L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

L&T Q1 Results: देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने जून 2026 तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14% बढ़कर 4,123 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,617 करोड़ रुपये था। यह बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। वहीं, कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6.7% बढ़कर 67,942 करोड़ रुपये पहुंच गई।

L&T की ऑर्डर बुक

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी L&T को जून तिमाही में 1,08,014 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। यह पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा है। कंपनी को रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑफशोर विंड, हेवी इंजीनियरिंग और मेटल सेक्टर से बड़े ऑर्डर मिले।

कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 7,78,954 करोड़ रुपये हो गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 52% है। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल रेवेन्यू में 51% योगदान विदेशी कारोबार का रहा।

मार्जिन पर दबाव

तिमाही में L&T का EBITDA 3.2% घटकर 6,116 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल के 9.9% से घटकर 9% पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बेहतर रहा।

ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग से मजबूती

L&T के ग्रीन एनर्जी बिजनेस को तिमाही में 33,042 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। यह पिछले साल से 58% ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट रहे। हालांकि, सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते इस सेगमेंट की रेवेन्यू 11% घट गई।

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग एंड प्रोडक्ट्स कारोबार में ऑर्डर इनफ्लो 74% बढ़कर 5,535 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिफाइनरी इक्विपमेंट से जुड़े बड़े ऑर्डर मिलने का फायदा कंपनी को मिला।

टेक और फाइनेंस ने भी दिखाया दम

L&T के टेक्नोलॉजी, प्लेटफॉर्म्स एंड सर्विसेज कारोबार की रेवेन्यू 15% बढ़कर 14,627 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर, फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की ऑपरेशनल इनकम 27% बढ़कर 5,042 करोड़ रुपये रही। इस दौरान कंपनी का कुल लोन बुक 1,29,634 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

रियल्टी कारोबार में भी तेजी

L&T के रियल्टी बिजनेस में नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी बुकिंग हुई। ऑर्डर इनफ्लो 32% बढ़कर 1,299 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,009 करोड़ रुपये पहुंच गई।

चेयरमैन ने क्या कहा?

L&T के चेयरमैन और MD एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने अलग-अलग सेक्टर और बाजारों पर फोकस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस तिमाही में Nabha Power की हिस्सेदारी बेचने का काम पूरा किया है। साथ ही, Hyderabad Metro में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए भी समझौता किया है। इससे कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

L&T के शेयर

L&T के शेयर मंगलवार को 0.63% की बढ़त के साथ 3,830 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 11.92% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल में इससे निवेशकों को 139.16% का मुनाफा हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 5.27 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम? समझिए नियम और एक्सपर्ट्स की राय

Motor Insurance Policy on E20 Fuel: भारत में 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया हुआ पेट्रोल स्टैंडर्ड फ्यूल बन चुका है। इसके बाद से ही पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि, अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम खराब होता है, तो क्या कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में इसका क्लेम मिलेगा?

इस मुद्दे पर सरकार, इंश्योरेंस कंपनियों और ऑटोमोटिव एक्सपर्ट्स का रुख बिल्कुल साफ है। आइए आपको बताते हैं कि E20 पेट्रोल और कार इंश्योरेंस से जुड़े नियम क्या कहते हैं।

क्या केवल E20 फ्यूल इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस रद्द हो जाता है?

बिल्कुल नहीं, सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ कर दिया है कि गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द नहीं होती। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने विवाद के बाद साफ किया कि, ‘गाड़ी में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से पॉलिसी अमान्य नहीं होती। क्लेम इस बात पर निर्भर करता है कि दुर्घटना या चोरी जैसी बीमित घटना हुई है या नहीं। पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल को लापरवाही नहीं माना जाएगा।’

पॉलिसीबाजार के मोटर इंश्योरेंस बिजनेस हेड पारस पसरीचा (Paras Pasricha) के मुताबिक, केवल E20 फ्यूल के इस्तेमाल से क्लेम रिजेक्ट नहीं होता। क्लेम इस बात पर तय होता है कि नुकसान की असली वजह क्या है।

