अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

उन नीट विद्यार्थियों की कहानी, जो पेपर लीक के बाद चले गए

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जंतर मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के प्रदर्शन में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन प्रदर्शनकारी उन 21 नीट अभ्यर्थियों का जिक्र नहीं करते थे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्टेज पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उस पोस्टर को सबसे पहले मंगवाया जिसमें उन नीट अभ्यर्थियों के नाम थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

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जंतर मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के प्रदर्शन में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन प्रदर्शनकारी उन 21 नीट अभ्यर्थियों का जिक्र नहीं करते थे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। हालांकि सरकार ने इस बात को नहीं कहा है लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन बच्चों ने नीट पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। रेमा बेगम भी इनमें से एक थीं। भारतीय राज्य के एक दूरदराज गांव में अपनी बीमार मां के साथ बड़ी हुई रेमा बेगम डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं, लेकिन उनकी मौत के साथ ही उनका यह सपना अधूरा रह गया।

 

कई साल की पढ़ाई और महंगी कोचिंग क्लासों के बाद, 20 साल की रेमा को विश्वास था कि उन्होंने आखिरकार एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पाने के लिए पर्याप्त मेहनत कर ली है। फिर खबर आई कि जिस मेडिकल प्रवेश परीक्षा में वे बैठी थीं, उसका प्रश्नपत्र लीक हो गया था और दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया।

 

 कुछ ही दिनों बाद, बेगम की मौत हो गई। इस घटना के बाद अपनी जान गंवाने वाले कम से कम 20 छात्रों में वे भी शामिल थीं। उनकी मौत के एक महीने बाद भी, बेगम के पिता रजऊल इस्लाम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी लाडली बेटी हिम्मत कैसे हार गई। लेकिन उनका मानना है कि दोबारा परीक्षा के ऐलान ने सब कुछ बदल दिया। न्यूज एजेंसी एएफपी को फोन पर इस्लाम ने बताया,”परीक्षा के बाद, उसे पूरा भरोसा था कि वह इसे पास कर लेगी। लेकिन जब पेपर लीक होने के कारण दोबारा परीक्षा की घोषणा हुई, तो वह बिल्कुल बदल गई और खुद में सिमट गई।”

 

उन्होंने कहा कि परिवार की कोई भी बात उसे सांत्वना नहीं दे सकी। मछली का कारोबार करने वाले इस्लाम ने अपनी बेटी की तैयारी पर काफी खर्च किया था और उसे दो साल के लिए बड़े शहरों के कोचिंग सेंटरों में भेजा था। उन्होंने कहा,”मैंने उसकी पढ़ाई पर बहुत पैसा खर्च किया था, इसलिए उसे चिंता थी कि यह सब बेकार चला जाएगा।”

 

परीक्षा की नई तारीख से कुछ दिन पहले बेगम ने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत भारत में विद्यार्थियों पर उस दबाव को उजागर करती है, जहां किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलना आर्थिक सुरक्षा के सबसे बड़े साधनों में से एक माना जाता है।साहित्यकार और पूर्व प्रोफेसर जी। एन। देवी ने नीट का जिक्र करते हुए कहा, “इसलिए नीट परीक्षा पास करने का मतलब कई परिवारों के लिए एक खुशहाल और आरामदायक जीवन का आश्वासन है। लेकिन इन सीटों की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों की संख्या देश में मौजूद संस्थानों की तुलना में बहुत अधिक है।” इस साल भी करीब बीस लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने देश भर में लगभग 1,37,000 मेडिकल सीटों के लिए नीट की परीक्षा दी। राजस्थान में, किसान राजेश कुमार ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी और 11 लाख रुपये का कर्ज लिया ताकि उनका बेटा प्रदीप मीणा तीन साल तक कोचिंग क्लास जा सके। कुमार ने एएफपी को बताया, “मैंने खेत में रोजाना 16 घंटे तक मजदूरी की ताकि वह कोचिंग जा सके। मुझे लगा कि अगर वह डॉक्टर बन जाता है तो यह सब सार्थक होगा, और मैं अपने बुढ़ापे में एक आरामदायक जीवन जी सकूंगा। परीक्षा के बाद, मीणा को पूरा भरोसा था कि वे सफल हो गए हैं। कुमार ने याद किया कि उनके बेटे ने उन्हें गले लगाया और कहा कि अब भगवान भी मुझे डॉक्टर बनने से नहीं रोक सकते। दोबारा परीक्षा की घोषणा के एक दिन बाद, 22 साल के प्रदीप ने अपनी जान दे दी।

 

