NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी ने क्या कहा? किरन रिजिजू ने सब बताया

NEET paper leak: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET पेपर लीक मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री के हवाले से बताया कि देश में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। पीएम मोदी ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “NEET परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की खबरें मिलने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके अलावा, छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए, बिना किसी देरी के दोबारा परीक्षा कराई गई और नतीजे घोषित किए गए… उन्होंने भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदमों के बारे में भी बताया… उन्होंने दोषियों को सजी देने और मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर ज़ोर दिया जिसमें कोई कमी न हो।”

उन्होंने आगे कहा, “NDA चल रहे मीनसून सत्र के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाएगा। देश के हित में लाए जाने वाले बिलों को पारित कराने के हमारे संकल्प में हम एकजुट हैं। हम विपक्ष से भी आग्रह करते हैं कि भले ही अलग-अलग पार्टियों की राय अलग-अलग हो, लेकिन वे देश, उसके भविष्य और युवाओं के लिए मिलकर काम करें।”

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए के सहयोगी दलों से संसद के विधायी कार्यों में एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की। साथ ही विपक्षी दलों से भी रचनात्मक भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं। लेकिन देश के भविष्य और युवाओं के हित में सभी सांसदों की साझा जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोमवार को संसद की ओर मार्च कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसमें हर साल 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। इस वर्ष पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

यह एग्जाम भारत में एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS), बीएचएमएस (BHMS), बीयूएमएस (BUMS) सहित विभिन्न मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। इसका आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा किया जाता है।

इसी दौरान सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी विवाद सामने आया, जिसमें कई छात्रों ने गलत अंक दिए जाने और कुछ मामलों में दूसरे छात्रों के परिणाम जारी होने जैसी शिकायतें की थीं। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौते में उलझा रहा पाकिस्तान उधर भारत ने चिनाब पर 4870 MW हाइड्रोपावर प्लान पर लगा दिया जोर!

Indus Waters Treaty: 1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के करीब 15 महीने बाद भारत ने साफ कर दिया है कि अब यह समझौता अपने पुराने रूप में वापस नहीं लौटेगा। सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि भारत सरकार पाकिस्तान के साथ इस संधि पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार है। लेकिन इसके मौजूदा स्वरूप को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।

वहीं, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान को बड़ा रणनीतिक जवाब देते हुए चिनाब बेसिन में 4870 मेगावाट (MW) की कुल क्षमता वाली 5 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम बेहद तेज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मौजूदा स्वरूप में सिंधु जल समझौता दोबारा काम नहीं कर सकता। आइए जानते हैं भारत की इन 5 बड़े प्रोजेक्ट का पूरा विस्तृत ब्योरा और उनकी मौजूदा स्थिति।

चिनाब बेसिन पर भारत के 5 बड़े प्रोजेक्ट: जानिए किस प्रोजेक्ट में कितना हुआ काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं में सावलकोट (1856 MW), पाकल दुल (1000 MW), रतले (850 MW), किरू (624 MW) और क्वार (540 MW) प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NHPC की 18 मई 2026 की लेटेस्ट फाइनेंशियल और टेक्निकल अर्निंग कॉल्स के मुताबिक ये सभी परियोजनाएं इस समय अलग-अलग चरणों में हैं।

इनमें सबसे पहले पाकल दुल जलविद्युत परियोजना की बात करें तो 1000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट का मार्च 2026 तक 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और NHPC ने इसे वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2027 के बीच चालू करने का लक्ष्य रखा है। 624 मेगावाट क्षमता वाली किरू परियोजना का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका 82 प्रतिशत निर्माण काम पूरा कर लिया गया है। इसे भी जनवरी से मार्च 2027 के बीच ही शुरू करने की समयसीमा तय की गई है।

तीसरी प्रमुख परियोजना 540 मेगावाट की क्वार हाइड्रोपावर परियोजना है, जिसका अब तक 33 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसे मार्च 2028 तक चालू करने का शेड्यूल निर्धारित किया गया है। चौथे प्रोजेक्ट के रूप में 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना पर काम चल रहा है। इसका मार्च 2026 तक 29 प्रतिशत निर्माण काम पूरा हो चुका है और इससे नवंबर 2028 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

