सीजेपी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने सोमवार को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे पहले सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

अब सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रांका ने कहा कि संगठन ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पुलिस को चिट्ठी देकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी है। उन्होंने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने का ऑप्शन भी दिया है।

रांका ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि कोई वहां नहीं था। उन्होंने तंज करने के अंदाज में कहा, ‘ऐसा लग रहा था कि सीजेपी के पहुंचने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को खाली करा दिया गया है’। इसी बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने हिरासत का वीडियो एडिट करके जारी किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में वकील से संपर्क करना कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। दीपके ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

दिल्ली के दो प्रदर्शनों का फर्क

राजधानी दिल्ली में छह से नौ अक्टूबर तक विपक्षी पार्टियों ने प्रदर्शन किया। राहुल गांधी के साथ 19 विपक्षी पार्टियों के 178 लोकसभा सदस्य और 62 राज्यसभा सदस्य प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्ष ने 30 सितंबर को साझा बैठक करके तय किया था कि छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन का घेराव करेंगे। इसके बावजूद न तो निर्वाचन सदन को सुरक्षित रखने के लिए देश भर से अर्धसैनिक बुलाए गए और न विपक्ष को रोकने के लिए उनके लोगों को घरों में नजरबंद किया गया। सुरक्षा बलों ने किसी को नहीं रोका। संसद भवन से मार्च शुरू हुआ तो नीति आयोग के सामने उसे रोक दिया गया। उसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने थोड़ी उछलकूद की, राहुल बैरिकेड पर चढ़े और फिर आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठ गए, जहां से करीब आठ घंटे बाद उनको हटा दिया गया। दूसरे दिन भी इसी तरह का प्रदर्शन हुआ। विपक्षी सांसद जंतर मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें दो सौ मीटर पहले रोक दिया। वहां प्रियंका गांधी वाड्रा जमीन पर लेट गईं, लेकिन पुलिस सबको उठा ले गई और दो घंटे में छोड़ दिया। उसके अगले दिन राजघाट और फिर राष्ट्रपति भवन तक मार्च हुआ। किसी को रोकने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हुआ।

लेकिन 10 अक्टूबर के कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को रोकने के लिए देश के अलग अलग राज्यों से अर्धसैनिक बलों की 221 टुकड़ियां दिल्ली बुलाई गईं। आठ से 12 अक्टूबर तक उनको दिल्ली में तैनात किया गया। दिल्ली पुलिस के जवानों, अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई। 15 हजार जवान तैनात किए गए। ड्रोन से निगरानी शुरू हुई। मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। ट्रेनें रद्द की गईं। कनॉट प्लेस और आसपास की दुकानें बंद करा दी गईं। इंटरनेट बंद करा दिया गया। दो दिन शराब की दुकानें बंद रहीं। सीजेपी के समर्थकों को उनके घरों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने शनिवार को पूरी दुनिया के जंग का मैदान बना दिया। सेंट्रल दिल्ली से बहुत दूर के इलाकों में भी बैरिकेडिंग थी, चेकिंग हो रही थी और लोग पकड़े जा रहे थे।

अमित शाह की छवि की भी चिंता थी

कहा जा रहा है कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर जैसी भीड़ जुटी और वहां से संसद मार्च के दौरान जैसा हंगामा हुआ उससे अमित शाह की ‘लौह पुरूष’ वाली छवि पर दाग लगा। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि उस घटनाक्रम से लगा कि अमित शाह का कानून व्यवस्था पर से नियंत्रण कम हुआ है और उनका प्रशासन कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को ठीक से हैंडल नहीं कर सका। तभी बताया जा रहा है कि इस बार जब सीजेपी ने 10 अक्टूबर को फिर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया तो गृह मंत्रालय ने तय किया कि पिछली घटना को किसी हाल में दोहराने नहीं दिया जाएगा। हालांकि पुलिस के अधिकारी और भाजपा के नेता भी मान रहे थे कि इस बार के प्रदर्शन को पहले की तरह समर्थन नहीं है। फिर भी कोई चांस नहीं लिया गया।

