रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। लुहांस्क: करीब 99.8% हिस्से पर रूस का नियंत्रण डोनेत्स्क: करीब 80% हिस्से पर रूस का नियंत्रण पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। पांच साल की जंग के बाद लोगों की नाराजगी बढ़ी द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों में अब यह सवाल उठने लगा है कि करीब पांच साल तक युद्ध लड़ने के बाद आखिर देश ने हासिल क्या किया। चिंता सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध के नतीजे की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे इस युद्ध की कीमत को लेकर भी है। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” यानी सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं हैं और लोगों को दिखाई देने लगी हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रूस की राजनीति में हिंसा को सहन किया जा सकता है, नाकामी को नहीं। ऐसे में पुतिन को कथित तौर पर डर है कि अगर डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना जंग खत्म हुई तो उन्हें सत्ता से हटा दिया जाएगा।

पुतिन, भारत-चीन के साथ मिलकर बनाना चाहते हैं ‘SCO बैंक’, जिस पर नहीं चलेगा अमेरिका का कोई दांव! जानिए ये पूरी प्लानिंग

Putin SCO Development Bank Proposal: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से एक नया ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’ बनाने का आह्वान किया है। पुतिन का मानना है कि यह बैंक पश्चिमी देशों और अमेरिका के प्रभुत्व वाले वित्तीय तंत्र से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करेगा, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी देश आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ‘हथियार’ के रूप में करते हैं।

किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित 2026 के SCO शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि प्रस्तावित विकास बैंक को उन देशों के वित्तीय ढांचे से जितना संभव हो सके स्वतंत्र रखा जाना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों में एकतरफा फायदा उठाने के लिए आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं।

क्या है ‘SCO डेवलपमेंट बैंक’?

डेवलपमेंट बैंक या विकास बैंक ऐसी वित्तीय संस्थाएं होती हैं, जो सदस्य देशों में ऊर्जा, परिवहन, बुनियादी ढांचे और सीमा पार परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फंडिंग प्रदान करती हैं। पुतिन के अनुसार, यह बैंक सदस्य देशों के बीच बड़े आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बिना किसी पश्चिमी रुकावट के फाइनेंस करने का काम करेगा।

यह बैंक SCO बिजनेस काउंसिल और इंटरबैंक एसोसिएशन की तरह सदस्य राष्ट्रों के आपसी व्यापारिक और व्यावसायिक रिश्तों को एक नया आयाम देगा।

डॉलर के दबदबे को खत्म करने और सैंक्शंस से बचने की कोशिश

यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और ईरान जैसे देश भारी पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। यही वजह है कि मॉस्को अब अमेरिकी डॉलर और SWIFT जैसे पश्चिमी वित्तीय तंत्र पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है।

98% व्यापार स्थानीय मुद्राओं में: पुतिन ने खुलासा किया कि पिछले साल SCO देशों के साथ रूस का व्यापार $400 अरब से अधिक रहा। सबसे खास बात यह है कि रूस और SCO देशों के बीच 98% से अधिक लेनदेन अब उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।

वैकल्पिक भुगतान प्रणाली: प्रस्तावित बैंक SCO के भीतर एक वैकल्पिक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है, ताकि पश्चिमी पाबंदियों का इन देशों के व्यापार पर कोई असर न पड़े।

SCO का बढ़ता दायरा और ‘मल्टीपोलर वर्ल्ड’

2001 में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा स्थापित SCO का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से हुआ है। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसमें शामिल हुए, जबकि ईरान 2023 में इसका पूर्ण सदस्य बना।

पुतिन ने SCO को उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया का एक अत्यंत प्रभावशाली केंद्र बताया और कहा कि इस ब्लॉक का मजबूत होना सभी सदस्य देशों की आर्थिक समृद्धि के लिए जरूरी है।

SCO बैंक को लेकर भारत-चीन की ये है रणनीतिक चुनौतियां

चीन द्वारा समर्थन दिए जाने के बावजूद प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक को जमीन पर उतारना बेहद जटिल है, क्योंकि भारत और चीन जैसे देशों के प्रमुख वित्तीय संस्थान और कॉर्पोरेट्स वैश्विक अर्थव्यवस्था और पश्चिमी बैंकिंग प्रणाली से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी सेकंडरी सैंक्शंस का खतरा बना रहता है, जिससे बचने के लिए दोनों देशों के बैंक बेहद सतर्क रुख अपनाते हैं।

