अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के विरोधी गुट के संतों की प्रस्तावित बैठक को पुलिस द्वारा रोक दिए जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह बैठक रामायणम आश्रम में आयोजित होनी थी। संतों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने रामायणम आश्रम में ताला लगवा दिया और कुछ समय के लिए वहां मौजूद संतों को नजरबंद रखा। इसके बाद संतों ने जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।

 

प्रदर्शन के दौरान संतों ने 'चंदा चोरों अयोध्या छोड़ो' के नारे लगाए। संतों ने आरोप लगाया कि चढ़ावा प्रकरण में जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोधी गुट के संतों ने चेतावनी दी कि जल्द ही एक लाख संतों को लेकर अयोध्या में बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। संतों ने वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर संतों का नया ट्रस्ट बनाए जाने की मांग भी उठाई। 

 

महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि राम मंदिर में चंदा व चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिसे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीजी ने अयोध्या मे कई बार कही है कि दूध का दूध व पानी का पानी हो तो वहीं होना चाहिए, महंत दिलीप त्यागी ने कहा की राम मंदिर मे चढ़ावा चोरी से अयोध्या की गरिमा – महिमा की वैश्विक स्तर पऱ बदनामी हुई है जिसका कोई निराकरण नहीं हुआ।

उन्होंने  कहा कि हमारा केंद्र व प्रदेश की सरकार से मांग है कि SIT की जांच व उससे इनको क्लीन चिट मिलने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बनाने का आदेश सर्वोच्च न्यायलय ने दिया था और भारत सरकार के निर्देश पऱ ट्रस्ट बना है इसलिए SIT कुछ नहीं कर सकती है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रिटायर्ड जजों की एक कमेटी बनाई जाए और उनके द्वारा जांच कराई जाए।

साथ ही इस ट्रस्ट को भंग किया जाए। संत प्रकाशनन्द उर्फ कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि आज हमारे संत समाज की शांतिपूर्वक चलने वाली संगोष्ठी थी। इसके माध्यम से हम ज्ञापन प्रशासन को सौपते परन्तु जिस प्रकार से यह कार्य हुआ है। चंदा चोरों को बचाया जा रहा है। इसमें जिला प्रशासन भी शामिल है। इसीलिए हम लोगों को रोका जा रहा है। ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि हम चुप नहीं बैठेंगे।

इसकी आवाज पूरे देश के संतों के साथ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर मे हुई चोरी के अभी तक केवल छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं। बड़ी मछली बाहर जिनका नाम दुनिया जानती है, संतों की बैठक मे शामिल होने आए संत प्रकाशनन्द ने कहा की हम लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपने कार्यक्रम को आयोजित किया था। इसके पूर्व भी हम लोगों ने कई जगह व दिल्ली में शांतिपूर्वक बैठक की थी।

कोई दिक्कत किसी को नहीं हुई किन्तु श्रीराम की नगरी अयोध्या मे उनके मंदिर के चढ़ावे की चोरी को लेकर होने वाली साधु-संतों की बैठक को रोका जा रहा है, हमें धमकियां दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब हमें लगता है कि चढ़ावा चोरी का लाभ स्थानीय प्रशासन को भी मिला है इसीलिए हम लोगो को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे संतों को बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम लोग अयोध्या एक लाख संतो के साथ आएंगे और जन-जन आंदोलन होगा। देखते हैं कि कितने लोगों  को जेल भेजा जाता है। हम लोग मरेंगे तो राम के लिए जिएंगे तो राम के लिए।

अपनी छापेमारी से देशभर में फेमस हो गए FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे कितना पढ़े-लिखे हैं? जानिए इनके IAS बनने की पूरी कहानी

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के एक अधिकारी हैं, जिनका नाम आजकल पूरे देश की मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। ये महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे हैं। खबरों में इन्हें ‘आईएएस सिंघम’ और ‘एफडीए का टीएन शेषन’ आदि नामों से संबोधित किया जा रहा है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर के तौर पर कार्यरत हैं। राज्य में फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर इनकी कड़ी कार्रवाई ने हर अमले के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। मुंढे ने तय नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी प्रतिष्ठानों के खिलाफ इंस्पेक्शन और कार्रवाई का आदेश दिया है।

मुंढे के पद से ज्यादा उनके तौर तरीके लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक निडर और बेबाक अधिकारी अगर अपनी पहुंच और अधिकारों का इस्तेमाल सही तरीके से करने लगता है, तो वह बड़ी से बड़ी तस्वीर को भी आसानी से बदल सकता है। मुंढे ने सिविल सर्विस में दो दशक से ज्यादा समय बिताया है, इस दौरान उन्होंने कड़े प्रशासनिक फैसले लिए और कहा जाता है कि 20 साल की सेवा में उनका लगभग 25 बार ट्रांसफर हुआ है।

कौन हैं आईएएस ऑफिसर तुकाराम मुंढे?