इस बार अमित शाह के गृह मंत्रालय ने तय कर लिया था कि किसी को भी जंतर मंतर नहीं पहुंचने देना है। बाकी कहीं भी प्रदर्शन हो वहां लोगों को रोका नहीं जाएगा। लेकिन उनको जंतर मंतर नहीं पहुंचने दिया जाएगा। तभी पिछले एक हफ्ते से जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे आम आदमी पार्टी के नेताओं को वहां तक नहीं पहुंचने दिया गया। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, विधायक संजीव झा आदि जंतर मंतर गए तो उनको वहां से तुरंत हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया गया और वहां से हटा दिया गया। इसी तरह राहुल गांधी और दूसरे नेता बस से जंतर मंतर की ओर बढ़े तो उन्हें भी दो सौ मीटर दूर ही रोक कर हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद 10 अक्टूबर को भी पुलिस और सरकार का पहला लक्ष्य किसी तरह से प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पहुंचने से रोकने का था। इसके लिए जितनी ज्यादती हुई है उससे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत की छवि पूरी दुनिया में बिगड़ी है लेकिन पुलिस ने जंतर मंतर पर किसी को नहीं पहुंचने दिया।

अगर फ्लैश प्रोटेस्ट हुआ तो पुलिस क्या करेगी?

अब बड़ा सवाल यह है कि पुलिस ने अपने नागरिकों खास कर युवाओं और छात्रों से गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया है तो इसके आगे क्या होगा? गुरिल्ला युद्ध इसलिए है क्योंकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों में नौ अक्टूबर से तू डाल डाल, मैं पात पात का खेल चल रहा है। प्रदर्शनकारी रात में कनॉट प्लेस पहुंच कर शौचालयों या दूसरी जगहों पर छिपे थे, जहां से निकल कर वे जंतर मंतर की ओर बढ़े। पुलिस उनको जनपथ में रोक रही थी तो वे कनॉट प्लेस में इकट्ठा हो रहे थे। उनको कनॉट प्लेस में रोका गया तो वे रेलवे स्टेशन पहुंच गए। दक्षिण की ओर प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली हाट में डेरा जमा लिया। निजामुद्दीन और उससे आगे लोधी रोड और लोधी गार्डेन के पास प्रदर्शनकारी जमे रहे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई घंटे तक लुकाछिपी का खेल चला।

सवाल है कि इस बार को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन का ऐलान कर दिया था। आगे किसी दिन ऐलान न करें और अचानक जंतर मंतर पहुंच जाएं तो क्या होगा? पुलिस की गुरिल्ला तकनीक से ही सीख कर प्रदर्शनकारियों ने अचानक यानी फ्लैश प्रोटस्ट कर दिया तो पुलिस क्या करेगी? क्या पुलिस अब स्थायी रूप से जंतर मंतर को घेरे रहेगी, उसी तरह ऊंचे ऊंचे बैरिकेड्स लगे रहेंगे और पुलिस तैनात रहेगी? वहां लोग रहते हैं, संस्थाओं को कार्यालय हैं, पार्टियों के दफ्तर हैं, दुकानें हैं, आने जाने का रास्ता है, क्या सब कुछ स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा? कम से कम अभी तो यही लग रहा है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों का टकराव स्थायी होने वाला है और सेंट्रल दिल्ली में स्थायी अव्यवस्था रहने वाली है। त्योहारों के सीजन में इससे कारोबार पर भी बड़ा असर होगा।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने संज्ञान लिया

केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इस मकसद में कामयाब हो गए कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर नहीं पहुंचने दिया। लेकिन क्या उनको अंदाजा है कि इससे एक लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की छवि पर क्या असर पड़ा है? भारत को क्या कीमत चुकानी पड़ रही है? लोग सोशल मीडिया में अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अखबारों के पहले पन्ने की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने पहले पन्ने पर खबर छापी है, जिसमें कई पुलिस वाले एक महिला प्रदर्शनकारी को उठा कर ले जा रहे हैं।

