जंतर मंतर बेअसर नहीं रहा है

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी डूसू के चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के बुरी तरह से हारने और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के चार में से तीन सीटों पर जीत जाने के बाद ऐसी व्याख्या की जा रही है, जैसे जंतर मंतर पर हुआ छात्रों का आंदोलन बेअसर रहा और देश का ‘जेन जी’ भाजपा और संघ के साथ है। लेकिन यह असली तस्वीर नहीं है। जंतर मंतर का आंदोलन बेअसर नहीं हुआ है और न छात्रों का गुस्सा शांत हुआ है। उन्होंने अलग तरह से अपने गुस्से को जाहिर किया है। यह साफ दिख रहा है कि एबीवीपी के लिए कोई लहर नहीं थी। वह प्रबंधन और विपक्ष के वोटों के बंटवारे की वजह से जीत गई। यह कोई निर्णायक जीत नहीं है। अगर कोई लहर होती तो ऐसा नहीं होता कि उपाध्यक्ष के पद पर उसका उम्मीदवार 16 हजार वोट से हारता। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव भी गिर पड़ के जैसे तैसे ही जीता है।

तभी इस पूरे मामले में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। अगर विपक्ष ने तालमेल कर लिया होता और एक होकर लड़ते तो डूसू की सभी चार सीटों पर विपक्ष की जीत होती। सोचें, कांग्रेस के सुप्रीम लीडर राहुल गांधी इन दिनों ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कर रहे हैं लेकिन देश की छात्र राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में दिलचस्पी नहीं ली। उन्होंने सीपीआई माले के छात्र संगठन आईसा की नेहा बोरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उनसे तालमेल की बात वे कर सकते थे। वे सीधे दीपांकर भट्टाचार्य से भी बात कर सकते थे। लेकिन लेफ्ट को गठबंधन बना कर अलग लड़ने दिया गया। तभी खराब माहौल के बावजूद एबीवीपी जीती।

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 और विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। यश 2,053 वोट से जीते, जबकि लेफ्ट की अनन्या रतूड़ी को 5,377 वोट मिले। सचिव पद पर एबीवीपी की जीत सात हजार के करीब वोट से हुई है, जबकि लेफ्ट को 87 सौ वोट मिला। ऐसे ही संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी ने सपा के विशेष यादव को 837 वोट से हराया। एबीवीपी उम्मीदवार को 16,615 वोट मिले, जबकि कांग्रेस, सपा और लेफ्ट को मिला कर इसके दोगुने से ज्यादा करीब 37 हजार वोट मिले।

डीयू में एबीवीपी को मिली जीत

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन के बाद युवाओं व छात्रों की नाराजगी के बीच सबकी नजर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डूसू के चुनावों पर थी। शनिवार को आए नतीजों में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बाजी मारी है। कांटे की टक्कर में एबीवीपी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर उसके यश डबास जीते। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली। लेफ्ट का गठबंधन भी नाकाम रहा।

अध्यक्ष पर पर एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के जितेंद्र कुमार मीणा को दो हजार के करीब वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने रिकॉर्ड बनाया। 17 साल के बाद डूसू के सेंट्रल पैनल में किसी पद पर निर्दलीय की जीत हुई है। शौकीन को 30 हजार से ज्यादा वोट मिले। एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद वे निर्दलीय लड़े थे। सबसी बड़ी जीत उनकी है। इससे पहले 2009 में निर्दलीय मनोज चौधरी और 1991 में निर्दलीय राजीव गोस्वामी डूसू के अध्यक्ष बने थे।

एबीवीपी की रिया छावड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर जीत मिली। गौरतलब है कि डूसू चुनाव के लिए शुक्रवार को 52 कॉलेजों में मतदान हुआ था। इसमें 40.46 फीसदी वोटिंग हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के 1,51,519 छात्रों में से 61,312 ने मतदान किया।

चुनाव नतीजे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा, ‘दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं, यहां देश के हर कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। आज एबीवीपी को मिली शानदार जीत उन राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। देश का युवा आज राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है’।

