कमाई तगड़ी पर बचत जीरो! क्या आप भी फंस चुके हैं ‘लाइफस्टाइल क्रीप’ के इस मायाजाल में? जानें बचने के 5 आसान उपाय

Financial Planning and Budgeting Tips: नौकरी में प्रमोशन होना, बंपर सैलरी हाइक मिलना या बिजनेस से होने वाली कमाई का बढ़ना हर किसी को एक सुखद अहसास देता है। इसे देखकर लगता है कि हमारे वित्तीय लक्ष्य बिल्कुल सही रास्ते पर हैं। इसके बावजूद, एक कड़वी हकीकत यह भी है कि समाज में ‘मोटी सैलरी’ कमाने वाले कई लोग भी महीने का अंत आते-आते पैसों की तंगी से जूझने लगते हैं।

असल में दिक्कत यह नहीं है कि वे हर महीने कितना कमा रहे हैं, बल्कि समस्या उस अंतर में है जो उनके बैंक खाते में आने वाले पैसे और चुपके से जेब से बाहर जाने वाले खर्चों के बीच होता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में ‘अफोर्डेबिलिटी’ का मतलब केवल यह नहीं है कि आप आज कोई चीज खरीद सकते हैं या नहीं, बल्कि इसका मतलब यह है कि क्या आप अपनी बचत को नुकसान पहुंचाए या बिना कर्ज लिए उसे लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे प्रैक्टिकल बजटिंग टिप्स, जो आपकी अच्छी सैलरी को असल मायने में आपकी ‘आर्थिक सुरक्षा’ में बदल सकते हैं।

1. CTC के भ्रम से बाहर निकलें, ‘इन-हैंड सैलरी’ से बनाएं बजट

ज्यादातर लोग अपने सालाना कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) या ग्रॉस सैलरी के हिसाब से अपने खर्चों की प्लानिंग करने की गलती कर बैठते हैं। सीटीसी का आंकड़ा नौकरी बदलते समय या सैलरी नेगोशिएशन के दौरान तो बहुत काम आता है, लेकिन घर का बजट चलाने में इससे कोई मदद नहीं मिलती।

आपको हमेशा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि टैक्स (TDS), प्रोविडेंट फंड (PF) और अन्य कटौतियों के बाद हर महीने आपके बैंक अकाउंट में वास्तविक रूप से कितना पैसा क्रेडिट हो रहा है। अगर आप खाते में आने वाली रकम से बड़े आंकड़े पर अपना बजट तैयार करेंगे, तो महीने के आखिरी हफ्ते में निराशा ही हाथ लगेगी।

2. फिक्स्ड खर्चे बयां करते हैं आपके बजट का सच

अपने वित्तीय स्वास्थ्य को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप उन खर्चों की एक लिस्ट बनाएं जिन्हें आप किसी भी कीमत पर टाल नहीं सकते। इसमें आपके घर का किराया या होम लोन की EMI, बच्चों की स्कूल फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम, कार लोन, राशन का खर्च और बिजली-पानी के यूटिलिटी बिल शामिल होते हैं।

इन अनिवार्य खर्चों को अलग करने के बाद जो रकम बचती है, वही आपके बजट की असली ‘फ्लेक्सिबिलिटी’ तय करती है। इस एक्सरसाइज को करने के बाद बहुत से लोगों को यह देखकर हैरानी होती है कि अपनी मर्जी से खर्च करने के लिए उनके पास उतनी बड़ी रकम बची ही नहीं है, जितना वे मानकर चल रहे थे।

3. ‘लाइफस्टाइल अपग्रेड’ करने से पहले दो बार सोचें

सैलरी में बढ़ोतरी होते ही अक्सर लोग बड़े वित्तीय कमिटमेंट कर लेते हैं। जैसे ही आय बढ़ती है, एक बड़ा घर किराए पर लेना, महंगी कार खरीदना या हर वीकेंड पर महंगे रेस्टोरेंट में जाना बहुत आसान और किफायती लगने लगता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि ये लाइफस्टाइल अपग्रेड धीरे-धीरे आपके स्थायी फिक्स्ड खर्चों में बदल जाते हैं।

अगर भविष्य में कभी नौकरी में कोई बदलाव होता है, बिजनेस में मंदी आती है या किसी आपातकालीन स्थिति के कारण आपकी आय कम होती है, तो इन बढ़े हुए फिक्स्ड कमिटमेंट्स को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि फाइनेंशियल प्लानर्स हमेशा सैलरी हाइक मिलने के कम से कम 3 से 6 महीने बाद तक कोई बड़ा लाइफस्टाइल अपग्रेड न करने की सलाह देते हैं।

4. पहले बचत करें, फिर बचे हुए पैसों को खर्च करें

मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों में बजटिंग की सबसे आम गलती यह होती है कि वे महीने भर खुलकर खर्च करते हैं और सोचते हैं कि महीने के अंत में जो कुछ बचेगा, उसे बचा लेंगे। हकीकत में महीने के अंत तक बचने वाली यह रकम या तो बेहद मामूली होती है या फिर शून्य होती है।

वित्तीय सलाहकार हमेशा यह सुझाव देते हैं कि आपको अपनी बचत और निवेश (जैसे- म्यूचुअल फंड एसआईपी या पीपीएफ) को महीने के किसी अन्य जरूरी बिल की तरह देखना चाहिए। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए, सबसे पहले इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट या लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए पैसे अलग कर दें। ऐसा करने से फिजूलखर्ची के चक्कर में आपकी बचत कभी नहीं छूटेगी।

