Chrome का नया लुक, अब ऊपर वाले टैब्स से पाएं छुटकारा, इस सीक्रेट सेटिंग से बदलें अपना ब्राउजिंग एक्सपीरियंस

हम में से ज्यादातर लोग अपने वेब ब्राउज़र में बदलाव पसंद नहीं करते। इंटरनेट सर्फिंग हमारी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गई है कि छोटा सा “अपडेट” भी कभी-कभी सिरदर्द लगने लगता है। लेकिन, गूगल ने अब क्रोम के सबसे बेसिक फीचर- टैब्स (Tabs)-को पूरी तरह से बदल दिया है। यह फीचर नवंबर 2025 से डेवलपर्स के लिए टेस्टिंग मोड (Canary Build) में था, लेकिन अब इसे हम सभी के लिए जारी कर दिया गया है।

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क्या है यह नया बदलाव?

मंगलवार को गूगल ने क्रोम में 'वर्टिकल टैब्स' (Vertical Tabs) फीचर लॉन्च किया है। अब तक आपके द्वारा खोले गए पेज (टैब्स) ब्राउज़र में सबसे ऊपर एक लाइन में दिखाई देते थे। अब आप उन्हें स्क्रीन के बाईं ओर (Left Side) एक लंबी लिस्ट के रूप में देख सकेंगे।

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क्यों है यह खास?

टैब्ड ब्राउजिंग का चलन 2002 में फायरफॉक्स (Firefox) के दौर से शुरू हुआ था और तब से हम ऊपर की तरफ ही टैब्स देखने के आदी हैं। लेकिन जब हम बहुत सारे टैब्स खोल लेते हैं, तो वे इतने छोटे हो जाते हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा पेज किस बारे में है। वर्टिकल टैब्स इसी समस्या का समाधान हैं।

 

यूजर्स को इससे क्या फायदा होगा?

वर्टिकल टैब्स सिर्फ एक दिखावटी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे हैं:

 

नाम पढ़ना हुआ आसान: जब आप 20-30 टैब्स खोल लेते हैं, तो ऊपर वाली पट्टी में सिर्फ छोटे आइकन दिखते हैं। वर्टिकल लिस्ट में टैब का टाइटल (Headline) साफ नजर आता है, जिससे आपको पता रहता है कि आप किस पेज पर हैं।

 

बेहतर मैनेजमेंट: अगर आप बहुत ज्यादा रिसर्च या मल्टी-टास्किंग करते हैं, तो साइड बार में टैब्स को मैनेज करना और उनके बीच स्विच करना ज्यादा तेज और आसान होता है।

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जगह की बचत: अगर आपको सिर्फ आइकन देखने हैं, तो आप इस साइड बार को छोटा (Collapse) भी कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर कंटेंट देखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है।

 

रीडिंग मोड (Reading Mode): गूगल ने इसके साथ ही 'फुल-पेज रीडिंग मोड' भी दिया है। अब किसी भी आर्टिकल पर राइट-क्लिक करके आप उसे बिना किसी विज्ञापन या फालतू की चीजों के, बिल्कुल एक किताब की तरह पढ़ सकते हैं।

 

इसे कैसे शुरू करें?

यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। अगर आप इसे आज़माना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

क्रोम के सबसे ऊपरी हिस्से (जहां टैब्स होते हैं) पर Right-Click करें। वहाँ “Show Tabs Vertically” का विकल्प चुनें। अगर आपको यह विकल्प नहीं दिख रहा है, तो परेशान न हों। गूगल इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर रहा है, जल्द ही यह आपके ब्राउज़र में पहुंच जाएगा।  Edited by : Sudhir Sharma 

iPad mini को टक्कर देगा Oppo Pad Mini, 144Hz OLED डिस्प्ले, Snapdragon 8 Gen 5 और दमदार बैटरी जैसे फीचर्स

Oppo कॉम्पैक्ट टैबलेट मार्केट में एंट्री करने की तैयारी में है। कंपनी का नया Pad Mini जल्द लॉन्च हो सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन लीक रिपोर्ट्स में इसके दमदार फीचर्स सामने आए हैं। यह टैबलेट उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है जो पोर्टेबल होने के साथ-साथ पावरफुल डिवाइस चाहते हैं। लॉन्च के बाद यह बाजार में मौजूद प्रीमियम कॉम्पैक्ट टैबलेट्स को सीधी टक्कर दे सकता है।

