Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

Som Pradosh Vrat 2026: दूसरे सोमवार के साथ बना सोम प्रदोष व्रत का संयोग, आज के एक व्रत से पाएं 24 प्रदोष व्रत का फल

कंधे पर खूब जच रही है ये 7 ट्रेंडी डिजाइन, सावन में आया मेहंदी का नया अंदाज!

सावन और त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाना हर किसी को पसंद आता है। इस बार हाथों और पैरों की मेहंदी से कुछ अलग ट्रेंड अपनाया जा सकता है। कंधे पर बनी मेहंदी डिजाइन इन दिनों काफी पसंद की जा रही है। स्लीवलेस ब्लाउज, ऑफ-शोल्डर ड्रेस और फ्यूजन आउटफिट के साथ कंधे की मेहंदी बहुत खूबसूरत लगती है।

 

मंडला फ्लोरल डिजाइन

Story pin image

मंडला और फूलों से बनी मेहंदी कंधे पर बेहद सुंदर दिखाई देती है। डिजाइन की शुरुआत बीच में बने गोल मंडला से होती है, जिसके चारों तरफ छोटी पंखुड़ियां, पत्तियां और महीन बेलें बनाई जाती हैं। कंधे के गोल हिस्से पर यह पैटर्न खूबसूरत लगते है। हल्के रंग के कपड़ों या स्लीवलेस ब्लाउज के साथ यह डिजाइन खास तौर पर उभरकर दिखाई देता है।

 

मोर वाली मेहंदी

This may contain: the back of a woman's shoulder is decorated with hennap and flowers

सावन के मौसम में मोर का डिजाइन काफी खूबसूरत लगता है। कंधे पर गर्दन के पास मोर शेप बनाकर उसके पंखों को बारीक पैटर्न से सजाते है। इसके साथ छोटी बेलें, फूल और पत्तियां जोड़ने से डिजाइन और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। मोर की लंबी आकृति कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बनाई जाए, तो पूरा पैटर्न ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

ज्वेलरी स्टाइल मेहंदी

This may contain: a woman wearing a black top has a tattoo on her chest and shoulder, which is decorated with geometric designs

भारी गहनों के बजाय कंधे पर ज्वेलरी जैसा मेहंदी पैटर्न काफी अलग अंदाज देता है। इसमें नेकलेस, चेन, झूमर और मोतियों जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं। कंधे के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर डिजाइन को नीचे की ओर हल्का फैलाया जा सकता है। मेहंदी की बारीक लाइनें इसे ज्वेलरी लुक देती हैं। साड़ी, लहंगा या फ्यूजन आउटफिट के साथ यह डिजाइन काफी रॉयल नजर आता है।

 

बोहो मेहंदी डिजाइन

Story pin image

बोहो स्टाइल मेहंदी में ट्रेडिशनल पैटर्न के साथ मॉडर्न मोटिफ्स का ब्लेंड देखने को मिलता है। मंडला, छोटी चेन, लटकन, पत्तियां और ज्योमेट्रिक आकृतियां इस डिजाइन का हिस्सा बन सकती हैं। कंधे पर इसे हल्के और खुले पैटर्न में बनाया जाता है। यह डिजाइन इंडो-वेस्टर्न या वेस्टर्न आउटफिट के साथ अच्छा लगता है।

 

अरैबिक फ्लोरल डिजाइन

Story pin image

अरैबिक मेहंदी में बड़े फूल, पत्तियां और घुमावदार बेलें प्रमुख होती हैं। कंधे पर इस डिजाइन को एक तरफ से शुरू करके बांह की ओर बढ़ाया जा सकता है। मोटी आउटलाइन और बीच में खाली जगह होने के कारण यह डिजाइन दूर से भी साफ दिखाई देता है। ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद न करने वालों के लिए यह स्टाइल अच्छा रहता है।

 

मिनिमल टैटू मेहंदीThis may contain: the back of a woman's shoulder with henna tattoos on it and flowers

छोटे और साफ डिजाइन पसंद करने वालों के लिए मिनिमल टैटू मेहंदी काफी अच्छी रहेगी। कंधे पर छोटा फूल, तितली, चांद, पत्ती, स्टार या कोई सुंदर प्रतीक बनाया जा सकता है। सावन के मौके पर बेलपत्र, त्रिशूल, डमरू या ॐ जैसे छोटे मोटिफ्स भी शामिल किए जा सकते हैं। डिजाइन छोटा होने के बावजूद कंधे पर काफी स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

