NSE IPO: SEBI से ग्रीन सिग्नल, सितंबर में ही लिस्टिंग; अब तक और क्या चला है पता

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना IPO लाने के लिए के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। लेकिन अब रास्ता साफ है। आइए जानते हैं NSE IPO के बारे में अब तक क्या पता चला है…

साइज और नेचर

NSE IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए शेयर बिक्री से मिला पैसा, OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा।

OFS में कौन बेचेगा शेयर

एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर यानि लगभग 6% हिस्से को बिक्री के लिए रखेंगे। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। SBI अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेच सकती है। एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री कर सकती है।

शेयर बेचने वाले अन्य प्रमुख शेयरधारकों में कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इनवेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।

ओपनिंग और लिस्टिंग की संभावित तारीख

इश्यू के 15 सितंबर को खुलने और 24 या 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है। शेयर BSE पर लिस्ट होंगे।

नए सप्ताह में तय हो सकता है प्राइस बैंड

कहा जा रहा है कि NSE अगले सप्ताह IPO के लिए प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य डिटेल्स की घोषणा कर सकता है।

कैसे होगा देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब NSE का 30,000 करोड़ रुपये का IPO आ रहा है। हालांकि, सबसे बड़े IPO के तमगे को लेकर इसकी टक्कर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड से है। जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है। लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है।

IPOs This Week: 7 सितंबर से शुरू हफ्ते में प्राइमरी मार्केट में सुनामी, खुलेंगे 15 नए इश्यू; साथ में 9 लिस्टिंग

IPO के बाद टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में हो सकती है NSE की एंट्री

यह IPO NSE को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल कर सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IPO से NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर

NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।

IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट

NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE की वित्तीय सेहत

NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock to Buy: यह शेयर आपको कर देगा मालामाल, UBS ने दी है खरीदने की सलाह

आप किसी दमदार शेयर की तलाश में हैं तो आप कोल इंडिया के शेयर में निवेश कर सकते हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है। उसने इस शेयर के लिए 550 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 32 फीसदी से ज्यादा चढ़ सकता है।

HSBC ने शेयर पर दी है होल्ड रेटिंग

एचएसबीसी ने भी कोल इंडिया के शेयरों पर ‘होल्ड’ की रेटिंग दी है। उसने इस शेयर के लिए 440 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि पावर की डिमांड स्ट्रॉन्ग है। उधर, हाइड्रो पावर जेनरेशन कमजोर है। कोयले की इनवेंट्री घटकर तीन साल के निचले स्तर पर आ गई है। कोयले की कीमतें चढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि आगे कोयले की मांग स्ट्रॉन्ग रहेगी।

25 एनालिस्ट्स में से 14 की खरीदने की सलाह

मॉर्गन स्टेनली ने इस शेयर पर ‘इक्वलवेट’ रेटिंग दी है। कोल इंडिया के शेयरों को कवर करने वाले 25 एनालिस्ट्स में से 14 ने इसे खरीदने की सलाह दी है। 6 ने इसे होल्ड करने की सलाह दी है। 5 ने इसे बेचने की सलाह दी है। कोल इंडिया देश की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी है। इसे शेयरों में 2 सितंबर को तेजी दिखी। कारोबार के अंत में शेयर 3.66 फीसदी चढ़कर 416 रुपये पर बंद हुआ।

2 सितंबर को शेयरों में जोरदार तेजी 

कोल इंडिया के शेयरों में ऐसे दिन तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव था। 2 सितंबर को निफ्टी 50 कारोबार खत्म होने पर 0.59 फीसदी यानी 141 अंक गिरकर 23,914 पर आ गया। कई हफ्ते बाद यह 24,000 के नीचे आया है। सेंसेक्स 0.49 फीसदी यानी 373 अंक गिरकर 76,570 पर रहा।

यह भी पढ़ें: Milky Mist Share Price: रॉकेट की तरह भागा शेयर, IPO में निवेश किया होता तो 15 दिन में 78% कमाया होता

81.5 करोड़ टन प्रोडक्शन का टारगेट

अप्रैल से अगस्त के दौरान कोल इंडिया का प्रोडक्शन साल दर साल आधार पर 4.5 फीसदी घटकर 26.75 करोड़ टन रहा। कंपनी ने FY27 के लिए 81.5 करोड़ टन उत्पादन का टारगेट रखा है। बीते एक साल में कोल इंडिया का शेयर 9.52 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव रहा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