इसके अलावा, भारत का हमेशा से यह स्पष्ट और संतुलित रुख रहा है कि SCO को किसी भी स्थिति में पश्चिमी-विरोधी मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो इस बैंक को पूरी तरह से पश्चिमी वित्तीय तंत्र से काटने के बजाय केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था तक सीमित रखता है।

भारत के लिए यह बैंक पश्चिमी वित्तीय तंत्र को पूरी तरह से नकारने के बजाय आपसी व्यापार और परियोजनाओं को बिना किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी के सुचारू रूप से चलाने का एक अतिरिक्त वित्तीय चैनल बन सकता है।

आतंकी पम्मा की गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी:तूने 40 गोलियां चलाईं, हम 4 हजार चलाएंगे, मार-मार के छन्नी बना देंगे; ऑडियो लीक से गुस्साया

ब्रिटेन(UK) में बैठे खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी दी है। पम्मा ने कहा कि बहाने से बात कर गोल्डी ने कॉल रिकॉर्डिंग लीक कर दी। कनाडा में हरदीप निज्जर को मरवाकर अच्छा नहीं किया। गोल्डी बराड़ एजेंसियों का बंदा है। पम्मा ने कहा कि गोल्डी बराड़ ने 40 गोलियों की बात की है, हम 4 हजार चलाएंगे और तेरे पूरे शरीर को छन्नी बना देंगे। तुझे निज्जर के कत्ल का हिसाब चुकाना पड़ेगा। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने लॉरेंस के साथ मिलकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का कत्ल कराया था। वहीं परमजीत सिंह पम्मा को जुलाई 2020 में भारतीय गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत आतंकी घोषित किया है। वह NIA की मोस्ट वांटेड सूची में है। NIA के अनुसार उसका संबंध Khalistan Tiger Force (KTF) से रहा है। हरदीप निज्जर भी इसी संगठन से जुड़ा था। इससे पहले सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू भी गोल्डी बराड़ को धमका चुका है। पन्नू ने बदला लेने की धमकी देते हुए कहा था कि गोल्डी FBI, कनाडाई या अमेरिकी अदालतों से बच सकता है लेकिन ‘खालसा न्याय’ से नहीं बच पाएगा। आतंकी पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के लिए क्या-क्या कहा… जिस रिकॉर्डिंग पर पम्मा भड़का, उसमें गोल्डी बराड़ ने क्या कहा था
जिस रिकॉर्डिंग को लेकर पम्मा ने बयान जारी किया, उसमें गोल्डी बराड़ ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। बराड़ ने उसे ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई। उसने दावा किया कि निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन देता था, जो युवाओं को ड्रग्स के कारोबार में धकेलते और उन्हें ब्लैकमेल कर मुखबिर के तौर पर इस्तेमाल करते थे। बराड़ ने निज्जर पर हथियारों की तस्करी से जुड़े लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। बातचीत में उसने कहा कि इन्हीं वजहों से उसकी टीम ने निज्जर को निशाना बनाया। ************ ये खबरें भी पढ़ें: निज्जर हत्याकांड में 2 पंजाबी गैंगस्टर आमने-सामने: अर्श डल्ला बोला- गोल्डी बराड़ का दावा झूठा, इसने सिद्धू मूसेवाला को झूठ बोलकर मारा गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बोला- हरदीप निज्जर को मैंने मरवाया:मेरे भाइयों को मरवाने वाले इसकी कोठी में रहते थे; पहले भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगे थे आतंकी की गोल्डी बराड़ को धमकी- गोली माथे पर लगेगी:कनाडा-अमेरिका की अदालतों से बचोगे, खालसाई इंसाफ से नहीं; निज्जर हत्याकांड पर आमने-सामने

यूक्रेन- घरों के बीच छिपे हथियार डिपो पर रूसी हमला:गोला-बारूद, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटे, 37 की मौत, 130 घरों को नुकसान