3 जून, 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में जन्मे तुकाराम मुंढे ने अपनी पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से शुरू की। एक गांव के स्कूल से भारतीय प्रशासनिक सेवा के सीनियर रैंक तक के उनके सफर ने उनके करियर को खास बना दिया है। बीड में अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद, मुंढे उच्च शिक्षा के लिए औरंगाबाद चले गए। उन्होंने हिस्ट्री में बैचलर डिग्री पूरी की और बाद में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पढ़ाई का सफर आखिरकार उन्हें यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक ले गया, जिसे उन्होंने 2004 में 20 की शानदार ऑल इंडिया रैंक के साथ पास किया।

2005 बैच के आईएएस अधिकारी मुंढे

मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के ऑफिसर के तौर पर इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हुए। 2011 में, मुंढे ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से क्राइसिस, इमरजेंसी और डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में कई मुश्किल प्रशासनिक काम संभाले हैं, जिससे उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी है जो लंबी सोच-विचार के बजाय एक्शन लेना पसंद करते हैं।

तुकाराम मुंढे अब खबरों में क्यों हैं?

मई 2026 में मुंढे को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन का कमिश्नर बनाया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोस्टिंग उनके 21 साल से ज्यादा के करियर में उनका 25वां ट्रांसफर था। चार्ज संभालने के बाद से, उन्होंने फूड सेफ्टी नियमों के पालन की जांच के लिए रेस्टोरेंट, फूड आउटलेट, वेयरहाउस और दूसरी जगहों का इंस्पेक्शन बढ़ा दिया है। यह कैंपेन तेजी से बढ़ रहे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले बिजनेस तक भी बढ़ा है। एफडीए की तीखी कार्रवाई की वजह से खाद्य सुरक्षा आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

पानी बचाने से लेकर फूड सेफ्टी तक

मुंढे की सख्त प्रशासक की इमेज उनके मौजूदा एफडीए कार्यकाल से पहले की है। सोलापुर कलेक्टर के तौर पर अपने समय के दौरान, वे पानी बचाने की कोशिशों और गांवों की पानी के टैंकरों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों से जुड़े। काम करने के उनके तौर-तरीकों और समस्या के पूरे समाधान पर फोकस ने उन्हें महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी से बाहर पहचान दिलाई। उनके करियर में उन्हें बार-बार ऐसे पद मिले हैं जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा और विवाद भी। औचक निरीक्षण, एनफोर्समेंट ड्राइव और ग्राउंड पर साफ मौजूदगी ने उनकी इमेज को एक ऐसे ऑफिसर के तौर पर बनाया है जो मुश्किल फैसले लेने से पीछे नहीं हटते।

NEET PG Admit Card 2026: आज जारी होगा नीट पीजी का एडमिट कार्ड, 30 अगस्त को परीक्षा के लिए कर लें तैयारी

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

parole to gurmit ram rahim

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मिल गई है। यौन शोषण के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को 17वीं बार पैरोल पर रिहा किया गया है। वह जेल से बाहर निकलकर सीधे सिरसा जाएगा। ALSO READ: बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

 

2 साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा

गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2 साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया था। इसके तीन दिन बाद 28 अगस्त 2017 को अदालत ने दोनों मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इस तरह उसे कुल 20 साल की कारावास की सजा मिली। राम रहीम इसके अलावा एक पूर्व डेरा प्रबंधक और एक पत्रकार की हत्या के मामलों में भी दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने इन दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया।
 

पैरोल मिलने की अनिवार्य शर्तें

पैरोल मिलने की सबसे बड़ी शर्त जेल के अंदर कैदी का आचरण है। यह भी देखा जाता है कि क्या उसने जेल के नियमों का पालन किया? राम रहीम को अक्सर उसके अच्छे व्यवहार के आधार पर ही पैरोल की रिपोर्ट मिलती है। आमतौर पर पैरोल तभी मिलती है जब कैदी अपनी सजा का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 1 या 3 साल) काट चुका हो। स्थानीय पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट ली जाती है कि क्या उस कैदी के बाहर आने से इलाके में 'लॉ एंड ऑर्डर' (कानून-व्यवस्था) बिगड़ने का खतरा तो नहीं है। कैदी को भारी सुरक्षा राशि (Bail Bond) जमा करनी पड़ती है और दो 'जमानतदारों' की गारंटी देनी होती है कि वह समय पर वापस आएगा। 

 

गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पहले भी इस पर आपत्ति जताई है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है। 

 

कब कब जेल से बाहर आया राम रहीम?