इन बैंकों में FD पर मिल रहा 8.5% तक का ब्याज! रिटायरमेंट के बाद 10 लाख फिक्स करने पर समझिए इंट्रेस्ट इनकम का पूरा कैलकुलेशन

Bank FD Rate: रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और रेगुलर इनकम का सोर्स होना काफी जरूरी होता है। यही वजह है कि अधिकांश बुजुर्ग अपनी गाढ़ी कमाई और रिटायरमेंट फंड को सेफ रखने के साथ-साथ बेहतर रिटर्न पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) चुनते हैं। बैंकों के बीच एफडी पर इंट्रेस्ट रेट्स में काफी फर्क देखने को मिलता है। स्मॉल फाइनेंस बैंक की ओर से वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक इंट्रेस्ट रेट ऑफर किया जाता है। इसके अलावा प्राइवेट, पब्लिक और विदेशी बैंक भी सीनियर सिटिजन्स को एफडी पर कॉम्पिटेटिव रिटर्न देते हैं।

सीनियर सिटिजंस को FD पर मिलने वाले इंट्रेस्ट रेट में मामूली सा भी फर्क उनके टोटल रिटर्न पर अच्छा खासा असर डालता है। खासकर तब जब रिटायरमेंट के बाद बड़े फंड की FD की गई हो। अलग-अलग बैंकों के इंट्रेस्ट रेट की तुलना करना और सही फ्रिक्वेंसी का चयन करना इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज करने में काफी मदद करता है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50% तक का मिल रहा है बंपर इंट्रेस्ट

सीनियर सिटिजन को एफडी पर मैक्सिमम रिटर्न देने में स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे आगे हैं। कई स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.50 प्रतिशत तक इंट्रेस्ट मिल रहा है। स्मॉल फाइनेंस बैंक की FD के इंट्रेस्ट रेट को एक नजर में नीचे देखा जा सकता है-

  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (Equitas Small Finance Bank): वरिष्ठ नागरिकों को 8.50 प्रतिशत तक की ब्याज दर दे रहा है।
  • ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक (ESAF Small Finance Bank): वरिष्ठ नागरिकों को 8.50 प्रतिशत तक की ब्याज दर प्रदान कर रहा है।
  • शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक (Shivalik Small Finance Bank): एफडी पर 8.50 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है।
  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday Small Finance Bank): वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.50 प्रतिशत तक की दर की पेशकश कर रहा है।
  • जना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank): एफडी पर 8.30 प्रतिशत तक की ब्याज दर दे रहा है।
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank): 8.30 प्रतिशत तक की ब्याज दर की पेशकश कर रहा है।
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh Small Finance Bank): वरिष्ठ नागरिकों को 8.25 प्रतिशत तक की दर प्रदान कर रहा है।

प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंक: सुरक्षित निवेश के साथ बढ़िया विकल्प

प्राइवेट और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी बुजुर्गों को आकर्षित करने के लिए कॉम्पिटेटिव एफडी रेट पेश कर रहे हैं:

प्राइवेट सेक्टर बैंक

एसबीएम बैंक इंडिया वरिष्ठ नागरिकों को सर्वाधिक 8.15 प्रतिशत तक का इंट्रेस्ट रेट दे रहा है। इसके बाद डीसीबी बैंक (DCB Bank) 8.00 प्रतिशत और बंधन बैंक (Bandhan Bank) 7.95 प्रतिशत तक का रिटर्न दे रहे हैं। इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) और यस बैंक (YES Bank) दोनों 7.75 प्रतिशत तक, आरबीएल बैंक (RBL Bank) और तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक (Tamilnad Mercantile Bank) 7.70 प्रतिशत तक और जम्मू एंड कश्मीर बैंक (Jammu & Kashmir Bank) 7.55 प्रतिशत तक की ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र (सरकारी) के बैंक

सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक 7.45 प्रतिशत तक की ब्याज दर दे रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) 7.25 प्रतिशत तक की ब्याज दर प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) और इंडियन बैंक (Indian Bank) 7.15 प्रतिशत तक जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank) और केनरा बैंक (Canara Bank) 7.10 प्रतिशत तक की ब्याज दर दे रहे हैं।

