दिल्ली-NCR वालों को लगा बड़ा झटका! आज सुबह से ₹3।89 महंगी हुई CNG, जानें आपके शहर में क्या है नया रेट

CNG Price: दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सीएनजी (CNG) का इस्तेमाल करने वालों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें आज शनिवार 29 अगस्त को सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई हैं। कंपनी ने सीएनजी की दरों में प्रति किलोग्राम 3.89 रुपये का इजाफा किया है। इससे निजी कार मालिकों के साथ-साथ ऑटो, कैब और दूसरी कमर्शियल गाड़ियां चलाने वालों को झटका लगा है।

जानिए दिल्ली और आसपास के शहरों में क्या है सीएनजी का नया रेट

आईजीएल द्वारा की गई इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत ₹83.09 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे पहले 17 मई को सीएनजी की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया था। आज से लागू हुई ₹3.89 प्रति किलोग्राम की वृद्धि इस वर्ष की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। सीएनजी की कीमतें बढ़ने का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले आम लोगों और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के किराए पर पड़ने की संभावना है।

क्यों बढ़ाए गए सीएनजी के दाम? आईजीएल ने बताई वजह

IGL ने शुक्रवार देर रात जारी एक बयान में सीएनजी की कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की बढ़ती कीमतों को बताया है। कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल लेबल पर एलएनजी के दामों में तेज उछाल आया है।

आईजीएल के मुताबिक सीएनजी सप्लाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्टेट LNG से आता है। जब से पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ है तब से स्पॉट मार्केट में एलएनजी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और इनपुट कॉस्ट का असर

कंपनी के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलएनजी की ऊंची कीमतों और इनपुट गैस कॉस्ट पर पड़ रहे असर को देखते हुए फैसला लिया गया है। आईजीएल ने कहा है कि गैस की बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट की भरपाई आंशिक रूप से करने के लिए प्रति किलोग्राम ₹3.89 कीमत बढ़ाना जरूरी था।

ग्लोबल एनर्जी मार्केट में यह तेजी ईरान युद्ध और ग्लोबल ऑयल शिपमेंट के मेन समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आने वाली अड़चनों के बाद से ही देखी जा रही है। इस साल फरवरी के अंत से ही क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रूड और गैस की दरों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

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putin and trump

ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में तख्तापलट हो जाये तो ट्रम्प जीत जायेंगे और यदि यूक्रेन से जेलेंसकी की बिदाई हो जाये तो पुतिन जीत जायेंगे। लगता है ट्रम्प और पुतिन मिलकर एक दूसरे की मदद करने का मंसूबा बना चूके है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को पहुंचना और रूसी खुफिया अधिकारियों से बातचीत करना इस बात का संकेत है कि दोनों महाशक्तियों के बीच कुछ खास पक रहा है।  

 

दरअसल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती, स्थायी होते हैं राष्ट्रीय हित। यही वजह है कि जो देश सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी दिखाई देते है, उनकी खुफिया एजेंसियां पर्दे के पीछे संवाद के रास्ते खुले रखती है। रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की, इसकी रूस की विदेशी खुफिया सेवा एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारीश्किन ने पुष्टि की है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सीआईए प्रमुख की मॉस्को यात्रा का महत्व  बहुत अधिक है। दोनों देशो की खुफियां एजेंसियों के बीच संवाद का इतिहास भी पुराना है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ वैचारिक रूप से एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन नाजी जर्मनी के खिलाफ दोनों एक ही मोर्चे पर खड़े थे। उस दौर में अमेरिकी ओएसएस और सोवियत खुफिया तंत्र के बीच संपर्क स्थापित हुआ। अमेरिकी खुफिया इतिहास से पता चलता है कि ओएसएस प्रमुख विलियम जे.डोनोवन ने 1943 में सोवियत अधिकारियों के साथ खुफिया सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर बातचीत की थी। कुछ ही वर्षों बाद यही दोनों देश शीत युद्ध में एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए। इतिहास का यह अध्याय बताता है कि खुफिया सहयोग विचारधारा या मित्रता पर नहीं, बल्कि तत्कालीन रणनीतिक जरूरतों पर आधारित होता है।

 