इतना ही नहीं अभूतपूर्व पुलिस कार्रवाई का संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी संज्ञान लिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के ऑफिस ऑफ ह्यूमन राइट्स कमीशन यानी  ओएचसीएचआर ने शनिवार, 10 अक्टूबर के घटनाक्रम पर चिंता जताई है। इसके प्रवक्ता ने बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। स्थिति यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से यह अपील करनी पड़ी है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से लोगों के इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने के अधिकार को बाधित न करें। उसने भारत सरकार के अधिकारियों से कहा है कि वह छात्रों और युवाओं से संवाद करे। हर बार की तरह भारत सरकार ने इसे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप बताते हुए इसे खारिज किया है। लेकिन खारिज करने से हालात नहीं बदलेंगे। दुनिया भर में पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

ज्ञानेश के खिलाफ प्रदर्शन जारी

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। शनिवार को मुकाबले रविवार को प्रदर्शन की तीव्रता कम थी लेकिन फिर सेंट्रल दिल्ली सहित अन्य कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए और करीब दो सौ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने प्रदर्शनकारियों को भगाने के बाद कनॉट प्लेस में फ्लैग मार्च किया। कई जगह युवाओं के अभिभावक भी सड़कों पर उतरे और उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को पुलिस हिरासत में ले रही है।

रविवार को लगातार दूसरे दिन एक तरफ प्रदर्शन हो रहे थे तो दूसरी ओर पूरी दिल्ली में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात रहे। इससे पहले सुबह 10 बजे के करीब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा किया गया। वे करीब 23 घंटे हिरासत में रहे। उन्होंने एक बॉन्ड भी भरा, जिसके बाद उनको रिहा किया गया।

बहरहाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर नहीं जाने दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इलाके में जमा होने लगे। वहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया तो सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई की आईसी घोष पुलिस की बस के सामने आ गईं। सीपीएम के छात्रों ने बस के सामने बैठ कर प्रोटेस्ट किया। गौरतलब है कि एसएफआई ने दिल्ली पुलिस के ऊपर महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी का आरोप लगाया था।

इस बात को लेकर एसएफआई ने विरोध करते हुए राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर सात के सामने कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हाथों में तिरंगा झंडा लेकर प्रदर्शन किया। ये सभी लोग बस के आगे जमीन पर बैठ गए। करीब 10 मिनट की जद्दोजहद के बाद दिल्ली पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने सभी हटा कर बस में बैठाया और वहां से हटाया। कुछ प्रदर्शनकारी हाथ में डंडे लेकर कनॉट प्लेस में घूम रहे थे। उनके साथ पुलिस की झड़प भी हुई। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से भीड़ नहीं लगाने की अपील की। प्रदर्शन को देखते हुए कनॉट प्लेस के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। लोगों ने प्रदर्शन का नया तरीका निकाल लिया। कई नावों पर सवार लोगों ने यमुना नदी में प्रदर्शन किया।

Delhi Traffic Advisory: आज घर से निकलने से पहले जान लें ट्रैफिक एडवाइजरी, दिल्ली की 25 से ज्यादा सड़कों पर रहेगा डायवर्जन

Delhi Police Traffic Advisory: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और दिल्ली में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में 12 अक्टूबर को कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित रह सकती है। ट्रैफिक पुलिस ने 12 अक्टूबर के लिए एक अहम ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कई जगहों पर डायवर्जन की तैयारी की है, जो जरूरत के अनुसार सुबह 6 बजे से लागू होगें। ऐसे में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या ISBT जाने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देख लेना चाहिए।

सुबह 6 बजे से होगा डायवर्जन

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जरूरत पड़ने पर सुबह 6 बजे से कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अगर जरूरी ना हो तो यात्रा से बचें और अगर रेलवे स्टेशन, ISBT या एयरपोर्ट जाना जरूरी है तो घर से थोड़ा जल्दी निकलें। खासकर नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली से होकर जाने वाले लोगों को एक्स्ट्रा टाइम लेकर चलने की सलाह दी गई है। ऐसे में अगर आज आप ऑफिस, कॉलेज या बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं तो सबसे पहले ट्रैफिक एडवाजरी का अपडेट जरूर जान लें।