इस पूरी पाइपलाइन में सबसे बड़ी परियोजना 1856 मेगावाट क्षमता वाली सावलकोट परियोजना है। इसका अभी कंस्ट्रक्शन चालू नहीं हो पाया है। NHPC के अनुसार यह प्रोजेक्ट फिलहाल केंद्र सरकार की वित्तीय और पर्यावरणीय मंजूरियों के चरण में है। केंद्र सरकार से औपचारिक निवेश मंजूरी मिलने की तारीख से इसके निर्माण में लगभग 96 महीने यानी 8 साल का समय लगेगा। सावलकोट अकेली परियोजना इस 5-प्रोजेक्ट पाइपलाइन की कुल 4870 मेगावाट क्षमता का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है। बाकी 4 निर्माणाधीन परियोजनाएं मिलकर 3014 मेगावाट क्षमता की हैं।

NHPC मार्च 2026 तक पाकल दुल, किरू, क्वार और रतले परियोजनाओं पर कुल 16024 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है जबकि इन चारों की कुल अनुमानित संयुक्त लागत लगभग 27945 करोड़ रुपये है। जब ये पांचों प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू हो जाएंगे तो इनसे सालाना लगभग 18.61 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।

भारत का रुख साफ, पहले आतंकवाद खत्म करे पाकिस्तान

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भविष्य में पानी के बंटवारे के प्रावधानों को दोबारा एक्टिव करने के लिए एक संशोधित संधि की आवश्यकता होगी। हालांकि यह इस शर्त पर निर्भर करेगा कि इस्लामाबाद भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म करे। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये परियोजनाएं भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, ग्रिड स्थिरता और क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करेंगी। इसके साथ ही सिंधु बेसिन में भारत के अधिकारों का अधिक उपयोग सुनिश्चित करेंगी।

सिंधु जल संधि स्थगित करने से लेकर अब तक की पूरी टाइमलाइन

1960 की संधि के अनुच्छेद III और अनुलग्नक D के तहत भारत को चिनाब और अन्य पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत उत्पन्न करने की अनुमति संधि के दौरान भी प्राप्त थी। लेकिन पाकिस्तान द्वारा पैदा किए गए विवादों और आतंकवाद के कारण हालात बदलते गए-

पहला औपचारिक नोटिस- 25 जनवरी 2023

भारत ने किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर विवाद के बाद सिंधु जल समझौते में संशोधन की मांग करते हुए पाकिस्तान को पहला औपचारिक नोटिस भेजा।

व्यापक समीक्षा की मांग- 30 अगस्त 2024

भारत ने संधि के अनुच्छेद XII(3) के तहत व्यापक समीक्षा और संशोधन की मांग करते हुए दूसरा नोटिस जारी किया।

पहलगाम हमला और कठोर फैसला- 22-23 अप्रैल 2025

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए। इसके ठीक अगले दिन (23 अप्रैल) सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने फैसला लिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि को स्थगित रखा जाएगा।

पाकिस्तान का रुख- 02 जुलाई 2026

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में भारत के एकतरफा फैसले को खारिज किया और आतंकवाद के आरोपों को नकारते हुए संधि को बाध्यकारी बताया।

मध्यस्थता अदालत का फैसला खारिज- 15 मई 2026

स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) द्वारा गठित ट्रिब्यूनल ने भारतीय रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं में अधिकतम पॉन्डेज की गणना पर एक फैसला जारी किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मध्यस्थता अदालत को अवैध बताते हुए फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने अतीत में युद्धों, सैन्य संकटों और लंबे समय की द्विपक्षीय शत्रुता के बावजूद भी 1960 की इस संधि का पालन किया था। हालांकि सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान से मिल रहे लगातार समर्थन ने इस संधि को चलाए रखने के लिए जरूरी विश्वास को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत अब अपने अधिकार क्षेत्र की नदियों के पानी का भरपूर और कुशल उपयोग अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन से कर्मचारी नाराज! इस बात पर यूनियनों और सरकार में भारी टकराव

8th Pay Commission Pension Update: 8वें वेतन आयोग के गठन को 3 नवंबर 2026 तक लगभग 9 महीने पूरे होने वाले हैं। आयोग अपनी 18 महीने की निर्धारित समय-सीमा का आधा सफर जल्द तय कर लेगा। जुलाई महीने में कोलकाता और भुवनेश्वर का दौरा पूरा करने के बाद अब आयोग देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों के साथ बैठकों का अगला दौर शुरू करने जा रहा है।

लेकिन आयोग की इन सिफारिशों के बीच पेंशन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन और कर्मचारी यूनियनों की मांगों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सरकार नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के रिव्यू पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली पर अड़े हुए हैं।

गजट नोटिफिकेशन का क्या है मैंडेट?

