इजराइल में पाकिस्तानी पायलटों की नो-एंट्री:नेतन्याहू सरकार ने बैन लगाया; राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के क्रू पर सख्ती की

इजराइल जाने वाली उड़ानों में अब पाकिस्तान समेत 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक लगाई जा रही है। ये नियम उन देशों के पायलटों और क्रू पर लागू होते हैं, जिनके देश के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इनमें पाकिस्तान के अलावा ईरान, ओमान, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था। इसके बाद से इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस के पायलटों और क्रू की जांच सख्त कर दी। नियम पहले से थे लेकिन पालन नहीं हो रहा था रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नियम पहले से मौजूद थे, लेकिन इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा था। लागू नियमों के तहत राजनयिक संबंध न रखने वाले देशों के पायलट और केबिन क्रू इजराइल जाने वाली उड़ानों में ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। कुछ मामलों में दूसरी नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों पर भी रोक लग सकती है। इंडोनेशियाई पायलट के कारण फ्लाइट लौटानी पड़ी थी इजराइल के नियमों का असर मंगलवार को इथियोपियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट पर भी पड़ा। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में था, तभी इजराइली अधिकारियों ने उसे वापस लौटने को कहा। अधिकारियों को पता चला था कि विमान में इंडोनेशियाई पायलट मौजूद है। इंडोनेशिया के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बाद विमान इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा लौट गया। वहां पायलट को बदला गया और फिर विमान ने दोबारा उड़ान भरी। इसके बाद वह तेल अवीव पहुंचा। इथियोपियन एयरलाइंस ने इसे गलती बताया। कंपनी का कहना था कि उसे जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट इजराइल जाने वाली फ्लाइट नहीं उड़ा सकता। एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से दूसरी नागरिकता की जानकारी मांगी फ्रांस की राष्ट्रीय एयरलाइन एयर फ्रांस का कहना है कि उसने अपने कर्मचारियों को नियमों की जानकारी दे दी है। फ्रांस की वेबसाइट मेडियापार्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से यह भी पूछा है कि क्या उनके पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जानकारी छिपाने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस को नियमों की जानकारी भेजी इजराइल के चैनल N12 की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को इन नियमों की जानकारी दी थी। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से एयरलाइंस पर है। इजराइली अधिकारी हर उड़ान के क्रू की नागरिकता की नियमित जांच नहीं करते थे। इसी वजह से पाकिस्तान, ओमान, ईरान, इराक और लेबनान जैसे देशों के पायलट पहले भी तेल अवीव जाने वाली उड़ानें संचालित करते रहे। अब इजराइल इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहा है। फिलहाल एयर फ्रांस, यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स ने नियमों का पालन करने की बात कही है। ऐसे में इन एयरलाइंस को इजराइल जाने वाली उड़ानों के लिए पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी में बदलाव करना पड़ सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि कितनी और एयरलाइंस इन नियमों को लागू करेंगी। इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है जिनके पास किसी प्रतिबंधित देश के साथ-साथ दूसरे देश की नागरिकता भी है। ओमानी को-पायलट विमान को एयरपोर्ट से टकराना चाहता था 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला कर दिया था। UAE के मुताबिक को-पायलट विमान को हाइजैक करके उसे इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल से टकराना चाहता था। हमले के दौरान विमान करीब 1 मिनट में 16 हजार फीट नीचे आ गया था। घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल पाए इसके बाद यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू कर लिया। विमान में 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में कैप्टन स्मित के सम्मान में प्रस्ताव पारित: आतंकी हमले को नाकाम करने की तारीफ की अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में प्रस्ताव पास किया है। इसे दोनों पार्टियों ने समर्थन दिया है। इसमें 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले के दौरान कैप्टन मच्छर की बहादुरी की तारीफ की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

इजराइल में पाकिस्तानी पायलटों की नो-एंट्री:नेतन्याहू सरकार ने बैन लगाया; राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के क्रू पर सख्ती की