विदेशी बैंक

विदेशी बैंकों की बात करें तो स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank) 7.10 प्रतिशत तक, डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) 7.00 प्रतिशत तक और एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank) 6.00 प्रतिशत तक की एफडी ब्याज दर दे रहे हैं।

10 लाख रुपये की एफडी पर सालाना ब्याज आय का गणित

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 8.50% की उच्चतम वार्षिक ब्याज दर पर 10 लाख रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करता है:

कुल फिक्स्ड राशि: ₹10,000,000

वार्षिक ब्याज दर: 8.50%

सालाना ब्याज आय: ₹85,000

यानी 8.50% की दर से 10 लाख रुपये फिक्स करने पर सिर्फ इंट्रेस्ट से ही वरिष्ठ नागरिक को सालाना ₹85000 (करीब ₹7083 प्रति माह) की निश्चित कमाई होगी। (नोट: अगर बैंक में ब्याज का रीइन्वेस्टमेंट या तिमाही आधार पर कम्पाउंडिंग होती है तो इंट्रेस्ट से कुल इनकम इससे भी अधिक हो सकती है।)

विशेषज्ञों की राय: कैसे करें सही और सुरक्षित एफडी निवेश

फाइनेंशियस एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि वरिष्ठ नागरिकों को अपनी पूरी जमा राशि किसी एक ही बैंक में रखने के बजाय अलग-अलग बैंकों में बांटकर निवेश करना चाहिए। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत मिलने वाले 5 लाख रुपये तक के जमा बीमा कवर के दायरे में सुरक्षित रहते हैं। उच्च रिटर्न पाने के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का चयन समझदारी से करें और अपनी लिक्विडिटी की जरूरतों के हिसाब से एफडी की अवधि तय करें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Tempsens Instruments IPO Allotment: 184 गुना सब्सक्राइब, लेटेस्ट GMP के साथ जानिए अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Tempsens Instruments IPO Allotment: इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट सेक्टर की Tempsens Instruments के IPO के लिए आज, 25 अगस्त को शेयरों का अलॉटमेंट हो सकता है। ₹650 करोड़ के इस IPO को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। इश्यू कुल 184.07 गुना सब्सक्राइब हुआ है।

सबसे ज्यादा दिलचस्पी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स यानी NII की रही। इस कैटेगरी में IPO 314.44 गुना सब्सक्राइब हुआ। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB ने 302.88 गुना बोली लगाई। रिटेल इनवेस्टर्स की कैटेगरी भी 60.69 गुना सब्सक्राइब हुई।

Tempsens Instruments IPO की लिस्टिंग

कंपनी ने IPO के लिए ₹285 से ₹300 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। IPO 20 अगस्त को खुला था। 24 अगस्त को इसकी बोली बंद हो गई। अब निवेशकों की नजर अलॉटमेंट पर है। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

GMP से लिस्टिंग पर कितना फायदा दिख रहा है?

Tempsens Instruments के शेयर को ग्रे मार्केट में भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। InvestorGain के मुताबिक, 25 अगस्त को इसका GMP करीब ₹317 था।

कंपनी के IPO का अपर प्राइस बैंड ₹300 है। ऐसे में ₹317 का GMP जोड़ें तो अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब ₹617 बनती है। यानी ₹300 के IPO Price के मुकाबले करीब 105.67% प्रीमियम का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, यह रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है।

Tempsens Instruments IPO अलॉट स्टेटस कैसे चेक करें?

अगर आपने भी इस IPO में पैसा लगाया है, तो अलॉटमेंट स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। इसके लिए KFin Technologies और NSE की वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

KFin Technologies से कैसे चेक करें?

KFin Technologies इस IPO की Registrar है।

  • स्टेप 1: KFin Technologies की IPO Status वेबसाइट खोलें।
  • स्टेप 2: IPO की लिस्ट में Tempsens Instruments चुनें।
  • स्टेप 3: PAN, Application Number या DP ID/Client ID में से कोई विकल्प चुनें।
  • स्टेप 4: मांगी गई जानकारी भरें।
  • स्टेप 5: Submit पर क्लिक करें।

इसके बाद आपका अलॉटमेंट स्टेटस स्क्रीन पर दिखाई देगा।

NSE से कैसे चेक करें?