 

144Hz OLED डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन

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लीक्स के मुताबिक Pad Mini में 8.8 इंच का LTPO AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जिसका रेजोल्यूशन 2882×1920 पिक्सल होगा। इसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 1800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस दी जा सकती है, जिससे विजुअल्स काफी शार्प और कलर्स बेहद ब्राइट नजर आएंगे। 3:2 आस्पेक्ट रेशियो इसे काम और वीडियो देखने दोनों के लिए बेहतर बनाता है। डिजाइन की बात करें तो इसमें 5.39mm पतला यूनिबॉडी मेटल चेसिस मिल सकता है और वजन करीब 279 ग्राम होगा, जो इसे काफी स्लिम और हल्का बनाता है।

 

 Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर

 

परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह अपने सेगमेंट के सबसे पावरफुल टैबलेट्स में से एक होगा। यह गेमिंग, मल्टीटास्किंग और डेली प्रोडक्टिविटी जैसे काम आसानी से संभाल सकेगा। कैमरा के तौर पर इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर सेंसर दिया जा सकता है, जो फोटो और वीडियो कॉलिंग के लिए उपयोगी होगा।

 

 बैटरी, चार्जिंग और कनेक्टिविटी

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रिपोर्ट्स के अनुसार टैबलेट में 8000mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो 67W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी। इससे यह पूरे दिन चलने के साथ जल्दी चार्ज भी हो सकेगा। कनेक्टिविटी के लिए इसमें eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है, जिससे यूजर्स कहीं भी आसानी से इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे।

 

  iPad mini से होगी टक्कर

 

यह टैबलेट Apple iPad mini (8th generation) को सीधी टक्कर दे सकता है। जहां Apple अपने डिवाइस में वॉटर रेजिस्टेंस और बेहतर हार्डवेयर दे सकता है, वहीं Oppo हाई रिफ्रेश रेट OLED डिस्प्ले के जरिए यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिश करेगा। फिलहाल कंपनी की ओर से लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन लीक के आधार पर इसकी जल्द एंट्री की उम्मीद की जा रही है।  Edited by : Sudhir Sharma

Sora वीडियो ऐप को क्यों बंद कर रहा है OpenAI, ये वीडियो एआई टूल्स बन सकते हैं बेस्ट ऑप्शन्स

सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Sora को बंद करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उसी समय हुआ जब Disney ने भी OpenAI के साथ अपनी बड़ी पार्टनरशिप खत्म कर दी।  घोषणा के तरीके से ऐसा लगा कि OpenAI के भीतर चीजें तेजी से बदल रही हैं। हालांकि Sora को पूरी तरह कब बंद किया जाएगा और इससे यूजर्स के बनाए गए वीडियो पर क्या असर पड़ेगा- इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

X पर Sora अकाउंट ने कहा कि हम जल्द ही और जानकारी साझा करेंगे, जिसमें ऐप और API की टाइमलाइन और आपके काम को सुरक्षित रखने से जुड़ी डिटेल्स शामिल होंगी। ये वीडियो एआई टूल्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकते हैं।

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पहले क्या खास था Sora में?

यह बहुत ही आसान था। इसमें टेक्स्ट लिखते ही वीडियो बना जाते, जो सिनेमेटिक और रियलिस्टिक क्लिप्स

 की तरह होते थे। यह बिलकुल सोशल मीडिया जैसा वीडियो प्लेटफॉर्म था। लेकिन महंगा, रिस्की और विवादों में भी यह आया। लॉन्च होने के  बाद यह काफी वायरल हुआ, लेकिन  इसके बंद होने के पीछे कॉपीराइट विवाद, डीपफेक और गलत कंटेंट और बहुत ज्यादा खर्च बताया जा रहा है। 

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 Google Veo 3

 

Google का Veo 3 मॉडल सबसे लोकप्रिय ऑप्शन्स में से एक माना जा रहा है। लॉन्च के समय इसे 'बेहद रियलिस्टिक' बताया गया था।  इस टूल से हाई-क्वालिटी वीडियो बनाए जा सकते हैं , लेकिन इसके लिए Google का पेड AI प्लान लेना होगा। इसकी कीमत लगभग 7.99 डॉलर प्रति माह से शुरू होती है।  इन प्लान्स के साथ Gemini जैसे एडवांस AI फीचर्स भी मिलते हैं।

