पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी से दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। इस मुलाकात में दोनों देशों के पुराने रिश्तों की झलक भी दिखी। मोदी ने ‘गुड महाराजा’ का जिक्र किया। यह नाम जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा को दिया गया था, जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के करीब 1,000 बच्चों को भारत में शरण दी थी। भारत बना था 5000 पोलिश बच्चों का दूसरा घर 16 साल बाद भारत आए डोनाल्ड टस्क पोलैंड के प्रधानमंत्री 16 साल बाद भारत दौरे पर आए हैं। इससे पहले 2010 में अपने पहले कार्यकाल में वह भारत आए थे। टस्क के साथ करीब 100 पोलिश कंपनियों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। पोलैंड 2030 तक भारत के साथ सालाना कारोबार दोगुना करना चाहता है। दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे। वहां वे सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों से मुलाकात करेंगे। PM टस्क के भारत दौरे की 4 तस्वीरें… 4 क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर जोर 1. रक्षा क्षेत्र में मिलकर हथियार बनाने की तैयारी पोलैंड भारत के साथ मिलकर हथियार और रक्षा उपकरण बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। दोनों देश रक्षा उपकरणों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनका उत्पादन करने में साथ काम कर सकते हैं। इसके लिए आपसी भरोसा बढ़ाने और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा से जुड़े समझौते करने की जरूरत है। 2. 2030 तक कारोबार दोगुना करने का लक्ष्य पोलैंड 2030 तक भारत के साथ सालाना कारोबार दोगुना करना चाहता है। इसके लिए करीब 100 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। ये कंपनियां भारतीय बाजार में कारोबार और साझेदारी के नए मौके तलाशेंगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता भी दोनों पक्षों के कारोबार को बढ़ाने में मदद कर सकता है। 3. अंतरिक्ष और तकनीक में भी सहयोग भारत और पोलैंड अंतरिक्ष, सूचना तकनीक, डिजिटल तकनीक और बैटरी रिसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम कर सकते हैं। पोलैंड की खाद्य प्रसंस्करण, खनन और मशीनरी के क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ है। टस्क नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच में शामिल होंगे। 23 अक्टूबर को वे बेंगलुरु जाएंगे, जहां तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े लोगों से मुलाकात करेंगे। 4. यूक्रेन में शांति पर भी जोर पोलैंड भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति मानता है। वह यूक्रेन में शांति की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दों पर भी भारत के साथ काम करना चाहता है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… UN रिपोर्ट में दाऊद की डी-कंपनी को भारतीय गिरोह बताया, भारत नाराज
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसमें अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन बताया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Bharat Electronics Share : 22 अक्टूबर को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने इस सरकारी डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी के साथ 770 करोड़ रुपये का एक करा कियाहै। । यह करार ‘इम्प्रूव्ड लो-लेवल लाइटवेट रडार’ (LLLR-I) के लिए है, जो लड़ाकू विमानों के साथ-साथ मिनी और माइक्रो ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम हैं। रक्षा मंत्रालय से यह बड़ी डील मिलने के बावजूद आज यह शेयर दबाव में कारोबार कर रहा है।
फिलहाल 12.45 बजे के आसपास यह शेयर 5.20 रुपए यानी 1.40 फीसदी की कमजोरी के साथ 366 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का लो 361.70 रुपए है। वहीं, इसका दिन का हाई 369.55 रुपए है।
इस करार का मकसद भारतीय सेना के वायु रक्षा नेटवर्क में कम ऊंचाई पर लड़ने के गैप को दूर करना है। रक्षा मंत्रालय (MoD) ने बताया कि LLLR-I प्रणाली लड़ाकू विमान के आकार के लक्ष्यों के साथ-साथ मिनी और माइक्रो ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है। इसमें हवाई टारगेट को पहचानने की अतिरिक्त खूबी भी है। इससे सेना को मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) से होने वाले खतरों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
LLLR-I, ‘अश्लेषा’ रडार का एक अपग्रेडेड वर्ज़न है। इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (LRDE) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण BEL द्वारा किया गया है। जहां ‘अश्लेषा’ एक S-बैंड 3D रडार है जिसमें सेमी-एक्टिव ऐरे एंटीना लगा होता है, वहीं इस अपग्रेडेड सिस्टम में गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित ‘एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे’ (AESA) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें चार फिक्स्ड फेज़्ड-ऐरे पैनल लगे हैं, जो बिना किसी हिलने-डुलने वाले हिस्से के 360 डिग्री कवरेज प्रदान करते हैं।
