महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

महिलाओं के सम्मान में उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरस्कारों की राशि बढ़ाई गई

Uttarakhand Government award: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में महिला शक्ति के समर्पण, संघर्ष और उत्कृष्ट योगदान का सम्मान करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने प्रतिष्ठित 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' और 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की सम्मान राशि में बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस फैसले से प्रदेश भर की महिलाओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।

 

सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, 'वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार' की मानदेय राशि को ₹51,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, 'आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार' की राशि को भी ₹51,000 से बढ़ाकर ₹61,000 करने का निर्णय लिया गया है।

महिला शक्ति के समर्पण और संघर्ष को नमन

यह फैसला राज्य की उन साहसी, कर्मठ और प्रतिभावान महिलाओं को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिन्होंने समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है। पुरस्कार राशि में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अथक प्रयासों को पहचान देना तथा उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित और प्रेरित करना है।

 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास के क्षेत्र में सबसे निचले स्तर पर जाकर अपनी सेवाएं देती हैं। ऐसे में सम्मान राशि में वृद्धि से उनके मनोबल में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी और वे अधिक निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

तीलू रौतेली कौन थीं?

वीरांगना तीलू रौतेली (तिलोत्तमा देवी रौतेला) उत्तराखंड (गढ़वाल) की एक ऐतिहासिक और अदम्य साहसी महिला योद्धा थीं, जिन्हें 'गढ़वाल की झांसी की रानी' भी कहा जाता है। उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए युद्ध लड़े थे। उत्तराखंड सरकार हर साल समाज सेवा, खेल, शिक्षा, साहसिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं और बालिकाओं को 'तीलू रौतेली पुरस्कार' से सम्मानित करती है।

चमोली में हाइड्रो प्रोजेक्ट पर बड़ा हादसा, सुरंग में गले तक भरा पानी और गाद, 7 मजदूरों की मौत, 6 लापता

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट साइट पर बन रही सुरंग में पानी और मलबा घुसने से सात मजदूरों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, अभी 6 लापता मजदूरों की तलाश जारी है।

शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पिपलकोटी इलाके में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर कुल 22 मजदूर फंस गए थे। बाद में सभी 22 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात की मौत की पुष्टि हुई है और 11 घायल हैं। फिलहाल, घायल मजदूरों का इलाज पास के अस्पताल में चल रहा है।

वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) कर रही है।

रेस्क्यू टीमों ने ऑपरेशन तेज किया

घटना के बाद पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और दूसरी एजेंसियां ​​मौके पर पहुंचीं। ऑपरेशन में मदद के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और सेना की टीमों को भी तैनात किया गया।

NDRF इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सुरंग में पानी काफी ज्यादा भरा हुआ था और पानी का स्तर छाती तक पहुंच गया था। बचाव दल के सदस्य सुरंग के अंदर गए और उन शवों को बाहर निकाला जो पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे।

मीणा ने मीडिया को बताया, “हम पानी के बीच से गुजरे और टीम के कुछ सदस्यों के पास पानी के अंदर ऑपरेशन करने के लिए खास उपकरण थे। चारों शव पानी में डूबे हुए थे और ऊपर से दिखाई नहीं दे रहे थे, इसलिए हम अंदर गए और घटना स्थल से चारों शवों को बाहर निकाला।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर चिंता जताई। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज करने के निर्देश दिए।

आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटरों से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी।

यह भी पढ़ें: Sukhbir Singh Badal Attack: सुखबीर सिंह बादल पर हमला करने वाला आरोपी गिरफ्तार, CM फडणवीस ने दिए जांच के आदेश

Video: कीचड़ और घुटनों तक पानी में भी नहीं थमी हाथी की रफ्तार, टॉर्च दिखाकर भगाने की कोशिश पर लोगों की ओर दौड़ा गजराज

सोशल मीडिया पर जंगली हाथी का एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कीचड़ से भरे धान के खेत में लोगों के बीच अचानक आक्रामक होता नजर आ रहा है। घुटनों तक पानी और दलदल के बावजूद हाथी जिस तेजी से आगे बढ़ता है, उसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच जाती है। वीडियो में कुछ लोग हाथी को खेत से दूर भगाने के लिए टॉर्च की रोशनी का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। शुरुआत में हाथी उनके बीच से आगे बढ़ता नजर आता है, लेकिन कुछ ही देर में वह अचानक लोगों की तरफ दौड़ पड़ता है।

