Invest Rs 10 Lakh: हाथ में हैं ₹10 लाख? जानें पैसा बढ़ाने की 5 सबसे सेफ और स्मार्ट स्ट्रेटेजी

10 Lakh Investment Options & Strategies: अपने जीवन का पहला ₹10 लाख का फंड जमा करना किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा फाइनेंशियल माइलस्टोन होता है। चाहे यह पैसा सैलरी की बचत, बोनस, बिजनेस प्रॉफिट, या किसी प्रॉपर्टी की बिक्री से आया हो, इसे हासिल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस ₹10 लाख को कहां और कैसे इन्वेस्ट करें ताकि भविष्य में इससे बड़ा वेल्थ बनाया जा सके।

फाइनेंशियल विशेषज्ञों का मानना है कि ₹10 लाख का निवेश करने के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ यानी एक जैसा नियम सब पर लागू होने का फॉर्मूला काम नहीं करता। आइए आपको बताते हैं कि सही रणनीति के साथ अपने ₹10 लाख को कैसे निवेश करें।

निवेश से पहले निपटाएं ये 3 सबसे जरूरी काम

₹10 लाख को सीधे बाजार में लगाने की जल्दबाजी न करें। सबसे पहले इन तीन बुनियादी बातों को मजबूत करें:

1- इमरजेंसी फंड: क्या आपके पास कम से कम 6 महीने के खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड है? अगर नहीं, तो इस ₹10 लाख में से कुछ हिस्सा लिक्विड फंड या बैंक एफडी में अलग रखें।

2- हेल्थ इंश्योरेंस: अपने और परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ कवर जरूर लें ताकि मेडिकल इमरजेंसी में आपकी बचत न डूबे।

3- महंगे कर्ज: अगर आप पर क्रेडिट कार्ड का बिल या पर्सनल लोन जैसा कोई भारी ब्याज वाला कर्ज है, तो निवेश करने से पहले उसे चुकता करें।

एक साथ पैसा लगाने से बचें, स्टैगर्ड तरीका अपनाएं

बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए पूरा ₹10 लाख एक बार में निवेश न करें। अपने पैसे को किसी लिक्विड फंड में रखें और वहां से अगले 6 से 12 महीनों के दौरान सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए इक्विटी फंड्स में ट्रांसफर करें। इससे बाजार के ऊंचे और निचले दोनों स्तरों का फायदा मिलेगा और रिस्क कम होगा।

अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से बांटें पैसा

हर निवेशक का लक्ष्य अलग होता है, इसलिए समय सीमा के हिसाब से अपने पैसों का बंटवारा करें:

शॉर्ट टर्म गोल (1 से 3 साल): अगर आपको बच्चे की पढ़ाई, कार या घर की डाउन पेमेंट के लिए जल्द पैसा चाहिए, तो लो-रिस्क ऑप्शन जैसे डेट म्यूचुअल फंड, एफडी या आर्बिट्राज फंड चुनें।

लॉन्ग टर्म गोल (5 साल से ज्यादा): रिटायरमेंट या लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Flexi Cap, Large Cap), एनपीएस, या डायरेक्ट स्टॉक्स में निवेश करें।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करें

₹10 लाख का निवेश करने के बाद रोज-रोज के बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर पैनिक न हों। अगर आप पहले से एसआईपी (SIP) चला रहे हैं, तो उसे जारी रखें। साल में एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Xtranet Technologies IPO: आईटी सेक्टर के इस आईपीओ में निवेश का मौका! क्या आपको करना चाहिए अप्लाई? यहां जानें

Xtranet Technologies IPO Details: आईपीओ में पैसे लगाने वाले निवेशकों के लिए आज से एक और नया मौका खुल गया है। मध्य प्रदेश की आईटी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ₹167 करोड़ का आईपीओ आज यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल गया है। कंपनी के अनलिस्टेड शेयर ग्रे मार्केट में अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं ब्रोकरेज की राय सहित इस आईपीओ से जुड़ी हर जरूरी बात।