इजराइल जाने वाली उड़ानों में अब पाकिस्तान समेत 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक लगाई जा रही है। ये नियम उन देशों के पायलटों और क्रू पर लागू होते हैं, जिनके देश के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इनमें पाकिस्तान के अलावा ईरान, ओमान, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था। इसके बाद से इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस के पायलटों और क्रू की जांच सख्त कर दी। इंडोनेशियाई पायलट के कारण फ्लाइट लौटानी पड़ी थी इजराइल के नियमों का असर मंगलवार को इथियोपियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट पर भी पड़ा। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में था, तभी इजराइली अधिकारियों ने उसे वापस लौटने को कहा। अधिकारियों को पता चला था कि विमान में इंडोनेशियाई पायलट मौजूद है। इंडोनेशिया के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बाद विमान इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा लौट गया। वहां पायलट को बदला गया और फिर विमान ने दोबारा उड़ान भरी। इसके बाद वह तेल अवीव पहुंचा। इथियोपियन एयरलाइंस ने इसे गलती बताया। कंपनी का कहना था कि उसे जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट इजराइल जाने वाली फ्लाइट नहीं उड़ा सकता। एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से दूसरी नागरिकता की जानकारी मांगी फ्रांस की राष्ट्रीय एयरलाइन एयर फ्रांस का कहना है कि उसने अपने कर्मचारियों को नियमों की जानकारी दे दी है। फ्रांस की वेबसाइट मेडियापार्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से यह भी पूछा है कि क्या उनके पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जानकारी छिपाने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस को नियमों की जानकारी भेजी इजराइल के चैनल N12 की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को इन नियमों की जानकारी दी थी। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से एयरलाइंस पर है। इजराइली अधिकारी हर उड़ान के क्रू की नागरिकता की नियमित जांच नहीं करते थे। इसी वजह से पाकिस्तान, ओमान, ईरान, इराक और लेबनान जैसे मुस्लिम बहुल देशों के पायलट पहले भी तेल अवीव जाने वाली उड़ानें संचालित करते रहे। अब इजराइल इन नियमों का सख्ती से पालन करा रहा है। फिलहाल एयर फ्रांस, यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स ने नियमों का पालन करने की बात कही है। ऐसे में इन एयरलाइंस को इजराइल जाने वाली उड़ानों के लिए पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी में बदलाव करना पड़ सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि कितनी और एयरलाइंस इन नियमों को लागू करेंगी। इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है जिनके पास किसी प्रतिबंधित देश के साथ-साथ दूसरे देश की नागरिकता भी है। ओमानी को-पायलट विमान को एयरपोर्ट से टकराना चाहता था 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला कर दिया था। UAE के मुताबिक को-पायलट विमान को हाइजैक करके उसे इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल से टकराना चाहता था। हमले के दौरान विमान करीब 1 मिनट में करीब15 हजार फीट नीचे आ गया था। घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल पाए इसके बाद यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू कर लिया। विमान में 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में कैप्टन स्मित के सम्मान में प्रस्ताव पारित: आतंकी हमले को नाकाम करने की तारीफ की अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के सम्मान में प्रस्ताव पास किया है। इसे दोनों पार्टियों ने समर्थन दिया है। इसमें 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले के दौरान कैप्टन मच्छर की बहादुरी की तारीफ की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

शेख हसीना बोलीं- BRICS समिट छोड़ने से बांग्लादेश को नुकसान:रिश्ते सुधारने का मौका गंवाया; भारत ने न्यौता दिया था लेकिन PM रहमान नहीं आए

