दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदला:अब ‘नौरू’ नहीं ‘नाओएरो’ कहलाएगा; UN रिकॉर्ड्स में आज से नया नाम लागू

प्रशांत महासागर में बसे दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नौरू ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब यह देश आधिकारिक तौर पर ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ कहलाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी अपने रिकॉर्ड में नया नाम लागू कर दिया है। करीब 12 हजार आबादी वाले इस द्वीपीय देश का कहना है कि ‘नाओएरो’ उसका असली नाम है, जबकि ‘नौरू’ विदेशी लोगों की सुविधा के लिए प्रचलन में आया था। अब सरकार का मानना है कि समय आ गया है कि देश दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। नाम बदलने का यह फैसला सिर्फ औपचारिकता नहीं है। सरकार इसे अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने की पहल मान रही है। इसी सोच के तहत देश ने दशकों पुराना नाम छोड़कर अपनी पारंपरिक पहचान को आधिकारिक रूप से वापस अपना लिया है। आखिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? नाओएरो सरकार का कहना है कि ‘नौरू’ उसकी पसंद नहीं, बल्कि विदेशियों की सुविधा का नाम था। असली नाम हमेशा ‘नाओएरो’ ही रहा, लेकिन इसका उच्चारण आसान नहीं होने की वजह से दुनिया ने धीरे-धीरे उसे ‘नौरू’ कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यही नाम आधिकारिक पहचान भी बन गया। राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने जनवरी में संसद में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश दुनिया के सामने उसी नाम से जाना जाए, जिसे उसके अपने लोग पीढ़ियों से बोलते आए हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को उसकी वास्तविक पहचान लौटाने की कोशिश है। शादी में विवाद के बाद 10 साल तक गृहयुद्ध चला 19वीं सदी के आखिर तक नाउरू एक छोटा-सा द्वीप था, जहां 12 स्थानीय जनजातियां रहती थीं। यहां कोई आधुनिक सरकार या सेना नहीं थी। लोगों का जीवन मछली पकड़ने, नारियल की खेती और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर था। 1870 के दशक में यूरोपीय व्यापारी नाउरू पहुंचने लगे। वे यहां नारियल और दूसरे सामान का व्यापार करते थे। बदले में उन्होंने स्थानीय लोगों को शराब और बंदूकें बेचना शुरू कर दिया। इससे द्वीप का सामाजिक संतुलन बिगड़ने लगा। 1878 में एक शादी समारोह के दौरान रीति-रिवाज को लेकर बहस हुई। बहस के बीच एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर गोली चला दी, जिससे एक कबीलाई प्रमुख के बेटे की मौत हो गई। नाउरू की पारंपरिक संस्कृति में ऐसी हत्या का बदला लेना सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता था। यहीं से बदले का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे द्वीप के 12 कबीलों के बीच गृहयुद्ध में बदल गया। यह संघर्ष करीब 10 साल तक चला, जिसे नाउरू सिविल वॉर के नाम से जाना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए, कई गांव उजड़ गए और लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में इस हिंसा से प्रभावित हुआ। हालात इतने खराब हो गए कि आखिरकार 1888 में जर्मनी ने हस्तक्षेप कर द्वीप पर नियंत्रण स्थापित किया, हथियार जब्त किए और इस लंबे खूनी संघर्ष को समाप्त कराया। जर्मनी के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नौरू पर कब्जा किया 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होते ही हालात बदल गए। ऑस्ट्रेलियाई सेना ने बिना ज्यादा प्रतिरोध के नाओएरो पर कब्जा कर लिया। युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी हार गया और उसे अपने कई विदेशी उपनिवेश छोड़ने पड़े। करीब पांच दशक तक विदेशी सरकार के कब्जे में रहने के बाद नाओएरो को 31 जनवरी 1968 को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और यह एक संप्रभु गणराज्य बन गया। फॉस्फेट से बदली किस्मत, उसी वजह से कंगाल हुआ 1900 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक अल्बर्ट फुलर एलिस ने नाओएरो में फॉस्फेट के विशाल भंडार की खोज की। इसके छह साल बाद व्यावसायिक खनन शुरू हुआ। उस समय फॉस्फेट की दुनिया भर में जबरदस्त मांग थी, क्योंकि इसका इस्तेमाल खेती में खाद बनाने के लिए होता था। देखते ही देखते यह छोटा-सा द्वीप दुनिया के सबसे बड़े फॉस्फेट निर्यातकों में शामिल हो गया। 