NSE की वेबसाइट पर भी IPO से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।

  • NSE के IPO Bid Details सेक्शन में जाएं।
  • Equity और SME IPO Bid Details का विकल्प चुनें।
  • Tempsens Instruments को चुनें।
  • अपनी एप्लिकेशन डिटेल्स डालें।
  • सबमिट करें और डिटेल देखें।

TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

TCS MHP Deal Porsche: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर में मंगलवार सुबह शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। पोर्शे की कंसल्टिंग सहायक कंपनी MHP के 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3573 करोड़ के अधिग्रहण के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने सतर्क रुख अपनाया है।

एनालिस्ट का मानना है कि इस डील से यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में TCS की पकड़ मजबूत होगी, लेकिन MHP के घटते रेवेन्यू और इंटीग्रेशन की चुनौतियों को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी चिंतित हैं।

आज 25 अगस्त, मंगलवार को मार्केट खुलने के साथ ही  TCS के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। शेयर NSE पर 0.7% गिरकर ₹2,268 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। साल 2026 में अब तक TCS का शेयर करीब 29.2% टूट चुका है।

डील में क्या-क्या है शामिल?

TCS ने जर्मन लग्जरी कार निर्माता पोर्शे की कंपनी MHP Management- und IT-Beratung GmbH की 100% हिस्सेदारी करीब ₹3573 करोड़ में खरीदी है। इस अधिग्रहण के साथ ही पोर्शे ने MHP और TCS के साथ 5 साल के लिए करीब ₹14000 करोड़ का रणनीतिक समझौता भी किया है।

ब्रोकरेज हाउसेस का क्या है कहना?

अधिग्रहण की खबर के बाद प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने TCS के शेयर पर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस जारी किए हैं:

सिटी ने TCS के शेयरों को बेचना की सलाह बरकरार रखी है, जो इसके करेंट भाव से करीब 20% की गिरावट का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि MHP का रेवेन्यू साल 2024 के 830 मिलियन यूरो से घटकर 2025 में 742 मिलियन यूरो रह गया है। गिरता रेवेन्यू TCS के लिए जोखिम बन सकता है। Citi का टारगेट प्राइस ₹1825 का है।

वहीं HSBC ने निवेशकों को TCS के शेयर होल्ड करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस डील से TCS की यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में मौजूदगी तो बढ़ेगी, लेकिन कंपनी के प्रति शेयर आय पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा। साथ ही दोनों कंपनियों का विलय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। HSBC का टारगेट प्राइस ₹2350 का है।

क्या करती है MHP कंपनी?

MHP एक ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग कंपनी है, जिसके पास 4,500 से अधिक कर्मचारी हैं। यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में काम करती है।

आईटी सेक्टर के लिए क्या हैं चुनौतियां?

यह डील ऐसे समय में हुई है जब पूरी भारतीय आईटी इंडस्ट्री टेक खर्च में सुस्ती और जेनेरिक एआई के कारण आ रहे बदलावों से जूझ रही है। MHP के कम वैल्युएशन पर मिलने की मुख्य वजह भी इसके घटते रेवेन्यू का रिस्क ही है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पोर्शे के साथ लंबी अवधि के सौदे से TCS को भविष्य में रेवेन्यू का सपोर्ट मिलेगा, लेकिन MHP के गिरते बिजनेस को वापस पटरी पर लाना और इसका TCS के साथ तालमेल बिठाना कंपनी प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Lenskart Block Deal: एक झटके में बिके 4.5 करोड़ शेयर, कीमत फिसली

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील के तहत 4.5 करोड़ शेयरों का लेनदेन हुआ है। ये शेयर कंपनी की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। लेंसकार्ट का शेयर सुबह के कारोबार में पहले पिछले क्लोजिंग प्राइस से करीब 2 प्रतिशत तक उछलकर BSE पर 673.35 रुपये के हाई तक गया। फिर यह लाल निशान में आया और 1.2 प्रतिशत तक टूटकर 653.20 रुपये के लो तक गया। शेयरों को किसने बेचा और किसने खरीदा, इसके बारे में अभी तक आधिकारिक रूप से डिटेल सामने नहीं आई है।