2020 (अक्टूबर) : 1 दिन

2021 (मई) : 1 दिन

2022 (फरवरी) : 21 दिन

2022 (जून) : 30 दिन

2022 (अक्टूबर) : 40 दिन

2023 (जनवरी) : 40 दिन

2023 (जुलाई) : 30 दिन

2023 (नवंबर) : 21 दिन

2024 (जनवरी) : 50 दिन

2024 (अगस्त) : 21 दिन

2024 (अक्टूबर) : 20 दिन

2025 (जनवरी) : 21 दिन

2025 (मई) : 20 दिन

2025 (सितंबर) : 21 दिन

2026 (फरवरी) : 20 दिन

2026 (मई) : 30 दिन

2026 (अगस्त) : 21 दिन

‘ईरान ने मेरे बेटे की हत्या की कोशिश की…’; नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा, बोले- सुरक्षा हटती तो हमलावर सफल हो जाते

Benjamin Netanyahu: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर एक बेहद ही सनसनीखेज दावा किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि उसे निशाना बनाकर हत्या की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद इजरायल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेतन्याहू ने सोमवार (24 अगस्त) को एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे परिवार को निशाना बनाया।” उन्होंने यह बात इजरायली चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही।

इजरायली टेलीविजन चैनल चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे को निशाना बनाया था। उन्होंने दावा किया कि यह केवल धमकी नहीं थी। बल्कि उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की गई थी। नेतन्याहू ने इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे एक बेटे को निशाना बनाया। ईरान ने मेरे एक बेटे की हत्या करने की कोशिश की। उसने उसकी हत्या की साजिश रची और उसे मारने की कोशिश की।”

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी किया बड़ा दावा

नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उनके बेटे को निशाना बनाने की जानकारी किसी खुफिया सूचना के लीक होने के कारण सामने आई थी। इसके जवाब में उन्होंने दोबारा स्पष्ट तौर पर कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की कोशिश की थी। इसके बाद नेतन्याहू ने अपने परिवार को दी जा रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार की सुरक्षा किसी दिखावे या विशेष सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक खतरे को देखते हुए जरूरी है। नेतन्याहू ने कहा कि अगर यह सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, तो उनके बेटे को निशाना बनाने वाले लोग अपने मकसद में सफल हो सकते थे। उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देना मौजूदा परिस्थितियों में एक आवश्यक कदम है।

किस बेटे को बनाया गया निशाना?

नेतन्याहू ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित हत्या की कोशिश में उनके किस बेटे को निशाना बनाया गया था। उनके दो बेटे याइर नेतन्याहू और अवनेर नेतन्याहू हैं। इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कथित ईरानी साजिश का निशाना याइर थे या अवनेर। नेतन्याहू ने इंटरव्यू के दौरान इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी शेयर नहीं की।

परिवार की सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है

नेतन्याहू का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पहले ही अतिरिक्त कदम उठाए जा चुके हैं। जुलाई में शिन बेट मामलों से संबंधित मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू और उनके दोनों बेटों याइर तथा अवनेर के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी थी। यह फैसला प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच लिया गया था। हालांकि, उस समय सुरक्षा बढ़ाने के पीछे कथित तौर पर किस विशेष खतरे का आकलन किया गया था, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

लंबे समय से सुरक्षा मामलों पर गोपनीयता

नेतन्याहू का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सुरक्षा से जुड़े कई मामलों को लेकर लंबे समय से सख्त गोपनीयता और प्रतिबंध लागू रहे हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी को आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता। ऐसे में नेतन्याहू द्वारा खुद अपने एक बेटे को ईरान की कथित हत्या की कोशिश का निशाना बताए जाने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें- Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

हालांकि, उनके बयान में कथित हमले की तारीख, स्थान, हमले के तरीके या उसे विफल करने वाली सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बारे में कोई डिटेल्स जानकारी नहीं दी गई। नेतन्याहू के इस दावे से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इजरायल और ईरान के बीच जारी गंभीर तनाव अब प्रधानमंत्री के परिवार तक कितनी दूर पहुंच चुका है। हालांकि, कथित हत्या की कोशिश से जुड़े विस्तृत तथ्य और खुफिया जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

jharkhand student protest

युवा किसी भी राष्ट्र का वर्तमान और भविष्य होते हैं। किसी देश का युवा उसके भविष्य का निर्माता होता है। विश्व का इतिहास बताता है कि हर दौर में युवा वर्ग ने समाज को दिशा देने और व्यवस्था को चुनौती देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। जब कहीं भी सामाजिक बदलाव की कोई हवा चलती है उसमें युवा वर्ग हमेशा ही आगे रहता है। वह सत्ता के एकाधिकार, सामाजिक विषमता और नीतिगत जड़ता के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिरोध दर्ज करता है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज में असमानता, अन्याय या दिशाहीनता बढ़ती है, तब-तब युवाओं की ऊर्जा ने नए आंदोलनों की नींव रखी है। युवा आंदोलनों ने समाज को एक नई दिशा देने का काम भी किया है।

 

