झारखंड में 2014 के बाद से अबतक की ये 44 भर्ती परीक्षाएं एक झटके में रद्द! जज-साइंटिस्ट, लेक्चरर तक की नौकरी गई! पूरी लिस्ट यहां देखिए

Jharkhand Exam Cancelled: झारखंड में छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और गड़बड़ियों के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार देर रात झारखंड सरकार ने कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी कर दी। देर रात जारी किए गए आठ अलग-अलग नोटिफिकेशंस के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट किया कि रद्द की गई परीक्षाओं में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा साल 2014 से आयोजित की गई परीक्षाएं शामिल हैं।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई चार घंटे की आपात कैबिनेट बैठक के फैसलों के बाद आई है। गौरतलब है कि सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक JSSC-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा को रद्द कर दिया था। साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा प्रकाशित परिणामों को भी रद्द कर दिया गया।

रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल प्रमुख पद

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार रद्द की गई 44 परीक्षाओं में प्रशासनिक, न्यायिक, शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, सहायक अभियंता, सिविल जज, अपर लोक अभियोजक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक वन संरक्षक और इसके दूसरे प्रशासनिक एवं तकनीकी पद शामिल हैं।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट और इंटरनल विजिलेंस सेल का प्रस्ताव

सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए झारखंड उच्च न्यायालय से फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा JPSC और JSSC में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोनों आयोगों के भीतर एक इंटरनल विजिलेंस सेल बनाने का भी फैसला लिया गया है।

IAS अमिताभ कौशल समिति 2 महीने में सौंपेगी रिपोर्ट

JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार और सिफारिशें देने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस सुधार समिति को 2 महीने के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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बिना एक बूंद तेल के हवा में उड़ा दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक विमान, 27 मिनट की उड़ान का बिजली का खर्च सिर्फ 5 डॉलर

इलेक्ट्रिक विमान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। दुनिया के सबसे बड़े पूरी तरह बैटरी से चलने वाले विमान ने पहली बार सफल उड़ान भरी है। इसे स्वीडन की कंपनी हार्ट एयरोस्पेस ने तैयार किया है। 30 सीटों वाले इस विमान ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित प्लैट्सबर्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली परीक्षण उड़ान भरी। परीक्षण के दौरान विमान ने केवल बैटरी की मदद से 27 मिनट तक उड़ान भरी और करीब 1,100 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। विमान के पंखों की चौड़ाई करीब 106 फीट है और इसका वजन लगभग 25,000 पाउंड है। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परीक्षण उड़ान में कोई यात्री नहीं था और विमान में सिर्फ एक पायलट मौजूद था।

हार्ट एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ एंडर्स फोर्सलुंड ने कहा कि X1 की पहली उड़ान के साथ कंपनी ने कमर्शियल विमान के स्तर पर इलेक्ट्रिक उड़ान की क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक कमर्शियल विमान आने वाले समय में एयरलाइन कंपनियों के खर्च के तरीके को बदल सकते हैं। इससे भविष्य में यात्रियों के लिए हवाई यात्रा का खर्च भी कम हो सकता है। कंपनी के मुताबिक, X1 पूरी तरह बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक प्रणाली पर काम करता है। इसका सिस्टम 1 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा कर सकता है। इस सफल परीक्षण से यह जरूर पता चला है कि बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक प्रणाली छोटे कमर्शियल विमान के स्तर पर काम कर सकती है। हालांकि, अभी इसकी उड़ान की दूरी और बैटरी के ज्यादा वजन जैसी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए पूरी तरह इलेक्ट्रिक यात्री विमान से नियमित हवाई यात्रा शुरू होने में अभी समय लग सकता है।

इसकी लागत कितनी आई?