Xtranet Technologies IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹120 से ₹127 प्रति शेयर।
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹13,970
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹50 करोड़

यह ₹167 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, जिसमें 1.31 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। आम लोगों के लिए आईपीओ खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹50.04 करोड़ जुटाए हैं। प्रमुख एंकर इनवेस्टर्स सेंट कैपिटल फंड, विनी ग्रोथ फंड, लॉन्गथ्राइव कैपिटल और टॉरस म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

आईपीओ से मिले पैसों का इस्तेमाल कंपनी ₹102 करोड़ वर्किंग कैपिटल जरूरतों, ₹20.2 करोड़ कर्ज चुकाने और ₹8.48 करोड़ नए सिस्टम व हार्डवेयर खरीदने पर खर्च करेगी।

कंपनी की वित्तीय सेहत और ऑर्डर बुक

2002 में स्थापित यह कंपनी एंटरप्राइज एप्लीकेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, मैनेज्ड सर्विसेज और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्र में एंड-टू-एंड आईटी सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) साल-दर-साल 35.6% बढ़कर ₹40.73 करोड़ हो गया। इस दौरान कुल रेवेन्यू 32.3% बढ़कर ₹365.3 करोड़ पर पहुंच गया। 30 अप्रैल 2026 तक कंपनी के पास ₹356.96 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक थी।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है GMP?

IPO मार्केट पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, 23 जुलाई को एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹13 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इस हिसाब से इसका संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹140 रह सकता है। अगर GMP के अनुमानों के मुताबिक लिस्टिंग होती है तो इसमें पैसा लगाने वाले निवेशकों को करीब 10% से ज्यादा का मुनाफा हो सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय: क्या लगाएं पैसा?

ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने इस आईपीओ को मध्यम अवधि और मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ‘Subscribe’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ काफी मजबूत है और इसका वैल्यूएशन मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन के हिसाब से सही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं! जानिए वे 5 बड़े आर्थिक कारण जो तय करेंगे आपकी सैलरी

8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ ‘फिटमेंट फैक्टर’ ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।

फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।

यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।’

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?

फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।

आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।

Delhi Metro Stations closed: CJP प्रोटेस्ट के कारण दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन आज भी बंद! देखें पूरी लिस्ट, यहां मिलेगी इंटरचेंज सुविधा

Delhi Metro Stations closed: देश की राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता (CJP)पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। डीएमआरसी ने गुरुवार (23 जुलाई) सुबह बताया कि लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंबा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। DMRC के अनुसार, राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की सुविधा उपलब्ध है।

डीएमआरसी का यह कदम जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच उठाया गया है। इससे पहले बुधवार को भी इसी तरह मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुई थीं। 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने की वजह से बुधवार सुबह के व्यस्त समय में हजारों लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले कई यात्रियों को बीच रास्ते में अपना रूट बदलना पड़ा। कुछ को अपरिचित स्टेशनों पर उतरना पड़ा और वैकल्पिक परिवहन के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

DMRC ने क्या कहा?

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) की तरफ से गुरुवार (23 जुलाई) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “सेवा अपडेट! नीचे बताए गए मेट्रो स्टेशन सुबह 07:30 बजे से अगले आदेश तक बंद रहेंगे। हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट यानी केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज (दूसरी लाइन की मेट्रो बदलने की सुविधा) की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

ये 16 स्टेशन हैं बंद

1. लोक कल्याण मार्ग

2. राजीव चौक

3. पटेल चौक

4. रामकृष्ण आश्रम मार्ग

5. बाराखंभा रोड

6. सुप्रीम कोर्ट

7. सेवा तीर्थ

8. जनपथ

9. मंडी हाउस

10. केंद्रीय सचिवालय

11. आईटीओ

12. दिल्ली गेट

13. इंद्रप्रस्थ

14. खान मार्केट

15. जोर बाग

16. शिवाजी स्टेडियम

मेट्रो बंद होने से लोग हुए परेशान

इससे पहले बुधवार को प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा उपायों के तहत 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने से दफ्तर जाने के व्यस्त समय में मध्य दिल्ली में यात्रियों की आवाजाही बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई। यात्रियों ने बताया कि कई मार्गों पर मेट्रो सेवाएं जारी थीं। लेकिन ट्रेनें बंद किए गए स्टेशनों पर नहीं रुक रही थीं। इसके कारण यात्रियों के पास आगे जाने और फिर सड़क मार्ग से वापस लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