बेल और पत्तियों वाली डिजाइन

Story pin image

कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बेल और पत्तियों की मेहंदी बहुत नाजुक और खूबसूरत लगती है। इसमें छोटी पत्तियों, फूलों और घुमावदार बेलों को एक फ्लो में बनाया जाता है। डिजाइन को ज्यादा गहरा भरने के बजाय कुछ हिस्से खाली रखे जाते हैं, जिससे पैटर्न हल्का और क्लासी नजर आता है। स्लीवलेस सूट, ब्लाउज या ऑफ-शोल्डर ड्रेस के साथ यह डिजाइन खूबसूरत लगेगा।

 

चांद-सितारा डिजाइन

Story pin image

कंधे पर चांद और सितारों वाली मेहंदी डिजाइन काफी खूबसूरत और अलग नजर आती है। इसमें एक छोटा सा चांद बनाकर उसके आसपास सितारे, छोटी पत्तियां और बारीक डॉट्स बनाए जा सकते हैं। डिजाइन को कंधे से थोड़ा नीचे तक फैलाने पर यह अच्छी लगती है। सावन के त्योहारों में यह डिजाइन स्टाइलिश लुक देती है

दिन में दिखेगा रात जैसा नजारा! इस तारीख को कुछ मिनटों के लिए गायब हो जाएगा सूरज

12 अगस्त को आसमान एक ऐसे दुर्लभ नजारे का गवाह बनने वाला है, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के लोग इंतजार कर रहे हैं। कुछ देशों में दिन के उजाले में कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाएगा। यही वजह है कि इस खगोलीय घटना को बेहद खास माना जा रहा है।

 

खगोलीय घटना

पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में भी शाम जैसा अंधेरा महसूस होता है। कई जगहों पर तापमान थोड़ा कम हो जाता है और वातावरण भी सामान्य दिनों से अलग दिखाई देता है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना मानी जाती है।

 

 

दिखाई देने वाली जगहें

यह पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे पहले उत्तरी रूस में दिखाई देगा। इसके बाद ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों से होकर गुजरेगा। इसके अलावा यूरोप के कई देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

 

 

भारत पर असर

चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में भारत में सामान्य दिनचर्या पर इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा। जो लोग धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं, वे अपनी आस्था के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं।

 

 

ग्रहण का समय

स्पेन में पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्यास्त से ठीक पहले दिखाई देगा और इसकी अवधि दो मिनट से भी कम होगी। बर्गोस शहर में करीब 1 मिनट 48 सेकंड तक पूरा अंधेरा रहेगा। वहीं, कुछ अन्य देशों में भी पूर्ण ग्रहण ढाई मिनट से कम समय तक दिखाई देगा। लेकिन आंशिक सूर्य ग्रहण लगभग 1 घंटा 45 मिनट तक देखा जा सकेगा।

 

 

दुर्लभ नजारा

पूर्ण सूर्य ग्रहण हर साल हर जगह दिखाई नहीं देता। यह केवल पृथ्वी की एक संकरी पट्टी से ही गुजरता है। कई क्षेत्रों में ऐसा नजारा दोबारा देखने के लिए दशकों या सैकड़ों साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इसे बेहद दुर्लभ और खास खगोलीय घटना माना जाता है।

 

 

धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। ग्रहण के समय कई लोग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करते हैं। कुछ लोग ग्रहण के दौरान भोजन बनाने या खाने से भी परहेज करते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और घर की सफाई करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है।

 

 

रखें ये सावधानियां

सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। साधारण धूप का चश्मा, काला शीशा या एक्स-रे फिल्म भी सेफ नहीं माने जाते। ग्रहण देखने के लिए हमेशा सोलर व्यूइंग ग्लास या फिल्टर का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

सुहागिनों के सोलह शृंगार को बनाएं और भी खास, आलता के ये नए और आसान पैटर्न्स!