X1 की परीक्षण उड़ान में इस्तेमाल हुई बिजली की अनुमानित लागत सिर्फ 5 डॉलर रही। हालांकि, यह आंकड़ा सुनने में काफी कम लगता है, लेकिन यह केवल 27 मिनट की परीक्षण उड़ान के दौरान इस्तेमाल हुई बिजली का खर्च है। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 5 डॉलर में विमान की पूरी संचालन लागत शामिल नहीं है। इसमें पायलट की सैलरी, रखरखाव, एयरपोर्ट फीस, बैटरी की क्षमता कम होने का खर्च, विमान की फाइनेंसिंग और बीमा जैसी लागतें शामिल नहीं हैं।

फिर भी यह परीक्षण इलेक्ट्रिक विमानों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। यह उड़ान ऐसे समय में हुई है जब दुनियाभर में जेट ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हार्ट एयरोस्पेस का मानना है कि ईंधन की बढ़ती और बदलती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक विमान एयरलाइंस का संचालन खर्च काफी कम कर सकते हैं। इससे भविष्य में विमान कंपनियों की वैश्विक तेल बाजार पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

Noida Airport: जेवर एयरपोर्ट के पास सेक्टर 23C में बनेगा नया इंटरस्टेट बस टर्मिनल! ताइवान सिटी, यूनिवर्सिटी और मेडिकल हब को लेकर ये है प्लान

Noida Airport News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) तक पहुंचने और वहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं आसपास के राज्यों के विभिन्न शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एयरपोर्ट के नजदीक एक इंटरसिटी बस टर्मिनल बनाने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही क्षेत्र में सिटी बसों की संख्या बढ़ाने समेत स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और औद्योगिक विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्टों को भी हरी झंडी दी गई है।

सेक्टर-23 में बनेगा इंटरसिटी बस टर्मिनल

YEIDA के फैसले के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर-23 में ‘इंटरसिटी बस टर्मिनल’ विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और कस्बों से बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा के जरिए जोड़ना है।

इस टर्मिनल के बनने के बाद यात्रियों को निजी गाड़ियों या कैब पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के विभिन्न शहरों तक बस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से अपने गंतव्य तक जाने में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

100 से बढ़ाकर 500 की जाएगी सिटी बसों की संख्या

YEIDA बोर्ड ने इस एरिया में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में चलने वाली सिटी बसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 500 करने की मंजूरी दी गई है। इस कदम से एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे रिहायशी, कमर्शियल और औद्योगिक इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। जैसे-जैसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, सार्वजनिक परिवहन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।

एयरपोर्ट से आसपास के इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी

YEIDA के CEO आरके सिंह के अनुसार, प्रस्तावित बस टर्मिनल एयरपोर्ट को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका मकसद यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे वे एयरपोर्ट से सीधे विभिन्न शहरों और कस्बों तक आसानी से यात्रा कर सकें।

फिलहाल,नोएडा एयरपोर्ट के आसपास तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने के साथ परिवहन व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में इंटरसिटी बस टर्मिनल और सिटी बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला क्षेत्र के भविष्य के यातायात ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

एयरपोर्ट के आसपास बनेगा 500 एकड़ का मेडिकल हब

YEIDA बोर्ड के फैसले सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं हैं। प्राधिकरण ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े विस्तार का भी रास्ता साफ कर दिया है।बोर्ड ने सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल हब बनाने को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट से आने वाले समय में बड़े अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सेक्टर-34 में 40 एकड़ का यूनिवर्सिटी टाउनशिप

शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सेक्टर-34 में 40 एकड़ जमीन पर यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली है। इससे यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है। एयरपोर्ट के आसपास शैक्षणिक संस्थानों और आधुनिक टाउनशिप के विकास से क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

50 एकड़ में बनेगा इंटरनेशनल स्टेडियम

इस एरिया में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। YEIDA बोर्ड ने 50 एकड़ में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए जमीन मंजूर की है। इसके अलावा अन्य सार्वजनिक और व्यावसायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी जमीन को मंजूरी दी गई है। इससे एयरपोर्ट के आसपास का पूरा क्षेत्र केवल एक ट्रांसपोर्ट हब के बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

सेक्टर-6 में 300 एकड़ में बनेगी ‘ताइवान सिटी’

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए YEIDA ने सेक्टर-6 में 300 एकड़ जमीन ‘ताइवान सिटी’ के लिए आरक्षित करने का भी फैसला किया है। इसका उद्देश्य ताइवान की कंपनियों और उद्योगों को आकर्षित करना है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को। यदि इस योजना को बड़े स्तर पर उद्योगों का समर्थन मिलता है तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण का एक नया औद्योगिक केंद्र विकसित हो सकता है।

तेजी से बदलने जा रहा है एयरपोर्ट के आसपास का इलाका

YEIDA के इन फैसलों से साफ है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास केवल हवाई यात्रा से जुड़ा ढांचा ही नहीं, बल्कि एक बड़े और आधुनिक शहरी क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इंटरसिटी बस टर्मिनल, 500 सिटी बसों की योजना, 500 एकड़ का मेडिकल हब, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और ताइवान सिटी जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।

बिना फ्लाइट टिकट हवा से देखें पूरा भारत, दिल्ली में बनी यह जादुई जगह!

