विश्व युवा कौशल दिवस पर योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, 75 जिलों के 10283 युवाओं को मिला रोजगार

Yogi government's major achievement on World Youth Skills Day

– कौशल विकास मिशन की ओर से प्रदेशभर में 13 से 15 जुलाई तक आयोजित हुआ 3 दिवसीय रोजगार मेला, 830 कंपनियों ने की शिरकत

– दूसरे दिन 14 जुलाई को रिकॉर्ड 8,912 युवाओं को मिला रोजगार, प्रयागराज में सबसे ज्यादा 728 चयन

– योगी सरकार में बदली युवाओं की तस्वीर, हुनर से मिल रहा रोजगार और सम्मान

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में विश्व युवा कौशल दिवस (15 जुलाई) के अवसर पर उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम), डीडीयू जीकेवाई और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के संयुक्त तत्वावधान में 13 से 15 जुलाई तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी रोजगार मेले का सफल आयोजन किया गया।

 

इस महाअभियान में प्रदेश के सभी 75 जिलों के युवाओं को शामिल किया गया। देश-विदेश की कुल 830 प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सेदारी की, जिसके माध्यम से कुल 10,283 योग्य अभ्यर्थियों का विभिन्न पदों के लिए अंतिम चयन किया गया।

 

इस उपलब्धि पर व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। आज प्रदेश का युवा हुनर से रोजगार और स्वरोजगार पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन के तहत ‘सबको हुनर, सबको काम’ के संकल्प को नई गति दी गई है।

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मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर 12.50 लाख को रोजगार दिलाया गया है। टाटा समूह के साथ 7000 करोड़ का सीएसआर एमओयू, 225 आईटीआई का अपग्रेडेशन, एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे फ्यूचरिस्टिक कोर्स और ब्लू डॉट सॉफ्टवेयर जैसी पहल से युवाओं को सीधे कंपनियों से जोड़ा जा रहा है।

 

तीन चरणों में चला रोजगार का महाअभियान

पहला चरण (13 जुलाई) : अभियान के पहले दिन प्रदेश के 9 जिलों – सम्भल, गोंडा, सुल्तानपुर, मऊ, फर्रुखाबाद, औरैया, उन्नाव, चंदौली और देवरिया में रोजगार मेले आयोजित हुए। इसमें 107 प्रमुख कंपनियों ने हिस्सा लिया और कुल 1,071 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। पहले दिन देवरिया में जबरदस्त उत्साह देखा गया, जहाँ रिकॉर्ड 303 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।

 

दूसरा चरण (14 जुलाई) : 14 जुलाई को व्यापक स्तर पर अभियान चला। प्रदेश के 63 जिलों में एक साथ मेले आयोजित हुए। इस एक दिन में 689 बड़ी कंपनियों ने शिरकत की और रिकॉर्ड 8,912 अभ्यर्थियों को नौकरी मिली। इस चरण में प्रयागराज पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहा, जहाँ अकेले 22 कंपनियों ने 1,185 युवाओं का चयन किया। इसके साथ ही वाराणसी में 674 और गोरखपुर में 317 युवाओं को रोजगार मिला।

 

तीसरा चरण (15 जुलाई) : विश्व युवा कौशल दिवस पर 15 जुलाई को अमेठी, पीलीभीत और इटावा समेत 3 जिलों में रोजगार मेला आयोजित हुआ। अंतिम दिन 34 कंपनियों की भागीदारी से कुल 300 युवाओं का चयन हुआ, जिसमें पीलीभीत के 138 युवा शामिल रहे।

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मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन पुलकित खरे ने कहा कि ‘सबको हुनर, सबको काम’ के संकल्प के तहत 3 दिवसीय मेले में 10,283 युवाओं का चयन बड़ी उपलब्धि है। यूपी का युवा आज तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर है। हमारा लक्ष्य हर कुशल हाथ को सही मंच और सीधा रोजगार देना है।

