दीपक चहर के 1.5 लाख के बैट चोरी, बोले- पुलिस में जाऊं या योगी जी-मोदी जी से लगाऊं गुहार? [VIDEO]

भारतीय क्रिकेटर दीपक चहर के साथ आगरा में एक ऐसा मामला हुआ है, जिसने उन्हें भी हैरान कर दिया। प्रैक्टिस के दौरान उनके तीन प्लेयर-एडिशन क्रिकेट बैट चोरी हो गए। इन तीनों बैट की कुल कीमत करीब 1.5 लाख रुपये बताई जा रही है।

 

मामला आगरा के चहर-डावर क्रिकेट ग्राउंड का है, जहां दीपक प्रैक्टिस करने पहुंचे थे। बैट चोरी होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और बेहद दिलचस्प अंदाज में लोगों से पूछा कि अब उन्हें आगे क्या करना चाहिए।

 

 प्रैक्टिस के बीच गायब हुए 3 बैट, कीमत करीब डेढ़ लाख

 

दीपक चाहर के पिता और कोच लोकेंद्र चाहर आगरा में चाहर-डावर ग्राउंड के नाम से क्रिकेट अकादमी चलाते हैं। बताया गया कि दीपक अभ्यास के दौरान अपनी क्रिकेट किट ग्राउंड पर रखकर गेंदबाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे।

 

करीब एक घंटे बाद जब वह बल्लेबाजी की तैयारी करने के लिए अपने बैट लेने पहुंचे, तो तीनों बैट गायब थे। दीपक के मुताबिक ये सामान्य क्रिकेट बैट नहीं, बल्कि प्लेयर-एडिशन बैट थे और तीनों की कुल कीमत करीब 1.5 लाख रुपये है।

 

दीपक ने सोशल मीडिया वीडियो में यह भी कहा कि जिसने बैट लिए हैं, संभव है उसे उनकी असली कीमत का अंदाजा ही न हो। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि चोर चाहे तो बैट वापस कर दे, बदले में वह उसे पैसे देने को तैयार हैं।

 

 

 

 

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 ‘पुलिस में जाऊं या योगी जी-मोदी जी से कहूं?’

 

बैट चोरी होने के बाद दीपक चाहर ने अपने फॉलोअर्स के सामने कुछ विकल्प भी रखे। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें पुलिस में शिकायत करनी चाहिए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगानी चाहिए या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी बात पहुंचानी चाहिए।

 

दीपक ने यह भी मजाक में कहा कि चोर इन महंगे बैट का क्या करेगा—उन्हें बेच देगा या फिर टेनिस-बॉल क्रिकेट खेलेगा। उनका कहना था कि अगर चोर को पैसों की जरूरत थी तो वह उनसे मांग सकता था।

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क्रिकेटर ने बैट वापस करने की अपील करते हुए कहा कि अगर चोरी करने वाला उन्हें लौटा देता है तो वह उसे पैसे देने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने बैट बनाने वाली कंपनी से अतिरिक्त बैट मांगने का विकल्प भी मजाकिया अंदाज में सामने रखा।

 

फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक घटना के समय तक औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी। दीपक चाहर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है और उनके ‘योगी जी या मोदी जी’ वाले अंदाज ने लोगों का खास ध्यान खींचा है।

 

दीपक चाहर ने भारत के लिए 13 वनडे और 25 टी20 इंटरनेशनल खेले हैं। वनडे में उनके नाम 16 और टी20 इंटरनेशनल में 31 विकेट हैं। उनका आखिरी वनडे मुकाबला दिसंबर 2022 में और आखिरी टी20 इंटरनेशनल दिसंबर 2023 में आया था।

 

