सिर्फ जाति समीकरण कितना काम आएगा!

उत्तर प्रदेश का इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायने में बहुत खास होने वाला है। आजादी के बाद से आज तक कोई भी मुख्यमंत्री लगातार इतने दिन तक पद पर नहीं रहा। जब लगातार कांग्रेस की सरकार बनती थी तब भी मुख्यमंत्री बदलते रहते थे। दूसरी खास बात यह है कि 1990 में कांग्रेस का वर्चस्व खत्म होने के बाद पिछले 36 साल में पहली बार किसी एक पार्टी का 10 साल तक राज रहा है। अगले साल फरवरी में एक पार्टी और एक व्यक्ति के 10 साल के राज के बाद चुनाव होगा। सो, भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। वैसे तो भाजपा ने सत्ता में रहते हुए सत्ता विरोधी माहौल यानी एंटी इन्कम्बैंसी की गुत्थी काफी हद तक सुलझा ली है। उसकी सरकारों के बार बार सत्ता में लौटने की संभावना दूसरी पार्टियों से ज्यादा होती है। यह भी कह सकते हैं कि भाजपा ने प्रो इन्कम्बैंसी को साध लिया है।

उत्तर प्रदेश का चुनाव इस मायने में भी बहुत खास होने वाला है कि पहली बार मुलायम सिंह का परिवार इतने समय तक सत्ता से बाहर रहा है। 2017 से पहले उनकी पार्टी थोड़े थोड़े अंतराल पर किसी न किसी फॉर्मूले से सरकार में आ जाती थी। कभी बसपा से तालमेल करके तो कभी लोकतांत्रिक कांग्रेस, रालोद या बसपा के बागियों के सहारे तो कभी अकेले। असल में उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता का दौर चला था। 1990 से लेकर 2007 तक 17 वर्षों में कई बार सपा की सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो पांच साल के बाद सपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई और अखिलेश यादव सीएम बने। लेकिन 2017 के बाद से सपा लगातार विपक्ष में है। एक और खास बात यह है कि लंबे अरसे के बाद उत्तर प्रदेश में बिल्कुल आमने सामने का विधानसभा चुनाव होने वाला है। पिछली बार यानी 2022 का विधानसभा चुनाव भी भाजपा और सपा के बीच ही था लेकिन तब तक मायावती की बहुजन समाज पार्टी एक ताकत थी। उसके 10 सांसद थे और लगभग 20 फीसदी वोट था। लेकिन अब वह शून्य सांसद, शून्य विधायक और लगभग नौ फीसदी वोट वाली पार्टी है, जिसमें बहुत अंतर्कलह है। पिछले चुनाव में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही थी। इस बार बसपा पहले ही मुकाबले से बाहर है और यह लगभग तय लग रहा है कि कांग्रेस और सपा मिल कर लड़ेंगे। सो, भाजपा का पांच पार्टियों का गठबंधन सपा के गठबंधन से लड़ेगा।

कम से कम अभी दोनों पार्टियों की जो चुनावी तैयारी दिख रही है वह अपना अपना सामाजिक समीकरण साधने की है। दोनों गठबंधन अपने हिसाब से जातियों का गणित ठीक करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वैसे तो हर भाषण में बाबर, औरंगजेब, सालार मसूद गाजी आदि का नाम लेते हैं, पोस्टर में आजम खां, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई जाती हैं और 80-20 की राजनीति की बात की जाती है। माफिया को पूरी तरह से खत्म कर देने के नैरेटिव से कानून व्यवस्था सुधरने की धारणा तो बनाई जाती है, साथ ही अतीक और मुख्तार के जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मैसेजिंग भी बोती है।

इसके साथ ही भाजपा जातियों का प्रबंधन भी कर रही है। वह इस भरोसे में है कि उसके पास सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी है, जो राजभर वोट लाएगी। निषाद पार्टी है, जिसके सहारे मल्लाह वोट मिलेंगे। अपना दल है, जिससे कुर्मी वोट सुनिश्चित है और रालोद है, जिसके सहारे जाट पूरी तरह से एकजुट रहेंगे। सामान्य वर्ग की जातियों यानी ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, भूमिहार और कायस्थ का वोट भाजपा पहले से पक्का मान रही है। उसको लग रहा है कि इनमें से अगर किसी जाति में कोई नाराजगी है तो वह रूठने जैसा है और चुनाव तक उसके मान जाने की संभावना सौ फीसदी है। इस तरह हिंदुत्व के अंदर जातियों का परफेक्ट समीकरण भाजपा बना हुआ मान रही है।

