लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पर चढ़ा Sprite का रंग, पहली बार किसी ब्रांड के नाम से चलेगी ट्रेन

Lucknow-Delhi Tejas Express: लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस अब करीब तीन महीने के लिए ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित की जाती है। इसे भारत की पहली ‘प्राइवेटली ब्रांडेड’ ट्रेन बताया जा रहा है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि IRCTC ने ट्रेन की ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार M/s स्प्राइट को छह महीने की अवधि के लिए दिए हैं। इसके अनुसार, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे से कहा गया है कि वह 19 अगस्त और 11 नवंबर, 2026 के बीच ट्रेन 82501/82502 को ‘Sprite’ Tejas Express के रूप में घोषित करे।

खबरों के अनुसार, ट्रेन की ब्रांडिंग का यह अधिकार Letter of Acceptance (LOA) के जरिए दिया गया है। रेलवे सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों दिशाओं में यात्रा के दौरान इस प्राइवेट ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से अनाउंस किया जाएगा।

किसी ब्रांड के नाम पर रखी जाने वाली पहली ट्रेन

यह पहली बार है जब किसी ट्रेन का नाम किसी ब्रांड के नाम पर रखा जा रहा है। रिपोर्ट में बताए गए रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भले ही लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट ट्रेन कहा जाता है, लेकिन IRCTC रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैक और स्टेशन) के इस्तेमाल के लिए इंडियन रेलवे को पेमेंट करती है।

हालांकि, ब्रांडिंग का यह तरीका इंडियन रेलवे द्वारा ट्रेनों के रेगुलर ऑपरेशन से अलग है।

इस एडवरटाइजिंग मॉडल के तहत, प्राइवेट कंपनियां ट्रेन के बाहरी हिस्से और दूसरी तय जगहों पर अपने ब्रांड दिखा सकती हैं, जबकि रेलवे नेटवर्क जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता रहता है। यानी ट्रेन पर ब्रांड का नाम और विज्ञापन तो नजर आएगा, लेकिन इसका संचालन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क के जरिए ही होगा।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ

देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

IRCTC द्वारा चलाई जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से AC है और इसमें यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें ट्रेन के अंदर खाने-पीने की बेहतर सुविधा और मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल हैं।

IRCTC इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है। यानी कॉर्पोरेट मीटिंग, शादी या किसी अन्य कार्यक्रम के लिए यात्री पूरी AC चेयर कार कोच भी बुक कर सकते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं।

Sprite के साथ हुई नई ब्रांडिंग डील से इस सर्विस में एक नया कमर्शियल पहलू जुड़ गया है, जिससे यह देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जो विज्ञापन व्यवस्था के तहत आधिकारिक तौर पर किसी कमर्शियल ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर रही है।

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योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

cm yogi

Yogi Government disposal of revenue cases: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की त्वरित न्याय और जनसमस्याओं के प्रभावी निस्तारण की नीति के तहत राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को लगातार तेज किया जा रहा है। शासन स्तर से की जा रही नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियानों का असर राजस्व वादों के निस्तारण के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

धारा-24 के 39,645 वादों का निस्तारण

सीमांकन/पैमाइश से संबंधित धारा-24 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 28,556 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 91,472 नए वाद आए, जिनमें से 39,645 वादों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में 80,383 वाद विचाराधीन हैं। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या महज 24 है। धारा-24 के तहत सबसे अधिक विचाराधीन वादों वाले जिलों में प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा शामिल हैं।

धारा-34 में विशेष अभियान से 2.21 लाख वाद निस्तारित

नामांतरण/दाखिल-खारिज से संबंधित धारा-34 में भी बड़े स्तर पर निस्तारण किया गया। 31 दिसंबर 2025 तक 48,910 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 14,70,133 वाद आयोजित हुए, जिनमें से 10,96,814 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं, 45 दिन से अधिक अवधि से लंबित नामांतरण वादों के निस्तारण के लिए 15 से 25 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में ही 2,21,667 वादों का निस्तारण किया गया।

भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में भी तेजी

धारा-80 के तहत भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 28,797 वाद आए, जबकि 49,855 वादों का निस्तारण किया गया। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य दर्ज की गई है।

पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर

योगी सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में पुराने और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि विशेष अभियान, नियमित समीक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग के माध्यम से लंबित वादों के निस्तारण की गति बढ़ी है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण, आमजन को समयबद्ध न्याय और राजस्व संबंधी मामलों में पारदर्शी एवं सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

योगी सरकार में निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जारी, 1828 पदों पर 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन

योगी सरकार में निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जारी, 1828 पदों पर 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने विज्ञापन संख्या-03-परीक्षा/2024 के तहत आयोजित सहायक लेखाकार एवं लेखा परीक्षक मुख्य परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। कुल 1828 विज्ञापित पदों के सापेक्ष 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया गया है। आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांकों की सूची तथा विभिन्न श्रेणियों की कटऑफ लिस्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी हैं।

 

668 सामान्य चयन पदों पर 570 अभ्यर्थी चयनित

आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत सहायक लेखाकार के 668 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 570 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। इनमें अनारक्षित वर्ग के 387, अन्य पिछड़ा वर्ग के 117 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 66 अभ्यर्थी शामिल हैं। अनुसूचित जाति के 88 और अनुसूचित जनजाति के 10 पदों के सापेक्ष संबंधित श्रेणी के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण इन पदों को नियमानुसार अग्रनीत किया गया है।

 

950 विशेष चयन पदों में 866 अभ्यर्थियों को मिली सफलता

सहायक लेखाकार के 950 विशेष चयन पदों के सापेक्ष 866 अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित हुए हैं। इनमें अनुसूचित जाति के 341, अनुसूचित जनजाति के 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 513 अभ्यर्थी शामिल हैं। महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत विज्ञापित 190 पदों के सापेक्ष सभी 190 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।

 

लेखा परीक्षक के 209 पदों पर 206 चयनित

आयोग ने लेखा परीक्षक के 209 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 206 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इनमें अनारक्षित वर्ग के 96, अनुसूचित जाति के 28, अनुसूचित जनजाति के 4, अन्य पिछड़ा वर्ग के 58 और ईडब्ल्यूएस वर्ग के 20 अभ्यर्थी शामिल हैं।

महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत 41 पदों के सापेक्ष सभी 41 महिला अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।

 

विधिक सेवा प्राधिकरण के पद पर भी चयन

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नियंत्रणाधीन सहायक लेखाकार के एक पद पर भी एक अभ्यर्थी का चयन हुआ है। यह पद अनारक्षित श्रेणी का था।

 

68 अभ्यर्थियों का चयन औपबंधिक

आयोग ने 68 अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से अंतिम चयन परिणाम में शामिल किया है। इनका अंतिम चयन प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण पत्रों एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के बाद आयोग और संबंधित अधियाचनकर्ता विभाग के निर्णय पर निर्भर होगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम चयन परिणाम संबंधित उच्च न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिकाओं/विशेष अपीलों तथा भविष्य में दायर होने वाले संबंधित मामलों में पारित होने वाले आदेशों के अधीन रहेगा।

 

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जोर

योगी सरकार लगातार प्रदेश में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने पर जोर दे रही है। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ चयन आयोगों के माध्यम से परिणाम जारी किए जा रहे हैं। सहायक लेखाकार और लेखा परीक्षक के इन पदों पर चयन से बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा। 

 

वेबसाइट पर चयन सूची और कटऑफ उपलब्ध

यूपीएसएसएससी ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक की सूची और श्रेणीवार कटऑफ आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। अभ्यर्थी अपने परिणाम एवं चयन से संबंधित विवरण आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