हालांकि शनिवार को CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन 2.6 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है। ट्रांजेक्शन के लिए फ्लोर प्राइस 635 रुपये प्रति शेयर रह सकता है। इस आधार पर लगभग 30 करोड़ डॉलर के शेयर बिक सकते हैं। शेयर बेचने वाले के लिए बाकी हिस्सेदारी बेचने को लेकर 45 दिन का लॉक-अप पीरियड होगा।

लेंसकार्ट में जून 2026 तिमाही के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 17.53 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 82.05 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, इसमें से SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के पास 9.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Lenskart का शेयर इस साल अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा

लेंसकार्ट का मार्केट कैप 1.14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। शेयर साल 2026 में अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 28 प्रतिशत उछली है। हाल ही में MSCI इंडिया इंडेक्स में लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस के साथ-साथ लॉरस लैब्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पेरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स की एंट्री हुई है।

Hormuz की भंवर से संभला Sensex, इन 4 वजहों से Nifty पहुंचा 24300 के पार

स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

लेंसकार्ट के शेयर को कवर कर रहे 21 एनालिस्ट्स में से 17 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है। 3 ने ‘होल्ड’ और एक ने ‘सेल’ की सलाह दी है। जेफरीज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि मांग के बजाय आपूर्ति कंपनी के लिए प्रमुख बाधा बनी हुई है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि लेंसकार्ट के मार्जिन को हायर एवरेज सेलिंग प्राइस, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेटिंग लेवरेज से लाभ होता है।

सिटी को उम्मीद है कि कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार अच्छी बनी रहेगी। इसे स्टोर्स में बढ़ोतरी और कस्टमर एक्वीजीशन का सपोर्ट मिलेगा। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और ​2028 के लिए EBITDA अनुमानों को क्रमशः 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत बढ़ाया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Lenskart Block Deal: पीयूष बंसल की कंपनी में SVF II Lightbulb बेच सकती है ₹2871 करोड़ के शेयर

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील के तहत लगभग 30 करोड़ डॉलर के शेयर बिक सकते हैं। CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन 2.6 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है। ट्रांजेक्शन के लिए फ्लोर प्राइस 635 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। शेयर बेचने वाले के लिए बाकी हिस्सेदारी बेचने को लेकर 45 दिन का लॉक-अप पीरियड होगा।

लेंसकार्ट में जून 2026 तिमाही के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 17.53 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 82.05 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, इसमें से SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के पास 9.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। अगर ट्रांजेक्शन हुआ तो सोमवार, 24 अगस्त को लेंसकार्ट के शेयरों में बड़ा उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 661.55 रुपये है।

कंपनी का मार्केट कैप 1.15 लाख करोड़ रुपये है। लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। शेयर साल 2026 में अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 32 प्रतिशत उछली है। हाल ही में MSCI इंडिया इंडेक्स में लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस के साथ-साथ लॉरस लैब्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पेरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स की एंट्री हुई है।

जून तिमाही में Lenskart का मुनाफा 269 प्रतिशत बढ़ा

अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 269.24 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद 221.84 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 43.3 प्रतिशत बढ़कर 2,714.18 करोड़ रुपये हो गया। भारत से रेवेन्यू 30.7 प्रतिशत बढ़कर 1,531 करोड़ रुपये रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से रेवेन्यू सालाना आधार पर 38 प्रतिशत बढ़कर 1,203 करोड़ रुपये हो गया।

लेंसकार्ट सॉल्यूशंस ने जून 2026 तिमाही के दौरान 132 नए स्टोर खोले। इसके बाद इसके एक्टिव स्टोर्स की कुल संख्या बढ़कर 3,459 हो गई है। कुल खर्च 2483.52 करोड़ रुपये के दर्ज किए गए, जो जून 2025 तिमाही में 1836.58 करोड़ रुपये के थे।

Dividend Stock: हर शेयर पर ₹100 का डिविडेंड, 2 सितंबर से पहले बनना होगा शेयरहोल्डर; कीमत 3 साल में 150% चढ़ी

स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

लेंसकार्ट के शेयर को कवर कर रहे 21 एनालिस्ट्स में से 17 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है। 3 ने ‘होल्ड’ और एक ने ‘सेल’ की सलाह दी है। जेफरीज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि मांग के बजाय आपूर्ति कंपनी के लिए प्रमुख बाधा बनी हुई है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि लेंसकार्ट के मार्जिन को हायर एवरेज सेलिंग प्राइस, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेटिंग लेवरेज से लाभ होता है।