Happy Steels की ठीकठाक शुरुआत, शेयर 3% प्रीमियम पर लिस्ट

हैप्पी स्टील्स की गुरुवार, 16 जुलाई को लिस्टिंग ठीकठाक रही। NSE SME पर शेयर 3 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 68 रुपये पर लि​स्ट हुआ। IPO प्राइस 66 रुपये था। लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर 5 प्रतिशत उछला और 71.40 रुपये पर अपर प्राइस बैंड हिट किया। कंपनी का 25 करोड़ रुपये का IPO 54.54 गुना भरकर बंद हुआ था। इसमें 38 लाख नए शेयर जारी हुए। कंपनी का मार्केट कैप 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

1996 में इनकॉरपोरेट हुई हैप्पी स्टील लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरर है। यह सेफ्टी-क्रिटिकल, फोर्ज्ड और मशीन्ड ट्रांसमिशन और ड्राइवलाइन पार्ट्स बनाती है। ये पार्ट्स ऑन-हाइवे, ऑफ-हाइवे, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और डिफेंस सेक्टर में इस्तेमाल होते हैं। कंपनी मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन में काम करती है। इसकी क्षमताओं में कच्चा माल खरीदना, फोर्जिंग, हीट ट्रीटमेंट, प्रिसिजन मशीनिंग, गियर कटिंग, ड्रिलिंग, सरफेस हार्डनिंग, ग्राइंडिंग, इंस्पेक्शन और पैकिंग शामिल हैं।

हैप्पी स्टील्स के प्रोडक्ट्स में कई तरह के एक्सल, लंबे स्प्लाइन शाफ्ट, स्पिंडल और दूसरे सेफ्टी-क्रिटिकल और लोड-बेयरिंग पार्ट्स शामिल हैं। ये पार्ट्स गाड़ियों की परफॉर्मेंस और सेफ्टी में अहम भूमिका निभाते हैं। ये प्रोडक्ट्स भारत और विदेशों में ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और टियर-I सप्लायर्स को सप्लाई किए जाते हैं।

मेट्रो कॉरिडोर, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर… 1647 करोड़ के ये 28 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स मंजूर, अब बदल जाएगी दिल्ली की सूरत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की रफ्तार और सूरत को बदलने के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 1647 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दे दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। इस भारी-भरकम बजट से दिल्ली में मेट्रो कॉरिडोर, बारापुला एलिवेटेड रोड, नए फ्लाईओवर और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग स्टेशन समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोत्साहन के रूप में 756 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि को भी मंजूरी दी है। यह जानकारी दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में दी गई है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि इस योजना के तहत दिल्ली को क्या-क्या मिलने जा रहा है:

मंजूर हुए दिल्ली सरकार के सभी 28 बड़े प्रोजेक्ट्स

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी 28 प्रमुख कैपिटल प्रोजेक्ट्स को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की SASCI योजना के तहत मंजूरी मिली है। मंजूर किए गए इन 28 प्रोजेक्ट्स में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:

  • दिल्ली मेट्रो रेल परियोजनाएं: नए मेट्रो कॉरिडोर के विकास को रफ्तार मिलेगी।
  • बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर: इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • करावल नगर फ्लाईओवर: इस इलाके में जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए फ्लाईओवर का निर्माण होगा।
  • डीटीसी डिपो में ईवी चार्जिंग स्टेशन: दिल्ली परिवहन निगम के डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
  • सड़क बुनियादी ढांचा: इनके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी इस मंजूरी का हिस्सा हैं।

क्या है SASCI स्कीम, इससे दिल्ली को मिला फंड?

ये सभी 28 प्रोजेक्ट्स केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र सरकार की एक विशेष योजना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूरी तरह से ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना सिर्फ वित्तीय सहायता देने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह राज्यों द्वारा रणनीतिक सुधारों को लागू करने और पूंजीगत निवेश को बढ़ाने को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय इंसेंटिव भी देती है। इसी के तहत दिल्ली को 756 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव मिला है।

समय पर काम पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही इस योजना को प्राथमिकता दी है और दिल्ली की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इसके तहत मंजूरी दिलाने के लिए लगातार केंद्र सरकार से आग्रह किया था। अब फंड मंजूर होने के बाद, मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इन स्वीकृत परियोजनाओं से जुड़े सभी संबंधित विभागों के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गति को तेजी से आगे बढ़ाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि दिल्ली के निवासियों को जल्द से जल्द इन परियोजनाओं का लाभ मिल सके।