उत्तर प्रदेश में, एक और परिवार को अपने 21 साल के बेटे ऋतिक मिश्रा की मौत के बाद ऐसा ही दुख सहना पड़ा। उनके पिता अनूप कुमार मिश्रा ने परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा, “यह उनकी तीसरी कोशिश थी और उन्होंने कहा था कि इस बार उनका पेपर अच्छा गया है।” परीक्षा लीक की खबर सामने आने के एक दिन बाद उनके बेटे की मौत हो गई।

 

उन विद्यार्थियों के लिए जिन्होंने आखिरकार दोबारा परीक्षा दी, यह अनुभव बहुत थका देने वाला था। 19 साल चैतन्य अग्रवाल ने कहा, “यह मानसिक रूप से बहुत हताश करने वाला है। आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और फिर आपको इसे दोबारा देने के लिए मजबूर किया जाता है।” शिक्षकों का कहना है कि इसके भावनात्मक प्रभाव को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। पूर्वी शहर कोलकाता के एक कोचिंग सेंटर के शिक्षक अभिजीत पात्रा ने कहा, “परीक्षा की तैयारी करना और उसे देना बहुत तनावपूर्ण अनुभव है, और यह सब फिर से करना आसान नहीं है। पेपर लीक इस मुश्किल अनुभव को और भी बदतर बना देता है।” 

 

 

पूर्व प्रोफेसर देवी कहते हैं कि कई परिवारों के लिए, पेपर लीक सालों के त्याग के बाद एक विश्वासघात जैसा था। उन्होंने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी अक्सर आर्थिक रूप से नुकसानदेह और सामाजिक रूप से थका देने वाली होती है, खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए जो महंगे निजी विश्वविद्यालयों या विदेश में पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। देवी कहती हैं, “वे आशा के साथ तैयारी की यह यात्रा शुरू करते हैं, इसलिए जब उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है या बेच दिया गया है, तो वे ठगा हुआ महसूस करते हैं।”

 

राजधानी नई दिल्ली में विरोध स्थल से हजारों किलोमीटर दूर, बेगम का परिवार अभी भी जवाब तलाश रहा है। उनके पिता ने कहा, “मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह परीक्षाओं में अनियमितताओं को गंभीरता से ले। उन्हें समझना चाहिए कि गरीब परिवार के बच्चे के लिए बेहतर जिंदगी का सपना देखना और उसके लिए काम करना आसान नहीं होता।”

 

तमिलनाडु की 17 साल की विद्यार्थी एस अनिता ने भी नीट की परीक्षाओं के बाद आत्महत्या कर ली थी। लेकिन मौत से पहले उन्होंने नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी डाली थी कि नीट की परीक्षा ग्रामीण और राज्य शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों को अलग थलग करती है। कॉकरोच जनता पार्टी और प्रदर्शनकारियों की मांग यह भी है कि जिन स्टूडेंट्स की जान गई, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

NEET प्रोटेस्ट में महिला पुलिसकर्मी के पेट में बच्चे ने तोड़ा दम? दिल्ली पुलिस ने बताया पूरा सच

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस खबर को “पूरी तरह से गलत और गुमराह करने वाला” बताया, जिसमें दावा किया गया था कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी का गर्भपात हो गया।

यह दावा तब फैलना शुरू हुआ, जब घायल महिला पुलिस अधिकारी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि महिला अधिकारी चार महीने की गर्भवती थी और प्रदर्शन स्थल पर हुई हिंसा के दौरान उनका गर्भपात हो गया।

हालांकि, पुलिस अधिकारी ने इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि ये तस्वीरें उस समय की हैं, जब प्रदर्शन के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति में महिला अधिकारी घायल हो गई थीं।

ऑनलाइन फैल रहे दावों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा, “संबंधित महिला न तो शादीशुदा हैं और न ही गर्भवती हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और वह मेडिकल निगरानी में हैं।”

इस दौरान दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी को सोशल मीडिया पर पोस्ट और शेयर न करें।

छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन?

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से देश में NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।

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CJP का बड़ा दावा: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने मांगा एक दिन का वक्त, कल होगा बड़ा फैसला!