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल न होने से बांग्लादेश को नुकसान हुआ। हसीना ने PTI को दिए इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि रहमान के फैसले के चलते बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का मौका भी गंवा दिया। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट हुई थी। भारत ने रहमान को समिट में आने का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे। हसीना ने कहा कि अगर उनके भारत में रहने की वजह से तारिक रहमान भारत नहीं आए, तो यह दुख की बात है। दो देशों के रिश्ते किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक मतभेदों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए। हसीना बोलीं- बातचीत के रास्ते खोलना सरकार की जिम्मेदारी हसीना ने कहा कि BRICS सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं है। इसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल होती हैं। समिट में शामिल होकर बांग्लादेश दूसरे देशों से सीख सकता था। लेकिन सरकार ने यह मौका गंवा दिया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए दूसरे देशों से बातचीत और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए। रहमान के पिता के भारत दौरे का जिक्र किया हसीना ने 1979 में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति और तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान के भारत दौरे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह दिल्ली में रह रही थीं। हसीना के मुताबिक, 1980 में जब जियाउर रहमान लंदन गए, तब भी वह वहीं थीं। इसके बावजूद उनकी मौजूदगी ने जियाउर रहमान के दौरे में कोई रुकावट नहीं डाली। हसीना ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान समेत परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 3 नवंबर को ढाका की सेंट्रल जेल में चार बड़े नेताओं की भी हत्या हुई। हसीना ने जियाउर रहमान पर गलत तरीके से सत्ता में आने का आरोप लगाया। हसीना बोलीं- बांग्लादेश गंभीर संकट से गुजर रहा हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और विरोधी दलों को अपनी बात रखने के मौके नहीं मिल रहे हैं। बांग्लादेश लौटकर लोकतंत्र बहाल करना चाहती हैं हसीना हसीना ने बांग्लादेश लौटने की कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि वह देश लौटकर लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई में शामिल होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपनी पसंद की सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के मुताबिक, उनकी वापसी इस दिशा में एक अहम कदम होगी। मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटने से डर नहीं इंटरव्यू के दौरान हसीना ने माना कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहां की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह डरकर पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने 1975 में अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान, मां, भाइयों और परिवार के कई सदस्यों की हत्या का जिक्र किया। हसीना ने कहा कि 1981 में सैन्य शासन और धमकियों के बावजूद वह बांग्लादेश लौटी थीं। उन्होंने 21 अगस्त 2004 को हुए ग्रेनेड हमले और खुद पर हुए दूसरे हमलों का भी जिक्र किया। हसीना ने कहा कि उन्हें जेल और राजनीतिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि बांग्लादेश में न्याय व्यवस्था की स्थिति है। उन्होंने मौत की सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सजा सुनाना न्याय नहीं है। 78 साल की शेख हसीना अगस्त 2024 में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। तब से वह यहीं रह रही हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार:TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था, AI की मदद से सऊदी नागरिक की पहचान

अमेरिकी कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाले कर्मचारी को FBI ने गिरफ्तार कर लिया है। कर्मचारी ने कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा दिया था। डिवाइस मिलने के बाद OpenAI ने AI मॉडल के जरिए आरोपी को पकड़ा। इसके बाद उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी की पहचान सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान के रूप में हुई है। टॉयलेट पेपर में छिपाकर लगाया था रिकॉर्डर कंपनी के मुताबिक अलफोजान ने 28 सितंबर को USB पोर्ट में रिकॉर्डर लगाया था। इसे छिपाने के लिए टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। 2 दिन बाद कर्मचारियों को सुरक्षा जांच के दौरान यह डिवाइस मिला था। डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा सेंसर और डेटा स्टोर करने के लिए माइक्रो SD कार्ड था। डिवाइस में रिकॉर्डिंग इन्क्रिप्टेड थी, इसलिए उसे सुना नहीं जा सका है। AI चैटबॉट से डिवाइस बनाने में मदद ली FBI अधिकारियों का आरोप है कि अलफोजान ने डिवाइस लगाने की तैयारी पहले से कर रखी थी। उसने कंपनी के मीटिंग रूम, अधिकारियों के आने-जाने के समय और दूसरी कंपनियों के साथ होने वाली बैठकों की जानकारी जुटाई थी। उसने अपनी पत्नी के AI चैटबॉट अकाउंट पर कई सवाल पूछे थे। इनमें डिवाइस कैसे बनाना है, उसे कहां और कैसे लगाना है, उससे आवाज रिकॉर्ड हो रही है या नहीं, उसे कैसे छिपाना है और दूर से उसका इस्तेमाल कैसे करना है, जैसे सवाल शामिल थे। जिस मीटिंग रूम में यह डिवाइस लगाया गया था, वहां OpenAI के अधिकारी कंपनी से जुड़े अहम मामलों पर चर्चा करते थे। CCTV फुटेज में अलफोजान को कई दिनों तक कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया। जबकि उसे वहां जाने या उन बैठकों में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। दोष साबित होने पर 5 साल तक की जेल 35 साल के अलफोजान अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की अनुमति रखता है। वह जुलाई 2025 में OpenAI से जुड़ा था। 9 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को अलफोजान को पहली बार फेडरव कोर्ट में पेश किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, दोष साबित होने पर उन्हें 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.3 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है। OpenAI ने नौकरी से निकाला, डेटा चोरी के सबूत नहीं OpenAI ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि अलफोजान ने कंपनी के AI मॉडल के मूल डेटा, सोर्स कोड या ग्राहकों की जानकारी तक गलत तरीके से पहुंच बनाई या उसे बाहर भेजा। कंपनी ने घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अलफोजान वेंचर कैपिटल फर्म राएद वेंचर्स में भी वेंचर पार्टनर हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, OpenAI में वे इंजीनियरिंग लीड था और AI एजेंट्स और डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करता था। इससे पहले अलफोजान मेटा, माईक्रोसॉफ्ट और जर्मनी की एक सॉफ्टवेयर कंपनी SAP में भी काम कर चुका है। उसने MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा:न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा; सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे

बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। लोगों ने उन पर बांग्लादेश में हत्याएं कराने और लोकतंत्र को बर्बाद करने के आरोप लगाए। उन्होंने यूनुस से कहा कि तुम यहां क्यों आए हो, वापस जाओ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग यूनुस के खिलाफ नारे लगाते और उन पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। हालात को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने हजारों लोगों की मौत का आरोप लगाया प्रदर्शनकारियों ने यूनुस पर हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह दावा भी किया कि बांग्लादेश में करीब 2 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध करने वालों की पहचान नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया है। घटना पर यूनुस या उनके प्रतिनिधियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं कम्युनिकेशन सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों पर उठे सवाल शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में हिंसा रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सवाल उठे। इस दौरान हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों, लोगों की गिरफ्तारी और हिरासत में मौतों की खबरें भी सामने आईं। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया गया। मानवाधिकार संगठनों ने इन मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। खसरे से 1170 बच्चों की मौतों पर भी घिरे यूनुस बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से बच्चों की मौतों को लेकर भी यूनुस की अंतरिम सरकार की आलोचना हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी से 1,170 बच्चों की मौत हुई है। यूनिसेफ ने मई 2026 में कहा था कि उसने वैक्सीन की खरीद में देरी को लेकर अंतरिम सरकार को कम से कम 10 बार चेतावनी दी थी। इसके बाद भी सरकार ने यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीदने के बजाय खुली टेंडर प्रक्रिया अपनाई। इस प्रक्रिया में देरी के बीच वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया। इसके बाद बीमारी का प्रकोप बढ़ गया। हालांकि, इस मामले में सरकार की जिम्मेदारी को लेकर जांच के निष्कर्ष अलग से देखे जाने चाहिए। हसीना की सरकार गिरने के बाद डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व किया। उनकी सरकार करीब डेढ़ साल तक सत्ता में रही। 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। यूनुस की सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया और भारत से हसीना को बांग्लादेश भेजने की मांग की।

Muhammad Yunus Video: ‘तुम आतंकी हो, बांग्लादेश में हजारों लोगों को मारा…’; न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बेइज्जत हुए मोहम्मद यूनुस, देखें नारेबाजी का वीडियो

Muhammad Yunus Video: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सोमवार (12 अक्टूबर) को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित जॉन एफ. कैनेडी (JFK) इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बांग्लादेशी मूल के कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर तीखे सवाल पूछे और उन पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान लोगों ने उन्हें आतंकवादी तक बता दिया। उनके खिलाफ हुए इस नारेबाजी का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कुछ लोग यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन पर बांग्लादेश में लोगों की मौत और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए। इस घटना के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। दूसरी ओर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं संचार सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ ढाका कानूनी कार्रवाई करेगा।

‘तुम आतंकवादी हो, बांग्लादेश में लोगों को मारा’

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मोहम्मद यूनुस से कहता सुनाई देता है, “तुम आतंकवादी हो। तुमने बांग्लादेश में लोगों को मारा है। यहां क्यों आए हो? हमें बताओ, यहां क्यों आए हो?” कुछ अन्य लोग भी बांग्लादेश सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें वापस जाने के लिए भी कहा। आरोप लगाने वाले लोगों ने दावा किया कि बांग्लादेश में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया।

व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट से बाहर जा रहे थे यूनुस

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस दोहा से कतर एयरवेज की फ्लाइट के जरिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। बताया गया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल-8 पर पहुंचने के बाद जब उन्हें व्हीलचेयर पर बाहर ले जाया जा रहा था, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर सवाल पूछने शुरू कर दिए।

बिगड़ते हालात को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने यूनुस को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिश की। ढाका के अखबार ‘डेली सन’ ने एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों के हवाले से बताया कि विरोध के दौरान यूनुस और उनके साथ मौजूद सहयोगी लामिया मोर्शेद तेजी से वापस एयरपोर्ट के अंदर चले गए।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से विवादों में रहा अंतरिम सरकार का कार्यकाल

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में पूर्व पीएम शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल राजनीतिक उथल-पुथल, हिंसा, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों के बीच गुजरा। यूनुस की अंतरिम सरकार को लेकर उनके राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन हिंसक घटनाओं को रोकने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहा।

अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों ने भी दावा किया कि अंतरिम प्रशासन के दौरान पार्टी के सदस्यों और उससे जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। हिंदू समुदाय और धार्मिक स्थलों पर कथित हमलों, मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौतों तथा राजनीतिक समर्थकों के साथ व्यवहार को लेकर चिंताएं जताई गईं।

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आलोचकों ने सरकार से हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, इन मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित घटनाओं की जांच, विश्वसनीय रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में पुलिसकर्मियों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों का मुद्दा भी उठाया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद बना रहा।

झारखंड के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब रांची एयरपोर्ट से सीधे भर सकेंगे विदेश की उड़ान, फॉरेन फ्लाइट्स के लिए ये है तैयारी

झारखंड की राजधानी रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए तैयार है। अब जरूरत किसी एयरलाइन कंपनी के आगे आने की है। रांची बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के डायरेक्टर विनोद कुमार बताते हैं, अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने का प्रस्ताव मिलने पर कस्टम, इमिग्रेशन सहित आवश्यक सेवाओं को सक्रिय किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू होने पर यात्रियों को पासपोर्ट और वीजा जांच, इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम जांच, अंतरराष्ट्रीय बैगेज हैंडलिंग, सुरक्षा जांच और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलेंगी। इससे झारखंड के यात्रियों के लिए विदेश यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकेगी। इसके लिए रनवे भी थोड़ा लंबा और चौड़ा किया जाएगा।

डूरंड कप में किया गया है टेस्ट

डायरेक्टर विनोद कुमार ने बताया,अभी हाल में ही राज्य में डूरंड कप आयोजित हुआ था। इसमें हमने अस्थाई रूप से कई सारी सुविधाओं को सक्रिय किया था जैसे इमीग्रेशन, विजा सत्यापन, अंतरराष्ट्रीय बैगेज हैंडलिंग में पूरी तरह सफल परीक्षण रहा। ऐसे में अगर कोई एयरलाइन कंपनी इंटरनेशनल रूट पर उड़ान शुरू करने का प्रस्ताव भेजती है तो रांची एयरपोर्ट पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने आगे बताया कि परीक्षण के दौरान सुरक्षा, इमीग्रेशन, यात्रियों का दबाव हर चीजों पर रांची एयरपोर्ट खरा उतरा है। अब बस जरूरत है तो किसी विमानन कंपनी के प्रस्ताव की। ऐसे में जो लोग खासतौर पर दिल्ली और मुंबई जाकर अंतरराष्ट्रीय उड़ान से सफर करते हैं, उनको बड़ी सुविधा होगी।

6000 यात्री करते हैं यात्रा

जानकारी देते हुए विनोद कुमार बताते हैं,रांची एयरपोर्ट में हर दिन 4000 से 5000 यात्री उड़ान भरते हैं। वहीं, कुछ खास मौके या फेस्टिव सीजन पर या वीकेंड के कोई खास दिन पर ये तादाद 6000 तक हो जाती है। साथ ही, रोजाना औसत 45-50 विमान की आवाजाही होती है। तो रांची एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए ठीक-ठाक संकेत नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 1800 करोड़ की बिकवाली हुई है। डाओ फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त है। उधर कल US इंडेक्स मिले-जुले रहे। लेकिन एशिया में कमजोर कारोबार होता दिख रहा है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

अनुमान के आसपास रहे HCL टेक के नतीजे

दूसरी तिमाही में HLC टेक के नतीजे अनुमान के आसपास रहे। रेवेन्यू में तीन तो मुनाफे में 11% की बढ़त दिखी। मार्जिन का आंकड़ा उम्मीद से अच्छा रहा। Advanced AI से रेवेन्यू 29% बढ़कर 219 मिलियन डॉलर पर रही। कंपनी ने पूरे कारोबारी साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस का लोअर रेंज 1%-4% से बढ़ाकर 2.5%-4% कर दिया है।

RBL Bank के Q2 नतीजे अच्छे

दूसरी तिमाही में RBL Bank ने अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा करीब तीन गुना हो गया है। ब्याज से होने वाली कमाई में 37 परसेंट का उछाल आया है। एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा है।

ICICI प्रू लाइफ, टाटा एलेक्सी के नतीजे आज

आज वायदा में शामिल ICICI प्रूडेंशियल लाइफ और Tata elxsi के नतीजे आएंगे। दूसरी तिमाही में ICICI Pru life का annual premium equivalent यानी APE 18% बढ़ सकता है। वहीं VNB मार्जिन में भी सुधार दिख सकता है। वहीं टाटा Tata elxsi के मुनाफे में तीन परसेंट तो रेवेन्यू में दो परसेंट की बढ़त संभव है।

TVS ग्रुप में पारिवारिक विवाद

TVS ग्रुप में उत्तराधिकार प्लान पर विवाद शुरू हो गया है। परिवार ओनरशिप और मैनेजमेंट के अधिकारों पर आमने-सामने है। मां मल्लिका श्रीनिवासन और बेटी लक्ष्मी वेणु ने सेटलमेंट का प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा है कि 2024 का फैमिली MOU कोई आर्थिक समझौता नहीं है। परिवार की सभी संपत्तियां कोई एक आदमी नहीं बांट सकता।

23 महीने के ऊपरी स्तर पर रिटेल महंगाई

रिटेल महंगाई 23 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर में CPI महंगाई 4.83% से बढ़कर 5.54% पर रही है। खाने-पीने की चीजों के साथ ग्रामीण और शहरी महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

कच्चे तेल में उबाल, 106 डॉलर के करीब

जियो पॉलिटिकल संकट गहराने से कच्चे तेल में उबाल आया है। इसके भाव 106 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रुस के यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रा पर हमले से कीमतों में उछाल आया है। हॉर्मूज संकट और हूती-सऊदी के बीच घमासान ने भी सेंटिमेंट खराब किए हैं।

मार्केट ओवरव्यू

पिछले सेशन में रिकवरी के बाद,12 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क पर फिर से बिकवाली का दबाव दिखा। IT, FMCG और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट के बीच निफ्टी 22,300 के स्तर की ओर फिसल गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत गिरकर 71,924.68 पर और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,363.35 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी बढ़त के साथ 22,415.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

इस साल मार्केट के सबसे चर्चित सेक्टर में से एक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों पर नतीजों के सीज़न से पहले फिर से दबाव बना है,जिससे एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है।

दक्षिण कोरिया और जापान में शेयरों में गिरावट के कारण MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.9% गिर गया है और अगस्त के मध्य के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है।

AI ट्रेड का पैमाना माने जाने वाले कोस्पी इंडेक्स में 4.8% तक की गिरावट आई है और यह जुलाई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है,क्योंकि चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों SK Hynix Inc. और Samsung Electronics Co. के शेयरों में 5% से ज़्यादा की गिरावट आई। टोक्यो में ट्रेडर्स के लंबे वीकेंड के बाद लौटने पर निक्केई 225 इंडेक्स में 2% की गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को नैस्डैक कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी वजह सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर हमले के बाद तेल की कीमतों में लगभग $2 प्रति बैरल की बढ़ोतरी रही।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 195.60 अंक या 0.38% बढ़कर 51,850.55 पर बंद हुआ। S&P 500 में 4.30 अंक या 0.06% की गिरावट आई और यह 7,807.24 पर बंद हुआ,जबकि नैस्डैक कंपोजिट 120.27 अंक या 0.44% गिर कर बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

12 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने 1,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा देना जारी रखा और सेशन के दौरान 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर खरीदे।

 

 

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सीजेपी नेताओं का अच्छा है!

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेताओं का बहुत अच्छा है। उनके नाम से प्रदर्शन हो रहे हैं, दिल्ली और पूरे देश में हंगामा मच रहा है, सरकार परेशान है और नौजवान सड़कों पर है, लेकिन इन नेताओं को कुछ नहीं करना होता है। ऐसा लग रहा है कि अभिजीत दीपके ने मौके को लपका और चीफ जस्टिस की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक सोशल मीडिया हैंडल बना दिया और उसके बाद से उसकी रॉयल्टी ले रहे हैं। उस सोशल मीडिया हैंडल से किसी भी मसले पर आंदोलन का ऐलान कर दिया जा रहा है और देश के लाखों युवा, जो पेपर लीक से लेकर एसआईआर या किसी अन्य मामलों में आक्रोशित हैं वे सड़क पर उतर जा रहे हैं।

सोचें, पारंपरिक रूप से किसी प्रदर्शन की तैयारी में कितनी मेहनत, कितने संसाधान, कितने नेता और कितनी ऊर्जा लगती है। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को कितना प्रयास करना पड़ रहा है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के नेताओं को इस तैयारी में लगाया गया है। वे रात दिन मेहनत करके लोगों को जुटा रहे हैं। सरकार की इतनी सख्ती है कि दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के कांग्रेस नेताओं को भी अपने घरों से निकल कर सेंट्रल दिल्ली पहुंचने के लिए गुरिल्ला अंदाज में कुछ उपाय करने पड़ रहे हैं। लेकिन अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ नहीं करना है। वे सिर्फ सोशल मीडिया में अपील कर रहे हैं या प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। पहले भी ये नेता सड़कों पर नहीं उतरे। आज भी नहीं उतर रहे हैं।

पहली बार जब अभिजीत दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे थे तो उनको बिना मांगे जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई थी। हवाईअड्डे पर ही पुलिस ने उनको मंजूरी दे दी। लेकिन उन्होंने क्या किया? तीन घंटे के प्रदर्शन में वे बेहोश हो गए और उनको एसी गाड़ी में बैठाना पड़ा और उसके बाद आंदोलन खत्म हो गया। जब 20 जून को फिर से आंदोलन शुरू हुआ तो सोनम वांगचुक और सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की तीन छात्राओं ने भूख हड़ताल किया। दिल्ली पुलिस ने जब वांगचुक को उठाया तो दीपके ने कहा कि वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे लेकिन दो घंटे भी भूख हड़ताल नहीं कर सके। उसके बाद भीड़ जुटाने की बारी आई तो लोग खुद ब खुद पहुंचे या भीम आर्मी के चंद्रशेखर भीड़ लेकर पहुंचे, जिसने आक्रामक तरीके से संसद की ओर मार्च किया।

इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। दीपके एंड कंपनी ने आठ अक्टूबर को बेंगलुरू में प्रदर्शन का ऐलान किया और प्रदर्शन से एक दिन पहले शाम को बेंगलुरू पहुंचे। फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और जर्मनी में रहने वाले इन्फ्लूएंसर ध्रुव राठी के नाम पर दो चार हजार लोग जुटे। इसके बाद 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन होना था। पर दीपके, दास और रांका बेंगलुरू में ही रहे। वही से ऐलान किया कि 10 अक्टूबर की सुबह साढ़े 10 बजे की फ्लाइट से दिल्ली लैंड करेंगे।

सोचें, प्रदर्शन 10 बजे से होना था और नेता साढ़े 10 बजे लैंड करने वाले थे। कोर टीम के तीन लोग जहाज में थे औऱ चौथी सदस्य रत्ना सिंह उनको लेने के लिए एयरपोर्ट पहुंची थीं। सो, चारों लोग अपनी सुविधा के हिसाब से वही एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिए गए। बाकी जनता जंतर मंतर के इलाके में लाठियां खा रही थी और दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों से गुरिल्ला वार कर रही थी। दूसरे दिन यानी 11 अक्टूबर का प्रदर्शन भी दूसरे लोगों ने किया। दीपके की दो दादी गुजर गईं इसलिए वे महाराष्ट्र चले गए और बाकी लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी जिम्मेदारी पूरी की।

इंडोनेशियाई पायलट के कारण विमान इजराइल में नहीं उतरा:फ्लाइट लौटी, पायलट बदलने पर मंजूरी मिली; फ्लाईदुबई हमले के बाद दुश्मन देशों के क्रू पर रोक

