Auto ancillary stocks : नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री बाजार को आई पसंद, जानिए ब्रोकरेज की किन शेयरों पर है नजर

Auto ancillary stocks : ऑटो एंसिलरी शेयरों में आज जोरदार तेजी देखने को मिली है। दरअसल ऑटो एंसिलरी के नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री बाजार को पसंद आई है। बुधवार को इंट्रा-डे में ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयरों में तेज रफ्तार देखने को मिली। BSE पर इनमें 15% तक की बढ़त नजर आई। वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के मज़बूत नतीजों और अच्छे आउटलुक के कारण ज्यादातर शेयर अपने मल्टी ईयर हाई पर ट्रेड करते दिखे। में, सुबह 11:42 बजे BSE सेंसेक्स 0.33% बढ़कर 78,687 पर था। एएसके ऑटोमोटिव, बॉश, क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन, गैब्रियल इंडिया, मेनन बेयरिंग्स, मिंडा कॉर्प, प्रिकोल, संसेरा इंजीनियरिंग और यूनिपार्ट्स इंडिया के शेयरों ने बुधवार को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में अपने ऑलटाइम हाई को हिट किया।

क्यों दौडे़ ऑटो एंसिलरी शेयर?

ऑटो एंसिलरी शेयरों में तेजी मजबूत नतीजों का असर रही। मदरसन वायरिंग, UNO Minda, ASK ऑटो के अच्छे नतीजे आए हैं। तीनों कंपनियों की ग्रोथ 20% से ज्यादा रही है। इनको प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड का बड़ा फायदा मिला है। इनकी ग्रोथ में EV कारोबार का योगदान बढ़ा है। ASK ऑटो के एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम्स कारोबार में 48% और सेफ्टी कंट्रोल केबल्स कारोबार में 20% ग्रोथ देखने को मिली है।

UNO Minda की कमेंट्री

कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि मजबूत ऑटो प्रोडक्शन और वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर भरोसा है। Q1 के बाद आमतौर पर कंपनी के मार्जिन बेहतर होते हैं। EV कारोबार में मजबूत ग्रोथ और कंपनी की पैठ में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है।

मदरसन वायरिंग की कमेंट्री

कंपनी ने कहा है कि Q1 में EV का आय में योगदान 8.5% रहा। वहीं, FY26 में यह 6.6% था। कॉपर कीमतों में 53% उछाल के बावजूद आय ग्रोथ 37% रही है।

हैप्पी फोर्जिंग की कमेंट्री

कंपनी के मैनेजमेंट को 30% से ऊपर मार्जिन बनाए रखने का भरोसा है। वॉल्यूम ग्रोथ भी अनुमान से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

गोल्डमैन सैच्स ने संसेरा और क्राफ्ट्समैन पर ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू की कवरेज

Goldman Sachs के एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां सेमीकंडक्टर वेफर फैब्रिकेशन इक्विपमेंट (WFE), डिफेंस, डेटा सेंटर पावर जेनरेशन, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पार्ट्स और एयरोस्पेस जैसी संबंधित सप्लाई चेन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। इस बदलाव की वजह से कैपेसिटी और स्किल बिल्डिंग (खासकर प्रिसिजन मशीनिंग और टूलिंग के क्षेत्र में) दोनों में निवेश बढ़ रहा है। सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्रियल/ऑटोमोटिव/सेमीकंडक्टर ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) की पहल इस बिजनेस की ग्रोथ को और सपोर्ट कर रही हैं।

ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इस सेक्टर की कुछ बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव ला रही हैं और अपने बिजनेज मॉडलों को साइकल प्रूफ बनाने पर फोकस कर रही हैं। ये कंपनियां अपनी प्रोडक्शन क्षमता का लाभ उठाते हुए मुनाफे वाले सेक्टरों में डाइवर्सिफिकेशन कर रही हैं।

Goldman Sachs के एनालिस्ट्स का कहना है कि प्रिसिजन मशीनिंग की ओर बढ़ने से भारतीय ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री का रेवेन्यू बढ़ेगा। इनको 8वें वेतन आयोग और ग्लोबल डेटा सेंटर/सेमीकंडक्टर/डिफेंस/एयरोस्पेस खर्च में बढ़ती हिस्सेदारी जैसे साइक्लिकल फैक्टर से कमाई में आने वाले उछाल का भी फायदा मिलेगा।