हाथी को अपनी ओर आता देख वहां मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगते हैं। इस दौरान कुछ लोग गिरते हुए भी नजर आते हैं। वीडियो ने जंगली हाथियों के बेहद शक्तिशाली और तेज होने के साथ-साथ उनके करीब जाने या उन्हें डराने के खतरे को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।

टॉर्च की रोशनी दिखाते ही दौड़ा हाथी

वीडियो में हाथी पानी और कीचड़ से भरे खेत में बेहद तेजी से आगे बढ़ता दिखता है। मुश्किल जमीन के बावजूद उसकी रफ्तार देखकर लोग भी हैरान रह गए। कुछ लोग लगातार टॉर्च लहराकर हाथी को डराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान हाथी अचानक लोगों की तरफ तेजी से बढ़ा। हाथी को अपनी ओर आता देखकर वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे जान बचाकर भागने लगे। इस भगदड़ में कुछ लोग जमीन पर गिरते हुए भी दिखाई दिए।

उत्तराखंड के अधिकारी ने बताया हाथी की रफ्तार का राज

यह वीडियो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पीएम धकाते ने X पर साझा किया। उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए बताया कि हाथी को धीमा समझना बेहद खतरनाक हो सकता है, खासकर कीचड़ भरे इलाके में।

उन्होंने समझाया कि हाथियों के चौड़े पंजे उनका वजन बड़े क्षेत्र में बांट देते हैं। इसी वजह से वे ऐसे दलदली और कीचड़ वाले इलाकों में भी उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

हाथी को डराने की कोशिश पड़ सकती है भारी

डॉ. धकाते ने चेतावनी दी कि हाथी को डराने या घेरने की कोशिश स्थिति को और खतरनाक बना सकती है। अगर हाथी खुद को खतरे में या चारों तरफ से घिरा हुआ महसूस करता है, तो वह पीछे हटने के बजाय हमला कर सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि जंगल में हाथी दिखाई देने पर उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और उसे डराने के लिए चिल्लाने, टॉर्च लहराने या पटाखे चलाने जैसी हरकतों से बचें।

‘हाथी को निकलने का रास्ता दें’

अधिकारी ने लोगों को खास तौर पर हाथी का रास्ता रोकने या उसे चारों ओर से घेरने से बचने की सलाह दी। उनके मुताबिक, जंगली हाथी को हमेशा पीछे हटने और सुरक्षित दिशा में जाने के लिए खुला रास्ता मिलना चाहिए। वीडियो को श्याम उरांव और संतोष लकड़ा के नाम से क्रेडिट किया गया है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि जंगली हाथियों को करीब से भगाने या डराने की कोशिश कितनी जोखिम भरी हो सकती है। ऐसे मामलों में दूरी बनाए रखना और हाथी को शांतिपूर्वक निकलने देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

14 लाख रुपये का ऑफर होने के बावजूद Infosys HR ने दिया कम पैकेज, Techie ने नौकरी ठुकराकर ऐसे लिया बदला

‘नदी का रौद्र रूप…तेज बहाव में बह गया पुल’, चमोली का खौफनाक वीडियो वायरल

उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के पास लता गांव के नजदीक बादल फटने के बाद हालात बिगड़ गए। इस घटना का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) का एक पुल तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में बहता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि नदी का पानी अचानक तेज हो गया। पानी का बहाव पुल के चारों तरफ तेजी से बढ़ता दिखाई देता है। कुछ ही देर में पानी की तेज लहरें पुल के ढांचे से टकराने लगती हैं।

पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि पुल ज्यादा देर तक टिक नहीं सका। तेज बहाव ने देखते ही देखते पुल को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही पलों में पूरा पुल पानी के साथ बह गया। वीडियो में बादल फटने के बाद अचानक बढ़े पानी की ताकत और उससे हुई तबाही साफ नजर आती है। सीमावर्ती इलाके में हुई इस घटना से वहां हुए नुकसान की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की तत्काल सूचना नहीं मिली है।

खबर अपडेट हो रही है….

अस्पताल पहुँचने में लगते थे घंटे, तो बना दी उड़ने वाली कार | Ravi Tamta | Flying Car | Uttarakhand

क्या हो अगर पहाड़ों के ऊपर से उड़कर जाया जा सके, वो भी बिना एयरपोर्ट के?