केंद्रीय सचिवालय से होकर यात्रा कर रही वृंदा नामक एक यात्री ने बताया कि प्रदर्शनकारी स्टेशन परिसर के पास जमा हो गए थे, जिससे यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा, “केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शनकारी जमा हो गए थे। उनमें से कई लोग निकास द्वार के पास एकत्र होकर ‘वंदे मातरम’ के नारे लगा रहे थे। वहां भारी अनिश्चितता का माहौल था और लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि वे स्टेशन से बाहर निकल पाएंगे या नहीं।”

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येलो लाइन पर यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री ने बताया कि ट्रेन में की जा रही घोषणाओं के जरिए यात्रियों को सूचित किया जा रहा था कि दिल्ली गेट से खान मार्केट के बीच के स्टेशनों पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कई यात्रियों ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके गंतव्य स्टेशन बंद कर दिए गए हैं तो वे वैकल्पिक रूट तलाशने में जुट गए।

इससे उन्हें दफ्तर, कॉलेज पहुंचने और अन्य जरूरी कामों के लिए देरी हुई। चालू स्टेशनों के बाहर कई लोग ‘नेविगेशन ऐप’ देखते नजर आए। जबकि कुछ अपने परिवार के सदस्यों को फोन कर रहे थे। कई लोग कैब बुक करते दिखे। वहीं, बस स्टॉप और ऑटो-रिक्शा स्टैंड पर लोगों की लंबी कतारें लग गईं।

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Salman Khan Neet News: नीट पेपर लीक को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने बुधवार (22 जुलाई) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को नुकसान पहुंचा, उनके प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। सलमान खान ने छात्रों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने भविष्य और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के लिए मेहनत, ईमानदारी और पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें खुशी है कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके हिंसक रूप लेने की खबरें बेहद दुखद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सोच-समझकर लिखी गई पोस्ट में कहा, “यह आंदोलन इतना शांतिपूर्ण था, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह जानकर और देखकर खुशी होती है कि देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है।”

युवाओं को दी सलाह

हालांकि, सलमान खान ने यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से अपने कब्जे में नहीं लिया जाना चाहिए। सलमान ने छात्रों के साहस और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पीढ़ी शिक्षा के प्रति गंभीर है। भविष्य में देश का नाम रोशन करेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से किया गया यह आंदोलन सही दिशा में उठाया गया कदम है।

अभिनेता ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “यह मामला छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इस आंदोलन का श्रेय सिर्फ देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे भरोसा है कि सरकार भी छात्रों का पूरा सहयोग करेगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए जीत की स्थिति होगी।” सलमान खान ने यह भी कहा कि भारत को भविष्य में दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र बनना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। न ही उनके खिलाफ कोई FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।

EPFO UAN Retrieval: भूल गए हैं अपना UAN नंबर? जानिए पोर्टल और उमंग ऐप से रिकवर करने का स्टेप-बाय-स्टेप आसान तरीका

How to Find Forgotten UAN Number: कर्मचारी भविष्य निधि देश के नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट फंड बनाने का एक सुरक्षित जरिया है। पीएफ खाते में जमा पैसे की जानकारी रखने, पासबुक देखने या क्लेम करने के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अक्सर कई लोग नौकरी बदलने या लंबा समय बीत जाने के बाद अपना UAN नंबर भूल जाते हैं।

अगर आप भी अपना यूएएन (UAN) भूल गए हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप ईपीएफओ (EPFO) के आधिकारिक पोर्टल और उमंग मोबाइल ऐप की मदद से मिनटों में इसे रिकवर कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं इसका पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस।

EPFO पोर्टल के जरिए कैसे खोजें अपना UAN?