अमेरिका और रूस के बीच बाद के वर्षों में भी सीमित खुफिया सहयोग के उदाहरण मिलते है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों ने कई बार एक-दूसरे को महत्वपूर्ण सूचनाएं दी है। दिसंबर 2017 में अमेरिका ने रूस को सेंट पीटर्सबर्ग में संभावित आतंकी हमले की जानकारी दी थी। रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की और हमले की साजिश को विफल किया। इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर अमेरिकी सहायता के लिए धन्यवाद दिया था। यह घटना बताती है कि गंभीर साझा खतरे के सामने कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं।


रैटक्लिफ की वर्तमान मॉस्को यात्रा को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका और रूस को आमने-सामने खड़ा कर रखा है, लेकिन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों ने दोनों के बीच संवाद की आवश्यकता भी पैदा की है। राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यूक्रेन युद्ध का अंत उनकी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि हो सकता है, जबकि पुतिन ऐसी समाप्ति चाहते हैं जिसमें रूस की रणनीतिक और क्षेत्रीय स्थिति कमजोर न हो। दोनों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं, लेकिन युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक ला सकती है। ऐसे संवेदनशील दौर में खुफिया चैनल औपचारिक कूटनीति से अधिक उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि उनके माध्यम से बिना सार्वजनिक दबाव के संभावित विकल्पों पर बातचीत की जा सकती है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, रूस और ईरान के रणनीतिक संबंध तथा पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते समीकरणों ने मॉस्को और वॉशिंगटन दोनों की चिंताएं बढ़ाई है। यदि अमेरिका ईरान में निर्णायक रणनीतिक सफलता चाहता है, तो उसे रूस की भूमिका और उसके प्रभाव को भी ध्यान में रखना होगा। इसी तरह रूस के लिए भी यूक्रेन के अलावा पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति-संतुलन को समझना आवश्यक है। इस मुलाकात में ईरान में तख्तापलट या यूक्रेन में राष्ट्रपति जेलेंस्की की सत्ता से विदाई पर बातचीत की संभावना से इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस पर ट्रम्प और पुतिन का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकता है कि बड़ी शक्तियां दूसरे देशों की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने हितों के अनुरूप प्रभावित करने के विकल्पों पर विचार करती रहती है। सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व परिवर्तन या राजनीतिक दबाव जैसी परिस्थितियां कई बार बड़े भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बनती है। इसलिए रैटक्लिफ की यात्रा को सामान्य तो नहीं लिया जा सकता। 

 

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ट्रंप और पुतिन के बीच सार्वजनिक राजनीति से अलग एक रणनीतिक संवाद की संभावना बनी हुई है। दोनों नेता अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और खुफिया एजेंसियां इसी रणनीतिक सोच का सबसे संवेदनशील हिस्सा होती है। वे मित्रता की रक्षा से अधिक अपने राष्ट्र के हितों की रक्षा करती है। आवश्यकता पड़ने पर प्रतिद्वंद्वी से बातचीत करना और अवसर मिलने पर सहयोगी से दूरी बनाना उनके लिए असामान्य नहीं है। इतिहास बताता है कि खुफिया एजेंसियों के बीच होने वाली बातचीत का वास्तविक महत्व अक्सर उसके तत्काल सार्वजनिक परिणामों से नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में दिखाई देने वाले घटनाक्रमों से समझ में आता है। अमेरिका और रूस भले ही आज भी प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन राष्ट्रीय हित उन्हें एक-दूसरे से बात करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की यह खामोश कूटनीति आने वाले समय में यूक्रेन और ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक शक्ति-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

 

ईरान रूस का रणनीतिक साझेदार है, जबकि यूक्रेन अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा-व्यवस्था का अहम मोर्चा। ऐसे में यदि दोनों देशों में सत्ता परिवर्तन होता है और नई सत्ताएं मॉस्को और वॉशिंगटन के अनुकूल बैठती है, तो यह पुतिन और ट्रंप दोनों के लिए असाधारण राजनीतिक जीत होगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महाशक्तियां अपने हितों के लिए दूसरे देशों की राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन को प्रभावित करने से पीछे नहीं रही है। सत्ता परिवर्तन कई बार विचारधारा से नहीं, भू-राजनीतिक जरूरतों से संचालित होते हैं। ट्रंप और पुतिन भी शक्ति की इसी कठोर राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजारों के लिए आज नरम संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की नरमी है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 4000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली है। FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में एक ही दिन में 10000 से ज्यादा नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट जोड़े हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