डिजिटल बीम-फॉर्मिंग और 3D प्रोसेसिंग की मदद से यह राडार, कम राडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) वाले छोटे ड्रोन का पता लगा सकता है। यह स्कैनिंग के दौरान टारगेट को ट्रैक कर सकता है और वायर्ड या वायरलेस लिंक के जरिए हथियार प्रणालियों को डेटा भेज सकता है। यह सिस्टम इतना हल्का है कि इसे इंसान आसानी से उठाकर ले जा सकते हैं और इसे मैदानी इलाकों, रेगिस्तानों तथा अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है।
लो-लेवल रडार एक बड़े एयर डिफेंस नेटवर्क में ‘गैप-फिलर’ (कमी पूरी करने वाले) का काम करते हैं। ये कम ऊंचाई वाले उन इलाकों को कवर करते हैं, जहां लंबी दूरी के रडार, जमीनी बनावट और पृथ्वी की गोलाई के कारण ठीक से काम नहीं कर पाते। इसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ड्रोन करते हैं। सेना को ऐसे रडार की तलाश है जो 0.001 वर्ग मीटर के RCS (रडार क्रॉस सेक्शन) वाले लक्ष्यों का पता लगा सकें जो कि एक माइक्रो ड्रोन के बराबर होता है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसमें अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन बताया गया था। भारत ने बुधवार को कहा कि यह बात गलत है और इससे साबित करती हुई कोई जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई। भारत ने कही कि ऐसी गलतियों से संयुक्त राष्ट्र की छवि को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी पर चीन से पैसे लेने का आरोप यह रिपोर्ट बेन सॉल ने जुलाई 2026 में तैयार की थी। इसे अक्टूबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान पेश किया गया था। बेन सॉल ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर भी सवाल उठे हैं। संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर नजर रखने वाले यूएन वॉच ने मई 2026 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चीन की सरकार ने 2024 में सॉल को 1.5 लाख डॉलर दिए थे। रिपोर्ट में चीन को उनका सबसे बड़ा आर्थिक मददगार बताया गया। भारत बोला- दाऊद 1993 से वांटेड, देश छोड़कर भागा संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक में बुधवार को भारत के प्रतिनिधि रघु पुरी ने यह मुद्दा उठाया। भारत ने रिपोर्ट के उस हिस्से पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2003 में अल-कायदा से संबंधों के कारण भारत में मौजूद डी-कंपनी के सरगना को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था। रघु पुरी ने कहा कि डी-कंपनी को भारत में मौजूद संगठन बताने से लोगों के सामने गलत तस्वीर जाती है। दाऊद इब्राहिम और उसका गिरोह 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले में भारत में वांटेड हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में भी दाऊद से जुड़ी जानकारी दी गई है। पुरी बोले- दाऊद के भारत छोड़ने की बात रिपोर्ट में नहीं पुरी ने कहा कि दाऊद 2003 में संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले भारत छोड़ चुका था। इसके बाद विदेश में रहते हुए उसे अल-कायदा और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण सूची में डाला गया था। पुरी के मुताबिक, रिपोर्ट में इस अहम जानकारी का जिक्र नहीं किया गया। ऐसी लापरवाही संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन को नुकसान पहुंचाती है। भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सूची में दाऊद के रहने की जगह के बारे में जो जानकारी दी गई है, वह उस देश की ओर इशारा करती है जहां ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था। यह पाकिस्तान का संदर्भ था। बिन लादेन को 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था। भारत बोला- आतंकवाद को मानवाधिकारों की आड़ में सही नहीं ठहरा सकते रघु पुरी ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश अब मानवाधिकारों और आतंकवाद से निपटने के नियमों का सहारा लेकर अपने कामों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वालों को बचाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेष अधिकारी कई बार गलत जानकारी के आधार पर रिपोर्ट जारी कर देते हैं। इसके बाद भी उनसे जवाब नहीं मांगा जाता। पुरी ने कहा कि इससे सदस्य देशों के सामने मुश्किल खड़ी होती है। गलत जानकारी वाली रिपोर्ट जारी होने के बाद उसे सुधारने की गुंजाइश कम रह जाती है। इससे पहले भी भारत ऐसी रिपोर्टों के फैक्ट्स में गलतियों पर चिंता जता चुका है। ———————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया मिलकर हथियार बनाएंगे: चारों देशों के बीच करार; अब PAK मुस्लिम देशों के साथ साझेदारी बढ़ा रहा पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया अब मिलकर हथियार बनाएंगे। चारों देशों ने बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में बद्र समझौता किया। इसके तहत हथियारों का साझा उत्पादन, सैन्य तकनीक का लेनदेन और रक्षा क्षेत्र में ट्रेनिंग और रिसर्च की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
