कुदरत ने बनाया ऐसा संगम, जहां साथ बहती हैं दो अलग रंगों वाली नदियां

बारिश के मौसम में प्रकृति कई ऐसे नजारे दिखाती है, जिन्हें देखकर आंखें ठहर जाती हैं। मध्य प्रदेश के बांद्राभान संगम पर इन दिनों नर्मदा और तवा नदी का ऐसा ही अनोखा रूप देखने को मिल रहा है। यहां दो नदियां एक-दूसरे से मिलती हैं, लेकिन संगम से पहले दोनों का पानी अलग-अलग रंग में नजर आता है। एक तरफ नदी का पानी मटमैला दिखाई देता है, तो दूसरी ओर नदी का पानी नीला नजर आता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे एक ही जगह पर दो अलग रंगों की नदियां बह रही हों।

मानसून के दौरान बारिश का असर नदियों के पानी पर साफ दिखाई देता है। बारिश के साथ मिट्टी, रेत और दूसरी चीजें बहकर नदी में पहुंचती हैं, जिससे पानी का रंग बदल जाता है। इसी वजह से बांद्राभान संगम का यह दृश्य इन दिनों और भी खास दिखाई दे रहा है। दोनों नदियों के अलग रंगों वाला पानी लोगों को अपनी ओर खींच रहा है और यह जगह फोटोग्राफी के लिए भी बेहद अट्रैक्टिव बन गई है।

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नर्मदा का बदला रंग

मानसून में तेज बारिश के कारण आसपास की मिट्टी और गाद पानी के साथ नर्मदा नदी में पहुंचती है। इसी वजह से नर्मदा का पानी इस समय मटमैला या भूरा नजर आता है। संगम के पास पहुंचने पर यह रंग साफ दिखाई देता है और दूर से देखने पर पानी की अलग धारा आसानी से पहचानी जा सकती है।नर्मदा के ठीक दूसरी तरफ तवा नदी का पानी अपेक्षाकृत साफ और नीला नजर आता है। दोनों नदियों के पानी के रंग में इतना फर्क दिखाई देता है कि संगम का दृश्य पहली नजर में ही लोगों का ध्यान खींच लेता है। नीले और मटमैले पानी का यह मेल इस जगह को और खास बना देता है।

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मानसून का असर

बारिश का असर नदियों पर कई तरह से पड़ता है। तेज बारिश के दौरान नदी में मिट्टी, गाद और छोटे कण पहुंचने से पानी का रंग बदल सकता है। अलग-अलग जगहों से आने वाले पानी की वजह से दो नदियों के रंग में भी अंतर दिखाई दे सकता है। बांद्राभान में मानसून के दौरान यही बदलाव इस अनोखे नजारे की वजह बन रहा है।

खूबसूरत संगम

बांद्राभान संगम का अलग-अलग रंगों वाला पानी देखने के साथ-साथ तस्वीरें लेने के लिए भी अट्रैक्टिव लगता है। एक फ्रेम में मटमैली नर्मदा और नीली तवा नदी का नजर आना इस जगह की खासियत है। मानसून के बादल, हरियाली और नदियों का यह नजारा मिलकर इसे नेचर और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए खास बना देते हैं।

बांद्राभान संगम का यह नजारा मानसून के दिनों में और भी खास हो जाता है। नर्मदा और तवा के पानी का अलग रंग दूर से ही लोगों का ध्यान खींचता है। प्रकृति का यह खूबसूरत रूप बताता है कि बारिश के मौसम में नदियों का रंग और अंदाज किस तरह बदल जाता है।

बिना फ्लाइट टिकट हवा से देखें पूरा भारत, दिल्ली में बनी यह जादुई जगह!

दिल्ली के लोगों और देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट के लिए एक नया पार्क बनाया गया है। द्वारका सेक्टर-20 में करीब 200 एकड़ में फैला यह पार्क जल्द ही प्लानिंग के साथ सभी लोगों के लिए खोला जाएगा। यहां टूरिस्ट को पर्यावरण, मनोरंजन और भारतीय संस्कृति का यूनिक एक्सपीरियंस मिल सकेगा।

भारत वंदना पार्क की सबसे बड़ा फीचर इसका 1.2 किलोमीटर लंबा स्काइब्रिज और ‘मिनी इंडिया’ जोन है। स्काइब्रिज पर घूमते हुए लोग पार्क के खूबसूरत नजारों का मजा ले सकेंगे और साथ ही मिनी इंडिया जोन में देश के अलग-अलग हिस्सों का कल्चर देखने को मिलेगा। यह पार्क के लोगों के घूमने की नई जगह तो बनेगा ही, साथ ही देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट को भी अट्रैक्शन पोईटन भी बनेगा।

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कॉस्ट और इनॉगरेशन

भारत वंदना पार्क को लगभग 550 करोड़ रुपये की कॉस्ट से तैयार किया जा रहा है। तकरीबन 200 एकड़ में फैले इस पार्क का बाहरी हिस्सा लगभग तैयार हो चुका है और अब इसे कुछ समय बाद ही लोगों के लिए खोला जाएगा। उम्मीद है कि अगले एक से दो महीनों में इनॉगरेशन हो सकता है। पार्क में घूमने के साथ-साथ लोगों के लिए बोटिंग, लेक-व्यू रेस्तरां और मॉडर्न टिकट काउंटर जैसी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।