गोल्डमैन सैक्स ने संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera) और क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन (Craftsman) को BUY रेटिंग देते हुए ₹4,130 और ₹11,600 के टारगेट दिए हैं। वहीं, संवर्धन मदरसन और भारत फोर्ज पर इसने ‘न्यूट्रल’ रेटिंग के साथ अपनी कवरेज शुरू की है

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Silver Price Outlook: इस साल चांदी ने निवेशकों को निराश किया है। साल की शुरुआत से अब तक इसकी कीमत करीब 23% गिर चुकी है। सिर्फ जून महीने में ही इसमें 22% की बड़ी गिरावट आई। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारत में इसका भाव करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो है। इसका मतलब है कि इस साल चांदी ₹65,000 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।

हालांकि, पिछले एक साल में चांदी ने 50% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। लेकिन अब कीमतें दिसंबर 2025 के स्तर के आसपास लौट आई हैं। सवाल यह है कि आखिर चांदी पर दबाव क्यों बना हुआ है?

तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी वजह

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है। इससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और कीमतें चढ़ गईं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 86 डॉलर प्रति बैरल पर है, जो युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब 20% ज्यादा है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और दुनिया भर के बाजारों पर दबाव आएगा।

फेड की ब्याज दरें क्यों हैं अहम?

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। ऐसे समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट छोड़कर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहता है।

चांदी सोने से ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली

चांदी की कीमतें सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और पावर ग्रिड जैसे सेक्टरों में होता है। इसलिए औद्योगिक मांग में थोड़ा भी बदलाव कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

गोल्ड सिल्वर रेशियो क्या होता है

जून 2026 में जब सोना 4,000-4,060 डॉलर प्रति औंस के बीच था, तब चांदी 60-61 डॉलर प्रति औंस पर थी। उस समय गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 67 था। इससे पहले मई में यह 55 और जनवरी में 50 तक आ गया था।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी चाहिए। इसे सोने की कीमत को चांदी की कीमत से भाग देकर निकाला जाता है। अगर रेशियो 75 या उससे ज्यादा हो, तो इसका मतलब माना जाता है कि चांदी सोने के मुकाबले सस्ती है। वहीं, अगर यह 50-60 या उससे नीचे हो, तो सोना सस्ता माना जाता है।

क्या अभी चांदी सस्ती है?

Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेन्द्र यादव का कहना है कि 70 का रेशियो अपने लंबे समय के औसत के करीब है। यह बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी चांदी सोने के मुकाबले थोड़ी सस्ती नजर आती है। खासकर तब, जब औद्योगिक मांग मजबूत बनी रहे। भारत में दिसंबर 2025 से चांदी की कीमत लगातार ₹2 लाख प्रति किलो से ऊपर बनी हुई है।

आगे किस धातु में ज्यादा दम?

निरपेन्द्र यादव का मानना है कि फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 65 से 75 के बीच रह सकता है। यह काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर फेड ब्याज दरें घटाता है, डॉलर कमजोर पड़ता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार आता है, तो चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे Gold-Silver Ratio घटकर 60-65 तक आ सकता है।

वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, मंदी का खतरा गहराता है या निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं, तो सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में यह रेशियो 70 से ऊपर बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में सिर्फ सोना या सिर्फ चांदी चुनने के बजाय दोनों में संतुलित निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है और आप कम जोखिम लेना चाहते हैं, तो सोना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं और लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धीरे-धीरे चांदी में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से चांदी में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है।

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Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV, Kunlun आर्किटेक्चर पर बनी SkyNomad देगी 505Km तक की रेंज