27 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा शेयरों में खरीदारी के बावजूद मीडिया, मेटल,ऑयल एंड गैस और PSU बैंकों के शेयरों में बिकवाली हावी रही। बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख सका और पूरे सेशन के दौरान ज्यादातर समय गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। कारोबार के अंत में निफ्टी 116.90 अंक या 0.48% गिरकर 24,090.85 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 539.35 अंक या 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 पर आ गया।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

27 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹298 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए ₹4,977 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। अच्छी बात यह रही कि दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.249% की बढ़त हुई है, जबकि ताइवान डॉलर में 0.19% और मलेशियन रिंगित में 0.124% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर और चीनी रेनमिनबी में 0.055% और 0.036% की मामूली बढ़त हुई है। जबकि जापानी येन में 0.019% की बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है।

उधर फिलीपीन पेसो में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। यह 0.507% गिरा है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया 0.107% और थाई बाहत 0.03% नीचे आया है।

अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी, एशिया में मिला-जुला कारोबार

अच्छे नतीजों के बाद Nvidia में 9% के उछाल ने अमेरिकी बाजारों का सेंटिमेंट सुधारा है। कल नैस्डैक करीब 1.5 फीसदी दौड़ा, S&P में भी रौनक रही। बाजार की अब आज शाम को आने वाले जैक्सन होल में फेड चेयरमैन के बयानों पर नजर रखेगा। वहीं एशियाई बाजार मिलेजुले हैं। जापान के निक्केई में 0.50 फीसदी की बढ़त है। लेकिन कॉस्पी करीब एक फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।

SEBI चेयरमैन का CAS पर बयान, CAS में कोई बदलाव नहीं

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने साफ कर दिया है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेसन यानी CAS में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इस मुद्दे पर कहा कि इमें अभी कोई बदलाव नहीं होगा। सिस्टम वैसे ही चल रहा है। पार्टिसिपेशन बढ़ेगा और ब्रोकर्स इसे अपने ऐप्स में इनेबल करेंगे और लोग सीखेंगे और इस मार्केट में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि NSE IPO DRHP मंजूरी के बहुत करीब है।

Market view : इंट्राडे मार्केट का मिजाज कमजोर, चार्ट पर शानदार दिख रहे इन शेयरों पर रहे नजर

हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी

हॉर्मुज पर सस्पेंस जारी है। ईरान हॉर्मुज खोलने के लिए शर्तें तैयार कर रहा है। उधर अमेरिका ने कहा कि ईरान से फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है। पुराने MoU पर लौटने का सवाल नहीं है। इसबीच क्रूड उछलकर 90 डॉलर के पास आ गया है।

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव

आज लेंसकार्ट में 1,313 करोड़ रुपए की ब्लॉक डील संभव है। Alphawave 1.2% हिस्सा बेच सकती है। इस डील की फ्लोर प्राइस 630 रुपए प्रति शेयर तय की गई है।

