GIFT Nifty दे रहा सेंसेक्स-निफ्टी के फ्लैट शुरुआत के संकेत, एशिया बाजार में मिलाजुला कारोबार

GIFT Nifty ने सोमवार को इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए धीमी शुरुआत का संकेत दिया, भले ही ग्लोबल संकेत काफी पॉजिटिव थे, क्योंकि इन्वेस्टर्स ने घरेलू इक्विटी में हालिया रैली के मुकाबले क्रूड ऑयल की घटती कीमतों, रिस्क सेंटिमेंट में सुधार और ग्लोबल अर्निंग्स सीजन की उम्मीद के बीच बैलेंस बनाया। OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने के बाद ऑयल की कम कीमतों ने मार्केट के लिए सपोर्टिव बैकग्राउंड बनाए रखा।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.30 बजे 24,327.50 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले निफ्टी क्लोज से 27.00 पॉइंट या 0.11 परसेंट नीचे था, जिससे पता चलता है कि शुक्रवार को लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ी कम खुल सकते हैं।

IT, फार्मा, मेटल और रियल्टी स्टॉक्स में बड़े पैमाने पर खरीदारी से सपोर्टेड, इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स ने शुक्रवार को अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। सेंसेक्स 261.79 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 95.15 पॉइंट्स या 0.39 परसेंट बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ।

एशियाई मार्केट में मजबूती, कमाई की उम्मीद से माहौल बेहतर हुआ

सोमवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर बढ़त रही क्योंकि इन्वेस्टर्स ग्लोबल कमाई के सीज़न की शुरुआत पर ध्यान दे रहे थे, जबकि US लेबर मार्केट के नरम डेटा ने जल्द ही फेडरल रिजर्व रेट में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को कम किया।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.4 परसेंट बढ़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की तिमाही कमाई से पहले साउथ कोरिया के कोस्पी में 2 परसेंट से ज़्यादा की बढ़त हुई, एनालिस्ट्स को AI से जुड़ी मेमोरी चिप की मज़बूत डिमांड से मुनाफ़े में तेज़ उछाल की उम्मीद थी। पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद जापान का निक्केई थोड़ा गिरा।

स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के कारण शुक्रवार को US मार्केट बंद रहे। हालांकि, एशियाई घंटों में US फ्यूचर्स में बढ़त हुई, जिसमें S&P 500 फ्यूचर्स 0.5 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.4 परसेंट बढ़े, जो कॉर्पोरेट अर्निंग्स और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को लेकर उम्मीद दिखाता है।

OPEC+ के आउटपुट में बढ़ोतरी से क्रूड पर दबाव बना हुआ है

OPEC+ के अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट फिर से बढ़ाने पर सहमत होने के बाद तेल की कीमतें कम हुईं, जिससे ग्लोबल सप्लाई में सुधार की उम्मीदें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड लगभग 0.6 परसेंट गिरकर $71.7 प्रति बैरल के करीब आ गया, जो चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब है, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड लगभग $68.4 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए शिपमेंट में रिकवरी और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से भी एनर्जी की कीमतों को कम रखने में मदद मिली है।

इस बीच, उम्मीद से कम US पेरोल डेटा ने US फेडरल रिजर्व द्वारा रेट में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया, जिसके बाद सोना दो हफ़्ते के हाई के पास बना रहा।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के सुधरते हालात और होर्मुज स्ट्रेट से बिना रुकावट शिपिंग से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई है, जबकि OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले से तेल की कम कीमतों को और सपोर्ट मिला है। निवेशक AI से चलने वाले सेमीकंडक्टर की मांग पर नए संकेतों के लिए सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की कमाई पर भी करीब से नज़र रखेंगे, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है, जिसमें 24,400 का लेवल तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इस ज़ोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,500-24,600 की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,200 पहला ज़रूरी सपोर्ट बना हुआ है, इसके बाद 24,000 का साइकोलॉजिकल लेवल है।

पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो मिला-जुला रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 3 जुलाई को चार सेशन की बिकवाली के बाद नेट बायर बन गए, और उन्होंने 1,355 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी। इस बीच, घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने आठ सेशन की खरीदारी का सिलसिला तोड़ा और नेट सेलर बन गए, और 1,953 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

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हेल्थकेयर और छोटी एनबीएफसी स्टॉक्स में निवेश से होगा फायदा, एक्सपर्ट प्रंशात खेमका की सलाह

शेयर बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव हो रहा है। व्हाइटओक कैपिटल ग्रुप के फाउंडर प्रशात खेमका का कहना है कि इनवेस्टर्स को अभी अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों के शेयरों पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्हाइटओक खुद लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ऐलोकेशन बदलने की जगह सिर्फ उन बिजनेसेज की पहचान पर फोकस करती है, जिनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रह सकता है।

लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब एआई स्टॉक्स पर दबाव

उनका मानना है कि अलग-अलग मार्केटकैप वाले शेयरों का प्रदर्शन साइकिल में अलग-अलग समय पर अच्छा रहता है। इसलिए उन शेयरों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है जिनमें हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चढ़ने के बाद अब AI से जुड़े शेयरों पर दबाव दिख रहा है।

एआई शेयरों में निवेश घटने पर भारत का फायदा

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में आर्टफिशियल इंटेलिजेंस शेयरों को लेकर सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। फिर भी, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह ट्रेंड जारी रहेगा। भारत को तब फायदा हुआ है, जब दुनिया में इनवेस्टर्स ने एआई से जुड़ी कंपनियों में अपने निवेश घटाए हैं। हाल में दक्षिण कोरिया के बाजारों में बड़ी गिरावट दिखी। इसमें चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ था।

लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव

खेमका ने कहा कि लंबी अवधि के लिहाज से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर अभी भी उनका आउटलुक पॉजिटिव है। उन्होंने कहा कि कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च करना जारी रखेंगी और इनका महत्व कम करने की जगह AI इंडस्ट्री के स्वरूप में बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर एग्जिक्यूशन वाली कुछ मिडकैप कंपनियां खुद को लार्जकैप कंपनियों के मुकाबले जल्द बदलने में कामयाब होंगी।

हेल्थकेयर, एनबीएफसी स्टॉक्स में दिख रहे मौके

उन्होंने हेल्थकेयर को व्हाइटओक का पंसदीदा सेक्टर बताया। उन्होंने कहा कि फार्मा, हॉस्पिटल्स और डायगोस्टिक्स में कई लिस्टेड कंपनियां हैं। इस सेक्टर में काफी डायवर्सिटी है, जिससे सुपर रिटर्न देने की क्षमता वाली कंपनियों की पहचान की जा सकती है। कुछ एनबीएफसी में भी निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं। खासकर छोटी एनबीएफसी ठीक लग रही हैं, जो कम इनकम वाले ग्राहकों पर फोकस करती हैं।

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प्राइवेट डिफेंस कंपनियों के स्टॉक्स भी अट्रैक्टिव

खेमका ने कहा कि अनसेक्योर्ड लोन को लेकर बढ़ती चिंता और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से कई एनबीएफसी कंपनियों के शेयरों में करेक्शन दिखा है। कुछ एनबीएफसी की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव दिख रही है। इंडस्ट्रियल्स में उन्होंने प्राइवेट सेक्टर की डिफेंस कंपनियों, कुछ कैपिटल गुड्स और मशीनरी बिजनेसेज को अट्रैक्टिव बताया।

8th Pay Commission Updates: क्या केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी 283 फीसदी बढ़ने जा रही है?

आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के वेतन वृद्धि के बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए देशभर में अलग-अलग पक्षों के विचार जानने की कोशिश कर रहा है। एंप्लॉयीज यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो मिनिमम बेसिक पे 283 फीसदी बढ़ जाएगा। यह 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 68,940 रुपये हो जाएगा। नए पे स्केल का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा।

एंप्लॉयीज यूनियंस ने बताई अपनी मांगें

कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉयीज एंड वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में 8वें वेतन आयोग को एक व्यापक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें मिनिमम बेसिक पे 69,000 रुपये करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने और ज्यादा हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) की मांग की गई है।

7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर माना था

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के पे में संशोधन करने के लिए होता है। रिवाइज्ड बेसिक सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर एंप्लॉयीज के मौजूदा बेसिक पे में बदलाव किया जाता है। एंप्लॉयीज यूनियंस ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह लागू हुआ तो मिनिमम बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो जाएगा। 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था।

इस महीने भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यूनियंस के प्रस्ताव मान लिए जाते हैं तो रिवाइज्ड बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन मौजूदा बेसिक पे में 3.83 से गुणा कर किया जाएगा। हालांकि, 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है, अभी इस बारे में कहना मुश्किल है। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा है। 22-23 जून को लखनऊ की बैठक के बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठक होने वाली है।

सातवें आयोग ने मिनिमम बेसिक पे 18000 किया था

कुछ एंप्लॉयीज यूनियंस ने मिनिमम बेसिक पे बढ़ाकर 55,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। खासकर हेल्थकेयर और एजुकेशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे में 18000 रुपये का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे पहले के वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे करीब ढ़ाई गुना कर दिया था। 7वें वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 7000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था। यह 10 साल पहले की बात है।

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अगले साल के मध्य में आयोग सौंप सकता है रिपोर्ट

अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग अगले साल के मध्य में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके बाद केंद्र सरकार इस रिपोर्ट पर व्यापक विचार करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगी। सरकार ने पिछले साल जीएसटी के रेट्स में कमी किए हैं। इस साल अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल आया था। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

क्या क्रूड ऑयल की कीमतें अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं?

क्रूड ऑयल की कीमतों में बीते कुछ हफ्तों में तेज गिरावट आई है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव गिरकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में डील है। इस डील की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है, जिससे ऑयल टैंकर्स की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रू़ड की सप्लाई बढ़ी है और कीमतें गिरी हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड में गिरावट सीमित रह सकती है। इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई देशों का स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व काफी घट गया है। अब फोकस इस रिजर्व को फिर से पहले के लेवल पर पहुंचाने पर होगा। इससे क्रूड की कीमतों में ज्यादा गिरावट का अनुमान नहीं है।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर माकदा के मुताबिक, तकनीकी रूप से क्रूड की कीमतों के बॉटम यानी सबसे निचले स्तर के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, “चार्ट अभी पॉजिटिव रिवर्सल या शॉर्ट कवरिंग का संकेत नहीं दे रहा है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मार्केट को क्रूड का बॉटम मिल गया है।”

उन्होंने कहा कि क्रू़ड ऑयल में बीते महीनों में उछाल की मुख्य वजह इसकी सप्लाई में कमी थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नहीं होने की वजह से क्रूड ऑयल की कमी हो गई थी। अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि WTI Crude के लिए अगला सपोर्ट 65 डॉलर प्रति बैरल पर है। इस लेवल के टूटने पर बेयरिश मोमेंटम दिख सकता है।

क्रूड की कीमतों की दिशा को लेकर एक्सपर्ट्स की एक राय नहीं है। ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा कि अभी क्रूड की कीमतों के बॉटम के बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि, कीमत गिरकर अमेरिका-ईरान की लड़ाई के पहले के स्तर पर आ गई है। लेकिन, क्रूड की सप्लाई सामान्य होने को लेकर बाजार की उम्मीद ज्यादा आशावादी लगती है।

माकदा का कहना है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड की ग्लोबल इनवेंट्री में काफी कमी आई है। OECD कमर्शियल फ्यूल इनवेंट्रीज गिरकर 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यूएस स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भी 1983 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

Petrol Diesel Price: क्या सस्ते होने वाले हैं पेट्रोल-डीजल? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आया बड़ा बयान

Petrol Diesel Price Cut: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की अटकलें तेज हो गई हैं। कच्चा तेल अब पश्चिम एशिया विवाद के शुरू होने से पहले के स्तर पर वापस आ चुका है।

इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल की कीमतें घटने की संभावनाओं पर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने बताया कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह स्थिर बने रहते हैं, तो सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी। आइए समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कितना सस्ता हुआ है और आपकी जेब को इसका फायदा कब से मिलेगा।

कच्चा तेल $120 से गिरकर $70 पर आया, फिर भी क्यों नहीं घटे दाम?

पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान जब होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। लेकिन हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए हुए एक समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम वापस 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं।

इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत न घटने के पीछे पेट्रोलियम मंत्री ने दो मुख्य कारण बताए हैं:

पुराने महंगे स्टॉक की प्रोसेसिंग: तेल विपणन कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर महंगे दामों में खरीदा गया था।

पहले का भारी नुकसान: इस विवाद के दौरान आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा, जिससे 30 जून तक कंपनियों को ₹74781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

प्राइवेट कंपनी ने घटाईं कीमतें: राहत की शुरुआत?

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा समीक्षा किए जाने से पहले ही निजी क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने आम जनता को राहत देने की शुरुआत कर दी है। नायरा एनर्जी ने अपने 7000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $70 के आसपास स्थिर रहीं, तो जल्द ही सरकारी तेल कंपनियां भी बड़ी राहत दे सकती हैं।

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क्या सोना बेचकर शेयर खरीदने का समय आ गया? एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव ने निफ्टी और बैंक निफ्टी पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में पॉजिटिव बदलाव दिख रहा है। बीते करीब दो सालों में शेयर बाजार का रिटर्न अच्छा नहीं रहा है। पहले हाई वैल्यूएशन बड़ा चैलेंज था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की। वैल्यूएशन अब घटा है। उधर, मध्यपूर्व में तनाव कम हुआ है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका पाॉजिटिव असर शेयर बाजारों पर दिख रहा है। सीएनबीसी-टीवी18 ने निवेश और शेयर बाजार के आउटुलक के बारे में जानने के लिए इंडियाचार्ट्स के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के साथ बातचीत की।

बाजार नई तेजी के शुरुआती चरण में

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार कई वैश्विक और भू-राजनीतिक झटकों के बाद अब एक नए अपट्रेंड के शुरुआती चरण में है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का असर पहले ही पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्निकल चार्ट्स पर ‘हायर लो’ (Higher Lows) का बनना यह दर्शाता है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। बाजारों में इस तेजी के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी 24,300 के लेवल को तोड़ने के बाद ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाएगा। बैंक निफ्टी के भी 63,000 पर पहुंच जाने की उम्मीद है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स की तेजी में बड़ी भूमिका

उन्होंने कहा कि मार्केट में अगले चरण की रैली में बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स का बड़ा योगदान होगा। यह सेक्टर आने वाले समय में स्टार परफॉर्मर बन सकता है। अगर आगे इंटरेस्ट रेट में कमी देखने को मिलती है तो इससे बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। रुपये में स्थिरता भी बैंकिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। उधर,

रियल एस्टेट, एनर्जी, मेटल्स और पावर सेक्टर्स का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा मोमेंटम दिख रहा है और निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी के मौके ढूंढने चाहिए।

सोने की जगह यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय

श्रीवास्तव ने कहा कि सोने और चांदी में शॉर्ट-टर्म मोमेंटम इंडिकेटर्स ओवरबॉट (overbought) की स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इससे निकट अवधि में मुनाफावसूली दिख सकती है। उन्होंने कहा कि यह समय कीमती धातुओं (precious metals) पर फोकस थोड़ा कम कर शेयरों पर बढ़ाने का है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी अब एक नए ‘गोल्ड’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि निवेशकों को लार्जकैप आईटी शेयरों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर को लेकर भी सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।

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शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन शानदार तेजी

शेयर बाजार में 2 अप्रैल को लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 169 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.75 फीसदी यानी 579 अंक के उछाल के साथ 77,502 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी नाममात्र की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

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इस विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने प्राइवेट बैंकों में घटाया निवेश, आईटी शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का भारत के प्राइवेट बैंकों पर भरोसा घटा है। उसने अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से निफ्टी आईटी इंडेक्स को हटा दिया है। उसने कहा है कि बाजार की रफ्तार बढ़ाने वाला कोई फैक्टर नहीं दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, इनफ्लेशन और मानसून से जुड़े रिस्क बाजार के लिए बड़े चैलेंज दिख रहे हैं।