5. अनचाहे खर्चों और आपातकाल के लिए रखें जगह

एक ऐसा बजट जो केवल तभी काम करता है जब सब कुछ आपकी प्लानिंग के मुताबिक चल रहा हो, असल में एक बेहद कमजोर बजट है। जिंदगी में कभी भी मेडिकल इमरजेंसी, घर या गाड़ी की अचानक मरम्मत, पारिवारिक संकट या कुछ समय के लिए नौकरी छूटने जैसी परिस्थितियां आ सकती हैं।

इसी वजह से एक मजबूत इमरजेंसी फंड का होना और खुद पर बहुत ज्यादा कर्ज (EMIs का बोझ) न लादना समझदारी की निशानी है। यही एक छोटी सी तैयारी एक सामान्य वित्तीय असुविधा और एक बड़े वित्तीय संकट के बीच का अंतर तय करती है।

कुल मिलाकर आपकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी इस बात से तय नहीं होती कि आपकी सैलरी कितनी बड़ी है। यह इस बात से तय होती है कि क्या आप बिना क्रेडिट कार्ड या कर्ज के जाल में फंसे अपने सभी मासिक खर्चों को पूरा कर पा रहे हैं और भविष्य के लिए पर्याप्त बचत कर रहे हैं या नहीं। हर दो-तीन महीने में अपने खर्चों का रिव्यू करना आपको चौंकाने वाले नतीजे दे सकता है। कई बार फायदा ज्यादा कमाने से नहीं, बल्कि यह समझने से होता है कि आप उसे खर्च कैसे कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹1 लाख का लोन लेकर शुरू किया काम, अब सालाना ₹8 लाख की कमाई! मिलिए छत्तीसगढ़ की ‘लखपति दीदी’ दिलमति से

Chhattisgarh Lakhpati Didi Dilmati Success Story: पारंपरिक खेती से जैसे-तैसे गुजारा करने से लेकर आज सालाना ₹8 लाख तक की कमाई करने तक, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की दिलमति की कहानी देश के ग्रामीण इलाकों में आ रहे बड़े बदलाव की मिसाल है। दिलमति ने एक सफल सुअर पालन व्यवसाय खड़ा करके न केवल अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की ‘लखपति दीदी’ बनकर उभरी हैं।

उनकी इस सफलता ने उनके गांव के कई अन्य परिवारों को भी इस बिजनेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। आइए जानते हैं दिलमति के संघर्ष और उनकी कामयाबी की पूरी कहानी।

कौन हैं लखपति दीदी दिलमति?

दिलमति छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले के लादुवा गांव की रहने वाली हैं। वे स्थानीय ‘मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह’ (SHG) की एक सक्रिय सदस्य हैं। कुछ साल पहले तक दिलमति का परिवार पूरी तरह से पारंपरिक खेती पर निर्भर था। सीमित आय के कारण उन्हें घर चलाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।दिलमति की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहां उन्हें सरकार द्वारा समर्थित आजीविका के अवसरों और योजनाओं के बारे में जानकारी मिली।

₹1 लाख के लोन से ऐसे खड़ा किया साम्राज्य

समूह के अधिकारियों और जानकारों से प्रोत्साहन मिलने के बाद दिलमति ने एक साहसिक कदम उठाया। दिलमति ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के जरिए ₹1 लाख का लोन लिया। इस रकम से उन्होंने सुअर पालन का काम शुरू करने के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड से 10 सुअर खरीदे।

धीरे-धीरे उनका यह बिजनेस मुनाफे में बदल गया। उनके फार्म में प्रत्येक मादा सुअर 9 से 10 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, और एक-एक बच्चा बाजार में करीब ₹5,000 में बिकता है। आज के समय में दिलमति के पास 9 मादा सुअर हैं, जिससे उनकी सालाना आमदनी ₹7 लाख से ₹8 लाख के बीच हो जाती है।

कमाई से तैयार किए कमाई के नए साधन

दिलमति केवल सुअर पालन तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने इस बिजनेस से होने वाली कमाई को समझदारी से दूसरी जगहों पर री-इन्वेस्ट किया:

  1. उन्होंने सुअरों के रहने के लिए एक पक्का और आधुनिक शेड बनवाया है।
  2. खेती को आसान बनाने के लिए धान और मक्का की थ्रेशिंग (मिसाई) मशीनें खरीदीं।
  3. अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन तकनीक को अपनाया और बड़े पैमाने पर जैविक सब्जियों की खेती शुरू की।
  4. इन सब अलग-अलग जरियों से अब उनके परिवार के पास कमाई के कई माध्यम तैयार हो चुके हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं रोल मॉडल, प्रशासन भी करेगा मदद

दिलमति की इस बड़ी सफलता ने लादुवा गांव की तस्वीर बदल दी है। दिलमति की कामयाबी को देखकर गांव के करीब 10 से 15 अन्य परिवारों ने भी सुअर पालन को अपनी आजीविका के रूप में अपना लिया है। दिलमति खुद अब दूसरी महिलाओं को नियमित बचत करने, समूहों से जुड़ने और लोन लेकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं।

दिलमति की इस उपलब्धि को देखते हुए बलरामपुर जिला प्रशासन अब इस तरह की आजीविका पहलों को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना बना रहा है। बलरामपुर के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मुताबिक, प्रशासन अब एक ‘गोट क्लस्टर प्रोजेक्ट’ तैयार कर रहा है। इसके तहत और भी अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए उन्नत नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