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी का बीते 20 जून से प्रदर्शन जारी है। वहीं इस प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक हुई। इसमें सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP की तरफ से सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।

बैठक के बाद CJP के प्रवक्ताओं ने कहा,’हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। दो घंटे की बातचीत में CJP ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के 5 सुझाव रखे हैं।’

 सरकार के सामने सीजेपी ने रखे तीन मांग

वहीं बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी सबसे बड़ी मांग, यानी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि सबसे पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।

सौरव दास ने कहा कि पार्टी ने उन परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की है, जिन्होंने नीट परीक्षा विवाद के बाद अपने बच्चों को खो दिया। इसके अलावा, जुलाई में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी मामला दर्ज न करने की मांग की गई है। अगर पहले से ऐसे मामले दर्ज हैं, तो उन्हें वापस लेने की भी मांग की गई है।

सीजेपी ने किया ये दावा

सीजेपी का दावा है कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इनमें नीट विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों व युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने की मांग शामिल है। हालांकि, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फैसला लेने के लिए थोड़ा और समय मांगा है। सौरव दास ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार के साथ विस्तार से बातचीत हुई है। सरकार ने इस पर जवाब देने के लिए कल तक का समय मांगा है। अगर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो हमारा आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

जानें केंद्र सरकार ने क्या कहा

केंद्र सरकार ने अभी तक सीजेपी की ओर से बैठक के बाद किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह बैठक नई दिल्ली के विठ्ठल पटेल हाउस में हुई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका शामिल हुए। सीजेपी का कहना है कि वह बातचीत के लिए तब तैयार हुई, जब सरकार ने उसकी दो अहम शर्तों पर सहमति जताई। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना और परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना शामिल है। हालांकि, पार्टी ने साफ कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

शनिवार को फिर होगी बातचीत

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान सीजेपी की मांगों और देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझावों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह बातचीत शनिवार को भी जारी रहेगी। जेपी नड्डा ने कहा, “सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल हमसे मिलने आया था। हमने उनकी सभी बातें ध्यान से सुनीं और कई मुद्दों पर चर्चा की। अब शनिवार दोपहर फिर बैठक होगी, जिसमें बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए। जेपी नड्डा ने कहा, “करीब दो घंटे तक बैठक चली। हमने प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि शनिवार दोपहर फिर मुलाकात होगी। तब तक सरकार इन मांगों और सुझावों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

छात्रों को धमकी, महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़…NEET Protest के बीच इन तीन अफसरों पर क्यों हुआ एक्शन?

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के व्यवहार पर भी लोगों की नजर रही। दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई। पिछले कुछ दिनों में तीन अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है। इनमें मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) संदीप लांबा और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत शामिल हैं।

इन तीनों पर प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं को लेकर कार्रवाई की गई है। हालांकि तीनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन ये घटनाएं बताती हैं कि विरोध प्रदर्शनों और भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा अधिकारियों के हर कदम पर जनता और संबंधित विभागों की कड़ी नजर रहती है।

पवन सांगले: वायरल वीडियो के बाद निलंबित

मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले को एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद निलंबित कर दिया गया। इस वीडियो में वह कथित तौर पर छात्र प्रदर्शनकारियों को धमकी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि हिरासत में लिए गए छात्रों से पवन सांगले ने कहा कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने आए, तो उनके बैग में ड्रग्स रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। वायरल क्लिप में वह कथित तौर पर यह कहते भी सुनाई देते हैं कि छात्रों के बैग में “50-50 ग्राम पाउडर” रखकर उन्हें पूरी जिंदगी जेल भिजवाया जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पवन सांगले के कथित बयानों की जमकर आलोचना हुई। कई लोगों ने पुलिस की ताकत के गलत इस्तेमाल पर सवाल उठाए। मुंबई पुलिस ने बताया कि पवन सांगले मोटर ट्रांसपोर्ट यूनिट में ड्राइवर के पद पर तैनात थे और शहर की वरिष्ठ कमान का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया और मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई।

संदीप लांबा: महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल

दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। यह फैसला उस समय लिया गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह कथित तौर पर “संसद चलो” प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बीच एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रही थी। वायरल वीडियो में संदीप लांबा कथित तौर पर धक्का-मुक्की के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। इस घटना की विपक्षी नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की।

दिल्ली पुलिस ने माना कि तनावपूर्ण माहौल में वरिष्ठ अधिकारी अपना संयम खो बैठे थे। हालांकि पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी, लेकिन मामले की जांच पूरी होने तक संदीप लांबा को जंतर-मंतर की ड्यूटी से हटा दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनका व्यवहार भीड़ को नियंत्रित करने के तय नियमों के अनुरूप नहीं था। वहीं, प्रदर्शन के आयोजकों ने संदीप लांबा पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इसके बाद उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग और तेज हो गई।