शेयरों से कमाई के लिहाज से स्थितियां चुनौतीपूर्ण

Bernstein ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को लेकर टेंशन कम हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी नीचे आ गई हैं। लेकिन, शेयर बाजार से कमाई के लिहाज से स्थितियां मुश्किल दिख रही हैं। कई बड़े सेक्टर बड़ी चुनौतियां का सामना कर रहे हैं। मौके मार्केट में सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों में हैं।

निफ्टी के लिए 26000 को टारगेट को बनाए रखा

बर्नस्टीन ने 1 जुलाई को जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई हैं। उसने कहा है, “इंडिया में मार्केट के रिटर्न का आउटलुक अब भी मुश्किल दिख रहा है।” हालांकि, इस साल के अंत तक निफ्टी के 26,000 के टारगेट में उसने बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से निफ्ली करीब 8-9 फीसदी चढ़ सकता है।

पोर्टफोलियो से इन शेयरों को किया बाहर

ब्रोकरेज फर्म ने अपने पोर्टफोलियो में हाल में हुए बदलाव के तहत ICICI Bank, IndusInd Bank और निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों को बाहर कर दिया है। हालांकि, उसने Axis Bank और Zydus Life के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि उसने फाइनेंशियल शेयरों में इस साल की शुरुआत में अपना निवेश घटाया था। इस सेक्टर को लेकर अब भी उसका एप्रोच सेलेक्टिव है।

प्राइवेट बैंकों में पहले जैसी ग्रोथ नहीं दिख रही

बड़े प्राइवेट बैंकों के बारे में बर्नस्टीन ने कहा है कि इनमें पहले की साइकिल जैसी ग्रोथ विजिबिलिटी और गवर्नेंस प्रीमियम नहीं दिख रहा। सरकारी बैंकों से प्रतियोगिता बढ़ रही है और शॉर्ट टर्म में रीरेटिंग की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। उसने कहा है कि उसने इस साल खराब प्रदर्शन की वजह से आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड को पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है।

डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में दिख रहे मौके

शेयर बाजार के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बर्नस्टीन के इंडिया पोर्टफोलियो ने इस साल 1.1 फीसदी रिटर्न दिया है। यह इस दौरान निफ्टी के 6.7 फीसदी के निगेटिव रिटर्न से बेहतर है। उसने कहा है कि बाजार की मौजूदा स्थितियों में सीमित मौके दिख रहे हैं। ये मौके डेटा सेंटर ईकोसिस्टम और इमर्जिंग मैन्युफैक्चरिंग थीम में दिख रहे हैं। ये मौके ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स तक सीमित हैं, जिससे मार्केट के कुल रिटर्न पर इनका असर पड़ने की संभावना नहीं है।

LIC सहित इन 8 कंपनियों और बैंकों में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, IDBI Bank का शेयर 2.46% उछला

सरकार एलआईसी सहित 8 बड़ी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचेगी। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने सरकार की वित्तीय सेहत पर दवाब बढ़ा दिया था। वित्तीय सेहत ठीक करने के लिए सरकार विनिवेश पर फोकस बढ़ाना चाहती है। इसके लिए एलआईसी, हिंदुस्तान जिंक सहित 8 कंपनियों में अगले कुछ महीनों में विनिवेश की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इनमें कुछ सरकारी बैंक भी शामिल हैं। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी।

LIC में हिस्सा बेचने से 10000 करोड़ मिल सकते हैं

Life Insurance Corporation (LIC) देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। ब्लूमबर्ग ने पहले खबर दी थी कि इस कंपनी में हिस्सेदारी बेच सरकार 10,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। Hindustan Zinc के शेयरों में हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 5,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार के विनिवेश कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी हर हफ्ते इस बारे में मीटिंग कर रहे हैं। इनवेस्टमेंट बैंकर्स इनवेस्टर्स डिमांड का पता लगा रहे हैं। वे शेयरों की कीमत और बिक्री के समय के बारे में भी विचार कर रहे हैं। मामले से जुड़े लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।

