SIP Calculator: क्या ₹5,000 की SIP से सच में बन सकते हैं करोड़पति? देखिए 10, 20 और 30 साल में कितनी बढ़ेगी आपकी पूंजी

SIP Return Calculation: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश करना लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का सबसे पसंदीदा तरीका बन चुका है। एकमुश्त पैसे लगाने के बजाय हर महीने एक निश्चित राशि जमा करने से निवेशकों को ‘रुपये की औसत लागत’ और ‘कंपाउडिंग की ताकत’ का सीधा फायदा मिलता है।

अगर आप भी हर महीने महज ₹5,000 की बचत करके म्यूचुअल फंड एसआईपी में लगाते हैं, तो 12% के औसत अनुमानित रिटर्न के हिसाब से आप कुछ ही दशकों में करोड़पति बन सकते हैं। आइए देखते हैं 10, 20 और 30 साल में आपके इस छोटे से निवेश का पूरा कैलकुलेशन।

10 साल में कितना बनेगा फंड?

अगर आप हर महीने ₹5,000 का निवेश लगातार 10 सालों तक जारी रखते हैं, तो आपका कुल निवेश और रिटर्न इस प्रकार होगा:

  • मासिक SIP: ₹5,000
  • निवेश की अवधि: 10 वर्ष
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • कुल जमा राशि: ₹6,00,000
  • अनुमानित रिटर्न: ₹5,61,696
  • 10 साल बाद कुल वैल्यू: ₹11,61,696

यानी 10 सालों में आपकी जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज लगभग आपके मूलधन के बराबर पहुंच जाता है।

20 साल में दिखेगा कंपाउंडिंग का असर

जैसे-जैसे आप निवेश की अवधि बढ़ाते हैं, कंपाउंडिंग की ताकत तेजी से काम करने लगती है:

  • मासिक SIP: ₹5,00,0
  • निवेश की अवधि: 20 वर्ष
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • कुल जमा राशि: ₹12,00,000
  • अनुमानित रिटर्न: ₹37,95,740
  • 20 साल बाद कुल वैल्यू: ₹49,95,740 (लगभग ₹50 लाख)

ध्यान दें, 10 साल से 20 साल के बीच आपकी जमा राशि केवल दोगुनी ₹6 लाख से ₹12 लाख हुई, लेकिन आपका कुल फंड बढ़कर लगभग ₹50 लाख हो गया।

30 साल में बनेंगे ₹1.76 करोड़ से अधिक

30 साल का लंबा नजरिया रखने पर आपको अहसास होगा कि वक्त आपके पैसों को किस तरह से मल्टीप्लाई करता है:

  • मासिक SIP: ₹5,000
  • निवेश की अवधि: 30 वर्ष
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • कुल जमा राशि: ₹18,00,000
  • अनुमानित रिटर्न: ₹1,58,49,569
  • 30 साल बाद कुल वैल्यू: ₹1,76,49,569 (₹1.76 करोड़ से ज्यादा)

30 सालों में आपके जेब से कुल ₹18 लाख ही गए, जबकि आपको मिलने वाला रिटर्न ही ₹1.58 करोड़ से अधिक का हो जाता है।

10, 20 और 30 साल की SIP का सफर

10, 20 और 30 साल की SIP का सफर

कंपाउंडिंग से दिन दोगुना रात चौगुना बढ़ती है पूंजी

म्यूचुअल फंड में वित्तीय सलाहकार जल्द से जल्द निवेश शुरू करने की सलाह इसीलिए देते हैं। आप जितने कम उम्र में एसआईपी शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग को काम करने के लिए उतना ही ज्यादा समय मिलेगा। जब मार्केट गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और मार्केट चढ़ने पर आपकी एनएवी (NAV) की वैल्यू तेजी से बढ़ती है।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें

म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होता है। 12% का रिटर्न एक ऐतिहासिक औसत पर आधारित गणना है। बाजार के रुख के अनुसार आपका रिटर्न कम या ज्यादा भी हो सकता है। इसलिए अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करें और वित्तीय सलाहकार से सलाह लेकर ही अपने लक्ष्य के अनुसार सही फंड्स चुनें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Price Today: फिर चढ़ी चांदी, दिल्ली, मुंबई में ₹2.40 के पार भाव, खरीदारी से पहले चेक कर लें अपने शहर का ताजा भाव