Xiaomi SkyNomad Series: चीन की टेक और EV निर्माता कंपनी Xiaomi ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपनी नई SkyNomad Series SUV को लॉन्च कर दिया है। कंपनी की यह पहली Extended-Range Electric Vehicle (EREV) सीरीज है, जिसे नए Kunlun Architecture प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max इलेक्ट्रिक मोड में 505 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी कुल ड्राइविंग रेंज 1,700 किलोमीटर से भी ज्यादा है। फिलहाल इस इलेक्ट्रिक SUV की प्री-बुकिंग चीन में शुरू हो चुकी है और सितंबर से इसकी डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। अब आइए जानते हैं Xiaomi SkyNomad Series की खासियतों के बारे में।

Xiaomi SkyNomad सीरीज की कीमत और उपलब्धता

Xiaomi ने SkyNomad Series को दो वेरिएंट में पेश किया है। इसका टॉप मॉडल Xiaomi SkyNomad N90 Max है, जो एक 7-सीटर एक्सटेंडेड-रेंज SUV है। चीन में इसकी प्री-सेल कीमत 2,99,900 चीनी युआन (करीब 42.41 लाख रुपये) रखी गई है। वहीं, कंपनी ने इसका एक 5-सीटर ऑल-व्हील-ड्राइव वेरिएंट SkyNomad N70 Max भी लॉन्च किया है। इसकी शुरुआती कीमत 2,59,900 चीनी युआन (करीब 36.75 लाख रुपये) है।

कलर ऑप्शन की बात करें तो, Xiaomi SkyNomad Series को Mountain Green, Valley Blue और Volcanic Gray एक्सटीरियर कलर में पेश किया गया है। वहीं, इसके इंटीरियर में Cream Beige और Mocha Brown कलर ऑप्शन मिलेंगे।

फिलहाल, चीन में अभी दोनों मॉडल्स के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो गए हैं। ग्राहक CNY 1,000 (लगभग ₹14,000) की रिफंडेबल डिपॉजिट राशि देकर किसी भी SUV को बुक कर सकते हैं। इस बुकिंग के साथ ग्राहकों को प्रोडक्शन में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा, डिलीवरी के समय उन्हें करीब 999 चीनी युआन (लगभग 14,000 रुपये) की कीमत वाला इन-कार डुअल कप होल्डर टेबल भी मुफ्त दिया जाएगा।

हालांकि, Xiaomi ने अभी तक SkyNomad Series को ग्लोबल मार्केट या भारत में लॉन्च करने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

Xiaomi SkyNomad सीरीज के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

Xiaomi का दावा है कि SkyNomad सीरीज नए Kunlun प्लेटफॉर्म पर आधारित उसका पहला प्रोडक्शन मॉडल है। पारंपरिक लेआउट के उलट, इस प्लेटफॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें केबिन का फर्श पूरी तरह से फ्लैट रहता है, सीट रेल्स लंबी होती हैं और इंटीरियर को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। इसे आने-जाने, कैंपिंग, काम या फैमिली ट्रिप जैसे अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के लेआउट में बदला जा सकता है, जिससे अंदर ज्यादा जगह मिलती है।

बड़े SkyNomad N90 Max की लंबाई 5,285mm और व्हीलबेस 3,080mm है, जबकि N70 Max की लंबाई 4,960mm और व्हीलबेस 2,950mm है। Xiaomi का दावा है कि सात सीटों वाली N90 Max में यात्रियों के बैठने के लिए 2,760mm तक की जगह और 1,831 लीटर तक का सामान रखने की क्षमता मिलती है।

कंपनी ने इस SUV में पावर-एडजस्टेबल सीटें, चार तक जीरो-ग्रेविटी सीटें, 16-पॉइंट मसाज, हीटिंग, वेंटिलेशन, बिल्ट-इन रेफ्रिजरेटर वाला स्लाइडिंग सेंटर कंसोल और 30 से ज्यादा स्टोरेज कम्पार्टमेंट जैसे फीचर्स दिए हैं।

नई EV में ‘कुनलुन हाइपररेंज’ (Kunlun HyperRange) एक्सटेंडेड-रेंज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 52kWh से 76kWh तक की बैटरी के विकल्प मिलते हैं। Xiaomi का दावा है कि SkyNomad N70 Max सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में 505km तक की CLTC (चाइना लाइट-ड्यूटी व्हीकल टेस्ट साइकिल) रेंज दे सकती है, जबकि बड़ी N90 Max एक बार चार्ज करने पर 464km तक की रेंज देती है। दोनों SUV में डुअल-मोटर ऑल-व्हील-ड्राइव सेटअप का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह 310kW तक की पीक पावर जेनरेट कर सकता है।

