Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना सावन, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस माह में जरूर करें तुलसी की मंजरी का उपाय

Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का विशेष स्थान है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। माना जाता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

सावन 2026 के करीब आते ही देशभर के शिवभक्त व्रत, पूजा, कांवड़ यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों में जुट जाएंगे। यह पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस माह में तुलसी का पौधा लगाना और उसमें मंजरी आना बहुत शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सावन में तुलसी का पौधा लगाने से सारी नेगेटिविटी दूर हो जाती है।

मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत है तुलसी में मंजरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी पर मंजरी आना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि मां लक्ष्मी की कृपा आपके घर पर बनी हुई है और जल्द ही कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

तुलसी की मंजरी करें श्री हरि को अर्पित

सावन के महीने में अक्सर घर में लगी तुलसी में मंजरी आने लगती है। तुलसी में मंजरी आना शुभ संकेत माना जाता है। यह भगवान विष्णु को भी प्रिय है। इसलिए सावन में इसके ये उपाय जरूर करने चाहिए

  • तुलसी की मंजरी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। यदि तुलसी पर मंजरी आ जाए, तो उसे तोड़कर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल को अर्पित करना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  • मंजरी को कभी भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं, क्योंकि शास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है।
  • यदि मंजरी सूख जाए, तो इसे फेंकने के बजाय गमले की मिट्टी में डाल दें। इससे नए तुलसी के पौधे उगेंगे, जिससे घर में हरियाली और बरकत बनी रहती है।

घर में तुलसी लगाने के नियम

तुलसी का पौधा घर में लगाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बहुत से लोग सावन में घर में तुलसी का पौधा लगाते हैं। आइए जानें इसे लगाने के नियम

  • तुलसी का पौधा हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
  • तुलसी की पूजा करना अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए फलदायी है।
  • बारिश के मौसम में नमी के कारण मिट्टी में पानी रुक सकता है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं। अतः तुलसी के गमले में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।

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Sawan 2026: सावन में पानी है भगवान शिव की कृपा, तो पहले जान लें सावन में शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं

Sawan 2026: आषाढ़ का महीने लगने के साथ ही लोग सावन के महीने की तैयारियां शुरू कर देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस महीने जो भक्त सच्चे मन से मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना करता है, उन पर महादेव प्रसन्न होते हैं। उन्हें सारी दुख-तकलीफों से मुक्त करते हैं। सावन के पावन महीने में भगवान शिव की आराधना में शिवलिंग का जलाभिषेक और उस पर कुछ चीजें अर्पित की जाती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, वहीं कुछ चीजों को चढ़ाना शास्त्रों में पूरी तरह वर्जित माना गया है। सावन में आपको शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी पूरी सूची नीचे दी गई है:

शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

शिवलिंग पर इन पवित्र चीजों को चढ़ाने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है :

जल या गंगाजल : भोलेनाथ को सबसे प्रिय जल है। तांबे या पीतल के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाना सबसे उत्तम माना जाता है।

बेलपत्र : सावन में भगवान शिव को तीन पत्तियों वाला साफ, हरा और बिना कटा-फटा बेलपत्र उल्टा (चिकना हिस्सा नीचे की तरफ) करके चढ़ाएं।

दूध, दही और घी : गाय के कच्चे दूध, दही और शुद्ध देसी घी से शिवलिंग का अभिषेक करने से सुख-समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।

शहद और शक्कर : शिवलिंग पर शहद और मिश्री/शक्कर चढ़ाने से जीवन में मिठास आती है और वाणी में मधुरता बढ़ती है।

धतूरा और भांग : शिव जी को धतूरा, भांग और आक (मदार) के फूल बेहद प्रिय हैं। इन्हें चढ़ाने से जीवन की कठिन बाधाएं दूर होती हैं।

सफेद चंदन और भस्म : शिव जी वैरागी हैं, इसलिए उन्हें चंदन का तिलक लगाना और भस्म (विभूति) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अक्षत : शिवलिंग पर चावल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि चावल का कोई भी दाना टूटा हुआ (खंडित) न हो।

शिवलिंग पर ये चीजें भूलकर भी नहीं चढ़ाएं

शास्त्रों के अनुसार, कुछ चीजों को शिवलिंग से दूर रखना चाहिए, क्योंकि इन्हें चढ़ाने से पूजा खंडित हो सकती है :

तुलसी के पत्ते : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने तुलसी जी के पति (असुर जालंधर) का वध किया था, इसलिए शिव पूजा में तुलसी पूरी तरह वर्जित है।

हल्दी और कुमकुम/सिंदूर : हल्दी और कुमकुम को स्त्री तत्व और सौंदर्य प्रसाधन से जोड़ा जाता है। चूंकि शिवलिंग पुरुष तत्व और वैराग्य का प्रतीक है, इसलिए इस पर हल्दी, रोली या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता।