दिल्ली के लोगों और देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट के लिए एक नया पार्क बनाया गया है। द्वारका सेक्टर-20 में करीब 200 एकड़ में फैला यह पार्क जल्द ही प्लानिंग के साथ सभी लोगों के लिए खोला जाएगा। यहां टूरिस्ट को पर्यावरण, मनोरंजन और भारतीय संस्कृति का यूनिक एक्सपीरियंस मिल सकेगा।

भारत वंदना पार्क की सबसे बड़ा फीचर इसका 1.2 किलोमीटर लंबा स्काइब्रिज और ‘मिनी इंडिया’ जोन है। स्काइब्रिज पर घूमते हुए लोग पार्क के खूबसूरत नजारों का मजा ले सकेंगे और साथ ही मिनी इंडिया जोन में देश के अलग-अलग हिस्सों का कल्चर देखने को मिलेगा। यह पार्क के लोगों के घूमने की नई जगह तो बनेगा ही, साथ ही देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट को भी अट्रैक्शन पोईटन भी बनेगा।

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कॉस्ट और इनॉगरेशन

भारत वंदना पार्क को लगभग 550 करोड़ रुपये की कॉस्ट से तैयार किया जा रहा है। तकरीबन 200 एकड़ में फैले इस पार्क का बाहरी हिस्सा लगभग तैयार हो चुका है और अब इसे कुछ समय बाद ही लोगों के लिए खोला जाएगा। उम्मीद है कि अगले एक से दो महीनों में इनॉगरेशन हो सकता है। पार्क में घूमने के साथ-साथ लोगों के लिए बोटिंग, लेक-व्यू रेस्तरां और मॉडर्न टिकट काउंटर जैसी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।

एलिवेटेड स्काइब्रिज

पार्क का सबसे बड़ा अट्रैक्शन 1.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड स्काइब्रिज होगा। यह जमीन से करीब 18 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है और नौ बड़े पाइलान पर टिका होगा। यहां चलते हुए लोगों को पूरे पार्क और ‘मिनी इंडिया’ का ऊपर से 360 डिग्री नजारा देखने को मिलेगा। इसकी डिजाइन पेड़ों के तनों से इंस्पायर्ड है। नौ पाइलान को पेड़ का शेप दिया जा रहा है, जिन पर पत्तियों जैसे एल्युमिनियम पैनल लगाए जाएंगे, जिससे स्काइब्रिज का लुक एकदम यूनिक नजर आएगा।

मिनी इंडिया

भारत वंदना पार्क का ‘मिनी इंडिया’ जोन यहां आने वाले लोगों के लिए बेस्ट एक्सपीरियंस होगा। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की फेमस बिल्डिंग और सांस्कृतिक धरोहरों की कॉपी बनाई गई हैं। जिसमे जयपुर का हवा महल, कर्नाटक का हंपी रथ मंदिर, एलोरा की गुफाएं, अंडमान का सेल्यूलर जेल, पटना का गोलघर, बनारस के घाट और पुराने संसद भवन जैसी जगहों की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की प्रतिकृति और महावीर मंदिर मेजर अट्रैक्शन रहेंगे।

कई चुनौतियों के बाद हुआ तैयार

भारत वंदना पार्क का शिलान्यास 17 दिसंबर 2019 को किया गया था और इसे मार्च 2022 तक पूरा करने की प्लानिंग थी। लेकिन कोरोना महामारी, कंस्ट्रक्शन से जुड़ी परेशानियों और पार्क के कॉम्प्लेक्स डिजाइन के कारण काम में देरी हुई। स्काइब्रिज के ऊंचे पाइलान, एयरपोर्ट के पास होने के कारण काफी दिक्कत हुयी। इसके बाद पाइलान की ऊंचाई कम करके डिजाइन चेंज करना पड़ा।

भारत वंदना पार्क के खुलने के बाद दिल्ली में घूमने के लिए एक नया और यूनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन खुल जाएगा। यहां लोग स्काइब्रिज से खूबसूरत नजारे देखने के साथ ‘मिनी इंडिया’ में देश की संस्कृति और फेमस हेरिटेज को एक ही जगह देख सकेंगे। हरियाली, झील, बोटिंग और मनोरंजन की सुविधाओं के साथ यह पार्क फैमिली और टूरिस्ट के लिए मेजर अट्रैक्शन बन सकता है।