टेक्नोलॉजी की बात करें तो, SkyNomad सीरीज का केबिन Snapdragon 8 Gen 3-बेस्ड डोमेन कंट्रोलर से चलता है। इसमें डुअल 5G कनेक्टिविटी, Wi-Fi 7, छह-स्क्रीन वाला इंफोटेनमेंट सिस्टम, 25-स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम और 6.9-इंच का रियर कंट्रोल डिस्प्ले दिया गया है। Xiaomi ने इसमें अपना Hyper XiaoAi वॉयस असिस्टेंट भी शामिल किया है, जो वॉयस कमांड से केबिन के 11 सीटिंग लेआउट को बदल सकता है।

इस इलेक्ट्रिक SUV में 700 TOPS वाला असिस्टेड-ड्राइविंग प्लेटफॉर्म, LiDAR, 4D मिलीमीटर-वेव रडार और Xiaomi का XLA आर्किटेक्चर पर बना HAD असिस्टेड-ड्राइविंग सिस्टम भी मिलता है।

सेफ्टी के लिहाज से, SkyNomad सीरीज में स्टील-एल्युमीनियम हाइब्रिड बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें कई स्ट्रक्चरल पॉइंट्स पर 2,200MPa अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ स्टील और 12 एयरबैग्स दिए गए हैं। इसमें Xiaomi की नई Armour Scale बैटरी भी है, जिसमें 18-लेयर प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर है। साथ ही, इसमें डुअल टेलगेट रिलीज हैंडल, ट्रिपल-रिडंडेंट डोर हैंडल और 26 ड्राइवर-असिस्टेंस जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।

SkyNomad Series के लॉन्च के साथ Xiaomi की इलेक्ट्रिक व्हीकल रेंज और मजबूत हो गई है। इससे पहले कंपनी के EV पोर्टफोलियो में SU7 सेडान और YU7 SUV जैसे मॉडल शामिल हैं।

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Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार 31 जुलाई को शेयर बाजार में कई बड़े स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। तिमाही नतीजों की रिपोर्ट के बाद इन कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जबकि कुछ का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा। आइए जानते हैं शुक्रवार के कारोबार में किन 12 स्टॉक्स पर फोकस रहेगा।

Tata Steel

स्टील सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 11.6% बढ़कर ₹2,318.4 करोड़ रहा। यह बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा। हालांकि, रेवेन्यू 14.3% बढ़कर ₹60,794.3 करोड़ पहुंचा और अनुमान से बेहतर रहा।

LIC Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 9.9% बढ़कर ₹1,499 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, कंपनी की मुख्य कमाई का पैमाना नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सिर्फ 0.6% बढ़कर ₹2,087 करोड़ रहा।

Thermax

इंजीनियरिंग कंपनी थरमैक्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 83.4% गिर गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा। इसके बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी दबाव रहा, जिससे मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

Indegene

लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी इंडीजीन का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹116 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 39.7% बढ़कर ₹1,063 करोड़ पहुंच गया। कारोबार तेजी से बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर दबाव रहने से कमाई में बढ़ोतरी नहीं हो सकी।

Mazagon Dock Shipbuilders

डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ हो गया। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ पहुंच गया।

Nucleus Software Exports

बैंकिंग और फिनटेक सॉफ्टवेयर कंपनी न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 32.2% घटकर ₹23.87 करोड़ रह गया। कंपनी का रेवेन्यू 3.35% गिरकर ₹210.43 करोड़ रहा। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च की वजह से मुनाफे और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखने को मिला।

JBM Auto

ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की कंपनी जेबीएम ऑटो का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 14.7% बढ़ा। कंपनी को इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटो कंपोनेंट्स कारोबार में अच्छी ग्रोथ का फायदा मिला।

RailTel Corporation of India

रेलवे सेक्टर की सरकारी टेलीकॉम कंपनी रेलटेल का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹66 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Swiggy