इसी सोच से उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रवि तम्टा ने 13 साल तक लगातार प्रयोग किए और एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया।

रवि के पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी न कोई बड़ी लैब थी, बस एक समस्या को हल करने की जिद थी।

उनका सपना है कि पहाड़ी इलाकों में, खासकर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान, लोगों तक जल्दी पहुँचा जा सके।

फ्लाइंग व्हीकल अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे कई और टेस्ट से गुजरना बाकी है।

लेकिन रवि की कहानी बताती है –
बड़े आविष्कार हमेशा बड़ी लैब में नहीं जन्म लेते। कभी-कभी एक मुश्किल सवाल ही उनकी शुरुआत होता है।

Ravi Tamta flying car Uttarakhand, Uttarakhand innovator electric flying vehicle, Indian innovator builds flying car, Almora electric flying vehicle prototype, 13 year flying car project India#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

ऋषभ पंत का एक पोस्ट और सोशल मीडिया पर मचा बवाल! लोगों ने दिया मजेदार रिएक्शन

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत का उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर किया गया सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया। भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत उत्तराखंड में अपना घर बनाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीन तलाशने में मदद मांगी है। ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और काफी समय से वहां जमीन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने और सही प्रक्रिया बताने की अपील की है।

वहीं पंत का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग इस पोस्ट पर तरह-तरह से कमेंट कर रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि पंत का अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

ऋषभ पंत ने अपनी इच्छा जाहिर की है कि वह उत्तराखंड में रहकर अपने राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी से घर बनाने के लिए सही जमीन तलाशने में मदद मांगी है। पंत ने कहा कि उत्तराखंड से उनका खास जुड़ाव है और वह अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार उन्हें जमीन गिफ्ट में देती है तो उन्हें खुशी होगी, लेकिन वह सरकार की तय कीमत पर जमीन खरीदने के लिए भी तैयार हैं। पंत ने बताया कि, उन्हें जमीन खरीदने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए वह मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद और सही जानकारी चाहते हैं।

लोगों ने किया कमेंट

पंत की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि, अच्छी कमाई करने वाले एक इंटरनेशनल क्रिकेटर को जमीन गिफ्ट में लेने की बात क्यों करनी चाहिए।

एक यूजर ने पंत की आईपीएल से होने वाली कमाई का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की मांग से लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है। यूजर ने ये भी कहा कि जब आम लोग ऐसे ही फायदे मांगते हैं तो अक्सर उनकी बुराई की जाती है।

पोस्ट पर लोगों ने किया कमेंट

कुछ यूजर्स ने कहा कि, “भारत में जमीन खरीदने और घर बनाने में पेपरवर्क, देरी और दूसरी दिक्कतें आ सकती हैं। उन्हें लगा कि अगर कोई हाई-प्रोफाइल क्रिकेटर प्रोसेस को समझने में स्ट्रगल कर रहा है, तो आम लोगों के लिए यह अनुभव और भी मुश्किल हो सकता है।” पंत के पोस्ट की टाइमिंग भी चर्चा का विषय बन गई। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि, जब पंत श्रीलंका में थे और भारत को वहां टेस्ट सीरीज खेलनी है, उसी दौरान उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से जमीन को लेकर मदद मांगी।

‘3 साल हो गए, जमीन नहीं मिली…’, आधी रात को ऋषभ पंत ने CM धामी से लगाई खास गुहार

Rishabh Pant: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालांकि, इस बार वजह उनकी बल्लेबाजी या फिर शानदार प्रदर्शन नहीं बल्कि शुक्रवार आधी रात को किया गया उनका सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिधे जमीन खरीदने की गुहार लगा दी। जिसके बाद उनका पोस्ट तुरंत वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी।

पंत, जो अभी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में धामी को टैग करते हुए यह अनुरोध किया। 28 वर्षीय पंत ने कहा कि वे पिछले तीन सालों से उत्तराखंड में उपयुक्त जमीन खोजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ऐसी कोई प्रॉपर्टी नहीं मिल पाई जो उनकी जरूरतों को पूरा कर सके।