केतकी का फूल : भगवान शिव ने केतकी के फूल को झूठ बोलने के कारण श्राप दिया था, तब से शिव पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

शंख से जल : शिव पुराण के अनुसार, महादेव ने शंखचूड़ नाम के दैत्य का वध किया था, जिसके कारण शिव जी की पूजा में न तो शंख बजाया जाता है और न ही शंख से जल चढ़ाया जाता है।

नारियल पानी : शिवलिंग पर चढ़ाई गई चीजें ग्रहण करना वर्जित होता है, और नारियल पानी देवताओं को चढ़ाने के बाद प्रसाद रूप में पिया जाता है। इसलिए शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाया जाता। हालांकि साबुत नारियल माता पार्वती के आगे अर्पित किया जा सकता है।

लाल रंग के फूल : शिव जी को सफेद रंग के फूल प्रिय हैं। चमेली या लाल रंग के अन्य फूल आमतौर पर देवी पूजन में उपयोग होते हैं, इन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।

सावन में करें चंद्राकार परिक्रमा : सावन में जब भी आप शिवलिंग की परिक्रमा करें, तो ध्यान रखें कि ‘जलाधारी’ (सोमसूत्र यानी जहां से जल बहता है) को कभी लांघें नहीं। हमेशा चंद्राकार (आधी परिक्रमा) ही करनी चाहिए।

Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ में कब मनाई जाएगी हलहारिणी अमावस्या, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का समय

Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ में कब मनाई जाएगी हलहारिणी अमावस्या, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का समय

Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ का महीना हिंदू धर्म में बहुत अहम माना जाता है। हिंदू कैंलेंडर का यह चौथा महीना होता है और इसमें सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसके अलावा इस माह में देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिसके बाद भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। आषाढ़ माह की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, पूजा, व्रत और दान-पुण्य के साथ ही पितृ दोष से राहत पाने के लिए उपाय भी किए जाते हैं।

आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार आषाढ़ अमावस्या पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह अमावस्या तिथि मंगलवार को पड़ रही है, जिससे भौमवती अमावस्या का शुभ अवसर प्राप्त होगा। इस महत्वपूर्ण तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

आषाढ़ अमावस्या 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि की मान्यता के कारण आषाढ़ अमावस्या का पर्व 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 13 जुलाई 2026 को शाम 06:49 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 14 जुलाई 2026 को दोपहर 03:12 बजे तक

इसे ‘हलहारिणी अमावस्या’ क्यों कहते हैं?

आषाढ़ अमावस्या का किसानों और कृषि संस्कृति से बहुत गहरा नाता है, जिसके कारण इसे हलहारिणी अमावस्या कहा जाता है। इस महीने में पूरी वर्षा की सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसलिए यह नई फसल की बुआई के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। यह किसानों के लिए नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर किसान अपने खेतों में बैलों को आराम देते हैं और अपने मुख्य कृषि उपकरण ‘हल’ के साथ-साथ खेती में काम आने वाले अन्य औजारों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता अन्नपूर्णा और धरती माता की आराधना की जाती है ताकि प्रकृति की कृपा से फसलें हरी-भरी, रोगमुक्त और समृद्ध रहें। इसी कृषि परंपरा और हल पूजन के कारण इसे ‘हलहारिणी’ नाम मिला है।

स्नान, दान और पितृ तर्पण का समय

अमावस्या तिथि पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस साल 14 जुलाई 2026 को सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर 03:12 बजे तक स्नान, तर्पण और दान का शुभ समय रहेगा। इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद अपने दिवंगत पितरों के निमित्त तर्पण या श्राद्ध कर्म करें। स्नान के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, काले तिल या छाता दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन नए पौधे (जैसे पीपल, बरगद या नीम) लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

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Jyeshtha Month Vat Purnima 2026: 29 जून को वट पूर्णिमा को मिलेगा स्ट्रॉबेरी मून का साथ, जानें ज्येष्ठ पूर्णिमा में स्नान-दान और पूजा का मुहूर्त

Jyeshtha Month Vat Purnima 2026: ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा हिंदू विवाहित महिलाओं के लिए विशेष स्थान रखती है। देश के कुछ हिस्सों में इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य के लिए वट सावित्री व्रत करती हैं। इसलिए ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को कुछ जगहों पर वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन महिला वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष की शाखाओं में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और जड़ों में भगवान शिव का वास होता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि और समय

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत, स्नान-दान और पूजा 29 जून को ही की जाएगी।

स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

स्नान और दान के लिए सर्वोत्तम ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से सुबह 04:46 बजे तक।

इस समय पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना और उसके बाद दान देना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है)

सुबह की पूजा का उत्तम मुहूर्त : सुबह 06:00 बजे से सुबह 08:30 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:22 बजे से शाम 07:42 बजे तक।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बन रहे 2 शुभ योग