सोलह शृंगार में पैरों पर लगा लाल आलता पारंपरिक सुंदरता को निखार देता है। आज भी कई महिलाएं तीज, करवा चौथ, शादी और दूसरे शुभ अवसरों पर आलता लगाना पसंद करती हैं। अपने पैरों को खूबसूरत और अलग लुक देने के लिए यहां दिए गए लेटेस्ट और ट्रेडिशनल आलता डिजाइन से आइडिया ले सकती हैं।

सिंपल आलता डिजाइन (Simple Alta Design)

"Red Alta Foot Design Using Wooden Spoon | Simple & Beautiful Bridal Foot Mehndi Style#AltaDesign

सिंपल आलता डिजाइन हमेशा ट्रेंड में रहता है। इसमें पैरों की सभी उंगलियों पर साफ-सुथरे तरीके से आलता लगाया जाता है और पैर के बीच में एक छोटा-सा गोल बनाया जाता है। यह डिजाइन बनाने में आसान है और साड़ी, सलवार सूट या किसी भी पारंपरिक आउटफिट के साथ बेहद खूबसूरत लगता है।

गोल बिंदी आलता डिजाइन (Round Bindi Alta Design)

"My

गोल बिंदी वाला आलता डिजाइन देखने में खूबसूरत लगता है। इसमें पैर पर गोल शेप बनाकर उसके चारों ओर छोटी-छोटी बिंदियां बनाई जाती हैं। इसे ब्रश या ईयरबड की मदद से आसानी से बनाया जा सकता है। तीज, सावन और दूसरे त्योहारों पर यह डिजाइन पैरों की खूबसूरती बढ़ा देता है।

 

 

कमल फूल आलता डिजाइन (Lotus Motif Alta Design)

Story pin image

कमल फूल वाला आलता डिजाइन ट्रेडिशनल लुक को खास बनाते है। इसमें पैरों पर आलता लगाकर बीच में कमल का फूल बनाया जाता है और उसके चारों ओर पत्तियों जैसी आकृति बनाई जाती है। साड़ी, पायल और कांच की चूड़ियों के साथ यह डिजाइन बेहद सुंदर दिखाई देता है।

 

बेल आलता डिजाइन (Vine Pattern Alta Design)

Beautiful Traditional Feet Alta Design | Wedding & Festive Foot Mehndi Look#altadesign

बेल वाला आलता डिजाइन पारंपरिक और स्टाइलिश लुक का शानदार मेल है। इसमें पैर पर आलता लगाने के बाद बेल जैसी आकृति बनाई जाती है। यह डिजाइन पैरों को अट्रैक्टिव लुक देता है और साड़ी, सिल्वर पायल व हल्के गहनों के साथ खूब जंचता है।

 

 

पायल स्टाइल आलता डिजाइन (Payal Style Alta Design)

पायल स्टाइल आलता डिजाइन पैरों को अलग और खूबसूरत लुक देता है। इसमें टखने के चारों ओर पायल जैसा पैटर्न बनाया जाता है और छोटे-छोटे डॉट्स या पतली लाइनों से सजाया जाता है। साड़ी और एथनिक आउटफिट के साथ यह डिजाइन अच्छा लगता है।

 

 

मिनिमल सर्कल आलता डिजाइन (Minimal Circle Alta Design)

मिनिमल सर्कल आलता डिजाइन ट्रेडिशनल और मॉडर्न लुक का खूबसूरत मेल है। इसमें गोल आकार के साथ लाल और सफेद रंग की छोटी-छोटी बिंदियों से सजावट की जाती है। यह डिजाइन साफ-सुथरा, सुंदर और बेहद स्टाइलिश दिखाई देता है। छोटे पारिवारिक कार्यक्रमों से लेकर त्योहारों तक, हर मौके पर यह अच्छा लगता है।

बॉर्डर वाला आलता डिजाइन (Border Alta Design)

बॉर्डर वाला आलता डिजाइन हल्का लेकिन एलिगेंट लुक देता है। इसमें पैरों के किनारों पर लहरदार (वेव) बॉर्डर बनाया जाता है, जिससे पैर और भी सुंदर दिखते हैं। शादी, तीज, करवा चौथ या किसी भी मौके पर यह डिजाइन ट्रेडिशनल लुक की खूबसूरती को बढ़ा देता है।

Sawan First Somwar 2026: सच्ची श्रद्धा के साथ आज दिन में इस समय करें भगवान शिव का जलाभिषेक, जानें विधि और जरूरी नियम

Sawan First Somwar 2026: भगवान शिव के अनेक नामों में से एक नाम ‘भोलेनाथ’ भी है, यानी महादेव अपने भक्त की सच्ची श्रद्धा और संपूर्ण समर्पण चाहते हैं। जो भक्त महादेव की सच्च दिल से आराधना करते हैं, शिव सदा उनके सहायक रहते हैं। भगवान शिव का प्रिय समय यानी सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज इस माह का पहला सोमवार है। इस दिन बहुत से भक्त उपवास करते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