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

यहीं पर बीमा के नियमों का अंतर समझना जरूरी है:

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

पारस पसरीचा के अनुसार, ‘अगर सर्वेयर की जांच में यह साबित होता है कि इंजन या फ्यूल सिस्टम का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ऐसे फ्यूल (E20) का इस्तेमाल करने से हुआ है जो वाहन निर्माता द्वारा अनुशंसित नहीं था, तो इसे स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत मैकेनिकल ब्रेकडाउन या कन्सिक्वेंशियल डैमेज माना जाएगा। इस स्थिति में क्लासिकल कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में क्लेम मिलना मुश्किल होगा।’

किस बात पर फंस रहा पेंच?

ICICI Lombard का ब्लॉग पोस्ट: जून 2026 में ICICI लोम्बार्ड के एक ब्लॉग में कहा गया था कि पुरानी गैर-E20 कंपैटिबल गाड़ियों में E20 फ्यूल से हुए नुकसान को लापरवाही के दायरे में देखा जा सकता है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख कंपनी ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की। अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी BS6 Phase-2 गाड़ियां पूरी तरह से E20 फ्यूल फ्रेंडली हैं और उनमें ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

सरकार और इंडस्ट्री का क्या रुख है?

सरकार और एथेनॉल इंडस्ट्री ने E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार को वाहन निर्माताओं या कंज्यूमर ग्रुप्स से E20 के कारण माइलेज घटने या इंजन/टैंक खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।

सरकार के मुताबिक पिछले 2.5 सालों से देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल रही हैं।

भारत इंडिपेंडेंट एथेनॉल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIEPA) के जॉइंट वाइस प्रेसिडेंट अक्षय मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा कैंपेन सिर्फ भ्रामक जानकारी पर आधारित है और एथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह से वैज्ञानिक जांच और OEM अप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।

कार मालिकों के लिए निष्कर्ष और काम की सलाह

आपकी कार का इंश्योरेंस E20 पेट्रोल डालने से रद्द नहीं होता है, दुर्घटना या चोरी की स्थिति में क्लेम पहले की तरह ही मिलेगा। अगर E20 के कारण फ्यूल पाइप, इंजेक्टर या जंग लगने से मैकेनिकल ब्रेकडाउन होता है, तो सामान्य इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा। इसके लिए आपके पास Engine Protect Add-on या Extended Warranty होना जरूरी है। आप अपनी गाड़ी के यूजर मैनुअल में फ्यूल कंपैटिबिलिटी जरूर जांच लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: क्या ₹50,000 महीने की सैलरी में बन सकते हैं करोड़पति? जानें एक्सपर्ट का SIP वाला ये फॉर्मूला

Mutual Fund SIP Calculator: ₹1 करोड़ का फंड तैयार करना हर किसी का सपना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहला करोड़ बनने के बाद संपत्ति की रफ्तार तेजी से बढ़ती है। लेकिन क्या ₹50,000 महीने की कमाई करने वाला कोई सामान्य व्यक्ति ₹1 करोड़ का कॉर्पस बना सकता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बिल्कुल संभव है, बशर्ते आप अनुशासन, धैर्य और सही रणनीति के साथ लंबी अवधि के लिए निवेशित रहें। आइए समझते हैं एसआईपी (SIP) के जरिए करोड़पति बनने का पूरा गणित।

₹50,000 की सैलरी में कैसे बनेगा ₹1 करोड़ का फंड?