Silver Price Today:    चांदी की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। देश की दिल्ली में आज चांदी की कीमत लगभग ₹240 प्रति ग्राम और ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है। वहीं मुंबई में भी कीमतें ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक चांदी की कीमत उछलकर करीब एक महीने के उच्चतम स्तर 2,32,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है। आगे जानिए देश के अलग-अलग शहरों में चांदी के ताजा रेट क्या हैं।

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,400₹24,000₹2,40,000
कोलकाता₹2,400₹24,000₹2,40,000
मुंबई₹2,400₹24,000₹2,40,000
चेन्नई₹2,400₹24,000₹2,40,000
पटना₹2,400₹24,000₹2,40,000
लखनऊ₹2,400₹24,000₹2,40,000
मेरठ₹2,400₹24,000₹2,40,000
अयोध्या₹2,400₹24,000₹2,40,000
कानपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
गाजियाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
नोएडा₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,400₹24,000₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,400₹24,000₹2,40,000
जयपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
लुधियाना₹2,400₹24,000₹2,40,000
गुवाहाटी₹2,400₹24,000₹2,40,000
इंदौर₹2,400₹24,0002,40,000
अहमदाबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000
सूरत₹2,400₹24,000₹2,40,000
वडोदरा₹2,400₹24,000₹2,40,000
पुणे₹2,400₹24,000₹2,40,000
नागपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
नासिक₹2,400₹24,000₹2,40,000
बैंगलोर₹2,400₹24,000₹2,40,000
भुवनेश्वर₹2,400₹24,000₹2,40,000
रायपुर₹2,400₹24,000₹2,40,000
हैदराबाद₹2,400₹24,000₹2,40,000

ग्लोबल मार्केट में क्या हैं रेट

इंटरनेशनल मार्केट Comex में सोने के दामों में उछाल देखा गया तो वहीं चांदी के दाम (Gold Silver Price Today) में गिरते नजर आए हैं। सुबह करीब 9 बजे सोना comex पर 0.47% तक चढ़ा (Gold Price on Comex) और कीमत 4325.00 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price on Comex) के दाम 0.12% गिरकर 62.215 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

MCX पर क्या हैं ताजा प्राइस?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी के भाव (Silver Price) में 607 रुपये 0.27 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। यह 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा।

कल क्या रहे थे भाव

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक ग्लोबल स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों में भारी उछाल के कारण चांदी की कीमतों में फिर से तेजी आई और यह 6,200 रुपये बढ़कर करीब एक महीने के उच्चतम स्तर 2,32,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समे्त) पर पहुंच गई। पिछले सत्र में यह 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इससे पहले चांदी 9 जुलाई को इस स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी, जब यह 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, US-ईरान तनाव कम होने और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के फिर से खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने और निकट भविष्य में US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की चर्चा ठंडी पड़ने की संभावना है। इससे US ट्रेजरी यील्ड पर दबाव पड़ रहा है और लोग अपना पैसा US बॉन्ड से निकालकर सोने और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं।

7 हफ्ते के हाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी चढ़ी, बुलियन में तेजी की क्या है वजह?

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver price Today: 7 हफ्ते के हाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी चढ़ी, बुलियन में तेजी की क्या है वजह?

Gold Silver price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी देखने को मिली। वहीं चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और गिरती ट्रेज़री यील्ड जैसे कारणों ने सोने-चांदी की मांग को बढ़ावा दिया। COMEX पर, सोने के फ़्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,361.30 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के फ़्यूचर्स 0.65% बढ़कर $62.695 प्रति औंस हो गए। स्पॉट मार्केट में, सोना $4,285.84 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है।

यह हालिया बढ़ोतरी पिछले सत्र में बुलियन (सोना-चांदी) में फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त के बाद हुई है।

कीमतों में बढ़त क्यों

कमजोर डॉलर से सस्ता होता है सोना

प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कमज़ोर हुआ, जिससे डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी विदेशी खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गई। कमजोर डॉलर आमतौर पर वैश्विक बाज़ारों में बुलियन की मांग को समर्थन देता है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी कमी आई, जिससे सोने जैसी बिना यील्ड (ब्याज) वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो गई। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो निवेशक अक्सर कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाते हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें

बाजारों में तब आशावाद देखा गया जब रिपोर्टों से संकेत मिला कि राजनयिक प्रयासों से पश्चिम एशिया में कोई समाधान निकल सकता है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर चर्चा भी शामिल है। तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों को नीचे धकेल दिया।

कच्चे तेल की कम कीमतें ऊर्जा-जनित महंगाई के डर को भी कम करती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो जाती हैं। इससे सोने के लिए एक अनुकूल माहौल बनता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें चर्चा में

निजी पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर रहने और लेबर मार्केट में कुछ नरमी के संकेत मिलने के बाद निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण का भी पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

बाजार पार्टिसिपेट अब शुक्रवार (7 अगस्त) को आने वाली अमेरिकी नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। कमजोर जॉब्स रिपोर्ट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने को और समर्थन मिलेगा। इसके विपरीत, उम्मीद से मज़बूत रोज़गार डेटा सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को फिर से जगाकर बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

चांदी का क्या हाल है?

चांदी भी मजबूत बनी रही, जिसे उन्हीं मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों का समर्थन मिला जिनसे सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कम बॉन्ड यील्ड और डॉलर के कमजोर होने से फायदा मिलने के अलावा, चांदी को एक कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल, दोनों तरह की भूमिकाओं से भी सपोर्ट मिल रहा है।

निवेशकों की नजरें आने वाले US के आर्थिक डेटा और सेंट्रल बैंक की उम्मीदों पर टिकी हैं, इसलिए आने वाले समय में सोने और चांदी, दोनों में उतार-चढ़ाव के बने रहने की संभावना है।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 349% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; शेयरों पर रहेगी नजर

Biocon Q1 Results: फार्मा कंपनी बायोकॉन ने 5 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर चार गुना से ज्यादा बढ़कर 141 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 31.4 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी का प्रॉफिट करीब 349% उछला है।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10% बढ़कर 4,336 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,942 करोड़ रुपये थी।

EBITDA और मार्जिन में सुधार

जून तिमाही में EBITDA 10.6% बढ़कर 847.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 766.1 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी मामूली बढ़कर 19.54% हो गया, जो एक साल पहले 19.43% था।

ग्रॉस EBITDA 902 करोड़ रुपये रहा। इसका मार्जिन 21% रहा। कंपनी ने कहा कि बायोफार्मा कारोबार में बेहतर मुनाफे की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

बायोफार्मा कारोबार ने कमाल किया

बायोकॉन का बायोफार्मा कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन रहा। इस कारोबार की रेवेन्यू 17% बढ़कर 3,615 करोड़ रुपये पहुंच गई। बायोसिमिलर कारोबार की रेवेन्यू 16% बढ़कर 2,855 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, जेनेरिक दवाओं की रेवेन्यू 21% बढ़कर 760 करोड़ रुपये रही।

कंपनी ने कहा कि नए बायोसिमिलर और जेनेरिक प्रोडक्ट लॉन्च होने से यह बढ़त मिली। हालांकि, सर्विसेज कारोबार दबाव में रहा। इस सेगमेंट की रेवेन्यू 16% घटकर 736 करोड़ रुपये रह गई।

फाइनेंस कॉस्ट घटी, R&D खर्च बढ़ा

बैलेंस शीट मजबूत करने की रणनीति के चलते कंपनी का ब्याज खर्च 23% घटकर 213 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च 17% बढ़कर 240 करोड़ रुपये हो गया।

अमेरिका और यूरोप में कई नए प्रोडक्ट लॉन्च

बायोकॉन के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीहास तांबे ने कहा कि कंपनी ने तिमाही के दौरान अमेरिका और यूरोप समेत विकसित बाजारों में कई प्रो़डक्ट लॉन्च किए। साथ ही उभरते बाजारों में नए प्रोडक्ट और साझेदारियों के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई। उन्होंने कहा कि कि कंपनी को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार और तेज होगी। इसका असर दूसरी छमाही के नतीजों में साफ दिखाई देगा।