Yes Bank Q1 Results: यस बैंक का मुनाफा 33% उछला, निफ्टी बैंक में वापसी के बाद चमके नतीजे! जानें हर एक डिटेल

Yes Bank Q1 FY27 Financial Results: यस बैंक ने आज, 18 जुलाई को FY27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जून तिमाही में यस बैंक के नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 33.5% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है। साथ ही बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई में भी तगड़ा उछाल आया है।

हालांकि, तिमाही आधार पर बैंक के प्रोविजंस यानी लोन डूबने की आशंका में रखी रकम में 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। आइए आपको बताते हैं यस बैंक के पहली तिमाही के नतीजों की हर एक बड़ी बात।

मुनाफा 33.5% बढ़ा, नेट इंटरेस्ट इनकम में भी उछाल

यस बैंक के लिए मुनाफे और कोर इनकम के मोर्चे पर यह तिमाही बेहतर साबित हुई है। जून तिमाही में यस बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 33.5% बढ़कर ₹1,070 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल की इसी तिमाही में बैंक का मुनाफा कम था। यह प्रदर्शन सीएनबीसी-टीवी18 के पोल के अनुमान (₹1,100 करोड़) के बिल्कुल करीब रहा है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार पर 17.5% की ग्रोथ के साथ ₹2,786.3 करोड़ रही है।

तिमाही आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़े प्रोविजंस

नतीजों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा प्रोविजंस का रहा है। मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में यस बैंक का प्रोविजन 100% से भी ज्यादा बढ़कर ₹394 करोड़ पर पहुंच गया है। मार्च तिमाही में यह आंकड़ा महज ₹187 करोड़ था। प्रोविजंस का बढ़ना यह दिखाता है कि बैंक ने संभावित खराब लोन से निपटने के लिए सुरक्षित फंड की राशि को बढ़ाया है।

एसेट क्वालिटी रही पूरी तरह स्थिर, नहीं बढ़ा एनपीए

प्रोविजंस बढ़ने के बावजूद बैंक की एसेट क्वालिटी पिछली तिमाही के स्तर पर ही पूरी तरह टिकी हुई है। ग्रॉस एनपीए पिछली तिमाही के समान ही 1.3% पर स्थिर रहा। हालांकि वैल्यू के हिसाब से यह मार्च के ₹3,604 करोड़ से मामूली बढ़कर ₹3,704 करोड़ रहा है। नेट एनपीए भी बिना किसी बदलाव के 0.2% पर बरकरार रहा। वैल्यू के मामले में यह पिछली तिमाही के ₹653 करोड़ के मुकाबले ₹677 करोड़ रहा है।

लोन और डिपॉजिट का कैसा रहा हाल?

यस बैंक के लोन ग्रोथ नेट एडवांस में सालाना आधार पर 18.4% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई है और यह ₹2.85 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। मार्च तिमाही के मुकाबले भी यह 4.3% बढ़ा है। बैंक के कुल डिपॉजिट में सालाना आधार पर 14.3% की बढ़त हुई है और यह ₹3.15 लाख करोड़ रहा। हालांकि, तिमाही आधार पर मार्च के मुकाबले डिपॉजिट में 1.1% की मामूली गिरावट देखी गई है।

निफ्टी बैंक में वापसी के बाद शेयरों की स्थिति

शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन नतीजों से ठीक पहले यस बैंक का शेयर 0.9% की मामूली गिरावट के साथ ₹23.53 पर बंद हुआ था। इस साल की शुरुआत से बात करें तो यस बैंक के शेयर ने निवेशकों को करीब 10% का रिटर्न दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि हाल ही में इंडेक्स रिशफल के दौरान यस बैंक को दोबारा निफ्टी बैंक इंडेक्स में शामिल कर लिया गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा इस स्टॉक पर बढ़ा है।

PNB Q1 Results: पंजाब नेशनल बैंक का मुनाफा 3 गुना से ज्यादा उछला, टैक्स में भारी कटौती से चमके नतीजे, पढ़ें हर एक डिटेल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PNB Q1 Results: पंजाब नेशनल बैंक का मुनाफा 3 गुना से ज्यादा उछला, टैक्स में भारी कटौती से चमके नतीजे, पढ़ें हर एक डिटेल

Punjab National Bank FY27 Q1 Results: सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। सालाना आधार पर बैंक के कोर पैरामीटर्स भले ही थोड़े सुस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन बैंक के नेट प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।

टैक्स खर्चों में आई भारी कमी ने पीएनबी के मुनाफे को तगड़ा बूस्ट दिया है, जिससे बैंक का मुनाफा पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 3 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि पहली तिमाही में पीएनबी का प्रदर्शन कैसा रहा और निवेशकों के लिए इस रिजल्ट में क्या खास है।

नेट प्रॉफिट में बंपर उछाल, टैक्स में राहत ने बदली बाजी

PNB के लिए जून तिमाही मुनाफे के लिहाज से शानदार साबित हुई है:

मुनाफे में बड़ी छलांग: जून तिमाही में पीएनबी का नेट प्रॉफिट उछलकर ₹5,253 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल की इसी तिमाही (Q1) में बैंक का मुनाफा केवल ₹1,675 करोड़ था।

टैक्स खर्च में भारी गिरावट: बैंक के मुनाफे में इस रिकॉर्ड तेजी की सबसे बड़ी वजह टैक्स देनदारी का कम होना है। जून तिमाही में पीएनबी का टैक्स खर्च घटकर ₹1,725 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹5,083 करोड़ था।