नवंबर 2025 में जारी सरकारी गजट नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग की नियम एवं शर्तों (ToR) को स्पष्ट किया गया है:

मौजूदा स्कीम्स का रिव्यू: आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह NPS और अप्रैल 2025 में लागू हुई UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन लाभों की समीक्षा करे।

सुधार की सिफारिशें: नोटिफिकेशन में NPS/UPS को खत्म करने या ओपीएस (OPS) वापस लाने का कोई जिक्र नहीं है। आयोग को केवल मौजूदा फ्रेमवर्क के भीतर ही सुधार और सुविधाएं बढ़ाने के सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

वित्तीय बोझ का ध्यान: सरकार ने आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि बिना योगदान वाली पेंशन योजनाओं के वित्तीय प्रभाव का ध्यान रखकर ही कोई फैसला लिया जाए।

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारी यूनियनों की मांगें और सरकार का रुख एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं:

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों का क्या है तर्क?

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में ओपीएस की बहाली की पुरजोर वकालत की है। यूनियनों का तर्क है कि NPS के तहत पेंशन पूरी तरह से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, जिससे 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

कर्मचारी संगठनों ने आंकड़े देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 में UPS लागू होने के बावजूद, लगभग 26 लाख NPS सब्सक्राइबर्स में से केवल 1.22 लाख (लगभग 4.5%) कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। यह दिखाता है कि कर्मचारियों को यह स्कीम खास पसंद नहीं आ रही है।

पेंशनर्स एसोसिएशनों की मांग है कि अगर ओपीएस पूरी तरह लागू नहीं होता, तो कम से कम न्यूनतम पेंशन की गारंटी, सरकार का अधिक अंशदान और निश्चित आय का मजबूत प्रावधान किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

8वां वेतन आयोग आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों का दौरा कर राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और कर्मचारी यूनियनों के साथ अपनी परामर्श प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, आयोग और केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गजट के सीमित दायरे (NPS/UPS रिव्यू) और कर्मचारियों की मुख्य मांग OPS बहाली के बीच एक संतुलित और सर्वमान्य रास्ता निकालने की होगी।

लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किया तबाही वाला हमली, इस बीच 17 अमेरिकी सैनिक मारे गए तो ट्रंप ने खाई ये कसम

Iran-US War Update: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने सोमवार रात लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए। दूसरी ओर इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। वीकेंड पर अमेरिकी सैनिकों की हुई मौतों और नुकसान से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भयंकर बदले की कसम खाई है।

5 घंटे चला ऑपरेशन: US CENTCOM ने इन ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी मध्य कमान (U।S। Central Command – CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस ताजा कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक सोमवार रात को ईरान पर किया गया ताजा हमला करीब 5 घंटे तक चला।

अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों, समुद्री क्षमताओं और एयर डिफेंस सिस्टम को सीधे तौर पर निशाना बनाया और तबाह कर दिया। वाशिंगटन का कहना है कि इन स्ट्राइक्स का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट और कमजोर करना है।

17 पहुंची मृत अमेरिकी सैनिकों की संख्या, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

हाल ही में वीकेंड के दौरान हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिकी सेना के हताहतों की संख्या बढ़ गई है। इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अमेरिकी सैनिकों के लिए खूनी साबित हुए इस वीकेंड के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान से कड़ा बदला लेने की कसम खाई है। बीते हफ्ते में ट्रंप ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी थी। इसमें ईरान के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाना शामिल है।

कैसे शुरू हुई यह जंग और दुनिया पर क्या पड़ रहा है असर?

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक साथ बड़ा हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी थीं। युद्ध के दौरान ईरान पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों और लेबनान में हुए इजराइली हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी अनिश्चितता छा गई है।

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US Iran War: ईरान युद्ध पर ट्रंप ने दे दिया एक बड़ा अपडेट! क्या अब थम जाएगा युद्ध, समझें अमेरिका का पूरा प्लान

US Iran War Ceasefire Update: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे भीषण संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जद्दोजहद जारी हैं। कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि 10 दिनों के एक अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव भी तैयार है।

लेकिन इन सब के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल युद्ध पर ‘पॉज’ बटन दबाने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अभी युद्ध उस मोड़ पर नहीं पहुंचा है जहां कूटनीति सैन्य दबाव से बेहतर डील दे सके। आइए समझते हैं कि अमेरिका सीजफायर के प्रस्ताव पर कदम पीछे क्यों खींच रहा है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

10 दिनों का सीजफायर प्रस्ताव क्या है और किसने तैयार किया?

