Houthi-Saudi War: हूती हमलों के बीच खाड़ी में बड़ा सैन्य फैसला, सऊदी अरब में जल्द तैनात होंगे पाकिस्तान-तुर्की के सैनिक

Houthi-Saudi War: यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान और तुर्की ने बड़ा ऐलान किया है। ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत दोनों देश सऊदी अरब में अपने सैनिकों और सैन्य क्षमताओं की जल्द तैनाती की दिशा में आगे बढ़ेंगे। तीनों देशों ने सऊदी की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी हमले या खतरे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय मक्का रक्षा गठबंधन की एक उच्चस्तरीय समिति रियाद में बैठक की, जिसके बाद ये फैसला लिया गया।

क्या है पूरा मामला?

सोमवार को रियाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक हुई। इसमें पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में तीनों देशों ने कहा कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी हमले या धमकी को स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही, सामूहिक रक्षा से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक रूप से लागू करने और जरूरी सैन्य बल व क्षमताएं उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

अगस्त में हुए इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के तहत अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है तो बाकी दोनों देश उसके समर्थन में सामने आएंगे। इस समझौते में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब शामिल हैं। इस गठजोड़ में तुर्की की नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। पाकिस्तान मुस्लिम दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश है। जबकि सऊदी अरब खाड़ी क्षेत्र की प्रमुख सैन्य और आर्थिक शक्तियों में से एक है।

कितने सैनिक जाएंगे, भूमिका क्या होगी?

हालांकि, तीनों देशों ने सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती की बात कही है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पाकिस्तान और तुर्की कितने सैनिक भेजेंगे। यह भी नहीं बताया गया है कि तैनात सैनिकों को किस तरह की जिम्मेदारी दी जाएगी।

हूती हमलों के बीच बढ़ी चिंता

यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है। हूती पहले भी सऊदी शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को निशाना बना चुके हैं। सितंबर में हूतियों ने बड़ा सैन्य अभियान चलाकर यमन की सऊदी समर्थित सरकार के नियंत्रण वाले कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था।

इसके जवाब में सोमवार को सऊदी समर्थित बलों ने जवाबी अभियान शुरू किया और हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने की कोशिश तेज कर दी। हूती विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बड़ा हमला किया है। यह हमला ईरान के समर्थक इस गुट और यमन की सऊदी-समर्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच बढ़ती लड़ाई के दौरान हुआ है।

Nobel Prize Medicine: ‘कैंसर से लेकर ब्रेन डिसऑर्डर तक!’ इस दवा की खोज के लिए 3 वैज्ञानिकों को मिला नोबेल

Nobel Prize in Medicine 2026: साल 2026 के लिए ‘फिजियोलॉजी या मेडिसिन’ क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इस बार यह प्रतिष्ठित सम्मान वैज्ञानिक कार्ल डीसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को संयुक्त रूप से दिया गया है। इन तीनों वैज्ञानिकों को ‘लाइट-गेटेड आयन चैनलों’ और ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ तकनीक से जुड़ी अभूतपूर्व खोजों के लिए चुना गया है। इस तकनीक ने मस्तिष्क के अध्ययन और तंत्रिका विज्ञान की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।

स्टॉकहोम स्थित करोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली ने सोमवार को इस पुरस्कार का ऐलान किया। असेंबली ने तीनों वैज्ञानिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इनकी खोजों के कारण ही प्रकाश के जरिए मस्तिष्क की विशेष तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित और अध्ययन करना संभव हो पाया है।

इनके इस ऐतिहासिक कार्य ने वैज्ञानिकों को यह समझने का एक बेहद शक्तिशाली जरिया दिया है कि जीवित मस्तिष्क में अलग-अलग न्यूरॉन्स की गतिविधियां स्मृति, भावनाओं और व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं।

कैसे काम करती है यह नोबेल पुरस्कार विजेता खोज?