नीति आयोग की एबीपी रैंकिंग में गोरखपुर का बजा डंका, बांसगांव ब्लॉक नंबर वन

नीति आयोग की एबीपी रैंकिंग में गोरखपुर का बजा डंका, बांसगांव ब्लॉक नंबर वन

NITI Aayog ABP Ranking : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने गोरखपुर जिले के विकास को लेकर नया इतिहास रच दिया है। भारत सरकार के नीति आयोग की एबीपी (आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम या एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम) रैंकिंग में गोरखपुर जिले का बांसगांव विकास खंड, ‘नंबर वन’ चुना गया है। नंबर वन ब्लॉक बनने पर डेढ़ करोड़ रुपए का पुरस्कार भी मिला है। बांसगांव ब्लॉक की इस उपलब्धि ने गोरखपुर के साथ ही समूचे उत्तर प्रदेश का गौरव पूरे देश में बढ़ाया है। गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा और मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में हो रहे समावेशी विकास के कार्यों को दिया है।   

 

नीति आयोग की तरफ से देशभर में कराई गई जनवरी–मार्च 2026 तिमाही की आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम, डेल्टा रैंकिंग में गोरखपुर जनपद का बांसगांव ब्लॉक, उत्तरी भारत (जोन-2) में प्रथम स्थान प्राप्त करने में सफल रहा है। यह जानकारी नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर की तरफ से यूपी के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में दी गई है। इस उत्कृष्ट उपलब्धि के एवज में गोरखपुर को डेढ़ करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि भी मिली है।

जिलाधिकारी दीपक मीणा बताते हैं कि नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम का जोर समावेशी विकास के जरिए नागरिकों के जीवन में सुगमता और गुणवत्ता की वृद्धि तथा समग्र रूप में जीवन स्तर के सुधार पर होता है। इसके अंतर्गत पांच थीम स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, आधारभूत ढांचा और सामाजिक विकास के कुल 39 केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स या मुख्य निष्पादन संकेतक) पर संबंधित आकांक्षी ब्लॉकों का मूल्यांकन किया जाता है।

 

डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर बांसगांव ब्लॉक ने जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में सभी पांच थीम के 39 केपीआई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शत प्रतिशत वेटेज प्राप्त किया है। यह उपलब्धि इस तथ्य को भी प्रतिष्ठित करती है कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर समावेशी विकास के मोर्चे पर देश में नए मानक स्थापित कर रहा है। 

संपूर्ण प्रदेश के लिए बांसगांव बना 'मॉडल ब्लॉक'

बांसगांव क्षेत्र, जिसे कभी विकास की दौड़ में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, आज अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता और नवाचारों के बल पर पूरे देश में 'मॉडल विकास खंड' के रूप में उभरा है। इस सफलता से न केवल गोरखपुर जिले का मान बढ़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य आकांक्षी ब्लॉकों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

 

गोरखपुर के मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी का कहना है कि डेल्टा रैंकिंग में मिली नंबर वन की उत्कृष्ट उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बांसगांव ब्लॉक की जनता के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण पत्र है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस पुरस्कार राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े विकास कार्यों में किया जाएगा।

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

जेवर में जलभराव पर सियासत तेज, विधायक धीरेन्द्र सिंह बोले- जिन्हें विकास नहीं दिखता, उन्हें सिर्फ गड्ढे नजर आते हैं

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट पार्किंग स्थल पर बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जिन्हें जेवर का अभूतपूर्व विकास नहीं दिखाई देता, उन्हें केवल गड्ढे और जलभराव नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर कमियों को दूर करने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसे प्रदेश में हो रहे विकास से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति बताया।

 

धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि बारिश के बाद विपक्ष को यहां गड्ढे और जलभराव दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसी धरती पर खड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, विश्वस्तरीय सड़कें, औद्योगिक निवेश और हजारों युवाओं के लिए पैदा हो रहे रोजगार के अवसर नजर नहीं आ रहे। विधायक ने कहा कि एक समय जेवर क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आज यह उत्तर प्रदेश के बदलते औद्योगिक और आर्थिक स्वरूप का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेवर को देश-दुनिया के मानचित्र पर नई पहचान दी है।