यह विवाद उस समय सामने आया, जब आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में सोनिया सहरावत घायल हो गई थीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान पत्थरबाजी और अन्य हिंसक घटनाओं के बीच प्रदर्शनकारियों का सामना करते दिखाई दिए। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।

तीन मामले, लेकिन सवाल एक ही

हालांकि तीनों अधिकारियों के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन इन सभी में एक बात समान है—सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की जवाबदेही। मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले पर छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगा, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। वहीं, दिल्ली पुलिस के संदीप लांबा को एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित हाथापाई का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। दूसरी ओर, सोनिया सहरावत के मामले में यह जांच की जा रही है कि प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियां सुरक्षा बलों के अधिकारियों के तय आचार नियमों के अनुरूप थीं या नहीं। ये तीनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की जवाबदेही सिर्फ प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनके व्यवहार और आचरण पर प्रदर्शन से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी लगातार नजर रखी जा रही है।

भारतीय ODI और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उतरे छात्रों के समर्थन में

Shubhman Gill

भारतीय एकदिवसीय और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने अपनी इंस्टा पोस्ट के जरिए नीट पेपर लीक पर जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है। पिछले साल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत के कप्तान शुभमन गिल ने टीम इंडिया की बागडोर टेस्ट और एकदिवसीय प्रारुप में थामी थी।

गिल ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि युवा पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और देश के भविष्य को आकार देने के लिए हर मौका मिलना चाहिए।

गिल ने लिखा, ‘‘एक युवा भारतीय के रूप में मेरा मानना है कि हमारी पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और उस भविष्य को बनाने के लिए हर अवसर मिलना चाहिए जिसकी हम सभी आकांक्षा रखते हैं। ’’छब्बीस साल के गिल ने कहा कि वह उन युवाओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने पूरे देश में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का रास्ता चुना है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हर उस युवा के लिए बहुत सम्मान है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास रखता है। ’’किसी विशेष प्रदर्शन या राजनीतिक मुद्दे का उल्लेख किए बिना गिल ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और छात्रों की चिंताओं से निपटने के दौरान सहानुभूति रखने की अपील की।

उन्होंने लिखा, ‘‘शिक्षा में हमारे देश के भविष्य को आकार देने की ताकत है। मुझे उम्मीद है कि हम संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और हर छात्र के सर्वश्रेष्ठ हित को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे। ’’गिल ने लिखा, ‘‘भारत के भविष्य के लिए। ’’

गुजरात के असिस्टेंट कोच विजेता दहिया को इंस्टा पर मिलने लगी गालियां, बोले मैं कॉकरोच नहीं

इंडियन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस के असिस्टेंट कोच विजेता दहिया को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता में से एक विजेता दहिया के हमनाम होने की सजा कुछ ऐसे मिली की लोगों ने उनको उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर गालियां बरसाना शुरु कर दिया। इंस्टा पर गालियां इतनी बढ़ गई कि ऐसे में उन्हें स्टेटस अपलोड कर यह साबित करना पड़ा कि वह कॉकरोच जनता पार्टी वाले विजेता दहिया नहीं है।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के साथ जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन का समर्थन कॉकरोच जनता पार्टी शुरुआत से कर रही है। 1973 में जन्मे विजेता दहिया शुरुआत से ही गुजरात टाइटंस के कोचिंग स्टाफ से जुड़े है। हालांकि इस बार समान नाम होने के कारण उन पर फोटो शेयरिंग एप्प इंस्टाग्राम पर गालियां बरसाई गई।

साल 2022 में बनी गुजरात टाइटंस के सफर की बात करें तो टीम ने अपने पहले ही संस्करण में राजस्थान रॉयल्स को हराकर इंडियन प्रीमियर लीग जीता। इसके बाद वह अहमदाबाद  के नरेंद्र मोदी स्टे़डियम में उपविजेता रही। साल 2024 में भी टीम प्लेऑफ में पहुंची वहीं साल 2025 में टीम को निराशा हाथ लगी। इसके अलावा साल 2026 में टीम वापस उपविजेता बनी।

CJP Protest : जंतर मंतर इलाके में 8 घंटे बंद रहेगा इंटरनेट, सरकार ने दिया ये बड़ा आदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की वजह से राजधानी द‍िल्‍ली में जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में आधी रात तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध-प्रदर्शन जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर भी धारा 163 लागू कर दी गई है।

बता दें क‍ि व‍िरोध-प्रदर्शन का असर राजधानी के कारोबार पर भी पड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए ‘नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन’ (NDTA) की सलाह के बाद आज शाम 6.30 बजे के बाद कनॉट प्लेस की सभी दुकानें और रेस्‍टोरेंट बंद कर दिए गए।