1968 में आजादी मिलने के बाद नाओएरो सरकार ने धीरे-धीरे फॉस्फेट उद्योग पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया। 1970 के दशक तक फॉस्फेट से होने वाली कमाई इतनी बढ़ गई कि यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाने लगा। प्रति व्यक्ति आय कई विकसित देशों के बराबर पहुंच गई। सरकार के पास इतना पैसा था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी कई सुविधाएं लोगों को लगभग मुफ्त मिलने लगीं। देश ने विदेशों में होटल, इमारतें और दूसरी संपत्तियां खरीदकर भी निवेश किया। लेकिन यह समृद्धि ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। लगातार खनन की वजह से फॉस्फेट के भंडार तेजी से खत्म होने लगे। आय का सबसे बड़ा स्रोत सूख गया और विदेशों में किए गए कई निवेश भी घाटे में चले गए। 1990 के दशक तक नाओएरो गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। जिस फॉस्फेट ने कभी इस छोटे से द्वीप को दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में पहुंचाया था, उसी के खत्म होने के बाद देश आर्थिक तंगी से जूझने लगा। आज भी देश उस दौर के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। अब जलवायु परिवर्तन से अस्तित्व पर खतरा आर्थिक चुनौतियों के बीच अब नाओएरो के सामने सबसे बड़ा संकट जलवायु परिवर्तन है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर इस द्वीपीय देश के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। कई वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दशकों में देश के कई हिस्से रहने लायक नहीं बचेंगे। 1993 के बाद से नाओएरो के आसपास समुद्र का जलस्तर हर साल औसतन करीब 5 मिलीमीटर बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से ज्यादा है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो इस सदी के अंत तक समुद्र का स्तर 20 से 57 सेंटीमीटर तक और बढ़ सकता है। समस्या सिर्फ समुद्र के बढ़ने की नहीं है। नाओएरो के पास लोगों को बसाने के लिए सुरक्षित जमीन भी बहुत कम बची है। दशकों तक फॉस्फेट खनन की वजह से द्वीप का करीब 80% अंदरूनी हिस्सा बंजर हो चुका है। ऐसे में आबादी का बड़ा हिस्सा समुद्र किनारे रहने को मजबूर है, जहां हर साल तटीय कटाव और ऊंची लहरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी खतरे से निपटने के लिए सरकार ने विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले नागरिकता देने की योजना शुरू की है। इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल लोगों और जरूरी बुनियादी ढांचे को सुरक्षित ऊंचे इलाकों में बसाने और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर किया जाएगा। चार साल पहले तुर्किये ने भी नाम बदला था नाओएरो का फैसला दुनिया में बढ़ रहे उस चलन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें देश अपनी स्थानीय भाषा और ऐतिहासिक पहचान को फिर से प्रमुखता दे रहे हैं। इससे पहले 2018 में अफ्रीकी देश स्वाजीलैंड ने अपना नाम बदलकर इस्वातिनी कर लिया था। वहीं 2022 में तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना आधिकारिक नाम तुर्किये करवा लिया था। नाओएरो का मानना है कि किसी देश की पहचान केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, संस्कृति और इतिहास से भी तय होती है। इसी सोच के साथ उसने दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान को आधिकारिक रूप से वापस स्थापित करने का फैसला किया है।