इस साल वट पूर्णिमा पर शुक्ल योग और ब्रह्म योग का अद्भुत संयोग बन रहा है:

शुक्ल योग : सुबह से लेकर दोपहर 02:36 बजे तक रहेगा।

ब्रह्म योग : दोपहर 02:36 बजे के बाद शुरू होगा।

इन दोनों ही योगों में की गई पूजा और धार्मिक कार्य अखंड फल देने वाले माने जाते हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार सुबह या दोपहर के शुभ मुहूर्त में वट पूर्णिमा और बरगद के पेड़ की पूजा के साथ ही सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण कर सकती हैं।

जून पूर्णिमा और स्ट्रॉबेरी मून का कनेक्शन

ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा सिर्फ भारत में ही विशेष स्थान नहीं रखती है। उत्तरी अमेरिका में भी इसका खास स्थान है। इस माह की पूर्णिमा के चांद को स्ट्रॉबेरी मून कहा जाता है। हालांकि, इस चांद का रंग गुलाबी नहीं होता है। दरअसल, इस समय उत्तर अमेरिका में स्ट्रॉबेरी का कम अवधि का मौसम होता है और के स्थानीय लोग स्ट्रॉबेरी फसल की कटाई करते हैं। इसलिए जून की पूर्णिमा के चांद को यहां के साथ-साथ कई पश्चिमी देशों में स्ट्रॉबेरी मून कहा जाता है।

29 जून को दिखेगा स्ट्रॉबेरी मून

स्ट्रॉबेरी मून का नाम उसके रंग की वजह से नहीं रखा गया है। यह शब्द उत्तर-पूर्वी उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी एल्गोंक्वियन लोगों से आया है। नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह नाम एक मौसमी निशान के तौर पर काम करता था, जो जंगली स्ट्रॉबेरी के पकने और इकट्ठा करने के लिए तैयार होने का संकेत देता था। वहीं, पूरे यूरोप में, जून के पूरे चांद को हनी मून, मीड मून और रोज मून के नाम से भी जाना जाता है, जो मौसमी रीति-रिवाजों और खेती के चक्र को दिखाता है।

स्ट्रॉबेरी मून के साथ माइक्रो मून भी होगा जून की पूर्णिमा को

भारत में, स्ट्रॉबेरी मून और माइक्रोमून का सबसे खूबसूरत नजारा सुबह 5:26 बजे दिखेगा। इसे 28 और 29 जून की रात को देखा जा सकता है। यह पूरा चांद एक माइक्रोमून भी है। इसका मतलब है कि यह चांद अपनी ऑर्बिट में पृथ्वी से सबसे दूर होगा। इसलिए यह आम पूर्णिमा के चंद्रमा से थोड़ा छोटा और धुंधला दिखाई देगा।

Sawan 2026: अभी से कर लें नोट भगवान शिव का प्रिय माह सावन इस दिन से होगा शुरू, इस माह में आएंगे सावन के 4 सोमवार

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Sawan 2026: हिंदी कैलेंडर का पांचवा महीना सावन का होता है। मानसून जब पीक पर पहुंचता है, तब इस मौसम की शुरुआत होती है। चारों तरफ हरियाली और बोल बम के नारों की गूंज होती है। हिंदू धर्म में सावन का महीना आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बहुत अहम माना जाता है। माना जाता है कि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

सावन महीने के सोमवार विशेष महत्व रखते हैं। यूं तो पूरा सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन सोमवार के दिन शिवालयों में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। भोलेनाथ की भक्ति में लीन श्रद्धालु पूरे माह व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक गतिविधियां आयोजित करते हैं। ऐसे में सावन 2026 का इंतजार कर रहे शिव भक्तों के लिए अच्छी खबर है कि अब ये पवित्र महीना बहुत दूर नहीं है। आइए जानें ये कब से शुरू होगा और इसमें कितने सोमवार आएंगे।

कब से शुरू होगा सावन 2026

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव की सच्चे मन से की गई भक्ति भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत

सावन 2026 में चार सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं, जिससे भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के कई विशेष अवसर मिलेंगे। यदि आप भी सावन में व्रत, पूजा या जलाभिषेक करने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से इसकी तैयारी शुरू कर सकते हैं।

सावन 2026 के 4 सोमवार

सावन के दौरान सोमवार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र तथा धतूरा अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है। साल 2026 में सावन के कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

पहला सावन सोमवार : 3 अगस्त

दूसरा सावन सोमवार : 10 अगस्त

तीसरा सावन सोमवार : 17 अगस्त

चौथा सावन सोमवार : 24 अगस्त

4 मंगला गौरी व्रत

महिलाओं के लिए सावन में मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए इसे रखती हैं। अविवाहित कन्याएं यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से करती हैं। सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त को रखा जाएगा। इन दिनों माता गौरी की पूजा का विशेष विधान रहेगा।

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