दूसरी ओर अखिलेश यादव की उम्मीदें लोकसभा चुनाव के बाद कई गुना बढ़ गई हैं। उनको लग रहा है कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का उनका फॉर्मूला कामयाब होगा। असल में उनके पास माई समीकरण यानी मुस्लिम और यादव का लगभग 30 फीसदी वोट है। बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होकर मुख्य मुकाबले से बाहर होने और कांग्रेस के सपा के साथ आऩे से मुस्लिम वोट में बिखराव की संभावना समाप्त हो गई है। लेकिन यह 30 फीसदी वोट सपा को कहीं नहीं पहुंचाएगा। तभी अखिलेश गैर यादव पिछड़ा और गैर जाटव दलित को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे है। इसमें कोई बुराई नहीं है। भारत में चुनाव जीतने के लिए जातियों का समीकरण बहुत अहम होता है। लेकिन सिर्फ इस आधार पर कोई भी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती है।

समाजवादी पार्टी की इस रणनीति में समस्या इसलिए है क्योंकि उसे 10 साल से सत्ता में बैठी भाजपा को हराना है। सरकार चला रही किसी भी पार्टी को सिर्फ जातीय समीकरण से नहीं हराया जा सकता है। आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास को देखें तो स्पष्ट दिखाई देता है कि कोई भी सरकार तभी हारी है, जब उसके खिलाफ कोई बहुत मजबूत और प्रत्यक्ष सत्ता विरोधी लहर हो। अगर सरकार के खिलाफ थोड़ी बहुत नाराजगी है या थोड़ी बहुत शिकायतें हैं तो उनके दम पर उस सरकार को नहीं हराया जा सकता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी पार्टी अपने जातीय समीकरण के दम पर ज्यादा से ज्यादा मजबूत विपक्ष का दर्जा बचाए रख पाएंगी। जैसा बिहार में राजद के साथ हो रहा है। ऐसा इसलिए होता है कि जो सत्ता में बैठा है या लगातार चुनाव जीत रहा है उसका एक मजबूत सामाजिक समीकरण बना होता है और वह ऐसा लाभार्थी वर्ग तैयार करता है, जो हर हाल में उसे वोट करता है। यह विपक्ष का एक डिसएडवांटेज है।

सो, अखिलेश यादव को कांग्रेस से तालमेल करने और जातीय समीकरण साधने के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ मजबूत सत्ता विरोधी लहर तैयार करने का प्रयास करना चाहिए था। हालांकि अगर सरकार के खिलाफ स्वाभाविक गुस्सा नहीं है तो सिर्फ प्रयास करने से सत्ता विरोधी लहर नहीं पैदा होगी। सत्ता विरोधी लहर दो तरह से बनती है। पहली, सरकार के कामकाज से नाराज होकर स्वाभाविक रूप से या फिर विपक्षी पार्टी के निरंतर प्रयास से। सरकार से नाराज होने की पर्याप्त वजह होने के बावजूद विपक्ष के निरंतर प्रयास की कमी से उत्तर प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर नहीं बन सकी है। कम से कम अभी सतह के ऊपर ऐसी कोई लहर नहीं दिख रही है। जबकि ऐसा होना चाहिए था। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ युवाओं में नाराजगी है। समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने इसके खिलाफ जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा भी लिया। लेकिन सपा इस नाराजगी को एक दिशा देने के लिए जरूरी निरंतरता के साथ काम नहीं कर सकी। ऐसे ही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला है। संसद के मानसून सत्र में सपा ने इसे लेकर खूब राजनीति की लेकिन सत्र समाप्त होने के बाद सपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है।

महंगाई वैसे तो पिछले 10 साल से लगातार बढ़ रही है लेकिन रूस व यूक्रेन युद्ध और इस साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका के हमले की वजह से जिस तरह आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है उससे महंगाई में बेहिसाब बढ़ोतरी हुई है। इसे हर आम और खास व्यक्ति महसूस कर रहा है। परंतु मुख्य विपक्षी पार्टी महंगाई को मुद्दा नहीं बना पाई है। रोजगार और लोगों की आर्थिक समस्याओं पर भी विपक्ष का फोकस कम ही रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले ‘संविधान खतरे में है’ और ‘आरक्षण समाप्त हो जाएगा’ का नैरेटिव जन जन तक पहुंच गया था। उसका भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन वह नैरेटिव विधानसभा चुनाव में नहीं चल सकता है क्योंकि मतदाता इतना तो समझता है कि राज्य की सरकार संविधान नहीं बदल सकती है और न आरक्षण खत्म कर सकती है। तभी विपक्ष के पास कोई ग्रैंड नैरेटिव नहीं है और न सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी सत्ता विरोधी लहर है। तभी सिर्फ जातीय समीकरण साधने से चुनाव जीतना मुश्किल होगा। हालांकि अभी पांच महीने का समय है और राजनीति में पांच महीने को अनंतकाल माना जाता है।