पासपोर्ट खोने की गलती पड़ सकती है भारी, तुरंत अपनाएं ये आसान ट्रिक

विदेश ट्रैवलिंग करते समय यदि अचानक आपका पासपोर्ट खो जाए, तो घबराहट हो ही जाती है। लेकिन ऐसी सिचुएशन में जल्दबाजी करने से बेहतर सही कदम उठाना जरूरी होता है। थोड़ी समझदारी और सही जानकारी के साथ आप नया ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवा सकते हैं और अपनी जर्नी बिना ज्यादा परेशानी के कर सकते हैं।

पहले ढूंढें और शिकायत करें

अगर विदेश में आपका पासपोर्ट नहीं मिल रहा है, तो घबराएं नहीं। होटल का कमरा, बैग, कैब, एयरपोर्ट या जिन जगहों पर आप गए थे, वहां अच्छी तरह से चेक करें। अगर फिर भी पासपोर्ट नहीं मिलता या चोरी होने का शक है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में कम्प्लेन कराएं। पुलिस रिपोर्ट बहुत जरूरी होती है, क्योंकि नया पासपोर्ट या इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवाते समय इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए कम्प्लेन करने में देर न लगाएं।

एम्बेसी से तुरंत कांटेक्ट करें

पुलिस में कम्प्लेन करने के बाद अपने देश के पास के इंडियन एम्बेसी (Embassy) या वाणिज्य दूतावास (Consulate) से कांटेक्ट करें। वहां के ऑफिसर आपको पूरी प्रोसेस समझाएंगे और बताएंगे कि आगे क्या करना है। अगर आपके पास आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट या उनकी कॉपी हैं, तो उन्हें साथ रखें। इससे आपकी आइडेंटिटी जल्दी चेक हो जाती है और नया डॉक्यूमेंट बनवाने में आसानी होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट रखें तैयार 

जब भी आप ट्रिप पर निकले तो पहले पासपोर्ट, वीजा और दूसरे जरूरी आइडेंटिटी कार्ड की डिजिटल और प्रिंट कॉपी अपने पास जरूर रखें। ओरिजिनल पासपोर्ट खो जाए, तो यही कॉपियां आपके काम आ सकती हैं। नया पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट, पहचान का प्रमाण, जन्मतिथि का प्रमाण, पते का प्रमाण और पासपोर्ट खोने का एफिडेबिट डॉक्यूमेंट लिए जा सकते हैं। पहले से तैयारी होने पर परेशानी कम होती है।

नया पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट

अगर आपकी ट्रिप अभी बाकी है, तो आप नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसमें कुछ दिन या करीब एक हफ्ते लग सकते है। लेकिन अगर आपको सिर्फ भारत वापस लौटना है, तो एम्बेसी आपको इमरजेंसी सर्टिफिकेट या टेम्परेरी ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इससे आप अपने देश वापस आ सकते हैं। यह फैसिलिटी ट्रैवल के बेस पर दी जाती है।

वीजा और इंश्योरेंस का रखें ध्यान 

पुराने पासपोर्ट में किसी देश का वैलिड वीजा होने पर उसके लिए भी अलग से प्रोसेस पूरी करनी पड़ सकती है। ऐसे में उस देश के एम्बेसी से कांटेक्ट करें और नया वीजा बनाने की प्रोसेस जाने। साथ ही अपनी एयरलाइन, होटल और ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनी को भी पासपोर्ट खोने के बारे में बताये। कई ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसीस इस केस में ज्यादा रहने, आने-जाने और जरूरी डॉक्यूमेंट बनवाने का खर्च भी कवर करती हैं।

आगे के लिए रखें ये सावधानी 

पासपोर्ट खोने जैसी परेशानी से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी तैयारी आपका काफी टाइम और स्ट्रेस बचा सकती है। टॉवल से पहले पासपोर्ट और वीजा की स्कैन कॉपी क्लाउड स्टोरेज में सेव करें, एक कॉपी ईमेल में रखें और एक प्रिंट अपने सामान से अलग रखें। किसी भरोसेमंद फैमिली मेंबर के पास भी इसकी कॉपी होना अच्छा रहता है। यह तैयारी मुश्किल समय में आपकी ट्रिप को एक बड़ी मदद कर सकती है।