इन रास्तों पर होगा डावर्जन

ट्रैफिक प्रभावित होने वाले प्रमुख स्थानों में शंकर रोड-वंदे मातरम टी-पॉइंट, धौला कुआं फ्लाईओवर, झंडेवालान, पंचकुइयां, मंडी हाउस, डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक, राम चरण अग्रवाल चौक, मिंटो रोड-डीडीयू मार्ग, गुरु नानक चौक, चेम्सफोर्ड रोड, कनॉट प्लेस, लोधी रोड फ्लाईओवर, नीला गुम्बद, मदरसा टी-पॉइंट, सम्राट होटल, सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग, भीकाजी कामा प्लेस, मोती बाग फ्लाईओवर, रिंग रोड-सैन मार्टिन मार्ग, अशोका रोड-जंतर मंतर रोड, विंडसर पैलेस, टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग, रेल भवन, जय सिंह रोड-संसद मार्ग, बाराखंबा रोड, गोल डाकखाना, पटेल चौक और आरएमएल अस्पताल के आसपास के रास्ते शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार इन डायवर्जन और प्रतिबंधों में बदलाव किया जा सकता है। इसलिए लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक का ताजा अपडेट जरूर देखें और जरूरत पड़ने पर दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करें।

 

CJP कल मांगेगी परमिशन

CJP ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के नेता आशुतोष रंका ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे वह सौरव दास और संगठन के अन्य सदस्यों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे। वहां दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन के लिए तारीख और अनुमति देने का अनुरोध किया जाएगा। रंका के मुताबिक, अगर पुलिस 24 घंटे के अंदर प्रदर्शन की तारीख नहीं देती है, तो संगठन अपने स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा करेगा।

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Delhi Traffic Advisory: CJP प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी, आज इन अहम रास्तों से जाने से बचें

Delhi traffic advisory for October 11: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा फिर से विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किए जाने के बीच, रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक संबंधी कड़े प्रतिबंध लागू रहे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, रविवार सुबह छह बजे से ही वाहनों के मार्गों में बदलाव किया गया है। लुटियंस दिल्ली में जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, पटेल चौक और कई अन्य प्रमुख चौराहों के आसपास ट्रैफिक प्रभावित रहने की आशंका है।

प्रभावित रूट्स में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोलचक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ चौराहा, जय सिंह रोड-संसद मार्ग चौराहा, रेल भवन गोलचक्कर, पटेल चौक, गोल डाकखाना और कनॉट प्लेस के आसपास के कई चौराहे शामिल हैं। इसके अलावा, मंडी हाउस, मिंटो रोड-दीन दयाल उपाध्याय मार्ग चौराहा, लोधी रोड फ्लाईओवर, नीला गुंबद गोलचक्कर, सम्राट होटल गोलचक्कर, सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग चौराहा तथा भीकाजी कामा प्लेस और मोती बाग फ्लाईओवर के नीचे बने अंडरपास पर भी यातायात प्रभावित रहने की आशंका है।

ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने और विशेष रूप से रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस अड्डों तथा एयरपोर्ट जाने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी है। पुलिस ने बताया कि स्थिति का आकलन करने के बाद प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी या उनमें बदलाव किया जाएगा। ये पाबंदियां सुबह 6 बजे से शुरू हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि जमीनी हालात के आधार पर इन्हें लागू या बदला जा सकता है।

इन रास्तों को करें इग्नोर

शंकर रोड-वंदे मातरम टी-पॉइंट गोलचक्कर (नई दिल्ली की ओर)

धौला कुआं फ्लाईओवर

झंडेवालान गोलचक्कर

पंचकुइयाँ गोलचक्कर

मंडी हाउस गोलचक्कर

डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक (W-पॉइंट)

राम चरण अग्रवाल चौक (A-पॉइंट)

मिंटो रोड और दीन दयाल उपाध्याय मार्ग

गुरु नानक चौक

चेम्सफ़ोर्ड रोड-आउटर सर्कल कनॉट प्लेस टी-पॉइंट

भैरौं रोड-MGM (रिंग रोड) टी-पॉइंट

लोधी रोड फ़्लाईओवर

नीला गुंबद गोलचक्कर

मदरसा टी-पॉइंट

सम्राट होटल गोलचक्कर

सरदार पटेल मार्ग-पंचशील मार्ग क्रॉसिंग

भीकाजी कामा प्लेस के नीचे

मोती बाग फ़्लाईओवर के नीचे

रिंग रोड-सैन मार्टिन मार्ग टी-पॉइंट

अशोक रोड-जंतर मंतर रोड गोलचक्कर

विंडसर पैलेस गोलचक्कर

टॉल्स्टॉय-जनपथ क्रॉसिंग

रेल भवन गोलचक्कर

जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग

आउटर सर्कल कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड टी-पॉइंट

गोल डाक खाना गोलचक्कर

पटेल चौक गोलचक्कर

जय सिंह रोड-अशोक रोड टी-पॉइंट

RML हॉस्पिटल गोलचक्कर

आउटर सर्कल कनॉट प्लेस-संसद मार्ग टी-पॉइंट।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े प्रबंध