ईपीएफओ के मेंबर सेवा पोर्टल से UAN नंबर खोजने की प्रक्रिया बहुत आसान है:

  • वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले ईपीएफओ के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर जाएं और ‘Know Your UAN’ विकल्प पर क्लिक करें।
  • मोबाइल नंबर दर्ज करें: अपना आधार से लिंक मोबाइल नंबर और कैप्चा दर्ज करें, फिर ‘Request OTP’ पर क्लिक करें।
  • ओटीपी दर्ज करें: आपके मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) को भरकर सबमिट करें।
  • पहचान पत्र चुनें: अब अपनी पहचान के लिए आधार, पैन या मेंबर आईडी में से किसी एक को चुनें और मांगी गई जानकारी दर्ज करें।
  • विवरण सबमिट करें: अपना नाम, जन्मतिथि और कैप्चा भरकर ‘Show My UAN’ पर क्लिक करें। आपका UAN नंबर स्क्रीन पर दिख जाएगा और एसएमएस के जरिए भी भेज दिया जाएगा।

Umang App से UAN रिकवर करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

  1. अपने फोन में Umang App खोलें और सर्च बार में ‘EPFO’ टाइप करें।
  2. ‘Employee Centric Services’ में जाकर ‘Know Your UAN’ विकल्प पर क्लिक करें।
  3. अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए वेरिफिकेशन पूरा करें।
  4. पहचान का माध्यम (आधार, पैन या मेंबर आईडी) चुनें।
  5. अपना नाम और जन्मतिथि दर्ज करें।
  6. ‘Show My UAN’ पर क्लिक करते ही आपका यूएएन नंबर स्क्रीन पर आ जाएगा।

सिर्फ पुराना PF नंबर है तो UAN कैसे निकालें?

अगर आपके पास आधार या पैन लिंक नहीं है और केवल पुराना पीएफ नंबर है, तो उमंग ऐप या पोर्टल के जरिए:

  • ‘Know Your UAN’ सेक्शन में जाएं।
  • पहचान के विकल्पों में ‘Member ID’ को चुनें।
  • अपनी पुरानी मेंबर आईडी (PF Number), ईपीएफओ रिकॉर्ड के अनुसार सही नाम और जन्मतिथि दर्ज करें।
  • प्रक्रिया पूरी होते ही आपका UAN जेनरेट या रिकवर हो जाएगा।

‘ORA-20001’ एरर आए तो क्या करें?

अगर प्रक्रिया के दौरान स्क्रीन पर ‘ORA-20001–demographic details do not match’ का मैसेज आता है, तो इसका मतलब है कि आपके आधार कार्ड और ईपीएफओ के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी मैच नहीं कर रही है। यह अंतर आपके नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि या जेंडर में हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको पहले अपने एंप्लॉयर या ईपीएफओ के जरिए अपने प्रोफाइल में करेक्शन कराना होगा, जिसके बाद ही UAN रिकवर हो पाएगा।

Lohia Corp IPO: कल से खुलेगा लोहिया कॉर्प का ₹1101 करोड़ का आईपीओ, पैसा लगाने से पहले जान लें ब्रोकरेज की राय

Lohia Corp IPO GMP and Details: प्राइमरी मार्केट में निवेशकों को पैसा बनाने का एक और जबरदस्त मौका मिलने जा रहा है। टेक्निकल टेक्सटाइल और वोवन प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए मशीनरी बनाने वाली कंपनी लोहिया कॉर्प लिमिटेड का करीब ₹1,101 करोड़ का आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल रहा है।

बाजार में एंट्री से पहले ही ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी ने भी इस इश्यू को लंबी अवधि के लिए ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह दी है। आइए जानते हैं इस आईपीओ का प्राइस बैंड, जीएमपी, जरूरी तारीखें, कंपनी की वित्तीय सेहत और ब्रोकरेज की राय।