Delhi Lakshmi Yojana: हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500! 2 मिनट में समझें अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस

Delhi Laxmi Yojna Registration Process: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। योजना के तहत परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को ₹2,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी योजना का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जिस पर आवेदन मिलने भी शुरू हो चुके हैं। योजना शुरू होने के महज दो दिनों के भीतर ही 1.47 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। सरकार ने इसके लिए ₹5,100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आइए आपको बताते हैं इस योजना का लाभ उठाने के लिए कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है।

एक साथ खाते में नहीं आएंगे ₹2,500

दिल्ली लक्ष्मी योजना एक अनोखी हाइब्रिड कैश-ट्रांसफर और सेविंग्स स्कीम है, जिसमें महिलाओं के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:

विकल्प 1 (कैश + एफडी): ₹1,000 की राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जबकि शेष ₹1,500 की राशि को सरकार द्वारा ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) में निवेश किया जाएगा।

विकल्प 2 (पूरी एफडी): लाभार्थी चाहें तो पूरे ₹2,500 को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने का विकल्प चुन सकती हैं।

इस FD पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा, जिस पर राज्य सरकार सॉवरेन गारंटी प्रदान करेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदकों को ये शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • परिवार की प्रमुख: आवेदक महिला परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • पारिवारिक आय: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • दिल्ली का निवासी होना: आवेदक, उसका पति या उसके माता-पिता कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली के निवासी हों।
  • वोटर आईडी: आवेदक दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए।
  • बिजली खपत: पिछले 1 वर्ष के दौरान परिवार की वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

किन्हें नहीं मिलेगा लाभ?

  1. जो परिवार इनकम टैक्स पेयर हैं या जीएसटी (GST) फाइल करते हैं।
  2. परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या लोकल बॉडी में स्थायी/संविदा कर्मचारी है।
  3. जिनके पास चार पहिया वाहन है।
  4. आवेदक महिला के 3 से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
  5. आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

पहचान व पते का प्रमाण: वोटर आईडी कार्ड (दिल्ली) और आधार कार्ड।

पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर: आवेदक की स्पष्ट फोटो और सिग्नेचर।

सांसद या विधायक का सिफारिश पत्र: क्षेत्र के सांसद (MP) या विधायक (MLA) का हस्ताक्षरित सिफारिश/समर्थन पत्र।

पते/बिजली खपत का प्रमाण: बिजली का बिल या गैस कनेक्शन का बिल।

उम्र का प्रमाण (कोई भी एक): जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, वोटर आईडी या आधार कार्ड।

बैंक खाता विवरण: डीबीटी के माध्यम से राशि प्राप्त करने के लिए बैंक पासबुक की कॉपी।

ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

पात्र महिलाएं घर बैठे नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके रजिस्ट्रेशन कर सकती हैं:

स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट https://dly.delhi.gov.in पर जाएं और ‘Apply for Scheme’ के बाद ‘Register Now’ पर क्लिक करें।

स्टेप 2: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और बेसिक विवरण दर्ज करें।

स्टेप 3: परिवार के सभी सदस्यों का ब्योरा सही-सही भरें।

स्टेप 4: पैसे ट्रांसफर के लिए अपना चालू बैंक खाता दर्ज करें।

स्टेप 5: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।

स्टेप 6: फॉर्म का प्रीव्यू ध्यान से जांचें और फाइनल सबमिट करें।

स्टेप 7: क्षेत्रीय MP या MLA द्वारा हस्ताक्षरित अनुशंसा की प्रति अपलोड करें।

स्टेप 8: आवेदन पूरा होने के बाद पावती रसीद डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

भारत का बॉर्डर रेल प्रोजेक्ट! चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर 45000 करोड़ खर्च कर बिछेगा रेलवे का जाल

Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।

इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल

रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।

आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।

संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां

सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।

नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।

हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।

पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।

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चीन की ओर से भी जारी है निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।

Share Market New Timing: एक-दो नहीं, तीन क्लोजिंग टाइम; आज 3 अगस्त से बदल रही पूरी ट्रेडिंग