रेडियो खराबी से ट्रम्प का हेलिकॉप्टर विमान के करीब पहुंचा:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को एक हफ्ते पहले से दिक्कत की जानकारी थी; फिर भी चूक हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के करीब पहुंचने की वजह सामने आई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल पाई। यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था, तभी रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी टेकऑफ की मंजूरी मिल गई। दोनों विमान कुछ देर के लिए काफी करीब आ गए, लेकिन पायलटों की सतर्कता से टकराव टल गया। जांच में यह भी सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को इस रेडियो खराबी की जानकारी एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। इसके बावजूद घटना वाले दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में चूक हुई। व्हाइट हाउस में निर्माण के कारण रेडियो में खराबी आई जांच में पता चला कि व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण के कारण मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदल दी गई थी। हेलिकॉप्टर अब द एलिप्स से उड़ान भर रहा था। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास लगे रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक नहीं था। इसी वजह से हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी। एक हफ्ते पहले मीटिंग में दिक्कत पर चर्चा हुई थी घटना से करीब एक हफ्ते पहले 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की बैठक हुई थी। इसमें तीन मिनट पहले दी जाने वाली उड़ान चेतावनी के कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। तब तय किया गया था कि रेडियो संपर्क न होने पर किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए यह सूचना दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, यह तरीका भी काम नहीं आया। कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने की जानकारी नहीं मिली और इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई। ट्रम्प का हेलिकॉप्टर और विमान सिर्फ 1.3 किमी दूर थे NTSB के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी करीब 1.3 किलोमीटर थी। उनकी ऊंचाई में भी महज 250 फीट का अंतर रह गया था। यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी दी थी। मरीन वन के पायलटों ने भी विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों अलग हो गए। FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। अब रेडियो सिस्टम ठीक किया गया घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगा दिया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में रेडियो संपर्क ठीक पाया गया। यह घटना पिछले साल के रीगन एयरपोर्ट हादसे के बाद और गंभीर मानी जा रही है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा नियम कड़े किए गए थे। ————————————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार दूसरे दिन गिरा सोना, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लगातार दूसरे गिरावट आई। इसकी कीमत 800 रुपये गिरकर 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। इसकी कीमत 2,50,500 रुपये प्रति किलग्राम पर बनी रही। हालांकि, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस मौके पर गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का पड़ा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। बीते दो दिनों में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

बुलियन मार्केट की नजरें फेड चेयरमैन की स्पीच पर

बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर सोने कीमतों पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.12 फीसदी गिरकर 4,588 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी 87 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

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इस हफ्ते की शुरुआत में तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था सोना

इस हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें तीन महीने के सबसे लेवल पर पहुंच गई थीं। इस तेजी में डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड का हाथ था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम का ऐलान किया था। लेकिन, इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी पर थोड़े समय के लिए लगाम लगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड चेयरमैन वॉर्श शुक्रवार को अपने भाषण में फिर से इनफ्लेशन कंट्रोल पर फोकस बढ़ा सकते हैं।

LPG New Connection: LPG के नए कनेक्शन पर लगी रोक कब हटेगी? पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया बड़ा अपडेट

LPG New Connection: अगर आप नया LPG गैस कनेक्शन लेने की तैयारी कर रहे हैं तो फिलहाल आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरन के बीच चल रहे विवाद के बीच देशभर में नए घरेलू LPG कनेक्शन जारी करने पर अस्थायी रोक लगी हुई है। तेल कंपनियां फिलहाल नए कनेक्शन की बुकिंग नहीं कर रही हैं। मौजूदा ग्राहकों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

तेल कंपनियों के मुताबिक, मार्च 2026 से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के नए कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फिलहाल इंतजार करना पड़ रहा है।

सरकार ने नए कनेक्शन पर रोक की वजह बताई

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए नए LPG कनेक्शन जारी करना अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस समय LPG वितरकों का मुख्य फोकस मौजूदा ग्राहकों को समय पर रिफिल उपलब्ध कराने पर है, ताकि पहले से कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन पर लगी रोक स्थायी नहीं है। पश्चिम एशिया की स्थिति सामान्य होने और LPG आपूर्ति स्थिर रहने के बाद नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सकती है।

अभी सिर्फ मौजूदा ग्राहकों को मिल रही गैस

फिलहाल, तेल कंपनियां नए उपभोक्ताओं के बजाय पुराने ग्राहकों की जरूरत पूरी करने पर जोर दे रही हैं। जिन लोगों के कनेक्शन पहले से मौजूद हैं, उन्हें रिफिल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, निष्क्रिय या बंद पड़े कनेक्शनों को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया जारी है।

इसके साथ ही उपभोक्ताओं से KYC पूरा कराने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट LPG कनेक्शनों को हटाना और वास्तविक उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

LPG की सप्लाई फिलहाल स्थिर, लेकिन आगे का अनुमान मुश्किल

‘द हिंदू’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, FLDI के महासचिव पवन सोनी ने कहा कि फिलहाल LPG की आपूर्ति की स्थिति स्थिर है। लेकिन यह स्थिरता कितने समय तक बनी रहेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में लगातार बने हुए तनाव के कारण यह निश्चित नहीं है कि तेल कंपनियां LPG लेकर कितने जहाज भारत तक ला पाएंगी। यही वजह है कि सरकार और कंपनियां मौजूदा स्टॉक और सप्लाई को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।

नया कनेक्शन नहीं मिल रहा तो क्या विकल्प है?