किसी भी देश की तरुणाई जिस ओर चलती है, जमाना उसी तरफ मुड़ जाता है। इस वर्ग में वह शक्ति होती है कि वह हवा का रूख मोड़ सकता है। ऐसे में इस वर्ग के साथ सतत सकारात्मक संवाद बहुत आवश्यक हो जाता है। युवा वर्ग के सवालों, उनकी समस्याओं और विचारों पर मंथन बहुत आवश्यक है। अगर उसके मन में कोई बात है तो उसे सुनना बहुत जरूरी हो जाता है। कहते भी हैं कि किसी भी समूह के भीतर अगर किसी बात को लेकर कोई सवाल या दबाव है तो उसे तुरंत राहत देना जरूरी है। उसके भीतर के तनाव या दबाव को समाप्त करना जरूरी होता है। व्यवस्था और नेतृत्व उससे संवाद कर उसे सामान्य कर सकते हैं।

 

किसी भी समूह के साथ अगर सकारात्मक संवाद किया जाए तो परिस्थितियों को परिवर्तित किया जा सकता है। दुनियाभर में अलग-अलग ट्रेंडस पर नजर रखने वाली कंपनी स्टैटिस्टा के आंकड़े बताते हैं कि बीते दो बरसों में दुनियाभर के लगभग 10 देशों में युवाओं के प्रदर्शन हुए हैं। कुछ सालों पहले सोशल मीडिया के प्रभाव से ही अरब जगत के कई देशों में अनेकों आंदोलन हुए। वहां तख्तापलट भी हुए। युवाओं के इन आंदोलनों के कारण अलग-अलग जगहों पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन उनमें कुछ बातें, कुछ मांगें अपने मूलस्वभाव में लगभग एक जैसी लगती हैं। और वो हैं, रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा, भ्रष्टाचारमुक्त शासन व्यवस्था। जब उन्हें लगता है कि उनकी आवाज सुनी ही नहीं जा रही है तो वे सड़कों पर आंदोलित होकर उतर रहे हैं।

 

हाल ही में जेनजी प्रोटेस्ट के बाद आरएसएस प्रमुख ने एक संवाद कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कहा कि जेन-जी की जो भी शिकायतें थीं, वो जायज थीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है और संवाद से एक सहमति का निर्माण होता है। सीजेपी के नेतृत्व वाला वह आंदोलन दिल्ली में तो खत्म हो गया। दूसरी ओर, रांची का प्रदर्शन भी सरकार के आश्वासन के बाद फिलहाल समाप्त हो गया। दरअसल, छात्र अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं। 

 

भारत में दुनिया की बहुत बड़ी युवा आबादी है। देश में युवाओं के आंदोलनों का इतिहास भी अत्यंत समृद्ध रहा है। आजादी के आंदोलन के दौरान भी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नायकों ने जनमानस को भी बड़े पैमाने पर आंदोलित किया। उनके विचार युवा चेतना की प्रमुख प्रेरणा बने। आजाद भारत में भी युवाओं ने समाज में अपने आंदोलनो से सुधार की मांगे रखीं। 70 के दशक में गुजरात का नवनिर्माण वाला छात्र आंदोलन हो या फिर 1974 में हुआ जेपी आंदोलन, सभी में नेतृत्व करने वाला आम छात्र अपने आंदोलन से  सत्ता में सुधार, उसमें परिवर्तन और व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग करता दिखता है।

 

पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम ने कहा था कि युवा ही वह शक्ति है जो दुनिया को बदल सकती है। आज युवा दुनियाभर में व्यवस्थाओं को बदलने की बात पर सड़कों पर उतर रहा है। आज के युवाओं की बेहतर बात यह है कि उनके पास ग्लोबल इन्फरमेशन का नेटवर्क है। वे हर क्षण सूचनाओं से अपडेट होते रहते हैं। मौजूदा वक्त सूचना क्रांति का है। आज का युवा हर तरह के स्मार्ट गैजेट्स और डिजिटल प्लेटफामर्स से जुड़ा हुआ है। पल-पल की जानकारी उसे स्क्रीन पर मिलती रहती है। समाज में भी व्यापक स्तर पर इस तकनीक के चलते बदलाव आए हैं।

 

आमजन अपनी राय इन डिजिटल माध्यमों में खुलकर रखते हैं। ऐसे  में युवा भी सत्ता से सवाल हो या उसके किसी काम की तारीफ करनी हो, वे खुलकर डिजिटल प्लेटफार्म पर अपनी अभिव्यक्ति देते हैं। अगर किसी तरह उनकी आवाज को दबाने का प्रयास हो या युवाओं को लगता है कि उनका दमन हो रहा है तो वे डरने के बजाय सोशल मीडिया पर धूम मचा देते हैं। रील्स, मीम्स, व्यंग्य चित्रों और गीतों के माध्यम से वे जनता और सरकार के बीच अपनी बात रखते हैं। डिजिटल सूचना के माध्यम से त्वरित प्रसार बिना किसी औपचारिक केंद्रीय नेता के भी आंदोलन बहुत तेजी से बड़े आकार में सामने आ रहे हैं। शिक्षा, रोजगार या पर्यावरण जैसे स्थानीय मुद्दे तुरंत वैश्विक संवाद का हिस्सा बन रहे हैं। 