Lohia Corp IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹404 से ₹425 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,875
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित है। इश्यू का साइज ₹1,101.28 करोड़ है जिसमें प्रमोटर्स 2.59 करोड़ शेयरों की बिक्री कर रहे है। चूंकि यह पूरी तरह से OFS है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स को जाएगी, कंपनी के खाते में कोई फंड नहीं आएगा।

कंपनी का बिजनेस मॉडल और वित्तीय सेहत

लोहिया कॉर्प टेक्निकल टेक्सटाइल और Raffia इंडस्ट्री के लिए मशीनरी और इक्विपमेंट बनाने वाली ग्लोबल दिग्गज है। यह सीमेंट, उर्वरक, केमिकल्स, फूड ग्रेंस और बैग्स की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक और बोरे बनाने की मशीनें बनाती है।

वित्त वर्ष 2025 में भारतीय वोवन राफिया मशीनरी बाजार में कंपनी की 40.7% की हिस्सेदारी थी, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी हिस्सेदारी 15.4% है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 64.16% बढ़कर ₹193.45 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹117.84 करोड़ था। इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 24.70% बढ़कर ₹1,717 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

InvestorGain के आंकड़ों के मुताबिक, 22 जुलाई को लोहिया कॉर्प का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹40 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसका अपर प्राइस बैंड ₹425 है इस हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग प्राइस: ₹465 प्रति शेयर (₹425 + ₹40) रह सकता है। इस GMP पर निवेशकों को करीब 10% का लिस्टिंग गेन मिलने की संभावना है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

ब्रोकरेज की राय क्या है?

ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी ने इस आईपीओ को ‘Subscribe for Long Term’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालांकि कंपनी का राजस्व मुख्य रूप से एक ही सेगमेंट पर निर्भर है, लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मजबूत पकड़ और ग्रोथ क्षमता को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

खराब मौसम की चेतावनी: अगले 7 दिनों में 22 राज्यों में भारी बारिश और 17 में आंधी-तूफान का अलर्ट! इन 6 जगहों पर हालात बिगड़ने का खतरा

Weekly Weather Forecast: देश भर में सक्रिय मानसून अपना विकराल रूप दिखा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 22 जुलाई को ताजा और विस्तृत वेदर बुलेटिन जारी करते हुए अगले 7 दिनों के लिए बड़े पैमाने पर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अगले 3 से 4 दिनों तक एक्टिव मानसून की स्थिति बनी रहेगी। IMD ने देश के 22 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, 17 राज्यों में तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया है। देश के 6 खास इलाकों में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश की वजह से हालात बिगड़ने की आशंका भी खड़ी हो सकती है।

आइए जानते हैं कि पिछले 24 घंटों में कहां-कहां मूसलाधार आफत बरसी और अगले 7 दिनों तक आपके राज्य में मौसम का क्या मिजाज रहने वाला है।

इन 6 जगहों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अत्यधिक मूसलाधार बारिश के चलते देश के 6 प्रमुख अंचलों और राज्यों में अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 22 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश में भीषण बारिश का अलर्ट है। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, कोंकण और गोवा के अलग-अलग इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश की आशंका है। मध्य महाराष्ट्र में 22 और 23 जुलाई को लगातार दो दिनों तक अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है। इसी तरह गुजरात क्षेत्र में 22 जुलाई से 24 जुलाई तक मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

बीते 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश?