ऑप्टोजेनेटिक्स एक ऐसी तकनीक है जो प्रकाश और आनुवंशिकी के मेल से काम करती है। वैज्ञानिकों की इस तिकड़ी ने अपनी खोजों से इसे संभव बनाया:

पीटर हेगमैन की खोज: जर्मन बायोफिजिसिस्ट पीटर हेगमैन के शोध ने यह उजागर करने में मदद की कि कैसे कुछ सूक्ष्मजीव विशेष प्रकार के प्रोटीन के जरिए प्रकाश को महसूस करते हैं।

जॉर्ज नागेल का योगदान: जर्मन न्यूरोवैज्ञानिक जॉर्ज नागेल ने बाद में यह साबित करके दिखाया कि ये सूक्ष्मजीव वाले प्रोटीन प्रकाश द्वारा नियंत्रित होने वाले ‘आयन चैनल’ के रूप में काम कर सकते हैं।

आयन चैनल की भूमिका: आयन चैनल कोशिकाओं की झिल्ली में मौजूद ऐसे प्रोटीन होते हैं, जो विद्युत आवेशित कणों के कोशिका के भीतर और बाहर जाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। चूंकि आयन की यह हलचल ही तय करती है कि कोई न्यूरॉन सक्रिय होगा या नहीं, इसलिए प्रकाश-संवेदनशील आयन चैनलों ने प्रकाश की मदद से न्यूरॉन्स की गतिविधियों को प्रभावित करने का रास्ता साफ कर दिया।

कार्ल डीसेरोथ का तकनीकी इस्तेमाल: अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोइंजीनियरिंग, साइकियाट्री और बिहेवियरल साइंसेज के प्रोफेसर कार्ल डीसेरोथ और उनके सहयोगियों ने इन बुनियादी खोजों को जीवित जीवों के न्यूरॉन्स को नियंत्रित करने के एक व्यावहारिक और सटीक तरीके में बदल दिया।

जैनेटिक तकनीकों के जरिए इन प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीनों को न्यूरॉन्स में जोड़कर और सटीक रूप से रोशनी डालकर, शोधकर्ता किसी खास न्यूरल सर्किट को संचालित कर सकते थे और उसके व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों को देख सकते थे। इस दृष्टिकोण ने मस्तिष्क के कामकाज को समझने के लिए एक नया दरवाजा खोल दिया। नोबेल असेंबली ने भी कहा कि इन खोजों से यह साबित करना संभव हो पाया है कि जीवित मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं यादों, भावनाओं और व्यवहार को किस तरह आकार देती हैं।

कौन हैं 2026 के नोबेल पुरस्कार विजेता?

कार्ल डीसेरोथ (Karl Deisseroth): अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोइंजीनियरिंग, साइकियाट्री और बिहेवियरल साइंसेज के प्रोफेसर हैं। उनके शोध ने न्यूरल सर्किट और व्यवहार की जांच के लिए ऑप्टोजेनेटिक्स को एक व्यावहारिक विधि के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

पीटर हेगमैन (Peter Hegemann): जर्मनी के प्रसिद्ध बायोफिजिसिस्ट हैं, जिन्होंने सूक्ष्मजीवों में प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीनों का गहन अध्ययन किया। उनके शोध ने प्रकाश के माध्यम से कोशिकाओं को नियंत्रित करने की नींव रखी।

जॉर्ज नागेल (Georg Nagel): जर्मनी के प्रमुख न्यूरोवैज्ञानिक हैं, जिन्होंने माइक्रोबियल ऑप्सिन की खोज और उनके लक्षणों को पहचानकर यह दिखाया कि वे प्रकाश-नियंत्रित आयन चैनलों के रूप में काम कर सकते हैं।

इन तीनों वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास ने माइक्रोबायोलॉजी, मेम्ब्रेन बायोलॉजी और न्यूरोसाइंस के बीच के अंतर को पाट दिया। इनकी इस खोज ने आधुनिक मस्तिष्क अनुसंधान को एक ऐसा हथियार दिया है, जो भविष्य में तंत्रिका तंत्र और मानसिक बीमारियों के इलाज में नई दिशा दिखाएगा।

ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने इस्तीफा दिया

ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (एनआईओसी) के मुख्य कार्यकारी हामिद बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री नियुक्त किया गया है।

सरकारी मीडिया संस्थान आईआरआईबी के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने श्री पाकनेजाद का इस्तीफा स्वीकार करते हुए श्री बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री नियुक्त किया।

राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि पाकनेजाद ने पहले भी “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देते हुए पद छोड़ने की इच्छा जतायी थी, लेकिन उनका शुरुआती अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया था।

प्रवक्ता के अनुसार, श्री पेजेश्कियान ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए कहा था, लेकिन श्री पाकनेजाद अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनके कार्यकाल के दौरान “प्रयासों और ईमानदार सेवा” के लिए उनकी सराहना की।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ईरान के पेट्रोलियम निर्यात पर कड़ा नौसैनिक नाकाबंदी अभियान चला रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य भी प्रमुख तनाव केंद्र बन गया है। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की ढुलाई होती थी।

ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रतिबंधित करने और कथित रूप से अनधिकृत मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर गोलीबारी के बाद अमेरिका ने जवाबी नाकाबंदी लागू की। इसका उद्देश्य ईरान के बंदरगाहों को निशाना बनाकर उसके पेट्रोलियम निर्यात को रोकना है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान के तहत ईरान के वाहन और रेल क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए नये प्रतिबंधों की घोषणा की है।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि नये प्रतिबंधों का उद्देश्य युद्ध के वित्तपोषण की तेहरान की क्षमता को और कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका “शासन के राजस्व को हमेशा के लिए खत्म करने” की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव ईरान के बचे हुए पेट्रोलियम राजस्व स्रोतों पर भी केंद्रित है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंधों का उद्देश्य तेहरान को कच्चा तेल बेचने तथा विदेशी मुद्रा तक पहुंच हासिल करने से रोकना है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतें गिर रही हैं और दावा किया कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को “लगभग छोड़ दिया है।” यह घटनाक्रम संघर्ष के आठवें महीने में प्रवेश करने के बीच हुआ है।

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मार्केट लाल, Sensex डे-हाई से टूट गया 750 प्वाइंट्स, Nifty आया 22400 के नीचे

Share Market Crash: 25 साल में लगातार आठ हफ्ते की सबसे लंबी गिरावट के बाद इस हफ्ते की शुरुआत सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत की लेकिन फिर ये ढह गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी सौदे को लेकर बातचीत फिलहाल स्थिर हो गई है। इससे मार्केट को शॉक लगा और सेंसेक्स डे-हाई से 750 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22400 के नीचे के आ गया।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 722.23 प्वाइंट्स चढ़कर 72,631.93 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 791.75 प्वाइंट्स टूटकर 71,840.18 और निफ्टी 199.85 प्वाइंट्स उछलकर 22,621.80 तक पहुंचा था, जिससे फिर यह 224.70 प्वाइंट्स गिरकर 22,397.10 तक आ गया।

क्या है वित्त मंत्री ने? 

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली में एक इवेंट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ट्रेड डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत अभी भी चल रही है लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से काफी बातचीत और समझौते के बाद ऐसी स्थिति हासिल कर ली है, जहां आगे कुछ देना या लेना दोनों के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्षों के लिए आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश बची है, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के लिए अब आगे और समझौता करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगा। इस पर मार्केट धड़ाम हो गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड बैलेंस अभी भारत के पक्ष में है अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सौदे को लेकर बातचीत अभी चल रही है।

वित्त मंत्री ने दिया चीन का उदाहरण

भारत के साथ सौदे को लेकर अमेरिका चाहता है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड इनबैलेंस यानी कारोबारी अंसतुलन कम हो यानी कि भारत अधिक से अधिक चीजें अमेरिका से खरीदे। वित्त मंत्री ने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच भी ऐसा ही असंतुलन है और 2014 के बाद से व्यापार घाटा लगातार बहुत तेजी से बढ़ा है लेकिन केवल व्यापार घाटे को कम करना ही अगर किसी समझौते की मुख्य शर्त बन जाए, तो सवाल यह है कि बातचीत के जरिए इसे किस हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले कारोबारी बातचीत का उद्देश्य यह होता था कि दोनों देश अपनी समस्याएं और असमानताएं सामने रखते थे और फिर बातचीत के जरिए समाधान निकालते थे लेकिन अब व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी बातचीत में किसी देश को अपने बाजार में कुछ चीजों की पहुंच बढ़ानी होती थी तो बदले में वह दूसरे देश की कुछ चीजों को अपने यहां अधिक पहुंच देता था यानी दोनों तरफ से कुछ देना और कुछ लेना होता था लेकिन अब टैरिफ बड़ा हथियार बन गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि पहले टैरिफ यानी आयात शुल्क का इस्तेमाल कारोबारी बातचीत के दौरान एक ढांचे के तहत होता था लेकिन अब इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या कहना है अमेरिका का