 

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में एयरपोर्ट वर्षों तक चर्चा और कागजों तक सीमित रहा, आज वे इसके आसपास बारिश के पानी को लेकर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें जेवर में हुआ विकास और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर स्वीकार नहीं हो रही है।

 

विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे

 

धीरेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जलभराव या किसी तकनीकी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है। उन्होंने कहा, विपक्ष तस्वीरों में गड्ढे खोजता रहे, हम जेवर में विकास की नई इबारत लिखते रहेंगे। कमी जहां होगी, उसे ठीक कराया जाएगा, लेकिन कुछ समय के जलभराव को जेवर और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक विकास पर पर्दा डालने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा।

Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

Diamond State Summit: ‘हमारे युवा प्रतिभाशाली हैं…’ , CM योगी ने की Gen-Z युवाओं की जमकर तारीफ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम डायमंड स्टेट समिट में देश युवाओं की काफी तारीफ की। डायमंड स्टेट्स समिट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि, युवा देश का भविष्य हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मदद के लिए उनकी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

बता दें कि, सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दिल्ली में नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक विवाद को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में Gen-Z युवाओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। न्यूज18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट’ कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके लोग इस योजना के तहत कम से कम एक घंटे का समय उन छात्रों को देते हैं, जो यूपीएससी, नीट, आईआईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

युवाओं पर सीएम योगी आदित्यनाथ का फोकस

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सबसे युवा आबादी का नेतृत्व करता है। हमारा युवा प्रतिभाशाली है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए हैं, जहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी सिखाई जा रही है। AI, स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर तमाम आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत यूपी के सरकारी इंटर कॉलेजों का कायाकल्प किया गया। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिला। UPSC, UPPSC, NEET और IIT-JEE की तैयारी के लिए वर्चुअल और फिजिकल कोचिंग की व्यवस्था की गई। जिलों में तैनात UPSC पास अधिकारी युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे।

सीएम योगी ने कहा कि देश के युवा प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में काफी लंबी दूरी तय की है और क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह सिर्फ आंकड़ों के आधार पर बदलाव की बात नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब आम लोग खुद अपनी आंखों से बदलाव देख रहे हैं, तो यह साफ है कि वास्तव में काफी बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में काशी और प्रयागराज को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में विश्वविद्यालय नहीं था। लेकिन पिछले 9 वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़, बलरामपुर और मिर्जापुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में भदोही में भी काशी नरेश विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बनने से प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

-हरिशंकर मिश्र

Kanwar Yatra social harmony: किसी भी समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता का वातावरण तब स्वतः निर्मित होता है, जब व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर भक्ति का पथ अपनाता है। कांवड़ यात्रा इसी सत्य का सजीव प्रतीक है। मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की यह एक विराट यात्रा है जिसमें जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक भेदभाव गौण हो जाते हैं। कांवड़ यात्रा हमारे लिए यह बड़ी सीख भी है कि सामाजिक समरसता किसी उपदेश से नहीं, बल्कि साझा आस्था, सहभागिता और परस्पर सम्मान से विकसित होती है और इसे वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप में देखा भी जा सकता है जबकि एक साथ हजारों लोग कंधे पर गंगाजल लिए शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

विविधताओं के बीच एकात्मता का यह दृश्य इस सावन में जीवंत हो उठा है। प्रेम, सेवा, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर टिकी हुई यह श्रद्धा यात्रा वह आध्यात्मिक शक्ति है जो लोगों को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ती है। इस सामूहिक अनुशासन के पीछे एक साक्षा पहचान है-भोला। यानि वह संज्ञा जो मनुष्य को शिव से एकाकार करती है।

 