बायोकॉन की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि कंपनी अब रणनीतिक निवेश को टिकाऊ ग्रोथ में बदलने पर फोकस कर रही है। उन्होंने कहा कि बायोसिमिलर के लिए बेहतर नीति माहौल और अमेरिका में बढ़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से लंबी अवधि की ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

बायोकॉन के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले बुधवार को बायोकॉन का शेयर 0.76% की बढ़त के साथ 425.20 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक यह करीब 10% चढ़ चुका है। वहीं, पिछले एक साल में इसने 14% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Investment: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मोतीलाल ओसवाल ने निवेशकों को दी खास सलाह

Gold Investment: हाल के वर्षों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन अब निवेश की रणनीति बदलने की जरूरत हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) का कहना है कि तेजी के दौरान एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा।

ब्रोकरेज के मुताबिक, अब सोने की कीमतों पर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का असर नहीं पड़ता। अमेरिकी महंगाई, ब्याज दरें और रियल यील्ड जैसे फैक्टर्स भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

MOFSL का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को एक बार में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय अलग-अलग स्तर पर धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6% से 8% तक की गिरावट आ सकती है। इसके बाद अगले 12 से 15 महीनों में कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

भारतीय निवेशकों के लिए ब्रोकरेज ने ₹1.30 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए वाजिब माना है। वहीं, मीडियम टर्म में ₹1.68 लाख और उसके बाद ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य दिया है।

ब्याज दरों पर क्यों रखें नजर?

सोना नियमित आय नहीं देता, जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड देते हैं। इसलिए ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है।

जब रियल यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने पर दबाव आ सकता है। वहीं, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने की मांग बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसले, ग्लोबल लिक्विडिटी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश पर नजर रखनी चाहिए।

चांदी को लेकर क्या राय है?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी की चाल सोने से अलग होती है। इसकी वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी होता है।

इसी कारण चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। इस पर औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक स्थिति, निवेशकों की खरीदारी और ब्याज दरों का असर पड़ता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

ब्रोकरेज का मानना है कि सोना और चांदी लंबी अवधि में पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अच्छा विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, निवेशकों को छोटी अवधि की तेजी या गिरावट के पीछे भागने के बजाय अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहिए। महंगाई, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखना ज्यादा अहम होगा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

Gold Silver Price Outlook: देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतों में 5 अगस्त को बढ़त देखने को मिली। मजबूत ग्लोबल संकेतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर इन कीमती धातुओं की मांग के कारण घरेलू वायदा बाजार (फ्यूचर्स मार्केट) में दोनों में तेजी देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 4,545 रुपये या 2.05 फीसदी बढ़कर 2,26,160 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इस साल 9 जुलाई को भी चांदी इसी स्तर के आसपास ट्रेड कर रही थी, जब कमोडिटी एक्सचेंज पर इसकी कीमत 2,26,377 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने के वायदा भाव ₹2,165 या 1.5% बढ़कर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए।

ग्लोबल बाज़ार में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स (Comex) गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 2% बढ़कर $4,226.50 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 3.21% बढ़कर $61.46 प्रति औंस हो गए।

सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी?

जानकारों का कहना है कि यह तेजी जियोपॉलिटिकल हालात, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच कीमती धातुओं की बढ़ती मांग की वजह से आई है।

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में भी बढ़त देखी गई, क्योंकि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोना खरीदना बढ़ाया है।”

जानकारों के मुताबिक, मार्केट में नए सौदे होने से चांदी की कीमतों को भी फायदा हुआ।

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बातचीत में प्रगति की खबरों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई और कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, जिसके बाद बुलियन की कीमतों में बढ़त हुई।

कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम कर सकती हैं, जिससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ता है और कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलता है।

RBI का पॉलिसी फ़ैसला और उसका असर

यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने लगातार चौथी पॉलिसी मीटिंग में बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

कैपिटलXB के को-फ़ाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजिताभ भारती ने कहा कि RBI का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई के जोखिमों पर नजर रखने के बीच संतुलन को दिखाता है। “हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ग्लोबल महंगाई के आउटलुक पर असर डाल रहा है, लेकिन RBI का ध्यान विकास को बढ़ावा देने और साथ ही महंगाई पर बारीकी से नजर रखने पर बना रहेगा।”

इंडियन कंज्यूमर के लिए इस बढ़ोतरी का क्या है मतलब?