भारत के साथ कारोबारी सौदे को लेकर अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) का कहना है कि ट्रंप सरकार इसे लेकर आखिरी दौर में है लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता जल्द होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि G20 की बैठक के दौरान भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के साथ अच्छी बातचीत हुई। ग्रीर के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच जिन मुद्दों को लेकर मतभेद है, उसकी पहचान कर ली गई है और अब उन्हें सुलझाने के लिए काम किया जा रहा है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चीन के लिए जासूसी के शक में अमेरिकी महिला गिरफ्तार:ताइवानी राष्ट्रपति के बेटे का वीडियो बनाया; चीन जाते समय एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने रविवार को लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट से 34 साल की एक महिला को गिरफ्तार किया। महिला पर आरोप है कि उसने चीन सरकार के लिए काम करते हुए ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बेटे की निगरानी की और उसकी तस्वीरें व वीडियो चीन तक पहुंचाए। अमेरिकी महिला की पहचान वैनयिंग झांग उर्फ हीदर झांग के रूप में हुई है। वह कैलिफोर्निया के इरविन शहर में रियल एस्टेट एजेंट है। FBI ने उसे उस समय गिरफ्तार किया, जब वह लॉस एंजिल्स से शंघाई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने वाली थी। अमेरिकी अधिकारियों ने उस पर किसी विदेशी सरकार के लिए काम करने का आरोप लगाया है। कैलिफोर्निया में रियल एस्टेट एजेंट के तौर पर काम करती थी गिरफ्तार महिला की पहचान वैनयिंग हीदर झांग (34) के रूप में हुई है। वह कैलिफोर्निया के इरविन में रियल एस्टेट एजेंट है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, झांग सितंबर 2025 में एक और व्यक्ति के साथ लास वेगास से सिएटल गई थी। दोनों ने वहां एक काली निसान रोग कार किराए पर ली और ताइवान के राष्ट्रपति के बेटे टिंग-यू लाई के घर के पास पहुंचे। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने घर और वहां आने वाले लोगों की तस्वीरें और वीडियो बनाए। पड़ोसी के सुरक्षा कैमरे की फुटेज में भी दोनों को कैमरे से रिकॉर्डिंग करते हुए देखा गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, झांग ने इस दौरान चीन के एक सरकारी अधिकारी को वीचैट पर जानकारी भेजी। FBI के मुताबिक, उसने बताया कि उसने टिंग-यू को देख लिया है और उसका वीडियो बना रही है। उसने दो गाड़ियों के नंबर भी भेजे थे। जून में चीनी अधिकारी से मिलने गई थी महिला FBI की शिकायत के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत जून 2025 में हुई थी। झांग को उसकी पुरानी यूनिवर्सिटी के एक दोस्त ने चीन के एक सरकारी अधिकारी से मिलवाया था। झांग जून में चीन के चांगशा शहर गई थी। वहां उसने एक निजी कमरा बुक किया, जहां उसकी चीनी अधिकारी से मुलाकात हुई। FBI के मुताबिक, अधिकारी ने उसे निगरानी से जुड़ा काम दिया था। जांच एजेंसी का कहना है कि इसके बाद झांग ने मैसेज भेजकर कहा था कि वह यह काम संभाल लेगी। कुछ समय बाद उसने अधिकारी को बताया कि वह अगले हफ्ते सिएटल जा सकती है। इसके बाद ही सितंबर 2025 में वह अपने साथी के साथ सिएटल गई और राष्ट्रपति के बेटे के घर की निगरानी की। FBI ने बताया- राष्ट्रपति पर दबाव बनाने में इस्तेमाल हो