चंबल नदी में बड़ा हादसा टला, ईंधन खत्म होने से बीच धारा में फंसा स्टीमर, 40 यात्री थे सवार

चंबल नदी में बड़ा हादसा टला, ईंधन खत्म होने से बीच धारा में फंसा स्टीमर, 40 यात्री थे सवार

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में रविवार सुबह चंबल नदी के उफान के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 35 से 40 यात्रियों को लेकर जा रहे स्टीमर का बीच नदी में ईंधन खत्म हो गया। ईंधन खत्म होने के कारण स्टीमर तेज बहाव के बीच कुछ समय तक फंसा रहा। अधिकारियों के मुताबिक, स्टीमर में यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट भी उपलब्ध नहीं थे। मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने बताया कि स्टीमर में उत्तर प्रदेश से आए यात्री सवार थे। नदी का जलस्तर बढ़ा होने के कारण ईंधन खत्म होने के बाद स्टीमर तेज बहाव में बेबस होकर बहने लगा।

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डीजल पहुंचाकर स्टीमर को किनारे लाया गया

 

स्थानीय प्रशासन को घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल डीजल की व्यवस्था की गई। अधिकारियों ने स्टीमर तक डीजल पहुंचाया, जिसके बाद उसमें दोबारा ईंधन भरा गया और उसे सुरक्षित तरीके से नदी के किनारे लाया गया। कलेक्टर के मुताबिक, स्टीमर में सवार सभी 35 से 40 लोग सुरक्षित हैं। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

 

आगरा से संचालित हो रहा था स्टीमर

 

अधिकारियों के अनुसार, यह स्टीमर उत्तर प्रदेश के आगरा से संचालित किया जा रहा था और इसका ऑपरेटर भी आगरा का रहने वाला है। जांच में यह भी सामने आया कि स्टीमर में यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था नहीं थी। उफनती चंबल नदी में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के स्टीमर का संचालन किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

मध्य प्रदेश से निकलकर यूपी तक जाती है चंबल

 

चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश की विंध्य पर्वतमाला में महू के पास जनापाव पहाड़ियों से होता है। यह नदी मध्य प्रदेश से निकलकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है और इटावा के पास यमुना नदी में मिल जाती है। मानसून के दौरान चंबल में जलस्तर बढ़ने के कारण नदी का बहाव काफी तेज हो जाता है। ऐसे में नाव और स्टीमर संचालन में सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी होती है।

Varanasi Airport Firing: वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियारों की जांच के दौरान अचानक पिस्तौल से चली गोली! Air India Express के 2 कर्मचारी घायल

Varanasi Airport Firing: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन में रविवार (16 अगस्त) सुबह जांच के दौरान एक यात्री के लाइसेंसी पिस्तौल से अचानक गोली चल जाने से हड़कंप मच गया। गोली की चपेट में आने से एयरपोर्ट पर तैनात एक महिला कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि मुंबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए आजमगढ़ निवासी कमलेश राय पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनके पास लाइसेंसी पिस्तौल थी।

उन्होने बताया कि जांच के दौरान पिस्टल की जांच और उसमें मौजूद गोलियों की गिनती की जा रही थी, तभी अचानक फायरिंग हो गई। उन्होंने बताया कि इस घटना में जांच कर रही महिला कर्मचारी के पैर में और पास खड़े एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पत्नी के साथ जा रहा था मुंबई

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट नंबर IX-1810 से मुंबई जा रहा था। उसके पास एक पिस्तौल और मैगजीन थी। उसने फ्लाइट में चढ़ने से पहले अधिकारियों को हथियारों की जानकारी दी। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता के मुताबिक, जब हथियार और उसके कागजात की जांच हो रही थी, तभी बंदूक अचानक से चल गई। उन्होंने बताया कि हथियार और उसके कागजात की जांच के समय हथियार का मालिक और एयरपोर्ट का स्टाफ दोनों मौजूद थे।

फायरिंग में दो कर्मचारी घायल

गोली पहले जमीन पर लगी और फिर पास खड़े दो स्टाफ सदस्यों को जा लगी। एक महिला स्टाफ सदस्य की जांघ में गोली लगी। जबकि एक पुरुष स्टाफ सदस्य के हाथ में चोट आई। वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर के मुताबिक, यह घटना 16 अगस्त, 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे हुई। गुप्ता ने बताया कि घायल दोनों स्टाफ सदस्यों की हालत स्थिर है। फिलहाल, उनका इलाज चल रहा है। ANI के मुताबिक, एयरपोर्ट डायरेक्टर ने कहा कि स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।