‘भोला’ कोई साधारण संबोधन नहीं है। यह बराबरी का संवाद है। कांवड़ उठाते ही श्रद्धालु का नाम, उसका कुल, उसकी आर्थिक हैसियत गौण हो जाती है। सड़क किनारे सेवा शिविर में एक करोड़पति व्यापारी का बेटा और एक दिहाड़ी मजदूर का बेटा एक ही पंगत में बैठकर बराबरी से भोजन करते हैं। यह सिर्फ भूख मिटाना भर नहीं हैं। यह सदियों पुरानी सामाजिक दूरियों को पाटने का एक मौन प्रयास है और आस्था की स्वाभाविक शक्ति से यह भाव जन्म लेता है।

 

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सामाजिक आयाम को गहराई से समझा है और यही कारण है कि कांवड़ यात्रा को व्यवस्थागत समर्थन लगातार दिया जा रहा है। योगी सरकार की दृष्टि में यह यात्रा ऐसा सामाजिक अवसर है जहां समाज अपने भीतर की खाइयों को स्वयं पाटने का काम करता है। सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था, यह सब एक तरह से सामाजिक समरसता के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास है।

 

इस समरसता का एक और भावनात्मक पक्ष हिंदू-मुस्लिम सहभागिता के रूप में दिखाई देता है। बरेली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली के कई कस्बों में कांवड़ बनाने का काम पीढ़ियों से मुस्लिम कारीगरों के हाथों में रहा है। बांस को मोड़ना, रंगीन कागज और कपड़े से सजावट करना, घंटियां टांकना, यह हुनर उन परिवारों की जीविका का हिस्सा है, जो साल भर सावन का इंतजार करते हैं। उम्मीद के इस भाव के साथ कि सावन आए और उनकी कारीगरी किसी शिवभक्त के कंधे की शोभा बने। यह भारतीय समाज की उस गहरी बुनावट का प्रमाण है, जहां श्रद्धा और आजीविका एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

Kanwar Yatra UP 2026

यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता के अन्य बिंदु भी देखने को मिलते हैं। कई कस्बों में मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर कांवड़ियों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था करते हैं। कुछ जगहों पर मस्जिद परिसर में थके यात्रियों को विश्राम की अनुमति दी जाती है। यात्रा के दौरान उभरने वाली यह सहजता दिखाती है कि आस्था और मानवता, राजनीतिक विमर्श से कहीं गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिर भी कुछ लोग प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह समरसता समाज में स्थायी छाप भी छोड़ जाती है? इसका उत्तर है कि मानव मन स्मृतियों से बनता है और हम अपनी यात्रा के अनुभव कभी नहीं भूलते। यात्रा के अनुभव समाज की सामूहिक चेतना में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। सामाजिक बदलाव ऐसे ही संचित अनुभवों से आता है, थोड़ा धीमे-धीमे, लेकिन निश्चित रूप से।

 

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो भी कांवड़ यात्रा हमें समरसता से ओतप्रोत करती है। शिव स्वयं समरसता के प्रतीक हैं। वह श्मशान में विराजते हैं और कैलाश पर भी, वह भस्म रमाते हैं और चंद्रमा भी धारण करते हैं, उनके गले में सर्प है और जटाओं से गंगा प्रवाहित होती है। शिव को विरोधाभासों का देवता कहा जाता है। वह कल्याण भी करते हैं और विध्वंस भी। कांवड़िया जब अपने कलश में गंगाजल भरता है, तब उसे अहसास होता है कि उसके भीतर की सारी भिन्नताएं उस जल में समाहित हो रही हैं। इसके बाद उसके शरीर के साथ ही उसकी आत्मा भी यात्रा करती है। वह आत्मा जो किसी जाति, किसी वर्ग, किसी संप्रदाय को नहीं जानती।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि शिक्षा, आर्थिक अवसर, न्यायसंगत नीतियां और निरंतर सामाजिक संवाद, यह सब मिलकर परिवर्तन लाते हैं, लेकिन कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन वह भूमि तैयार करते हैं, जिस पर बड़े सामाजिक परिवर्तन के बीज बोए जा सकते हैं। योगी सरकार में इस यात्रा के लिए जो प्रतिबद्धता दिखाई देती है, उसके मूल में यही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके लिए सारी व्यवस्थाएं पूरी कर एक तरह से गहरा सामाजिक निवेश करते हैं, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा। 