सकती थीं तस्वीरें FBI एजेंट होल्ट ने शिकायत में कहा कि अगर चीन किसी संभावित संघर्ष के दौरान ताइवान के राष्ट्रपति पर दबाव बनाना चाहता है, तो उनके करीबी रिश्तेदारों की लोकेशन, घर और गाड़ियों की तस्वीरें उसके लिए उपयोगी हो सकती हैं। झांग के पति एड्रिक डिंग, जो उसी रियल एस्टेट कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें अभी मामले के बारे में जानकारी नहीं है। ताइवान के राष्ट्रपति के बेटे कौन हैं? टिंग-यू लाई ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बेटे हैं और अमेरिका में रहते हैं। वे इंजीनियर हैं और उनकी पढ़ाई भी अमेरिका में हुई है। उन्होंने 2012 में केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से पीएचडी की। टिंग-यू फिलहाल नीदरलैंड की बहुराष्ट्रीय कंपनी फिलिप्स में काम करते हैं। उनकी पत्नी और बच्चा भी अमेरिका में रहते हैं। अमेरिका में पहले भी चीन से जुड़े जासूसी के मामले सामने आ चुके हैं 2023: न्यूयॉर्क में चीन के एक कथित गुप्त पुलिस स्टेशन से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि इसका इस्तेमाल चीन के आलोचकों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। 2024: न्यूयॉर्क में रहने वाले शुजुन वांग को चीन के लिए काम करने का दोषी पाया गया था। अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, उन्होंने लंबे समय तक चीन के पक्ष में जानकारी जुटाई थी। 2026: कैलिफोर्निया की पूर्व मेयर ईलीन वांग पर भी चीन के लिए एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगाया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, उन पर चीन समर्थक प्रचार के बदले पैसे लेने का आरोप था। चीन और ताइवान के बीच तनाव की वजह क्या है? ताइवान में अपनी लोकतांत्रिक सरकार है, लेकिन चीन उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। बीजिंग लंबे समय से ताइवान को चीन में शामिल करने की बात करता रहा है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता। वहीं ताइवान की मौजूदा सरकार अपने भविष्य का फैसला खुद करने की बात कहती है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ताइवान की अलग पहचान और स्वशासन पर जोर देती है। इसी वजह से चीन और ताइवान के बीच तनाव बना रहता है। अमेरिका के ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह ताइवान का बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। ताइवान अमेरिका और चीन के लिए इतना अहम क्यों है? ताइवान सिर्फ राजनीतिक विवाद की वजह से अहम नहीं है। यह दुनिया की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का भी बड़ा केंद्र है। दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शामिल TSMC ताइवान की कंपनी है। यहां बनने वाली एडवांस चिप्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, कारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों में होता है। इसी वजह से ताइवान को लेकर किसी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर सिर्फ चीन और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की टेक्नोलॉजी सप्लाई पर भी पड़ सकता है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… सर्वे- ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं: मिडटर्म में हार का खतरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पूरी खबर पढ़ें…