सिटी को उम्मीद है कि कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार अच्छी बनी रहेगी। इसे स्टोर्स में बढ़ोतरी और कस्टमर एक्वीजीशन का सपोर्ट मिलेगा। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और ​2028 के लिए EBITDA अनुमानों को क्रमशः 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत बढ़ाया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FD पर 8.5% ब्याज! सीनियर सिटीजन के लिए ये बैंक दे रहे सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट

जो सीनियर सिटीजन फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) पर निश्चित रिटर्न पाना चाहते हैं, वे 8.5% तक ब्याज कमा सकते हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक डिपॉज़िट पर सबसे ज़्यादा ब्याज दरें दे रहे हैं। कई प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंक भी अलग-अलग FD अवधि (एक साल से 10 साल तक) के लिए अच्छी ब्याज दरें दे रहे हैं।

सीनियर सिटीजन के लिए, FD ब्याज दरों में थोड़ा सा अंतर भी कुल रिटर्न पर बड़ा असर डाल सकता है, खासकर तब जब बड़ी रकम निवेश की जा रही हो। अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करने और सही अवधि चुनने से ब्याज से होने वाली कमाई को ज़्यादा से ज़्यादा किया जा सकता है, साथ ही निवेश में जोखिम भी कम रहता है।

Image

  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.50% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.50% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.50% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.50% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • जना स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.30% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.30% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.25% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • AU स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.90% तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।
  • स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.75 % तक की FD ब्याज दरें दे रहा है।

Image

  • SBM बैंक इंडिया फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 8.15% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • DCB बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 8.00% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • बंधन बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.95% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • इंडसइंड बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.75% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • YES बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.75% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • RBL बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.70%  तक ब्याज दर दे रहा है।
  • सिटी यूनियन बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.50%  तक ब्याज दर दे रहा है।
  • IDFC फर्स्ट बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.50%तक ब्याज दर दे रहा है।
  • कोटक महिंद्रा बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.30% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • एक्सिस बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.20%तक ब्याज दर दे रहा है।
  • HDFC बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10 % तक ब्याज दर दे रहा है।
  • ICICI बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10%तक ब्याज दर दे रहा है।

Image

  • बैंक ऑफ़ इंडिया फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.45% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • पंजाब एंड सिंध बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.35% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • बैंक ऑफ़ बड़ौदा फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.25% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.25% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.15% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • इंडियन बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.15% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • केनरा बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • इंडियन ओवरसीज़ बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • पंजाब नेशनल बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.05% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.05% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • Image
  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.10% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • ड्यूश बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 7.00% तक ब्याज दर दे रहा है।
  • HSBC बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट पर 6.00 % तक ब्याज दर दे रहा है।

जानकारों का सुझाव है कि ₹5 लाख के इंश्योरेंस कवर के दायरे में रहने के लिए अपनी जमा राशि को कई बैंकों में बांटें, ज़्यादा रिटर्न के लिए चुनिंदा स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इस्तेमाल करें और जमा की अवधि को अपनी नकदी की ज़रूरतों के हिसाब से तय करें। जमा पर इंश्योरेंस सुरक्षा और स्थिर रिटर्न के कारण, FD रिटायर हो चुके लोगों के लिए निवेश का एक भरोसेमंद ज़रिया बनी हुई है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म ने रेटिंग की अपग्रेड, 18% ऊपर का दिया टारगेट, क्या आप करेंगे निवेश

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म HSBC से AC बनाने वाली कंपनी ब्लू स्टार (Blue Star) के शेयर की रेटिंग अपग्रेड कर दी। HSBC ने अब ब्लू स्टार के लिए अपनी पिछली “hold” रेटिंग को बदलकर “buy” (खरीदने) की सलाह दी है और प्रति शेयर ₹1,780 का प्राइस टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 18% की बढ़ोतरी हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जून तिमाही में रूम एयर कंडीशनर (RAC) इंडस्ट्री में 25% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें वॉल्यूम में अनुमानित बढ़ोतरी 20% – 22% रही। उसने यह भी कहा कि पहली तिमाही में ब्लू स्टार के मुकाबले वोल्टास का प्रदर्शन बेहतर रहा।