वाराणसी एयरपोर्ट के डायरेक्टर ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “आज सुबह करीब 9:30 बजे, मुंबई जाने वाली फ्लाइट IX-1810 में अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहे एक यात्री ने फ्लाइट में हथियार ले जाने की जानकारी दी। हथियारों की जांच के दौरान यात्री ने एक राउंड गोली चलाई, जिससे दो AAICLAS स्क्रीनर घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। स्थानीय पुलिस को सूचित कर दिया गया है। जांच चल रही है।” पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारी अब इस घटना की विस्तार से जांच कर रहे हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के 5 साल पूरे:महिलाओं की आजादी छीनी, प्रेस पर पाबंदियां बढ़ीं, लोगों को कोड़े से मारने की सजा दी गईं

तालिबान के काबुल पर कब्जे के आज पांच साल पूरे हो गए हैं। पांच साल में अफगानिस्तान की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। तालिबान ने पूरे देश पर अपना नियंत्रण मजबूत किया और अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार आया। लेकिन दूसरी तरफ महिलाओं के अधिकारों पर सख्त पाबंदियां लगीं, प्रेस की आजादी घटी और शारीरिक सजाएं फिर आम हो गईं। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2021 से नवंबर 2022 के बीच अदालतों ने कम से कम 18 मामलों में शारीरिक सजा का आदेश दिया। इनमें ज्यादातर मामले तथाकथित नैतिक अपराधों से जुड़े थे। दिसंबर 2022 में परवान प्रांत के एक स्टेडियम में भीड़ के सामने 27 लोगों को सबके सामने कोड़े मारे गए। तालिबान से पहले की अफगान सरकारों के दौर में भी शारीरिक सजा मौजूद थी, लेकिन तालिबान के शासन में इसे खुले तौर पर और नियमित रूप से लागू किया जाने लगा। 15 अगस्त 2021: काबुल में दाखिल हुआ तालिबान अफगानिस्तान में 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। कुछ ही घंटों में अफगान सरकार का पतन हो गया। कमर्शियल फ्लाइट रद्द हो गईं और हजारों लोग देश छोड़ने के लिए काबुल एयरपोर्ट पहुंच गए। तालिबान ने उस समय महिलाओं के अधिकार बनाए रखने और अमेरिका व पिछली अफगान सरकार के साथ काम करने वालों को माफी देने का वादा किया था। प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा था कि लोगों को अपनी संपत्ति, जान या सम्मान को लेकर खतरा नहीं होगा। लेकिन अगले पांच साल में तस्वीर इन वादों के बिल्कुल उलट नजर आई। छात्राओं को सेकेंडरी स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने से रोका अफगानिस्तान अब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां छात्राओं को औपचारिक रूप से सेकेंडरी स्कूल और यूनिवर्सिटी में पढ़ने से रोक दिया गया है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद महिलाओं पर पाबंदियां लगातार बढ़ती गईं। नौकरी करने, और सार्वजनिक जगहों पर जाने को लेकर भी कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। UN की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के राज में अब तक महिलाओं के खिलाफ 100 से ज्यादा फरमान जारी हो चुके हैं। सर्वे में शामिल 10 में से 7 महिलाओं ने अपनी मानसिक स्थिति को खराब या बहुत खराब बताया। आधे से ज्यादा महिलाओं ने कहा कि वे महीने में सिर्फ एक या दो बार घर से बाहर निकलती हैं। करीब तीन-चौथाई महिलाओं ने पुरुष अभिभावक के बिना घर से बाहर निकलने में असुरक्षा महसूस होने की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में सिर्फ 7% महिलाएं नौकरी कर रही हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 84% है। प्रेस पर दबाव, सैकड़ों पत्रकारों ने देश छोड़ा तालिबान शासन में पत्रकारिता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स यानी CPJ ने अफगानिस्तान को पत्रकारों के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक और मुश्किल जगहों में शामिल किया है। 2021 के बाद से कई अफगान पत्रकार देश छोड़ चुके हैं। तालिबान शासन में अफगानिस्तान की इकोनॉमी बढ़ीं तालिबान के शासन में अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद नहीं हुई। कुछ क्षेत्रों में सुधार के संकेत मिले हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 2025 में अफगानिस्तान की वास्तविक GDP 4.8% बढ़ी। सरकार का घरेलू राजस्व भी बढ़कर GDP का 19.8% हो गया। लेकिन इस ग्रोथ का फायदा आम लोगों तक व्यापक रूप से नहीं पहुंचा। प्रति व्यक्ति आय घटी है और महंगाई बढ़ी है। देश अभी भी बड़े स्तर पर आयात पर निर्भर है। बिजली की कमी, बैंकिंग सुविधाओं तक सीमित पहुंच, बड़े अनौपचारिक कैश सेक्टर और विदेशी मदद में कमी भी आर्थिक विकास के लिए बड़ी चुनौती हैं। अफीम की खेती में 95% गिरावट तालिबान के सत्ता में आने के समय अफगानिस्तान दुनिया में अफीम का सबसे बड़ा स्रोत था। UNODC के मुताबिक 2022 में दुनिया की करीब 80% अफीम अफगानिस्तान से आती थी। अप्रैल 2022 में तालिबान ने पोस्ता (अफीम का पौधा) की खेती पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर खेती पर पड़ा। UNODC के 2023 के सर्वे के मुताबिक पोस्ता की खेती में 95% की गिरावट आई। रूस ने तालिबान सरकार को मान्यता दी तालिबान सरकार को अब तक सिर्फ रूस ने औपचारिक रूप से मान्यता दी है। हालांकि तालिबान का कहना है कि वह करीब 40 देशों के संपर्क में है और औपचारिक मान्यता के लिए जरूरी शर्तें पूरी कर चुका है। भारत ने भी तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता दिए बिना काबुल के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं। अक्टूबर 2025 में तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत आए थे। यह तालिबान सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी की भारत की पहली यात्रा थी। चीन और UAE ने भी तालिबान द्वारा नियुक्त राजदूतों को स्वीकार किया है, हालांकि दोनों ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। —————- यह खबर भी पढ़ें… PM रहमान की भारत यात्रा से पहले बांग्लादेश की शर्त: शेख हसीना को राजनीति से दूर रखा जाए; 21 अगस्त को दिल्ली आ सकते हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है। पूरी खबर पढ़ें…