जिन लोगों को फिलहाल 14.2 किलो का नया घरेलू LPG कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए कुछ डिस्ट्रीब्यूटर 5 किलो या 10 किलो के सिलेंडर का विकल्प बता रहे हैं। खास तौर पर बड़े शहरों में 10 किलो का FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे बुक कराया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक डिलीवरी भी ली जा सकती है। हालांकि, उपलब्धता और नियम क्षेत्र तथा वितरक के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

होर्मुज संकट का LPG सप्लाई पर क्यों पड़ा असर?

पश्चिम एशिया में तनाव का भारत की LPG सप्लाई पर सीधा असर इसलिए पड़ता है क्योंकि देश अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। पहले भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आता था। करीब 90 फीसदी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पहुंचता था।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी। इसके बाद भारत ने LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका से LPG और LNG की खरीद भी बढ़ाई है। अमेरिका से आने वाली LPG को भारत तक पहुंचने में लंबा समुद्री रास्ता तय करना पड़ता है। पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति की तुलना में इसकी लागत भी अधिक हो सकती है।

कब से शुरू होगी नए कनेक्शन की बुकिंग?

सबसे अहम सवाल यही है कि नया LPG कनेक्शन कब से मिलना शुरू होगा? फिलहाल सरकार ने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, यह रोक अस्थायी है। स्थिति सामान्य होने पर नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाएगी। यानी अभी उपभोक्ताओं को निश्चित तारीख का इंतजार करना होगा।

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फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मौजूदा LPG ग्राहकों को नियमित रिफिल उपलब्ध कराना है। पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई और देश में LPG की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही आपूर्ति व्यवस्था पर्याप्त रूप से स्थिर होगी, नए कनेक्शन की बुकिंग दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।

Kuku kohli Aruna Irani Relationship: ‘कुकू कोहली ने नहीं बताया था कि वे शादीशुदा हैं’, जब अरुणा ईरानी ने अपने दिवंगत पति के साथ पहली मुलाकात किया था खुलासा

Kuku kohli Aruna Irani Relationship: अरुणा ईरानी और दिवंगत फिल्म निर्माता कुकू कोहली की प्रेम कहानी और उनकी शादी उन दिनों अक्सर सुर्खियों में रहती थी। कुकू कोहली की पहली पत्नी के जिंदा रहते अरुणा ईरानी इस हादसे के बारे में ज्यादा बात नहीं करती थीं। चार साल पहले, अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे उनकी मुलाकात कुकू कोहली से एक फिल्म सेट पर हुई और कैसे उनका रिश्ता पनपा।

अरुणा ईरानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया- हमारी मुलाकात एक फिल्म के दौरान हुई, जिसमें हम दोनों साथ काम कर रहे थे। उस फिल्म के दौरान वह सभी अन्य अभिनेताओं को तब तक इंतजार करवाते थे, जब तक धर्मेंद्र जी सेट पर नहीं आ जाते। तभी शूटिंग शुरू होती थी।

मुझे उन पर बहुत गुस्सा आता था क्योंकि मैं उस समय कुछ अन्य फिल्मों में भी काम कर रही थी। इसलिए हमारा रिश्ता प्यार और नफरत से भरा हुआ था। मैं उन पर बहुत गुस्सा होती थी और वह मुझे दिलासा देते थे। उस चक्कर में कैसे लफड़ा हो गया समझ नहीं आया ।

अरुणा ईरानी को यह जानकर काफी हैरानी हुई कि कुकू पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “जब हम मिले थे, तो उन्होंने मुझे यह भी नहीं बताया था कि वह शादीशुदा हैं, और इसी वजह से मुझे उनसे प्यार हो गया। इसलिए हमारे रिश्ते के बारे में बात करना सही नहीं लगा, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी पत्नी और बेटियां थीं। अब मैं इस बारे में इसलिए बात कर रही हूं, क्योंकि उनकी पहली पत्नी का कुछ महीने पहले निधन हो गया है।”