IDBI Bank के लिए भी नई बोलियां आमंत्रित की जा सकती हैं

इस मामले के बारे में जानकारी देने वाले लोगों ने यह भी बताया कि भविष्य में कुछ और सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए अतिरिक्त बैंकर्स की नियुक्ति की जा रही है। अथॉरिटीज IDBI Bank में ब़ड़ी हिस्सेदारी बेचने के लिए नई बोलियां (bids) आमंत्रित करने के बारे में भी सोच रही है। इसके लिए सरकार रिजर्व प्राइस में कमी कर सकती है। इससे पहले आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया इसलिए रोक दी गई थी, क्योंकि खरीदारों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। 2 जुलाई को IDBI Bank के शेयर में तेजी दिखी। यह 2.46 फीसदी चढ़कर 84.30 रुपये पर चल रहा था।

विदेशी निवेशकों ने इस साल 29 अरब डॉलर की बिकवाली की

इस बारे में पूछने पर वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सरकार ऐसे वक्त अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने जा रही है, जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ा है। इस साल की पहली छमाही में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इस दौरान निफ्टी में करीब 9 फीसदी की गिरावट में इसका बड़ा हाथ है।

इस साल जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के मेगा आईपीओ भी आएंगे

इस साल Jio Platforms और NSE के आईपीओ भी आने वाले हैं। सरकार के अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के प्लान पर इन आईपीओ का असर पड़ सकता है, क्योंकि ये दोनों ही आईपीओ काफी ज्यादा अमाउंट के होंगे। इस मामले की जानकारी देने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सरकार पहले Coal India और NHPC में हिस्सेदारी बेचकर निवेशकों के रिस्पॉन्स का पता लगाना चाहती है।

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सरकार का विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

सरकार ने इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। अप्रैल से जून के दौरान सरकार ने विनिवेश से करीब 2 अरब डॉलर (18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) जुटाए  हैं। यह बीते तीन सालों में हर साल विनिवेश से आए कुल अमाउंट से ज्यादा है। 2 जुलाई को शेयर बाजारों में तेजी दिखी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 0.50 फीसदी से ज्यादा मजबूती थी।

Gold Silver Price: सोने की कीमतों में तेजी, यूएस जॉब डेटा में नरमी और क्रूड में गिरावट से मिला सपोर्ट

Gold Silver Price: गुरुवार को सोने की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। सोने को उम्मीद से कम जॉब डेटा और क्रूड की कम कीमतों से सपोर्ट मिला, जबकि मार्केट का फोकस फेडरल रिजर्व की चाल पर नए संकेतों के लिए आज की यूएस पेरोल रिपोर्ट पर था। पिछले सेशन में 23 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल को छूने के बाद, 0251 GMT तक स्पॉट गोल्ड 0.7% बढ़कर $4,057.92 प्रति औंस हो गया। अगस्त डिलीवरी के लिए U.S. गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर $4,070.10 पर आ गया।

प्राइवेट पेरोल डेटा उम्मीद से कम आने के बाद बुलियन बुधवार को 7 महीने से ज़्यादा के निचले स्तर के करीब रहा, फिर $4,029.89 पर बंद हुआ।

ABC रिफाइनरी में इंस्टीट्यूशनल मार्केट्स के ग्लोबल हेड निकोलस फ्रैपेल ने कहा, ADP डेटा अनुमान से थोड़ा कम आया, इसलिए शायद यही सोने की तेजी की वजह है क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि डेटा का असर नॉन-फार्म पेरोल में दिखेगा।” ADP नेशनल एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट से पता चला कि मई में बिना बदलाव के 122,000 की बढ़त के बाद पिछले महीने प्राइवेट एम्प्लॉयमेंट में 98,000 नौकरियां बढ़ीं। रॉयटर्स के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट ने प्राइवेट एम्प्लॉयमेंट में 118,000 की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था।