सीजेपी का बड़ा डर है

ऐसा लग रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने न सिर्फ युवाओं के प्रदर्शन का तरीका बदला है, बल्कि उसके असर को कोई गुना बढ़ा दिया है। केंद्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें हों या न्यायपालिका और प्रशासन हो, सब कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों व युवाओं की चिंता कर रहे हैं। नेताओं में तो सीजेपी के खौफ बन गया है। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में पार्टियों और नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। वहां सीजेपी ने स्कूलों को लेकर जो अभियान शुरू किया, उसका बड़ा असर चुनाव नतीजों में दिखा है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में निर्दलीय जीते हैं। निर्दलीय व अन्य को 23 सौ से ज्यादा सीटें मिली हैं और कुल 31 फीसदी वोट मिले हैं।

ऐसे ही पिछले दिनों नोएडा के एक मजिस्ट्रेट ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में एक छात्र को नोटिस जारी कर दिया था तो मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया। सोचें, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ इस बात का जिक्र किया कि सर्वोच्च अदालत की ओर से सारे एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया गया है लेकिन मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कर दिया तो उस पर चीफ जस्टिस ने बड़ी नाराजगी जताई और उसके अगले दिन मजिस्ट्रेट निलंबित हो गए। नोएडा में ही एक प्रदर्शनकारी छात्रों को नोटिस देने के मामले में एक पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक सरकारों ने  स्कूलों की सुधार के लिए फंड जारी किया है वह अलग है। जाहिर है कि सीजेपी ने सबके अंदर चिंता या डर बैठा दिया है।

मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

यह भी पढ़ें: विजयानंद ट्रैवल्स ने वोल्वो को दिया अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर, बेड़े में शामिल होंगी 150 नई बस

मैंने सिर फोड़ दिया था…’, दावा करने वाला ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, CJP प्रोटेस्टर के पिता पर हमला करने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। उस पर जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने का आरोप है। भारद्वाज की गिरफ्तारी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से उसे हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। बता दें कि यह कार्रवाई नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP), इंडियन यूथ कांग्रेस और लोकसभा सांसद चंद्र शेखर व राजेश रंजन के विरोध प्रदर्शन के बाद की गई थी।

इसके बाद भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।

पीड़ित और उनकी बेटी के वकील ऋषभ रंजन ने CNN-News18 को बताया: “उनकी सुनवाई बहुत हैरान करने वाली थी। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। हमें बस यह जानकारी मिली कि स्वतंत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज के सामने उनके घर पर पेश किया गया। हमें बताया गया कि एक दिन की पुलिस कस्टडी दी गई है, लेकिन इस समय हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता कि कौन सी धाराएं जोड़ी गई हैं।”

इससे पहले, सूत्रों ने CNN-News18 को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ (POCSO) एक्ट के तहत एक नई FIR दर्ज की है, साथ ही भारद्वाज के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति’ (SC/ST) एक्ट की धाराएं भी जोड़ी हैं।

क्या है पूरा मामला?

21 साल के ‘इन्फ्लुएंसर’ और अन्य लोगों पर संजय आजाद नाम के व्यक्ति पर हमला करने का आरोप है, जो 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में अपनी नाबालिग बेटी के साथ गए थे।

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, भारद्वाज ने दावा किया कि उसने “पीड़ित का सिर फोड़ दिया था” और कहा कि उसे कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन हासिल है, जिनमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शामिल हैं।

उसने कहा “मैंने निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। क्या आप जानते हैं कि इस अपराध पर कौन सी धारा लागू होती है? धारा 307। उन्हें 60 टांके लगे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था।”

भारद्वाज ने दावा किया कि इस घटना के बावजूद, उसे जेल नहीं हुई और वो आजादी से घूमता रहा।

भारद्वाज ने कहा, “उसकी बेटी पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। लेकिन मुझे जेल तक नहीं हुई। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”

