Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?

‘एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा’

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्ते या फारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।

रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमला

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।

Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।

चीन को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।

चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

होर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कच्चे तेल में नरमी से भारतीय बाजारों के सेंटिमेंट सुधरे हैं। गिफ्ट निफ्टी में करीब 70 प्वाइंट की बढ़त दिख रही है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 680 करोड़ की नेट खरीदारी देखने को मिली है। नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी थोड़े कम हुए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

21 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में मार्केट पिछले सेशन की जबरदस्त रिकवरी को आगे नहीं बढ़ा पाए और सपाट बंद हुए। मेटल,PSU बैंक और रियल्टी शेयरों में बढ़त का असर ऑटो,IT,मीडिया और फार्मा शेयरों में बिकवाली से खत्म हो गया। मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बावजूद,मार्केट बढ़त के साथ खुला लेकिन उस बढ़त को बनाए नहीं रख पाया और पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में ही घूमता रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में बनी अनिश्चितताओं के बीच इन्वेस्टर्स सतर्क नजर आए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 3.11 अंक बढ़कर 77,540.83 पर और निफ्टी 20.15 अंक या 0.08 प्रतिशत बढ़कर 24,252 पर बंद हुआ।

ईरान के खिलाफ आर्थिक D-Day का एलान, ईरान की तेल निर्यात थामने की चेतावनी

वेस्ट एशिया में अब आर-पार की लड़ाई दिख रही है। अमरिका ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी इकोनॉमिक स्ट्राइक शुरू कर दी है। US के वित्त मंत्री ने कहा है कि ईरान के खिलाफ वॉर अब आखिरी चरण में है। ईरान का भी पलटवार हुआ है। उसने कहा कि ये प्रतिबंध एक्ट ऑफ वॉर की कटेगरी में आते हैं। अमेरिका का साथ देने वाले देशो को भी निशाना बनाते हुए एक्सपोर्ट ठप करेंगे।

कच्चे तेल में मामूली नरमी, $91 के नीचे, सोना 4600 डॉलर के पार

वेस्ट एशिया तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल में नरमी है। यह 91 डॉलर के नीचे है। इधर सोना-चांदी चमके हैं। सोना 4600 डॉलर के पार चला गया है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड भी 4.7 के अहम लेवल के ऊपर है। हलांकि डॉलर इंडेक्स 99 डॉलर के नीचे है।

अमेरिकी बाजारों में रही बढ़त, निक्केई और कॉस्पी में दबाव

शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी दिखी। डाओ जोंस में 500 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल आया। नैस्डैक और S&P में भी हल्की बढ़त रही। वहीं एशिया में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। कॉस्पी में करीब 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। निक्केई फ्लैट कारोबार कर रहा है।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज़्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त देख रही है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया सबसे आगे है, जिसमें 0.305% की बढ़त हुई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन (0.216%),ताइवान डॉलर (0.154%),थाई बाहत (0.141%),चीनी रेनमिनबी (0.051%),जापानी येन (0.044%) और मलेशियन रिंगित (0.017%)का नंबर है। सिंगापुर डॉलर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि फिलीपींस पेसो में डॉलर के मुकाबले 0.092% की गिरावट आई है।

लेंसकार्ट और मीशो में बड़ी ब्लॉक डील संभव

लेंसकार्ट में आज 2800 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील हो सकती है। 4% डिस्कउंट पर 635 रुपये फ्लोर प्राइस तय की गई है। इसके साथ मीशो में भी करीब 957 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील हो सकती है। इसके लिए 4 फीसदी तक के डिस्काउंट पर 197 रुपये के करीब फ्लोर प्राइस तय है। दोनों में बड़े निवेशक हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

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शुरू हुई मोबाइल PLI 2.0 स्कीम, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

डिक्सन और अंबर जैसी कंपनियों पर आज फोकस रखें। सरकार ने मोबाइल PLI 2.0 स्कीम का नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार 62500 करोड़ रुपये के इंसेंटिव देगी। यह स्कीम एक अप्रैल 2026 से ही लागू होगी और वित्त वर्ष 2031 तक चलेगी। इसके तहत सरकार 5% तक के इंसेंटिव देगीएफआईआई और

डीआईआई फंड फ्लो

21 अगस्त को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार नौवें सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹2,124 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार दूसरे सेशन में भी नेट सेलर बने रहे और ₹543 करोड़ के शेयर बेचे।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sugar Import: चीनी के भाव कब कम होंगे? ब्राजील से आने वाली है खेप, सरकार जमाखोरी पर भी सख्त

Sugar Import: भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच थोड़ी राहत की खबर आई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने कहा है कि 15 अक्टूबर से पहले ब्राजील से कुछ चीनी की खेप भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने माना कि अभी यह बताना मुश्किल है कि तब तक कितनी मात्रा में चीनी आएगी।