जंतर-मंतर के आसपास बंद रहेगा मोबाइल इंटरनेट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में कुछ समय के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आदेश जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला जन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है। आदेश के मुताबिक, 23 जुलाई को शाम 4 बजे से रात 12 बजे (आधी रात) तक सभी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। यह आदेश दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है।

सरकार ने दिया ये आदेश

आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय गृह सचिव ने यह तय करने के बाद कि यह कदम जन सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए जरूरी है, मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की भड़काऊ या गैरकानूनी गतिविधि को रोकना है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट सेवा बंद करने के फैसले को केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी मिल चुकी है। अवर सचिव महेंद्र विक्रम सिंह के हस्ताक्षर वाले इस आदेश को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजा गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

CJP Protest new advisory: कनॉट प्लेस में शाम 6:30 बजे तक बंद होंगी दुकानें, प्रोटेस्ट के बीच आई ये नई एडवाइजरी जानिए

दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आसपास की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) द्वारा जारी अडवाइजरी के तहत कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, दफ्तर और रेस्टोरेंट आज शाम 6:30 बजे तक बंद हो जाएंगे। एनडीटीए (NDTA) द्वारा गुरुवार को जारी इस एडवाइजरी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से टेलीफोन पर मिली सलाह के बाद लिया गया है।

एनडीएमसी नेतृत्व ने कनॉट प्लेस के सभी कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट्स को शाम 6:30 बजे तक दिन भर के लिए कामकाज बंद करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा और अनहोनी से बचाव के लिए उठाया गया कदम

व्यापारिक संगठन (NDTA) ने अपनी अडवाइजरी में इलाके के सभी दुकान मालिकों, कार्यालय संस्थानों और रेस्टोरेंट संचालकों से अनुरोध किया है कि वे इस निर्देश का सख्ती से पालन करें और सहयोग दें। सर्कुलर के मुताबिक सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस और उसके आसपास बनी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रतिष्ठान मालिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अप्रिय घटना, संपत्ति के नुकसान या चोट से बचने के लिए इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स (X) पर तीखी प्रतिक्रिया दी

इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एनडीटीए की इस एडवाइजरी को साझा करते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। अपनी तीखी प्रतिक्रिया में केजरीवाल ने लिखा कि, ‘कनाट प्लेस की सभी दुकानों को आज शाम 6.30 pm बंद करने के आदेश। जबरदस्त सिक्योरिटी। ढेर सारी एम्बुलेंस। क्या मोदी सरकार आज फिर जंतर मंतर पर अपने बच्चों पर बर्बर हमला करेगी?’

दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब कोलकाता में नया फ्रंट? जानिए अभिजीत दिपके की CJP ने अब ये क्या नई डिमांड कर दी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खबर सामने आई है। न्यूज 18 के रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब कोलकाता में भी प्रदर्शन करने जा रही है।

कोलकाता में प्रदर्शन की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कोलकाता पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक आवेदन देकर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में रैली निकालने की अनुमति मांगी है। आवेदन के अनुसार, पार्टी ने कल शाम 4 बजे कॉलेज स्ट्रीट से रानी रश्मोनी एवेन्यू तक रैली आयोजित करने की इजाजत मांगी है। आयोजकों का कहना है कि इस रैली में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। साथ ही, जुलूस के दौरान दो वाहनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

कनॉट प्लेस में सभी दुकानें और ऑफिस शाम 6:30 बजे तक बंद करने का आदेश

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने 23 जुलाई को कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, ऑफिस और रेस्टोरेंट को आज शाम 6:30 बजे तक बंद करने की अपील की है। NDMC ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि NDMC चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सलाह पर कनॉट प्लेस के आसपास की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस करीब 1 किमी की दूरी पर हैं। जब जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन या पुलिस कार्रवाई होती है, तो उसका असर आसपास के इलाकों खासकर कनॉट प्लेस, जनपथ, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस और संसद मार्ग पर भी पड़ता है।

कल हुई थी हिंसा

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस इलाके में हुई हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में केस दर्ज कर लिया है। बीते बुधवार को हुई पत्थरबाजी में एसीपी विवेक भगत के अलावा पंजाबी बाग के एसीपी भी घायल हुए थे। साथ ही इंस्पेक्टर नंद किशोर समेत कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को भी चोट आई थी। बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी अनशन पर बैठी है। सीजेपी के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर हैं। ये सभी हाल ही में हुए नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सीजेपी के समर्थन में एक के बाद एक नेता जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और 21 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता दिल्ली में पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे।