रूस का परमाणु बम गिराने में सक्षम Tu-95 सैन्य विमान मंगलवार को ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। हादसे में 6 क्रू मेंबर मारे गए और एक घायल हुआ। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, विमान एक सुनसान इलाके में गिरा। जमीन से टकराते ही विमान का फ्यूल टैंक ब्लास्ट हो गया। घायल क्रू मेंबर को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। विमान में सवार सभी लोग क्रू मेंबर थे। विमान में कोई हथियार नहीं था रूस की न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, दुर्घटना के समय विमान में कोई परमाणु हथियार या गोला-बारूद लोड नहीं था। Tu-95 सैन्य विमान को सोवियत संघ के समय डिजाइन किया गया था। रूस नियमित सैन्य अभ्यासों में इस विमान का इस्तेमाल करता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
म्यांमार की सेना ने सोमवार को पश्चिमी रखाइन राज्य में एक बाजार के पास एयरस्ट्राइक की। इसमें कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई और 58 लोग घायल हुए हैं। यह इलाका ताकतवर विद्रोही संगठन अराकान आर्मी के कब्जे में है। हमले के वक्त बाजार में दुकानदारों और ग्राहकों की भीड़ थी। अराकान आर्मी ने हमले में लोगों के मारे जाने की जानकारी दी है अराकान आर्मी के मुताबिक, सेना के लड़ाकू विमान ने बाजार के पास दो बम गिराए। घायलों में 22 की हालत गंभीर है। हालांकि, म्यांमार की सेना ने हमले पर कोई बयान नहीं दिया है। अराकान आर्मी ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी अराकान आर्मी ने मंगलवार तड़के जारी बयान में कहा कि वह हमले के लिए जिम्मेदार लोगों और संगठनों के खिलाफ जल्द जवाबी कार्रवाई करेगी। संगठन ने आरोप लगाया कि जानबूझकर किए गए हवाई हमलों में बड़ी संख्या में आम लोगों की जान गई है। म्यांमार की सेना ने हमले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, सेना पहले कहती रही है कि उसके हवाई हमलों का निशाना केवल सैन्य ठिकाने होते हैं। वह सैन्य शासन का विरोध करने वाले संगठनों पर आतंकवाद में शामिल होने का आरोप भी लगाती रही है। 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से संघर्ष जारी म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को सेना ने आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया, जिसके बाद सैन्य शासन के कई विरोधियों ने हथियार उठा लिए। तब से देश के बड़े हिस्से में संघर्ष जारी है। अराकान आर्मी रखाइन के जातीय अल्पसंख्यक समुदाय को अधिक स्वायत्तता दिलाने की मांग करने वाले आंदोलन का सशस्त्र संगठन है। इसने नवंबर 2023 में रखाइन में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद संगठन ने राज्य के 17 में से 14 टाउनशिप और एक अहम क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। सेना की पाबंदियों से खाने-पीने की चीजों की कमी रखाइन में लड़ाई तेज होने के बाद म्यांमार की सेना ने व्यापारिक रास्तों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं। इससे इलाके में खाने-पीने की चीजों की कमी बढ़ गई है। इससे पहले दिसंबर में रखाइन के म्राउक-यू टाउनशिप में एक अस्पताल पर हुए हवाई हमले में कम से कम 34 लोगों की मौत हुई थी और 80 लोग घायल हुए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका चुनाव के बाद ईरान पर हमला कर सकता है:रिजल्ट का इंतजार कर रहे ट्रम्प; उनकी रिपब्लिकन पार्टी हार सकती है अमेरिका ईरान पर एक बार फिर बड़ा हमला कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था।
रूस-यूक्रेन जंग में अब रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभाल रहे हैं। यूक्रेन ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड जमीनी रोबोट का इस्तेमाल कर रूसी सेना पर हमला करने का दावा किया है। यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के तहत रोबोट और ड्रोन की मदद से रूस के करीब 3,000 सैनिकों को मार गिराया गया। साथ ही, पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में 5 गांवों और 3 बस्तियों पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया गया। यूक्रेनी सेना के मुताबिक, यह अभियान मई में शुरू हुआ था और सितंबर के आखिरी सप्ताह में पूरा हुआ। सेना ने गुरुवार को इसकी जानकारी सार्वजनिक की। इस दौरान रोबोट ने 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए। ड्रोन से दुश्मन के इलाके में उतारे