ब्याज से कमाई 6 तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर

अगर बैंक के मुख्य कामकाज यानी ब्याज से होने वाली कमाई की बात करें तो सालाना आधार पर पीएनबी की शुद्ध ब्याज आय 2.1% बढ़कर ₹10,798 करोड़ रही। हालांकि सालाना ग्रोथ मामूली है, लेकिन यह आंकड़ा पिछले 6 तिमाहियों में बैंक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।

एसेट क्वालिटी में सुधार: डूबा हुआ पैसा यानी NPA घटा

बैंक की एसेट क्वालिटी यानी बैड लोन की स्थिति इस तिमाही में काफी स्थिर और बेहतर नजर आई है। बैंक का ग्रॉस एनपीए पिछली तिमाही (मार्च) के 2.95% से घटकर 2.78% पर आ गया है। रुपयों में बात करें तो यह ₹37,124 करोड़ से घटकर ₹35,380 करोड़ रह गया है।

बैंक का नेट एनपीए भी मार्च तिमाही के 0.29% से मामूली सुधरकर 0.28% पर आ गया है। वैल्यू के हिसाब से यह ₹3,609 करोड़ से घटकर ₹3,433 करोड़ बचा है।

बैंक के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि नए खराब लोन की रफ्तार धीमी हुई है। जून तिमाही में नए स्लिपेज ₹2,080 करोड़ रहे, जो मार्च तिमाही के ₹2,758 करोड़ से काफी कम हैं।

हालांकि, लोन डूबने की आशंका में रखी जाने वाली रकम पिछली तिमाही के ₹424 करोड़ से मामूली बढ़कर ₹541 करोड़ हो गई है।

नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दिखा थोड़ा दबाव

सालाना आधार पर बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि फंड की लागत थोड़ी बढ़ी है:

ग्लोबल एनआईएम: यह सालाना आधार पर 2.7% से घटकर 2.5% पर आ गया। हालांकि, मार्च तिमाही (2.47%) के मुकाबले इसमें 3 बेसिस पॉइंट की मामूली बढ़त है।

डोमेस्टिक एनआईएम: घरेलू स्तर पर बैंक का मार्जिन पिछले साल के 2.84% से 20 बेसिस पॉइंट घटकर 2.64% रहा, लेकिन यह भी मार्च के 2.61% से 3 बेसिस पॉइंट बेहतर है।

PNB के शेयरों का क्या है हाल?

नतीजों से ठीक पहले, यानी शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन पंजाब नेशनल बैंक का शेयर एनएसई पर 0.75% की बढ़त के साथ ₹106.01 पर बंद हुआ था। हालांकि, अगर इस साल की शुरुआत से बात करें तो पीएनबी का स्टॉक अब तक करीब 15% टूट चुका है। ऐसे में सोमवार को बाजार खुलने पर इन नतीजों का असर शेयर की चाल पर देखने को मिल सकता है।

Kotak Mahindra Bank Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 26% बढ़कर हुआ ₹4123 करोड़, एसेट क्वालिटी में सुधार

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! सैलरी, DA और पेंशन में बदलाव का पूरा रोडमैप जारी, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission ToR Full List Out: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें पे कमीशन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) से यह साफ हो गया है कि नए वेतन आयोग के दायरे में क्या-क्या चीजें शामिल होंगी और कर्मचारियों की सैलरी, डीए (DA), पेंशन तथा अन्य भत्तों में किस तरह के बदलाव होने जा रहे हैं।

इस 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा फायदा देश के 1 करोड़ से अधिक लोगों को मिलेगा। इसमें लगभग 50 लाख सक्रिय केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। आइए जानते हैं कि 8th CPC की इस पूरी लिस्ट में आपके लिए क्या खास है।

8th Pay Commission का गठन और समय सीमा

8वां वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय होगा। इसमें एक अध्यक्ष, एक पार्ट-टाइम सदस्य और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर आयोग बीच में अंतरिम रिपोर्ट भी सौंप सकता है।

सैलरी, DA और भत्तों में क्या-क्या बदलेगा?

8th CPC के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के मुताबिक, आयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक बदलावों की जांच करेगा और अपनी सिफारिशें देगा:

पे-मैट्रिक्स और सैलरी स्ट्रक्चर: कर्मचारियों के मूल वेतन और पे-मैट्रिक्स को तर्कसंगत बनाया जाएगा ताकि सरकारी सेवाओं में बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके।

भत्ते: इसमें मुख्य रूप से महंगाई भत्ता (DA), पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की समीक्षा और संशोधन शामिल है।

अन्य सुविधाएं और लाभ: कर्मचारियों के सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन पॉलिसी और समकालीन कामकाजी जरूरतों के आधार पर मिलने वाली अन्य नकद या गैर-नकद सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी।

भत्तों का युक्तिकरण: वर्तमान में मिल रहे तमाम तरह के छोटे-बड़े भत्तों की संख्या की समीक्षा होगी ताकि उनकी जटिलता को कम किया जा सके।

परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव और बोनस पर नया फोकस

नए वेतन आयोग में काम के कल्चर को अधिक कुशल और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया गया है:

कार्य संस्कृति में सुधार: एक ऐसा इमोल्यूमेंट स्ट्रक्चर तैयार करना जिससे सरकारी कामकाज में दक्षता, जवाबदेही और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिले।

उत्पादकता आधारित बोनस: मौजूदा बोनस योजनाओं की समीक्षा की जाएगी ताकि इसे परफॉर्मेंस से जोड़ा जा सके।

इंसेंटिव स्कीम: बेहतर और उत्कृष्ट काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत करने के लिए वित्तीय और प्रदर्शन-आधारित मापदंडों के साथ एक नई इंसेंटिव योजना की सिफारिश की जाएगी।

पेंशनर्स और NPS/UPS के लिए क्या है खास?