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना प्रदर्शन जारी रखने की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की घोषणा के मद्देनजर दिल्ली में रविवार को लगातार दूसरे दिन भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 30,000 से अधिक जवानों की तैनाती की योजना है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया था। प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

अवैध सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली से लगती सीमाओं, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। CJP की ओर से अपना आंदोलन जारी रखने की घोषणा के बाद सुरक्षा के ये इंतजाम किए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था संभालने में दिल्ली पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 120 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं। नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जमीनी स्तर पर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।विभिन्न इकाइयों का नेतृत्व करने वाले विशेष पुलिस आयुक्त भी स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।

पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी है। वाहनों की जांच बढ़ा दी गई है और होटलों, गेस्ट हाउस, लॉज तथा धर्मशालाओं में लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों को जुटाने की कोशिशों का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी नजर रखी जा रही है।

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पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा कर्मियों के साथ सहयोग करने की अपील की है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक घोषणाओं की जानकारी ले लें।

जंग का मैदान बनी दिल्ली

नई दिल्ली। शनिवार को दिन भर लगभग पूरी दिल्ली जंग का मैदान बनी रही। कॉकरोच जनता पार्टी ने सेंट्रल दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरी दिल्ली को कब्जे में ले रखा था। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 38 हजार जवान अलग अलग जगहों पर तैनात थे, जिन्होंने सात हजार के करीब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

पुलिस ने जगह जगह बैरिकेडिंग कर रखी थी और जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे युवाओं व छात्रों को अलग अलग जगहों से पकड़ा। उनको बसों में भर कर दूरदराज के इलाकों में ले जाया गया। देर शाम प्रदर्शनकारियों को रिहा किया गया। इससे पहले सोनम वांगचुक ने ऐलान किया था कि अगर प्रदर्शनकारी रिहा नहीं होते हैं तो वे आंदोलन करेंगे। इस बीच शनिवार की शाम को सीजेपी ने रविवार को फिर से जंतर मंतर की ओर मार्च करने का ऐलान किया।

एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों से घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी पार्टियों के साथ साथ सिविल सोसायटी के लोगों ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरा जोर लगा कर प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पहुंचने से रोक दिया। जंतर मंतर पहुंचने का प्रयास करते हुए ममता बनर्जी को गिरफ्तार किया गया तो अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लिया गया। हालांकि बाद में दोनों को छोड़ दिया गया।

सुबह की उड़ान से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को अन्य नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया। बाद में उनकी दादी के निधन की खबर आई तो पुलिस ने उनको घर जाने की इजाजत दे दी। असल में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जंतर मंतर के आसपास पांच लेयर की बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शन के लिए तय जगह तक पुलिस ने किसी को पहुंचने नहीं दिया। दीपके की गिरफ्तारी के बाद उनका एक पुराना वीडियो जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनको हिरासत में लिए जाने के बाद आजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। बाद में शिंदे ने कमान संभाली और लोगों से जंतर मंतर की ओर बढ़ने का आह्वान किया। सीजेपी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सरकार ने बहुत बड़ी तैयारी की थी। आठ से 12 अक्टूबर तक के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 221 कंपनियां यानी करीब 23 हजार जवान दिल्ली बुला कर तैनात किए गए। इनके अलावा दिल्ली पुलिस के कम से कम 15 हजार जवानों और अधिकारियों की तैनाती की गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए। करीब ढाई सौ ट्रेनें रद्द कर दी गईं। कनॉट प्लेस के आसपास दुकानें बंद थीं तो जंतर मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद रखा गया था। स्कूल व कॉलेज भी या तो बंद थे या ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी।

सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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