रोबोट इस ऑपरेशन में चार पहियों वाले ऐसे रोबोट इस्तेमाल किए गए, जिनमें विस्फोटक भरे थे। बड़े ड्रोन इन्हें रूसी सेना की सीमा के 14.5 किमी अंदर तक ले जाकर छोड़ते थे। इसके बाद ये रोबोट जमीन पर चलते हुए रूसी सैनिकों के ठिकानों तक पहुंचते और हमला करते थे। रोबोट में लगे कैमरों से आसपास के इलाके पर नजर रखी जाती थी। इनकी मदद से रूसी सेना के कमांड सेंटर, सैनिकों के ठिकानों, हथियार और सामान रखने की जगहों और नदी पार करने के रास्तों पर हमले किए गए। इस रणनीति का मकसद यूक्रेनी सैनिकों की जान जोखिम में डाले बिना रूसी ठिकानों पर हमला करना था। थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की ने कहा कि यूक्रेन दुनिया में पहली बार ड्रोन से रोबोट को दुश्मन के इलाके में उतारकर हमला कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘दुश्मन को आसमान से हमले का खतरा रहता है, जमीन से नहीं। रूसी सैनिकों को वहां से हमले का सामना करना पड़ा, जहां उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी।’ कैसे काम करते हैं सुसाइड रोबोट? सुसाइड जमीनी रोबोट छोटे वाहन होते हैं, जो पहियों से चलते हैं। इन्हें दूर बैठकर ऑपरेटर रिमोट से चलाता है। इनमें विस्फोटक भरे होते हैं। ये दुश्मन के सैनिकों या ठिकानों तक पहुंचकर धमाका करते हैं। इन रोबोट की मदद से सैनिकों को बारूदी सुरंगों, गोलियों और दुश्मन के हमलों के बीच सीधे जाने का खतरा कम होता है। ड्रोन इन्हें दुश्मन के इलाके में पहुंचाते हैं और रोबोट में लगे कैमरों से ऑपरेटर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता है। हालांकि, ये रोबोट हर काम अपने आप नहीं करते। इन्हें चलाने और हमले का फैसला लेने में इंसान की भूमिका अहम होती है। रूस और भारत समेत कई देश बना रहे जमीनी रोबॉट यूक्रेन के अलावा रूस, चीन और इजराइल समेत कई देश जंग में इस्तेमाल होने वाले जमीनी रोबॉट बना रहे हैं। रूस इनका इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने जैसे कामों में कर रहा है। ची न ऐसे रोबॉट बना रहा है, जो हथियार ले जाने और मिलकर काम करने में सक्षम हों। वहीं, इजराइल भी रोबॉट से चलने वाले लड़ाकू वाहन विकसित कर रहा है। भारत भी इस तकनीक पर काम कर रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चलने वाले रोबॉट और मानवरहित जमीनी वाहन बना रहा है। भारत में ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक ऐसा वाहन विकसित किया गया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकता है। इसका इस्तेमाल निगरानी करने और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक काम करने में किया जा सकता है।
इजराइल ने शनिवार को हवाई हमले में हमास आतंकी को मार गिराया है। इजराइली सेना (IDF) ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि आतंकी की पहचान साहेर निदाल लत्फी साकर के रूप में हुई है। IDF के मुताबिक, साकर ने 7 अक्टूबर 2023 को नोआ अर्गमानी और उनके साथी अविनातन ओर को नोवा म्यूजिक फेस्टिवल से किडनैप किया था। उसने दोनों को मोटरसाइकिल पर बैठाया और जबरदस्ती गाजा ले गया था। IDF ने बताया कि साकर गाजा में दुनियाभर में सक्रिय जिहादी संगठनों से जुड़ा था। युद्ध के दौरान वह हमास को हथियार पहुंचाता था। इसके अलावा इजराइली सैनिकों और आम नागरिकों पर हमलों की तैयारी में भी उसकी अहम भूमिका थी। म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान हमास ने हमला किया था 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में बॉर्डर एरिया पर एक म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान हमला किया था। इस हमले में करीब 1200 लोग मारे गए थे, जबकि 251 को बंधक बना लिया गया था। यह हमला इजराइल के लिए दशकों में सबसे गंभीर सुरक्षा घटनाओं में से एक था। इसके बाद इजराइल ने गाजा में हमास के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। देखते ही देखते यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया के लिए बड़े संकट में बदल गया। हमास ने इसे ‘अल-अक्सा फ्लड’ ऑपरेशन नाम दिया था। इसके जवाब में इजराइल ने कुछ घंटे बाद हमास के खिलाफ ‘सोर्ड्स ऑफ आयरन’ ऑपरेशन शुरू किया था। 2023 के हमास हमले की तस्वीरें… इजराइली सेना ने 2024 में नोआ का रेस्क्यू किया 25 साल की नोआ अर्गमानी को 8 जून 2024 को इजराइली सेना ने ‘ऑपरेशन अर्नोन’ के तहत गाजा से रेस्क्यू किया था। इस ऑपरेशन में नोआ के अलावा 7 अक्टूबर को किडनैप हुए इजराइली नागरिक आंद्रेई कोज्लोव, अल्मोग मीर जान और श्लोमी जिव को भी छुड़ाया गया था। वहीं, नोआ के साथी अविनातन ओर को अक्टूबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की गाजा डील के तहत रिहा किया गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन का नाम शहीद सैनिक के नाम पर रखा गया ‘ऑपरेशन अर्नोन’ 8 जून 2024 को इजराइली सेना ने गाजा के नुसीरात इलाके में चलाया था। इस ऑपरेशन का मकसद हमास के कब्जे से इजराइली बंधकों को छुड़ाना था। इस बचाव अभियान को अंजाम देने के लिए इजराइली सेना, सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और इजराइली पुलिस की स्पेशल फोर्स यमम ने मिलकर काम किया था। इस ऑपरेशन का नाम यमम के कमांडर अर्नोन जमोरा के नाम पर रखा गया। गाजा में बंधकों को छुड़ाने के दौरान वह हमास की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें हेलिकॉप्टर से इजराइल के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद उनकी मौत हो गई। नोआ के अपहरण में शामिल एक आतंकी पहले भी मारा जा चुका इजराइली सेना के मुताबिक, इससे पहले जुलाई 2026 में भी नोआ और अन्य बंधकों के अपहरण से जुड़े आतंकियों को हवाई हमलों में मार गिराया गया था। इनमें अहमद हुसैन मोहम्मद काफिना भी शामिल था। वह मुजाहिदीन ब्रिगेड का कमांडर था और 7 अक्टूबर के हमले में इजराइल में घुसा था। IDF ने बताया कि काफिना ने नोआ अर्गमानी और अविनातन ओर के अपहरण में भी हिस्सा लिया था। ——————— यह खबर भी पढ़ें… गाजा में 2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी:UN रिपोर्ट- रेप पीड़िताओं की आरोपियों से शादी, बाल विवाह 123% बढ़े संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी 2 बोरी आटे के बदले कर दी। पूरी खबर पढ़ें…

एक जाने माने सामरिक विशेषज्ञ ने भारत को ‘पेरेनियल सॉफ्ट स्टेट’ यानी ‘चिरंतन नरम देश’ कहा है। पंडित नेहरू के समय से भारत को सॉफ्ट स्टेट माना जाता है। भारत की नीतियां कभी भी टकराव और हमले वाली नहीं रही हैं। इसकी जड़ें भारत के सनातन इतिहास में खोजी जाती हैं और बड़े गर्व से कहा जाता है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। लेकिन यह सिर्फ हमले की बात नहीं है। हमला नहीं करने भर से भारत सॉफ्ट स्टेट नहीं है। भारत अपनी विदेश और सामरिक नीतियों के कारण सॉफ्ट स्टेट है। एक बार फिर यह प्रमाणित हुआ है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने आतंकवादियों की मदद करने वाले और उनको ट्रेनिंग देने वाले सात आतंकियों को जेल से छोड़ दिया है।
इनमें एक मैथ्यू वैन डाइक भी है, जो अमेरिकी नागरिक है और लीबिया के गृह युद्ध से लेकर यूक्रेन में चल रही लड़ाई तक में वह भाड़े के सैनिक के रूप में काम करता है। उसके साथ छह और यूक्रेनी नागरिक थे, जिनके साथ वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। पहले भी ये लोग भारत आते थे और पूर्वोत्तर जाकर वहां के रास्ते म्यांमार की सीमा में चले जाते थे, जहां आतंकवादी संगठनों को हथियार चलाने और ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देते थे। इस बार भी ये लोग इसी तरह से म्यांमार गए लेकिन इस बार रूस ने भारत को अलर्ट कर दिया तो इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
लेकिन ये लोग छह महीने भी जेल में नहीं रहे। इनको न सिर्फ जमानत मिल गई, बल्कि अपने देश जाने की इजाजत भी दे दी गई।
सोचें, एनआईए ने इन लोगों के खिलाफ यूएपीए की धाराएं लगाई थीं। यूएपीए में ही अनेक लोग छह साल या उससे ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि ये लोग एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं, जो भारत में ड्रोन सप्लाई कर रहा है और यहां से दूसरे देश में भेज रहा है। लेकिन एक दिन अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने निजी रूप से मैथ्यू वैन डाइक का मुद्दा उठाया और आनन फानन में भारत ने यूएपीए के आरोप ड्रॉप कर दिए और सबको रिहा कर दिया। अब फेस सेविंग के लिए कहा जा रहा है कि उनको एक महीने में भारत लौटना होगा लेकिन सबको हकीकत पता है। भोपाल गैस कांड से लेकर पुरुलिया हथियार कांड और बोफोर्स कांड तक के आरोपियों के भारत से जाने की घटनाएं गवाह हैं कि अपने घरेलू मामलों में भी भारत किस तरह से बाहरी दबाव में झुकता है।