सीएम योगी ने पीड़ित परिवारों का साझा किया दुख, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सौंपी आर्थिक सहायता

सीएम योगी ने पीड़ित परिवारों का साझा किया दुख, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सौंपी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग कारणों से अपने प्रियजन को खोने वाले दो परिवारों से बुधवार को मुलाकात की। सांत्वना देकर उनका दुख साझा किया और आर्थिक सहायता का संबल प्रदान किया। उन्होंने दोनों परिवारों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। 

 

बुधवार को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के दो परिवारों से मिले। इनमें से एक परिवार के सदस्य, औरंगाबाद गांव के आदित्य प्रजापति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जबकि दूसरे परिवार में मुन्नी देवी के पति का कैंसर से निधन हो गया था। सीएम योगी ने दोनों परिवारों को ढांढस बंधाया और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।

UP-EDGE Project: योगी सरकार का पूर्वांचल पर मेगा प्लान! 28 जिलों की बदलने वाली है किस्मत, ₹2,500 करोड़ से होगा ये बदलाव

UP-EDGE Project: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्लान तैयार किया है। विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से ₹2,500 करोड़ की UP-EDGE प्रोजेक्ट प्रस्तावित की गई है। पांच साल तक चलने वाली इस परियोजना का मकसद पूर्वांचल के जिलों में स्थानीय क्षमता के आधार पर रोजगार, आय और निवेश के नए अवसर तैयार करना है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार (22 सितंबर) को कहा कि वह पूर्वांचल क्षेत्र के 28 जिलों को समर्पित एक परियोजना शुरू करेगी।

इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को निवेश, रोजगार, उद्यमिता और निर्यात के अवसरों में बदलना है। विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की जाने वाली उत्तर प्रदेश सक्षम जिला-आधारित आर्थिक विकास (UP-EDGE) परियोजना पूर्वांचल क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी मजबूत करेगी।

28 जिलों को मिलेगा फायदा

UP-EDGE यानी UP Enabling District-Led Economic Growth Project के तहत फिलहाल पूर्वांचल के 28 जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बुंदेलखंड के सात जिलों को भी परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट को विश्व बैंक के सहयोग से लागू किया जाना प्रस्तावित है।

बैठक में परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट यानी PPR को भारत सरकार को भेजने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्व बैंक के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में परियोजना के विभिन्न प्रस्तावित घटकों पर चर्चा की गई। इनमें प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) को भारत सरकार को भेजना भी शामिल है।

बुंदेलखंड के सात जिले शामिल

विश्व बैंक के प्रैक्टिस मैनेजर हून सोह, लीड इकोनॉमिस्ट ऑरेलियन क्रॉस, सीनियर इकोनॉमिस्ट विंसेंट बेलिंगा और सीनियर स्पेशलिस्ट नेहा गुप्ता के साथ हुई बैठक में बताया गया कि यूपी-एज प्रोजेक्ट पूर्वांचल के 28 जिलों के लिए तैयार की गई है। बयान के मुताबिक, बुंदेलखंड के सात जिलों को भी इस परियोजना में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की अवधि पांच साल होगी।

पूर्वांचल में उत्तर प्रदेश की करीब 40% आबादी

बैठक में बताया गया कि पूर्वांचल में यूपी की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 27.6 प्रतिशत है। क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से करीब 45 फीसदी कम है। लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। ऐसे में यह परियोजना जिलों की जरूरतों और स्थानीय संभावनाओं के आधार पर आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करेगी।

कृषि के साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वांचल में विकास की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने जिलेवार बड़े निवेश प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया। सरकार के मुताबिक, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। सीएम योगी ने कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर भी जोर दिया।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब एक लाख नए उद्यम विकसित करने और महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल जिलों जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर विकसित किए जाएंगे। वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में कौशल विकास और ट्रेनिंग को बढ़ावा देने के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

