्टी की कीमत भी कम है। डेट और सस्ते इंटरनेट के बीच दिल्ली का एक कड़वा सच भी सामने आया है।  ड्यूश बैंक के हालिया ग्लोबल कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी के खर्च के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शामिल है। चाहे घर का किराया हो या किसी साथी के साथ बाहर घूमने-फिरने का खर्च, दिल्ली में खर्च दूसरे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई भी कई प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे कम बताई गई है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

यह जानकारी ड्यूश बैंक की ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेस 2026’ रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट में दुनिया के 69 शहरों का आकलन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत, वेतन, मकानों की लागत और जीवन की गुणवत्ता जैसे कई पैमानों पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सामान्य और किफायती डेट (बाहर घूमने और खाने का खर्च) के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इसके लिए औसतन 103 डॉलर (करीब 9,920 रुपये) खर्च होते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड का जिनेवा इस मामले में सबसे महंगा शहर है, जहां इसी तरह की आउटिंग पर 475 डॉलर (करीब 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ते हैं।

इन चीजों के खर्च के आधार पर हुई तुलना, इंटरनेट भी सबसे सस्ता

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में शहरों की किफायत का आकलन कई रोजमर्रा के खर्चों के आधार पर किया गया। इसमें वाइन की एक बोतल, एक जोड़ी जींस, गर्मियों की एक ड्रेस, दो कप कॉफी, मिड-रेंज रेस्तरां में दो लोगों का डिनर, दो मूवी टिकट, सार्वजनिक परिवहन के दो टिकट और 5 किलोमीटर की टैक्सी यात्रा का खर्च शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मासिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट के मामले में भी दिल्ली सबसे सस्ता शहर रहा। यहां एक औसत इंटरनेट कनेक्शन की कीमत 7.3 डॉलर (करीब 703 रुपये) प्रति माह आंकी गई।

हालांकि, कम खर्च होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) के मामले में दिल्ली शीर्ष 50 शहरों में जगह नहीं बना सकी। इस रैंकिंग में लोगों की खरीदने की क्षमता, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की किफायती कीमत, प्रदूषण, मौसम और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली में लोगों की कमाई भी काफी कम

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घरों की कीमतें काफी कम हैं। शहर के बीचों-बीच एक वर्ग मीटर रिहायशी संपत्ति की औसत कीमत 2,465 डॉलर (करीब 2.37 लाख रुपये) है। इसी आधार पर 69 शहरों की सूची में दिल्ली 65वें स्थान पर रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में 9.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2019 के बाद से घरों की कीमतों में 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई है।

कमाई के मामले में दिल्ली सबसे पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के मामले में दिल्ली की स्थिति काफी कमजोर है। हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी (नेट सैलरी) के आधार पर दिल्ली 69 शहरों में 66वें स्थान पर रही। दिल्ली में औसत मासिक नेट सैलरी 538 डॉलर (करीब 51,800 रुपये) बताई गई है। यह न्यूयॉर्क में काम करने वाले लोगों की औसत कमाई का लगभग दसवां हिस्सा है। वहीं, स्विट्जरलैंड का ज़्यूरिख इस सूची में सबसे ऊपर रहा। वहां लोगों की औसत मासिक नेट सैलरी 8,363 डॉलर (करीब 8.05 लाख रुपये) दर्ज की गई।

पिछले 10 साल में डॉलर के हिसाब से घटी सैलरी

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में औसत मासिक सैलरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2012 में औसत सैलरी 633 डॉलर थी, जो 2016 में बढ़कर 653 डॉलर हो गई। इसके बाद 2019 में यह घटकर 556 डॉलर रह गई। 2025 में बढ़कर 607 डॉलर हुई, लेकिन 2026 में फिर गिरकर 538 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली की औसत सैलरी में 17.7 फीसदी की कमी आई है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

यह अध्ययन ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट के जिम रीड और गैलिना पोज़्दन्याकोवा ने तैयार किया है। 13 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से नमबेओ (Numbeo) के जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बाद में ड्यूश बैंक की रिसर्च टीम ने जांचकर और बेहतर बनाया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉफी पीने वालों के लिए दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में से एक है। यहां एक रेगुलर कैपुचीनो कॉफी की औसत कीमत 2.40 डॉलर (करीब 231 रुपये) है। वहीं, शहर के मुख्य इलाके में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 685 डॉलर (करीब 65,970 रुपये) बताया गया है।

बीयर और सिगरेट का खर्च अब भी कम

ड्यूश बैंक की “ओएसिस इंडेक्स” (Oasis Index) रैंकिंग में दिल्ली 52वें स्थान पर रही। इस इंडेक्स में पांच बीयर और सिगरेट के दो पैकेट खरीदने में आने वाले कुल खर्च के आधार पर शहरों की तुलना की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इस पूरी खरीदारी पर औसतन 18.8 डॉलर (करीब 1,800 रुपये) खर्च होते हैं। यह न्यूयॉर्क में इसी तरह की खरीदारी पर होने वाले खर्च का लगभग 35 फीसदी है।

रैंकिंग की बात करें तो 2025 के मुकाबले दिल्ली सात स्थान ऊपर आई है। हालांकि, 2016 की रैंकिंग की तुलना में यह एक पायदान नीचे खिसक गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉलर के हिसाब से पिछले 10 वर्षों में इस बास्केट की कीमत 36 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।