एलिवेटेड स्काइब्रिज

पार्क का सबसे बड़ा अट्रैक्शन 1.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड स्काइब्रिज होगा। यह जमीन से करीब 18 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है और नौ बड़े पाइलान पर टिका होगा। यहां चलते हुए लोगों को पूरे पार्क और ‘मिनी इंडिया’ का ऊपर से 360 डिग्री नजारा देखने को मिलेगा। इसकी डिजाइन पेड़ों के तनों से इंस्पायर्ड है। नौ पाइलान को पेड़ का शेप दिया जा रहा है, जिन पर पत्तियों जैसे एल्युमिनियम पैनल लगाए जाएंगे, जिससे स्काइब्रिज का लुक एकदम यूनिक नजर आएगा।

मिनी इंडिया

भारत वंदना पार्क का ‘मिनी इंडिया’ जोन यहां आने वाले लोगों के लिए बेस्ट एक्सपीरियंस होगा। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की फेमस बिल्डिंग और सांस्कृतिक धरोहरों की कॉपी बनाई गई हैं। जिसमे जयपुर का हवा महल, कर्नाटक का हंपी रथ मंदिर, एलोरा की गुफाएं, अंडमान का सेल्यूलर जेल, पटना का गोलघर, बनारस के घाट और पुराने संसद भवन जैसी जगहों की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की प्रतिकृति और महावीर मंदिर मेजर अट्रैक्शन रहेंगे।

कई चुनौतियों के बाद हुआ तैयार

भारत वंदना पार्क का शिलान्यास 17 दिसंबर 2019 को किया गया था और इसे मार्च 2022 तक पूरा करने की प्लानिंग थी। लेकिन कोरोना महामारी, कंस्ट्रक्शन से जुड़ी परेशानियों और पार्क के कॉम्प्लेक्स डिजाइन के कारण काम में देरी हुई। स्काइब्रिज के ऊंचे पाइलान, एयरपोर्ट के पास होने के कारण काफी दिक्कत हुयी। इसके बाद पाइलान की ऊंचाई कम करके डिजाइन चेंज करना पड़ा।

भारत वंदना पार्क के खुलने के बाद दिल्ली में घूमने के लिए एक नया और यूनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन खुल जाएगा। यहां लोग स्काइब्रिज से खूबसूरत नजारे देखने के साथ ‘मिनी इंडिया’ में देश की संस्कृति और फेमस हेरिटेज को एक ही जगह देख सकेंगे। हरियाली, झील, बोटिंग और मनोरंजन की सुविधाओं के साथ यह पार्क फैमिली और टूरिस्ट के लिए मेजर अट्रैक्शन बन सकता है।

ट्रेन को टेम्पो बना दिया! परिवार को चढ़ाने के लिए क्रॉसिंग पर रुकी ट्रेन? वायरल वीडियो देखकर इंटरनेट यूजर्स ने रेलवे से मांगा जवाब

बिहार के पश्चिम चंपारण में रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है वहां दिखाई देने वाला एक ऐसा नजारा, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की होगी। जहां आमतौर पर लोग ट्रेन के गुजरने तक इंतजार करते हैं, वहीं इस घटना में एक परिवार अचानक ट्रेन की तरफ बढ़ता नजर आया। देखते ही देखते परिवार के चार सदस्य ट्रेन के करीब पहुंचे और उसमें सवार हो गए। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह पूरा घटनाक्रम काफी हैरान करने वाला था। किसी ने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।

वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं और इस असामान्य घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि पूरा मामला किसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ।

क्रॉसिंग पर इंतजार कर रहा था परिवार

बताया जा रहा है कि यह घटना 8 अगस्त को कुमारबाग रेलवे स्टेशन के पास हुई। वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग बंद दिखाई दे रही है और दूसरी तरफ कई वाहन ट्रेन के निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी दौरान चार लोगों का एक परिवार क्रॉसिंग के पास खड़ा नजर आता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शख्स ने दावा किया कि परिवार काफी देर से वहीं मौजूद था और करीब एक घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहा था।

फोन के बाद कुछ ऐसा हुआ कि सब चौंक गए

वीडियो में परिवार के एक सदस्य को फोन पर बातचीत करते हुए भी देखा गया। रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति को लगा कि शायद वह किसी परिचित से बात कर रहा था और उसी संपर्क के जरिए ट्रेन को वहां रुकवाने की व्यवस्था की गई। कुछ ही देर बाद मुजफ्फरनगर-नरकटियागंज DEMU ट्रेन वहां पहुंची। ट्रेन पहले धीमी हुई और फिर रेलवे क्रॉसिंग के पास पूरी तरह रुक गई। बस फिर क्या था, परिवार के चारों सदस्य तुरंत ट्रेन के एक कोच के दरवाजे की तरफ बढ़े और उसमें चढ़ गए।

गेटमैन भी देखता रह गया पूरा नजारा

वीडियो में रेलवे क्रॉसिंग पर मौजूद गेटमैन भी इस पूरी घटना को देखते हुए दिखाई देता है। ट्रेन के रुकते ही परिवार के लोगों का तेजी से कोच में चढ़ना वहां मौजूद लोगों के लिए भी असामान्य दृश्य था। वीडियो बनाने वाले शख्स ने इसी बात को लेकर रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या इस तरह रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन रोककर यात्रियों को सवार करने की अनुमति है।

‘ट्रेन को टेंपो बना दिया’

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने घटना पर हैरानी जताई, तो कुछ ने पूरे मामले पर मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। एक यूजर ने लिखा, “ट्रेन को टेंपो बना दिया।” वहीं दूसरे ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि यहां कुछ भी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने सीधे लोको पायलट की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। एक कमेंट में तो लोको पायलट को निलंबित करने तक की बात कही गई।