इससे भी अहम बात यह है कि पंत ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वे अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं और राज्य में रहकर उसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए लिखा, “नमस्ते सर, आप कैसे हैं? उत्तराखंड का स्थानीय होने के नाते, मुझे यहां आए हुए काफी समय हो गया है। मैं दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होने के लिए जमीन खरीदने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे यहां रहने के लिए कोई अच्छी और बड़ी जगह नहीं मिल पा रही है। मुझे अपना उत्तराखंड बहुत पसंद है। मेरी आपसे विनम्र विनती है कि जमीन लेने में मेरी मदद करें, क्योंकि आजकल साफ-सुथरी जमीन मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। एक जमीन तो मुझे तब मिलनी चाहिए थी जब मैं राज्य का प्रचार-प्रसार कर रहा था, लेकिन अब मैं सब कुछ छोड़कर अपने मूल स्थान पर वापस आकर उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहता हूं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहता हूं। कृपया इस मामले पर ध्यान दें। 3 साल हो गए हैं और मुझे अभी तक कोई जमीन नहीं मिली है। आपके जवाब का इंतजार है, सर।”

X पर पोस्ट करने के बाद पंत ने साफ किया कि वह जमीन मुफ्त में नहीं मांग रहे थे, बल्कि सरकार से तय दरों पर उसे खरीदना चाहते थे।

पंत ने आगे लिखा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए यह एक शानदार तोहफा होगा, लेकिन अगर आप मुझे इजाजत दें तो मैं इसे सरकार से उनकी तय दरों पर खरीदना चाहूंगा, ताकि कम से कम मैं अपने राज्य में अपना पहला घर बना सकूं। कृपया इसमें मदद करें। सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि इसके लिए क्या करना होगा।”

पंत की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और उनकी इस अनोखी अपील ने लोगों का खासा ध्यान खींचा।

पंत अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं

बता दें कि पंत का जन्म उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उन्होंने वहीं से अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की थी, जिसके बाद वे प्रोफेशनल तौर पर क्रिकेट खेलने के लिए दिल्ली चले गए। आगे चलकर उन्होंने सभी फॉर्मेट में भारत के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, पंत घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते रहते हैं, लेकिन उत्तराखंड के साथ उनका जुड़ाव हमेशा मजबूत रहा है। उनकी हालिया पोस्ट से पता चलता है कि वे भविष्य में इस राज्य को अपना घर बनाना चाहते हैं और इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब पंत 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए उत्तराखंड में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्ति बन गए हैं। खबरों के अनुसार, उन्होंने 23.84 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भरा है।

इन आंकड़ों की घोषणा उत्तराखंड के इनकम टैक्स चीफ कमिश्नर ने 24 जुलाई को इनकम टैक्स डे के मौके पर एक कार्यक्रम में की थी। बता दें कि पंत लगातार दूसरे साल राज्य में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले व्यक्तियों की लिस्ट में सबसे ऊपर रहे।

ABP Live की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पंत का टैक्स योगदान पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। पिछले साल उन्होंने लगभग 10.5 करोड़ रुपये का एडवांस टैक्स भरा था।

27 करोड़ रुपये की IPL डील से लेकर बड़े-बड़े एंडोर्समेंट तक

पंत का भारी-भरकम टैक्स पेमेंट कई सोर्स से हुई उनकी कमाई को दिखाता है, जिसमें BCCI कॉन्ट्रैक्ट, IPL सैलरी, मैच फीस और एंडोर्समेंट डील शामिल हैं।

बता दें कि पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, जिससे वह लीग के सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक बन गए। हालांकि, जिस अवधि की बात की जा रही है, उस दौरान पंत BCCI के Grade A कॉन्ट्रैक्ट में भी थे और उन्हें सालाना 5 करोड़ रुपये रिटेनरशिप के तौर पर मिलते थे। लेकिन, बाद में उन्हें Grade B में कर दिया गया, जिसके बाद उनकी सालाना रिटेनरशिप घटकर 3 करोड़ रुपये हो गई।

उनकी कमर्शियल कमाई भी उनकी इनकम में काफी योगदान देती है। पंत के एंडोर्समेंट एसोसिएशन Adidas, Dream11, SG, Thums Up, Cadbury, boAt, Noise, Zomato, JSW Cement और MakeMyTrip के साथ हैं।

धामी ने दिया आश्वासन

इस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने पंत को आश्वासन दिया है कि मामले में संबंधित लोगों को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने पंत को एक्स पर जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय ऋषभ, आप उत्तराखंड के गौरव हैं। आपने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। अपनी मातृभूमि के प्रति आपका यह प्रेम और यहां वापस आकर योगदान देने की भावना अत्यंत सराहनीय है। आपके द्वारा उठाए गए विषय के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे शीघ्र ही आपसे संपर्क कर नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।”