इथियोपियन एयरलाइंस के एक कार्गो विमान को इजराइल में उतरने की मंजूरी नहीं मिली। इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से आए इस विमान को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इजराइल ने यह फैसला पायलट के इंडोनेशियाई नागरिक होने के कारण लिया। इजराइल के इंडोनेशिया से राजनयिक संबंध नहीं हैं। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना रविवार देर रात हुई। इसके बाद विमान के पायलट को बदलकर दूसरे पायलट को जिम्मेदारी दी गई, जिसे इजराइल में उतरने की मंजूरी थी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में पायलट के हमले के बाद इजराइल ने विदेशी एयरलाइंस के लिए सुरक्षा नियम सख्त किए हैं। नए नियमों के तहत उन देशों के नागरिकों को इजराइल आने वाली उड़ानों में पायलट या क्रू मेंबर के तौर पर सफर करने से रोकने की बात कही गई है, जिनके इजराइल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। विमान का ईंधन समुद्र के ऊपर गिराना पड़ा इथियोपियन एयरलाइंस की फ्लाइट में सवार क्रू मेंबर्स की लिस्ट विमान के अदीस अबाबा से उड़ान भरने के बाद इजराइल को भेजी गई थी। यानी विमान के रवाना होने से पहले इजराइल को उसके क्रू की पूरी जानकारी नहीं मिली थी। विमान में उड़ान भरते समय काफी ईंधन था। पायलट को वापस अदीस अबाबा लौटना था, इसलिए विमान का वजन कम करने के लिए समुद्र के ऊपर ईंधन गिराया गया। इसके बाद पायलट को बदल दिया गया। नए पायलट को इजराइल में उतरने की मंजूरी मिलने के बाद विमान के दोबारा वहां जाने का रास्ता साफ हुआ। फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलट ने किया था हमला यह घटना उस हमले के दो हफ्ते बाद हुई है, जिसमें दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के एक पायलट ने अपने सह-पायलट पर चाकू से हमला कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर विमान को इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर गिराने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, कई यात्रियों ने बीच में आकर उसे रोक दिया और विमान की सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग कराई गई। फ्लाइदुबई की फ्लाइट का रूट देखें… ईरान-पाकिस्तान के नागरिक भी आसानी से इजराइल आ रहे थे फ्लाईदुबई की घटना के बाद जांच में पता चला था कि दुश्मन देशों के सैकड़ों क्रू मेंबर पहले भी इजराइल आ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना था। इजराइल के परिवहन मंत्रालय ने विदेशी एयरलाइंस के लिए नियम सख्त कर दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान, इराक, लेबनान और पाकिस्तान जैसे देशों की नागरिकता रखने वाले पायलट और दूसरे विमान कर्मचारी पिछले कुछ सालों में आसानी से इजराइल आ रहे थे। इजराइली मीडिया के मुताबिक, देश की सुरक्षा एजेंसियां कई सालों से विदेशी एयरलाइंस के कर्मचारियों की जांच में कमियों को लेकर चेतावनी दे रही थीं। उनका कहना था कि परिवहन मंत्रालय इजराइल आने वाली विदेशी एयरलाइंस और उनके क्रू मेंबर्स की पर्याप्त सुरक्षा जांच नहीं कर रहा था। इसके अलावा, विदेशी एयरलाइंस की ओर से संचालित इजराइली उड़ानों की जांच में भी कमियां थीं। इस पर परिवहन मंत्रालय ने कहा था कि उसके पास खुफिया जानकारी जुटाने के लिए जरूरी तंत्र नहीं है। हमले के बाद इजराइल ने फ्लाईदुबई को पत्र भेजा था इजराइली न्यूज चैनल 12 के मुताबिक, फ्लाईदुबई हमले के अगले दिन इजराइल के परिवहन मंत्रालय ने एयरलाइंस को एक पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि विमान संचालक दुश्मन देशों के नागरिकों को इजराइल जाने वाली उड़ानों में पायलट, क्रू मेंबर या यात्री के तौर पर सफर करने की अनुमति न दें। पत्र में कहा गया था कि मंत्रालय समय-समय पर जांच करेगा कि एयरलाइंस सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए जरूरी योजनाओं, उपायों और प्रक्रियाओं को लागू कर रही हैं या नहीं। इसके लिए मंत्रालय मौके पर जाकर भी जांच करेगा। दोहरी नागरिकता वाले क्रू मेंबर्स पर भी लागू नियम पत्र में विमान संचालकों को यह भी कहा गया था कि इजराइल के फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन में आने वाली उड़ानों में ऐसे पायलट या कॉकपिट क्रू मेंबर नहीं होने चाहिए, जो उन देशों के नागरिक हों जिनके इजराइल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। यह नियम उन लोगों पर भी लागू है जिनके पास ऐसे किसी देश की दोहरी नागरिकता है। यानी किसी व्यक्ति के पास दो देशों की नागरिकता होने पर भी यह नियम लागू होगा, अगर उनमें से एक देश के इजराइल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। परिवहन मंत्रालय ने एयरलाइंस को चेतावनी दी थी कि वह इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लगातार जांच करे। ————————– यह खबर भी पढ़ें… फ्लाईदुबई विमान को बचाने वाले दोनों सीक्रेट पायलट कौन दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट ने भारतीय को-पायलट पर हमला किया तो विमान तेजी से नीचे जाने लगा। घायल कैप्टन स्मित मच्छर ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला। इससे प्लेन में मौजूद बाकी दो पायलटों को कॉकपिट में पहुंचने का मौका मिल गया और उन्होंने इसे संभाल लिया। पूरी खबर पढ़ें…