उसने आगे कहा, “मुझ पर हनुमान जी की कृपा है। दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि कपिल मिश्रा के फोन करने पर मुझे छोड़ा गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानते हैं? क्या आप मोदी जी को जानते हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सबका समर्थन हासिल है।”

विपक्ष की नाराजगी, पासवान ने बनाई दूरी

उसके बयानों पर CJP, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इसके बाद, चिराग पासवान ने खुद को उस तथाकथित ‘इन्फ्लुएंसर’ से अलग कर लिया और जोर देकर कहा कि जो लोग खुलेआम कानून का मजाक उड़ाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर भारद्वाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता की नजर में यह एक गलत मिसाल कायम करेगा।

उन्होंने भारद्वाज पर अपने नाम का “गलत इस्तेमाल” करने का भी आरोप भी लगाया। “मामले की गंभीरता को देखते हुए और चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे नाम के साथ-साथ कई अन्य राजनेताओं के नामों का भी गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह भी किया है… संजय जी (निशु के पिता) आज जिस स्थिति में हैं, उसे देखते हुए मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से उनके और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें न्याय दिलाना एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे मैं और मेरी पार्टी पूरी तरह से स्वीकार करते हैं… हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सच सामने आए और जो व्यक्ति खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहा है, उसके खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाए…”

यह भी पढ़ें: विजयानंद ट्रैवल्स ने वोल्वो को दिया अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर, बेड़े में शामिल होंगी 150 नई बस

Top News 22 August: इमरान खान की सेहत पर बहन का बड़ा दावा, राम मंदिर निर्माण पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

Top News 22 August: इमरान खान की सेहत पर बहन का बड़ा दावा, राम मंदिर निर्माण पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

top news 22 august

Top News 22 August: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के बाद उनकी बहन ने कहा कि इमरान को बहुत टॉर्चर किया जा रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति ने अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का दावा, मंदिर निर्माण में सरकार का एक भी पैसा नहीं लगा। दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन। रूस का यूक्रेन के शॉपिंग मॉल पर हमला। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झाखंड भर्ती विवाद। 22 अगस्त की बड़ी खबरें : 

 

इमरान के स्वास्थ्य पर क्या बोलीं बहन उज्मा?

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व PM इमरान खान की बहन उज्मा ने दावा किया कि मुलाकात के दौरान इमरान बार-बार एक ही चीज कही, मेरे साथ जुल्म हुआ है। मुझे बहुत टॉर्चर किया जा रहा है। आंखों के इलाज के लिए इंजेक्शन न लगने पर स्थिति और बिगड़ने का खतरा था। आंख की एक नस खराब होने से बची हुई है। एक इंजेक्शन लगने के बाद अब धीरे-धीरे आंखों की रोशनी वापस आ रही है।

 

मंदिर निर्माण में नहीं लिया सरकार का एक भी पैसा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर निर्माण में निश्चित रूप से ट्रस्ट का योगदान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर और परिसर के निर्माण में केंद्र अथवा राज्य सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा है।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रसिद्ध धरना स्थल जंतर-मंतर पर शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन हुआ। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस के विरोध में हजारों लोग जुटे। प्रदर्शन का आयोजन ‘Reservation Reform Andolan’ के बैनर तले किया गया। ALSO READ: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण और UGC नियमों के विरोध में उतरे हजारों लोग

 

रूस का यूक्रेन के शॉपिंग मॉल पर हमला

रूस ने शुक्रवार दोपहर मध्य यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर में कई ड्रोन से हमला किया। इस हमले में शहर के एक बड़े शॉपिंग मॉल को निशाना बनाया गया। मीडिया खबरों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। घायलों में 22 बच्चे शामिल हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झाखंड भर्ती विवाद

झारखंड में परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। रांची में 24 दिन आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने परीक्षाएं रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। मामले में दायर याचिका पर शीर्ष अदालत सोमवार को सुनवाई कर सकती है।

 