सऊदी अरब ने परमाणु बम बनाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अमेरिकी संसद को दी गई है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि सऊदी ने अभी परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया है। यह रिपोर्ट अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए परमाणु समझौते के बाद सामने आई है। जुलाई में हुए इस समझौते के तहत सऊदी अरब में परमाणु बिजली का ढांचा तैयार किया जाएगा। इजराइल इस समझौते का विरोध कर चुका है। परमाणु बिजली बनाने वाली तकनीक से हथियार का रास्ता खुल सकता है दरअसल परमाणु तकनीक से बिजली बनाने के लिए यूरेनियम को एक खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे यूरेनियम एनरिचमेंट कहते हैं। समझौते के तहत सऊदी अरब यूरेनियम को करीब 20% तक एनरिच कर सकेगा। यह परमाणु बम के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है। समस्या यह है कि एक बार किसी देश के पास यूरेनियम को 20% तक एनरिच करने की क्षमता आ जाए, तो उसे हथियार बनाने लायक स्तर तक जाने में कम समय लग सकता है। इसी वजह से अमेरिकी सांसदों को डर है कि सऊदी अरब भविष्य में परमाणु हथियार बना सकता है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कर चुके हैं हथियार बनाने की बात सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा। अमेरिकी अधिकारी भी लंबे समय से मानते रहे हैं कि सऊदी परमाणु हथियार बनाने में दिलचस्पी रखता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी ने बम बनाने का फैसला कर लिया है। सांसदों का सवाल- सऊदी को अपने देश में एनरिचमेंट फैसेलिटि क्यों चाहिए? अमेरिकी सीनेटर एड मार्की और जेफ मर्कली समेत छह डेमोक्रेट सांसदों ने इस समझौते का विरोध किया है। उनका सवाल है कि अगर सऊदी अरब का मकसद सिर्फ परमाणु बिजली बनाना है, तो वह अपने देश में यूरेनियम एनरिच करने की सुविधा क्यों चाहता है। अमेरिका बोला- समझौता परमाणु हथियार बनाने के लिए नहीं अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि समझौते का मकसद सऊदी अरब में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा विकसित करना है। अमेरिका के मुताबिक, इससे क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी और परमाणु हथियारों को फैलने से रोकने के नियमों का पालन होगा। इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। अमेरिकी संसद के पास समझौते की समीक्षा के लिए 90 दिन हैं अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुआ यह समझौता 30 साल का है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु बिजली से जुड़ा ढांचा तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। अमेरिकी संसद इस समझौते की समीक्षा कर रही है। इसके लिए संसद के पास 90 दिन का समय है। अगर इस दौरान संसद समझौते को रोकने के लिए प्रस्ताव पास नहीं करती, तो यह अपने आप लागू हो सकता है। सऊदी अरब NPT का सदस्य है सऊदी अरब न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) का सदस्य है। इस संधि के तहत सदस्य देश परमाणु हथियार नहीं बनाने और अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखने पर सहमत होते हैं। अगर सऊदी अरब खुलकर परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ता है, तो उसे अमेरिका और यूरोपीय देशों समेत कई देशों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे निवेश, व्यापार और रक्षा सहयोग प्रभावित हो सकता है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… दावा- सऊदी अरब ने यमन में मिसाइल अटैक किया: बाब अल-मंदेब के पास लोकल मार्केट पर हमला यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक गांव के लोकल मार्केट पर मिसाइल अटैक किया। पूरी खबर पढ़ें…

नई दिल्ली। भारत की सीमा पार कर के म्यांमार में आतंकवादियों को हथियार चलाने और ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देने वाले एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को भारत ने छोड़ दिया है। उनको अपने देश जाने की इजाजत दे दी गई है। हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए ने कहा है कि इन सभी लोगों को एक महीने में भारत लौटना होगा। एजेंसी ने यह भी कहा कि जांच चल रही है और अभी इनके भारत में रहने की जरुरत नहीं है।