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही यूपी की ताकत : मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में उत्तर प्रदेश की ताकत दिखाई दे रही है। यहां उत्तर प्रदेश में निर्मित तमाम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें गोरखपुर के टेराकोट उत्पाद भी शामिल हैं। रविवार को वहां 1.5 लाख से अधिक लोग आए, सोमवार को भी भारी भीड़ उमड़ी है। इस ट्रेड शो में 90 देशों के खरीदार पहुंचे हैं, जो यूपी की सामर्थ्य दिखाता है। शो में शिल्पकारों के उत्पादों की बिक्री और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भी उत्तर प्रदेश के पास सामर्थ्य था, लेकिन नेतृत्व के पास इच्छाशक्ति नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप यूपी बीमारू और बदनाम प्रदेश बनकर रह गया था। इसे देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। किंतु, बीते साढ़े नौ सालों में सम-विषम परिस्थितियों में नेतृत्व के जूझने और अनथक प्रयास का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू की छवि से उबरकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

चुनौतियों से जूझकर किए हर क्षेत्र में रिफॉर्म

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कई चुनैतियां थीं। बाहर के लोग यूपी का नाम सुनकर चौंकते थे। पहचान का संकट ऐसा था कि युवाओं के लिए राज्य, देश या विदेश में नौकरी नहीं थी। कर्फ्यू-दंगे प्रदेश की नियति बन गए थे। पुलिस में दो लाख पद खाली थे तो कानून व्यवस्था कैसे ठीक रहती। सरकार में आने के बाद हमने हर क्षेत्र में रिफॉर्म किए। युवाओं के हित में सरकार ने न केवल भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, बल्कि प्रशिक्षण और इससे जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी आगे बढ़ाया। साढ़े नौ सालों में प्रदेश सरकार ने शुचिता व पारदर्शिता के साथ 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। इसमें अकेले यूपी पुलिस में 2 लाख 30 हजार नौकरियां दी गईं। 

कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होकर तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। कभी बीमारू के तमगे वाला प्रदेश अब देश की टॉप-थ्री इकॉनमी में है। कर्फ्यू-दंगे से मुक्त होने के बाद यूपी तेज प्रगति की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति का ग्रोथ इंजन कहला रहा है। यूपी वही है, लेकिन प्रयास से परिणाम की यात्रा में बदलाव हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा। 2017  से पहले राज्य में सिर्फ 130 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 24 हजार से अधिक हो चुकी है। 

कविता सुनाकर बोले सीएम- प्रयास से ही मिलेगी मंजिल

समारोह में विद्यार्थियों को शिक्षक व अभिभावक की तरह समझाते हुए सीएम योगी ने कहा कि किसी प्रतियोगिता में पदक जीतने से पहले सबसे महत्वपूर्ण प्रतिभाग करना है। उन्होंने महान कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता, ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ सुनाते हुए कहा कि सबसे जरूरी है प्रयास करना, क्योंकि प्रयास ही मंजिल तक पहुंचाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का भी उदाहरण दिया। कहा कि डॉ. कलाम फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन फेल होने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार में कम साधन होने के बावजूद वह भारत के मिसाइल मैन बने। राष्ट्रपति बनने के पहले उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मिला। सीएम ने विद्यार्थियों को सीख दी कि वे अपने हौसलों को कभी कमजोर न होने दें। जो ठान लेता है, वही करके भी दिखाता है। इसलिए जीवन में कभी हिम्मत नहीं हारना है। 

500 खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती अगले सप्ताह से

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में भी बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप के साथ ही खेलों को भी बढ़ावा दे रही है। ओलंपिक, एशियाड, कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता को खूब नकद पुरस्कार देने साथ ही उन्हें सीधे सरकारी नौकरी दी जा रही है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले सप्ताह 500 और खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती शुरू होगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थितजन को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, यातायात नियमों के पालन और नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा शर्मा कौशिक, दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओपी सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

राष्ट्रीयता, कृतज्ञता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और गुरु-परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पितरों (पूर्वजों) की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रचेतना के स्वर गूंज रहे हैं। अवसर है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का।

 

गोरक्षपीठ में 23 सितंबर से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा एवं 24 सितंबर से समसामयिक विषयों पर सम्मेलन जारी है। इसी क्रम में आश्विन कृष्ण तृतीया (मंगलवार, 29 सितंबर) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में विशाल श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित होगी, जिसमें देशभर के अनेकानेक संतजन उपस्थित रहेंगे।

 

आजीवन और स्मृतिशेष होकर भी अपने विचारों, संकल्पों और कार्यों से भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करने वाले, 1935 से 1969 तक नाथपंथ की विश्वविख्यात गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर रहे महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज को इतिहास ‘युगपुरुष’ के रूप में स्मरण करता है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे, बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा।

मेवाड़ में जन्मे थे महंत दिग्विजयनाथ 

महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर की गोरक्षपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी का प्रभाव था कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट-कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया।

श्रीराम मंदिर आंदोलन में नींव के पत्थर हैं ब्रह्मलीन महंतश्री

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका को सभी जानते हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी, बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजयनाथ जी के नेतृत्व में अखंड रामायण पाठ का आयोजन शुरू हो गया था।

 

रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ जी ने निर्णायक बनाया। एक सुखद संयोग यह भी है कि न्यायालय के निर्णय के बाद मंदिर निर्माण की जब शुभ घड़ी आई तब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी स्वत: सबको स्मरण होंगे। 

शिक्षा की जलाई ज्योति से प्रकाशित हो रहा पूर्वांचल

महंत दिग्विजयनाथ जी ने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा पूर्वांचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम ‘महाराणा प्रताप हाई स्कूल’ हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ जी के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केंद्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतश्री के नेतृत्व में हुई।

 

शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी दो संस्थाओं महाराणा प्रताप डिग्री कालेज व महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में महंत दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा वर्तमान में चार दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थाएं गोरखपुर क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। इनमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा तक के प्रकल्प सम्मिलित हैं।

राजनीति को भी लोक कल्याण का ध्येय माना

महंत दिग्विजयनाथ जी ने राजनीति में भी गोरक्षपीठ की लोक कल्याण की परंपरा को ही ध्येय बनाया। 1937 में हिंदू महासभा में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की विधिवत शुरुआत की। महंत जी ने 1944 में हिंदू महासभा के प्रांतीय अधिवेशन का ऐतिहासिक आयोजन गोरखपुर में कराया। महासभा के राजनीतिज्ञ होने के कारण 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के मिथ्यारोप में उन्हें बंदी बना लिया गया, लेकिन सरकार को उन्हें 1949 में दस माह बाद ससम्मान बरी करना पड़ा। राष्ट्रहित में उन्होंने 1956 में पृथक पंजाबी राज्य के लिए मास्टर तारा सिंह के आमरण अनशन को सूझबूझ से समाप्त कराया।

 

वह 1961 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (हिंदू राष्ट्रपति के रूप में) निर्वाचित हुए। धर्म व सामाजिक एकता के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय है। 1939 में अखिल भारतीय अवधूत भेष बारहपंथ योगी महासभा की स्थापना कर पूरे देश के संत समाज को लोक कल्याण व राष्ट्रहित में एकजुट करने के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। 1960 में हरिद्वार में अखिल भारतीय षडदर्शन सभा सम्मेलन की अध्यक्षता, 1961 में दिल्ली में अखिल भारतीय हिंदू सम्मेलन का आयोजन व 1965 में दिल्ली में अखिल विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। 1967 में गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए महंतजी 1969 में ब्रह्मलीन हुए, लेकिन उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की अमरता अहर्निश बनी हुई है। इन महातपस्वी के आदर्श, शिक्षा संस्थान और राष्ट्रीय दृष्टि आज भी समाज को गति और दिशा प्रदान कर रहे हैं।

 

शाह और योगी में सब ठीक है

शुक्रवार को दिल्ली से सटे नोएडा की एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी और उनके लिए काम करने वाले इकोसिस्टम ने इसे सोशल मीडिया में बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया। तस्वीर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की थी। मौका था नोएडा में यूपी के इंटरनेशनल ट्रेड शो के उद्घाटन का। अमित शाह उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान वे योगी आदित्यनाथ के साथ बैटरी वाले कार्ट में बैठ कर भी घूमे और योगी की जम कर तारीफ की।