22 जुलाई की सुबह तक पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण गुजरात क्षेत्र में 30 सेमी से भी अधिक की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई। मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या अधिक) हुई। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण व गोवा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) दर्ज की गई। इसी तरह झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश (7 से 11 सेमी) देखने को मिली है।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा का हाल

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई के दौरान भारी बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

पूर्वी राजस्थान: 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी। 22 से 26 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।

पश्चिमी राजस्थान: 22 जुलाई को 40-50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से आंधी और 22 से 26 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है।

पंजाब: 22 जुलाई और 27-28 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। जबकि 23 व 25 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है।

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 22 जुलाई को भारी बारिश होगी और 27 व 28 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश: 26 से 28 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 27 और 28 जुलाई को भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: हिमाचल में 22 जुलाई को बहुत भारी और 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश होगी। उत्तराखंड में 22 से 28 जुलाई तक लगातार भारी बारिश और बिजली कड़कने का अलर्ट है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ

दक्षिण-पश्चिम व पश्चिम मध्य प्रदेश में 22 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी जबकि 23 जुलाई को बहुत भारी और 24-25 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 22 और 23 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जिसके बाद 24-25 जुलाई को भारी बारिश होगी। पूरे क्षेत्र में 30-40 किमी/घंटा की गति से हवाएं चलेंगी। छत्तीसगढ़ में 22 और 23 जुलाई को भारी बारिश और 22 से 26 जुलाई तक आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी और 23 जुलाई को भी भारी बारिश जारी रहेगी।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल में 60 किमी/घंटा की हवाएं

झारखंड में 22 से 26 जुलाई के दौरान 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से तेज आंधी और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई तक लगातार भारी बारिश जारी रहेगी।

बिहार में 22 से 24 जुलाई और 27-28 जुलाई के दौरान भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। 22 से 24 जुलाई के दौरान गांगेय पश्चिम बंगाल में और 26 से 28 जुलाई तक उप-हिमालयी बंगाल में भारी बारिश का अनुमान है। अंडमान व निकोबार में 22 से 28 जुलाई तक तेज हवाएं चलेंगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और नार्थ-ईस्ट में मूसलाधार आफत

असम और मेघालय में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी और 23 से 28 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 22 और 23 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी, जबकि 24 से 28 जुलाई के दौरान भारी वर्षा का पूर्वानुमान है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तटीय कर्नाटक और केरल में तेज सतही हवाएं

हालांकि अगले 7 दिनों तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश अंदरूनी मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधि थोड़ी कम रहेगी, फिर भी तटीय इलाकों में असर दिखेगा। तटीय कर्नाटक में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी। 23 जुलाई और 26 से 28 जुलाई तक भारी बारिश और तेज सतही हवाएं चलेंगी।

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22 और 23 जुलाई को केरल एवं माहे में भारी बारिश और तेज हवाएं चलेंगी जिसके बाद 24 से 28 जुलाई तक व्यापक वर्षा होगी। 22 और 23 जुलाई को तेलंगाना, उत्तरी व दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश होगी। 22 से 28 जुलाई के दौरान तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में तेज सतही हवाएं चलेंगी। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराइकल और रायलसीमा में 22 से 26 जुलाई के दौरान 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान चलने की चेतावनी दी गई है।

क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पलटे भारत आ रहे 2 तेल टैंकर, लाल सागर में भी बढ़ा संकट!

Houthi Warning Saudi Arabia Red Sea: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच लाल सागर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Militia) द्वारा सऊदी अरब को दी गई ‘आंख के बदले आंख’ की खुली चेतावनी के बाद भारत और चीन आ रहे तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर यू-टर्न लेना पड़ा है।

पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉक के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में लाल सागर के इस अहम समुद्री मार्ग पर नया संकट गहराने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर भड़क सकती हैं। जानिए लाल सागर में क्या हुआ और इसका क्या असर हो सकता है।

किन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न?

रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक, जिन तीन तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला है, उनमें से दो सीधे भारत आ रहे थे:

Rodos (रोडोस): लगभग 7 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह टैंकर मंगलवार को लाल सागर में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की तरफ मुड़ गया।

Amazon (अमेजन): भारत की ओर आ रहा यह स्वेजमैक्स टैंकर भी हुथियों की धमकी के बाद वापस स्वेज की ओर लौट गया।

Xin Long Yang (सिन लोंग यांग): चीन जा रहे इस बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन इसने भी आगे बढ़ने के बजाय स्वेज का रास्ता चुन लिया।

हूती विद्रोहियों की ‘आंख के बदले आंख’ वाली चेतावनी क्या है?