क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए मध्य पूर्व के 4 प्रमुख देश कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्ताव के ये है मुख्य बिंदु:

  • अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल 10 दिनों का अस्थायी सीजफायर लागू हो।
  • इस विराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सीधी बातचीत हो।
  • यदि 10 दिनों का विराम सफल रहता है, तो एक व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे पर आगे की चर्चा की जाए।
  • कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

ईरान ने इस बात को स्वीकार किया है कि उसे सीजफायर का प्रस्ताव मिला है और वह इस पर विचार कर रहा है, हालांकि उसने अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।

सीजफायर के प्रस्ताव को क्यों टाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव पर तुरंत मुहर न लगाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े रणनीतिक कारण हैं:

A. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बार्गेनिंग पावर: अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने से अमेरिका को बातचीत की मेज पर ज्यादा बढ़त मिलेगी।

B. अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला: हाल ही में जोर्डन में हुए एक ईरानी मिसाइल हमले में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए थे। इस घटना ने वाशिंगटन के रुख को और सख्त कर दिया है। अब अमेरिका का ध्यान युद्ध रोकने से हटकर जवाबी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका किसी भी स्थिति में खुद को कमजोर दिखाकर बातचीत में शामिल नहीं होना चाहता।

ये 4 देश ही क्यों कर रहे हैं मध्यस्थता?

इन चारों देशों के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं:

ओमान: ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक गुप्त बैकचैनल के रूप में काम करता आया है।

कतर: कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है, और साथ ही ईरान के साथ भी इसके कामकाजी संबंध हैं।

मिस्र: मिस्र अरब जगत का एक प्रमुख देश है, जो क्षेत्रीय युद्ध को फैलने से रोकने के लिए लगातार सक्रिय रहता है।

पाकिस्तान: पाकिस्तान की सीमाएं ईरान से लगती हैं और खाड़ी देशों व अमेरिका दोनों के साथ उसके करीबी संबंध हैं। वह इस डर से मध्यस्थता में जुटा है ताकि युद्ध से उसका अपना क्षेत्र अस्थिर न हो।

इस युद्ध से दांव पर क्या लगा है?

यह सीजफायर सिर्फ लड़ाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अगर यह समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुलता है, तो भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ना और आर्थिक दबाव महसूस होना तय है।

Silver Rate Today: आज का चांदी का भाव! लगातार छठे दिन गिरावट, जानिए आज 1 किलो सिल्वर का ताजा भाव

Silver Price Today: अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र है, जब चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

बाजार के जानकारों के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक चांदी की कीमत में कुल 15,500 रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निवेशक वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में हल्की तेजी दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 1,618 रुपये (0.75%) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

दिल्ली में 1 किलो सिल्वर ₹2,35,100

अगर आप आज चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जान लेना आपके लिए जरूरी है। आज दिल्ली में चांदी की कीमत ₹235.10 प्रति ग्राम और ₹2,35,100 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। दिल्ली देश के सबसे बड़े सर्राफा बाजारों में से एक है। यहां चांदी की मांग हमेशा ऊंची रहती है। निवेश के साथ-साथ लोग चांदी का इस्तेमाल आभूषण, बर्तन, सजावटी सामान, सिक्के और उपहार के रूप में भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसी वजह से दिल्ली में चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की लगातार नजर रहती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अपने शहर का ताज़ा रेट जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आप निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अधिकृत ज्वेलर्स या सर्राफा बाजार से मौजूदा कीमत की पुष्टि करने के बाद ही खरीदारी करें।

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LPG Cylinder Price Today: एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी, जानिए आपके शहर में आज कितनी है घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमत

LPG Cylinder Price Today: अगर आप आज यानी 21 जुलाई को एलपीजी गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जान लें। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने 21 जुलाई के लिए घरेलू और 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम जारी कर दिए हैं। राहत की बात यह है कि आज गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। उपभोक्ताओं को मौजूदा दरों पर ही सिलेंडर मिलेगा। इस महीने की शुरुआत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटाए गए थे। इसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