Share Market New Timing: आज तीन अगस्त है और आज से शेयर मार्केट की टाइमिंग पूरी तरह से बदल रही है। अब शाम 03:30 PM पर ही इक्विटी मार्केट में शेयरों का लेन-देन बंद नहीं होगा बल्कि 10 मिनट और मिलेंगे। हालांकि यह सुविधा सभी स्टॉक्स के लिए नहीं होगी। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मार्केट की एफिसिएंसी और ट्रांसपैरेंसी बढ़ाने और लिक्विडिटी को बेहतर करने के साथ-साथ भारतीय शेयर मार्केट को वैश्विक मानकों के हिसाब से बनाने के लिए नया ट्रेडिंग फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत एफएंडओ (F&O) डेरिवेटिव्स सेगमेंट का समय बढ़ाकर 3:40 PM तक कर दिया गया है। हालांकि मॉर्निंग टाइम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस नए बदलाव से निवेशकों से लेकर ट्रे़डर्स तक सभी पर असर पड़ेगा।

Share Market New Timing: क्या हुआ है बदलाव

नए नियमों के तहत सेबी ने F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट के ट्रेडिंग टाइम को 10 मिनट के लिए बढ़ा दिया है। स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ सेगमेंट में अब सुबह 9:15 AM से 3:40 PM तक ट्रेडिंग की जा सकेगी। हालांकि जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट में नहीं हैं, उनकी ट्रेडिंग का समय पहले की तरह ही रहेगा और उनका लेन-देन 3:30 PM तक ही हो सकेगा। नए नियमों के तहत F&O वाली कंपनियों के शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस सिर्फ आखिरी 30 मिनट के औसत भाव से तय नहीं होगा, बल्कि एक नीलामी प्रक्रिया के जरिए तय होगा।

अब ये है नियम

मार्केट में सबसे बड़ा बदलाव तो ये है कि अब एक नहीं बल्कि तीन क्लोजिंग टाइम होगा।

जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट से बाहर हैं, उनकी सामान्य ट्रे़डिंग 03:30 तक होगी। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

F&O स्टॉक्स (कैश मार्केट) 03:15 PM तक जारी रहेगी और उसके बाद 03:35 PM तक CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) चलेगा।

स्टॉक और इंडेक्स एफएंडओ ट्रे़डिंग 03:40 PM तक चालू रहेगी।

क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए क्यों पड़ी CAS की जरूरत

ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के मुताबिक किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस और उसका आखरी ट्रेड प्राइस (LTP) एक नहीं होता। मान लीजिए एक शेयर पूरे दिन ₹1,000 से ₹1,010 के बीच ट्रेड हो रहा था लेकिन 3:29 PM पर किसी ने जल्दबाजी में 10 शेयर ₹980 में बेच दिए। अगर ₹980 को ही क्लोजिंग प्राइस मान लिया जाए, तो यह उस शेयर की असली वैल्यू नहीं दिखाएगा। अब तक इससे बचने के लिए VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस) मेथड का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब आज 3 अगस्त 2026 से सेबी इसे और ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लाया है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Persistent Systems Share Price: Q1 नतीजों के बाद IT कंपनी का शेयर 4% तक फिसला, HSBC को आगे और गिरावट की आशंका

सोमवार, 3 अगस्त को IT कंपनी Persistent Systems Ltd. के शेयरों में दिन में 4 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। बीएसई पर शेयर 5319.75 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मुनाफा बढ़ने के बावजूद शेयर में बिकवाली का दबाव है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 13.67 प्रतिशत बढ़कर 483.04 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 424.93 करोड़ रुपये था।

ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4,303.22 करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2025 तिमाही में 3,333.58 करोड़ रुपये था। सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और उभरते उद्योग क्षेत्र कंपनी के रेवेन्यू में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले बने रहे। इसकी हिस्सेदारी 40.7 प्रतिशत रही। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल रेवेन्यू में 34 प्रतिशत रही। हेल्थकेयर और लाइफसाइंसेज सेक्टर का योगदान 25.3 प्रतिशत रहा।

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के कर्मचारियों की संख्या 30 जून 2026 तक बढ़कर 28,640 हो गई। खर्च 3750.76 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 2832.84 करोड़ रुपये के थे। जून तिमाही में कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बुकिंग दर्ज कीं। एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील के कारण कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) लगभग दोगुनी होकर 1.15 अरब डॉलर हो गई। सालाना कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV) पिछली तिमाही के मुकाबले 20.6 प्रतिशत बढ़कर 53.68 करोड़ डॉलर हो गई।