HSBC ने कहा कि गर्मियों की बिक्री (जनवरी से जून) को देखें तो, ऊंचे बेस (high base) के बावजूद धीमी ग्रोथ के बावजूद ब्लू स्टार के मार्जिन स्थिर रहेकम मार्जिन गाइडेंस के कारण ब्रोकरेज ने अपने अनुमानों में कटौती की है।

उसने कहा कि मजबूत ऑर्डर बुक, डेटा सेंटर बिजनेस में मौजूदगी, मार्जिन बढ़ने की गुंजाइश और अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस को देखते हुए उसने ब्लू स्टार की रेटिंग बढ़ाई है।

इस साल अब तक ब्लू स्टार के शेयर की कीमत में 23% की गिरावट आई है, जबकि वोल्टास के शेयरों में 8% की गिरावट देखी गई है। HSBC का कहना है कि इससे कंपनी का वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गया है।

इस महीने की शुरुआत में, कंपनी ने अपनी पहली तिमाही की कमाई की रिपोर्ट दी थी, जिसमें उसका रेवेन्यू 13.3% बढ़कर ₹3,378 करोड़ हो गया, लेकिन यह CNBC-TV18 के ₹3,547 करोड़ के अनुमान से कम था। इसका EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पिछले साल के मुकाबले 12% घटकर ₹175 करोड़ रह गया और यह बाजार के ₹247 करोड़ के अनुमान से भी काफी कम था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान अवधि के 6.7% से घटकर 5.2% हो गया और यह बाजार के 7% के अनुमान से भी कम था।

हालांकि, कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर MEP प्रोजेक्ट ऑर्डर का आना इस हाई-ग्रोथ सेगमेंट में लगातार बनी हुई तेजी को दिखाता है।

ब्लू स्टार पर नज़र रखने वाले 27 एनालिस्ट में से 13 ने “buy” रेटिंग, 9 ने “hold” रेटिंग और 5 ने “Sell” रेटिंग दी है। ब्लू स्टार के शेयर बढ़त के साथ खुले, लेकिन बाद में वह बढ़त खत्म हो गई और मंगलवार को शेयर 0.3% गिरकर ₹1,503.2 पर ट्रेड कर रहे थे। इस साल अब तक शेयर में 15% की गिरावट आई है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FCNR (B) Deposit Scheme : समय से पहले ही बंद हो जाएगी FCNR(B) विंडो, स्कीम को मिला शानदार रिस्पॉन्स, जानिए रुपए के लिए क्या हैं मायने?

FCNR(B)Deposit Scheme : RBI ने समय से एक महीने पहले यानी 31 अगस्त से ही NRIs के लिए FCNR डिपॉजिट विंडो बंद करने का एलान किया है। स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते 13 अगस्त तक बैंकों को अब तक 52 बिलियन डॉलर से ज्यादा के डिपॉडिट मिल चुके हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम की डेडलाइन 30 सितंबर की जगह अब 31 अगस्त कर दी गई है। इस स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते समय से पहले बंद किया गया है।

इस स्कीम पर नजर डालें तो स्वैप फैसिलिटी के जरिए 13 अगस्त तक 57 अरब डॉलर आए हैं। FCNR डिपॉजिट स्कीम से ही 52 अरब डॉलर से ज्यादा के डिपॉजिट आए हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम में तेज रफ्तार इनफ्लो देखने को मिला है। पहले 20 अरब डॉलर आने में 38 दिन लगे। वहीं, दूसरे 20 अरब डॉलर आने में सिर्फ 14 दिन लगे। पिछले 13 दिनों में 16 अरब डॉलर का इनफ्लो देखने को मिला। ऐसा मानना है कि इस महीने के अंत तक इनफ्लो की रफ्तार और बढ़ेगी।

और कितना इनफ्लो संभव?

