
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया (JSW MG Motor India) ने गुरुवार, 17 जुलाई को भारत का पहला मल्टी-पावरट्रेन न्यू एनर्जी व्हीकल (NEV) प्लेटफॉर्म 'ADAPT' पेश किया। कंपनी ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान इस प्लेटफॉर्म पर आधारित एक नई इलेक्ट्रिक SUV (EV) और एक प्लग-इन हाइब्रिड SUV (PHEV) भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी। कंपनी का कहना है कि ADAPT प्लेटफॉर्म के जरिए वह अपने न्यू एनर्जी व्हीकल पोर्टफोलियो का विस्तार करेगी और ग्राहकों को अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध कराएगी।
ALSO READ: बार-बार KYC कराने से मिलेगा छुटकारा, ऐसे जानें अपनी 14 अंकों की CKYC संख्या, बैंक का काम होगा आसान
EV के साथ Hybrid पर भी रहेगा फोकस
कंपनी ने कहा कि भारत में वर्ष 2030 तक न्यू एनर्जी व्हीकल्स की हिस्सेदारी 30% तक पहुंचाने का लक्ष्य केवल बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग तरह के ग्राहक हैं। कुछ लोग सीधे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे, जबकि कई ग्राहक हाइब्रिड तकनीक के जरिए धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना पसंद करेंगे।
ऐसे में EV के साथ HEV, PHEV और REEV जैसी तकनीकों की भी जरूरत होगी। उपलब्ध कराने से लागत कम होगी और नए मॉडल तेजी से लॉन्च किए जा सकेंगे। जहां किसी नई कार के लिए नया प्लेटफॉर्म विकसित करने में आमतौर पर 4 से 5 साल लगते हैं, वहीं ADAPT प्लेटफॉर्म तैयार होने की वजह से MG अब 12 से 24 महीने के भीतर नए मॉडल बाजार में उतार सकेगी।
ADAPT प्लेटफॉर्म में क्या है खास?
ADAPT एक मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म है, जो चार तरह की तकनीकों को सपोर्ट करता है—
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
- हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (HEV)
- प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (PHEV)
- रेंज-एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल (REEV)
कंपनी का कहना है कि इसी प्लेटफॉर्म पर भविष्य की कई नई MG गाड़ियां विकसित की जाएंगी। हालांकि सभी आगामी मॉडल इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, ऐसा जरूरी नहीं है।
भारतीय ग्राहकों के लिए होगा खास ट्यूनिंग
एमजी ने बताया कि नए मॉडल ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे, लेकिन उन्हें भारतीय सड़कों, मौसम और ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।
70% लोकलाइजेशन का लक्ष्य
एमजी मोटर का लक्ष्य ADAPT प्लेटफॉर्म पर बनने वाले वाहनों में 70 प्रतिशत स्थानीयकरण हासिल करना है। कंपनी के मुताबिक शेष 30% हिस्से में मुख्य रूप से बैटरी सेल और कुछ विशेष तकनीकी सिस्टम शामिल होंगे, जिन्हें फिलहाल अधिकांश वाहन निर्माता भी स्थानीय स्तर पर नहीं बनाते।