 

अब जहां आधुनिक युवा आंदोलन लचीले और तात्कालिक प्रभाव वाले दिख रहे हैं, वहीं उनके सामने कुछ गंभीर चुनौतियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। इस दौर में साफ दिखता है कि कई आंदोलन सोशल मीडिया पर जितनी तेजी से उभार ले रहे हैं,  उतनी ही तेजी से वे बिखर भी जाते हैं। जानकार मानते हैं कि आभासी मीडिया पर विमर्श से उठ खड़े होने वाले आंदोलनों में ठोस नीतिगत बदलाव के लिए जिस तरह की निरंतरता और वैचारिक गहराई की आवश्यक होती है, उसकी अक्सर इनमें कमी पाई जाती है।

यदि युवा आंदोलनों की ऊर्जा को सकारात्मकता के साथ जोड़ा जा सके, उसमें गंभीरता, ठहराव और वैचारिक परिपक्वता, संवैधानिक मूल्यों की समझ के दायरे में रहकर अभिव्यक्ति करने जैसी बातें जुड़ सकें तो युवाओं की आवाज सत्ता को जवाबदेह बना सकती। युवा अपनी सकारात्मकता के साथ राष्ट्र के समावेशी और न्यायपूर्ण भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इसके लिए उनसे सतत प्रभावी संवाद आवश्यक है।

₹4 लाख के एजुकेशन लोन पर बड़ा अपडेट! जानिए बिहार के छात्रों के लिए क्या बोले सीएम सम्राट चौधरी

Bihar Student Credit Card Scheme: बिहार में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देख रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। बीते कुछ दिनों से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर चल रही तरह-तरह की अफवाहों और संशय की स्थिति पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दी जाने वाली ₹4 लाख तक की आर्थिक सहायता पहले की तरह ही जारी रहेगी। सीएम ने कहा है कि राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और पढ़ाई के रास्ते में पैसों की तंगी को कभी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।

₹4 लाख तक का एजुकेशन लोन रहेगा बरकरार

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण दिया जाता है। छात्र इस राशि का उपयोग अपनी फीस, किताबों और रहने-खाने से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए आसानी से कर सकते हैं।

पिछले कुछ समय से लोन की सीमा घटाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर विराम लगाते हुए सरकार ने अभिभावकों और छात्रों को चिंता न करने की सलाह दी है।

शिक्षा ऋण का दायरा घटा नहीं, बल्कि और बढ़ा

शिक्षा विभाग ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि योजना को सीमित करने की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। वास्तव में छात्रों के लिए उच्च शिक्षा पाना अब और भी आसान हो गया है।

अब स्टूडेंट अपनी जरूरत और पात्रता के आधार पर बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम, बैंकों और ‘पीएम विद्यालक्ष्मी योजना’ के जरिए भी लोन ले सकते हैं। सरकार का मकसद हर जरूरतमंद छात्र तक संस्थागत वित्तीय मदद पहुंचाना है, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली युवा पैसों के अभाव में पढ़ाई न छोड़े।

बिहार सरकार के इस स्पष्टीकरण से हजारों छात्रों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। अगर आप भी बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ₹4 लाख तक के लोन का लाभ उठाना चाहते हैं, तो बिना किसी हिचकिचाहट के आवेदन कर सकते हैं और अपने बेहतर करियर के सपने को पूरा कर सकते हैं।

20 साल बाद ‘जॉनी गद्दार’ की यादें होंगी ताजा, श्रीराम राघवन बना रहे हैं उसी अंदाज की नई थ्रिलर

मैचबॉक्स शॉट्स ने अपनी नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, मशहूर फिल्ममेकर श्रीराम राघवन उनके लिए कई नई कहानियों पर काम कर रहे हैं। इनमें एक अनटाइटल्ड थ्रिलर भी शामिल है, जिसका अंदाज उनकी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ जैसा होगा। साल 2027 में ‘जॉनी गद्दार’ की रिलीज को 20 साल पूरे होने वाले हैं।

फाउंडर संजय राउत्रे ने कहा, “श्रीराम ने मैचबॉक्स को उसकी पहली फिल्म और पहला सबक दिया था कि अगर किसी कहानी को पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ बताया जाए, तो उसे हमेशा अपना दर्शक मिल जाता है। ‘जॉनी गद्दार’ की 20वीं सालगिरह के साल उसी अंदाज की थ्रिलर विकसित करना हम दोनों के लिए एक तरह से घर वापसी जैसा है।”

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब नेटफ्लिक्स के लिए मैचबॉक्स शॉट्स की बनाई वॉर सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ दुनियाभर में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। नॉन-इंग्लिश कंटेंट की ग्लोबल रैंकिंग में यह सीरीज दूसरे नंबर पर है, जबकि भारत में नंबर एक पर बनी हुई है। यह लगातार दूसरी नेटफ्लिक्स सीरीज है, जिसे मैचबॉक्स ने बनाया और जिसने ग्लोबल चार्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है। इससे पहले ‘IC 814: द कंधार हाईजैक’ भी ग्लोबल स्तर पर नंबर दो पर डेब्यू कर चुकी है।