ज्ञानेश है भाजपा का हथियारः उद्धव

मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ‘हथियार’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की।

सीईसी और एसआईआर के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में हजारों लोग शामिल हुए। मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि अगर एसआईआर मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए कराया गया था तो सरकार बताए कि देश में अवैध रूप से रह रहे कितने बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘ज्ञानेश कुमार भाजपा का हथियार हैं।’

निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कवायद में पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोजन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।’

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने दावा किया, ‘भाजपा को समझ लेना चाहिए कि लोग आज शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए तो वे उसका सिंहासन जला देंगे।’

उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को ‘चुराने’ का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी ‘चुराने’ का आरोप लगाया।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करने को लेकर उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।

उद्धव ने दावा किया, ‘यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।’ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश में भविष्य के चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से ही राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित ‘अनियमितताओं’ के बारे में बताते रहे हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से इन मुद्दों के स्पष्ट होने तक चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह भी किया था।

दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च कुछ ही दूरी तय कर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय पहुंचा। एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।

मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए दीपके ने कहा, ‘अब या कभी नहीं।’

अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को निकाला:आदेश मिलने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके रहे, UN महासभा में शामिल होने पहुंचे थे

अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर भेज दिया है। दोनों संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे, लेकिन महासभा खत्म होने के बाद भी वहीं रुके रहे। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि UN महासभा में शामिल होने आए उसके प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। ज्यादातर प्रतिनिधि चले गए, लेकिन दो राजनयिक न्यूयॉर्क में ही रुके रहे। शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी मिशन को बताया कि उन्हें दोनों के अब भी न्यूयॉर्क में मौजूद होने की जानकारी है। इसके बाद ईरान को दोबारा संदेश भेजकर दोनों राजनयिकों को तुरंत अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद एक राजनयिक शुक्रवार रात और दूसरा शनिवार सुबह न्यूयॉर्क से रवाना हो गया। अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क गए थे ईरानी राष्ट्रपति ईरान और अमेरिका में जंग के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान UN महासभा में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुंचे थे। 23 सितंबर को यहां उन्होंने दुनिया के सामने ईरान का पक्ष रखा और अमेरिका-इजराइल पर कई गंभीर आरोप लगाए। पजशकियान अपने भाषण में युद्ध में मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले 200 साल में किसी देश पर हमला नहीं किया है, बल्कि उसका देश खुद आतंकवाद और हमलों का शिकार रहा है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। पजशकियान ने यह भी साफ किया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार नहीं छोड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी देशों पर दोहरे रवैये और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। UN में ईरानी डेलिगेशन को स्टारलिंक देने पहुंचे थे इजराइली अधिकारी UN महासभा में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी डेलिगेशन को स्टारलिंक डिवाइस देने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि इससे ईरान के लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर अपनी बात दुनिया तक पहुंचा सकेंगे। नेतन्याहू के भाषण के बाद एक इजराइली अधिकारी स्टारलिंक डिवाइस लेकर ईरानी अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने डिवाइस लेने की अपील करते हुए कहा कि यह उनके लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने डिवाइस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और इसे लेने से इनकार कर दिया। ईरान में जंग से 7,300 मौतें, 32 लाख लोगों ने घर छोड़ा 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान में करीब 7,300 लोग मारे गए और 32,314 घायल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1.49 लाख इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए। करीब 32 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। जंग का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा। 229 स्वास्थ्य केंद्र और 49 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, ईरान ने अप्रैल में बताया था कि युद्ध की वजह से 24.8 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

राहुल ने शुरू किया सत्याग्रह अभियान

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की तर्ज पर सत्याग्रह अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए राहुल देश भर में अन्याय और अपने हक के लिए लड़ रहे लोगों की आवाज को एक साथ जोड़ेंगे। गौरतलब है कि इस समय पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से लेकर एसआईआर और महंगाई के खिलाफ लोगों में गुस्सा है, जो बार बार प्रकट हो रहा है। राहुल ऐसे हर मुद्दे से जुड़े लोगों को एक पहल से जोड़ेंगे।

राहुल गांधी ने कहा है, ‘जो भी लोग अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, वे अपनी कहानी भेजें। मैं नेता विपक्ष के रूप में संसद से लेकर सड़क तक आपके साथ खड़ा हूं’। गौरतलब है कि आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी ने भी यही तरीका अपनाया था। उन्होंने लोगों से अपनी मुश्किलें लिख कर भेजने को कहा था। तब उनकी अपील पर हजारों लोगों ने अपनी शिकायतें उनको लिख कर भेजी थीं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘देश भर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं। जेन जी, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं। हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है। सत्याग्रह इन्हीं आवाजों को एक साथ लाने की पहल है’। उन्होंने लिखा, ‘बापू ने यही सिखाया था, सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना। अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं, अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे’।

गौरतलब है कि खुद कांग्रेस पार्टी भी इस समय मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। विपक्षी पार्टियों की साझा बैठक में आंदोलन की योजना बनी है। दूसरी पार्टियों ने भी देश के अलग अलग हिस्सों में आंदोलन किया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के सांसद और नेता छह अक्टूबर को चुनाव आयोग का घेराव करेंगे। विपक्ष की बैठक में दो से आठ अक्टूबर तक लगातार प्रदर्शन करने की योजना बनी है।

सीमा पर गोलीबारी के बाद पाकिस्तान में भारतीय राजनयिक तलब:कहा- मारे गए लोग PAK नागरिक थे; BSF ने घुसपैठ के शक में गोली मारी थी

पाकिस्तान ने शनिवार को भारतीय राजनयिक को तलब किया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने पंजाब के तरनतारन में भारत-पाक सीमा पर दो लोगों की मौत पर विरोध जताया है। पाकिस्तान का दावा है कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गोलीबारी में मारे गए। यह घटना शुक्रवार को हुई थी। वहीं भारतीय अधिकारियों के मुताबिक ये लोग भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। चेतावनी देने के बाद BSF ने गोली चलाई। BSF ने चेतावनी दी थी, नहीं रुके तो गोली चलाई भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, तीन संदिग्ध लोग पाकिस्तान की तरफ से भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे। BSF जवानों ने उन्हें रुकने की चेतावनी दी। इनमें से एक वापस पाकिस्तान की तरफ चला गया, जबकि दो लोग आगे बढ़ते रहे। इसके बाद BSF ने फायरिंग की, जिसमें दोनों की मौत हो गई। तरनतारन में 7 महीने में घुसपैठ की यह दूसरी घटना है। पाकिस्तान ने जांच की मांग की है पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मारे गए दोनों लोग निहत्थे नागरिक थे। पाकिस्तान के मुताबिक, वे सीमा के पास गए थे और अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए। पाकिस्तान ने कहा है कि उसके नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है। पाकिस्तान ने मामले की तुरंत, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच की मांग की है। साथ ही उसने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और जांच के नतीजे पाकिस्तान सरकार को बताने को कहा है। पाकिस्तानी वेबसाइट डॉन के मुताबिक मारे गए लोगों की पहचान आजमत रसूल और मोहसिन जट्ट के रूप में हुई है। दोनों लाधर के जट्टां वाली हवेली इलाके के रहने वाले थे। तीसरा व्यक्ति घायल है और अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले भी 5 घुसपैठिए मारे गए मार्च 2026: तरनतारन के खेमकरण सेक्टर में BSF ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया था। वह चेतावनी के बाद भी आगे बढ़ रहा था। अगस्त 2024: तरनतारन के दल गांव के पास एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया था। अगस्त 2023: तरनतारन के थेकालन गांव के पास एक घुसपैठिए की गोलीबारी में मौत हुई। मई 2021: खालड़ा गांव के पास एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया। BSF ने उसके पास से पाकिस्तानी सामान बरामद किया था। फरवरी 2021: फिरोजपुर सेक्टर में एक पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया। उसके पास से 14.8 किलो हेरोइन और हथियारों से जुड़ा सामान मिला था। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला, खिड़कियां टूटीं:पुजारी समेत श्रद्धालु अंदर मौजूद थे अमेरिका के ओहायो में शुक्रवार को हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किया गया। इसमें मंदिर को काफी नुकसान हुआ। पूरी खबर पढ़ें…

पुतिन ने NATO देशों को परमाणु हमले की धमकी दी:कहा- कलिनिनग्राद पर हमला किया तो सारे हथियार तैयार; यहां 80 साल से रूसी कब्जा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को NATO देशों को परमाणु हमले की धमकी दी। उन्होंने कहा कि रूस की किसी भी जमीन पर हमला हुआ, तो वह अपने सभी हथियारों से जवाब देगा। पुतिन ने मॉस्को में वल्दाई फोरम के दौरान कहा कि नाटो अगर कैलिनिनग्राद को रूस से अलग करने की कोशिश करता है, तो रूस तुरंत जवाब देगा। कैलिनिनग्राद रूस का एक अलग इलाका है। यह रूस के बाकी हिस्से से जुड़ा नहीं है। यह रूस की सीमा से 300 किमी दूर यूरोप में पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945 से इस इलाके पर रूस का कब्जा है। कैलिनिनग्राद रूस के लिए कैसे अहम पुतिन बोले- पश्चिमी देश रूस के साथ युद्ध की तैयारी कर रहे राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिमी देशों और यूरोप पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश आने वाले वर्षों में रूस के साथ युद्ध की तैयारी की बात कर रहे हैं। उन्होंने बाल्टिक सागर में सैन्य अभ्यास और रूसी जहाजों को जब्त करने का भी जिक्र किया। उनका बयान मॉस्को की उस चेतावनी के बाद आया, जिसमें नाटो से कहा गया था कि कैलिनिनग्राद की रक्षा के लिए रूस परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। दावा- NATO कैलिनिनग्राद की नाकाबंदी करने की तैयारी कर रहा है यूरोप में रूस के कई दूतावासों ने इस हफ्ते बयान जारी किए। इनमें कहा गया कि मॉस्को के पास जानकारी है कि नाटो कैलिनिनग्राद और पूरे क्षेत्र की हवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की तैयारी कर रहा है। रूस ने यूरोपीय नेताओं पर खतरनाक खेल खेलने का आरोप लगाया। रूस का कहना है कि यूरोपीय नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मॉस्को किसी दूसरे देश पर हमला कर सकता है या ड्रोन और तोड़फोड़ के जरिए दूसरे देशों में अस्थिरता फैला सकता है। रूस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… पुतिन बोले-मोदी दोस्त, फिर भी जंग रोकने को कहते हैं: उनके पास अच्छे सुझाव; PM 5 मौकों पर यूक्रेन जंग का मुद्दा उठा चुके रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात उठाते हैं। वह हर मुलाकात में युद्ध रोकने और शांति का रास्ता निकालने पर बात करते हैं। पूरी खबर पढ़ें…