एक्सपर्ट्स और इकोनॉमिस्ट की राय है कि अगस्त अंत तक FCNR (B) डिपॉजिट से 65-75 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। कुल मिलाकर 80-100 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। SBI रिसर्च ने पहले अनुमान लगाया था कि अगर FCNR-B रूट के ज़रिए निवेश की सुविधा सितंबर तक खुली रहती है, तो 70 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है, जो 2013 में आए निवेश के स्तर से कहीं ज्यादा होगा।

FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम और रुपया

बड़े डॉलर इनफ्लो के बाद भी रुपए में ज्यादा मजबूती नहीं आई है। RBI ने इनफ्लो का बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट बनाने में लगाया गया। एक पूर्व सेंट्रल बैंकर ने इस अचानक होने वाले क्लोजर होने की वजह रुपये पर पड़ रहे दबाव को बताया है। उनका कहना है पहले के विपरीत, इस बार USD/INR करेंसी पेयर स्थिर रहा है, लेकिन इसमें लगातार गिरावट का रुझान बना हुआ है। खबर है कि RBI रुपये की गिरावट को रोकने के लिए पिछले कुछ दिनों से डॉलर बेच रहा है।

उन्होंने कहा 5 जून और 14 अगस्त के बीच रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिला। 5 जून को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.39 पर बंद हुआ था और 14 अगस्त तक यह लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 95.45 पर आ गया। इनफ्लो शुरू होने के बाद, जुलाई के मध्य में रुपये में थोड़ी रिकवरी हुई और यह 94.30 पर पहुंच गया, लेकिन उसके बाद इसकी रफ़्तार धीमी पड़ गई। हाल के हफ्तो में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़त और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से रुपया कमजोरर हुआ है। साथ ही, फ़ॉरवर्ड्स मार्केट में ऐसी हलचल नहीं दिख रही है जिससे RBI के लिए इकोनॉमिक हेजिंग आसान हो सके। इसलिए, शायद RBI ने गोल्ड बॉन्ड की तरह ही इसे अभी बंद कर देना ही बेहतर समझा होगा।

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर पड़ा बड़ा असर

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर बड़ा असर पड़ा है। 15 जून से 31 जुलाई के बीच टाइम डिपॉजिट में 8.5 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसमें FCNR डिपॉजिट का करीब 3-3.5 लाख करोड़ रुपए का योगदान रहा है। SBI रिसर्च के मुताबिक अगस्त में टाइम डिपॉजिट 5 लाख करोड़ रुपए और बढ़ सकता है। इससे बैंकों को स्टेबल और सस्ते फंडिंग का फायदा मिलेगा। अतिरिक्त लिक्विडिटी से सरकारी बॉन्ड यील्ड में कमी आ सकती है।

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से किन बैंकों ज्यादा फायदा?

इससे प्राइवेट और सरकारी बैंकों के हिस्से में 42%-42% डिपॉजिट आया है। वहीं, विदेशी बैंकों के हिस्से में 15% डिपॉजिट आया है। इस स्कीम के जरिए HSBC ने 6.1 अरब डॉलर जुटाए हैं। HSBC के बाद SBI और ICICI बैंक ने काफी डिपॉजिट जुटाए है। HDFC बैंक इस रेस में पीछे रहा है।

एक्सपर्ट्स की राय

एक प्राइवेट बैंक के ट्रेज़री हेड ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि FCNR-B डिपॉज़िट स्कीम को मिले अच्छे रिस्पॉन्स की वजह से शायद सेंट्रल बैंक को अपना फैसला बदलना पड़ा।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्कीम में जरूरत से ज्यादा पैसा आ गया है और ऐसे में अब सेंट्रल बैंक की तरफ इसको समय से पहले बंद करने का फैसला लिया गया है।

करूर वैश्य बैंक के ट्रेज़री हेड रामचंद्र रेड्डी ने कहा “स्कीम को समय से पहले बंद करना नीति में बदलाव के बजाय एक तरह का तालमेल बिठाने जैसा लग रहा है। FCNR-B फेसिलिटी को मिली जबरदस्त रिस्पॉन्स से पता चलता है कि इसके जरिए फंड जुटाने का मकसद काफी हद तक पूरा हो गया है और RBI अब इससे मिली लिक्विडिटी और फॉरेन एक्सचेंज पर पड़ने वाले इसके असर को मैनेज करने पर फोकस कर सकता है। मैं इसे नीति में किसी बदलाव के बजाय इस स्कीम में सोच-समझकर किए गए मामूली सुधार के तौर पर देखता हूं।”

 

 

Market Outlook : बाजार में गिरावट का सिलसिला रहा जारी, जानिए 18 अगस्त को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।