200 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट में बनी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ मैचबॉक्स शॉट्स की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। सीरीज के लिए काम कर रहे एयरबेस पर फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ शूटिंग की गई और करीब 450 लोगों की टीम ने बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में सेट पर काम किया।

हालांकि, कंपनी का सफर इतने बड़े स्तर से शुरू नहीं हुआ था। श्रीराम राघवन की ‘अंधाधुन’ मैचबॉक्स शॉट्स की पहली प्रोडक्शन थी। करीब 16 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया और 2018 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल रही। मैचबॉक्स के सफर में एक चीज लगातार बनी रही है—कहानी और कहानीकार पर भरोसा, साथ ही लागत पर नियंत्रण।

इसी सोच के बीच कंपनी ने अलग-अलग जॉनर और स्केल की कई परियोजनाएं की हैं, जिनमें ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’, ‘थ्री ऑफ अस’, ‘स्कूप’, ‘मेरी क्रिसमस’ और ‘खौफ’ जैसी फिल्में और सीरीज शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग तरह की कहानियों में निवेश करना शुरुआत में एक क्रिएटिव फैसला था, जो धीरे-धीरे बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदल गया। इससे कंपनी किसी एक तरह के दर्शक या किसी एक फॉर्मेट पर निर्भर नहीं रहती।

संजय राउत्रे के साथ पार्टनर्स सरिता पाटिल और दीक्षा राउत्रे भी कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। मैचबॉक्स का मानना है कि किसी प्रोजेक्ट की सफलता सिर्फ उसकी ओपनिंग से तय नहीं होती। सरिता पाटिल के मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या लोग सालों बाद भी किसी फिल्म को देख रहे हैं और दूसरों को उसकी सिफारिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, दर्शकों का ऐसा प्यार खरीदा या किसी रणनीति से हासिल नहीं किया जा सकता।

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की ग्लोबल सफलता के बाद जहां कंपनी अपनी स्ट्रीमिंग स्लेट का विस्तार कर रही है, वहीं थिएट्रिकल फिल्मों को लेकर भी उसकी प्रतिबद्धता कायम है। कंपनी का कहना है कि हर फॉर्मेट की अपनी अर्थव्यवस्था और अपनी ऑडियंस होती है और हर कहानी को उसी हिसाब से विकसित किया जाता है। कुछ कहानियां सिनेमाघर में अजनबियों से भरे अंधेरे हॉल में देखने के लिए होती हैं, जबकि कुछ घर के आराम में ज्यादा बेहतर अनुभव देती हैं। दोनों अनुभव कंपनी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मैचबॉक्स शॉट्स की नई स्लेट में श्रीराम राघवन के अलावा हंसल मेहता, वासन बाला और जस्मीत रीन जैसे फिल्ममेकर्स के साथ भी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी का विस्तार सिर्फ फिल्मों और सीरीज तक सीमित नहीं है। मैचबॉक्स ने ‘द गुरुग्राम स्कूल मर्डर’ और ‘द जॉनसन एंड जॉनसन फाइल्स’ समेत कई किताबों के अधिकार भी हासिल किए हैं। इसका उद्देश्य अपनी कहानियों पर ज्यादा नियंत्रण रखना और तैयार स्क्रिप्ट्स के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय खुद मजबूत आईपी तैयार करना है।

संजय राउत्रे ने कहा कि बाहर से देखने पर मैचबॉक्स की स्लेट भले ही अलग-अलग तरह की नजर आती हो, लेकिन अंदर से हर प्रोजेक्ट के पीछे एक ही सवाल होता है—क्या यह कहानी अस्तित्व में आने लायक है और क्या इसे ऐसी लागत में बनाया जा सकता है, जिसे दर्शक सही ठहरा सकें?

उनके मुताबिक, कम बजट में बनाई गई ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी शांत फिल्म कंपनी के लिए उतनी ही संतोषजनक हो सकती है, जितनी 200 करोड़ रुपये की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी बड़ी फिल्म। उनके शब्दों में, “फिल्म का बड़ा होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि उसका गणित सही हो।”

मैचबॉक्स शॉट्स खुद को एक बुटीक प्रोडक्शन हाउस के रूप में देखता है, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा इससे कहीं बड़ी है। कंपनी का लक्ष्य लंबे समय तक चलने वाले आईपी तैयार करना, क्रिएटर्स के साथ मजबूत और स्थायी साझेदारी बनाना और थिएट्रिकल, स्ट्रीमिंग के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट में भी काम करना है।

आखिरकार, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ एक और हिट फिल्म या सीरीज बनाना नहीं है। असली लक्ष्य यह साबित करना है कि अनुशासन और सही बिजनेस मॉडल के साथ क्वालिटी कंटेंट को लंबे समय तक सफल कारोबार में बदला जा सकता है।