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का जून तिमाही में घाटा घटकर ₹791 करोड़ रह गया। पिछले साल समान तिमाही में कंपनी को ₹1,197 करोड़ का घाटा हुआ था। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन बाजार के अनुमान के मुताबिक रहा।

Chambal Fertilisers and Chemicals

उर्वरक सेक्टर की कंपनी चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 4.6% घटकर ₹544 करोड़ रह गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार देखने को मिला।

Torrent Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 3.3% बढ़कर ₹566 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 54.8% उछलकर ₹4,921 करोड़ रहा। घरेलू कारोबार और अमेरिकी बाजार में अच्छी मांग का फायदा मिला।

Rainbow Children’s Medicare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी रेनबो चिल्ड्रन्स मेडिकेयर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 13.2% बढ़कर ₹60.57 करोड़ हो गया। इस दौरान रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी मजबूत दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Q1 Earnings (31 जुलाई)

अलग अलग सेक्टरों की कई कंपनियां शुक्रवार, 31 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Aadhar Housing Finance, Aarti Drugs, Aditya Birla Capital, ABB India, Bajaj Holdings & Investment, Concord Biotech, CORONA Remedies, Dixon Technologies (India) और GAIL (India) समेत कई कंपनियां शामिल हैं।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नौकरी ढूंढ़ने नहीं, नौकरी देने की सोच पैदा कर रहा ‘यूथ अड्डा’

CM Yuva Yojana: आज की जेनरेशन जेड (Gen Z) पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह पीढ़ी नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और आत्मनिर्भरता में अपना भविष्य देखती है। जिन युवाओं का जन्म 1997 के बाद हुआ, वे इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए हैं। ऐसे में उन्हें केवल रोजगार नहीं, बल्कि अवसर, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और उद्यमिता का पूरा इकोसिस्टम चाहिए।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बहुत पहले समझ लिया था। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने केवल रोजगार योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को उद्यमी बनाने की सोच के साथ सीएम युवा और यूथ अड्डा जैसी अभिनव अवधारणा को विकसित किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। इस पहल का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विचार, कौशल, तकनीक, मार्गदर्शन और बाजार सभी को एक मंच पर उपलब्ध करवा कर युवाओं के लिए उद्यमिता का नया इकोसिस्टम तैयार करना है। 

 

Gen Z की क्षमता और भविष्य की कार्यशक्ति में उसकी अहम भूमिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक वर्ष पहले ही पहचान लिया था। इसी सोच के तहत युवाओं और उद्यमिता के बीच मौजूद दूरी को कम करने की पहल की गई। कॉफी या चाय पर सहज, खुले और व्यावहारिक संवाद के माध्यम से युवाओं को कौशल, नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास हुआ। इसी अनौपचारिक लेकिन प्रभावी मॉडल को ‘यूथ अड्डा’ नाम दिया गया, जहां कॉफी शॉप जैसे माहौल में युवा अपने विचार साझा कर सकें, विशेषज्ञों से संवाद कर सकें और अपने उद्यमी सपनों को वास्तविक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

Gen Z की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ यूथ अड्डा

आज का युवा केवल ऋण या अनुदान नहीं चाहता। वह चाहता है कि कोई उसके विचार को समझे, बिजनेस मॉडल बनाने में मदद करे, अनुभवी मेंटर्स से जोड़े, बैंकिंग प्रक्रिया आसान बनाए और बाजार तक पहुंच दिलाए। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यूथ अड्डा को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्र के बजाय एक समग्र उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, फ्रेंचाइजी मॉडल, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन सब कुछ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है।

 

यूथ अड्डा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सरकारी सेवा वितरण की पारंपरिक सोच को बदलता है। यहां युवा केवल किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि अवसर का आकांक्षी है, जिसकी जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित की गई हैं। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