Govinda: ‘अब ज्यादा हो रहा है हद में रहिए…,’ सुनीता के ‘शुगर डैडी’ वाले तंज पर गोविंद का पलटवार

Govinda: गोविंदा और सुनीता आहूजा की मैरिड लाइफ में एक बार फिर दरार आ गई है, जब सुनीता आहूजा ने गोविंदा को प्रेमिका कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एयरपोर्ट पर देखा। सुनीता ने गोविंदा को कोमल का “शुगर डैडी” कहा, जबकि हीरो नंबर 1 अभिनेता ने अपनी पत्नी को कोई जवाब नहीं दिया और कहा, “अपनी हद में रहो।”

आज पैप से बात करते हुए, गोविंदा ने सुनीता आहूजा के कमेंट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, “देश के सभी बड़े कलाकारों ने उन सभी लड़कियों के साथ काम किया है, जो यंगस्टर्स राही हैं। आप एक भी कसार नहीं छोड़ रही हैं कि मैं लोगों के दिलों से उतर जाऊं। शोहरत, इज्जत, दौलत सब मिली हुई हैं।” ऊपरवाले ने दी है। इसका मतलब ये नहीं कि जिसके पास नहीं है, आप जलील करें।

गोविंदा और कोमल के बार-बार साथ दिखने पर सुनीता आहूजा ने कहा, “फिल्म बननी भी तो चाहिए। फिल्म बनने के बाद ही प्रमोशन होता है। क्या कहें… अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ घूम रहे हैं, उन्हें थोड़ी शर्म आनी चाहिए। और कुछ तो स्टैंडर्ड होना चाहिए। तुम्हारा ‘शुगर डैडी’ इतना अमीर है, तो ढंग के कपड़े तो पहनो। हमें देखो, हम कितने स्टाइल में चलते हैं। बहुत बुरा है, उनका दिमाग खराब हो गया है।”