सऊदी अरब में बुधवार देर रात एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। दम्माम शहर के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक शख्स की जान गई और 8 लोग घायल हुए। वहीं, सऊदी की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको के तेल ठिकाने पर ड्रोन हमले से पाल और फिलीपींस के नागरिकों की मौत हो गई। वहीं भारतीय समेत 2 लोग घायल हुए। लगातार हो रहे हमलों के बीच अमेरिका ने अपने कुछ राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवारों के साथ सऊदी अरब छोड़ने को कहा है। एयरपोर्ट पर हमले के बाद विमानों का रास्ता बदला सऊदी अरब के सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गुरुवार को एयरपोर्ट पर हमले की जानकारी दी। इसमें एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है। दम्माम फारस की खाड़ी के तट पर स्थित है। यह बहरीन और कतर के करीब है। दुनिया भर की उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइटरडार24 ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि हमले के बाद विमानों को दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि उसने देश के पूर्वी इलाके में चार ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। इस महीने सऊदी के एयरपोर्ट पर हुए बड़े हमले हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के बड़े एयरपोर्ट और दूसरी अहम जगहों पर मिसाइलों और अन्य हथियारों से हमले किए हैं। 6 अक्टूबर: जजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। साथ ही दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी एयर डिफेंस ने रोकने का दावा किया। 7 अक्टूबर: रियाद और अभा के एयरपोर्ट पर हमले हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। 8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमला हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई। सरकारी एयरलाइन सऊदिया का एक विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ। 10 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 1 भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक मिसाइल या ड्रोन गिरा। एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। अमेरिका ने हूतियों के हमलो के बीच राजनियकों को वापस बुलाया अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में तैनात राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि मंत्रालय के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों की ओर से नागरिक एयरपोर्ट और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर हो रहे हमलों को कर्मचारियों को हटाने की वजह बताया है। अमेरिकी दूतावास फरवरी के आखिर में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिकी युद्ध के शुरुआती दौर में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद वहां बहुत कम कर्मचारी काम कर रहे थे। हालांकि, हाल के हफ्तों में कुछ राजनयिक फिर से वहां लौटे थे। UAE, जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी लोगों को हटाने की खबरें अमेरिकी राजनयिकों और उनके परिवारों को सऊदी अरब से हटाने के बीच अमेरिकी मीडिया ने UAE, जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुलाने की खबरें दीं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का प्रशासन ईरान पर फिर से हमले शुरू करने की योजनाएं बना रहा है। हालांकि, बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने दूसरे देशों से लोगों को हटाने की खबरों को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश सिर्फ सऊदी अरब के लिए दिया गया है। पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी घटाई जा रही NBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के कई सैन्य ठिकानों पर अपनी मौजूदगी धीरे-धीरे कम कर रही है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता ने कहा कि सैन्यकर्मियों को मिशन की तैयारी बेहतर रखने के लिए नियमित रूप से अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता है। खाड़ी देशों में बढ़ते हमलों और ईरान पर संभावित नई सैन्य कार्रवाई की खबरों के बीच पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- सऊदी क्राउन प्रिंस बंकर वाले महलों में रह रहे: हूती विद्रोहियों के डर से ठिकाना बदल रहे; इस महीने रियाद एयरपोर्ट पर 20 हमले किए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हूती विद्रोहियों के हमले के डर से बंकरों वाले महलों में रहने को मजबूर हैं। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया अब मिलकर हथियार बनाएंगे। चारों देशों ने बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में बद्र समझौता किया। इसके तहत हथियारों का साझा उत्पादन, सैन्य तकनीक का लेनदेन और रक्षा क्षेत्र में ट्रेनिंग और रिसर्च की जाएगी। मक्का पैक्ट के बाद पाकिस्तान की मुस्लिम बहुल देशों के साथ यह बढ़ती साझेदारी क्षेत्र में नए रक्षा समीकरण बना सकती है। इसका मकसद हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता घटाना और अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना है। चारों देशों की अलग-अलग ताकत साथ आई कतर के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का मकसद चारों देशों की हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाना और रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग मजबूत करना है। इसके तहत चारों देश अपने संसाधनों, तकनीक, कामगारों और निवेश का इस्तेमाल एक-दूसरे की मदद के लिए करेंगे। रक्षा उद्योग के जानकार अर्दा मेवलुतोग्लू के मुताबिक, चारों देशों की अपनी-अपनी ताकत है। इन खूबियों को मिलाकर चारों देश हथियारों के उत्पादन और उनकी देखरेख के लिए एक साझा व्यवस्था तैयार कर सकते हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट अल्बर्ट विडाल के मुताबिक, पाकिस्तान और इंडोनेशिया तुर्किये के हथियार खरीदने के साथ उनका कुछ हिस्सा अपने देश में भी बनाना चाहते हैं। इससे तुर्किये की कंपनियों को लंबे समय तक ऑर्डर मिल सकते हैं और उत्पादन की लागत घट सकती है। वहीं, पाकिस्तान और इंडोनेशिया में रोजगार के नए मौके बन सकते हैं। कतर इसमें निवेश के जरिए मदद कर सकता है। पहले से चल रही रक्षा साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा तुर्किये का रक्षा उद्योग दुनिया के विकसित रक्षा उद्योगों में शामिल है। वह पहले से ही कतर, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के साथ अलग-अलग रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। कतर और तुर्किये ने अक्टूबर 2025 में भी रक्षा उद्योग में सहयोग के लिए एक समझौता किया था। पाक-तुर्किये का वॉरशिप प्रोजेक्ट पाकिस्तान और तुर्किये के बीच युद्धपोत बनाने की परियोजना है। इस परियोजना के तहत चार युद्धपोत बनाए जाने हैं। इनमें से दो तुर्किये के इस्तांबुल में और दो पाकिस्तान के कराची शिपयार्ड में बनाए जाने हैं। इससे पाकिस्तान को अपने देश में युद्धपोत बनाने का अनुभव मिलेगा। इंडोनेशिया-तुर्किये के बीच भी समझौते हैं इंडोनेशिया और तुर्किये मिलकर एक टैंक बना रहे हैं। नए समझौते से ऐसी अलग-अलग परियोजनाओं को एक साझा व्यवस्था के तहत लाने में मदद मिल सकती है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्च फेलो बुर्कु ओजसेलिक के मुताबिक, इसका मकसद हर नई रक्षा परियोजना के लिए अलग व्यवस्था बनाने के बजाय मौजूदा समझौतों को एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ना है। कतर पहले से ही तुर्किये में निवेश कर रहा कतर एक दशक से ज्यादा समय से तुर्किये के रक्षा उद्योग में निवेश कर रहा है। वहीं, 2017 में कतर और उसके पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक विवाद के दौरान तुर्किये ने दोहा में अपने सैनिक भेजे थे। अमेरिका पर निर्भरता कम करना भी मकसद एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते की एक बड़ी वजह हथियारों और सैन्य तकनीक के लिए अमेरिका जैसे देशों पर निर्भरता कम करना है। हाल के संघर्षों में सामने आया है कि दूसरे देशों से हथियार खरीदने पर सप्लाई में रुकावट, तकनीक के इस्तेमाल पर पाबंदियों जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अमेरिका के पास हथियारों की कमी की खबरों से भी दूसरे देशों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस हो सकती है। चैथम हाउस के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका कार्यक्रम के एसोसिएट फेलो बदर मूसा अल-सैफ के मुताबिक, खाड़ी देशों का रुख अब एशिया और दूसरे विकासशील देशों की ओर भी बढ़ रहा है। वे मुस्लिम बहुल देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच भी रक्षा समझौता सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत एक देश पर हमला तीनों पर माना जाएगा। हालांकि, तुर्किये के सैनिकों को विदेश में तैनात करने के लिए संसद की अलग से मंजूरी जरूरी होगी। इसलिए बुधवार को इस समझौते को मंजूरी के लिए अपनी संसद में भी पेश किया। मक्का समझौते और दोहा में हुए बद्र करार के बीच एक अहम अंतर है। मक्का समझौता सैन्य सहयोग और सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि बद्र करार का मुख्य जोर हथियार बनाने, तकनीक साझा करने और रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर है।
पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया अब मिलकर हथियार बनाएंगे। चारों देशों ने बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में बद्र समझौता किया। इसके तहत हथियारों का साझा उत्पादन, सैन्य तकनीक का लेनदेन और रक्षा क्षेत्र में ट्रेनिंग और रिसर्च की जाएगी। मक्का पैक्ट के बाद पाकिस्तान की मुस्लिम बहुल देशों के साथ यह बढ़ती साझेदारी क्षेत्र में नए रक्षा समीकरण बना सकती है। इसका मकसद हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता घटाना और अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना है। चारों देशों की अलग-अलग ताकत साथ आई कतर के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का मकसद चारों देशों की हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाना और रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग मजबूत करना है। इसके तहत चारों देश अपने संसाधनों, तकनीक, कामगारों और निवेश का इस्तेमाल एक-दूसरे की मदद के लिए करेंगे। रक्षा उद्योग के जानकार अर्दा मेवलुतोग्लू के मुताबिक, चारों देशों की अपनी-अपनी ताकत है। इन खूबियों को मिलाकर चारों देश हथियारों के उत्पादन और उनकी देखरेख के लिए एक साझा व्यवस्था तैयार कर सकते हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट अल्बर्ट विडाल के मुताबिक, पाकिस्तान और इंडोनेशिया तुर्किये के हथियार खरीदने के साथ उनका कुछ हिस्सा अपने देश में भी बनाना चाहते हैं। इससे तुर्किये की कंपनियों को लंबे समय तक ऑर्डर मिल सकते हैं और उत्पादन की लागत घट सकती है। वहीं, पाकिस्तान और इंडोनेशिया में रोजगार के नए मौके बन सकते हैं। कतर इसमें निवेश के जरिए मदद कर सकता है। पहले से चल रही रक्षा साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा तुर्किये का रक्षा उद्योग दुनिया के विकसित रक्षा उद्योगों में शामिल है। वह पहले से ही कतर, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के साथ अलग-अलग रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। कतर और तुर्किये ने अक्टूबर 2025 में भी रक्षा उद्योग में सहयोग के लिए एक समझौता किया था। पाक-तुर्किये का वॉरशिप प्रोजेक्ट पाकिस्तान और तुर्किये के बीच युद्धपोत बनाने की परियोजना है। इस परियोजना के तहत चार युद्धपोत बनाए जाने हैं। इनमें से दो तुर्किये के इस्तांबुल में और दो पाकिस्तान के कराची शिपयार्ड में बनाए जाने हैं। इससे पाकिस्तान को अपने देश में युद्धपोत बनाने का अनुभव मिलेगा। इंडोनेशिया-तुर्किये के बीच भी समझौते हैं इंडोनेशिया और तुर्किये मिलकर एक टैंक बना रहे हैं। नए समझौते से ऐसी अलग-अलग परियोजनाओं को एक साझा व्यवस्था के तहत लाने में मदद मिल सकती है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्च फेलो बुर्कु ओजसेलिक के मुताबिक, इसका मकसद हर नई रक्षा परियोजना के लिए अलग व्यवस्था बनाने के बजाय मौजूदा समझौतों को एक मजबूत नेटवर्क से जोड़ना है। कतर पहले से ही तुर्किये में निवेश कर रहा कतर एक दशक से ज्यादा समय से तुर्किये के रक्षा उद्योग में निवेश कर रहा है। वहीं, 2017 में कतर और उसके पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक विवाद के दौरान तुर्किये ने दोहा में अपने सैनिक भेजे थे। अमेरिका पर निर्भरता कम करना भी मकसद एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते की एक बड़ी वजह हथियारों और सैन्य तकनीक के लिए अमेरिका जैसे देशों पर निर्भरता कम करना है। हाल के संघर्षों में सामने आया है कि दूसरे देशों से हथियार खरीदने पर सप्लाई में रुकावट, तकनीक के इस्तेमाल पर पाबंदियों जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अमेरिका के पास हथियारों की कमी की खबरों से भी दूसरे देशों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस हो सकती है। चैथम हाउस के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका कार्यक्रम के एसोसिएट फेलो बदर मूसा अल-सैफ के मुताबिक, खाड़ी देशों का रुख अब एशिया और दूसरे विकासशील देशों की ओर भी बढ़ रहा है। वे मुस्लिम बहुल देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच भी रक्षा समझौता सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत एक देश पर हमला तीनों पर माना जाएगा। हालांकि, तुर्किये के सैनिकों को विदेश में तैनात करने के लिए संसद की अलग से मंजूरी जरूरी होगी। इसलिए बुधवार को इस समझौते को मंजूरी के लिए अपनी संसद में भी पेश किया। मक्का समझौते और दोहा में हुए बद्र करार के बीच एक अहम अंतर है। मक्का समझौता सैन्य सहयोग और सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि बद्र करार का मुख्य जोर हथियार बनाने, तकनीक साझा करने और रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान छोड़ यूरोपीय देशों में बस रहे बड़े अफसर:रक्षा मंत्री बोले- नौकरी में रहते ही भागने का प्लान बना रहे; पुर्तगाल पसंदीदा ठिकाना बना पाकिस्तान के कई बड़े सरकारी अधिकारियों ने विदेशों में घर बसा लिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों ने नौकरी में रहते हुए ही यह प्लान बना लिया था। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान के कई बड़े सरकारी अधिकारियों ने विदेशों में घर बसा लिया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों ने नौकरी में रहते हुए ही यह प्लान बना लिया था। उनके मुताबिक, इन अधिकारियों ने कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के दूसरे देशों में स्थायी रूप से बसने की तैयारी की थी। पिछले कुछ सालों में पुर्तगाल ऐसे अधिकारियों के लिए पसंदीदा ठिकाना बनकर उभरा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आसिफ ने कहा कि विदेश में बसने की योजना बनाने वाले कई अधिकारी सरकार में अहम पदों पर रह चुके हैं। पुर्तगाल में बसाने के नाम पर पाकिस्तानी अफसरों से ठगी ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति पाकिस्तानी सरकारी अधिकारियों को पुर्तगाल में स्थायी निवास (PR) दिलाने में मदद करने का दावा कर रहा था। उसने कई प्रभावशाली अधिकारियों से बड़ी रकम वसूली और फिर फरार हो गया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, इस मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, वे अलग-अलग सरकारों में अहम पदों पर रह चुके हैं और प्रभावशाली लोगों से उनके करीबी संबंध रहे हैं। हालांकि, आसिफ ने न तो अधिकारियों के नाम बताए और न ही ठगी की रकम का खुलासा किया। आसिफ ने अधिकारियों की वफादारी पर सवाल उठाए आसिफ ने सवाल उठाया कि सरकारी पदों पर रहते हुए सुविधाएं और सम्मान पाने वाले अधिकारी पाकिस्तान के प्रति कितने वफादार रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को राजनीतिक नेताओं की नजदीकी के कारण वैध और अवैध तरीकों से संपत्ति जुटाने के मौके भी मिले। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे अधिकारी पाकिस्तान को अपना स्थायी घर मानते हैं या फिर विदेश जाने से पहले इसे केवल एक पड़ाव समझते हैं। पूर्व भारतीय सुरक्षा सलाहकार ने भी चिंता जताई पाकिस्तान मामलों के एक्सपर्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य तिलक देवशर ने भी आसिफ के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान में कुछ गंभीर रूप से गलत हो रहा है। देवशर ने रक्षा मंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों ने नौकरी में रहते हुए ही विदेश जाने की तैयारी कर ली थी। उन्होंने पुर्तगाल को पाकिस्तानी नौकरशाहों के विदेश जाने का नया पसंदीदा ठिकाना बताया। —————– ये खबर भी पढ़ें… भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री का पाकिस्तान पर बयान:कहा- वह परमाणु ताकत, उससे बातचीत जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि उससे बातचीत जरूरी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

होर्मुज जलडमरूमध्य, समुद्री सुरक्षा और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने बुधवार को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ किया है कि देश पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले का उसी ताकत से या उससे भी ज्यादा आक्रामक जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ किसी शांति समझौते पर पहुंचने की संभावनाओं को बेहद कठिन बताया है। श्री रुबियो ने ईरान के साथ कूटनीतिक सहमति बनाने में आ रही जटिलताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि शांति समझौते की राह बहुत मुश्किलों से भरी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं करता, तब तक अमेरिका उस पर आर्थिक प्रतिबंध और दबाव जारी रखेगा। अमेरिका की मुख्य मांग यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और ईरान परमाणु हथियार न बनाने की पक्की गारंटी दे।
वहीं, ईरान ने फिर दोहराया है कि किसी भी नए सैन्य दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में एक व्यापक सैन्य संघर्ष छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों में आग लग गई। ये टैंकर ईरानी सेना की बिछाई गई समुद्री सुरंगों की चपेट में आ गए थे।
आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘सिपाह न्यूज’ के मुताबिक, इन जहाजों ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने के लिए ईरान के प्रतिबंधित या ‘गैर-कानूनी’ घोषित रास्ते का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि सुरंगों से भरे इस जलमार्ग में उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, जिसमें उनके जहाजों की तबाही भी शामिल है। इस घटना से जुड़े दावों की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
आईआरजीसी ने यह दावा भी किया है कि ईरानी वायु रक्षा तंत्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है और उसकी सेनाएं इस जलमार्ग की कड़ी निगरानी जारी रखेंगी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बघाई ने कहा है कि ईरान किसी भी सैन्य हमले को बिना जवाब दिए बर्दाश्त नहीं करेगा। तेहरान में संवाददाताओं से बात करते हुए श्री बघाई ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया कि ईरान अमेरिकी कार्रवाई पर चुप रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘हमला करो और भाग जाओ’ का दौर अब खत्म हो चुका है।
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श्री बघाई ने सोशल मीडिया पर चल रही उन सूचनाओं को भी बेबुनियाद बताया, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ने ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर हमला करने के अपने इरादे से ईरान को अवगत कराया है। इस स्थान को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा माना जाता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका इस ठिकाने को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट किया है कि वे आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। इसके जवाब में ईरान का रुख कायम है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
दोनों देशों के बीच का यह ताजा टकराव अब मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर आकर टिक गया है, जो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। हमलों की धमकियों के बीच ईरान ने इस जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर काफी हद तक रोक लगा दी है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है। ईरान ने साफ कह दिया है कि जब तक अमेरिका अपना रुख बदलकर युद्ध खत्म करने और नुकसान के मुआवजे समेत उसकी मांगें पूरी नहीं करता, तब तक यह जलमार्ग नहीं खोला जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान और कतर जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से अप्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत जारी है। इसके बावजूद, समुद्री सुरक्षा, सैन्य अभियानों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मूलभूत मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख में काफी बड़ा फासला बना हुआ है।
एक तरफ अमेरिका के कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव और दूसरी तरफ ईरान की जवाबी धमकियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्रीय सुरक्षा व वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बेहद संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण फिलहाल बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण हल की संभावनाएं अनिश्चित दिखाई दे रही हैं।
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अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले में पकड़े गए तीन प्रमुख आरोपियों को बुधवार तड़के राजस्थान के कोटा से मुंबई लाया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस तीनों आरोपियों को सड़क मार्ग से कोटा से मुंबई लेकर आई और यहां पहुंचते ही अनिवार्य चिकित्सकीय जांच के लिए उन्हें जीटी अस्पताल ले जाया गया।
आरोपियों को चिकित्सकीय जांच के बाद पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के जबरन वसूली रोधी प्रकोष्ठ (एईसी) के कार्यालय ले जाया गया।
अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी रेहान उर्फ सुक्का, मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले और वर्तमान में मुंबई में रह रहे ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन तथा हरियाणा निवासी फूल सिंह के रूप में हुई है।
कोटा शहर की पुलिस ने तीनों आरोपियों को मुंबई पुलिस को सौंप दिया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया और वहां एक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। अदालत ने आरोपियों को मुंबई ले जाने के लिए ‘ट्रांजिट रिमांड’ की मंजूरी दे दी।
इस बीच, अधिवक्ता अजिंक्य मिरगल बुधवार सुबह मुंबई में एईसी के कार्यालय पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वह इस मामले में आरोपियों की ओर से पैरवी करेंगे।
मुंबई के जुहू इलाके में कम से कम दो लोगों ने श्रॉफ की कार पर रविवार शाम गोलियां चलाई थीं और वे फिर मोटरसाइकिल से फरार हो गए थे। इस हमले में अभिनेता को कोई गंभीर चोट नहीं आई लेकिन उनका वाहन चालक और घटनास्थल के पास मौजूद एक व्यक्ति घायल हो गए थे।
मुंबई पुलिस के अनुसार, कार पर पांच-छह गोलियां चलाई गईं। हमलावरों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल अंधेरी में लावारिस हालत में मिली थी।
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आरोपी वारदात के बाद सूरत भाग गए थे और वहां से जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे। तीनों की योजना बस से दिल्ली जाने और फिर नेपाल भागने की थी। मुंबई पुलिस ने हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, रेहान लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के कथित सहयोगी अनिल पंडित के संपर्क में था। इस गिरोह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर हमले की जिम्मेदारी ली है। हालांकि, इस पोस्ट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले, दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने मंगलवार को गोलीबारी के मामले में दो महिलाओं समेत चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।
एक अधिकारी ने पहले बताया था कि पुलिस को संदेह है कि ये आरोपी विदेश से आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे गैंगस्टर अनिल पंडित के निर्देश पर काम कर रहे थे।
इन चार आरोपियों की पहचान कुणाल (21), सुमित (19), राधा (23) और बबीता (23) के रूप में हुई है। इन्हें दिल्ली और हरियाणा से पकड़ा गया था।
पुलिस के अनुसार, कुणाल ने अनिल पंडित के निर्देश पर अमृतसर से कथित तौर पर एक पिस्तौल और 20 कारतूस लिए थे। इस दौरान सुमित भी उसके साथ था। राधा और बबीता कथित तौर पर हथियार लेकर मुंबई गई थीं।
पुलिस ने बताया कि गोलीबारी के पीछे के मकसद का पता लगाया जा रहा है। हालांकि, जिस तरह से श्रॉफ पर हमला किया गया, उससे पता चलता है कि हमलावरों की साजिश उनकी हत्या करने की थी।
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छत्तीसगढ़ में दशहरे के मौके पर IPS अधिकारी अंकिता शर्मा का एक अलग अंदाज देखने को मिला। पारंपरिक साड़ी पहने अंकिता शर्मा ने शस्त्र पूजा के बाद AK-47 राइफल से फायरिंग की। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कोई उनके आत्मविश्वास की तारीफ कर रहा है, तो कोई उनकी वर्दी के पीछे छिपे साहस और मेहनत की कहानी जानना चाहता है।
लेकिन अंकिता शर्मा की पहचान सिर्फ इस वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। UPSC की परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करने से लेकर चुनौतीपूर्ण इलाकों में पुलिसिंग करने तक, उनका सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा है।
दशहरे पर शस्त्र पूजा के बाद चलाई AK-47
विजयादशमी के दिन राजनांदगांव पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान राजनांदगांव की SP अंकिता शर्मा ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा की और फिर AK-47 राइफल से फायरिंग की। इस दौरान उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी, जिसने लोगों का खास ध्यान खींचा।
उनका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने उनके आत्मविश्वास और साहसी अंदाज की तारीफ की। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के लिए हथियारों का प्रशिक्षण, सुरक्षा नियमों का पालन और पेशेवर दक्षता उनकी जिम्मेदारियों का अहम हिस्सा है।
कौन हैं IPS अंकिता शर्मा?
अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की IPS अधिकारी हैं। सख्त पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को लेकर अपने काम के कारण उन्हें पहचान मिली है। उनके काम करने के अंदाज की वजह से उन्हें ‘लेडी सिंघम’ भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ के चुनौतीपूर्ण और नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी तैनाती रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपराधियों और नक्सलियों के खिलाफ कई अभियानों में भी भूमिका निभाई है। उनके प्रशासनिक फैसलों और जनता से जुड़ाव ने उनकी पहचान को और मजबूत किया।
तीसरे प्रयास में पास की UPSC परीक्षा
अंकिता शर्मा का जन्म 25 जून 1990 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुआ था। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया रैंक 203 हासिल की थी। यह सफलता उन्हें तीसरे प्रयास में मिली।
पहले प्रयास में वह मुख्य परीक्षा तक पहुंचीं, जबकि दूसरे प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।
During the Shastra Puja event on Vijayadashami, SP Ankita Sharma of Rajnandgaon, Chhattisgarh, handled an AK-47 rifle and performed aerial firing with it. https://t.co/NrXtosmUuG
— Treeni (@treeni) October 20, 2026
खैरागढ़ की पहली महिला SP बनने का मिला मौका
अंकिता शर्मा की पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के भाटापारा में हुई थी। इसके बाद उन्होंने रायपुर के आजाद चौक में CSP के रूप में भी काम किया। मई 2022 में उन्हें खैरागढ़ का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया। इस पद पर पहुंचकर वह जिले की पहली महिला SP बनीं।
फिलहाल वह राजनांदगांव जिले की SP हैं। उनकी कहानी बताती है कि किसी अधिकारी की पहचान सिर्फ उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, फैसलों और जिम्मेदारियों को निभाने के तरीके से भी बनती है। दशहरे पर वायरल हुआ उनका वीडियो इसी वजह से चर्चा में है।