इससे पहले कहा जा रहा था कि शाह और योगी में तनातनी है और इस वजह से अमित शाह उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह से बाहर हैं। यह भी गिन कर बताया जा रहा था कि शाह को उत्तर प्रदेश में कोई राजनीतिक कार्यक्रम किए कितना समय हो गया है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक है और अमित शाह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर नजर रखेंगे। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की तारीफ की और खास कर कानून व्यवस्था की जम कर तारीफ की। उन्होंने बताया कि पहले इस तरह के ट्रेड शो लखनऊ की बजाय दिल्ली में करने होते थे क्योंकि राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब थी। भले आगे जो हो लेकिन शाह और योगी की एक साथ तस्वीर और योगी की तारीफ के बाद विवाद वाला मामला थमता दिख रहा है।

उत्तर प्रदेश के उत्पादों पर बढ़ा दुनिया का भरोसा, निर्यात दो लाख करोड़ के पार: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर आज पूरी दुनिया को भरोसा है।

प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। योगी ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदार और 2400 से अधिक एग्जीबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं।

दोनों नेताओं ने एक ही ई-कार्ट से ट्रेड शो का अवलोकन किया और उद्यमियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है। यूपी ट्रेड शो ट्रेडिशन और टेक्नोलॉजी, हेरिटेज और इनोवेशन के संगम का उदाहरण है।

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उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने ही परंपरागत उद्यमों की ताकत को पहचाना था और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की सोच दी थी। टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और 75 नये उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है।

भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, कन्नौज के इत्र और बनारस की सिल्क साड़ियां अब करोड़ों के कारोबार वाले ब्रांड बन चुकी हैं। एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट और फ्रेट कॉरिडोर ने बाजार तक पहुंच आसान की है। ट्रेड शो में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री हैं। उनके विशेष पवेलियन लगे हैं। कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि के बाद सीएम ने अमित शाह को फिरोजाबाद के ओपल ग्लास से बनी राधा-कृष्ण प्रतिमा भेंट की और ‘एक जनपद एक व्यंजन’ पोर्टल का शुभारंभ किया।

Pic Credit : UNI

बिचौलियों का खेल खत्म! आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए योगी सरकार का नया प्लान, जानिए कैसे 20 लाख लोगों की बदलेगी जिंदगी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बहुत जल्द बिचौलियों का खेल खत्म करने की तैयारी की रही है। राज्य सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर तेजी से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश कॉरपोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज (UPCOS) के लॉन्च से करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारी और उनके परिवार एक नए कल्याणकारी ढांचे के केंद्र में आ गए हैं। सरकार का कहना है कि परिवार के सदस्यों को शामिल करने पर इस पहल से 17 से 20 लाख लोग लाभांवित हो सकते हैं।

सरकार की व्यवस्था से दूर होंगी आउटसोस वर्करों की चिंताएं

बीजेपी के लिए यह प्रशासनिक सुधार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी विभागों, हॉस्पिटल, लोकल बॉडी और दूसरे सार्वजनिक संस्थानों में काम करते हैं। इससे वे एक बड़ा कार्यबल बन जाते हैं जिनका सीधा लिंक सरकारी मशीनरी से होता है। नए सिस्टम का मकसद उनकी कुछ पुरानी चिंताओं को दूर करना है, जिसमें वेतन में देरी, एजेंसियों द्वारा कटौती, सामाजिक सुरक्षा की कमी और नौकरी को लेकर अनिश्चितता शामिल है।

आउटसोर्स कर्मियों के बैंक खाते में जाएगी सैलरी

यूपीसीओएस के तहत, सैलरी सीधे वर्कर के बैंक अकाउंट में भेजी जाएगी, जबकि ईपीएफ और ईएसआई योगदान नियमित जमा किए जाएंगे। सरकार ने कहा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों को वर्कर की सैलरी से सर्विस चार्ज काटने की इजाजत नहीं होगी। कैटेगरी के आधार पर 20 लाख रुपये से 40 लाख रुपये के एक्सीडेंट इंश्योरेंस की भी घोषणा की गई है।