ODOP को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने ‘एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)’ समेत अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। बेहतर बाजार व्यवस्था और वैश्विक पहुंच के जरिए इन उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। UP-EDGE प्रोजेक्ट के जरिए सरकार का फोकस सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित रखने के बजाय जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के हिसाब से विकास मॉडल तैयार करने पर है। प्रोजेक्ट के अगले चरण में प्रस्तावित PPR को केंद्र सरकार के समक्ष भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पूर्वांचल में विकास की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक अवसरों को ध्यान में रखते हुए जिलेवार बड़े निवेश परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।”

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उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास में कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की भूमिका भी बढ़ानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़कर निर्यात के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। आदित्यनाथ ने एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजार तंत्र से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

Bharat Taxi in UP: यूपी के सभी 75 जिलों में ‘भारत टैक्सी’ सुविधा शुरू! इसे चलाने वाले ड्राइवरों को 5 लाख रुपये तक का कवर, सारी डिटेल जानिए

Bharat Taxi in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (23 सितंबर) को यूपी में ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कर दिया। एक तरफ ‘भारत टैक्सी’ के जरिए ड्राइवरों को कमीशन से राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरी तरफ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कर्ज की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। देश के पहले सहकारिता आधारित प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी; का परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। ‘Bharat Taxi’ पहले से ही लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में चल रही है।

ड्राइवरों को नहीं देना होगा कमीशन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “‘भारत टैक्सी’ देश का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड संचालित करता है।” CM ने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवरों से कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ₹5 लाख तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब तक टैक्सी ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के जरिए ड्राइवरों को सुरक्षा के साथ सम्मान और गरिमा देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘ये पूरे भारत की टैक्सी है’

सीएम योगी ने कहा, “जब व्यक्ति अपनी गाड़ी पर भारत टैक्सी लिखाएगा और जो भी उस कार का चालक होगा, भारत टैक्सी के ब्रांड को संचालित करने का कार्य करेगा, तो उसको इस बात पर गौरव की अनुभूति होगी कि ये टैक्सी केवल एक यात्री को ढोने की नहीं, ये पूरे भारत की टैक्सी है। भारत को संचालित करने की भारत की गति को प्रगति में बदलने की टैक्सी है। उसके मन में इस बात की निश्चिंतता भी होगी कि मुझे यह सुविधा 5,00,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रही है…जब किसी को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है तो उसमें एक निश्चिंतता होती है और फिर वह व्यक्ति पूरी तन्मयता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को कर पाता है…आज यह टैक्सी लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज में संचालित हो रही है।”

एयरपोर्ट, मेट्रो और पुलिस से भी समझौता

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी ने लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। उन्होंने इस पहल के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ से आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित बस सर्विस को भी इसी तरह के सहकारी मॉडल से विकसित करने की संभावना जताई।

किसानों के लिए 11% से घटकर 6% हुआ ब्याज

सीएम योगी ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर कम करने का फैसला किया और अब इसका परिणाम सामने है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

पांच ड्राइवरों और पांच किसानों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान पांच भारत टैक्सी ड्राइवरों को शेयर सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, किसान योजना के पांच लाभार्थियों को लोन स्वीकृति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश सहकारी डेटाबेस सेंटर का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।

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सरकार के सहकारी मॉडल पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सहकारी क्षेत्र देश की मजबूती से जुड़ा है। सरकार और केंद्र की ओर से सहकारी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य किसी निजी ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर को खत्म करना नहीं, बल्कि ड्राइवर-केंद्रित और लोगों के लिए किफायती परिवहन का एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल में ड्राइवर सदस्य और हितधारक के रूप में जुड़े होंगे, ताकि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा दिया जा सके।