Delhi Rains: दिल्ली-NCR में भारी बारिश से हवाई सेवा प्रभावित! 250 से ज्यादा उड़ानें लेट, 15 फ्लाइट डायवर्ट

Delhi Rains: दिल्ली-NCR में सोमवार (24 अगस्त) को हुई मूसलाधार बारिश का असर सड़क ट्रैफिक के साथ-साथ हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर 250 से ज्यादा उड़ानें देरी से चल रही हैं। जबकि मौसम खराब होने के कारण 15 उड़ानों को दूसरे शहरों की ओर डायवर्ट करना पड़ा। डायवर्ट की गई उड़ानों में तीन इंटरनेशनल फ्लाइट भी शामिल हैं। इनमें से 12 उड़ानों को जयपुर, 2 को चंडीगढ़ और 1 उड़ान को लखनऊ भेजा गया। हालांकि, मौसम में सुधार के साथ दिन आगे बढ़ने पर उड़ान संचालन के सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।

भारी बारिश से दिल्ली में जलभराव और ट्रैफिक जाम

दिल्ली में सोमवार को हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कों पर पानी भरने से कई जगहों पर यातायात की रफ्तार धीमी रही और लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि कुछ अन्य इलाकों के लिए मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया।

एयरलाइंस ने यात्रियों को किया अलर्ट

मौसम की स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस ने यात्रियों को अपनी उड़ान का स्टेटस चेक करने की सलाह दी है। एयरलाइंस ने यह भी चेतावनी दी कि खराब मौसम का असर कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर भी पड़ सकता है। एयर इंडिया (Air India) ने यात्रियों को बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों का संचालन प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हो सकता है। इंडिगो (IndiGo) ने कहा कि दिल्ली के ऊपर खराब मौसम के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है। एयरलाइन ने यात्रियों से धैर्य रखने और उड़ान की स्थिति पर नजर बनाए रखने की अपील की।

स्पाइसजेट (SpiceJet) ने भी यात्रियों को आगाह करते हुए कहा कि दिल्ली में खराब मौसम के कारण सभी आने-जाने वाली उड़ानें और उनसे जुड़ी कनेक्टिंग उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। यात्रियों से एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचने को कहा गया। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने कहा कि दिल्ली में गंभीर मौसम की स्थिति के कारण उसके नेटवर्क की कुछ उड़ानें प्रभावित हुई हैं और यात्रियों को हुई असुविधा के लिए उसने खेद जताया।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों को एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जरूर चेक करने, अतिरिक्त यात्रा समय लेकर चलने और कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्रियों को एयरलाइन के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मध्य दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, नई दिल्ली, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कुछ स्थानों पर बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ भारी बारिश हुई। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शहर के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की शिकायत की।

‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी

दिल्ली में भारी बारिश के बाद मौसम विभाग ने रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों में बादलों की गरज और बिजली की चमक के साथ तेज से मध्यम बारिश और 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे के बीच दिल्ली में सबसे अधिक 28 मिलीमीटर (मिमी) बारिश छतरपुर में दर्ज की गई। इसके बाद लोधी रोड में 24.6 मिमी और पीतमपुरा में 18.5 मिमी बारिश हुई।

इस दौरान रिज में पांच मिमी, मयूर विहार में 1.5 मिमी, सफदरजंग में एक मिमी और आयानगर में 0.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलीं। न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन, बुराड़ी, सीआर पार्क और अलकनंदा के आसपास जलभराव की सूचना मिली। यात्रियों ने भी सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम और जलभराव वाले मार्गों की जानकारी शेयर की।

ये भी पढे़ं- Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

दिल्ली में सोमवार को शहर के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 1.4 डिग्री अधिक है। रिज में सबसे कम न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

Tukaram Mundhe News मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच एक नाम चर्चा में है तुकाराम मुंढे…। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के तौर पर 51 वर्षीय मुंढे ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कई चर्चित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत FDA ने राज्य भर में सैकड़ों होटलों, रेस्तरां और ढाबों एक्शन लिया था।

मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए हैं। मई में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद से उनकी टीम 3,000 से ज्यादा छापे और निरीक्षण कर चुकी है।

इन कार्रवाइयों में बड़े ब्रांडों के साथ-साथ क्रिकेट क्लब, होटल, मशहूर रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। मुंढे का साफ संदेश है कि जो भी खाद्य कारोबारी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

जज ने पूछा- कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई?