KAARMIKA Wealth Mentors के डायरेक्टर किरण गांधी का कहना है कि अगर आप हर महीने ₹50,000 कमाते हैं, तो भी अनुशासित निवेश से करोड़पति बना जा सकता है। उन्होंने इसके लिए कुछ जरूरी नियम बताए हैं:

सैलरी का 20-30% निवेश: अपनी मासिक आय का कम से कम 20 से 30 फीसदी हिस्सा हर महीने म्यूचुअल फंड SIP में लगाएं।

स्टेप-अप एसआईपी: हर साल जब आपकी सैलरी बढ़े, तो अपने एसआईपी निवेश में भी 10% से 15% की बढ़ोतरी करें।

इमरजेंसी फंड तैयार रखें: अपने निवेश को बीच में टूटने से बचाने के लिए इमरजेंसी फंड अलग बनाकर रखें और बेवजह के कर्ज से बचें।

हाई रिटर्न का लालच न करें: केवल ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें और हर साल अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें।

SIP Calculator: ₹12,000 प्रति महीने का गणित

किरण गांधी के अनुसार, अगर आप ₹12,000 महीने की एसआईपी शुरू करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो करीब 20 साल में आपका फंड लगभग ₹1 करोड़ हो जाएगा।

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी की रकम में केवल 10% की बढ़ोतरी यानी स्टेप-अप SIP का रास्ता चुना, तो ₹1 करोड़ का यह लक्ष्य 20 साल से भी काफी पहले हासिल किया जा सकता है।

इस कैलकुलेशन के हिसाब से ₹50,000 महीने की सैलरी में करोड़पति बनना कोई नामुमकिन सपना नहीं है। इसके लिए सिर्फ एक सही रणनीति, अनुशासन और समय की जरूरत है। अगर आप 25-30 साल की उम्र से ही 15-20 सालों के लिए ₹10,000 से ₹12,000 की अनुशासित एसआईपी शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से ₹1 करोड़ का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

भारत में SIP का नया रिकॉर्ड, जून में ₹31,781 करोड़ का निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में छोटे निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जून 2026 में मंथली एसआईपी योगदान ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह मई 2026 के मुकाबले 2.7% और जून 2025 के मुकाबले 16.5% ज्यादा है। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई है, जो एक साल पहले 8.64 करोड़ थी। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल SIP AUM बढ़कर ₹17.70 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो पूरी इंडस्ट्री के कुल एसेट का 21.5% है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

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HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक को निवेशकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए सिर्फ पुराने विवादों को बंद करना काफी नहीं होगा। कॉरपोरेट गवर्नेंस के जानकारों का कहना है कि बैंक को अपनी गवर्नेंस, आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि निवेशक अब सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि बैंक के काम करने के तरीके को भी देख रहे हैं।

मामला क्या है?

यह चर्चा MSRDC डिपॉजिट मामले के बाद तेज हुई है। बैंक के बोर्ड ने इस मामले की आंतरिक जांच पूरी की। जांच में CEO शशिधर जगदीशन समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना और चेतावनी जारी की गई।

हालांकि, बोर्ड ने यह भी माना कि मामले में किसी तरह की निजी कमाई, गलत मंशा या नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं मिले। इसके बाद बोर्ड ने जगदीशन की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश भी की।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

Institutional Investor Advisory Services (IiAS) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित टंडन का कहना है कि किसी एक मामले का निपटारा कर देना ही काफी नहीं है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या बैंक ने हाल के गवर्नेंस विवादों से सबक लिया है। क्या बोर्ड की निगरानी पहले से मजबूत हुई है। क्या आंतरिक कंट्रोल बेहतर हुए हैं। उनके मुताबिक गवर्नेंस में सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि उन तक पहुंचने की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होती है।

पुराने मामलों पर भी उठे सवाल

अमित टंडन का कहना है कि इस मामले को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। इसे पूर्व स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और हाल के दूसरे गवर्नेंस विवादों के साथ जोड़कर देखना होगा। उनका मानना है कि अब बैंक की सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को यह भरोसा दिलाना है कि उसकी गवर्नेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

बोर्ड का संदेश क्या है?

अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख का कहना है कि बोर्ड की स्वतंत्र जांच से साफ हुआ कि यह मामला नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि गवर्नेंस और कारोबारी पहुंच का था। इसलिए बोर्ड ने CEO की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश की। हालांकि, अंतिम फैसला RBI को लेना है।

आगे बैंक के लिए क्या चुनौती?