यमन के हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब ने यमन पर ‘अन्यायपूर्ण और दमनकारी’ घेराबंदी की है, जिसके जवाब में उन्होंने ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत के तहत सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी तुरंत लागू कर दी है।

हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी है कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह से सामान लोड या अनलोड न करें। अगर कोई जहाज ऐसा करता है, तो उसे किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जाएगा।

जहाजों ने ट्रांसपोंडर बंद किए, बढ़ी हलचल

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद लाल सागर और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यानबू पोर्ट के आसपास नौवहन काफी जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार से लाल सागर में तैर रहे और यानबू पोर्ट पर लोडिंग कर रहे कई तेल टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने और हुथी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं।

वैश्विक शिपब्रोकर क्लार्कसन्स (Clarksons) के अनुसार, अगर हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर लाल सागर के ट्रैफिक पर पड़ता है, तो कच्चे तेल के जहाजों के रास्तों में बड़ा फेरबदल होगा और यानबू से निकलने वाले तेल को यूरोप की तरफ डायवर्ट करना पड़ सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और सऊदी अरब से आता है। भारत आ रहे दो टैंकरों (Rodos और Amazon) के रास्ता बदलने से रिफाइनरियों तक क्रूड पहुंचने में देरी हो सकती है। लाल सागर में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल भाड़ा काफी बढ़ सकता है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा हो सकता है।

DDA फ्लैट में अब बिना अनुमति क्या-क्या बदल सकते हैं? जानिए रिनोवेशन के नए नियम

DDA renovation norms: राजधानी दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। DDA ने अपने फ्लैट्स में मरम्मत और रिनोवेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कई तरह के संशोधनों को मंजूरी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया है। इसी महीने से लागू हुई इस नई नीति के तहत अब फ्लैट मालिक बालकनी की रेलिंग/पैरापेट बढ़ाने, घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग दीवार हटाने, दरवाजे शिफ्ट करने, लॉफ्ट बनाने, वाटरप्रूफिंग के साथ फ्लोरिंग बदलने और पीवीसी पानी की टंकी लगाने जैसे काम बिना DDA या नगर निगम की पूर्व अनुमति के करा सकेंगे।

अब बिना अनुमति के कर सकेंगे ये बदलाव

DDA अधिकारियों के मुताबिक संशोधित नीति के तहत ऐसे बदलावों को Condonable यानी स्वीकार्य कैटेगरी में रखा गया है। इनके लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

बालकनी और सुरक्षा: बेहतर सुरक्षा के लिए बालकनी के पैरापेट (रेलिंग) की ऊंचाई को ग्रिल या ग्लेजिंग लगाकर 5 फीट तक बढ़ाया जा सकता है।

बाउंड्री वॉल: वेंटिलेशन को बनाए रखते हुए फ्रंट और रियर आंगन की दीवारों को वायर फेंसिंग यानी जाली के जरिए 7 फीट तक ऊंचा किया जा सकता है।

दरवाजे बदलना या शिफ्ट करना: फ्रंट या रियर आंगन में नए दरवाजे लगाए जा सकते हैं या मौजूदा दरवाजों की जगह बदली जा सकती है, बशर्ते इससे आम रास्ता बाधित न हो।

दीवारें हटाना: रहने के लिए बड़ी जगह बनाने के उद्देश्य से घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग इंटरनल पार्टिशन वॉल (लगभग 4.5 इंच मोटी दीवार) को बिना अनुमति के हटाया जा सकता है।

इंटीरियर और यूटिलिटी अपग्रेड: इसके तहत सामान रखने के लिए लॉफ्ट बनाना, वाटरप्रूफिंग ट्रीटमेंट के साथ फ्लोरिंग (फर्श) बदलना और ग्राउंड फ्लोर या गैरेज लेवल पर अतिरिक्त पीवीसी (PVC) पानी की टंकियां लगाना शामिल है। इनके लिए अब पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।

DDA ने क्यों बदले 2007 से चले आ रहे नियम?