सोने-चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी त्योहारी सीजन से ठीक पहले हुई है, जब भारत में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। ऊंची कीमतें गहने खरीदने के फैसलों पर असर डाल सकती हैं, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अपनी मर्जी से या गैर-जरूरी चीजों के लिए खरीदारी करते हैं।

कामा ज्वैलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितता और बदलती आर्थिक स्थितियों की वजह से ग्राहक ज़्यादा सतर्क हो सकते हैं।शाह ने कहा, “आर्थिक हालात के अनिश्चित होने की वजह से लोग सतर्क हो रहे हैं। जैसे-जैसे हम त्योहारी सीजन की ओर बढ़ रहे हैं, इसका असर घरेलू मांग पर थोड़ा दिखेगा, खासकर सोना खरीदने के मामले में।”हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सोने की पारंपरिक भूमिका यानी मूल्य को सुरक्षित रखने का जरिया – लंबे समय तक इसकी मांग को बनाए रख सकती है।

आगे कहां तक जाएंगे भाव

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि अगर सोने की कीमत $4,200 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो इसके $4,500 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर, इससे सोने की कीमतें लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं।

वहीं चांदी के आउटलुक पर अगर कीमत लगातार $63 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो यह $70-$71 प्रति औंस की रेंज तक जा सकती है, जो लगभग ₹2.50-2.55 लाख प्रति किलोग्राम के बराबर है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Whirlpool India Q1 Results: होम अप्लायंसेस कंपनी का मुनाफा 29% घटा, शेयर में दबाव

Whirlpool India Q1 Results: कंज्यूमर ड्युरेबल कंपनी व्हर्लपूल ऑफ इंडिया (Whirlpool India) ने अपने जून तिमाही के नतीजे ऐलान किया है। तिमाही नतीजों के बाद शेयर 5% टूटा। जून तिमाही में कंपनी के मुनाफे और मार्जिन में गिरावट देखने को मिला।

कंपनी ने जून तिमाही में ₹103 करोड़ का कंसोलिडेटेड मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के ₹146 करोड़ से 29.4% कम है। राजस्व साल-दर-साल 12% बढ़कर ₹2,727 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹2,432 करोड़ था। ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन (ईबीआईटीडीए) से पहले की कमाई एक साल पहले की तिमाही में ₹211 करोड़ से 34% घटकर ₹140 करोड़ हो गई। EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 8.7% से घटकर 5% हो गया।

पिछले साल की इसी तिमाही में ₹196.4 करोड़ के मुकाबले, टैक्स से पहले का प्रॉफ़िट घटकर ₹138.8 करोड़ हो गया। कुल खर्च ₹2,289.9 करोड़ से बढ़कर ₹2,656.9 करोड़ हो गया, जिसकी मुख्य वजह कच्चे माल की ज़्यादा लागत, कर्मचारियों पर खर्च और अन्य ऑपरेटिंग खर्च थे।

कच्चे माल और इस्तेमाल किए गए पार्ट्स की लागत ₹1,187.3 करोड़ से बढ़कर ₹1,427 करोड़ हो गई, जबकि कर्मचारियों के फायदे पर होने वाला खर्च ₹221.1 करोड़ से बढ़कर ₹242.9 करोड़ हो गया। अन्य खर्च भी ₹380.7 करोड़ से बढ़कर ₹439.3 करोड़ हो गए।

फ़ाइनेंस से जुड़े खर्च ₹15.2 करोड़ से मामूली रूप से बढ़कर ₹14.8 करोड़ हो गए, जबकि डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन का खर्च ₹53.6 करोड़ से बढ़कर ₹54.5 करोड़ हो गया। कंपनी ने ₹103.8 करोड़ की कुल कॉम्प्रिहेंसिव इनकम बताई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹146.6 करोड़ थी।