Persistent Systems पर HSBC ने ‘होल्ड’ रेटिंग रखी बरकरार

जून तिमाही की कमाई सामने आने के बाद ब्रोकरेज फर्म HSBC ने पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर के लिए ₹4,610 के टारगेट प्राइस के साथ ‘होल्ड’ रेटिंग को दोहराया है। यह टारगेट शेयर के पिछले बंद भाव से 17 प्रतिशत कम है। HSBC ने कहा कि कंपनी ने जून 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान से बेहतर रही और रिकॉर्ड डील हासिल की गईं। मजबूत ऑर्डर इनफ्लो काफी हद तक उम्मीदों के मुताबिक था। लेकिन शुद्ध मुनाफा उम्मीदों से कम रहा। ज्यादा डायरेक्ट कॉस्ट और अधिक सेल्स व मार्केटिंग खर्चों ने मुनाफे पर असर डाला। EBIT मार्जिन गिरकर 16% हो गया, जबकि अनुमान लगभग 16.5% का था।

Sterlite Tech Share Price: ₹960 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट ने भरा जोश, शेयर 5% चढ़ा; लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट

मार्जिन के दबाव के बावजूद, ब्रोकरेज ने कहा कि Persistent अपने सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ने वाली IT सर्विसेज कंपनियों में से एक बनी हुई है। इसकी 4.1% की कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, Mphasis, Zensar, LTTS और हेक्सावेयर जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों से बेहतर रही।

शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत चढ़ा

Persistent Systems का मार्केट कैप 86700 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में 18 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। बीएसई पर 52 सपताह का एडजस्टेड हाई 6,597 रुपये और एडजस्टेड लो 4,242.65 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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Market Insight : RBI मॉनिटरी पॉलिसी के पहले ऑटो,बैंक,NBFC और रियल एस्टेट शेयरों पर करें फोकस, IT में करें मुनाफावसूली

Market Insight : बाजार की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि वीकेंड पर उम्मीद के मुताबिक ट्रंप फिर पीछे हटे। TACO ट्रेड अब सबसे आसान ट्रेड बन चुका है। जिस वीकेंड TACO नहीं होगा,उस सोमवार दिक्कत होगी। बता दें कि TACO ट्रेड का अर्थ है कि टैरिफ की घोषणा के बाद शेयरों की कीमत गिरने पर उन्हें सस्ते में खरीदना और फिर टैरिफ में देरी या कमी होने और बाजार के फिर से पटरी पर आने के बाद उन्हें मुनाफे पर बेचना।

अनुज सिंघल ने आगे कहा कि गुरुवार दोपहर को हमने IT में मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। शुक्रवार दोपहर को न्यूट्रल रहने की सलाह थी। अब यहां से सबसे बड़ा फैक्टर होगा बैंक निफ्टी। आज बैंक निफ्टी में अच्छा गैपअप हुआ है। उसके बाद देखना होगा HDFC बैंक कैसे रिएक्ट करेगा। शुक्रवार को HDFC बैंक दिन के निचले स्तर पर बंद हुआ था। बैंक निफ्टी की बस दिक्कत यही है,क्योंकि यह सबसे बड़ा शेयर है। निफ्टी IT 200 DMA के करीब जाकर ठंडा पड़ा है और अब कच्चे तेल का नीचे आना और रुपये का मजबूत होना एल्गो निगेटिव है। ऐसे में शायद यहां से IT बेचें, बैंक फिर खरीदें ट्रेड वापस शुरू होगा।

बाजार: अच्छे संकेतों की भरमार

आज बाजार के पास चलने के लिए लगभग सब कुछ है। सबसे बड़ा पॉजिटिव है कच्चे तेल का नीचे आना। कच्चा तेल हमने $89 पर छोड़ा था,आज हम $84 के भी नीचे हैं। सऊदी अरब,रूस और पांच दूसरे सदस्य सितंबर उत्पादन बढ़ाएंगे। 1.88 लाख बैरल रोजाना उत्पादन बढ़ाया जाएगा। उत्पादन बढ़ाने का फैसला 2023 में हुई कटौती को खत्म करेगा।