बड़े वेलफेयर मॉडल पर काम कर रही सरकार

प्रदेश सरकार के हाल के फैसले बताते हैं कि वह एक बड़े वेलफेयर मॉडल पर आगे बढ़ रही है। इसके तहत नकद लाभ को एक बड़े वेलफेयर मॉडल का केंद्र बिंदु माना जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य, बीमा और रोजगार सुरक्षा भी शामिल है। हाल ही में पंचायत असिस्टेंट का मानदेय बढ़ाने पर सहमती के साथ ही सरकार ने रोजगार और सामाजिक आर्थिक सुरक्षा से जुड़े कई सहूलियतें प्रदान करने की घोषणा की। इसी तरह अगस्त में 3.5 लाख से अधिक मिड-डे मील कुक का मानदेय बढ़ाने का फैसला किया था। सरकार ने उन्हें कैशलेस हेल्थ कवर सहित कई अन्य सुविधाओं की घोषणा की थी। आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी बढ़ते वेलफेयर नेट में लाया गया है। 8 सितंबर को, योगी ने हेल्पर्स और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए उनके महीने के मानदेय को 8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने की घोषणा की। बड़ी वेलफेयर स्कीमों की तुलना में अलग-अलग रकम कम लग सकती है, लेकिन राजनीतिक महत्व कवर किए जा रहे ग्रुप्स की संख्या और नेचर में है।

कल्याणकारी योजनाओं की सोच में बदलाव

लखनऊ में गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर नोमिता पी कुमार ने कहा कि इन उपायों से सरकार की कल्याकारी योजनाओं की सोच में बदलाव का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा, “पंचायत असिस्टेंट के मानदेय में 50% की बढ़ोतरी से लेकर आंगनवाड़ी वर्कर, मिड-डे मील कुक और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बढ़ी हुई आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा तक, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वेलफेयर पॉलिटिक्स का एक नया पैटर्न उभर रहा है।”

यूपी ट्रेड शो: अमित शाह बोले- उत्तर प्रदेश में बनी ब्रह्मोस मिसाइलों ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित UP इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के चौथे एडिशन की शुरुआत हो गई है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस ट्रेड शो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, राज्य अब की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। शाह ने आगे कहा कि, उत्तर प्रदेश में तैयार की जा रही ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सैन्य ताकत को मजबूत कर रही है।

पाकिस्तान को नहीं आ रही नींद!

केंद्रीय मंत्री ने भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि, राज्य में बनी ब्रह्मोस मिसाइल अब पाकिस्तान की “रातों की नींद हराम” कर रही है। UP इंटरनेशनल ट्रेड शो में अमित शाह ने कहा कि, उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर से रक्षा क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का कुल डिफेंस प्रोडक्शन अब करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। शाह ने कहा कि इससे देश में ही आधुनिक हथियार तैयार करने और रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिल रही है।

भारत का एक्सपोर्ट अब 56 गुना बढ़ा

शाह ने कहा कि, “साल 2013 के मुकाबले भारत का एक्सपोर्ट अब 56 गुना बढ़ चुका है और इसमें उत्तर प्रदेश की भी अहम भूमिका रही है।” उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार होने से निवेश के लिए माहौल बेहतर हुआ है। शाह ने इसके लिए योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश में तैयार हो रही ब्रह्मोस मिसाइल देश की रक्षा ताकत को मजबूत कर रही है और इससे पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश तेजी से मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है और राज्य ने 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है।

तनाव के बीच भी नहीं रुकी तरक्की

अमित शाह ने कहा कि दुनिया में जारी तनाव और कई चुनौतियों के बीच भी भारत ने अपनी आर्थिक तरक्की को बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि देश में GST कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है। इसके अलावा छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल खर्च किया है। शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश को हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में मजबूत बनाना है और 2047 तक भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करना है।

यहां हर साल बनेंगे करीब 100 ब्रह्मोस मिसाइल

लखनऊ में बनी ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण परियोजना है। पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां तैयार की गई ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच को रवाना किया था। करीब 380 करोड़ रुपये की लागत से 200 एकड़ में तैयार इस केंद्र ने वर्चुअल उद्घाटन के करीब पांच महीने बाद ही काम शुरू कर दिया था। यहां हर साल करीब 100 मिसाइल सिस्टम तैयार किए जाने की उम्मीद है।