व्हर्लपूल ने कहा कि वह अभी भी एक ही रिपोर्ट करने लायक सेगमेंट होम अप्लायंसेज में काम कर रही है। कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल नतीजों में उसकी पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी, व्हर्लपूल ऑफ़ इंडिया किचन अप्लायंसेज प्राइवेट लिमिटेड का परफ़ॉर्मेंस भी शामिल है। इसके अलावा, बोर्ड ने सीनियर मैनेजमेंट में कई बदलावों को मंज़ूरी दी। अनीश आहूजा, जो अभी हेड ऑफ सर्विस हैं, 1 सितंबर से सब्सिडियरी व्हर्लपूल ऑफ़ इंडिया किचन अप्लायंसेज में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर का पद संभालेंगे।

कंपनी ने मैन्युफ़ैक्चरिंग फ़ाइनेंस के हेड अंकित गुप्ता का इस्तीफ़ा भी स्वीकार कर लिया, जो 14 अगस्त से लागू होगा, और 10 अगस्त से सौरव चक्रवर्ती को नया हेड ऑफ़ फ़ाइनेंस नियुक्त किया। इस हफ़्ते की शुरुआत में कंपनी की पैरेंट कंपनी व्हर्लपूल कॉर्प ने ग्राहकों की मांग में कमी के कारण पूरे साल के लिए अपनी कमाई का अनुमान घटा दिया था।

नतीजों के ऐलान के बाद कंपनी के शेयर 4.8% तक गिरकर ₹781.15 के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गए। शुरुआती गिरावट से उबरते हुए, अब यह शेयर 1.49% गिरकर ₹808.3 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर में 10% की गिरावट आई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

₹1.6 लाख सैलरी पर ₹1.85 लाख EMI! F&O ट्रेडिंग के चक्कर में लगा ₹60 लाख का चूना, चौंका देगी आईटी प्रोफेशनल की ये स्टोरी

Trading Loss Loan Trap: शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में रातों-रात अमीर बनने की चाहत कई लोगों के लिए बर्बादी का कारण बन रही है। मुंबई के एक 35 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल की आपबीती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर तेजी से वायरल हो रही है। MNC में मैनेजर के पद पर कार्यरत इस शख्स ने ट्रेडिंग में लगभग ₹80 लाख गंवा दिए हैं और अब वह ₹60 लाख के भारी-भरकम कर्ज के तले दब चुका है।

हालत यह है कि उसकी महीने की टेक-होम सैलरी ₹1.6 लाख है, जबकि बैंक और डिजिटल लोन ऐप्स की ईएमआई ही ₹1.85 लाख बनती है। सोशल मीडिया पर यूजर ने अपना दर्द शेयर करते हुए इस संकट से निकलने के रास्ते पूछे हैं।

कैजुअल ट्रेडिंग से शुरू हुआ सफर, ऐसे बना ₹60 लाख का कर्ज

रेडिट यूजर (gaushi1614) ने अपनी पोस्ट में बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसने स्टॉक मार्केट और F&O ट्रेडिंग में कदम रखा था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत बन गई। पुराने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में वह और अधिक ट्रेडिंग करने लगा, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। ₹80 लाख गंवाने के बाद अब उस पर ₹60 लाख का बकाया कर्ज है।

  • दो पर्सनल लोन
  • डिजिटल लेंडिंग ऐप्स और NBFCs के लोन
  • ₹7 लाख से अधिक का बकाया क्रेडिट कार्ड बिल शामिल है।

घर चलाने के पैसे नहीं, परिवार से छिपा रखी है बर्बादी की कहानी

आईटी मैनेजर का कहना है कि उसकी प्राथमिकता किसी तरह अपनी मासिक ईएमआई का बोझ ₹1.85 लाख से घटाकर ₹1.2 से ₹1.3 लाख के स्तर पर लाना है, ताकि वह अपने परिवार के दैनिक खर्च संभाल सके और धीरे-धीरे पूरे कर्ज का भुगतान कर सके। यूजर ने बताया कि नए लोन लेने और क्रेडिट कार्ड का भारी इस्तेमाल करने के कारण बैंक अब उसे लोन कंसोलिडेशन या रीस्ट्रक्चरिंग की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस व्यक्ति की पत्नी और बच्चों को इस भारी कर्ज की भनक तक नहीं है। उसे डर है कि रिकवरी एजेंटों के घर आने पर उसके परिवार को सच पता चल जाएगा। हालांकि, उसने दावा किया है कि उसने अब तक एक भी ईएमआई बाउंस नहीं होने दी है, लेकिन अब स्थिति असहनीय हो गई है।