Luma Ray3

Ray3  भी एक पावरफुल AI वीडियो जनरेशन टूल है। 1080p वीडियो आउटपुट के साथ एडवांस एडिटिंग फीचर्स मिलते हैं। साथ ही प्रोफेशनल क्वालिटी वीडियो भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण यह हर यूज़र के लिए किफायती नहीं है। Edited by : Sudhir Sharma

AI Technology : दुनिया में AI की रेस तेज, नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा भविष्य, क्या हैं चुनौतियां

नई-नई AI तकनीकों के आने से न सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोज़मर्रा की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीक बन सकती है। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

 

AI की दौड़ में बड़ी कंपनियां

 

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI को लेकर भारी निवेश कर रही हैं। कई कंपनियां ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही हैं जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

 

कई क्षेत्रों में बदल रही तस्वीर

AI की मदद से अब ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है। डेटा एनालिसिस आसान हो रहा है। रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ रहा है। इससे उद्योगों की कार्यक्षमता भी काफी बढ़ रही है। AI तकनीक का असर अब कई क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की मदद से बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में AI आधारित लर्निंग टूल छात्रों की पढ़ाई को आसान बना रहे हैं। व्यापार और उद्योग में कंपनियां AI के जरिए बड़े डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय ले रही हैं।

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 चुनौतियां भी कम नहीं

AI तकनीक के कारण स्मार्ट सिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और ऑटोमेटेड सिस्टम का विकास भी तेजी से हो रहा है। कई देशों में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम लागू किए जा रहे हैं। हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है। AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।

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भविष्य में क्या होगा?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। कुल मिलाकर, AI तकनीक आने वाले समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और जीवनशैली को नई दिशा देने वाली है।

क्या होंगी चुनौतियां

हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।  डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है । AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।  Edited by : Sudhir Sharma

दुबई में फंसी पीवी सिंधू नहीं खेल पाएंगी इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप

PV Sindhu

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु का मंगलवार से शुरू होने वाली अखिल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप से बाहर रहना तय है क्योंकि अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण वह दुबई में फंस गई हैं।खिलाड़ियों के यात्रा संबंधी बाधाओं ने सुपर इस 1000 प्रतियोगिता की तैयारियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। सिंधु शनिवार से दुबई में फंसी हुई हैं क्योंकि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

सिंधु और उनके कोच इंडोनेशिया के इरवानस्याह आदि प्रतामा दुबई में फंसे हुए हैं। वह उनके ठहरने के स्थान के करीब हुए विस्फोट में बाल-बाल बच गए थे। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण उन्हें बाद में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।भारतीय स्टार खिलाड़ी को पहले दौर में थाईलैंड की सुपानिडा कटेथोंग का सामना करना था, लेकिन दुबई के हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डे के बंद रहने के कारण उन्हें टूर्नामेंट से हटना पड़ेगा।


विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) भी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है तथा देर से पहुंचने वाले खिलाड़ियों की मदद करने के लिए तैयार है।

सिंधु की टूर्नामेंट में भागीदारी अभी अनिश्चित है, लेकिन भारत के कुछ अन्य खिलाड़ी सिंगापुर और अफ्रीका के वैकल्पिक मार्गों से बर्मिंघम पहुंच गए हैं। हालांकि यह देखना बाकी है कि लंबी और थका देने वाली यात्रा उनकी तैयारियों को कितना प्रभावित करेगी।

भारत के शीर्ष पुरुष एकल खिलाड़ी लक्ष्य सेन और उभरते युवा खिलाड़ी आयुष शेट्टी यात्रा संबंधी किसी भी तरह की समस्या के बिना यहां पहुंच गए हैं। लक्ष्य का पहले दौर में मुकाबला चीन के विश्व के नंबर एक खिलाड़ी शी यु ची से होगा, जबकि आयुष इंडोनेशिया के अलवी फरहान के खिलाफ खेलेंगे।

दुबई एयरपोर्ट के पास अटकी PV सिंधू , कोच बाल बाल बचे (Video)