फिलहाल ब्राजील ही सबसे बड़ा विकल्प

नाइकनवरे के मुताबिक, इस समय चीनी आयात के लिए ब्राजील ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है। थाईलैंड आमतौर पर भारत को चीनी सप्लाई करता है। लेकिन, इस बार वो खुद उत्पादन की कमी से जूझ रहा है।

नाइकनवरे ने बताया कि ब्राजील से भारत तक जहाज आने में 40 से 45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से मिलों तक चीनी पहुंचाने में भी कुछ समय लगता है। इसलिए 15 अक्टूबर तक कितनी चीनी पहुंचेगी, इसका सटीक अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।

सरकार समय सीमा में ढील दे सकती है

केंद्र सरकार ने पहले 31 अक्टूबर तक आयातित चीनी के पहुंचने की शर्त रखी थी। लेकिन नाइकनवरे का मानना है कि सरकार इसे सख्ती से लागू नहीं करेगी। अगर कुछ खेप रास्ते में होगी, तो उसके बाद भी उसे मंजूरी मिल सकती है।

किन राज्यों को पहले मिलेगी चीनी?

सबसे पहले बंदरगाह वाले राज्यों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश

उत्तर भारत के राज्यों तक भी यही चीनी बाद में सड़क और रेल के जरिए पहुंचाई जाएगी।

सरकार ने क्यों दी आयात की मंजूरी?

20 अगस्त को सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतें 24% बढ़कर 56-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। इसी वजह से यह फैसला लिया गया।

उत्पादन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं?

NFCSF ने 2025-26 सीजन के लिए 279 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान बरकरार रखा है। इसमें एथेनॉल के लिए भेजी जाने वाली 24 लाख टन चीनी शामिल नहीं है।

फेडरेशन का अनुमान है कि 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सीजन में शुरुआती स्टॉक 35 लाख टन रहेगा। देश की औसत मासिक खपत करीब 22 लाख टन है। नवंबर तक नई पेराई शुरू होने से सप्लाई और बढ़ने की उम्मीद है। नाइकनवरे ने कहा कि फिलहाल घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं दिख रही।

सरकार की सख्ती के बाद कीमतें घटीं

यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने हाल ही में चीनी उद्योग पर कीमतें बढ़ाने और स्टॉक जमा करने का आरोप लगाया था। इसके बाद सरकार ने कई कदम उठाए।

  • मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन
  • व्यापारियों पर 200 टन की स्टॉक सीमा
  • बड़े खरीदारों के लिए अलग सीमा
  • राज्यों में गोदामों की जांच
  • फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती

नाइकनवरे ने बताया कि शनिवार को खुले टेंडरों में एक्स-मिल चीनी के दाम करीब ₹5 प्रति किलो गिर गए। उनका मानना है कि अगले हफ्ते भी कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

दुनिया में चीनी सस्ती क्यों हुई?

दिलचस्प बात यह रही कि भारत के आयात के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी महंगी होने के बजाय सस्ती हो गई। कीमत पहले 18 सेंट प्रति पाउंड तक गई, लेकिन बाद में गिरकर करीब 17.50 सेंट प्रति पाउंड रह गई।

नाइकनवरे का कहना है कि वैश्विक सप्लाई फिलहाल आरामदायक स्थिति में है। इसी वजह से भारत के 10 लाख टन आयात का अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

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India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।

वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स शुरू:उसैन बोल्ट से भी तेज निकला रोबोट, 9.39 सेकेंड में 100 मीटर दौड़ा

चीन की राजधानी बीजिंग में शनिवार से शुरू हुए 5 दिवसीय ‘दूसरे वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स’ के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया इतिहास रचा गया। चीन की सिंहुआ यूनिवर्सिटी की ‘तियानझुओ’ टीम द्वारा विकसित ह्यूमनाइड रोबोट ने 100 मीटर की रेस महज 9.39 सेकेंड में पूरी कर ली। इसके साथ ही ‘लाइटनिंग’ नाम के इस रोबोट ने उसैन बोल्ट द्वारा 2009 में स्थापित 100 मीटर दौड़ के 9.58 सेकेंड के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पिछले साल इसी प्रतियोगिता में रोबोट का बेस्ट टाइम 21.50 सेकेंड था, जो अब घटकर आधे से भी कम रह गया है। इसके अलावा तिएनकुंग रोबोट ने हाई जंप में 2.88 मी. पार कर रिकॉर्ड बनाया। इंसानों का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड 2.45 मी. है। दूसरे वर्ल्ड ह्यूमनायड रोबोट गेम्स टूर्नामेंट में 16 देशों की 666 टीमों और 2,056 रोबोट्स हिस्सा ले रहे हैं। इनके बीच 51 अलग-अलग इवेंट्स के तहत 1,301 मुकाबले खेले जाएंगे। इनमें फुटबॉल, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो और जूडो शामिल हैं।