वेतन आयोग पेंशनभोगियों के हितों और उनकी वित्तीय सुरक्षा की भी पूरी समीक्षा करेगा:

NPS और UPS के तहत ग्रेच्युटी: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और एकीकृत पेंशन योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की समीक्षा कर नई सिफारिशें दी जाएंगी।

ओल्ड पेंशन धारक: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे में नहीं हैं, उनकी ग्रेच्युटी और मासिक पेंशन की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, बिना अंशदान वाली गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की बिना फंड वाली लागत का भी आकलन किया जाएगा।

सिफारिशें तय करते समय किन बातों का रखा जाएगा ध्यान?

8th Pay Commission केवल एकतरफा सिफारिशें नहीं देगा, बल्कि उसे देश की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा:

देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय विवेक: सरकार के खजाने पर बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखा जाएगा।

कल्याणकारी योजनाएं: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वेतन बढ़ाने के बाद भी देश के विकास कार्यों और जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट बचा रहे।

राज्यों पर असर: केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को आमतौर पर राज्य सरकारें भी कुछ संशोधनों के साथ लागू करती हैं। इसलिए राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

प्राइवेट सेक्टर से तुलना: पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (CPSUs) और प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी, वर्किंग कंडीशन और बेनिफिट्स की तुलना भी की जाएगी।

कौन-से कर्मचारी होंगे इसके पात्र?

8th CPC की सिफारिशें केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, एजेंसियों और निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों पर लागू होंगी:

  • केंद्रीय कर्मचारी (इंडस्ट्रियल और नॉन-इंडस्ट्रियल दोनों)
  • अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी
  • सशस्त्र रक्षा बल के कर्मी
  • केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी
  • भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी
  • संसद के अधिनियमों के तहत स्थापित नियामक निकायों के सदस्य (आरबीआई को छोड़कर)
  • सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी और कर्मचारी
  • केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वहन किए जाने वाले खर्च वाले हाईकोर्ट के कर्मचारी
  • केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी

‘भूत बनकर आऊंगा…’, सोनम वांगचुक के एक बयान से ऐसा क्या हुआ कि आधी रात पुलिस को लेना पड़ा बड़ा एक्शन?

Sonam Wangchuk Hospitalization: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीती रात एक बड़ा एक्शन देखने को मिला। पिछले 20 दिनों से जारी आंदोलन के बीच शनिवार तड़के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट कर दिया। इसके बाद माहौल पूरी तरह गरमा गया है।

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक का बयान तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान में उन्होंने 20 जुलाई के संसद मार्च को लेकर एक ऐसी बात कही थी, जो आज जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद लोगों के जेहन में दोबारा तैरने लगी है। आइए आपको बताते हैं कि सोनम वांगचुक ने पिछले दिनों क्या कहा था, आज की घटना से उसका क्या कनेक्शन है और क्या उनके इस बयान से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

’20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, वरना भूत बनकर आऊंगा…’

भूख हड़ताल के दौरान अपने समर्थकों और देश की जनता को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने अपनी शारीरिक स्थिति और आंदोलन के भविष्य को लेकर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘मैं बाहर से भले ही कमजोर हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं। मुझे उम्मीद है आप लोग भी अंदर-बाहर दोनों तरफ से बहुत मजबूत होंगे। हमें यह मजबूती 20 जुलाई तक चाहिए, जब बहुत शांतिपूर्ण तरीके से संसद मार्च निकालेंगे। हम एक साथ चलेंगे और देश के मंदिर में अपनी प्रार्थना सुनाएंगे। आप सब चलेंगे हमारे साथ? वादा करते हैं ना? मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा। अगर नहीं आए और 20 जुलाई का प्रदर्शन सफल नहीं रहा तो मैं ‘भूत’ बनके आऊंगा।’

क्या वांगचुक के इस ‘संकल्प’ से डर गया प्रशासन?

सोनम वांगचुक का यह बयान केवल एक भावनात्मक अपील नहीं थी, बल्कि यह उनके अटूट संकल्प को दिखा रहा था। आज जब 21वें दिन पुलिस ने उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया, तो समर्थकों का कहना है कि प्रशासन कहीं न कहीं वांगचुक के इसी इरादे और 20 जुलाई के ‘संसद मार्च’ की तैयारी से घबरा गया था।

आंदोलन को बिखेरने की कोशिश?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने वांगचुक को इसलिए हटाया ताकि 20 जुलाई को होने वाले बड़े प्रदर्शन की धार को कमजोर किया जा सके।

वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस और डॉक्टरों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और वांगचुक की जान बचाने के लिए की गई है, क्योंकि 21 दिनों के अनशन के कारण उनके शरीर में पानी की बेहद कमी हो चुकी थी।

अस्पताल में शिफ्टिंग के बाद और मजबूत हुआ समर्थकों का इरादा

सोनम वांगचुक ने अपने बयान में जिस ‘मजबूती’ का जिक्र किया था, वह आज जंतर-मंतर पर साफ देखने को मिली। वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद शनिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया है।

कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि अगर वांगचुक अस्पताल में भी रहते हैं, तो भी 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च हर हाल में निकाला जाएगा और देश के लोकतंत्र के मंदिर संसद तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।

Early Retirement Loss: 60 की बजाय 55 की उम्र में रिटायरमेंट? एक फैसले से हो सकता है ₹1.6 करोड़ का भारी नुकसान, समझें गणित

Retiring at 55 vs 60 Financial Loss Calculation: नौकरी से जल्दी मुक्ति पाना और अर्ली रिटायरमेंट का आनंद लेना आज के युवाओं का एक बड़ा सपना बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपनी तय उम्र से महज 5 साल पहले काम छोड़ना आपके बुढ़ापे के फंड को कितना बड़ा झटका दे सकता है?