रेलवे से जांच की मांग

मामले को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे और संबंधित अधिकारियों को टैग करते हुए जांच की मांग की। एक यूजर ने रेल मंत्रालय से सवाल किया कि आखिर सड़क वाले रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन को यात्रियों के चढ़ने के लिए कैसे रोका गया। एक अन्य व्यक्ति ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह आम लोगों का समय बर्बाद करना उचित नहीं है।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल

फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है कि ट्रेन वहां किस कारण रुकी थी और परिवार के सदस्यों को चढ़ने की अनुमति किस परिस्थिति में मिली। हालांकि, इस वीडियो ने रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के अचानक रुकने और यात्रियों के इस तरह सवार होने को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग अब पूरे मामले की जांच और स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं।

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दिल्ली के आस-पास रहने वाले इस लॉन्ग वीकेंड ले, घुमने के साथ-साथ शानदार कॉफी डेस्टिनेशन का मजा!

बारिश का मौसम और हाथ में गर्मागर्म कॉफी का कप हो तो लॉन्ग वीकेंड का मजा दोगुना हो जाता है। लॉन्ग वीकेंड पर रोज की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेकर दोस्तों या परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहते हैं, तो किसी खूबसूरत कॉफी कैफे का रुख कर सकते हैं। कॉफी के शौकीनों के लिए बारिश के मौसम में ऐसे कैफे घूमना और गर्मागर्म कॉफी की चुस्कियों का मजा लेना यादगार एक्सपीरियंस हो सकता है।

ग्राम स्ट्रीट कॉफी, गुरुग्राम

The view at this restaurant in Chamonix, France : r/nextfuckinglevel

अगर आप मॉनसून में किसी शांत और आरामदायक जगह पर बैठकर अच्छी कॉफी का आनंद लेना चाहते हैं, तो गुरुग्राम का ग्राम स्ट्रीट कॉफी एक बेस्ट डेस्टिनेशन है। यहां का खूबसूरत इंटीरियर, हल्की रोशनी और आरामदायक बैठने की फैसिलिटी लोगों को पहली ही नजर में पसंद आ जाती है। इस कैफे में आपको कई तरह की स्पेशल कॉफी के साथ स्वादिष्ट ब्रेकफास्ट, ब्रंच और डेजर्ट भी मिलते हैं। बारिश के मौसम में यहां बैठकर गर्म कॉफी की चुस्की लेना एक अलग ही एहसास देता है।

सबको कॉफी, ग्रेटर कैलाश

There is a café -- NATURE'S CORNER CAFÉ on the hill in Baishi Mountain Scenic Area, Hebei Province. Through the large floor-to-ceiling windows, people have a chance to enjoy the magnificent natural

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में सबको कॉफी अपनी बेहतरीन स्पेशल कॉफी और मॉडर्न माहौल है। यहां हर कप कॉफी को अच्छी क्वालिटी की कॉफी बीन्स से खास तरीके से तैयार किया जाता है, जिससे उसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। कैफे का इंटीरियर मॉडर्न होने के साथ-साथ बेहद आरामदायक भी है, इसलिए लोग यहां घंटों बैठकर समय बिताना पसंद करते हैं। मानसून में यहां कॉफी पीना और स्वादिष्ट स्नैक्स का टेस्ट लेना मजेदार होते है।

ब्लू टोकाई कॉफी रोस्टर्स, मेहरौली

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मेहरौली में स्थित ब्लू टोकाई कॉफी रोस्टर्स भारत के सबसे लोकप्रिय स्पेशल कॉफी कैफे में गिना जाता है। यह कैफे अपनी प्रीमियम भारतीय कॉफी बीन्स के लिए मशहूर है। मानसून के दौरान यहां का शांत माहौल और आसपास की हरियाली इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देती है। यहां एस्प्रेसो, पोर-ओवर, कोल्ड ब्रू और कई तरह की स्पेशल कॉफी का स्वाद लेने का मौका मिलता है।

पोर ओवर कॉफी रोस्टर्स, खान मार्केट

अगर आपको सुकून भरे माहौल में बैठकर आराम से कॉफी पीना पसंद है, तो खान मार्केट का पोर ओवर कॉफी रोस्टर्स आपके लिए शानदार जगह हो सकती है। यह कैफे अपनी खास ब्रूइंग टेक्निक और टेस्टी कॉफी के लिए जाना जाता है। यहां का शांत वातावरण किताब पढ़ने, लैपटॉप पर काम करने या दोस्तों के साथ लंबी बातचीत करने के लिए परफेक्ट है। हर कप कॉफी को बहुत ही ध्यान से तैयार किया जाता है, जिससे उसका टेस्ट स्पेशल बन जाता है।

 

बरिस्ता कॉफी कंपनी, वसंत विहार

बरिस्ता कॉफी कंपनी लंबे समय से कॉफी लवर की पसंदीदा जगहों में शामिल है। वसंत विहार इसका कैफे मानसून में और भी खूबसूरत लगता है। यहां का आरामदायक माहौल, अच्छी सर्विस और स्वादिष्ट कॉफी लोगों को बार-बार आने के लिए अट्रैक्ट करती है। बारिश के मौसम में यहां मिलने वाला तिरामिसू लाटे, रिच हॉट चॉकलेट और ताजे बेक किए गए स्नैक्स लोगों को काफी पसंद आते हैं।

अंधेरा होते ही चमक उठते हैं ये 7 जंगल और बीच, कहलाते है इंडिया का सीक्रेट नाइट शो!