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यमुना एक्सप्रेस-वे पर चलती बस में लगी भीषण आग 9 यात्रियों की मौत

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा जेवर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे पर बुधवार देर रात एक चलती बस में अचानक भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया।

कश्मीरी गेट, नई दिल्ली से महोबा जा रही एक बस में 33 किलोमीटर माइलस्टोन के पास आग लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में बस के अंदर मौजूद नौ यात्रियों की जलने और दम घुटने से मौत हो गई, जबकि बचाव दल ने 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार ने गुरुवार को जानकारी दी और बताया कि,बस में आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस के उच्चाधिकारी स्थानीय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

जेवर टोल पर तैनात फायर टेंडर के अलावा अन्य चार फायर टेंडर, रेस्क्यू टेंडर और फायर सर्विस यूनिट को भी तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। आग बुझाने के बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बस के अंदर धुआं भरा होने के बावजूद जवानों और दमकलकर्मियों ने अथक प्रयास करते हुए यात्रियों को बाहर निकाला।

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रेस्क्यू के दौरान बस के अंदर नौ लोग मृत अवस्था में मिले। प्रथम दृष्टया उनकी मौत जलने अथवा दम घुटने के कारण होने की बात सामने आई है। प्रारंभिक जांच में बस में आग लगने का कारण एसी में स्पार्क/ब्लास्ट होना बताया जा रहा है। इसके बाद बस के इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने और तेजी से फैलने की आशंका जताई गई है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। हादसे के बाद जेवर थाना पुलिस ने मृतकों की पहचान कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा मृतकों के परिजनों से संपर्क करने और उनकी शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना के संबंध में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बस के चालक और परिचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। घटना का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। प्रशासन द्वारा हादसे से संबंधित अन्य आवश्यक कार्रवाई भी की जा रही है।

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लखनऊ में अब कट्टा-बम नहीं ब्रह्मोस बन रही है: योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों में लखनऊ में कट्टा और बम बनते थे, अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है।

योगी ने गुरुवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण की 12 हजार करोड़ रुपये की दो महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं वरुण विहार और नैमिष नगर का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि दोनों योजनाएं 10,680 एकड़ में विकसित होंगी। वरुण विहार 6,500 एकड़ में छह लाख लोगों के लिए और नैमिष नगर 4,100 एकड़ में चार लाख लोगों के लिए बसाया जाएगा।

इस दौरान 2,166 करोड़ के पांच बहुमंजिला अपार्टमेंट का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियोजित विकास में जमीन दबंगों-गुंडों को बिक जाती थी, जिससे समस्या खड़ी होती थी।

अब नियोजित विकास पर जोर है। किसानों को अच्छा मुआवजा मिलेगा, एलडीए और किसान के बीच कोई मध्यस्थ नहीं होगा, दलाली नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वरुण विहार को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा और लखनऊ से नैमिषारण्य तक फोरलेन सड़क बनेगी। 

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लखनऊ को स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी और रायबरेली शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परियोजनाओं में जिन किसानों की जमीन आ रही है, उन्हें अच्छा मुआवजा मिलेगा।

कोई दलाली नहीं होने दी जाएगी। एलडीए और किसान के बीच कोई मध्यस्थ नहीं होगा। सीधे बातचीत होगी और मुआवजा जमीन मालिक के खाते में जाएगा। योगी ने बताया कि दोना गांव के मुनेश्वर सिंह को 3.13 करोड़, रेवरी की रमदेई को 2.05 करोड़, कमलेश कुमार को 2.80 करोड़ और अब्बास नगर की सुषमा सिंह को 2.90 करोड़ मुआवजा मिला। नमरा फातिमा ने मुआवजे से दूसरी जगह जमीन खरीदी और शेष धन से मेडिकल की पढ़ाई की तैयारी करने की बात कही। ओम प्रकाश अवस्थी ने 1.96 करोड़ के मुआवजे से डेढ़ बीघा के बदले 16 बीघा जमीन खरीदी और शेष राशि एफडी कर दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ से नैमिषारण्य तक फोरलेन कनेक्टिविटी होने जा रही है। आने वाले समय में लखनऊ और नैमिषारण्य के बीच दूरी नहीं रह जाएगी। वरुण विहार के बीच से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी दी जाएगी।