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के पास शनिवार को एक हथियार डिपो पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद डिपो में रखे गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटने लगे। धमाकों से आसपास के घरों और दूसरी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 37 लोगों की मौत हुई है, जबकि 130 घरों को नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार देर रात हुए इस हमले के बाद शनिवार को भी घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम जारी रहा। धमाकों में 42 लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार बच्चे भी शामिल हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हथियारों का यह भंडार रिहायशी इलाके के इतने करीब नहीं होना चाहिए था। हादसे से जुड़ी 3 फोटोज कीव के पास मिला गांव में था हथियार डिपो रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने कीव के पश्चिम में स्थित मिला गांव में एक हथियार डिपो को निशाना बनाया था। रूस के मुताबिक, यहां FP-1 और FP-2 लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन के पुर्जे और उन्हें लॉन्च करने वाले बूस्टर रखे गए थे। धमाकों से गांव के करीब 130 घर तबाह हो गए। 45 साल के स्थानीय निवासी ल्यूबोव पावलेंको का घर हथियार डिपो से करीब 200 मीटर दूर है। उन्होंने अपने घर का नुकसान दिखाते हुए बताया कि पूरी बाहरी दीवारों पर दरारें पड़ गई हैं और खिड़कियों के आसपास भी दरारें हैं। जेलेंस्की बोले- हथियार डिपो यहां नहीं होना चाहिए था जेलेंस्की ने मिला गांव में हथियार रखने के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों के इतने करीब विस्फोटक सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। हम पता कर रहे हैं कि रिहायशी इमारतों के पास हथियार और विस्फोटक रखने की अनुमति देना कानूनी था या नहीं। जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी देखी जाएगी, जिन्होंने हथियारों की तैनाती और रख-रखाव से जुड़े फैसले लिए थे। PM बोले- 5 साल बाद भी वही गलतियां दोहराई जा रही पिछले महीने जुलाई में विश्नेवे में भी एक ऐसी घटना हुई थी। उस धमाके में नौ लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। इस घटना में 280 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा था। उस घटना की जांच में सामने आया था कि एक सरकारी कंपनी ने रिहायशी इमारतों के पास विस्फोटक सामग्री रखने से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया था। यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की ने कहा कि विश्नेवे की घटना से मिली सीख पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जंग के 5 साल हो जाने के बाद भी वही गलतियां बार-बार दोहराना आपराधिक लापरवाही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को, बिना किसी अपवाद के, कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यूक्रेन के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी रूस पिछले कई दिनों से कीव और आसपास के इलाकों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। इसके चलते कीव में एयर रेड सायरन लगातार बज रहे हैं और यूक्रेनी सेना पर एयर डिफेंस का दबाव बढ़ गया है। कई रूसी ड्रोन जेट इंजन से चलते हैं और करीब 400 मील प्रति घंटे यानी 640 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं। यूक्रेन के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की भी भारी कमी है। ये बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम उसकी प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम में शामिल हैं। यूक्रेन में यह आशंका भी है कि लगातार ड्रोन हमलों का मकसद उसकी एयर डिफेंस यूनिट्स को कमजोर करना हो सकता है, ताकि रूस आगे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल हमला कर सके। रूस-यूक्रेन में बढ़े हवाई हमले रूस और यूक्रेन दोनों ने पिछले कुछ महीनों में एक-दूसरे के खिलाफ हवाई हमले तेज किए हैं। यूक्रेन अब रूस के आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन पिछले कई हफ्तों से रूस की बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज से जुड़े ठिकानों पर हमले कर रहा है। यूक्रेन का दावा है कि कंपनी सेना को सामान और उसके कुछ हिस्से उपलब्ध कराती है, जबकि रूस इससे इनकार करता है। रूस में स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में बेलगोरोद और रोस्तोव क्षेत्रों में यूक्रेनी हमलों में दो लोगों की मौत और 25 लोग घायल हुए। वहीं, रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र जापोरिज्जिया के मॉस्को नियुक्त गवर्नर के मुताबिक, एक शॉपिंग सेंटर पर यूक्रेनी हमले में चार लोग घायल हुए। —————————– यह खबर भी पढ़ें… जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से पैट्रियट मिसाइलें मांगी:बोले- यूक्रेन भेजो, गोदामों में न रखो; रूस के हमले में 9 की मौत रूस के ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुरंत पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…