कॉलेज से सीधे स्टार्टअप और उद्यमिता की ओर

प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि उद्यमिता की शुरुआत नौकरी मिलने के बाद नहीं, बल्कि कॉलेज और तकनीकी संस्थानों के दिनों से ही होनी चाहिए। इसलिए यूथ अड्डा का फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विद्यार्थियों पर रखा गया है। यहां छात्रों को प्रेरित किया जाता है कि वे डिग्री पूरी होने के बाद केवल नौकरी के लिए आवेदन करने की बजाय यह सोचें कि वे किस समस्या का समाधान कर सकते हैं और उससे किस प्रकार सफल उद्यम स्थापित किया जा सकता है। योगी सरकार ने यह भी समझा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक आधारित होगी। इसी कारण यूथ अड्डा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और आधुनिक डिजिटल टूल्स पर विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रदेश का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके।

सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, पूरे बिजनेस सफर में साथ

यूथ अड्डा केवल प्रशिक्षण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यहां युवाओं को बिजनेस आइडिया तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी, डिजिटल ब्रांडिंग, गूगल बिजनेस प्रोफाइल, वॉट्सएप बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और व्यवसाय विस्तार तक लगातार मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही 100 से अधिक तैयार फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पहली बार व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं का जोखिम काफी कम हो सके।

ग्रामीण युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

यूथ अड्डा की अवधारणा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाना है, ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सहयोग देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पूरे वर्ष चलता रहेगा उद्यमिता का अभियान

यूथ अड्डा को केवल एक केंद्र नहीं, बल्कि वर्षभर सक्रिय रहने वाले उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया गया है। यहां बैंकर्स मीट, टेक फेस्ट, स्टार्टअप क्लिनिक, बिजनेस आइडिएशन वर्कशॉप, फाउंडर्स टॉक, नारी शक्ति श्रृंखला, कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम और सफल उद्यमियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक पांच लाख युवाओं को इस पहल से जोड़ना, ₹1,000 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराना, 10,000 से अधिक नए उद्यम एवं फ्रेंचाइजी स्थापित करना तथा 25,000 से अधिक एमएसएमई को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनते हैं, तो इससे न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को भी नई गति मिलेगी।

यूपीकॉन निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी पहल के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीकॉन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह के मुताबिक,  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) के अंतर्गत यूपीकॉन द्वारा संचालित यूथ अड्डा को प्रदेश में उद्यमिता के एक सशक्त मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। यूपीकॉन युवाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, परियोजना परामर्श, बैंकिंग सहायता, डिजिटल सशक्तीकरण और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित कर रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल योजनाओं का लाभ दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश तथा एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में सहभागी बनाना है।

बिना ड्राइवर के चलेगी आपकी कार! जानिए भारत में आने वाली फ्यूचर कार टेक्नोलॉजी

भारत में कारों की दुनिया तेजी से बदल रही है। पेट्रोल, CNG और इलेक्ट्रिक कारों के बाद अब हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और रेंज एक्सटेंडर जैसी नई टेक्निक भी बाजार में दस्तक दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आने वाले समय में इंडियन के लिए सबसे बेहतर और किफायती फ्यूल टेक्नोलॉजी (fuel technology) कौन-सी होगी:

Strong Hybrid Car (स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार)

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स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन (petrol engine) और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों साथ काम करते हैं। इसकी बैटरी को अलग से चार्ज नहीं करना पड़ता, बल्कि यह ब्रेक लगाने या इंजन के जरिए खुद चार्ज हो जाती है। शहर में कम स्पीड पर कार कुछ किलोमीटर तक केवल इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है, जिससे पेट्रोल की बचत होती है और माइलेज बढ़ता है। हालांकि इन कारों की कीमत सामान्य पेट्रोल कारों (petrol vehicles) से ज्यादा होती है।

 

 

Mild Hybrid Car (माइल्ड हाइब्रिड कार)

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माइल्ड हाइब्रिड टेक्निक में भी इंजन के साथ छोटी इलेक्ट्रिक मोटर होती है, लेकिन यह कार को अकेले इलेक्ट्रिक मोड (electric-only mode) में नहीं चला सकती। इसका मेन काम इंजन की मदद करना और ईंधन की थोड़ी बचत करना होता है। इस तकनीक से माइलेज में हल्का सुधार मिलता है, लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जितना फायदा नहीं होता।

 

Plug-in Hybrid Car (प्लग-इन हाइब्रिड कार)