अरुणा और कुकू की शादी 1990 में हुई थी, जब वह 40 साल की थीं

फिल्मफेयर के साथ एक पुराने इंटरव्यू में, अरुणा ने यह भी बताया था कि उनके और कुकू कोहली के बच्चे क्यों नहीं हुए। “आज जब मैं अपने भतीजे-भतीजियों और भांजे-भांजियों को देखती हूं, तो मुझे खुशी होती है कि मेरे बच्चे नहीं हैं। अगर कोई मेहमान घर आता और मेरा बच्चा उनका स्वागत न करता या सोफे पर बेपरवाह पड़ा रहता – जैसा कि आजकल के बच्चे करते हैं – तो मुझे बुरा लगता।

उनका ऐसा रवैया होता है, ‘तो क्या हुआ?’ भगवान का शुक्र है। मेरे एक करीबी दोस्त, डॉ. अजय कोठारी ने मुझे सही बात समझने और फैसला लेने में मदद की। उन्होंने कहा, ‘शादी करना ठीक है, आपको साथ की जरूरत है, लेकिन बच्चे और आपके बीच उम्र का फ़ासला इतना ज़्यादा होगा कि उसे संभालना मुश्किल होगा।’ मुझे लगता है कि वह सही थे। मैं और मेरा बच्चा एक-दूसरे के साथ घुटन महसूस करते।

1991 की फ़िल्म ‘फूल और कांटे’ के लिए मशहूर अनुभवी फ़िल्म निर्माता कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके दोस्त अशोक पंडित ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अशोक पंडित ने PTI को बताया, “उन्हें बेचैनी महसूस हो रही थी, इसलिए कल उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम करीब 4:30 बजे हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया।” कोहली के परिवार में उनकी पत्नी अभिनेत्री अरुणा ईरानी और उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली से हुई दो बेटियां, पूजा और करिश्मा हैं।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में चार सत्रों से जारी तेजी पर ब्रेक, चांदी ₹500 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार चार सत्रों से सोने में जारी तेजी पर 26 अगस्त को ब्रेक लग गया। सोना 600 रुपये गिरकर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी में तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में कमजोरी का असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा।

चांदी की कीमतों में 500 रुपये का उछाल

चांदी में 500 रुपये का उछाल आया। इससे इसकी कीमतें 2,50,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म मडरेक्स में लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि लगातार तेजी के बाद सोने में प्रॉफिट बुकिंग हुई, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि हालिया तेजी के गोल्ड का भाव बीते कई महीनों की उंचाई पर पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरे सोना और चांदी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.66 फीसदी गिरकर 4,627 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 0.27 फीसदी की कमजोरी के साथ 68.39 प्रति औंस पर चल रही थी। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी गिरावट दिखी। इसका भाव 1.22 फीसदी गिरकर 87.51 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।

क्रूड ऑयल की कीमतों में भी गिरावट 

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट दिखी। इसकी वजह लगातार पांच सत्रों की तेजी के बाद कंसॉलिडेशन है। उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल में भी गिरावट आई है। इसकी वजह इसकी सप्लाई को लेकर चिंता में कमी है। ईरान और ओमान अस्थायी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ओपन करने के तरीकों पर बातचीत कर रहे हैं।

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फेड चेयरमैन की स्पीच पर इनवेस्टर्स की नजरें 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह 28 अगस्त यानी शुक्रवार को जैक्सन होल में स्पीच देने वाले हैं। उनकी स्पीच से फेड की पॉलिसी के संकेत मिलेंगे। सितंबर में फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। अगर वह इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रखता है तो यह सोने की कीमतों के लिए पॉजिटिव होगा।

नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

Nitin Gadkari

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और जेन-जी के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार जिस तरह से मोदी सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही है, उससे अब मोदी सरकार में बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही है।  संसद से मानसून सत्र के बाद अब कभी मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है।

सियासी गलियारों में इस बात की अटकलें लगाई जा रही है कि मोदी कैबिनेट के इस विस्तार में कई सीनियर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता  है। इन अटकलों को मंगलवार को उस वक्त और हवा मिल गई जब मोदी कैबिनेट में शामिल सीनियर मंत्री नितिन गडकरी ने इशारों ही इशारों  में राजनीति  से संन्यास के संकेत दे दिए है। हलांकि नितिन गडकरी के बयान के बाद जिस तरह नागपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल दिखाई दी उसके बाद गडकरी के दफ्तर से सफाई भी आई।
 