रूसी ड्रोन हमले से कीव के पास एक गोदाम में जोरदार ब्लास्ट, 27 की मौत, दर्जनों घायल

Russia-Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पास एक गोदाम में रूसी ड्रोन हमलों के कारण हुए धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस धमाके से आसपास के इलाके में काफी नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने को लेकर भी काफी सवाल उठ रहे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि धमाके से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी। वहीं, रूस ने कहा कि उसकी सेना ने हथियारों के एक ऐसे गोदाम को निशाना बनाया था, जहां ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण रखे गए थे।

27 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

कीव क्षेत्र के सैन्य प्रशासन के प्रमुख, तिमुर तकाचेंको ने बताया कि इस घटना में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने कहा, “दुर्भाग्य से, अभी तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। और यह संख्या अंतिम नहीं हो सकती है।” उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद दर्जनों लोग घायल भी हुए। बता दें कि यह घटना तब हुई जब रूसी ड्रोन ने कीव के पास एक गोदाम पर हमला किया, जिससे हुए धमाके से उस जगह के आसपास भारी नुकसान हुआ।

जेलेंस्की ने दिए जांच के आदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन ने गोदाम पर हमला किया, जिससे धमाका हुआ। हालांकि, उन्होंने गोदाम की जगह के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।

उन्होंने रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा, “गोला-बारूद को घरों या दूसरे रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता।”

उम्मीद है कि जांच में धमाके से जुड़ी परिस्थितियों और उस जगह पर सामान रखने के तरीके की पड़ताल की जाएगी।

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फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी इतनी नहीं घटी है कि फेड निश्चिंत हो सके। जब तक महंगाई के 2% लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का भरोसा नहीं होता, तब तक फेड को काम करना होगा।

यह मई में फेड चेयर बनने के बाद वार्श का पहला बड़ा भाषण था। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में जैक्सन होल में फेड के सालाना सम्मेलन में यह बात कही। वार्श ने कहा कि 2% का महंगाई लक्ष्य तय है। फेड इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। उनके मुताबिक, कीमतों में स्थिरता लाना फेड की जिम्मेदारी है।

महंगाई में अभी बड़ा सुधार नहीं

वार्श ने कहा कि गर्मियों में PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल स्थिति में बड़ा सुधार आ गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी 2% से ऊपर है। इसलिए फिलहाल फेड का मुख्य फोकस कीमतों पर होना चाहिए।

ब्याज दर है फेड का बड़ा हथियार

वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय स्थितियां अभी बहुत सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दर फेड का सबसे अहम हथियार है। उन्होंने कहा कि महंगाई अपने आप 2% तक नहीं आएगी। इसे स्थिर करना फेड की जिम्मेदारी है।

ब्याज दर बढ़ाने पर बंटी राय

अब बड़ा सवाल ब्याज दरों को लेकर है। अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आने वाले महीनों में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड को नीति और सख्त करनी पड़ सकती है।

पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुई थी आलोचना

जुलाई की बैठक के बाद वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना भी हुई थी। आलोचकों का कहना था कि वह दरें स्थिर रखने की वजह साफ तरीके से नहीं बता पाए।

उसके बाद निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड बेचने शुरू किए। इससे उनकी यील्ड करीब दो दशक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे में कमी के संकेत के तौर पर देखा गया।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत

हालांकि, जुलाई की बैठक के बाद कुछ आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिले हैं। जुलाई में रिटेल बिक्री एक साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा गिरी। कोर महंगाई भी सीमित रही। कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियां घटाईं। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी कटौती की गई।

इन आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हुई है। शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह 70% से ज्यादा थी।

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? जानिए वक्त के साथ तस्वीर कैसे बदली

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कंधे पर रखकर दागो और दुश्मन खत्म! भारत आ रही है दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-टैंक मिसाइल Javelin, जानिए इसमें क्या है खास

भारत अपनी मिलिट्री ताकत और डिफेंस कैपिसिटी को और अधिक मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत जल्द ही अमेरिका में बनी हुई दुनिया की सबसे खतरनाक और मॉडर्न एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम जैवेलिन (Javelin) को खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित सौदे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह योजना भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। यह सौदा न सिर्फ भारतीय सेना की इंफेंट्री की मारक क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि दोनों देशों के बीच डिफेंस इंडस्ट्रियल को-प्रोडक्शन के नए दरवाजे भी खोलेगा।