Flying Car: उत्तराखंड के इस व्यक्ति ने खुदकी बनाई फ्लाइंग कार की ली टेस्ट-ड्राइव, इंटरनेट ने’देसी जुगाड़’ की खूब हो रही तारीफ

Flying Car: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के एक व्यक्ति ने उस चीज को असलियत में बदल दिया है, जिसे ज़्यादातर लोग सिर्फ़ साइंस-फ़िक्शन (काल्पनिक विज्ञान) समझते थे। अल्मोड़ा के काफ़लीखान गांव के रहने वाले इनोवेटर रवि टम्टा ने ‘HAPIDA SKYNeX’ का सफल टेस्ट-फ़्लाइट किया है। यह एक-सीट वाला इलेक्ट्रिक फ़्लाइंग व्हीकल प्रोटोटाइप है, और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह भारत में पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन (निजी परिवहन) को पूरी तरह बदल देगा।

अल्मोड़ा में एक खुले मैदान में की गई इस टेस्ट-फ़्लाइट के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। टम्टा के स्टार्टअप ‘Hapida Sky Private Limited’ के तहत बना यह एयरक्राफ़्ट, ड्रोन टेक्नोलॉजी का ही एक मॉडिफ़ाइड और अपग्रेडेड वर्शन है, जिसे किसी व्यक्ति को हवा में सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

तमटा का कहना है कि यह आइडिया एक आम समस्या से आया। उनके गांव से घर तक का 40 किलोमीटर का सफ़र, जिसमें सड़क मार्ग से आमतौर पर लगभग 90 मिनट लगते हैं, हवाई मार्ग से सिर्फ़ 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है। उनका लंबे समय का विज़न एक सुरक्षित, इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाना है, जिससे हवाई सफ़र आसान और व्यावहारिक हो सके, खासकर पहाड़ी इलाकों में।

इसे अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर बताते हुए, टम्टा ने कहा कि सफल लिफ्ट-ऑफ कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा था। टेस्ट के बाद उन्होंने कहा, “आज मेरी ज़िंदगी का बहुत बड़ा दिन है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी और गर्व हो रहा है कि HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान कई सालों की रिसर्च, संघर्ष, प्रयोगों और लगातार कोशिशों का नतीजा है।”

इस कामयाबी ने ऑनलाइन लोगों का दिल जीत लिया है। एक यूज़र ने लिखा, “अद्भुत! यह पहाड़ी इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “हमें सिर्फ़ डिग्री-होल्डर्स की नहीं, बल्कि ऐसे इनोवेटर्स की ज़रूरत है।” कुछ लोगों ने इसे “उत्तराखंड का पहला बड़ा इनोवेशन” बताया और अधिकारियों से टम्टा के काम को मान्यता देने और उसे सपोर्ट करने की अपील की। ​​एक और यूज़र ने कहा, “हमारे पहाड़ी इलाकों से बहुत अच्छी खबर है।”

हालांकि HAPIDA SKYNeX अभी सिर्फ़ एक प्रोटोटाइप है और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी काफी समय है, लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ़्लाइट एक अहम शुरुआती कदम है। रवि टम्टा के लिए, यह सिर्फ़ एक उड़ने वाली मशीन बनाने की बात नहीं है—यह साबित करने की बात है कि भारत के छोटे कस्बों और गांवों से भी वर्ल्ड-क्लास इनोवेशन निकल सकते हैं।

Renault Kiger discounts go up to Rs 68,000 in August 2026

2026 Renault Kwid showroom shot

Renault has announced various discount schemes for customers in August 2026, including cash offers, exchange or scrappage incentives, and corporate benefits. All Renault models (except the Duster) are available this month with a discount. The benefits mentioned here are applicable for bookings made between August 1 and August 31, 2026.

  • Kiger gets highest discounts; Kwid gets the lowest
  • Kiger and Triber offered with loyalty and corporate benefits

Disclaimer: Offers/benefits may vary by city and are subject to stock availability. Buyers are advised to check with their local dealer for exact figures.

Renault Kiger offers in August 2026

Benefits up to Rs 68,000

Renault Kiger front quarter

Depending on the trim level, the 2026 Renault Kiger is being offered with benefits of up to Rs 68,000 across India (except Kerala and Gujarat). This includes a cash discount of Rs 20,000, exchange or scrappage benefits of up to Rs 25,000 and loyalty incentives worth up to Rs 18,000. There’s also a corporate discount of Rs 5,000.