फाइनेंशियल विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप 60 वर्ष की बजाय 55 वर्ष की उम्र में रिटायर होने का फैसला करते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत रुकने से आपको ₹1.6 करोड़ तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि महज 5 साल पहले काम छोड़ने से आपके निवेश पर क्या असर पड़ता है और इसके पीछे का वित्तीय गणित क्या है।

सिर्फ 5 साल का अंतर और ₹1.6 करोड़ का नुकसान

सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर और वेल्थविशर फाइनेंशियल प्लानर्स के संस्थापक मधुपम कृष्णा के अनुसार, रिटायरमेंट फंड में आखिरी के 5 साल सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं:

प्लान A (60 साल में रिटायरमेंट): मान लीजिए आप 30 साल की उम्र से 60 साल की उम्र तक यानी 30 वर्षों के लिए हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं। अगर इस पर आपको औसतन 12% का रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल निवेश ₹36 लाख होगा और 60 की उम्र में आपका कुल फंड करीब ₹3.5 करोड़ तैयार हो जाएगा।

प्लान B (55 साल में अर्ली रिटायरमेंट): अगर आप अपना इरादा बदलते हैं और 5 साल पहले यानी 55 की उम्र में ही रिटायर हो जाते हैं, तो आपका निवेश 25 साल ही चलेगा। इस स्थिति में आपका कुल निवेश ₹30 लाख होगा, लेकिन आपका अंतिम फंड घटकर सिर्फ ₹1.9 करोड़ रह जाएगा।

सीधा घाटा: ₹3.5 करोड़ – ₹1.9 करोड़ = ₹1.6 करोड़ का बड़ा नुकसान।

सिर्फ 5 साल का अंतर और ₹1.6 करोड़ का नुकसान

आखिरी 5 सालों में ऐसा क्या होता है?

दरअसल निवेश में आखिरी वर्षों में ‘कंपाउंडिंग की ताकत’ सबसे तेजी से काम करती है। अगर आप 55 की उम्र के बाद ₹10,000 की मासिक किस्त देना बंद भी कर दें और उस ₹1.9 करोड़ के फंड को बिना छुए अगले 5 साल के लिए सिर्फ 12% रिटर्न पर छोड़ दें, तो यह जादुई रूप से ऐसे बढ़ेगा:

  • 56 वर्ष की उम्र में: ₹2.19 करोड़
  • 57 वर्ष की उम्र में: ₹2.49 करोड़
  • 58 वर्ष की उम्र में: ₹2.78 करोड़
  • 59 वर्ष की उम्र में: ₹3.12 करोड़
  • 60 वर्ष की उम्र में: ₹3.5 करोड़

यानी जो पैसा आपने अपने 30 और 40 के दशक में निवेश किया था, वह आखिरी 5 सालों में ‘रिटर्न पर रिटर्न’ बनाकर बर्फ के विशाल गोले की तरह बड़ा हो जाता है। अर्ली रिटायरमेंट लेकर आप इसी बंपर मुनाफे को खो देते हैं।

डबल मार: फंड छोटा और रिटायरमेंट की जिंदगी लंबी

जल्दी रिटायर होने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपके पास पैसा कम होगा, बल्कि इसका एक और गंभीर पहलू है आपको अधिक वर्षों तक बिना सैलरी के गुजारा करना होगा।

20% लंबी रिटायरमेंट लाइफ: मान लीजिए औसत जीवन प्रत्याशा 85 वर्ष है। अगर आप 60 साल में रिटायर होते हैं, तो आपको 25 साल की जिंदगी के लिए फंड चाहिए। लेकिन अगर आप 55 में रिटायर होते हैं, तो आपको 30 साल की जिंदगी का खर्च उठाना होगा। यानी आपको 20% लंबी रिटायरमेंट लाइफ को फाइनेंस करना होगा।

महंगाई और हेल्थकेयर का जोखिम: मधुपम कृष्णा बताते हैं कि आपको अतिरिक्त 5 वर्षों तक महंगाई और तेजी से बढ़ती मेडिकल लागतों का सामना करना पड़ेगा, जो सामान्य महंगाई दर से भी ज्यादा रफ्तार से बढ़ती हैं।

क्या 55 की उम्र में रिटायर होना बिल्कुल गलत है?