इससे पहले, ANI से बात करते हुए गोविंदा ने सुनीता के उन दावों पर बात की जिनमें उनके कथित अफेयर की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “वह मुझे बहुत प्यार से डांटती-फटकारती हैं, और मैं उसे प्यार से स्वीकार कर लेता हूं। मुझे लगता है कि लोग जहां भी हों और भगवान ने उन्हें जो भी भूमिका दी हो, या जो भी खास जगह उन्हें मिली हो, उनके बिना हम सफलता हासिल नहीं कर पाते।

हम आज जो हैं, वो नहीं हो पाते। हमारे परिवार के जो बच्चे अब बड़े हो गए हैं, उन पर उनका पूरा हक है। उन्होंने उनके साथ भी बहुत अच्छा व्यवहार किया।” गोविंदा और सुनीता की शादी 11 मार्च 1987 को एक निजी समारोह में हुई थी और उन्होंने अपनी शादी की बात तब तक गुप्त रखी जब तक कि उनकी पहली संतान, टीना आहूजा, का जन्म नहीं हो गया।

अमेरिका में 43 लाख की सर्जरी भारत में सिर्फ 4.3 लाख में हुई! फिर भी अमेरिकी महिला ने बताईं ये 3 कमियां

अमेरिका की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से चर्चा में है। उन्होंने अपनी मां के इलाज से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अलग-अलग देशों में मेडिकल खर्च को लेकर बहस छेड़ दी। मां की सर्जरी के लिए अमेरिका में मिले खर्च के अनुमान ने परिवार को दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने विदेश में इलाज कराने के बारे में सोचा और कई देशों पर विचार किया। इसी दौरान भारत का विकल्प भी उनके सामने आया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इलाज के साथ नए देश में अस्पताल, सुविधाओं और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी भरोसा जरूरी था।

लेकिन भारत पहुंचने के बाद सामने आया अनुभव उनके लिए उम्मीद से अलग रहा। महिला ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद भारत की मेडिकल सुविधाओं और इलाज की लागत को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

डॉक्टर की सलाह पर भारत आए

इसी दौरान महिला के एक डॉक्टर दोस्त ने उन्हें भारत में इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद परिवार ने भारत आने का फैसला किया। महिला के अनुसार, भारत के एक बड़े अस्पताल में उनकी मां की सर्जरी हुई। अस्पताल में रहने का खर्च भी इसमें शामिल था।

सिर्फ ₹4.3 लाख में हुआ इलाज

महिला ने बताया कि भारत में सर्जरी और अस्पताल में रहने समेत कुल खर्च करीब 4,500 डॉलर यानी 4.3 लाख रुपये आया। अमेरिका में मिले अनुमान से तुलना करें तो यह रकम करीब दस गुना कम थी। हालांकि, इलाज का वास्तविक खर्च मरीज और बीमारी के हिसाब से अलग हो सकता है।

इलाज की गुणवत्ता ने किया प्रभावित

महिला ने केवल कम खर्च की तारीफ नहीं की। उन्होंने भारत में मिली मेडिकल सुविधाओं और देखभाल को भी अच्छा बताया। उनके मुताबिक, इलाज उनकी उम्मीद से बेहतर रहा। इसी वजह से उन्होंने भारत में मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं पर भी बात की।

भारत में मेडिकल टूरिज्म का बड़ा मौका

महिला का मानना है कि भारत अगर विदेशी मरीजों के लिए यात्रा, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को और बेहतर करे, तो मेडिकल टूरिज्म में देश और आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, भारत के पास इस क्षेत्र में काफी बड़ी संभावनाएं हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अमेरिका और भारत में इलाज की लागत पर चर्चा शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल किया कि अमेरिका जैसे विकसित देश में मेडिकल ट्रीटमेंट इतना महंगा क्यों है कि लोग इलाज के लिए विदेश जाने पर मजबूर हो रहे हैं।

निजी अस्पतालों की भी हुई तारीफ

कुछ यूजर्स ने भारत के निजी अस्पतालों की तारीफ की। उनका कहना था कि कई अस्पताल कम लागत में अच्छी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत की सरकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अभी सुधार की जरूरत है।

विदेशी मरीजों को मिलती है मदद

मेडिकल टूरिज्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, कई भारतीय अस्पताल विदेशी मरीजों को इलाज के साथ दूसरी सुविधाओं में भी मदद करते हैं। इनमें एयरपोर्ट ट्रांसफर, रहने की व्यवस्था, अपॉइंटमेंट और इलाज का शेड्यूल शामिल हो सकता है।