रेडिट यूजर्स ने दी काम की सलाह: ऐसे निकल सकते हैं कर्ज के जाल से

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस परेशानी से उबरने के लिए व्यावहारिक और कड़े सुझाव दिए हैं:

1- सबसे महंगे कर्ज पहले चुकाएं

यूजर्स ने सलाह दी है कि क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन ऐप पर 36% से 42% तक का सालाना ब्याज लगता है। सबसे पहले संपत्ति जैसे- कार, ज्वेलरी बेचकर या रिश्तेदारों से बिना ब्याज की मदद लेकर इन हाई-इंटरेस्ट लोन का निपटारा करना चाहिए।

2- F&O ट्रेडिंग अकाउंट पूरी तरह बंद करें

ट्रेडिंग की लत आसानी से नहीं छूटती। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट को स्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए और कुछ समय के लिए हर तरह के निवेश से दूरी बना लेनी चाहिए।

3. पत्नी और परिवार से सच साझा करें

अकेले इतने बड़े मानसिक तनाव को झेलना मुश्किल है। रिकवरी एजेंटों के दबाव से पहले पत्नी को स्थिति के बारे में ईमानदारी से बताना चाहिए ताकि वे मिलकर जीवनशैली के खर्चों में कटौती कर सकें।

4. सिक्योर लोन या मोर्टगेज लोन का विकल्प

अगर घर या अन्य कोई संपत्ति है, तो हाई-कॉस्ट पर्सनल लोन को चुकाने के लिए कम ब्याज दर वाले लोन का विकल्प चुना जा सकता है, जिससे ईएमआई आधी हो सकती है।

Desperately need advice – 60L debt due to trading losses and I don’t know how to get out

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u/gaushi1614 in

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या बाजार में भरेगी जोश, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा हैं संकेत, RBI की पॉलिसी पर नजर

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। वॉल स्ट्रीट के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने , कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण एशियाई बाजारों में तेजी के बाद GIFT निफ्टी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहा है। आज सबकी नजरें RBI के पॉलिसी फ़ैसले पर होंगी, जिससे बैंकों, NBFCs, ऑटो और रियल्टी जैसे ब्याज दरों से असर पड़ने वाले सेक्टर के शेयरों पर ध्यान रहेगा।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 165 अंक या 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 24,745 पर ट्रेड कर रहा था, जो यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,614.90 के क्लोजिंग स्तर से काफी ऊपर खुल सकता है। बाजार के सकारात्मक शुरुआत के संकेत तब आए हैं जब भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने मंगलवार को लगातार चार सत्रों की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया था। सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 78,428.95 पर आ गया, जबकि निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। RBI के पॉलिसी फैसले और साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

एशियाई बाजारों में तेजी, वॉल स्ट्रीट रिकॉर्ड ऊंचाई पर

बुधवार को एशियाई इक्विटी में वैश्विक तेजी जारी रही, क्योंकि टेक्नोलॉजी कंपनियों की अच्छी कमाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति की उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। जापान का निक्केई 225 3 फीसदी बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4 फीसदी चढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 1.5 फीसदी ऊपर चढ़ा।

शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी फ्यूचर्स मिले-जुले रहे, जिसमें बेंचमार्क के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी ऊपर चढ़े।

अमेरिकी इक्विटी में रात भर आई तेजी के बाद वैश्विक धारणा में काफी सुधार हुआ। अच्छी कॉर्पोरेट कमाई और जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। डॉव 1.71 प्रतिशत चढ़ा, जबकि S&P 500 में 1.79 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 2.59 फीसदी की बढ़त हुई। पैलांटिर टेक्नोलॉजीज और कैटरपिलर जैसी AI से जुड़ी कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों और सालाना अनुमानों में बढ़ोतरी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ावा दिया।

तेल की कीमतों में गिरावट जारी

पिछले सेशन में 5 प्रतिशत से ज़्यादा गिरने के बाद कच्चे तेल की कीमतें दबाव में रहीं, क्योंकि US-ईरान विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट के डर को कम कर दिया। ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर $79.02 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.5 फीसदी गिरकर $75.35 पर आ गया।