Delhi EV Policy : इलेक्ट्रिक व्हीकल में स्विच करने पर मिलेगा ₹1 लाख तक का फायदा, समझिए पूरा हिसाब

Delhi EV Policy : दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई से दिल्ली EV पॉलिसी 2026 लागू कर दी है। यह पॉलिसी तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।

सरकार का मकसद दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना है। इसके लिए चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, पूरा EV इकोसिस्टम मजबूत किया जाएगा, ताकि प्रदूषण कम हो और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटे। नई पॉलिसी में सब्सिडी, स्क्रैपेज इंसेंटिव, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जैसी कई सुविधाएं दी गई हैं।

पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर फायदा

नई पॉलिसी के तहत अगर कोई BS-IV या उससे पुरानी कार स्क्रैप करके इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, तो उसे 1 लाख रुपये तक का स्क्रैपेज इंसेंटिव मिलेगा।

अगर कोई पुरानी दोपहिया गाड़ी स्क्रैप करके नई इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदता है, तो उसे 10,000 रुपये का अतिरिक्त स्क्रैपेज इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, पुराना थ्री-व्हीलर स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने पर 25,000 रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा।

दोपहिया और तिपहिया पर नियम

नई पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वालों को पहले साल 30,000 रुपये, दूसरे साल 20,000 रुपये और तीसरे साल 10,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर या ई-ऑटो खरीदने वालों को पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये का इंसेंटिव मिलेगा।

इलेक्ट्रिक ट्रक और कार के नियम

N1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रक खरीदने वालों को 1 लाख रुपये तक का खरीद इंसेंटिव मिलेगा। इसके अलावा, 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली सभी इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ रहेगी। यह छूट सिर्फ दिल्ली में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर मिलेगी।

सब्सिडी के लिए कैसे करें आवेदन?

दिल्ली सरकार ने 3 जुलाई को Delhi EV Subsidy Portal लॉन्च किया है। इसी पोर्टल पर सब्सिडी के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए आधार कार्ड, RC और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज देने होंगे। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP से पहचान की पुष्टि करनी होगी।

सरकार के मुताबिक, गाड़ी खरीदने और RC मिलने के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। अगर आवेदन मंजूर हो जाता है, तो 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की रकम DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में भेज दी जाएगी। पोर्टल पर आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकेगी।

नई पॉलिसी लागू कैसे होगी?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस पॉलिसी को लागू करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग के पास होगी। इसके लिए अलग से EV Cell बनाया जाएगा। यही सेल पूरी पॉलिसी की निगरानी करेगा। जरूरत पड़ने पर दिशा-निर्देश जारी करेगा और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाएगा। सरकार एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) भी नियुक्त करेगी।

किसे मिलेगी सब्सिडी?

सरकार Model Approval Committee भी बनाएगी। यह समिति तय करेगी कि कौन-से EV मॉडल सरकारी सब्सिडी और इंसेंटिव के लिए योग्य हैं। समिति तकनीकी मानकों और दूसरे नियमों के आधार पर EV मॉडल की जांच करेगी। सिर्फ मंजूर किए गए मॉडल ही सरकारी सब्सिडी का फायदा उठा सकेंगे।

नई पॉलिसी से क्या बदलेगा?

नई पॉलिसी के तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में सिर्फ ई-ऑटो का ही रजिस्ट्रेशन होगा। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और CNG दोपहिया का रजिस्ट्रेशन धीरे-धीरे बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया का ही रजिस्ट्रेशन होगा।

सब्सिडी लेने वालों के लिए नियम

सरकार ने नई पॉलिसी में 3 साल का लॉक-इन पीरियड रखा है। अगर आपने सरकारी सब्सिडी लेकर EV खरीदी है, तो पहले तीन साल तक उस गाड़ी का दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जा सकेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोग सिर्फ सब्सिडी का फायदा लेकर तुरंत गाड़ी दूसरे राज्यों में न बेच दें।