अमेरिका नागरिक मैथ्यू वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में म्यांमार के ट्रेनिंग कैंप में उग्रवादियों को हथियार और ड्रोन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय खबर आई थी कि ये सभी भारत से मलेशिया भागने वाले थे। इससे पहले कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। यह भी खबर आई थी कि इनके बारे में रूस ने भारत को खबर दी थी और तब गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि विदेशी नागरिकों को परिवार से मिलने देना संवैधानिक अधिकार है। इन्हें जमानती बॉन्ड भरना होगा और एक महीने बाद भारत लौट कर कोर्ट को जानकारी देनी होगी। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के कारण अमेरिकी नागरिक वैन डाइक को राहत मिली और सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया। कांग्रेस ने पूछा कि इन नागरिकों को भारत का वीजा कैसे मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार कैसे पहुंचे?
बहरहाल, एनआईए ने सातों विदेशी नागरिकों अमेरिका के मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेन के हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम व कामिन्स्की विक्टर को मार्च 2026 में रूस से मिली खुफिया सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। आरोपी कई बार ट्रेनिंग देने आ चुके हैं। ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। वे इस बार गुवाहाटी पहुंचे और फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुसे। इतने गंभीर आरोपों के बावजूद इनको छोड़ दिया गया है।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित UP इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के चौथे एडिशन की शुरुआत हो गई है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस ट्रेड शो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, राज्य अब की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। शाह ने आगे कहा कि, उत्तर प्रदेश में तैयार की जा रही ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सैन्य ताकत को मजबूत कर रही है।
पाकिस्तान को नहीं आ रही नींद!
केंद्रीय मंत्री ने भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि, राज्य में बनी ब्रह्मोस मिसाइल अब पाकिस्तान की “रातों की नींद हराम” कर रही है। UP इंटरनेशनल ट्रेड शो में अमित शाह ने कहा कि, उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर से रक्षा क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का कुल डिफेंस प्रोडक्शन अब करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। शाह ने कहा कि इससे देश में ही आधुनिक हथियार तैयार करने और रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिल रही है।
भारत का एक्सपोर्ट अब 56 गुना बढ़ा
शाह ने कहा कि, “साल 2013 के मुकाबले भारत का एक्सपोर्ट अब 56 गुना बढ़ चुका है और इसमें उत्तर प्रदेश की भी अहम भूमिका रही है।” उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार होने से निवेश के लिए माहौल बेहतर हुआ है। शाह ने इसके लिए योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश में तैयार हो रही ब्रह्मोस मिसाइल देश की रक्षा ताकत को मजबूत कर रही है और इससे पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश तेजी से मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है और राज्य ने 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है।
तनाव के बीच भी नहीं रुकी तरक्की
अमित शाह ने कहा कि दुनिया में जारी तनाव और कई चुनौतियों के बीच भी भारत ने अपनी आर्थिक तरक्की को बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि देश में GST कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है। इसके अलावा छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल खर्च किया है। शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश को हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में मजबूत बनाना है और 2047 तक भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करना है।
यहां हर साल बनेंगे करीब 100 ब्रह्मोस मिसाइल
लखनऊ में बनी ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण परियोजना है। पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां तैयार की गई ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच को रवाना किया था। करीब 380 करोड़ रुपये की लागत से 200 एकड़ में तैयार इस केंद्र ने वर्चुअल उद्घाटन के करीब पांच महीने बाद ही काम शुरू कर दिया था। यहां हर साल करीब 100 मिसाइल सिस्टम तैयार किए जाने की उम्मीद है।