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Yamuna Expressway Bus Fire: जलती बस से जिंदा बाहर आई युवती ने बताया कैसे बची उसकी जान, पीछे जो छूटे वो इतने लकी नहीं थे, बच नहीं पाए

Yamuna Expressway Bus Fire: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार (24 सितंबर) सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। जेवर एयरपोर्ट के पास एक चलती प्राइवेट स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत होने की खबर है। जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि करीब 30 से अधिक यात्री बस में सवार थे। आग लगते ही कई यात्रियों ने कूदकर जान बचाई। जेवर पुलिस ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि इस दुखद घटना में एक महिला और 8 पुरुषों समेत 9 लोगों की मौत हो गई है।

नोएडा से महोबा जा रही थी बस

न्यूज 18 के मुताबिक, यह निजी स्लीपर बस नोएडा से महोबा जा रही थी। हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर एयरपोर्ट के नजदीक हुआ। आग लगते ही बस देखते ही देखते आग की लपटों से घिर गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बस पूरी तरह आग की चपेट में दिखाई दे रही है। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने यात्रियों की मदद करने की कोशिश की।

बस में करीब 30-40 यात्री सवार थे

अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय बस में करीब 30 से 40 लोग सवार थे। आग लगने के बाद जान बचाने के लिए कई यात्रियों ने बस की खिड़कियों से बाहर छलांग लगा दी। बस के अंदर धुआं भर जाने के कारण यात्रियों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया। कई यात्रियों ने घबराहट और भगदड़ के बीच किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

‘मैं सो रही थी, दरवाजे पर किसी ने जोर से मारा’

हादसे से बची एक महिला यात्री ने ANI को बताया कि वह बस में सो रही थी। तभी किसी ने दरवाजे पर जोर से आवाज की। जब उसकी आंख खुली तो बाहर काफी भीड़ थी और बस के अंदर धुआं भर चुका था। महिला के मुताबिक, वह अपना कोई सामान नहीं ले सकी। यहां तक कि उसने जूते भी नहीं पहने और सिर्फ अपना फोन लेकर बस से बाहर निकलने की कोशिश की। उसने बताया कि बस के अंदर इतना ज्यादा धुआं था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और लोग दम घुटने की स्थिति में थे। बाहर निकलने की कोशिश में यात्री एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। महिला ने बताया कि किसी व्यक्ति ने अंततः उसे बाहर खींचकर निकाला।

‘बहुत कम लोग बाहर निकल पाए’

महिला यात्री ने बताया कि बस में हालात बेहद अफरातफरी वाले थे। उसके पीछे कई लोग मौजूद थे और उसे आशंका है कि उनमें से कुछ लोग बाहर नहीं निकल सके। एक अन्य यात्री ने बताया कि वह सो गया था। तभी किसी ने उसे जगाकर बताया कि बस में आग लग गई है। इसके बाद सभी लोग बाहर निकलने के लिए भागने लगे। उस यात्री के मुताबिक, बस यात्रियों से भरी हुई थी और धुएं के कारण बाहर निकलना आसान नहीं था। किसी तरह यात्रियों ने घबराहट की स्थिति में बस से बाहर निकलने की कोशिश की।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

हादसे की सूचना मिलते ही जेवर पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है। फिलहाल आग लगने की सटीक वजह सामने नहीं आई है। पुलिस और संबंधित अधिकारी हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं।

CM योगी ने लिया संज्ञान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को घायलों को उचित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। CMO के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों से जुड़े लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज, राहत-बचाव अभियान और हादसे में प्रभावित लोगों की पहचान करना है। आग कैसे लगी और हादसे के पीछे क्या कारण था, इसकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।