अश्विन पारेख का मानना है कि CEO, CFO और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर जुर्माना लगाना अपने आप में बड़ा कदम है। इससे बोर्ड ने साफ संदेश दिया है कि जवाबदेही तय की जाएगी।

वहीं, अमित टंडन का कहना है कि अब बहस सजा की मात्रा पर नहीं होनी चाहिए। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बैंक अपनी गवर्नेंस को कितना मजबूत बनाता है।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को 0.38% गिरकर 736.75 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.01% गिरा है। वहीं, एक साल में यह 26.64% टूटा है। 5 साल की बात करें, तो निवेशकों को सिर्फ 3.30% रिटर्न मिला है। बैंक का मार्केट कैप 5.64 हजार करोड़ रुपये है।

Q1 Results: प्राइवेट बैंक का मुनाफा 25% बढ़ा, NPA घटा; शेयर 11% उछला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : हल्के लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 28 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे एक्सपायरी सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुए। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर और निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। लगभग 1539 शेयरों में बढ़त हुई,2543 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

TCS सबसे ज़्यादा बढ़त (4.466%) के साथ टॉप गेनर रहा,इसके बाद एटरनल (4.23%), टेक महिंद्रा (3.82%),नेस्ले इंडिया (3%) और सिप्ला (2.5%) रहे। दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनीलीवर (HUL) सबसे ज्यादा गिरावट वाला शेयर रहा। Q1 नतीजों के बाद इसमें 7% की गिरावट आई। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) (-4.24%), कोल इंडिया (-4%),टाटा कंज्यूमर (-2.2%) और NTPC (-2%) रहे।

सेक्टर के हिसाब से मिला-जुला प्रदर्शन रहा। निफ्टी IT सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 3.2% की बढ़त हुई; इसके बाद निफ्टी रियल्टी (2%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.08%) रहे। निफ्टी ऑटो भी बढ़त के साथ बंद हुआ (0.69%), जबकि निफ्टी फार्मा में 0.2% की बढ़त हुई।

दूसरी ओर,निफ्टी एनर्जी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.7% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी (-1.4%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (-0.9%) रहे। निफ्टी मेटल में 0.6% की गिरावट आई,जबकि निफ्टी बैंक 0.58% गिरा। निफ्टी इंफ्रा (-0.5%),निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.4%) और निफ्टी मीडिया (-0.34%) में भी गिरावट रही।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई,जबकि निफ्टी स्मॉल कैप 100 इंडेक्स में 0.2% की गिरावट आई।

निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी आज दिन भर एक सीमित दायरे में रहा और मंथली एक्सपायरी के समय आमतौर पर दिखने वाली उतार-चढ़ाव की स्थिति नहीं दिखी। निफ्टी लगातार दूसरे दिन 50EMA के आसपास बंद हुआ,जो ट्रेडर्स के बीच असमंजस की स्थिति को दिखाता है। ऊपरी स्तर पर 24,050 एक मजबूत रेजिस्टेंस बना रहा,जबकि निचले स्तर पर 23,920 के आसपास सपोर्ट देखा गया। अगर इंडेक्स जल्द ही 24,050 के स्तर को पार कर जाता है तो उसे 24,500 की ओर बढ़ने के लिए जरूरी मजबूती मिल सकती है। निचले स्तर पर सपोर्ट 23,800 पर है।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह ने कहा कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24120-24150 के जोन में है,जो 100 डे EMA के पास स्थित है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 24300 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 24450 तक बढ़ सकता है। वहीं,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23850-23820 के जोन में है।

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर’बेयरिश कैंडलस्टिक’के साथ सेशन खत्म किया,जो थोड़े नेगेटिव टेक्निकल सेटअप का संकेत है। आवरली चार्ट पर,RSI’बेयरिश क्रॉसओवर’में आ गया है और 50 के लेवल से नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि इंडेक्स अपने 20-पीरियड SMA से नीचे बना हुआ है,जो शॉर्ट टर्म के लिए कमजोर मोमेंटम दिखाता है। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,200 पर है,जबकि 57,300–57,500 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। जब तक इंडेक्स इस रेंज से बाहर नहीं निकलता,तब तक ट्रेडर्स को सलाह होगी कि वे लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग अप्रोच अपनाएं और एग्रेसिव डायरेक्शनल पोजीशन लेने से बचें।