DDA अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की कई हाउसिंग सोसायटी दशकों पहले बनी थीं। तब परिवारों की जरूरतें आज से अलग थीं। समय के साथ इनमें रहने वाले लोगों को स्टोरेज, वेंटिलेशन या स्पेस का सही इस्तेमाल करने के लिए मामूली बदलाव करने पड़ते थे लेकिन छोटे-छोटे काम के लिए भी मंजूरी लेने में लंबा समय लगता था और शिकायतें बढ़ती थीं।

एक वरिष्ठ DDA अधिकारी ने बताया कि DDA फ्लैटों में बदलाव और रिनोवेशन को नियंत्रित करने वाली नीति में लगभग दो दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ था। 2007 के बाद यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने नीति में संशोधन किया है ताकि स्ट्रक्चरल सेफ्टी को नुकसान पहुंचाए बिना घर मालिकों को सहूलियत दी जा सके।

उन्होंने कहा कि इस नई नीति का मकसद अस्पष्टता को खत्म करना है ताकि DDA का प्रवर्तन दल रूटीन होम इम्प्रूवमेंट की बजाय अवैध कब्जों और असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित कर सके।

किन बदलावों के लिए अभी भी अनिवार्य होगी मंजूरी?

DDA ने साफ किया है कि इस नीति का मतलब अनियंत्रित या अवैध निर्माण की छूट नहीं है। नीचे दिए गए बड़े और स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए औपचारिक अनुमति और प्रमाणन अनिवार्य रहेगा-

स्ट्रक्चरल बदलाव: फ्लैट के मुख्य ढांचे, एक्सटेंशन (विस्तार), बालकनी/छत को पूरी तरह ढकने या स्ट्रक्चरल सेफ्टी को प्रभावित करने वाले किसी भी काम के लिए DDA की मंजूरी लेनी होगी।

किचन और बाथरूम: रसोई या शौचालय में किया जाने वाला ऐसा बदलाव जो इमारत के ढांचे को प्रभावित करता हो।

ऐसे प्रस्तावों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से प्रमाण पत्र, निर्धारित शुल्क और कई मामलों में प्रभावित पड़ोसियों की सहमति जमा करनी होगी। कॉमन एरिया (साझा रास्तों) पर अवैध कब्जा करना, अतिरिक्त मंजिलें बनाना या लोड-बेयरिंग दीवारों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और ऐसा करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि DDA के इस फैसले से दिल्ली के पुराने आवासीय क्षेत्रों के फ्लैट मालिकों और संभावित खरीदारों को सबसे बड़ा फायदा होगा। द्वारका, वसंत कुंज, रोहिणी, पीतमपुरा, मयूर विहार और जनकपुरी जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित पुराने DDA फ्लैटों की रीसेल वैल्यू और मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। पहले खरीदार कानूनी मंजूरी के झंझट के कारण पुराने फ्लैट खरीदने से कतराते थे लेकिन अब वे कानूनी रूप से अपने हिसाब से फ्लैट को आधुनिक बना सकेंगे।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म राइज इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मोहित गावरी ने बताया कि, ‘पहले DDA फ्लैटों में हर छोटे बदलाव के लिए मंजूरी की जरूरत होती थी जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे और खरीदार हिचकिचाते थे। ये नए नियम उस अड़चन को दूर करते हैं और DDA घरों को बाजार में अधिक बिक्री योग्य बनाते हैं। स्थापित DDA कॉलोनियों में जहां नई हाउसिंग सप्लाई सीमित है, यह फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर रीसेल डिमांड और अच्छी कीमतें दिलाने में मदद करेगी।’

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नियमों में ढील मिलने के बाद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि फ्लैट मालिकों द्वारा रेनोवेशन कराने से आर्किटेक्ट्स, ठेकेदारों, इंटीरियर डिजाइनरों और रिनोवेशन कंपनियों के काम और गतिविधियों में तेजी आएगी।