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

rahul gandhi vs amit shah

जंतर मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में चर्चा और जवाब संबंधी पेशकश को खारिज करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनसे इस्तीफा मांग लिया। राहुल ने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? ALSO READ: क्या बिना संसद में परिसीमन बिल पास हुए बदल जाएंगी लोकसभा की सीटें? जानिए संविधान का वो नियम जो कोई नहीं बताता

 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देखिए सबसे पहले लापता और भाग गए हैं इस प्रकार की भाषा भारत की सर्वाजनिक जीवन में, संसदीय जीवन में अभी अभी सुनाई देती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है तबसे मैं लगातार संसद में आता हूं और अपने चैंबर में बैठा हूं चूंकि विपक्ष सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है सरकार की ओर से किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र आंदोलन के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार हैं और चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

 

उन्होंने कहा कि मेरी ओर से मैंने भी कह दिया कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं लेकिन वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। आज 3 बजे तक वो स्पीकर साहब को पत्र दें और कल 3 बजे तक हम सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार हैं मैं सदन में बैठूंगा और सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है। ALSO READ: सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में राहुल गांधी और अमित शाह, क्‍या मुलाकात हुई, कुछ बात हुई?

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं 'हम' कहता हूं, तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली किसने चलाई? कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? क्या हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। ALSO READ: झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सियासी संग्राम, संसद में NDA का प्रदर्शन; राहुल गांधी से मांगा जवाब

 

उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है, वे सदन में नहीं आ सकते। उन्होंने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? 

रांची स्टूडेंट प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके की एंट्री, देवेंद्र नाथ महतो का बड़ा फैसला

ranchi student protest

झारखंड में JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बातचीत की और पानी पीने की अपील की। सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी देवेंद्र महतो के समर्थन में रांची आ रहे हैं। इस बीच JPSC मामले में CID ने 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, कुल गिरफ्तारियां 14 पहुंचीं।

 

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की और उनका हाल-चाल जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

 

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं। कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।

 

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी। इसके बाद महतो ने पानी पीकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। 

 

रांची जाएंगे अभिजीत दिपके

जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के जरिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने में सफल रहे सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने भी रांची जाकर देवेंद्र नाथ महतो का समर्थन करने का फैसला किया है। 

 

एग्जाम में गड़बड़ी मामले में अब तक 14 गिरफ्तार

CID झारखंड ने JPSC एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की चल रही जांच के सिलसिले में 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों की संख्या अब 14 हो गई है।

विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

जब देश में गर्म है छात्रों की पिटाई का मामला तब बिहार की इस महिला अफसर की क्यों हो रही तारीफ? जानिए कौन हैं IPS शैलजा दास

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में पटना में छात्रों ने बिहार बंद बुलाया था। इसकी वजह से शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। इसी दौरान पटना पूर्वी की सिटी एसपी और 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक बयान चर्चा में है।

आईपीएस अधिकारी का बयान हो रहा वायरल

आईपीएस अधिकारी शैलजा ने कहा कि, “नागरिकों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। वे जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। जब तक वह हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक हम भी उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वारयल हो रहा है। लोग आईपीएस अधिकारी शैलजा की काफी तारीफ भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कौन है आईपीएस अधिकारी शैलजा दास

कौन है आईपीएस शैलजा दास

आईपीएस शैलजा दास बिहार कैडर की 2022 बैच की अधिकारी हैं और फिलहाल पटना पूर्वी में सिटी एसपी के पद पर तैनात हैं। आईपीएस शैलजा दास को एक संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा 2021 में उन्होंने 83वीं रैंक हासिल की थी, जिसमें इतिहास उनका वैकल्पिक विषय था। पटना में तैनाती से पहले वह नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। पटना में हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने धैर्य के साथ स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास किया।

सेंट स्टीफंस कॉलेज से की है पढ़ाई

शैलजा दास की शुरुआती शिक्षा अपने गृह नगर में हुई। उन्होंने वर्ष 2013 में बुद्धा पब्लिक स्कूल से दसवीं और बाद में दिल्ली पब्लिक स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अखिल भारतीय 83वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बनीं।