PV Sindhu

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू शनिवार को प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के लिए जाते समय दुबई हवाईअड्डे पर फंस गईं क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण उड़ान संचालन निलंबित कर दिया गया।यह टूर्नामेंट अगले मंगलवार से शुरू होना है।

सिंधू ने इंस्टाग्राम पर एक भीड़भाड़ वाले हवाईअड्डे का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘‘सभी उड़ानें अगली सूचना तक निलंबित। ’’

शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया।इन सैन्य हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया जिससे कई उड़ानें प्रभावित हुईं जिनमें एमिरेट्स और एयर इंडिया शामिल हैं।

दुबई हवाईअड्डे ने भी मिसाइल हमलों के बाद हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण अनिश्चितकाल के लिए सभी परिचालन निलंबित कर दिए हैं।

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू को ट्रेनिंग देने वाले इंडोनेशियाई कोच इरवांस्याह आदि प्रतामा उस समय बाल-बाल बच गए जब ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के लिए बर्मिंघम जाते हुए दुबई हवाई अड्डे पर उनके करीब धमाका हुआ।

 भारत के अधिकतर खिलाड़ी पहले ही बर्मिंघम पहुंच चुके हैं। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की शीर्ष पुरुष युगल जोड़ी, पुरुष एकल खिलाड़ी लक्ष्य सेन, युवा आयुष शेट्टी, गायत्री गोपीचंद और त्रीसा जॉली की महिला युगल जोड़ी बर्मिंघम पहुंच चुके हैं।

मालविका बंसोड़ भी पहुंच गई हैं लेकिन उन्नति हुड्डा अब भी भारत में हैं क्योंकि नयी दिल्ली से बर्मिंघम के लिए उनकी सीधी उड़ान आखिरी समय में रद्द हो गई थी।

उन्नति ने कहा, ‘‘मुझे आज करीब 11 बजे यात्रा करनी थी लेकिन सुबह-सुबह पता चला कि उड़ान रद्द हो गई है। अन्य उड़ानों में सीटें खाली नहीं हैं। मैं बीएआई के संपर्क में हूं और वे बीडब्ल्यूएफ से बात कर रहे हैं कि शायद मेरे मैच देर से कराए जाएं।’’

भारत के पूर्व कोच विमल कुमार को भी शनिवार को निकलना था लेकिन बेंगलुरु में विमान में सवार होने से कुछ देर पहले उन्हें उड़ान के रद्द होने के बारे में पता चला।

India AI Impact Summit 2026 का चौथा दिन: जब मंच पर आमने-सामने आए धुर विरोधी; Prime Minister Narendra Modi के कहने पर भी नहीं मिलाए सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई ने हाथ

 'AI इम्पैक्ट समिट' के चौथे दिन एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसने तकनीक की दुनिया में जारी खींचतान को कैमरे के सामने ला दिया। समिट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकजुटता दिखाने के लिए मंच पर मौजूद सभी वक्ताओं से एक-दूसरे का हाथ थामकर ऊपर उठाने का आग्रह किया, तो लगभग सभी दिग्गज अधिकारियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

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लेकिन इस दौरान सिलिकॉन वैली की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता भी साफ झलक उठी। OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डारियो अमोदेई एक-दूसरे के बगल में तो खड़े थे, लेकिन उन्होंने हाथ नहीं मिलाए।

दिखी प्रतिद्वंद्विता की लकीर

AI की रेस में एक-दूसरे को पछाड़ने में जुटे ये दोनों दिग्गज प्रधानमंत्री के इशारे के बावजूद अपनी मुट्ठियाँ अलग-अलग रखे नजर आए। जहाँ बाकी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश दे रहे थे, वहीं ऑल्टमैन और अमोदेई ने दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।

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ऑल्टमैन के चेहरे पर दिखी असहजता

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान सैम ऑल्टमैन काफी असहज नजर आ रहे थे। जब प्रधानमंत्री मोदी सभी को हाथ जोड़ने का संकेत दे रहे थे, तब ऑल्टमैन ने अन्य लोगों का अनुसरण करने के बजाय अपनी नजरें दूसरी ओर फेर लीं। तकनीक की दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिस्पर्धियों के बीच का यह 'कोल्ड वॉर' अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। Edited by : Sudhir Sharma 

रूस में Telegram पर डिजिटल स्ट्राइक, पुतिन ने लगाई पाबंदियां, फाउंडर बोले- हम झुकेंगे नहीं