प्लानरुपी इनवेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी के अनुसार, ऐसा कोई नियम नहीं है कि आप जल्दी रिटायर नहीं हो सकते, लेकिन ऐसा करने से पहले कुछ कड़े पैमानों को चेक कर लेना जरूरी है। आप 55 की उम्र में तभी रिटायर होने की सोचें जब आपके पास:

  1. पर्याप्त बड़ा कॉर्पस हो: जो बढ़ती उम्र और महंगाई के बावजूद अगले 30-40 साल तक खत्म न हो।
  2. मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस हो: ताकि बुढ़ापे में बीमारी के चलते आपका मुख्य फंड खाली न हो जाए।
  3. कम्यूनिटी या पैसिव इनकम सोर्सेज हों: जैसे किराए से आने वाली इनकम, डिविडेंड या कोई गारंटेड पेंशन स्कीम।

एक्सपर्ट एडवाइस: केवल इसलिए नौकरी मत छोड़िए क्योंकि आप काम बंद करना चाहते हैं। रिटायरमेंट का फैसला तब लें जब आपकी वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत हो कि आप एक लंबी और सुरक्षित जिंदगी जी सकें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

VIDEO: जबरन घसीटते हुए ले गई पुलिस… आ गया पूरा वीडियो, वांगचुक की पत्नी ने पुलिस को दी ये चेतावनी

Sonam Wangchuk Wife Gitanjali J Angmo: दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बाद यह मामला अब और गरमा गया है। वांगचुक के अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। वहीं CJP के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, दिल्ली पुलिस वांगचुक को जबरन घसीटते हुए अपने साथ ले गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने का पूरा वीडियो शेयर किया है।

‘पुलिस ने जबरन घसीटा’… कार्यकर्ताओं का गंभीर आरोप

NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वांगचुक को ले जाए जाने के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि पुलिस वांगचुक को जबरन घसीटते हुए अपने साथ ले गई है।

‘बिना सहमति कुछ भी दिया, तो सीधे ठहराऊंगी जिम्मेदार’

सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो अस्पताल पहुंचीं और एक्स पर लिखा, ‘मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूं, जहां सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है। मेरी, उनके परिवार की और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत की निगरानी कर रहे हमारे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह से या नस के जरिए कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए।’

गीतांजलि ने इससे पहले मीडिया से बातचीत में यह भी साफ कर दिया था कि अगर सोनम वांगचुक की सेहत के साथ कोई भी ऊंच-नीच होती है, तो इसके लिए वे सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन को जवाबदेह मानेंगी।

डॉक्टरों ने बताया कैसी है वांगचुक की हालत?

सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने सोनम वांगचुक के हेल्थ बुलेटिन को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। डॉक्टरों के मुताबिक, सोनम वांगचुक फिलहाल होश में हैं और उनकी स्थिति स्थिर है। लेकिन लगातार 21 दिनों तक भूखे रहने के कारण उनके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई है, जिससे वे बेहद कमजोर हो चुके हैं।

अस्पताल का कहना है कि उनके शरीर के सभी मानकों को दोबारा सामान्य स्तर पर लाने के लिए उन्हें लगातार डॉक्टरों की निगरानी, मॉनिटरिंग और इलाज की सख्त जरूरत है।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने लिया एक्शन

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उठाया है। दो दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक की गिरती सेहत से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ‘देश के किसी भी नागरिक का जीवन बेहद कीमती होता है।’ कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर जरूरी मेडिकल हस्तक्षेप भी किया जाए। इसी आदेश के आधार पर शनिवार तड़के पुलिस जंतर-मंतर पहुंची थी।

वांगचुक के बाद अब अभिजीत दिपके बैठेंगे अनशन पर

सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद भी आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ऐलान कर दिया है कि सोनम सर को अस्पताल भेजने से यह आंदोलन नहीं रुकेगा। अब वे खुद शनिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं। दिपके ने साफ किया कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को संसद की तरफ निकाला जाने वाला उनका विरोध मार्च अपने तय शेड्यूल के हिसाब से ही होगा।

चारों तरफ पर्दे, सादे कपड़ों में पुलिस और आधी रात का एक्शन… सोनम वांगचुक की मिडनाइट शिफ्टिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी

Sonam Wangchuk Shifted to Hospital: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार तड़के एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई। पुलिस ने बेहद सीक्रेट अभियान से वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

यह केवल एक सामान्य मेडिकल शिफ्टिंग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी प्रशासनिक रणनीति और कानूनी मजबूरी थी। आइए जानते हैं जंतर-मंतर पर रात के सन्नाटे में हुए इस पूरे एक्शन की ‘इनसाइड स्टोरी’ कि आखिर कैसे और क्यों ऐसा किया गया।

आधी रात का सन्नाटा और सादे कपड़ों में पुलिस की घेराबंदी

इस पूरे ऑपरेशन की टाइमिंग और तरीका बेहद चौंकाने वाला था। पुलिस नहीं चाहती थी कि दिन के उजाले में कार्रवाई करने से समर्थकों की भारी भीड़ जुट जाए या जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े। इसलिए तड़के का समय चुना गया।

धरना स्थल पर अचानक पहुंचे पुलिस बल के कई जवान सादे कपड़ों में थे ताकि प्रदर्शनकारियों को तुरंत भनक न लगे कि कोई बड़ा एक्शन होने जा रहा है। उन्होंने आते ही वांगचुक के चारों तरफ एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बना दिया।

ऑपरेशन ‘पर्दा’: कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग रोकने की कवायद

इंसाइड स्टोरी का सबसे दिलचस्प हिस्सा था सोनम वांगचुक को ले जाने का तरीका। वांगचुक को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर ले जाने से पहले उनके चारों तरफ बड़े-बड़े पर्दे तान दिए गए।