भाजपा के सहयोगी दबाव बना रहे हैं

उत्तर प्रदेश का चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टियां दबाव बढ़ाने लगी हैं। इस बार भाजपा के सामने गठबंधन साधने की बड़ी चुनौती है। एक तरफ लोकसभा चुनाव के बाद बने हालात है, जिनमें भाजपा को अपने सामाजिक समीकरण की चिंता सता रही है तो दूसरी ओर गठबंधन की सहयोगी पार्टियां बढ़ गई हें, जो मौजूदा हालात को समझते हुए भाजपा के ऊपर ज्यादा सीट के लिए दबाव बना रही हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब दिल्ली आए थे और प्रधानमंत्री से मुलाकात करके लौटे थे, तब दिल्ली में सहयोगी पार्टियों के साथ सीट बंटवारे पर ही विचार विमर्श हुआ था। भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े के लिए कहा जा रहा है कि उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी के साथ भाजपा का बराबरी का तालमेल कराया था और चिराग पासवान, जीतन राम मांझी व उपेंद्र कुशवाहा जैसे चार सहयोगियों को सिर्फ 41 सीट में एडजस्ट किया था। इसलिए माना जा रहा है कि वे उत्तर प्रदेश में भी सहयोगियों से सीटों का तालमेल बैठा लेंगे।

लेकिन उत्तर प्रदेश के सहयोगी थोड़े मुश्किल मिजाज वाले हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने प्रदेश के बंटवारे का राग छेड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि नई सरकार बनने के बाद राज्य का चार हिस्सों में बंटवारा होगा और पूर्वांचल में राजभर का राज होगा। गौरतलब है कि पिछले कई बरसों से उत्तर प्रदेश के बंटवारे की बात हो रही है। लेकिन केंद्र सरकार सीमा के पुनर्निधारण के काम में नहीं उलझना चाहती है। इसमें बिहार की सीमा भी बदलेगी। तभी इसे टाला जा रहा है। लेकिन राजभर ने अपने मतदाताओं को मैसेज देने और भाजपा पर दबाव डालने के लिए यह राग छेड़ दिया। इससे पहले भाजपा के दूसरे सहयोगी संजय निषाद ने अचानक एक दिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। कहा गया कि यह शिष्टाचार मुलाकात है। लेकिन राजनीति में तो अब शिष्टाचार लगभग पूरी तरह से समाप्त हो गया है। इसलिए यह दबाव बनाने की राजनीति का ही हिस्सा दिखाई देता है।

असल में पिछली बार भारतीय जनता पार्टी के पास दो ही सहयोगी पार्टियां थी। संजय निषाद की निषाद पार्टी और अनुप्रिया पटेल के अपना दल। इस बार दो और सहयोगी जुड़ गए हैं। जयंत चौधरी की रालोद और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी। ये दोनों पार्टियां पिछली बार समाजवादी पार्टी के गठबंधन में लड़ी थीं। पिछली बार भाजपा अकेले 376 सीटों पर लड़ी और दोनों गठबंधन की पार्टियों को 27 सीटों में एडजस्ट किया। अब रालोद और निषाद पार्टी को इससे ज्यादा सीटें चाहिए। जयंत चौधरी के साथ कम से कम 30 सीटों पर समझौता होना है और निषाद को भी 15 से ज्यादा सीटें चाहिएं। अगर इतनी सीटों पर समझौता होता है तो इसका अर्थ होगा कि भाजपा के लिए 330 के आसपास सीटें बचेंगी। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी को हर हाल में साढ़े तीन सौ सीटों पर लड़ना है। यानी चार सहयोगी पार्टियों को सिर्फ 53 सीटों में एडजस्ट करना है। यह मुश्किल लग रहा है। भाजपा को साढ़े तीन सौ सीटों से नीचे जाना होगा। भाजपा के सहयोगी भी समझ रहे हैं कि पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और अखिलेश के पीडीए दांव की वजह से भाजपा को उनकी जरुरत है। गैर यादव पिछड़ा वोट इन पार्टियों के जरिए सुनिश्चित होगा। इसलिए यह तय है कि सीट बंटवारा भाजपा के लिए आसान नहीं रहने वाला है।

चढ़ावा चोरी का मामला थमेगा नहीं

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला भारतीय जनता पार्टी के गले की हड्डी बना हुआ है। जैसे ही मामला थमने लगता है कि कोई नई खबर आ जाती है। भाजपा के प्रदेश की सरकार और योगी आदित्यनाथ के करीबी मान रहे थे कि अब यह मामला थम गया है। मंदिर का प्रबंधन संभालने के लिए वायु सेना के पूर्व अधिकारी जितेंद्र मिश्र को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। सीईओ वाली व्यवस्था बनने के बाद सारी बातें समाप्त हो गईं। लेकिन इसी बीच इस मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी की रिपोर्ट की बातें सामने आ गईं। सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा है कि मंदिर में 105 बार पैसे चुराने की घटना हुई है।