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प्लग-इन हाइब्रिड कारों में बड़ी बैटरी (battery) होती है, जिसे घर या चार्जिंग स्टेशन से चार्ज किया जा सकता है। बैटरी चार्ज रहने तक कार लंबी दूरी केवल इलेक्ट्रिक मोड में चलती है। बैटरी खत्म होने पर पेट्रोल इंजन अपने आप काम शुरू कर देता है। इससे रोजाना शहर में बिना पेट्रोल खर्च किए ड्राइव करना आसान हो जाता है, जबकि लंबी यात्रा (long journey) में भी चार्जिंग की चिंता नहीं रहती।

Range Extender EV Car (रेंज एक्सटेंडर ईवी कार)

This may contain: an electric car is parked next to two charging stations

रेंज एक्सटेंडर EV पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार होती है। इसमें लगा छोटा पेट्रोल इंजन पहियों को नहीं चलाता, बल्कि केवल बैटरी को चार्ज करने का काम करता है। कार हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर (electric motor) से ही चलती है। बैटरी कम होने पर इंजन बिजली बनाकर बैटरी को चार्ज करता रहता है। इससे लंबी दूरी पर भी चार्जिंग स्टेशन (charging station) खोजने की परेशानी काफी कम हो जाती है।

Pure Electric Vehicle (प्योर इलेक्ट्रिक व्हीकल)

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प्योर इलेक्ट्रिक कारें (Pure electric car) केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलती हैं। इनमें पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होता, इसलिए पॉल्यूशन भी नहीं होता। हालांकि लंबी दूरी की जर्नी में चार्जिंग स्टेशन की अवेलेबिलिटी और चार्ज होने में लगने वाला समय अभी भी कई लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है।

Future Technology (भविष्य की टेक्निक)

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आने वाले वर्षों में भारत में अलग-अलग जरूरतों के अनुसार कई टेक्निक साथ-साथ देखने को मिल सकती हैं। शहर में रोजाना चलने वालों के लिए इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड (plug-in hybrid) बेहतर ऑप्शन बन सकते हैं, जबकि लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए रेंज एक्सटेंडर EV और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं।

फिलहाल माना जा रहा है कि आने वाले समय में कोई एक टेक्निक सभी पर हावी नहीं होगी। लोगों की जरूरत, बजट और इस्तेमाल के हिसाब से पेट्रोल, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज एक्सटेंडर और इलेक्ट्रिक कारें सभी बाजार में साथ-साथ चलती रहेंगी।

Sona Comstar Q1 Results: मुनाफा 47% उछला, रेवेन्यू ने बनाया नया रिकॉर्ड; रोबोटिक्स कारोबार में भी उतरी कंपनी

Sona Comstar Q1 Results: ऑटो कंपोनेंट कंपनी Sona BLW Precision Forgings (Sona Comstar) ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 46.7% बढ़कर 178.5 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 122 करोड़ रुपये था। वहीं ऑपरेशन से रेवेन्यू 52.4% बढ़कर 1,301 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 854 करोड़ रुपये था।

कंपनी का प्रदर्शन बाजार के अनुमान से बेहतर रहा। CNBC-TV18 के अनुमान के मुकाबले कंपनी ने मुनाफा, रेवेन्यू और EBITDA तीनों मोर्चों पर बेहतर नतीजे दिए।

EBITDA और मार्जिन का हाल

जून तिमाही में EBITDA 42.6% बढ़कर 293.3 करोड़ रुपये रहा। हालांकि EBITDA मार्जिन 24.1% से घटकर 22.5% पर आ गया। यानी कंपनी की कमाई बढ़ी, लेकिन लागत बढ़ने से मार्जिन पर कुछ दबाव रहा।

EV बिजनेस ने बनाई नई ऊंचाई

Sona Comstar ने कहा कि यह उसकी अब तक की सबसे अधिक तिमाही रेवेन्यू रही। बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) से होने वाला रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जून तिमाही में कुल ऑटोमोटिव रेवेन्यू में BEV उत्पादों की हिस्सेदारी 44% रही, जबकि BEV रेवेन्यू सालाना आधार पर 107% बढ़ा।