घरेलू एलपीजी सिलेंडर के प्रमुख शहरों में दाम

दिल्ली – ₹942.00

मुंबई – ₹941.50

कोलकाता – ₹968.00

चेन्नई – ₹957.50

चंडीगढ़ – ₹951.50

देहरादून – ₹961.00

हैदराबाद – ₹934.00

भुवनेश्वर – ₹968.00

तिरुवनंतपुरम – ₹951.00

19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम

दिल्ली – ₹2,930.00

मुंबई – ₹2,885.50

कोलकाता – ₹3,082.00

चेन्नई – ₹3,106.00

चंडीगढ़ – ₹2,954.50

देहरादून – ₹2,983.50

हैदराबाद – ₹2,052.50

भुवनेश्वर – ₹3,115.00

तिरुवनंतपुरम – ₹2,970.50

घर बैठे ऐसे जानें अपने शहर का रेट

अगर आप अपने शहर में एलपीजी सिलेंडर की ताज़ा कीमत जानना चाहते हैं, तो इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की नवीनतम दरें आसानी से देख सकते हैं।

गैस सिलेंडर लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी लेते समय यह सुनिश्चित करें कि सिलेंडर की सेफ्टी सील सही सलामत हो। यदि गैस रिसाव की आशंका हो तो सिलेंडर स्वीकार न करें। सिलेंडर पर अंकित एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें और संभव हो तो डिलीवरी के समय उसका वजन भी चेक करें। रेगुलेटर सही तरीके से फिट होना चाहिए और भुगतान के बाद बिल या कैश मेमो जरूर लें। साथ ही सिलेंडर को हमेशा सीधी स्थिति में, हवादार स्थान पर तथा आग या तेज धूप से दूर रखें, ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।

नए रेट कब जारी होते हैं?

भारत में एलपीजी सिलेंडर के नए रेट आमतौर पर हर महीने की 1 तारीख को सरकारी तेल कंपनियां (Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum) जारी करती हैं। नई दरें 1 तारीख की सुबह से लागू हो जाती हैं। हालांकि, घरेलू (14.2 किलोग्राम) एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हर महीने बदलाव जरूरी नहीं होता।

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कई बार कीमतें कई महीनों तक स्थिर रहती हैं। जबकि 19 किलोग्राम कमर्शियल सिलेंडर के दाम अपेक्षाकृत अधिक बार बदले जा सकते हैं। विशेष परिस्थितियों में सरकार या तेल कंपनियां महीने के बीच में भी घरेलू सिलेंडर की कीमतों में बदलाव कर सकती हैं।

सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा!भूस्खलन के बाद 7 मजदूरों की मौत, कई फंसे, गैस रिसाव से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण

Sikkim Tunnel Collapse Latest Update: सिक्किम के नामची जिले के समरदुंग (Samardung) क्षेत्र में निर्माणाधीन सुरंग में हुए दर्दनाक हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई मजदूर अभी भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है। सोमवार 20 जुलाई की दोपहर हुए भूस्खलन के कारण सुरंग का एंट्री गेट पूरी तरह बंद हो गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल सके। हादसे के बाद शुरू किए गए राहत एवं बचाव अभियान को सुरंग के भीतर मीथेन गैस के रिसाव ने और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, गैस के प्रभाव के कारण कई बचावकर्मियों को सुरंग के अंदर चक्कर आने लगे और कुछ बेहोश भी हो गए, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, जिला प्रशासन ने सात लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। मृतकों के शवों को सिंगतम जिला अस्पताल, गंगटोक स्थित एसटीएनएम अस्पताल और नामची जिला अस्पताल भेजा गया है।

नामची जिला प्रशासन, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज, एनएचपीसी और अन्य विभागों की टीमें भी मौके पर तैनात हैं।

जिला कलेक्टर अनूप तमलिंग ने बताया कि सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की सटीक संख्या का अभी सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मीथेन गैस, संकरी सुरंग और कम विजिबिलिटी के कारण बचाव अभियान लगातार कठिन होता जा रहा है। फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

27 मजदूर फंसे

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, निर्माणाधीन सड़क सुरंग का एंट्री गेट बंद हो गया, जिससे उसके भीतर कम से कम 27 मजदूर फंस गए। अधिकारियों के मुताबिक, भूस्खलन के कारण भूमिगत चट्टानों और भू-स्तरों में बदलाव आने से प्राकृतिक रूप से मीथेन गैस का रिसाव शुरू हुआ है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए घटनास्थल पर एंबुलेंस तैनात हैं। गैस मास्क सहित विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस बचाव दल लगातार सुरंग के भीतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

तमलिंग ने कहा कि इस समय प्राथमिकता फंसे हुए मजदूरों को बचाना है, जिसके बाद घटना की विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है। जबकि गैस मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों से लैस बचावकर्मी फंसे हुए मजदूरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।

अब तक सात की मौत की पुष्टि

नामची में NHPC तीस्ता स्टेज VI प्रोजेक्ट की एक सुरंग दुर्घटना में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। शवों को पास के अस्पतालों में भेजा गया है। जबकि बचाव दल निर्माणाधीन सुरंग के अंदर फंसे हुए कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि समरडुंग सुरंग में फंसे मजदूरों की सही संख्या की अभी भी पुष्टि की जा रही है। यह संख्या मौजूदा अनुमान से कम या ज्यादा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि भूस्खलन के कारण समरदुंग सुरंग के अंदर संदिग्ध गैस रिसाव भी हुआ है।

पुलिस ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि भूस्खलन के कारण भूमिगत परतों या चट्टानों की संरचना में हलचल होने से यह गैस प्राकृतिक रूप से निकल रही है। यह टनल NHPC के तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए पटेल इंजीनियरिंग द्वारा ADIT के हिस्से के तौर पर बनाई जा रही थी।

किराए के मकान के साथ चल रहा है होम लोन? ITR दाखिल करते समय ऐसे उठाएं डबल टैक्स छूट का फायदा, बचेंगे लाखों

HRA and Home Loan Tax Benefit: नया घर खरीदने के बाद भी किराए के मकान में रहने वाले या नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर में रहने वाले नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के मन में अक्सर एक सवाल उठता है। ‘क्या मैं एक साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और होम लोन दोनों पर टैक्स छूट का दावा कर सकता हूं?’

एक व्यक्ति ने एक्सपर्ट से सवाल किया कि, ‘मैंने एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट के लिए होम लोन लिया था, जिसका पजेशन मुझे अगस्त 2025 में मिला। मैंने तुरंत इस फ्लैट को किराए पर दे दिया और खुद एक दूसरे किराए के फ्लैट में रह रहा हूं। क्या मैं फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए आईटीआर फाइल करते समय पूरे साल के लिए HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स लाभ का दावा कर सकता हूं?’

आइए टॉप फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं कि इनकम टैक्स एक्ट इस बारे में क्या कहता है और इसका पूरा नियम क्या है।

1. क्या एक साथ मिल सकती है HRA और होम लोन पर छूट?

जी हां, बिल्कुल! इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत एक ही समय में HRA और होम लोन दोनों पर टैक्स बेनिफिट क्लेम करने पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं है। बशर्ते आप इन दोनों क्लेम से जुड़ी बुनियादी शर्तों को पूरा करते हों:

HRA के लिए शर्त: इनकम टैक्स की धारा 10(13A) के तहत आपको अपनी कंपनी से HRA मिलता हो, आप वास्तव में उस घर का किराया चुका रहे हों जिसमें आप रह रहे हैं, और वह घर आपके खुद के नाम पर नहीं होना चाहिए।

होम लोन के लिए शर्त: जिस वित्तीय वर्ष में आपको प्रॉपर्टी का पजेशन मिलता है, आप उस पूरे साल के लिए होम लोन के टैक्स बेनिफिट का दावा करने के हकदार हो जाते हैं।

2. पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलेगा अधिकतम फायदा

ध्यान रखें कि HRA और होम लोन के मूलधन पर मिलने वाली टैक्स छूट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन सा टैक्स व्यवस्था चुना है। धारा 10(13A) के तहत HRA पर छूट और धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन पुनर्भुगतान पर ₹1.50 लाख तक की छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में ही मिलती है। अगर आप नई टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो ये दोनों छूट खत्म हो जाएंगी।

3. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का नियम

लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट का गणित इस बात पर निर्भर करता है कि घर से आपको क्या कमाई हो रही है और आपने कौन सा टैक्स रिजीम चुना है। टैक्स व्यवस्था होम लोन के ब्याज (Section 24b) पर मिलने वाली छूट के नियम:

पुरानी टैक्स व्यवस्था- आप साल भर में चुकाए गए पूरे ब्याज को मकान से मिले किराए के एवज में क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा, हाउस प्रॉपर्टी हेड के तहत होने वाले ₹2 लाख तक के नुकसान को अपनी अन्य आय के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। अगर नुकसान ₹2 लाख से ज्यादा है, तो उसे अगले 8 सालों तक आगे ले जाया जा सकता है।

नई टैक्स व्यवस्था- नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती केवल आपके द्वारा कमाए गए टैक्स योग्य किराए की रकम तक ही सीमित रहेगी। इसमें हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को किसी अन्य आय के साथ सेट-ऑफ करने या भविष्य के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति नहीं है।

4. प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट का अतिरिक्त लाभ

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पजेशन मिलने वाले साल में टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ा फायदा होता है। आप पजेशन वाले पूरे साल के होम लोन ब्याज का दावा तो कर ही सकते हैं। इसके साथ ही, घर का पजेशन मिलने से पहले की अवधि के दौरान आपने जो भी कुल ब्याज चुकाया था, उसका 1/5 हिस्सा भी हर साल क्लेम कर सकते हैं।

कुल मिलाकर आपकी प्रॉपर्टी किराए पर उठाई गई है और आप खुद किसी अन्य मकान में किराया देकर रह रहे हैं, तो आप नियमों का पालन करते हुए एक ही साल में HRA और होम लोन (ब्याज + मूलधन) दोनों पर डबल टैक्स ब्रेक का फायदा उठा सकते हैं। बेहतर लाभ के लिए अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार सही टैक्स रिजीम का चुनाव करें।

Gold-Silver Outlook: गोल्ड-सिल्वर मार्केट में मचा हाहाकार! भारी मंदी के बीच रॉबर्ट कियोसाकी ने कर दी ये बड़ी भविष्यवाणी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कल का मौसम 21 जुलाई: जम्मू कश्मीर, हिमाचल के लिए IMD की रेड वॉर्निंग! यूपी संग इन 21 राज्यों में भयंकर बारिश का अलर्ट

India Weather Update: देश भर में मानसून ने अपना सबसे विकराल और आक्रामक रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 जुलाई के लिए मौसम का बड़ा बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। इसका मतलब है कि इन जगहों पर अथॉरिटी को ऐक्शन लेने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड समेत देश के 21 से अधिक राज्यों में भयंकर बारिश और आंधी-तूफान का ऑरेंज और येलो कलर वॉर्निंग भी जारी की गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, देश भर में एक साथ 8 से अधिक चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ प्रणालियां सक्रिय हैं, जो मानसून को और अधिक घातक बना रही हैं।

इन 2 पहाड़ी राज्यों के लिए IMD की रेड कलर वॉर्निंग

मौसम विभाग ने 21 जुलाई को दो राज्यों में भारी बारिश को लेकर रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। यहां भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ के खतरे को देखते हुए उच्चतम स्तर का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने का अलर्ट है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कई जगहों पर मूसलाधार बारिश के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल आशंका है।

यूपी, बिहार और दिल्ली-एनसीआर समेत 11 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई को देश के मैदानी और पहाड़ी इलाकों के 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भयंकर बारिश होने की संभावना है। यूपी के अलग-अलग जिलों में 21 जुलाई को मूसलाधार से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में मानसून पूरी तरह मेहरबान है, यहां भी कई स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज-चमक के साथ बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। देवभूमि उत्तराखंड में 21 जुलाई को कई जगहों पर बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में कल तेज बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना है।

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बादलों का जमघट रहेगा और बहुत भारी बारिश होगी। कोंकण और गोवा में तटीय इलाकों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। महाराष्ट्र के मध्य अंचलों में 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

राजस्थान, एमपी और झारखंड समेत 8 राज्यों में भारी बारिश

देश के 8 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। एमपी के पश्चिमी इलाकों में 21 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड और ओडिशा दोनों राज्यों में 21 जुलाई को भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

गुजरात के मैदानी अंचलों में 21 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आकाशीय बिजली और तूफानी हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहेगा। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है।

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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में दिन के समय काफी तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।