इस बीच, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने बुधवार को कहा कि हाल के हफ्तों में महंगाई की उम्मीदें और महंगाई के रिस्क कम हुए हैं, हालांकि उन्होंने दोहराया कि फेड महंगाई को अपने 2% के लक्ष्य तक लाने के लिए कमिटेड है।

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, ट्रेडर्स सितंबर में रेट बढ़ने की लगभग 64% संभावना मान रहे हैं। इन्वेस्टर्स अब जून के नॉनफार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जो आज दिन में बाद में आएगा, ताकि फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के रास्ते के बारे में और सुराग मिल सकें। बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस्ड इनडायरेक्ट बातचीत खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई, लेकिन इससे पक्की शांति की तरफ कोई खास बढ़त नहीं हुई।

क्रूड की बढ़ी हुई कीमतें और मजबूत लेबर मार्केट महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों को लेकर डर पैदा कर सकते हैं।

हालांकि सोने को पारंपरिक रूप से महंगाई के खिलाफ बचाव के तौर पर देखा जाता है, लेकिन ज्यादा ब्याज दर वाले माहौल में यह एक नॉन-यील्डिंग एसेट के तौर पर अपनी अपील खो देता है। स्पॉट सिल्वर 1.6% बढ़कर $60.06 प्रति औंस हो गया, प्लैटिनम 2% बढ़कर $1,607.67 हो गया, और पैलेडियम 1.4% बढ़कर $1,227.13 हो गया।

Gold price today: सोने-चांदी में गिरावट जारी, एमसीएक्स पर सोना 1% टूटा, चांदी भी 2% फिसली

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IT Stocks के दम पर Sensex में 500 अंकों का उछाल, 5 वजहों से Nifty भी 24150 के पार

Share Market Rally: इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के दूसरे दिन भी मार्केट में शानदार रौनक है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो कच्चे तेल फिसल गया और मार्केट में रौनक छा गई। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स इंट्रा-डे में 500 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24150 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप आधे-आधे फीसदी मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:25 AM पर सेंसेक्स 295.10 प्वाइंट्स यानी 0.38% की बढ़त के साथ 77,217.74 और निफ्टी 50 भी 89.45 प्वाइंट्स यानी 0.37% की बढ़त के साथ 24,095.30 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 526.61 प्वाइंट्स चढ़कर 77,449.25 और निफ्टी 153.60 प्वाइंट्स उछलकर 24,159.45 तक पहुंचा था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका-ईरान वार्ता

कतर का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। यह रास्ता कच्चे तेल के लिए काफी अहम है क्योंकि युद्ध से पहले वैश्विक सप्लाई का पांचवा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता था।

कच्चे तेल में गिरावट

लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल में गिरावट ने मार्केट में रौनक बिखेरी है। अमेरिका और ईरान के बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इस पर दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक गिरकर प्रति बैरल $71 के नीचे आ गया को यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 1% से अधिक टूटकर प्रति बैरल $68 के नीचे आ गया।

रुपये की मजबूती

कच्चे तेल की गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 32 पैसे मजबूत 94.93 के भाव पर खुला।

India VIX में गिरावट

मार्केट को घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट में अनिश्चितता कम होने का संकेत दिया। फिलहाल यह 3.85% की गिरावट के साथ 12.73 पर है।

आईटी शेयरों की जोरदार खरीदारी

लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी आईटी ने आज जोरदार वापसी की और 3% से अधिक उछल पड़ा। फिलहाल सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन आईटी और मेटल को छोड़ सभी में 1% से कम तेजी है। निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की बढ़त है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंज जेम्स का कहना है कि अनुमान के मुताबिक कल की बढ़त 24000 के लेवल से आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन हाई VWAP से इसमें आगे तेजी का संकेत मिल रहा है। उनका कहना है कि निफ्टी को शुरुआत में 24170 के लेवल पर रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकता है लेकिन इसके 24600 तक पहुंचने की संभावना अधिक है। हालांकि यह बुलिश रुझान तब तक है, जब तक निफ्टी का 23,970 का लेवल बना रहे।

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