$4.57 करोड़ का सौदा: पैकेज में 100 मिसाइल राउंड और 25 लॉन्च यूनिट्स शामिल

हमारी सहयोगी वेबसाइट सीएनबीसी टीवी 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और भारत के बीच इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत को जैवेलिन मिसाइल प्रणाली और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्तावित रक्षा सौदे का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 4.57 करोड़ डॉलर है।

इस सौदे में शामिल पैकेज के तहत भारत को 100 एफजीएम-148 जैवेलिन मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 जैवेलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स या ब्लॉक 1 कमांड लॉन्च यूनिट्स मिलेंगी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे के मुताबिक इस शुरुआती खरीद के बाद भविष्य में भारत और अमेरिका दोनों देशों में इस घातक मिसाइल प्रणाली के को-प्रोडक्शन की संभावनाओं पर भी काम कर सकते हैं। इससे भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी बल मिलेगा।

क्या है दागो और भूल जाओ तकनीक? जानिए जैवेलिन मिसाइल की खासियतें

जैवेलिन दुनिया की सबसे भरोसेमंद और घातक मध्यम दूरी की, कंधे से रखकर दागी जाने वाली एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से पैदल सेना, स्काउट्स और कॉम्बैट इंजीनियर्स के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फायर एंड फॉरगेट यानी दागो और भूल जाओ तकनीक पर काम करती है। इसका मतलब है कि एक बार जब सैनिक मिसाइल को अपने लक्ष्य पर लॉक करके दाग देता है तो मिसाइल खुद-ब-खुद अपने टारगेट को ढूंढकर उसे तबाह कर देती है और सैनिक को तुरंत अपनी लोकेशन बदलने का समय मिल जाता है।

यह मिसाइल दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों और बंकरों को आसानी से नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। कंधे से दागे जाने के अलावा इस आधुनिक सिस्टम को जरूरत के मुताबिक सैन्य वाहनों, विमानों और पानी के जहाजों और नौकाओं पर भी तैनात और माउंट किया जा सकता है।

किन कंपनियों ने बनाया है यह सिस्टम और भारत के लिए क्यों है अहम

जैवेलिन मिसाइल सिस्टम को जैवेलिन जॉइंट वेंचर ने बनाया है। ये अमेरिका की दो प्रमुख रक्षा क्षेत्र की दिग्गजों आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक साझेदारी है। अमेरिका सेना और दुनिया के कई और दूसरे देश लंबे समय से इस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत और अमेरिका जिस तरह से अपने रक्षा-औद्योगिक सहयोग का विस्तार कर रहे हैं, उस दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों और दुर्गम पहाड़ियों पर पैदल सेना को बख्तरबंद खतरों से निपटने के लिए एक त्वरित और अचूक हथियार की जरूरत रहती है। ऐसे में जैवेलिन का भारतीय सेना में शामिल होना न सिर्फ सेना की जमीनी मारक क्षमता में काफी इजाफा करेगा बल्कि भारत-अमेरिका रक्षा रणनीतिक संबंधों को भी एक नया आयाम देगा।

भारत ने जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम के लिए किया करार,खुलेगा डिफेंस सेक्टर में को-प्रोडक्शन का रास्ता

अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय सेना ने अमेरिका की फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में बनी जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ़ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर साइन किया है। इस बात की जानकारी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की। उन्होंने भारत के इस फैसले को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम बताया है।

X पर लिखें अपने एक पोस्ट में गोर ने कहा “बड़ी खबर! भारत युद्ध में परखा हुआ जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है।” उन्होंने इसे “अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम” बताया और कहा कि इस घटना से “संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन)की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं।” गोर ने आगे कहा,”दोनों देशों के बीच सहयोग का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर है!”