पहले कहा जा रहा है कि 25 से 30 बार पैसे चुराने की घटना हुई है। अब एसआईटी ने कहा है कि 105 बार पैसे चुराए गए हैं और इन सबके वीडियो फुटेज मौजूद हैं। पहले यह भी कहा जा रहा था कि वीडियो फुटेज डिलीट कर दी गई है। लेकिन अगर फुटेज मौजूद है और सौ बार से ज्यादा चोरी हुई है तो इसका जवाब देना होगा। इसके लिए आठ छोटे छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार करके जेल भेज देना पर्याप्त नहीं होगा। इस बात की चौतरफा कोशिश हो रही है कि चंपत राय से लेकर अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे बड़े लोगों को क्लीन चिट मिल जाए और गिरफ्तार किए गए आठ लोगों को ही चोरी के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। अभी तक ऐसा ही हो रहा है। लेकिन जिस बड़े पैमाने पर चोरी की रिपोर्ट एसआईटी ने दी है उसके बाद लोगों का भरोसा तभी बनेगा, जब कुछ बड़े लोगों पर कार्रवाई होगी। अन्य़था हिंदू भक्तों के मन में संदेह बना रहेगा।

मोहन भागवत के मुताबिक किसका उदय होगा?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले दिनों युवा धर्म संसद कार्यक्रम में अपने भाषण में कहा कि जिसका उदय होता है उसका अस्त निश्चित है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई समझता है कि हमेशा सब कुछ उसके हिसाब से ही होगा तो ऐसा नहीं होता है। उनके इस बयान के बाद एक कयास तो इस बात का लगाया जा रहा है कि उन्होंने किसके अस्त होने की बात कही है। लेकिन साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई है, अगर उनके हिसाब से किसी का अस्त होना है तो उसके बाद किसका उदय होगा? ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र 76 साल है और पार्टी के अंदर उनके उत्तराधिकारी की चर्चा शुरू हो गई है।

इसी संदर्भ में यह सवाल पूछा जा रहा है कि जिस तरह से नरेंद्र मोदी का उदय हुआ उनके बाद उस तरह का उदय किसका होगा? अमित शाह सबसे प्रबल दावेदार हैं और ऐसी जानकारी देने वाले कई लोग हैं, जिनका कहना है कि वे उप प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और इस वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल टल रही है। उनके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जो अगर अगले साल मार्च में फिर जीतते हैं तो बड़े दावेदार होंगे। इनके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का नाम भी चर्चा में है। वे संघ की पसंद बताए जा रहे हैं। फिर सवाल है कि बरसों से संघ की सबसे बड़ी पसंद रहे नितिन गडकरी का क्या होगा? मोहन भागवत और संघ की दुविधा गडकरी और फड़नवीस की होगी।

योगी सरकार का फैसला, फलावदा के जनता PG कॉलेज का बदला नाम, अब चौधरी चरण सिंह के नाम से जाना जाएगा

योगी सरकार का फैसला, फलावदा के जनता PG कॉलेज का बदला नाम, अब चौधरी चरण सिंह के नाम से जाना जाएगा

प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ महापुरुषों के गौरवशाली योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मेरठ के फलावदा स्थित जनता पीजी कॉलेज का नाम परिवर्तित कर चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा, मवाना किए जाने की कार्रवाई की गई है।

 

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक बनाने के साथ ही विद्यार्थियों को देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महापुरुषों के विचारों एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। शिक्षण संस्थानों का महापुरुषों के नाम से जुड़ाव विद्यार्थियों को उनके संघर्ष, विचार और योगदान से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है।

 

उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा जनता पीजी कॉलेज, फलावदा के नाम परिवर्तन के संबंध में शासन को प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया था। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा प्रस्ताव पर विचार करते हुए नाम परिवर्तन की संस्तुति की गई। इसी क्रम में शासन स्तर से नियमानुसार आवश्यक कार्रवाही करते हुए महाविद्यालय का नाम चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा, मवाना किए जाने का निर्णय लिया गया है।

 

चौधरी चरण सिंह का देश और प्रदेश के सामाजिक, शैक्षिक एवं कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसानों, ग्रामीण समाज और शिक्षा के प्रति उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। ऐसे महापुरुषों के नाम से शिक्षण संस्थानों का जुड़ना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का माध्यम बनेगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने दायित्वों को समझने में मदद करेगा।

 