रूसी अधिकारियों ने देश के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप में से एक, 'टेलीग्राम' पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार का यह कदम रूसी नागरिकों को विदेशी तकनीकी प्लेटफार्मों के बजाय खुद के नियंत्रित विकल्पों की ओर धकेलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल डुरोव ने एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि रूस की यह कोशिश नाकाम होगी। रूस ने फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम पर बैन लगा दिया है।

इनके अलावा स्नैपचैट (Snapchat), फेसटाइम (FaceTime), ट्विटर/X और गेमिंग प्लेटफॉर्म रोब्लॉक्स (Roblox) पर भी रूस ने प्रतिबंध लगा रखा है। रूसी नियामक संस्था 'रोसकोमनाडजोर'  का कहना है कि इन विदेशी प्लेटफार्मों का उपयोग स्थानीय कानूनों के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिमों के लिए किया जा रहा था।

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टेलीग्राम को निशाना बनाना रूसी प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि इसका उपयोग रूस में लाखों आम लोगों के अलावा खुद रूसी सेना, शीर्ष सरकारी अधिकारी, सरकारी मीडिया और यहां तक कि क्रेमलिन द्वारा भी किया जाता है।  

 

डुरोव ने कहा कि रूस अपने नागरिकों को निगरानी और राजनीतिक सेंसरशिप के लिए बनाए गए एक सरकारी ऐप का उपयोग करने के लिए मजबूर करने की कोशिश में टेलीग्राम पर पाबंदियां लगा रहा है। आठ साल पहले, ईरान ने भी यही रणनीति अपनाई थी- और वह विफल रहा। उसने झूठे बहानों के आधार पर टेलीग्राम को प्रतिबंधित किया और लोगों को सरकार द्वारा संचालित विकल्प पर स्विच करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

 

मंगलवार को रूसी सरकार ने टेलीग्राम तक पहुंच को सीमित करने का आदेश जारी किया। सरकार का तर्क है कि यह कदम 'रूसी नागरिकों की सुरक्षा' के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने ऐप पर उन सामग्रियों को ब्लॉक करने से इनकार करने का आरोप लगाया है जिन्हें प्रशासन 'आपराधिक और आतंकवादी' मानता है।

 

 डिजिटल सर्विस ट्रैकिंग साइट Downdetector के अनुसार पिछले 24 घंटों में 11,000 से अधिक यूजर्स ने ऐप के काम न करने या धीमा चलने की शिकायत की है।

 

 

 

रूस के दूरसंचार नियामक रोसकोम्नाडज़ोर (Roskomnadzor) ने एक बयान में कहा कि जब तक रूसी कानूनों के उल्लंघन को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक टेलीग्राम मैसेंजर के संचालन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित नहीं है और धोखाधड़ी या आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं हैं।

 

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री को न हटाने और खुद को विनियमित करने में विफल रहने के लिए टेलीग्राम पर 64 मिलियन रूबल (लगभग 8.28 लाख डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

पाबंदियां लागू होते ही पूरे रूस में इसके असर देखे गए।  Edited by : Sudhir Sharma

Wingo ऐप पर सरकार का तगड़ा एक्शन, चल रहा था बड़ा साइबर खेल, ब्लॉक किए Telegram चैनल और सर्वर

केंद्र सरकार ने 'Wingo' नामक एक एंड्रॉयड ऐप के माध्यम से चल रहे संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। जांच में पाया गया कि यह ऐप यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन से धोखाधड़ी वाले SMS भेज रहा था। मीडिया खबरों के मुताबिक सरकार ने इस ऐप के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को ब्लॉक कर दिया है और एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक 'हाई अलर्ट' जारी किया है। 

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यह ऐप कम समय में पैसा दोगुना करने और 'क्विक मनी' का लालच देता था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) ने कई शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए इस स्कैम ईको सिस्टम को नष्ट कर दिया है। 

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कई शिकायतें मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने इस साइबर ठगी नेटवर्क को तोड़ने के लिए तुरंत कदम उठाए। अधिकारियों के अनुसार, Wingo ऐप यूजर्स को जल्दी पैसे कमाने का लालच देता था और चुपचाप उनके मोबाइल डिवाइस व निजी डेटा का दुरुपयोग करता था। Edited by : Sudhir Sharma