अमेरिकी दूतावास ने LOA पर हस्ताक्षर किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अहम कदम “अमेरिका और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच मजबूत साझेदारी को दिखाता है और अमेरिका तथा भारत के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सहयोग के रास्ते खोलता है।”

अमेरिकी दूतावास ने कहा कि LOA पर हस्ताक्षर होने से आपसी फायदे वाले को-प्रोडक्शन और भारत तथा अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के मकसद से अन्य मौकों पर बातचीत का रास्ता भी खुलेगा।

LOA पर यह हस्ताक्षर नवंबर 2025 में अमेरिका द्वारा भारत को जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी दिए जाने के बाद हुआ है।

क्या है जैवलिन सिस्टम ?

जैवलिन सिस्टम को ‘जैवलिन जॉइंट वेंचर’ने बनाया है,जो RTX और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक पार्टनरशिप है। यह एक एडवांस्ड,मीडियम-रेंज फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे बख्तरबंद गाड़ियों और मज़बूत ठिकानों समेत कई तरह के टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। फायर-एंड-फॉरगेट खूबी की वजह से मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद ही अपने टारगेट की ओर बढ़ सकती है। इससे ऑपरेटर को मिसाइल को लगातार गाइड करने के बजाय अपनी जगह बदलने या सुरक्षित कवर लेने का मौका मिल जाता है।

जैवलिन की एक बड़ी विशेषता इसकी टॉप-अटैक’क्षमता है,जिससे मिसाइल बख्तरबंद गाड़ी पर ऊपर से हमला कर सकती है। जहां आमतौर पर आर्मर प्रोटेक्शन कमजोर होता है। इस सिस्टम का इस्तेमाल कुछ खास लक्ष्यों के खिलाफ सीधे हमले में भी किया जा सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल अमेरिकी सेना,अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई दूसरे देशों की सेनाएं भी करती हैं।

 

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Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

Defense export : रक्षा मंत्रालय का एक्सपोर्ट के नियमों को आसान करने का फैसला लिया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए SOP ( स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) आसान किया गया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस नियम भी आसान किए गए हैं। अब तीन अलग-अलग ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की जगह एक OGEL होगा। ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की गई है। OGEL का दायरा 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है।

इससे बार-बार एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन की जरूरत घटेगी। इंटरनेशनल टेंडर में एक्सपोर्ट प्रक्रिया आसान होगी। लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनियों को राहत मिलेगी। बता दें किडिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर है। डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड पर है। रक्षा मंत्रालय को भरोसा है कि इस कदम से डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ेंगे।

सरकार ने भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए अपने उत्पाद विदेशों में बेचना आसान बनाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। इसके तहत निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और’ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस'(OGEL) फ्रेमवर्क का दायरा बढ़ाया गया है।

संशोधित डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत,ज्यादातर मामलों में गैर-घातक डिफेंस प्रोडक्ट के निर्यात के लिए अब संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने की जरूरत नहीं होगी,जबकि संवेदनशील देशों के लिए सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। इंटरनेशनल टेंडर और एग्ज़िबिशन के लिए सभी तरह के सामान के एक्सपोर्ट पर कंसल्टेशन की जरूरत भी खत्म कर दी गई है। उम्मीद है कि इस कदम से भारतीय कंपनियों को विदेशों में मिलने वाले मौकों पर तेजी से काम करने और बिना किसी अतिरिक्त कानूनी बाधा के अपने प्रोडक्ट को प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी।

OGEL फ्रेमवर्क में और भी बड़े बदलाव किए गए हैं। OGEL एक स्थायी,एक बार मिलने वाला एक्सपोर्ट ऑथराइज़ेशन होगा। यह एक्सपोर्टर्स को हर शिपमेंट के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय,खास डिफेंस आइटम के कई कंसाइनमेंट के लिए खुद मंजूरी जेनरेट करने की सुविधा देगा। सरकार ने बड़े प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट,पार्ट्स और कंपोनेंट्स और कंपनी के अंदर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन मौजूदा OGEL SOPs को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया है।

खास बात यह है कि OGELकी वैलिडिटी दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। इससे रिन्यूअल और उससे जुड़े कंप्लायंस की बार-बार जरूरत कम हो गई है। इसके दायरे को भी 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है। इसमें सिर्फ वे देश शामिल नहीं है जो नेगेटिव या सेंसिटिव लिस्ट में हैं और जिन पर UN सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रतिबंध या हथियारों की रोक लगा रखी है।

 

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