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में यह नीचे की ओर गया। दिन के दौरान तेजी से हुई रिकवरी ने इंडेक्स को दिन के उच्चतम स्तर की ओर धकेला,लेकिन 57,030–57,060 का जोन एक मज़बूत रेजिस्टेंस के तौर पर उभरा,जिससे फिर से बिकवाली का दबाव बना। आखिर में इंडेक्स 0.58% गिरकर 56,756 पर बंद हुआ।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी ने एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर की ओर एक लंबी विक (wick) दिखी जो ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग को दिखाती है। इंडेक्स रिलेटिव रोटेशन ग्राफ (RRG) के ‘लैगिंग क्वाड्रेंट’में भी बना हुआ है जो बेंचमार्क की तुलना में कमजोर रिलेटिव स्ट्रेंथ और मोमेंटम को दर्शाता है।

आगे की बात करें तो बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57,200-57,300 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57,700 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58,000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की ओर बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,300-56,200 के जोन में है।

 

Trading Plan : एक्सपायरी के दिन 80 अंकों के छोटे से दायरे में फंसा निफ्टी, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Manipal Health IPO: पैसों का कर लें इंतजाम! कल से खुल रहा है मणिपाल हेल्थ का मेगा इश्यू , जानें ब्रोकरेज की राय

Manipal Health Enterprises IPO: देश की प्रमुख अस्पताल चेन मणिपाल हॉस्पिटल्स का संचालन करने वाली कंपनी मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का आईपीओ कल यानी 29 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। अगर आप भी इस IPO में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो निवेश करने से पहले इसका प्राइस बैंड, जीएमपी, लॉट साइज और ब्रोकरेज रिपोर्ट जान लें।

Manipal Health IPO: प्राइस बैंड और इश्यू साइज

  • प्राइस बैंड: ₹560 से ₹590 प्रति शेयर।
  • ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 29-31 जुलाई
  • अलाटमेंट: 3 अगस्त
  • लिस्टिंग: 5 अगस्त
  • न्यूनतम निवेश: रिटेल निवेशक कम से कम 1 लॉट (25 शेयर) के लिए बोली लगा सकते हैं। अपर प्राइस बैंड (₹590) के हिसाब से 1 लॉट के लिए ₹14,750 का निवेश करना होगा।
  • इश्यू साइज: ₹9,275 करोड़ (₹8,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,275 करोड़ का ऑफर फॉर सेल)

कंपनी प्रोफाइल और फंड का इस्तेमाल

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज बेड क्षमता के आधार पर भारत का सबसे बड़ा पैन-इंडिया मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल नेटवर्क है। मार्च 2026 तक कंपनी 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 49 अस्पतालों और 13,037 लाइसेंस प्राप्त बेड्स का संचालन करती है।

कंपनी आईपीओ से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल अपनी सहायक कंपनी मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड के बकाए कर्ज को चुकाने, सह्याद्री हॉस्पिटल्स में माइनॉरिटी हिस्सेदारी खरीदने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

FY26 में कंपनी की कुल आय 26% बढ़कर ₹10,520.52 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹8,362.79 करोड़ थी। EBITDA भी बढ़कर ₹2,795.94 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹2,247.07 करोड़ था। हालांकि, कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) घटकर ₹916.52 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹1,081.67 करोड़ था।

ब्रोकरेज की राय: Subscribe करें या नहीं?

ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी के मुताबिक, अपर प्राइस बैंड ₹590 पर कंपनी का वैल्यूएशन FY26 की कमाई के आधार पर 85.4x PE पर है और इश्यू के बाद मार्केट कैप ₹77,605.6 करोड़ बैठता है। ब्रोकरेज का मानना है कि आईपीओ का वैल्यूएशन पूरी तरह से प्राइज्ड-इन है। ब्रोकरेज ने इस आईपीओ को ‘Subscribe – Long Term’ यानी लंबी अवधि के लिए सब्सक्राइब की रेटिंग दी है।

ग्रे मार्केट में क्या है रुझान?

आईपीओ मार्केट ट्रैकर्स के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 को मणिपाल हेल्थ का जीएमपी ₹13.5 दर्ज किया गया है। ₹590 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर की लिस्टिंग ₹603.5 के आसपास हो सकती है। यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम फिलहाल लगभग 2.29% के मामूली लिस्टिंग गेन का इशारा कर रहा है।

डिक्लेमर: मनीकंट्रोल हिंदी पर दिए गए विचार और निवेश की सलाह एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स के अपने निजी होते हैं। शेयर बाजार या आईपीओ में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

Aurionpro Solutions Share Price: अपने पीक से 62% नीचे ये स्टॉक आज 12% गिरा, तिमाही नतीजों का दिखा असर

Aurionpro Solutions Share Price: सॉफ्टवेयर एंड आईटी सर्विसेस सेक्टर की कंपनी Aurionpro Solutions के शेयरों में आज भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर आज 12.10% गिरकर ₹735.40 प्रति शेयर पर बंद हुआ। शेयर में यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही के बाद आई। शेयर 11 जून के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।

जून तिमाही के लिए, Aurionpro ने ₹358 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹337 करोड़ से 6.3% और पिछली तिमाही के ₹346 करोड़ से 3.6% अधिक है। हालांकि, EBITDA सालाना आधार पर 9.1% घटकर ₹61 करोड़ रह गया, जबकि EBITDA मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट्स घटकर 17.2% हो गया। नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 12.6% घटकर ₹45 करोड़ रह गया (जो पहले ₹51 करोड़ था), और PAT मार्जिन भी एक साल पहले के 15.3% से घटकर 12.6% हो गया।

मार्जिन पर दबाव के बावजूद, कंपनी ने तिमाही के दौरान 23 नए कस्टमर जोड़े। रेवेन्यू में बढ़ोतरी को बैंकिंग और फिनटेक बिजनेस से सहारा मिला, जो सालाना आधार पर 4.7% बढ़कर ₹201 करोड़ हो गया, जबकि टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ने 8.4% की बढ़ोतरी के साथ ₹157 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।

तिमाही के दौरान, कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिका से अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है। उसने एक प्रमुख डिजिटल इंश्योरेंस पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ 33 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। Aurionpro ने Ujjivan Small Finance Bank से अपने प्रमुख iCashpro+ इंटीग्रेटेड ट्रांजैक्शन बैंकिंग प्लेटफॉर्म को लागू करने के लिए 6 साल का कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया।

मल्टीबैगर रिटर्न के बावजूद स्टॉक अपने पीक से 62% नीचे

शेयर पर सितंबर 2024 से लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और इस दौरान इनकी वैल्यू में 55% से ज़्यादा की गिरावट आई है। मार्च 2023 और सितंबर 2024 के बीच आई जबरदस्त तेज़ी के बाद, जब स्टॉक ₹1,975 प्रति शेयर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था, इसकी रफ्तार कम हो गई और उसके बाद के ज़्यादातर महीनों में स्टॉक गिरावट के साथ बंद हुआ।

शेयर अपने पीक से स्टॉक में 62% की गिरावट आई है। कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखें तो 2025 में इसमें 40% की गिरावट आई और 2026 में अब तक यह 29% और गिर चुका है।

Lodha Developers Share Price: डबल मुनाफे से शेयर को लगे पंख, 8% चढ़ा शेयर,अभी और लगा सकता है 28% की छलांग

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Retirement Planning Guide: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय हर इंसान का लक्ष्य अलग होता है। कोई रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स्ड रकम तय करना चाहता है, तो कोई किसी खास वित्तीय पड़ाव को हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि रिटायरमेंट के लिए कितना फंड या कॉर्पस काफी है?