सोशल मीडिया के इस दौर में पुलिस किसी भी ऐसे वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग को रोकना चाहती थी, जिससे यह संदेश जाए कि वांगचुक के साथ जबरदस्ती की जा रही है। पर्दे के पीछे ही उन्हें सुरक्षित रूप से गाड़ी तक ले जाया गया, जिससे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता कुछ समझ पाते, तब तक गाड़ी निकल चुकी थी।

नए पुलिस कमिश्नर की ताजपोशी और 24 घंटे में एक्शन

इस कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक गलियारों में हो रही हलचल भी एक बड़ा कारण थी। जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अनशन चल रहा था, लेकिन यह सख्त एक्शन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के ठीक एक दिन बाद हुआ। उन्होंने सतीश गोलचा की जगह ली है। नए नेतृत्व के आते ही पेंडिंग पड़े इस संवेदनशील मामले को तुरंत निपटाने का फैसला लिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट का ‘सुरक्षा कवच’ और मेडिकल मजबूरी

पुलिस के इस कदम के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट का वह सख्त आदेश था, जिसने पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत आधार दिया। दो दिन पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि ‘किसी भी नागरिक का जीवन कीमती है’। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल दखल देने का आदेश दिया था।

20 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक के शरीर में पानी की गंभीर कमी हो चुकी थी और वे बेहद कमजोर हो चुके थे। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर यह कदम उठाया ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार न ठहराया जा सके।

अस्पताल के अंदर का माहौल और पत्नी की चेतावनी

सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने वांगचुक को स्थिर लेकिन बेहद कमजोर बताया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक कह दिया है कि उनकी लिखित सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी ड्रिप, दवा या जबरन खाना न दिया जाए। उन्होंने किसी भी ऊंच-नीच के लिए सीधे प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

प्रशासन की अगली चुनौती: 20 जुलाई का ‘संसद मार्च’

पुलिस ने वांगचुक को तो अस्पताल पहुंचा दिया और जंतर-मंतर को भी खाली करा लिया है, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद भूख हड़ताल शुरू कर दी है और ऐलान किया है कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को होने वाला ‘संसद मार्च’ किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। अब दिल्ली पुलिस के सामने 20 जुलाई को संसद के घेराव को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

ईरान पर अमेरिका का चौतरफा अटैक! 6 घंटे तक आसमान और समंदर से बरसे बम, बिजली और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पूरी तरह तबाह

US strikes Iran port and bridge: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है। शुक्रवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर भीषण हमले किए। अमेरिका ने जहां ईरान के मुख्य बंदरगाहों और आंतरिक परिवहन संपर्कों (पुलों) को तबाह करने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइलें दागी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ यह युद्ध अब पांचवें महीने में प्रवेश कर चुका है। दोनों ओर से लगातार हो रही बमबारी के कारण वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। आइए आपको बताते हैं कि पिछले 24 घंटों में युद्ध के मैदान में क्या-क्या हुआ है.

अमेरिकी सेना का ‘नावल ब्लॉकेड’ और 6 घंटे की भीषण बमबारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9:30 बजे (ET) तक ईरान पर चौतरफा हमले किए गए. अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और युद्धपोतों ने ईरान के सर्विलांस ठिकानों, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, भूमिगत हथियार डिपो और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया।

राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से ‘नावल नाकेबंदी’ कर रही है। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई और समुद्री ऑपरेशन चलाया।

जवाब में ईरान का मिसाइल हमला, कुवैत और कतर निशाने पर

अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने खाड़ी के उन देशों पर मिसाइलें दागीं जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। तेहरान ने कतर जो इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है और कुवैत पर मिसाइलें बरसाईं। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस मिसाइल हमले में उनके देश के एक बड़े ‘डिटेसिनेशन प्लांट’ यानी खारे पानी को पीने लायक बनाने वाली फैसिलिटी को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

चाबहार पोर्ट और बंदर खमीर के रणनीतिक पुलों को किया तबाह

इस ताजा हमले में अमेरिका ने ईरान की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को निशाना बनाया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में चाबहार बंदरगाह पर स्थित एक बड़ा टावर मलबे में तब्दील हो गया।

बता दें कि चाबहार पोर्ट को भारत की मदद से विकसित किया गया था और यह अफगानिस्तान के लिए एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। अमेरिका का दावा है कि इस टावर का इस्तेमाल ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) जहाजों की जासूसी के लिए कर रही थी।

दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में तटीय शहर बंदर खमीर के पास बने प्रमुख पुलों को अमेरिकी हवाई हमलों में उड़ा दिया गया। इसका मकसद ईरान के सबसे बड़े वाणिज्यिक बंदरगाह ‘बंदर अब्बास’ का संपर्क राजधानी तेहरान और देश के अंदरूनी हिस्सों से पूरी तरह काटना है।

युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार ईरान ने स्वीकार किया है कि उसके पावर ग्रिड (बिजली नेटवर्क) को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण दक्षिणी प्रांतों में ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है।

दोनों तरफ भारी तबाही, अब तक सैकड़ों मौतें

शुक्रवार को हुए इन ताजा हमलों में दोनों पक्षों के सैन्य और नागरिक हताहत हुए हैं:

ईरान में नुकसान: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ताजा हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक घायल हुए हैं. केवल पुल पर हुए हमले में 8 लोगों की जान गई।

अमेरिका को नुकसान: पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस हफ्ते सोमवार से अब तक 13 और अमेरिकी सैनिक (10 थल सेना और 3 नौसेना कर्मी) घायल हुए है। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 14 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 427 घायल हुए हैं।