Raksha Bandhan Gift: रक्षाबंधन पर यूपी की महिलाओं को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, एक साथी के साथ दो दिन बस में फ्री सफर कर सकेंगी महिलाएं

Raksha Bandhan Gift: उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षाबंधन पर महिलाओं और उनके एक सहयात्री को सरकारी बसों में फ्री यात्रा की सौगात दी है। खास बात यह है कि यह फ्री सेवा एक नहीं बल्कि दो दिन तक जारी रहेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (23 अगस्त) को कहा कि रक्षाबंधन पर 27 अगस्त की रात से 28 अगस्त की रात तक राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिला यात्री एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। आपको बता दें कि इस साल रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

सीएम योगी ने इस संबंध में परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन को मिलकर व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाएं त्योहार के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से अपने घर पहुंच सकें। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ को सक्रिय रखने और प्रमुख रूट्स पर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिलों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में उन्होंने प्रदेश में जलभराव, बाढ़ की स्थिति, रक्षाबंधन पर महिला यात्रियों के लिए परिवहन व्यवस्था, चीनी की उपलब्धता, आगामी गन्ना पेराई सत्र तथा स्कूलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के मद्देनजर बस चालकों की जांच और निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे का सेवन करने वाले किसी भी चालक को बस चलाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों का भी सत्यापन सुनिश्चित करते हुए महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाएं।

सीएम आदित्यनाथ ने बैठक में प्रदेश के विभिन्न मंडलों और जिलों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और गाजियाबाद के मण्डलायुक्तों तथा नोएडा प्राधिकरण से जलभराव वाले क्षेत्रों और उसके कारणों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं भी अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों को चिह्नित कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पम्पिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।

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मुख्यमंत्री ने सभी मेयर, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को स्थानीय पार्षदों के साथ फील्ड में जाकर जलभराव और सफाई व्यवस्था देखने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नालों पर जहां भी अतिक्रमण है, उसे चिह्नित कर तत्काल हटाया जाए। सीएम योगी ने यूपी के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा भी की। उन्होंने बलिया, गोण्डा, बहराइच, बाराबंकी, फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली।

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NEW US Territory, होर्मुज पर ट्रंप का दावा, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर होर्मुज जलडमरूमध्य की एक तस्वीर साझा की, जिसमें इसे “NEW US Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप के इस कदम से ईरान के साथ बढ़े तनाव के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिकी बयानबाजी और तीखी हो गई है।

 

ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। ट्रंप ने इससे पहले 18 अगस्त को भी यही तस्वीर साझा की थी। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में एक पुलिस अकादमी में भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।

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ईरान ने ट्रंप के दावे पर किया पलटवार

 

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने होर्मुज पर ट्रंप के दावे का जवाब देते हुए कहा कि जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में अमेरिका की असमर्थता और उस पर अपना अधिकार जताने के दावे के बीच बड़ा विरोधाभास है। रेजाई ने कहा कि फारस की खाड़ी में एक नए ‘पोस्ट-अमेरिकन ऑर्डर’ का स्वागत है। उन्होंने अमेरिकी दबाव के खिलाफ पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी है।

 

ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंधों की तैयारी

 

ट्रंप की ताजा पोस्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक टकराव के और गहराने की आशंका है। ईरान ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की निंदा की है। उसका कहना है कि नए प्रतिबंध उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकते हैं और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें चीन सबसे अहम है, जो ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है।

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अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने इन प्रतिबंधों को “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” बताया है। बेसेंट ने चीन से भी ईरान के तेल निर्यात को लेकर अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है।

 

ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज किया

 

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी अधिकार क्षेत्र को उसकी सीमाओं से बाहर लागू करने की कोशिश है। बघाई ने कहा कि इस तरह के द्वितीयक प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। वहीं, मोहन रेजाई ने पड़ोसी देशों को अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका के आर्थिक युद्ध का हिस्सा बनेंगे, उन्हें ईरान दुश्मन के रूप में देखेगा।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव का केंद्र

 

होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। ईरान का कहना है कि यह समुद्री मार्ग बंद है और उसने बिना अनुमति तेल टैंकरों के प्रवेश को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दी है। होर्मुज में आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। फिलहाल केवल कुछ ही कमोडिटी जहाज इस जलमार्ग से गुजर पाए हैं, जबकि बड़े कच्चे तेल के टैंकर और LNG जहाज काफी हद तक यहां से दूर हैं।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है।