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार महापुरुषों के सम्मान को केवल स्मरण तक सीमित रखने के बजाय उनके विचारों और योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्थागत प्रयास कर रही है। प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की पहचान, गौरव और गुणवत्ता को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

 

प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं, शोध, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उच्च शिक्षा को नई दिशा देते हुए ऐसे वातावरण का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें युवा ज्ञान, कौशल और संस्कारों के साथ आगे बढ़ सकें।

 

उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, फलावदा का नया नाम विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह के जीवन, विचारों और राष्ट्रहित में उनके योगदान से जोड़ने के साथ ही उन्हें समाज और देश के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभाने की प्रेरणा देगा।

छोटी घटना पर भी तुरंत पहुंचे DM-SP, जनता दर्शन में सख्त दिखे CM योगी आदित्यनाथ

छोटी घटना पर भी तुरंत पहुंचे DM-SP, जनता दर्शन में सख्त दिखे CM योगी आदित्यनाथ

CM Yogi Janta Darshan Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। प्रार्थना पत्रों का अवलोकन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग मामूली घटनाओं को बड़ा बनाना चाहते हैं। ऐसे में जनपदों में हर छोटी से छोटी घटना पर जिलाधिकारी व एसपी स्वयं नजर रखें। तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की सुनवाई करें और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर मामलों का पटाक्षेप कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता व लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। 

हर पीड़ित से मिले सीएम, समयबद्ध निस्तारण का दिया निर्देश

मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित से मिले। उनकी समस्याओं व शिकायतों को सुना। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विद्युत आदि से जुड़ी शिकायतों का प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि सरकार साढ़े 9 वर्ष से बिना भेदभाव हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान करा रही है। अधिकारी संवेदनशील होकर जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाएं, मरीजों के इलाज की व्यवस्था कराएं और भूमाफिया/दबंगों पर कठोरतम कार्रवाई करें। 

पुलिस से संबंधित शिकायतों पर हुए सख्त 

सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष पुलिस व राजस्व से जुड़ीं शिकायतें अधिक रहीं। इस पर मुख्यमंत्री सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं का जनपदों में निराकरण कराएं। यदि किसी मातहत द्वारा लापरवाही की शिकायत मिले तो उस पर भी कार्रवाई करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 

बच्चे से पूछा- कैसे हो, कहां पढ़ते हो 

‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आए नन्हे बच्चे से मुख्यमंत्री ने हालचाल पूछा। फिर पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने उसकी तरफ चॉकलेट बढ़ाई तो उसने झट से चॉकलेट ले ली। फिर सीएम ने चॉकलेट वापस मांगी तो बच्चे ने मना कर दिया। इस पर पूरा हॉल खिलखिला उठा। मुख्यमंत्री ने सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए बच्चे से मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा।

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ की टीम ने दिल्ली में HM अमित शाह से की मुलाकात, 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है फिल्म

Hanuman Ansh: बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ ने शानदार कमाई की है। इस सफलता के बाद फिल्म की टीम ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात में फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और लीड एक्टर शोभिनव सत्या भी मौजूद थे।

अमित शाह से की मुलाकात

जानकारी के मुताबिक बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने नीम करोली बाबा के बारे में बहुत सम्मानीय बातें कीं। वहीं उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं के बारे में अपनी जानकारी साझा की। उन्होंने फिल्म बनाने वालों को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर लाने का काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

‘रामबोला’ के बारे में दी जानकारी

विशाल के साथ प्रोड्यूसर महावीर जैन भी अमित शाह से मिलने पहुंचे थे, जिन्होंने शाह को उनके अगले प्रोजेक्ट ‘रामबोला’ के बारे में बताया। रामबोला फिल्म गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और विरासत पर आधारित है।” ‘रामबोला’ का ऐलान इसी महीने की शुरुआत में किया गया था। इसे विशाल चतुर्वेदी लिखेंगे और डायरेक्ट करेंगे। वहीं महावीर इसके को-प्रोड्यूसर होंगे।

इन लोगों से भी हो चुकी है मुलाकात

इससे पहले ‘हनुमान अंश’ की टीम कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात कर चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में टीम ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसके बाद मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की थी।

7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज थिएट्रिकल सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। लगभग ₹2 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में धीमी रही, लेकिन लोगों की बातचीत (वर्ड ऑफ माउथ) से इसे गति मिली और चौथे हफ्ते से इसमें जबरदस्त उछाल आया। इसने दुनिया भर में ₹300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।