माना जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। आज के दिन छोटे-बड़े सभी शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग जाती है। आज श्रद्धालु भांग, बेलपत्र, धतूरा और जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और सोमवार का उपवास करते हैं। अक्सर भक्त सावन के सोमवार को महादेव के जलाभिषेक के सही समय को लेकर दुविधा में रहते हैं। ऐसे में आइए जानें भगवान का जलाभिषेक किस समय करना चाहिए।

शिवलिंग जलाभिषेक का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह का समय पूजा के लिए सबसे अचछा माना जाता है। इसिलए भगवान का जलाभिषेक सूर्योदय के समय करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन किसी वजह से सुबह मंदिर नहीं जा पाते ह तो दिन में भी श्रद्धा से पूजा कर सकते है। भगवान शिव के लिए सबसे जरूरी सच्ची श्रद्धा मानी गई है।

पूजा विधि

सुबह स्नानादि के बाद साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर साफ जल जढ़ाएं। अगर घर में गंगाजल है तो उसकी कुछ बूंद भी मिला सकते हैं। इसके बाद दूध, बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवायʼ मंत्र का जाप करें। आखिर में आरती करें और भगवान शिव से परिवार की खुशहाली की प्राथना करें।

पूजा के जरूरी नियम

जल्दबाजी में पूजा न करें, पूजा करते समय मन शांत रखें। शिवलंग पर ताजे बेलपत्र और ताजे फूल ही चढ़ाएं। अगर व्रत रख रहे हैं तो अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।

शिव पूजा में ध्यान रखें कि शिवलंग पर तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता। टूटे हुए बेलपत्र, बासी फूल या खराब फल भी भगवान को अर्पित नहीं करने चाहिए। पूजा के दौरान गुस्सा या किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए।

Kamika Ekadashi 2026 Date: द्विपुष्कर योग में मनाई जाएगी सावन की पहली एकादशी, जानें तारीख, विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

योगी सरकार ने महिला कावड़ियों के लिए किए विशेष प्रबंध, जलाभिषेक करने उमड़ पड़ी नारीशक्ति

Yogi government makes special arrangements for female Kanwariyas

– प्रयागराज में महिला शिवभक्तों के लिए संगम और गंगा के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए

– सुविधा और सुरक्षा के वातावरण में नदियों का पवित्र जल लेकर काशी के लिए प्रस्थान कर रहीं हैं महिला शिवभक्त 

– आपदा सखियों ने भी महिला शिवभक्तों की मदद के लिए घाटों और मार्गों पर संभाला मोर्चा

– महिला शिव भक्तों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, महिला पुलिस फोर्स की हुई तैनाती

Uttar Pradesh News : कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसका असर श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा पर भी दिख रहा है। कांवड़ यात्रा कर रहे शिवभक्तों में महिला शिवभक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इन महिला शिव भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। 

 

घाटों में महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती

पवित्र श्रावण मास में शिवभक्त कावड़ियों की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सकुशल संपन्न कराने के योगी सरकार के निर्देश के क्रम में प्रयागराज में भी यात्रा मार्ग, कांवड शिविरों, भंडारों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

ALSO READ: मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना : अनाथ और असहाय बच्चों के भविष्य की मजबूत आधारशिला, योगी सरकार में एक लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच रहा योजना का लाभ

संगम नगरी प्रयागराज में कांवड़ लेकर चलने वाली शिवभक्त महिला कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने महिला शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में दशाश्वमेध और संगम घाट से सबसे अधिक महिला कांवड़ियां जल लेकर काशी के लिए निकलती हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा बताते हैं कि महिला शिव भक्तों के लिए संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात हैं। आजीविका मिशन की 44 आपदा सखियां भी महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी के बीच बनाए गए कांवड़ पथ में भी प्रमुख स्थानों में जगह-जगह महिला पुलिस एवं वॉलिंटियर्स मुस्तैद हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव , ब्रह्मेश्वर महादेव सहित शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महिला सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। 

 

नारी शक्ति ने उठाई कांवड़, निर्भय होकर कर रहीं जलाभिषेक

 भगवान शंकर की आराधना के लिए श्रावण मास में महिलाओं की जितनी लंबी कतारें शिवालयों में लगती थीं, अब उतनी ही उनकी भागीदारी अब कांवड़ यात्रा में भी दिख रही है। छोटे कस्बों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त घरों से निकल कर कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं।

ALSO READ: Sawan 2026 : सावन में आस्था का ज्वार, शिवालयों की घंटियों संग गूंजा 'बम-बम भोले', कांवड़ियों से गुलजार हुए बाजार, योगी सरकार ने किए पुख्ता इंतजाम