भारत के वेस्टर्न घाट के कुछ जंगल और कुछ समुद्र तट रात के समय बायोल्यूमिनेसेंस की वजह से चमक उठते हैं। जंगलों में यह रोशनी फंगस से और समुद्र में छोटे प्लैंकटन से होती है। मानसून और उसके बाद का समय इस दुर्लभ प्राकृतिक नजारे को देखने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इन जगहों की खूबसूरती के साथ-साथ इनके कंर्वेशन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

मट्टू बीच, कर्नाटक (Mattu Beach, Karnataka)

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कर्नाटक के उडुपी के पास मट्टू बीच अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रात में दिखने वाली नीली चमक के लिए भी जाना जाता है। मानसून के बाद सही मौसम में समुद्र की लहरों में मौजूद छोटे-छोटे प्लैंकटन नीली रोशनी छोड़ते हैं, जिससे पूरा बीच चमकता हुआ दिखाई देता है। यह नजारा टूरिस्ट और फोटोग्राफरों को खूब पसंद आता है। सितंबर से दिसंबर के बीच यहां आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

अगुम्बे, कर्नाटक (Agumbe, Karnataka)

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अगुम्बे को “दक्षिण भारत का चेरापूंजी” कहा जाता है। यह जगह घने जंगलों, तेज बारिश और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। मानसून के दौरान यहां पेड़ों की गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले खास फंगस रात में हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं। प्रकृति का अनोखा नजारा देखने के लिए जून से सितंबर के बीच यहां घूमने जा सकते हैं।

बंगाराम आइलैंड, लक्षद्वीप (Bangaram Island, Lakshadweep)

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लक्षद्वीप का बंगाराम आइलैंड भारत के सबसे मशहूर ग्लोइंग बीच में से एक है। यहां समुद्र में मौजूद छूटे प्लैंकटन लहरों के हिलने पर चमकीली नीली रोशनी छोड़ते हैं। रात के समय ऐसा लगता है जैसे पूरा समुद्र चमक रहा हो। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

गोवा के बायोल्यूमिनेसेंट बीच, गोवा (Goa Bioluminescent Beaches, Goa)

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गोवा के बेतालबातिम, कोलवा और कुछ अन्य शांत बीचों पर मानसून के बाद कई बार रात में समुद्र की लहरें नीली रोशनी से चमकती दिखाई देती हैं। यह रोशनी समुद्र में मौजूद सूक्ष्म प्लैंकटन की वजह से होती है। हालांकि यह नजारा हर रात नहीं दिखता, लेकिन सही मौसम में इसे देखना यादगार एक्सपीरियंस बन जाता है। सितंबर से दिसंबर के बीच का टाइम यहां घूमने के लिए परफेक्ट है।

भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, महाराष्ट्र (Bhimashankar Wildlife Sanctuary, Maharashtra)

महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रात में चमकने वाले जंगलों के लिए जानी जाती है। मानसून के दौरान यहां गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले फंगस हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं, जिससे जंगल का नजारा बेहद खास लगता है। जुलाई से सितंबर के बीच और बिना चांद वाली रातों में यह दृश्य सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।

चोरला घाट, गोवा–कर्नाटक–महाराष्ट्र (Chorla Ghat, Goa–Karnataka–Maharashtra)

गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर चोरला घाट अपने घने जंगलों और हरियाली के लिए पॉपुलर है। मानसून के दौरान यहां नमी ज्यादा होने की वजह से चमकने वाले फंगस आसानी से उग जाते हैं। रात के समय गिरी हुई लकड़ियों पर हल्की हरी चमक दिखाई देती है, जो इस जगह को और भी खास बना देती है। जुलाई से सितंबर यहां घूमने का सबसे अच्छा समय है।

साइलेंट वैली नेशनल पार्क, केरल (Silent Valley National Park, Kerala)

केरल का साइलेंट वैली नेशनल पार्क भारत के सबसे खूबसूरत और सुरक्षित वर्षावनों में से एक है। यहां का ठंडा और नम वातावरण चमकने वाले फंगस के लिए परफेक्ट होता है। मानसून के दौरान जंगल के कुछ हिस्सों में यह दुर्लभ प्राकृतिक नजारा देखने को मिल सकता है। प्रकृति और जंगलों को पास से देखना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए बढ़िया ऑप्शन हो सकती है।

मानसून में जरूर करें भारत के इन डेस्टिनेशन को एक्सप्लोर, बारिश में खिल उठती है इनकी खूबसूरती

मानसून का मौसम आते ही घूमने का मजा कई गुना बढ़ जाता है। इस दौरान भारत के ऐतिहासिक स्मारक भी एक अलग ही खूबसूरती में नजर आते हैं। बारिश की हल्की फुहारें, ठंडी हवाएं और चारों ओर फैली हरियाली इन जगहों को खूबसूरत बना देती हैं। किले, महल और प्राचीन इमारतें इस मौसम में पहले से ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती हैं। इतिहास पसंद करने वालों के साथ-साथ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह समय बेहद खास माना जाता है।

हुमायूं का मकबरा, दिल्ली (Humayun’s Tomb, Delhi)

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दिल्ली में हुमायूं का मकबरा मानसून के मौसम में और भी खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद चारों ओर फैले चारबाग बगीचे हरियाली से भर जाते हैं और लाल बलुआ पत्थर से बना यह ऐतिहासिक स्मारक बिल्कुल नया-सा नजर आता है। हल्के बादल और ठंडी हवा यहां घूमने का एक्सपीरियंस और भी खास बना देते हैं। इतिहास, फोटोग्राफी या शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए मानसून में यह जगह परफेक्ट है।