RBI के पॉलिसी फैसले पर नज़र

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीद और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार के निकट-अवधि के नजरिए को मजबूत किया है, जबकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से भी बाजार की धारणा को मजबूती मिल रही है।

पोनमुडी ने कहा कि निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से बुधवार को आने वाले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर है। बाजार के प्रतिभागी महंगाई, लिक्विडिटी, ग्रोथ और व्यापक पॉलिसी आउटलुक पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

RBI MPC Meet: 5 अगस्त के फैसले से क्या आपकी FD पर बढ़ेगा ब्याज? जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की उम्मीदें

RBI Monetary Policy Repo Rate Update: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 5 अगस्त 2026 को अपनी अहम पॉलिसी का ऐलान करने वाली है। इस घोषणा से पहले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले निवेशक टकटकी लगाए बैठे हैं कि क्या बैंक अब उन्हें एफडी पर ज्यादा ब्याज देंगे?

यह सवाल इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि जून में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई है, जो पिछले 17 महीनों में पहली बार RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकली है। हालांकि, महंगाई अभी भी RBI के 2% – 6% के दायरे में है, लेकिन कोर इन्फ्लेशन भी 4% के करीब बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि कीमतों का दबाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है।

तो क्या इस पॉलिसी के बाद FD निवेशकों को ज्यादा रिटर्न मिलेगा? आइए समझते हैं पूरा सिनेरियो।

क्या RBI रेपो रेट में करेगा बदलाव?

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.25% पर ही बरकरार रखेगा। आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक फिलहाल ‘वेट-एंड-वॉच’ की नीति अपना सकता है।

पीएल कैपिटल की लीड इकोनॉमिस्ट प्राची केले का कहना है, ‘हमें उम्मीद है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच MPC सतर्क रुख अपनाएगी। भविष्य की नीतियों के लिए वह डेटा-आधारित अप्रोच रखेगी। अगस्त की बैठक में हम रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’

अगर रेपो रेट नहीं बढ़ा, तो क्या FD रेट्स बढ़ेंगे?

अगर RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं करता है, तो निवेशकों को तत्काल कोई बड़ी खुशखबरी नहीं मिलेगी, लेकिन इसका एक फायदा यह भी है कि बैंक फिलहाल डिपॉजिट रेट्स में कटौती भी नहीं करेंगे। FD की ब्याज दरें सिर्फ रेपो रेट पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इन 3 प्रमुख कारकों पर भी तय होती हैं:

लिक्विडिटी: बैंकों के पास नकदी की स्थिति कैसी है।

लोन की डिमांड: अगर बाजार में कर्ज की मांग ज्यादा है और बैंकों को अतिरिक्त फंड की जरूरत है, तो वे बिना रेपो रेट बढ़े भी FD पर ब्याज बढ़ा सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा: ग्राहकों के डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए बैंकों के बीच की आपसी प्रतिस्पर्धा।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, ‘वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद उम्मीद है कि RBI अपना रुख जस का तस रखेगा। अगर ऐसा होता है, तो FD निवेशकों को इस स्थिर ब्याज दर वाले माहौल का फायदा मिलता रहेगा और रिटर्न पहले की तरह अनुमानित रहेगा।’

सीनियर सिटीजन्स के लिए कैसा है माहौल?

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी पर अभी भी शानदार मौके हैं। कई बैंक वरिष्ठ नागरिकों को चुनिंदा अवधियों पर आम जमाकर्ताओं के मुकाबले 0.50% से ज्यादा का प्रीमियम दे रहे हैं, जिससे उनका कुल ब्याज 8% से भी ऊपर चला जाता है। हालांकि, यह दरें बैंक-दर-बैंक अलग होती हैं।

FD निवेशकों को क्या करना चाहिए?

महंगाई दर और वैश्विक हालात को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि ब्याज दरें फिलहाल ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी। हालांकि, FD रेट्स में कोई भी बड़ी बढ़ोतरी केवल एक पॉलिसी पर नहीं, बल्कि बैंकों की फंडिंग जरूरतों पर निर्भर करेगी। वैसे अगर आप निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो लंबी अवधि की एफडी लॉक करने से पहले बैंकों के अलग-अलग रेट्स की तुलना जरूर कर लें।