रोबोटिक्स और AI में एंट्री

Sona Comstar ने इस तिमाही में Robotics & Physical AI कारोबार में भी उतरने का ऐलान किया। कंपनी इस क्षेत्र के लिए मिशन-क्रिटिकल कंपोनेंट, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग सेवाएं और चुनिंदा रोबोट प्लेटफॉर्म डेवलप करेगी। साथ ही कंपनी ने Sona Comstar 2.0 रणनीति पेश की है। इसके तहत FY35 तक रेवेन्यू को फिर से 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

नए ऑर्डर और शेयर का हाल

तिमाही के दौरान कंपनी को तीन नए ऑर्डर मिले, जिनमें EV, हाइब्रिड और ICE वाहनों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनसे कंपनी की ऑर्डर बुक में करीब 940 करोड़ रुपये जुड़े।

कंपनी के नतीजे बाजार बंद होने के बाद आए। इससे पहले BSE पर Sona Comstar का शेयर 719.25 रुपये पर बंद हुआ। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 25% घटा, रेवेन्यू बढ़ा; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MG ने पेश किया भारत का पहला Multi-Powertrain ADAPT प्लेटफॉर्म, आएंगी नई Electric और Plug-in Hybrid SUV

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जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया (JSW MG Motor India) ने गुरुवार, 17 जुलाई को भारत का पहला मल्टी-पावरट्रेन न्यू एनर्जी व्हीकल (NEV) प्लेटफॉर्म 'ADAPT' पेश किया। कंपनी ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान इस प्लेटफॉर्म पर आधारित एक नई इलेक्ट्रिक SUV (EV) और एक प्लग-इन हाइब्रिड SUV (PHEV) भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी। कंपनी का कहना है कि ADAPT प्लेटफॉर्म के जरिए वह अपने न्यू एनर्जी व्हीकल पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी और ग्राहकों को अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध कराएगी।

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EV के साथ Hybrid पर भी रहेगा फोकस

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कंपनी ने कहा कि भारत में वर्ष 2030 तक न्यू एनर्जी व्हीकल्स की हिस्सेदारी 30% तक पहुंचाने का लक्ष्य केवल बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग तरह के ग्राहक हैं। कुछ लोग सीधे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे, जबकि कई ग्राहक हाइब्रिड तकनीक के जरिए धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना पसंद करेंगे।

ऐसे में EV के साथ HEV, PHEV और REEV जैसी तकनीकों की भी जरूरत होगी। उपलब्ध कराने से लागत कम होगी और नए मॉडल तेजी से लॉन्च किए जा सकेंगे। जहां किसी नई कार के लिए नया प्लेटफॉर्म विकसित करने में आमतौर पर 4 से 5 साल लगते हैं, वहीं ADAPT प्लेटफॉर्म तैयार होने की वजह से MG अब 12 से 24 महीने के भीतर नए मॉडल बाजार में उतार सकेगी।

 

ADAPT प्लेटफॉर्म में क्या है खास?

ADAPT एक मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म है, जो चार तरह की तकनीकों को सपोर्ट करता है—

 

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
  • हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (HEV)
  • प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV)
  • रेंज-एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल (REEV)

 

कंपनी का कहना है कि इसी प्लेटफॉर्म पर भविष्य की कई नई MG गाड़ियां विकसित की जाएंगी। हालांकि सभी आगामी मॉडल इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, ऐसा जरूरी नहीं है।

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भारतीय ग्राहकों के लिए होगा खास ट्यूनिंग

एमजी ने बताया कि नए मॉडल ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, लेकिन उन्हें भारतीय सड़कों, मौसम और ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।

70% लोकलाइजेशन का लक्ष्य

 

एमजी मोटर का लक्ष्य ADAPT प्लेटफॉर्म पर बनने वाले वाहनों में 70 प्रतिशत स्थानीयकरण हासिल करना है। कंपनी के मुताबिक शेष 30% हिस्से में मुख्य रूप से बैटरी सेल और कुछ विशेष तकनीकी सिस्टम शामिल होंगे, जिन्हें फिलहाल अधिकांश वाहन निर्माता भी स्थानीय स्तर पर नहीं बनाते।