अजंता की गुफाएं, महाराष्ट्र (Ajanta Caves, Maharashtra)

Exclusive Ajanta Ellora Caves: 1.5-Day Guided Tour- Only Caves (with Reviews)

महाराष्ट्र की सह्याद्रि पहाड़ियों के बीच बनी अजंता की गुफाएं बारिश के मौसम में किसी जादुई दुनिया जैसी लगती हैं। मानसून के दौरान आसपास छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं और हर तरफ हरियाली छा जाती है। बौद्ध कला और प्राचीन चित्रों से सजी ये गुफाएं प्रकृति के बीच और भी अट्रैक्टिव दिखाई देती हैं। यहां इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ देखने को मिलती है।

बेकल किला, केरल (Bekal Fort, Kerala)

Bekal Fort Images - Bekal Fort Photo Gallery - Bekal Kerala Pictures

केरल के समुद्र किनारे बना बेकल किला मानसून में बेहद खूबसूरत नजर आता है। एक तरफ अरब सागर की ऊंची लहरें और दूसरी तरफ बारिश से भीगी किले की दीवारें इस जगह की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं। ठंडी हवा, समुद्र का नजारा और हरियाली यहां आने वाले टूरिस्ट को यादगार एक्सपीरियंस देते हैं। फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।

 

मांडू किला, मध्य प्रदेश (Mandu Fort, Madhya Pradesh)

Mandu Forts MP: Monuments, History & Guide

मध्य प्रदेश का मांडू मानसून के दौरान पूरी तरह हरियाली से ढक जाता है। जहाज महल, हिंडोला महल, प्राचीन बावड़ियां और पुराने महल बारिश के मौसम में और भी अट्रैक्टिव दिखाई देते हैं। बादलों से घिरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं इस ऐतिहासिक शहर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। इतिहास और प्रकृति का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो मांडू बेहतरीन जगह है।

 

कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा (Konark Sun Temple, Odisha)

Did You Know That An East India Company Complaint Led To Konark Temlpe's Discovery? | Outlook Traveller

ओडिशा का प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर मानसून में और भी भव्य दिखाई देता है। बारिश के बाद मंदिर के आसपास फैली हरियाली और बादलों से भरा आसमान इसकी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी को और उभार देता है। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। बारिश के मौसम में यहां घूमने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।

चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान (Chittorgarh Fort, Rajasthan)

Chittorgarh Fort - Images, Timings & History - Holidify

राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किला मानसून के दौरान बिल्कुल अलग रूप में नजर आता है। बारिश के बाद सूखी पहाड़ियां और मैदान हरियाली से भर जाते हैं, जिससे विशाल किला और भी आकर्षक दिखने लगता है। किले के भीतर बने महल, मंदिर और जलाशय इस मौसम में देखने लायक होते हैं। यहां से आसपास का नजारा भी खूबसूरत दिखाई देता है।

गोल गुंबद, कर्नाटक (Gol Gumbaz, Karnatkaa)

File:Gol Gumbaz -4, Bijapur, Karnataka.jpg - Wikimedia Commons

कर्नाटक के विजयपुरा में गोल गुंबद मानसून के मौसम में बेहद खूबसूरत लगता है। काले बादलों में विशाल गुंबद और भी शानदार दिखाई देता है। बारिश के बाद आसपास के बगीचे हरे-भरे हो जाते हैं, जिससे पूरा परिसर ताजगी से भर जाता है। इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का यह अनोखा स्मारक इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में घूमने की बेहतरीन जगह है।

ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश (Gwalior Fort, Madhya Pradesh)

630+ Gwalior Fort Madhya Pradesh Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

मध्य प्रदेश का ग्वालियर किला मानसून के मौसम में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद किले के चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ियों पर छाए बादल इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। विशाल प्राचीर, प्राचीन महल, मंदिर और शानदार नक्काशी खूब अट्रैक्ट करती है। किले की ऊंचाई से पूरे शहर का सीन दिखाई देता है, जो मानसून में और भी खूबसूरत लगता है। इतिहास, वास्तुकला और फोटोग्राफी का आनंद एक साथ लेना चाहते हैं, तो ग्वालियर किला बेहतरीन ऑप्शन है।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।

पहाड़ों की चोटियों पर बसे भारत के वो मंदिर जहां सिर्फ कदम चलते है!

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है, जहां कई प्राचीन मंदिर पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बने हुए हैं। इन मंदिरों तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन भक्त कठिन रास्तों को पार करके भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ों की शांति और सुंदर वातावरण इन मंदिरों की खासियत को और बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिरों के बारे में, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है:

आदि बद्री मंदिर – शांत वातावरण में बसा प्राचीन धाम

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उत्तराखंड में स्थित आदि बद्री मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर सरस्वती नदी के उद्गम क्षेत्र के पास स्थित है। यहां पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है और भक्तों को कुछ दूरी पैदल चलकर तय करनी पड़ती है। पहाड़ों के बीच बसे इस मंदिर की यात्रा श्रद्धा, धैर्य और प्रकृति के करीब जाने का अनुभव देती है। यहां का शांत वातावरण मन को सुकून और आध्यात्मिक शांति का एहसास कराता है।

 

मध्यमहेश्वर मंदिर – कठिन रास्तों के बीच आस्था का केंद्र

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित मध्यमहेश्वर मंदिर पंच केदारों में से एक है। यह मंदिर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों और सुंदर घाटियों के बीच स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि सड़क मार्ग सीधे मंदिर तक नहीं पहुंचता। कठिन चढ़ाई के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। यह यात्रा धैर्य, भक्ति और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल मानी जाती है।

 

तुंगनाथ मंदिर – दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

तुंगनाथ मंदिर - विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

 

उत्तराखंड में स्थित तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर चंद्रशिला पर्वत के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को ऊबड़-खाबड़ और चढ़ाई वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। बादलों और पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। तुंगनाथ की यात्रा भक्तों को धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देती है।

 

वैष्णो देवी मंदिर – आस्था और विश्वास की कठिन यात्रा

Vaishno Devi Shrine: Where Spirituality, History, and Devotion Converge - माता वैष्णो देवी मंदिर की गुफा कितनी पुरानी है? जानिए इसका इतिहास | Jansatta

जम्मू-कश्मीर के कटरा में मां वैष्णो देवी मंदिर त्रिकूट पर्वत पर करीब 5,200 फीट की ऊंचाई पर बना है। माता रानी के दर्शन के लिए भक्तों को कठिन चढ़ाई और लंबी यात्रा पूरी करनी पड़ती है। रास्ते में कई मुश्किलों के बावजूद श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ आगे बढ़ते हैं। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी के दर्शन करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

 

केदारनाथ मंदिर – हिमालय की गोद में शिव का पवित्र धाम

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच स्थित है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, क्योंकि मंदिर तक सीधा सड़क मार्ग नहीं है। खराब मौसम और कठिन रास्तों के बावजूद भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। केदारनाथ की यात्रा धैर्य, विश्वास और अटूट भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

 

व्हाइट ब्यूटी की तलाश में जाएं भारत के इन 8 खूबसूरत वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन पर, जहां सफेद जानवरों का होगा दीदार!

भारत में वन्यजीवों की कई ऐसी प्रजातियां हैं जो अपनी अनोखी रंग-रूप की वजह से लोगों को अट्रैक्ट करती हैं। इनमें सफेद रंग के दुर्लभ जंगली जानवर सबसे ज्यादा रोमांच पैदा करते हैं। हालांकि जंगलों में इन्हें देख पाना बहुत मुश्किल होता है। भारत के कुछ नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ एरिया ऐसे हैं जहां इन दुर्लभ जीवों को देखने की संभावना रहती है।

1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क – सफेद हिरण और रेयर वाइल्ड लाइफ का एरिया

पानी में नहाते दिखा दुर्लभ सफेद हिरण, वीडियो हुआ वायरल - white Moose rare animal Population only 50 VIRAL VIDEO tsty - AajTak

उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट भारत के सबसे पुराने और पॉपुलर नेशनल पार्क में से एक है। यह जगह बाघ, हाथी, हिरण और कई पक्षियों के लिए जानी जाती है। समय-समय पर यहां सफेद रंग वाले दुर्लभ हिरण या अन्य वन्यजीवों के दिखाई देने की खबरें सामने आती रही हैं। घने जंगल, घास के मैदान और नदी क्षेत्र ऐसे वातावरण बनाते हैं जहां कई तरह के जीव रहते हैं। सफारी के दौरान दुर्लभ रंग वाले जानवर दिखना पूरी तरह किस्मत पर डिपेंड करता है।

 

2. केवलादेव नेशनल पार्क – सफेद पक्षियों का खूबसूरत संसार

सफेद मोर सुंदर पंख और प्रेमालाप प्रदर्शन के साथ एक राजसी पक्षी तस्वीर और मुफ्त डाउनलोड के लिए चित्र - Pngtree

राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्कदुनिया के पॉपुलर पक्षी अभयारण्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पक्षी आते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां कई प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में सफेद रंग के पक्षी जैसे बगुले, सारस और अन्य जलपक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं। झीलों, तालाबों और घास वाले एरिया के कारण यह जगह पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग मानी जाती है।

 

3. रणथंभौर नेशनल पार्क – सफेद बाघ की कहानियों से जुड़ा 

दुनिया में पीले टाइगर्स मौजूद थे तो सफेद बाघ कहां से आए? - Trending AajTak

रणथंभौर राजस्थान का पॉपुलर टाइगर रिजर्व है, जहां बाघों को खुले जंगल में देखने का शानदार एक्सपीरियंस मिलता है। यहां सफेद बाघ नियमित रूप से नहीं पाए जाते, लेकिन भारत में सफेद बाघों की ऐतिहासिक कहानी मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क जैसे क्षेत्रों से जुड़ी रही है। रणथंभौर में सफेद रंग के अन्य दुर्लभ जीव और पक्षी देखने को मिल सकते हैं।

 

4. काजीरंगा नेशनल पार्क – सफेद गैंडों की धरती

उत्तरी सफेद गैंडे: लॉन्गलीट के जानवर प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने में मदद करते हैं | आईटीवी न्यूज़ वेस्ट कंट्री

असम का काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडों के लिए वर्ल्ड फेमस है। यहां सफेद रंग वाले गैंडे नहीं, बल्कि सामान्य रंग के भारतीय गैंडे पाए जाते हैं, जिन्हें कई लोग गलती से “सफेद गैंडा” कह देते हैं। इसके अलावा यहां हाथी, जंगली भैंसे, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां मिलती हैं। मानसून के बाद हरियाली से भरा यह पार्क बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

 

5. भितरकनिका नेशनल पार्क – सफेद मगरमच्छों की दुर्लभ झलक

 

Meet Pearl, one of the world's rare albino alligators | Natural World | Earth Touch News

ओडिशा का भितरकनिका नेशनल पार्क मैंग्रोव जंगलों और खारे पानी के मगरमच्छों के लिए पॉपुलर है। यहां दुर्लभ रंग वाले मगरमच्छों के दिखाई देने की घटनाएं सामने आई हैं। पार्क में सफेद या हल्के रंग के मगरमच्छ बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। इसके अलावा यहां कछुए, पक्षी और कई जलीय जीव भी पाए जाते हैं। यह एरिया भारत के सबसे जरुरी मैंग्रोव इको-सिस्टम में से एक है।

 

6. काबिनी वाइल्डलाइफ सेचुअरी – जंगलों में दुर्लभ नजारे

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कर्नाटक का काबिनी एरिया अपने खूबसूरत जंगलों, झील और वाइल्डलाइफ सफारी के लिए पॉपुलर है। यहां हाथी, बाघ, तेंदुए और कई प्रकार के हिरण पाए जाते हैं। काबिनी की खासियत यह है कि यहां जंगल और पानी का सुंदर ब्लेंड देखने को मिलता है, जिससे वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस और भी शानदार हो जाता है।

7. नागरहोल टाइगर रिजर्व – रेयर वाइल्डलाइफ का नेचुरल होम

Best Travel Place : गुलाबी लैगून! नीले समंदर की लहरें और आग जैसा दहकता लाल रेगिस्तान, रोड ट्रिप के शौकीनों के लिए स्वर्ग है यह देश! - News18 हिंदी

नागरहोल टाइगर रिजर्व कर्नाटक के सबसे जरुरी जंगल एरिया में से एक है। यहां बाघ, हाथी, गौर, हिरण और कई पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। घने जंगल और नदी क्षेत्र इसे वाइल्डलाइफ के लिए आइडियल प्लेस बनाते हैं। सफेद रंग वाले जानवरों को देखना यहां भी दुर्लभ घटना है, लेकिन सफारी के दौरान अलग-अलग प्रजातियों के अनोखे रूप देखने का मौका मिल सकता है।

 

8. पेरियार टाइगर रिजर्व – झील और जंगलों का अनोखा संगम

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केरल का पेरियार टाइगर रिजर्व अपनी खूबसूरत झील, हाथियों और हरे-भरे जंगलों के लिए पॉपुलर है। यहां कई प्रकार के पक्षी, हिरण और वाइल्डलाइफ पाए जाते हैं। सफेद रंग वाले दुर्लभ जीवों को देखना आसान नहीं होता, लेकिन इस क्षेत्र की बायोडाइवर्सिटी इसे खास बनाती है। नाव सफारी के दौरान जंगल और पानी के बीच वाइल्डलाइफ को देखने का एक्सपीरियंस बेहद यादगार होता है।

भारत के जंगलों में सफेद रंग के दुर्लभ जानवरों को देखना एक रोमांचक लेकिन बेहद मुश्किल एक्सपीरियंस है। नेचर में ऐसे जीव बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं और इनका कंज़र्वेशन बेहद जरूरी है। इन नेशनल पार्क की ट्रिप केवल दुर्लभ जानवरों को देखने के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की यूनिक बायोडाइवर्सिटी और नेचुरल ब्यूटी को समझने का भी शानदार मौका देती है।

विदेश नहीं स्वदेश, बाली जैसी 8 जगह भारत में जहां है समुद्र सुंदरता और सुकून!

भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जो आपको बिना विदेश गए ही बाली जैसा ट्रॉपिकल एक्सपीरियंस देती हैं। यहां का नीला समुद्र, सफेद रेत और नारियल के पेड़ों से सजा माहौल मन को तुरंत आकर्षित कर लेता है। कुछ जगहें इतनी शांत और प्राकृतिक हैं कि लगता है जैसे समय वहीं थम गया हो। आइए जानते हैं भारत की ऐसी 8 जगहों के बारे में जो बिल्कुल बाली जैसी फील देती हैं:

तारकरली

beautiful debag beach island bird eye view in malvan

तारकरली महाराष्ट्र का एक अनछुआ बीच डेस्टिनेशन है, जो अपनी सफेद रेत और क्रिस्टल-क्लियर पानी के लिए जाना जाता है। यहां स्कूबा डाइविंग और स्नॉर्कलिंग का एक्सपीरियंस बहुत खास होता है। कम भीड़ और प्राकृतिक सुंदरता इसे बाली जैसा ट्रॉपिकल फील देती है। तारकरली के लिए नवंबर से फरवरी का समय बेस्ट होता है, जब समुद्र और मौसम दोनों साफ रहते हैं। यहां कंकावली रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीक है और गोवा या मुंबई से सड़क मार्ग भी अच्छा ऑप्शन है। यहां 2–3 दिन में लगभग ₹6,000 से ₹14,000 खर्च आता है।

 

गोकर्ण

Walking through the streets of Gokarna - RTF | Rethinking The Future

गोकर्ण एक शांत और कम भीड़ वाला बीच टाउन है, जो गोवा के पास स्थित है। यहां के ओम बीच, कुडले बीच और हाफ मून बीच बहुत साफ और प्राकृतिक हैं। योग, मेडिटेशन और शांत समुद्री माहौल इसे बाली जैसी सुकून भरी जगह बनाते हैं। गोकर्ण घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे सही है। यहां पहुंचने के लिए गोवा या हुबली एयरपोर्ट और अंकोला/कारवार रेलवे स्टेशन का उपयोग किया जाता है। 2–3 दिन की यात्रा में लगभग ₹5,000 से ₹12,000 का खर्च आता है।

 

मुनरो द्वीप

HD wallpaper: Underwater Waterfall In Le Morne Brabant Mauritius Known As The White Island Paradise Island In The Indian Ocean Near The Coast Of Madagascar 2560×1440 | WallpaperFlare

मुनरो द्वीप केरल का एक शांत बैकवॉटर इलाका है, जहां छोटी नहरें, नारियल के पेड़ और गांवों की सादगी देखने को मिलती है। यहां कयाकिंग और बोट राइड का एक्सपीरियंस बाली के उबुद जैसे राइस फील्ड और वाटरवेज जैसा महसूस होता है। मुनरो द्वीप घूमने के लिए सितंबर से मार्च का समय अच्छा माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट और कोल्लम रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक हैं। बैकवॉटर स्टे के कारण यहां 2–3 दिन में लगभग ₹5,000 से ₹10,000 का खर्च आ सकता है।

 

वर्कला

7 places in India you should experience as a solo traveller | GQ India

वर्कला केरल का एक बेहद खूबसूरत क्लिफ बीच डेस्टिनेशन है, जहां समुद्र के ऊपर ऊंची चट्टानें और नीचे नीला पानी दिखाई देता है। यहां का सनसेट व्यू, बीच कैफे और आयुर्वेदिक स्पा इसे बाली के उलुवातु जैसा फील देते हैं। यह जगह योग और रिलैक्सेशन के लिए भी काफी फेमस है। वर्कला जाने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च होता है जब मौसम ठंडा और घूमने के लिए आरामदायक रहता है। यहां पहुंचने के लिए नज़दीकी एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम है और रेलवे स्टेशन वर्कला खुद है। यहां 3 दिन के ट्रिप में रहने-खाने सहित लगभग ₹6,000 से ₹15,000 तक खर्च आ सकता है।

 

लक्षद्वीप

Lakshadweep Places: लक्षद्वीप की ये जगह भी है बहुत खूबसूरत

लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित बेहद शांत और अनछुआ द्वीप समूह है। यहां का साफ नीला पानी, नारियल के पेड़ और बहुत कम भीड़ इसे बाली से भी ज्यादा शांत और प्राकृतिक बनाते हैं। यह जगह कपल्स और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है। लक्षद्वीप घूमने का सही समय अक्टूबर से मार्च है और यहां जाने के लिए कोच्चि से अगत्ती आइलैंड तक फ्लाइट मिलती है, साथ ही परमिट लेना जरूरी होता है। यहां 5 दिन की यात्रा में लगभग ₹25,000 से ₹60,000 खर्च आता है।

 

माजुली द्वीप

भारत में है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, तस्वीरों में देखिए यहां की खूबसूरती

माजुली दुनिया का सबसे बड़ा रिवर आइलैंड है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच है। यहां की हरियाली, असमिया संस्कृति और शांत वातावरण इसे बहुत खास बनाते हैं। यह जगह बाली के उबुद जैसे शांत और सांस्कृतिक एक्सपीरियंस देती है। माजुली द्वीप के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा होता है। यहां सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जोरहाट है और आगे नाव से द्वीप तक पहुंचना पड़ता है। 2–3 दिन की जर्नी में लगभग ₹6,000 से ₹12,000 खर्च आता है।

 

पुडुचेरी

File:Puri Sea Beach viewed from the light house.jpg - Wikimedia Commons

पुडुचेरी फ्रेंच कॉलोनी स्टाइल, रंगीन गलियों और शांत बीच के लिए मशहूर है। यहां का प्रोमेनेड बीच, कैफे कल्चर और आर्टिस्टिक माहौल इसे बाली की वाइब देता है। यह जगह ट्रैवलर्स और फोटोग्राफी लवर्स के लिए बहुत खास है। पुडुचेरी घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय बेस्ट है। यहां चेन्नई एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है और सड़क मार्ग से केवल 3 घंटे में पहुंचा जा सकता है। 3–4 दिन की ट्रिप में लगभग ₹5,000 से ₹15,000 खर्च आता है।

 

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

Top 10 tourist places in Andaman and Nicobar Islands

यह भारत का सबसे खूबसूरत ट्रॉपिकल आइलैंड डेस्टिनेशन है। हैवलॉक और नील आइलैंड जैसे स्थान अपने नीले पानी, कोरल रीफ और सफेद रेत के लिए मशहूर हैं। स्कूबा डाइविंग और बीच लाइफ इसे असली बाली जैसा एक्सपीरियंस बनाते हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मई होता है। यहां पोर्ट ब्लेयर के लिए दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई से फ्लाइट मिलती है। 5–6 दिन की ट्रिप में लगभग ₹18,000 से ₹45,000 तक खर्च हो सकता है।

भारत की ये बाली जैसी जगहें साबित करती हैं कि खूबसूरत ट्रॉपिकल एक्सपीरियंस के लिए विदेश जाना जरूरी नहीं है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत माहौल और अनोखी वाइब हर यात्री को आकर्षित करती है। चाहे एडवेंचर हो या रिलैक्सेशन, ये जगहें हर तरह का एक्सपीरियंस देती हैं। एक बार यहां जाने के बाद इनकी यादें हमेशा दिल में बस जाती हैं।