GST का डाटा काफी मजबूत है। GST कलेक्शन 14 महीने की ऊंचाई पर है। जुलाई में GST कलेक्शन 15.4% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपए रहा है। 14 महीनों का सबसे तेज GST ग्रोथ दर्ज किया गया है। FY27 में दूसरी बार GST कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपए के पार रहा है। ऑटो बिक्री भी उम्मीद के मुताबिक शानदार रही है। FIIs ने काफी समय बाद लगातार खरीदारी की है।

एक बार फिर TACO से थके लोग?

ईरान पर नए हमले फिलहाल टाले गए हैं। तेहरान और वेस्ट एशिया के देशों ने जानकारी दी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दोबारा खोलने पर समझौते की कोशिश चल रही है। तेजी से समझौता होने की उम्मीद में ट्रंप ने हमला रद्द किया है।

ऑटो कंपनियों के लिए शानदार रहा जुलाई

ऑटो कंपनियों के लिए जुलाई का महीना शानदार रहा है। सभी सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। इस साल का जुलाई इतिहास में सबसे बेहतरीन रहा है। मारुति सुजुकी ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। एंट्री-लेवल सेगमेंट में लगातार दूसरे महीने 90% बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Hyundai ने 100 महीनों में सबसे ज्यादा मंथली एक्सपोर्ट दर्ज किया है। टाटा मोटर्स (PV) की बिक्री 59% बढ़ी है। M&M ने पैसेंजर व्हीकल,ट्रैक्टर और 3-व्हीलर सभी सेगमेंट में दमदार प्रदर्शन किया है। रॉयल एनफील्ड की घरेलू बिक्री मजबूत रही है।

2 व्हीलर पॉकेट अभी भी सबसे मजबूत है। हीरो मोटो,बजाज ऑटो,TVS मोटर और आयशर मोटर्स सभी में ब्रेकआउट है। पैसेंजर व्हीकल स्पेस में सबसे मजबूत Hyundai है। मारुति यहां से भी शायद Hyundai से कमजोर प्रदर्शन करेगी। मारुति की बिक्री अच्छी है लेकिन नतीजों में मार्जिन पर दबाव है और मार्जिन पर दबाव आगे भी धीरे-धीरे ही कम होगा।

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3 फैक्टर्स जो मूड बिगाड़ सकते हैं

मारुति और मुथूट के नतीजे थोड़े फीके हैं। US बॉन्ड यील्ड इस बार 4.7% की रेखा पार कर गई है। निफ्टी का PCR अब 1.39 पर काफी ओवरबॉट है।

बाजार: अब क्या हो रणनीति?

शुक्रवार को निफ्टी के ब्रेकआउट का कन्फर्मेशन मिला है। सिर्फ वीकेंड था,इसीलिए हमने मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। अब 24,350 निफ्टी के लिए सपोर्ट का काम करेगा। अब लॉन्ग पोजिशन लें तो 24,350 का स्टॉप होगा। सब ठीक रहा तो अब निफ्टी 24,750-24,800 यानी 200 DMA टेस्ट करेगा। सबसे दिलचस्प डाटा है 3 बड़े इंडेक्स और 200 DMA। निफ्टी और 200 DMA। निफ्टी बैंक और 200 DMA। निफ्टी IT और 200 DMA। यहां से वापस अब घरेलू अर्थव्यवस्था पर फोकस करें। इस हफ्ते RBI की मॉनिटरी पॉलिसी भी आनी है। उसके पहले ऑटो, बैंक, NBFCs, रियल एस्टेट चल सकते हैं। IT में अब मुनाफावसूली करें,सिर्फ मजबूत शेयरों में रहें। वीकेंड में परसिस्टेंट ने फिर बढ़िया तिमाही दिखाई। लेकिन शेयर पहले ही काफी चल चुका है,अब नीचे मिले तभी लें। परसिस्टेंट पर हमने 4300 में कॉन्ट्रा का नजरिया लिया था और सिर्फ CNBC-आवाज़ ने शॉर्ट करने से मना किया था। अब यहां से IT में वापस सिर्फ चुनिंदा शेयरों पर फोकस करेंगे।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,550-24,650 (ऑप्शंस जोन) पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,750-24,800 (200 DMA) पर है। सबसे अहम सपोर्ट 24,350-24,400 (न्यूट्रल जोन)पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,350-24,500 है। इसके लिए SL 24,300 पर होना चाहिए। 24,550-24,600 के रिजेक्शन पर बिकवाली करें। इसके लिए SL 24,650 पर रखें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 57,450-57,500 (200 DMA)पर और बड़ा रजिस्टेंस 57,800-58,000 पर है। इसके लिए पहला सपोर्ट 57,200-57,300 पर और बड़ा सपोर्ट 56,800-57,000 पर है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Urban Company का शेयर बना रॉकेट, 17% तक उछला; मॉर्गन स्टेनली से मिला डबल अपग्रेड