मुंढे की कार्रवाई तब और चर्चा में आ गई जब मुंबई की एक अदालत के जज ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य विभाग निजी दुकानों के खिलाफ ही सख्ती कर रहा है। क्या अदालत की कैंटीनों की भी जांच की गई है? मुंढे की टीम ने इस सवाल का जवाब घंटों के भीतर कार्रवाई से दिया।

अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ ऐसी कैंटीनों को बंद कराया जो कथित तौर पर बिना लाइसेंस चल रही थीं। इस घटना ने यह संदेश दिया कि विभाग बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी या संस्थागत परिसरों में चलने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रख रहा है।

हर दिन वायरल हो रही छापेमारी की तस्वीरें

मुंढे की कार्रवाई की सबसे खास बात उसका सार्वजनिक असर है। छापों के बाद खाद्य विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में कई जगहों पर गंदी दीवारें, कॉकरोच, चूहे और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिखाई दी। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से खराब साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता को यह कहकर सामान्य मान लिया गया था कि भारत में ऐसा होता है।

अब मुंढे की कार्रवाई से लोगों को उम्मीद दिखाई दे रही है कि खाद्य सुरक्षा के नियम वास्तव में लागू किए जा सकते हैं। कंज्यूमर कंसल्टिंग फर्म ‘The Knowledge Company’ के पार्टनर अंकुर बिसेन के मुताबिक, लोगों में लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा है। ऐसे में मुंढे की कार्रवाई ने उसे आवाज दी है।

खाने में रंग से लेकर तेल बदलने तक, दुकानदारों में डर

मुंबई में न्यूज एजेंसी Reuters ने 25 स्ट्रीट वेंडर्स और रेस्टोरेंट का दौरा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे की कार्रवाई का असर छोटे कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है। एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक अन्य दुकानदार ने अपना तलने वाला तेल दिन में तीन बार बदलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

मुंबई के फेमस वड़ा पाव पर भी कार्रवाई

मुंबई का मशहूर वड़ा पाव भी मुंढे की खाद्य सुरक्षा मुहिम से बच नहीं पाया है। जून में खाद्य विभाग ने वड़ा पाव समेत खाने की चीजों को पैक करने के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। मुंबई में लंबे समय से सड़क किनारे खाने की चीजों को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर साफ बटर पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 14 वर्षीय सुप्रिया वागले को अपने पसंदीदा वड़ा पाव की साफ बटर पेपर में पैकिंग पसंद आई। उसका कहना है कि इससे उसे राहत महसूस होती है और वह स्ट्रीट फूड को लेकर ज्यादा भरोसा कर पा रही है।

Domino’s और Pizza Hut के बाद McDonald’s पर भी एक्शन

मुंढे की टीम ने कई बड़े ब्रांडों के आउटलेट पर भी कार्रवाई की है। Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के परमिट निलंबित किए गए हैं। इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई। विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान वहां जिंदा कीट यानी कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना मिला।

हालांकि, Reuters के सवालों पर संबंधित तीनों कंपनियों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई। मुंढे की कार्रवाई केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। विभाग ने मुंबई के एक ब्रिटिश दौर के क्रिकेट क्लब, करीब 70 साल पुराने आइसक्रीम पार्लर और 110 साल पुराने पारसी डेयरी के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

कारोबारी बोले- सुधार का समय तो दिया जाए

मुंढे की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ कारोबारियों का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने और कमियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए खाद्य विभाग पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।

एक मामले में अदालत ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के अनुसार, संबंधित खाने के प्रतिष्ठान ने अपनी कमियों में सुधार कर लिया था, इसके बावजूद उसका परमिट निलंबित रखा गया था। मुंढे ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। जहां सुधार की गुंजाइश होती है, वहां विभाग सुधार करता है।

हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से हर साल भारत में खाद्य निरीक्षकों ने एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की है। इनमें करीब 20 प्रतिशत नमूने असुरक्षित, घटिया या सही लेबलिंग के बिना पाए गए। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 खाद्य कारोबार लाइसेंस रद्द किए गए हैं। ऐसे आंकड़ों के बीच मुंबई में मुंढे की कार्रवाई को लोग सिर्फ एक अधिकारी की सख्ती के रूप में नहीं। बल्कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।

21 साल की नौकरी में कई बार हुआ तबादला

तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के तौर पर करीब 21 साल के करियर में उनका कई बार तबादला हो चुका है। 2018 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका लगभग हर साल तबादला हो जाता है।

उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार करने और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं डरने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग में उनकी शैली एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल होती छापेमारी की तस्वीरों के कारण।

सेलिब्रिटी जैसी लोकप्रियता, लेकिन मुंढे बोले- मैं सेलिब्रिटी नहीं

मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंच गए। लोग उनसे हाथ मिलाने की कोशिश करते नजर आए। एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुंढे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।

ये भी पढ़ें- लो प्रेशर सिस्टम से अगले 4 दिन भारी! यूपी, बिहार, MP समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, मौसम को लेकर IMD ने दी ये चेतावनी

उन्होंने Reuters से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं कोई सेलिब्रिटी हूं। मैं सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हूं।” मुंढे का अभियान अब मुंबई से आगे भी चर्चा का विषय बन चुका है। उनके सामने चुनौती सिर्फ छापे मारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में साफ-सफाई और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक बना रहे।