For those residing in Kerala and Gujarat, the loyalty benefit and corporate discount remain the same but cash offers and exchange incentives can now be up to Rs 50,000 each. The price of the Renault Kiger is between Rs 5.81 lakh and Rs 10.40 lakh.

Renault Triber offers in August 2026

Benefits up to Rs 60,000

Apart from Kerala and Gujarat, the 2026 Renault Triber MPV is available with benefits amounting to Rs 60,000. Buyers will be offered a cash discount of Rs 15,000, scrappage incentives worth up to Rs 25,000 or an exchange offer of Rs 15,000, and a corporate discount of Rs 5,000.

Renault Triber front quarter

While the scrappage and corporate offers are unchanged, residents of Kerala and Gujarat get cash discounts of up to Rs 30,000 and exchange benefits worth up to Rs 30,000. The 2026 Renault Triber is priced from Rs 5.81 lakh to Rs 8.53 lakh.

Renault Kwid offers in August 2026

Benefits up to Rs 40,000

Renault Kwid rear quarter

The 2026 Renault Kwid is being offered with a cash discount of up to Rs 15,000 and a scrappage incentive worth up to Rs 25,000 in most states in India. However, this offer is not applicable for buyers in Kerala, Assam, Karnataka, Odisha, Uttarakhand, Telangana, Chhattisgarh, Arunachal Pradesh and Andhra Pradesh. Buyers here can get the Kwid with cash discounts amounting to up to Rs 30,000, while the scrappage benefit remains unchanged. The 2026 Renault Kwid is priced between Rs 4.53 lakh and Rs 5.61 lakh.

All prices are ex-showroom, India.

Also read

Jeep Meridian offers go up to Rs 1.65 lakh in August 2026

Tata Curvv EV benefits in August 2026 go up to Rs 3.35 lakh

Video: चेहरा काला किया, बिच्छू बूटी से रगड़ा… छेड़छाड़ के आरोपियों के साथ गांव वालों ने किया ऐसा व्यवहार, वीडियो वायरल

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। यहां छेड़छाड़ के आरोपों का सामना कर रहे दो युवकों को पुलिस के हवाले करने से पहले ग्रामीणों द्वारा दी गई कथित सजा का वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में दोनों युवकों के चेहरे काले किए गए और उन्हें बिच्छू बूटी से रगड़ते हुए देखा गया। इस घटना के बाद लोगों के बीच महिलाओं की सुरक्षा, अपराधियों पर कार्रवाई और कानून हाथ में लेने जैसे मुद्दों को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने ग्रामीणों के गुस्से को सही ठहराया, तो कुछ ने सार्वजनिक सजा देने के तरीके पर सवाल उठाए। मामले ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय को जन्म दे दिया है।

सतौली गांव में सामने आया मामला

जानकारी के मुताबिक, यह घटना नैनीताल के मुक्तेश्वर क्षेत्र के सतौली गांव की बताई जा रही है। आरोप है कि मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो युवकों ने गांव से गुजरते समय स्थानीय लड़कियों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद ग्रामीणों और संबंधित महिलाओं ने दोनों को रोक लिया।

वायरल वीडियो में दिखा ग्रामीणों का गुस्सा

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोगों की भीड़ दोनों युवकों के आसपास नजर आई। आरोपियों के चेहरे काले किए गए थे और उन्हें चप्पलों से पीटते हुए भी देखा गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें बिच्छू बूटी से रगड़ा, जो त्वचा पर तेज जलन और खुजली पैदा करने के लिए जानी जाती है। बाद में दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर बंटे लोगों के विचार

वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई यूजर्स ने महिलाओं के सम्मान के खिलाफ होने वाले व्यवहार पर सख्ती की बात करते हुए ग्रामीणों के कदम का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ा संदेश जाना जरूरी है।

कुछ लोगों ने उठाए कानून हाथ में लेने पर सवाल

वहीं, कई यूजर्स ने इस तरह की सार्वजनिक सजा पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि उत्पीड़न एक गंभीर अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई पुलिस और कानून के जरिए होनी चाहिए। लोगों ने पूछा कि क्या किसी भी स्थिति में भीड़ को खुद सजा देने का अधिकार मिलना चाहिए?

घटना ने छेड़ी न्याय और भीड़ की कार्रवाई पर बहस

इस मामले ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, अपराधों पर कार्रवाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि न्याय की प्रक्रिया कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।

एक साल में 1.14 रुपये करोड़ इनकम टैक्स जमा किया, फिर शख्स ने ऐसा क्यों कहा कि कमाई अपनी नहीं लगती