होम सर्विसेज देने वाली अर्बन कंपनी के शेयरों में 3 अगस्त को जबरदस्त तेजी है। बीएसई पर शेयर की कीमत शुरुआती कारोबार में पिछले बंद भाव से 17.6 प्रतिशत तक उछलकर 152 रुपये के हाई तक गई। कंपनी ने शुक्रवार को अपने वित्तीय नतीजे जारी किए थे। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी को कंसोलिडेटेड बेसिस पर 92.12 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। एक साल पहले कंपनी 6.94 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी। इसके बावजूद शेयर में बंपर खरीद हो रही है।

इसकी एक वजह यह है कि तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक की रेटिंग को “अंडरवेट” से डबल अपग्रेड कर सीधा “ओवरवेट” कर दिया है। ब्रोकरेज ने अक्टूबर 2025 में स्टॉक पर अपना कवरेज शुरू किया था। टारगेट प्राइस 128 रुपये से बढ़ाकर 165 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। इसके अलावा कंपनी की InstaHelp सर्विस ने 1 लाख डेली डिलीवर्ड ऑर्डर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।

बता दें कि तिमाही आधार पर कंपनी का घाटा कम हुआ है। मार्च 2026 तिमाही में यह 161.16 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 43.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 528.34 करोड़ रुपये रहा। जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू 367.27 करोड़ रुपये रहा था। कुल खर्च बढ़कर 639.88 करोड़ रुपये के हो गए, जो जून 2025 तिमाही में 384.25 करोड़ रुपये के थे।

मार्केट लीडरशिप को प्राथमिकता दे रहा है मैनेजमेंट

अर्बन कंपनी का इंडिया बिजनेस से रेवेन्यू जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत ज्यादा रहा। मार्जिन भी बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया। कंपनी के मैनेजमेंट का मानना है कि घाटा ज्यादा बना रहेगा क्योंकि कंपनी आगे बाकी सब चीजों से ज्यादा मार्केट लीडरशिप को प्राथमिकता दे रही है। अर्बन कंपनी के शेयर को 7 सात एनालिस्ट कवर कर रहे हैं। इनमें से 2 ने “बाय” और 2 ने “सेल” रेटिंग दी है। 3 ने “होल्ड” की सलाह दी है।

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अर्बन कंपनी भारत, UAE, सिंगापुर और सऊदी अरब में एक मल्टी कैटेगरी होम सर्विस प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है। इसके प्लेटफॉर्म पर क्लीनिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिक वर्क, अप्लायंसेज रिपेयर, ब्यूटी ट्रीटमेंट और मसाज थेरेपी जैसी सर्विसेज मिलती हैं। इसका InstaHelp वर्टिकल बुकिंग के 10-15 मिनट के अंदर सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने और खाना बनाने के लिए लोग मुहैया कराने जैसी सर्विसेज देता है।

सितंबर 2025 में लिस्ट हुई थी Urban Company

अर्बन कंपनी 17 सितंबर 2025 को ​लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,900.24 करोड़ रुपये का था। कंपनी का शेयर शेयर एक सप्ताह में 17 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 19.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 22600 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

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