पॉलिसीबाजार के लाइफ इंश्योरेंस चीफ बिजनेस ऑफिसर विवेक जैन के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस का कोई एक फिक्स्ड स्टैंडर्ड नहीं हो सकता। यह आपकी जीवनशैली, रिटायरमेंट की उम्र, लाइफ एक्सपेक्टेंसी, महंगाई दर और हेल्थकेयर के खर्चों पर निर्भर करता है।

भारत में क्यों तेजी से बदल रहा है रिटायरमेंट का गणित?

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए विवेक जैन बताते हैं कि साल 2050 तक भारत में लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति 60 साल से अधिक उम्र का होगा। आज लोग ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं और कई लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका रिटायरमेंट का दौर पहले की तुलना में ज्यादा लंबा होगा। इसके लिए ऐसे फंड की जरूरत है जो लंबी अवधि तक महंगाई और मेडिकल खर्चों का मुकाबला कर सके।

सिर्फ ₹5,000 महीना निवेश से बन सकता है ₹3.25 करोड़ का फंड

विवेक जैन एक आसान उदाहरण से समझाते हैं कि कैसे जल्दी शुरुआत करने से बड़ा फायदा होता है। अगर कोई 25 साल का युवा हर महीने ₹5,000 का निवेश शुरू करता है और 60 साल की उम्र तक लगातार निवेश बनाए रखता है, तो 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न के हिसाब से 60 की उम्र में उसके पास करीब ₹3.25 करोड़ का बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

इसमें से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि बाकी 40% हिस्से से एनुटी खरीदकर जीवनभर के लिए हर महीने रेगुलर पेंशन पाई जा सकती है।

महंगाई और हेल्थकेयर खर्चों का चक्रव्यूह

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी चुनौती महंगाई है। आज जो खर्च आपको सामान्य लग रहा है, आने वाले 20-30 सालों में वह कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा, मेडिकल इंफ्लेशन सामान्य महंगाई से भी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों और लंबे इलाज का खर्च बढ़ता है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय हेल्थकेयर के नियमित खर्चों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

40 की उम्र से पहले ही रिटायरमेंट प्लान कर रहे भारतीय

पॉलिसीबाजार के डेटा का विश्लेषण करते हुए विवेक जैन ने कुछ बेहद दिलचस्प ट्रेंड्स सामने रखे हैं:

युवाओं की हिस्सेदारी: रिटायरमेंट पॉलिसी खरीदने वाले लगभग 60% ग्राहक 40 साल से कम उम्र के हैं। वहीं, 50 साल से ऊपर के केवल 11.6% लोग ही इसे खरीद रहे हैं। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी जल्दी वित्तीय आजादी चाहती है।

मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स की पसंद: 98% से अधिक लोग मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स (NPS, रिटायरमेंट ULIPs और पेंशन ULIPs) चुन रहे हैं। लोग अब इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से नहीं डरते।

छोटे शहरों का दबदबा: रिटायरमेंट प्लानिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। 75% से ज्यादा रिटायरमेंट पॉलिसियां टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही हैं।

NRIs का भरोसा: कुल रिटायरमेंट पॉलिसी में करीब 10% हिस्सेदारी एनआरआई (NRIs) की है। इनका औसत निवेश साइज (₹2.25 लाख) भारतीय निवेशकों से 2.5 गुना अधिक है। एनआरआई खरीदारी में सबसे बड़ी 38% हिस्सेदारी गल्फ (खाड़ी देशों) क्षेत्र की है।

ITR Last Date: 31 जुलाई या 31 अगस्त? जानिए आपके लिए कौन-सी है इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन

कुल मिलाकर विवेक जैन का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग का मकसद सिर्फ सबसे बड़ा कॉर्पस जमा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा फंड बनाना है जो आपको जिंदगीभर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखे। 50 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट प्लान करने का जमाना अब चला गया है; जितना जल्दी शुरुआत करेंगे, आपका भविष्य उतना ही सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।