पहले बयान, फिर सफाई- रविवार को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि वे तीन दशकों से ज्यादा समय से सक्रिय सार्वजनिक जीवन में हैं और अपने राजनीतिक सफ़र के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और कई सम्मान हासिल किए हैं। लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता. नई पीढ़ी को काम करने का मौका मिलना चाहिए।
 
गडकरी के इस बयान को उनके राजनीति के संन्यास के नजरिए से देखा जाने लगा और इस पर कई तरह की प्रतिक्रिया आने लगी। इसके बाद गडकरी के दफ्तर से बयान पर स्पष्टीकरण आया कि
उनकी इस टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया कि युवा पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।  उनकी बात साफ तौर पर ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व से जुड़ी थी। हालांकि, कुछ टेलीविजन चैनल इस बयान को राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर पेश कर रहे हैं और इसे इसके असली संदर्भ से अलग दिखा रहे हैं।
 
भाजपा में पीढी परिवर्तन का दौर- भाजपा अब पीढी परिवर्त के दौर से गुजर रही है। नितिन नबीन के रूप में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने  के बाद पिछले दिनों पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कई नए  चेहरों को जगह दी गई। इसमें स्मृति ईरानी, कवित पाटीदार, राममाधव, वीडी शर्मा जैसे नाम है जिनको भाजपा में युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व माना जाता है। ऐसे में जब भाजपा का झुकाव अब जेन-जी वोटर्स की तरफ तेजी से  हो रहा है तब 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी कैबिनेट में कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है।
 
दरअसल केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों को जिस तरह से सरकारी परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और सरकारी स्कूलों की खराब हालत को लेकर छात्रों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा उससे पार्टी बैकफुट पर दिखाई दे रही है। इसलिए अब भाजपा युवा वर्ग (जेन-जी) को साधन के लिए सरकार और संगठन स्तर पर बड़े बदलाव की तरफ आगे बढ़ रही है।
 

Sensex डे-हाई से 286 प्वाइंट्स नीचे तो Nifty की पूरी बढ़त गायब, 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Share Market volatile: शुरुआती कारोबार में आज मार्केट में रौनक दिखी लेकिन ऊपरी स्तर पर इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स डे-हाई से 286 प्वाइंट्स नीचे आ गया तो निफ्टी ने पूरी बढ़त गंवा दी। ब्रोडर लेवल पर बात करें तो रौनक बनी हुई है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 11:10 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 131.04 प्वाइंट्स यानी 0.17% की बढ़त के साथ 77,787.13 और निफ्टी 10.70 प्वाइंट्स यानी 0.04% की गिरावट के साथ 24,323.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 330.75 प्वाइंट्स चढ़कर 77,986.84 तक पहुंचा था जिससे यह फिर 285.66 प्वाइंट्स गिरकर 77,701.18 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी 44.05 प्वाइंट्स उछलकर 24,378.60 तक पहुंचा था जिससे यह 84.35 प्वाइंट्स टूटकर 24,294.25 तक आ गया था।

Share Market Volatile: ये है वजह

सेक्टरवाइज मिला-जुला रुझान

मार्केट को आज सरकारी बैंकों से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हुआ है तो दूसरी तरफ आईटी और ऑटो सेक्टर में बिकवाली से दबाव बना है लेकिन निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से कम गिरावट है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में नरमी से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 2.39% की गिरावट के साथ 10.81 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

कच्चे तेल की नरमी

वैश्विक ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2% टूटकर प्रति बैरल $86 के नीचे आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

ईरान पर अमेरिका की सख्ती

अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंसा कसना तेज कर दिया और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी। इससे मार्केट पर दबाव बना है।

अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक

घरेलू स्टॉक मार्केट को आज अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक से सपोर्ट मिला। ताइवान के ताइवान वेटेड में डेढ़ फीसदी और दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 1% की तेजी है तो जापान के निक्केई 225, हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सैंग, चीन के शंघाई कंपोजिट और थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है तो इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट फिलहाल फ्लैट है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।