प्रयागराज के दारागंज के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी से जल लेकर काशी के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली ज्योति कहती हैं कि अब महिलाएं रास्ते में सुरक्षित हैं, किसी तरह का भय नहीं है इसलिए उनके कस्बे भरवारी से कई महिलाएं कांवड़ यात्रा में जा रही हैं। 
 

सदियापुर की मीरा देवी भी परिवार के आठ सदस्यों के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बैजनाथ धाम कांवड़ यात्रा के लिए निकली हैं। मीरा देवी बताती हैं कि उनके साथ उनकी तीन पीढ़ियां इस बार यात्रा में जा रही है। उनके साथ उनकी दो बहुएं, एक बेटी और तीन नातिन भी जा रहीं हैं। इसके अलावा उनका बेटा भी साथ है। मीरा बताती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा और असुविधा नहीं दिखती।

ALSO READ: UP को बड़ी वित्तीय राहत, 19,208 करोड़ रुपए की अग्रिम कर हिस्सेदारी मिली, CM योगी ने PM मोदी को कहा धन्यवाद

योगी जी की सरकार आने के बाद महिला शिवभक्त हर स्थान पर सुरक्षित हैं। कांवड़ मार्ग में जगह -जगह महिला शिवभक्तों के विश्राम शिविर बनाए गए हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन और कीर्तन करते हुए पूरी उत्साह और हर्ष के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं।

Grahan In August 2026: गर्भवती महिलाएं अगस्त में इन बातों का रखें ध्यान, दो ग्रहण से बच्चे पर पड़ सकता है बुरा असर

Grahan In August 2026: सूर्य और चंद्र ग्रहण दुर्लभ लेकिन सामान्य खगोलीय घटनाए हैं। हर साल दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगते हैं। साल 2026 के पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण लग चुके हैं और अब अगस्त के महीने में दूसरे और आखिरी सूर्य-चंद्र ग्रहण लगेंगे। यह दिलचस्प आसमानी घटना में खगोलय नजरिए से काफी लोगों की रुचि होती है। लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव होते हैं। इस समय में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण काल को अशुभ समय माना गया है। इसलिए, ग्रहण काल के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और लोग मंत्र जाप या आध्याम्तिक साधना करते हैं। माना जाता है कि, ग्रहण काल के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए अन्यथा होने वाले बच्चे पर इसका बुरा प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण से पहले खुद को सुरक्षित करने के लिए तैयार कर लेनी चाहिए। आइए जानें अगस्त 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण कब लगेंगे और उनसे कैसे करें बचाव?

12 अगस्त को लगेगा सूर्य ग्रहण

ज्योतिषियों के अनुसार, अगस्त महीने में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 तारीख को लगेगा। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण

अगस्त में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह 28 अगस्त को सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक प्रभावी होगा। यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

गर्भवती महिलाएं रखें इन 5 बातों का ध्यान

  • ग्रहण के दौरान घर के अनावश्यक कार्य न करें और घर की सभी खिड़कियां-दरवाजे बंद रखना उचित रहेगा।
  • ग्रहण के समय अनावश्यक यात्रा न करें और खुले आसमान के नीचे जाने से बचें।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में भोजन करने और रसोई से जुड़े कार्यों से बचना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाएं भूलकर भी सुई, कैंची या किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग न करें। यह अशुभ होता है।
  • ग्रहण के दौरान सोने की बजाय भगवान का ध्यान, मंत्र जाप करना चाहिए। इसके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

Sawan 2026 Somvaar Upay: शादी की उम्र निकल रही है पर नहीं बज रही शहनाई, ये उपाय पूरी करेगा मनोकामना

Surya Grahan 2026 August: हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, करियर, सेहत और संपत्ति को लेकर 4 राशियां रहें सावधान

Surya Grahan 2026 August: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगा था, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण सावन के महीने में हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क राशि में लगेगा, जिसका नकारात्मक प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि पर देखने को मिलेगा। खास बात ये है कि साल के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु कर्क राशि में होंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से लेकर रात 11:06 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार, श्रावणी अमावस्या 12 अगस्त को होगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसका समय रात में 9 बजकर 4 मिनट पर लगेगा। इसका समापन या मोक्ष 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

कब से कब तक रहेगा सूतक काल

ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ समय से 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह में 09:04 बजे से लगना चाहिए, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इस वजह इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण पर सतर्क रहें 4 राशियां 

सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है और उसका सूतक काल नहीं मान्य होगा। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 राशिवालों के लिए मुश्किल हो सकता है। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर होने की आशंका है। इन राशियों के जातकों को 12 अगस्त से लेकर 12 जनवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान, धन-संपत्ति को लेकर सावधान रहना चाहिए। धन हानि, प्रॉपर्टी विवाद, बीमारी, अपयश, तनाव आदि से आप लोग परेशान हो सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

इन चार राशि के लोगों को 12 अगस्त से 6 माह तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार के दिन आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की कृपा से सभी ग्रह, दोष और संकट दूर होंगे।

Sawan 2026 Rahu Gochar: मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करने वाला है राहु, 4 राशियों के जीवन में होगा धमाल और चमकेगी किस्मत

सावन व्रत में बनाएं ये 5 आसान सात्विक रेसिपीज, बिना प्याज-लहसुन मिलेगा भरपूर स्वाद

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, पूजा-पाठ और सात्विक लाइफस्टाइल अपनाने का समय माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं और प्याज, लहसुन, मांसाहार व अंडे जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में शरीर को एनर्जी देने वाला हल्का भोजन खाना भी जरूरी होता है। आप भी इस सावन व्रत में बिना प्याज-लहसुन वाली आसान रेसिपीज आपकी व्रत की थाली को स्वादिष्ट और पौष्टिक बना सकती हैं:

1. सिंघाड़े की खीर (Singhara Kheer)

इसे बनाने के लिए दूध को एक भारी तले वाले बर्तन में उबालें। उसमें धीरे-धीरे सिंघाड़े का आटा मिलाते हुए लगातार चलाएं, ताकि गांठें न बनें। 8-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। अब चीनी या गुड़, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम, काजू व पिस्ता डालकर 2-3 मिनट और पकाएं। सिंघाड़ा फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स माना जाता है। दूध से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है तथा ड्राई फ्रूट्स हेल्दी फैट, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं। इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से परोसा जा सकता है।

 

2. जीरा आलू (Jeera Aloo)

इसे बनाने के लिए कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा चटकाएं। फिर बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें। अब उबले और कटे हुए आलू डालें। सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 5-7 मिनट तक मीडियम आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। फिर हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जीरा डाइजेशन को बेहतर बनाने और गैस जैसी प्रॉब्लम को कम करता है, जबकि आलू कार्बोहाइड्रेट और पोटैशियम का अच्छा सोर्स है। कम मसालों में बनने वाली यह डिश व्रत में हल्की होती है और शरीर को एनर्जी देती है।

 

 

3. साबूदाना खिचड़ी (Sabudana Khichdi)

इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबूदाने का पानी निकाल लें। कड़ाही में घी गर्म करके जीरा चटकाएं और हरी मिर्च डालें। फिर उबले आलू डालकर 2-3 मिनट तक हल्का भूनें। अब साबूदाना, मूंगफली का पाउडर और सेंधा नमक डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए 3-4 मिनट पकाएं। हरा धनिया और थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर परोसें। साबूदाना शरीर को तुरंत एनर्जी देता है, जबकि मूंगफली प्रोटीन, हेल्दी फैट और विटामिन ई का अच्छा सोर्स है। नींबू से विटामिन C मिलता है। यह रेसिपी व्रत में लंबे समय तक पेट भरा रखती है।

 

 

4. कुट्टू की पूरी (Kuttu Puri)

इसे बनाने के लिए उबले आलू को मैश करके कुट्टू के आटे में मिलाएं। सेंधा नमक डालें और जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर कड़क आटा गूंध लें। आटे को 10 मिनट ढककर रखें, फिर छोटी-छोटी लोइयां बनाकर पूरियां बेलें। गर्म घी या तेल में इन्हें सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें। कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और इसमें फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम तथा एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे दही, जीरा आलू या व्रत की किसी भी सब्जी के साथ परोसें।

 

 

5. साबूदाना टिक्की (Sabudana Tikki)

इसे बनाने के लिए पहले उबले आलू को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें भीगा हुआ साबूदाना, भुनी मूंगफली का पाउडर, बारीक कटी हरी मिर्च, सेंधा नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं। तैयार मिक्सचर से छोटी साइज की टिक्कियां बनाएं और तवे पर थोड़ा घी लगाकर मीडियम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं। आलू में पोटैशियम होता है। इसलिए यह रेसिपी व्रत के मिए परफेक्ट है। इसे दही या व्रत की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।