 

वस्तुतः समरसता एक ऐसा अनुभव है, जिसे जीना पड़ता है, बांटना पड़ता है, कंधे पर उठाना पड़ता है। यह यात्रा हर वर्ष याद दिलाती है कि विभाजन की रेखाएं मनुष्य की बनाई हुई हैं, जबकि साझी श्रद्धा, साझी प्यास, साझी थकान और साझा विश्राम, यह सब हमारी सामाजिक एकता के प्रमाण हैं। ‘बोल बम’ की गूंज केवल शिव का आह्वान नहीं, बल्कि उस समाज का आह्वान भी है जो अपने भीतर एकत्व, समरसता और आत्मबोध की चाह रखता है।

 

यह उद्घोष हमें स्मरण कराता है कि शिव अंतर्मन में विद्यमान उस चेतना के प्रतीक हैं जो भेदभाव से ऊपर उठकर समता, करुणा और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करती है। अहंकार, स्वार्थ और विकारों का परित्याग करने को प्रेरित करती है। जब मन निर्मल हो, व्यवहार करुणामय हो और जीवन लोककल्याण के संकल्प से जुड़ जाए, तभी शिव की उपासना पूर्ण होती है। यही ‘बोल बम’ का सनातन संदेश है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

 

यूपी में आबकारी विभाग का नया कीर्तिमान, 4 माह में 20,862 करोड़ से अधिक का राजस्व

Excise Revenue UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का आबकारी विभाग राजस्व संग्रह और अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई, दोनों मोर्चों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में विभाग ने 20,862.42 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2,279.23 करोड़ रुपए यानी 12.27 प्रतिशत अधिक है। अकेले जुलाई महीने में विभाग ने 5,052.86 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया, जो पिछले वर्ष के जुलाई की तुलना में 16.04 प्रतिशत अधिक रहा।

71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य निर्धारित

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों, प्रभावी निगरानी और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विभाग लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग के लिए 71,278 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे हासिल करने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना भी है। 

819 आरोपियों को भेजा गया जेल

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई जारी है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान 29,294 अभियोग दर्ज कर अवैध मदिरा एवं मादक पदार्थ बरामद किए गए। इस दौरान 4,673 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 819 आरोपियों को जेल भेजा गया तथा तस्करी में प्रयुक्त 30 वाहन जब्त किए गए। जुलाई में भी 9,769 अभियोग दर्ज कर 1,704 लोगों की गिरफ्तारी कर 271 को जेल भेजा गया।

UP News : योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट में आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने आयुष विभाग के लिए 23.25 करोड़ रुपये और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2,000.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

 

पांच मंडलों में खुलेंगे नए आयुष मेडिकल कॉलेज

 

अनुपूरक बजट में आयुष क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगवाल स्कूल ऑफ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने प्रदेश के उन पांच मंडलों आगरा, बस्ती, गोंडा, मेरठ और मिर्जापुर में नए राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां अभी कोई आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसके लिए 23.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र को 2000.25 करोड़ रुपये का प्रावधान

 

योगी सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2000.25 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1500 करोड़ रुपये का है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया है। 

 

अनुपूरक बजट में 108 ई.एम.टी.एस 'स्वास्थ्य सेवा' के संचालन हेतु 200 करोड़ रुपये एवं 102 एम्बुलेंस के संचालन मद में भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदन से अधिक की धनराशि का व्यवभार राज्य बजट से वहन किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश के शहरी चिकित्सालयों में अग्निशमन व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में राज्य कैंसर मिशन की स्थापना, एसजीपीजीआई में क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क विकसित करने की पहल की गई है। इसके साथ ही एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना की जा रही है।