Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

ITR Refund: ई-वेरिफिकेशन में देरी होने पर भी मिलेगा रिफंड, ITAT के फैसले से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

48 घंटे से भी कम समय में क्रेडिट होने वाला है आपके PF खाते में इंट्रेस्ट! जानिए कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज, 5 लाख पीएफ पर कितनी होगी कमाई?

EPF Interest 2026: अगर आप भी बार-बार अपनी ईपीएफ (EPF) पासबुक रिफ्रेश कर रहे हैं तो आपका इंतजार अब लगभग खत्म होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 34 करोड़ खातों में 15 जुलाई तक ब्याज की रकम क्रेडिट करने जा रहा है। पिछले वर्षों में जहां ब्याज अक्टूबर-नवंबर के समय क्रेडिट होता था। वहीं इस साल यह काफी पहले किया जा रहा है।

इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इंट्रेस्ट के मद में क्रेडिट होने वाली है। EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम (CITES) के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाने वाला पहला ब्याज भुगतान है।

पिछले महीने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई ब्याज दर लगातार तीसरे साल भी 8.25 प्रतिशत पर बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से इस 8.25% ब्याज का रुपयों में क्या गणित बैठता है और इसका कैलकुलेशन कैसे किया जाता है।

₹5 लाख से ₹1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इंट्रेस्ट का कैलकुलेशन 31 मार्च 2026 तक के कुल फंड के आधार पर की जाती है। ये इंट्रेस्ट 15 जुलाई तक आपके पासबुक में दिखने लगेगी। साधारण गणित के हिसाब से आपके पीएफ बैलेंस पर मिलने वाला इंट्रेस्ट कुछ ऐसा बनता है:-

₹5 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹41250 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹541250 हो जाएगा।

₹10 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹82500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹1082500 हो जाएगा।

₹50 लाख के पीएफ बैलेंस पर: ₹412500 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹5412500 हो जाएगा।

₹1 करोड़ के पीएफ बैलेंस पर: ₹825000 का ब्याज मिलेगा और ब्याज क्रेडिट होने के बाद कुल बैलेंस ₹10825000 हो जाएगा।

इंट्रेस्ट क्रेडिट होने से पहले अपने ईपीएफओ मेंबर पोर्टल या उमंग (UMANG) ऐप पर जाकर तुरंत चेक कर लें कि आपकी केवाईसी डिटेल्स अपडेटेड हैं या नहीं। केवाईसी डिटेल्स का पुराना या आउटडेटेड होना ही सबसे आम कारण है जिसकी वजह से ब्याज क्रेडिट और क्लेम अटक जाते हैं।

कैसे होता है EPF ब्याज का कैलकुलेशन? जानिए नियम

ईपीएफ (EPF) में ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है। लेकिन यह रकम वित्तीय वर्ष के अंत में साल में एक बार आपके खाते में जमा होती है। इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से किया जाता है-

मंथली क्लोजिंग बैलेंस: ईपीएफओ हर महीने के अंत में आपके खाते के बैलेंस को आधार बनाता है। पिछले वित्त वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस पर पूरे साल का ब्याज मिलता है।

मासिक दर: वार्षिक ब्याज दर को 12 से भाग दिया जाता है, जैसे- 8.25% ÷ 12 = 0.6875% प्रति माह

नया योगदान: महीने के दौरान जमा हुई नई राशि को उस महीने के ब्याज में नहीं गिना जाता बल्कि उसे अगले महीने के ओपनिंग बैलेंस में शामिल किया जाता है। साल के दौरान जमा होने वाले नए पीएफ योगदान पर ब्याज, जमा होने के अगले महीने की पहली तारीख से 31 मार्च तक मिलता है।

पैसा निकालने पर नियम: अगर आपने साल के बीच में पीएफ का पैसा निकाला है तो निकाली गई रकम पर ब्याज केवल निकासी वाले महीने से ठीक पहले तक ही मिलता है। उसके बाद उस हिस्से पर ब्याज नहीं मिलता।

राउंड ऑफ और टोटल: सभी 12 महीनों के ब्याज को जोड़कर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। आखिरी में EPFO कुल ब्याज की रकम को नजदीकी पूरे रुपये में राउंड ऑफ कर देता है।

इस बार नए CITES सिस्टम की वजह से न सिर्फ ब्याज काफी जल्दी मिल रहा है। बल्कि आगे चलकर क्लेम, अकाउंट ट्रांसफर और दूसरी EPFO सेवाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।

मेंबर पासबुक पोर्टल पर कैसे चेक करें अपना बैलेंस? स्टेप बाई स्टेप तरीका

अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज आपके खाते में क्रेडिट हुआ है या नहीं तो सुनिश्चित करें कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट हो। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:-

स्टेप 1: सबसे पहले EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपने UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी (OTP) को दर्ज करके अपनी पहचान सत्यापित करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आप अपना लेटेस्ट ईपीएफ बैलेंस देख सकते हैं और यह भी चेक कर सकते हैं कि FY26 का ब्याज क्रेडिट हुआ है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

ये भी पढ़ें- EPFO Alert: PF फंड का क्लेम और e-नॉमिनेशन के लिए तुरंत अपडेट करें प्रोफाइल फोटो, नहीं तो हो सकती है परेशानी

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 13 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत खराब रहने की संभावना है। शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 0.79 फीसदी कमजोरी के साथ 24,045 के आसपास ट्रेड कर रह है। यह एक निगेटिव संकेत है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

10 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन भी रिकवरी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में हुई जबरदस्त खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी,दोनों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के बीच बाजार मजबूती के साथ खुला और पूरे सेशन के दौरान बढ़त बनाए रखी। निफ्टी 50 ने इंट्राडे में 24,228.45 का हाई लेवल छुआ। इस तेज़ी में IT शेयरों का अहम योगदान रहा। वहीं,रियल्टी,मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने सेंटीमेंट को और मजबूत किया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 827.57 अंक या 1.08 प्रतिशत बढ़कर 77,569.39 पर और निफ्टी 244.10 अंक या 1.02 प्रतिशत बढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ।

ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट में टेंशन से ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार चला गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर है। इधर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोना $4,100 के नीचे फिसल गया है।

LTM के उम्मीद से बेहतर नतीजे, L&T फाइनेंस का मुनाफा 28% बढ़ा

LTM ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की constant currency यानी CC रेवेन्यू ग्रोथ 0.3% रही है। कंपनी के मुनाफे में 9% से ज्यादा की बढ़त रही है। वहीं मार्जिन में भी सुधार दिखा है। ऑर्डर बुक भी मजबूत रही है। दूसरी ओर L&T Finance की प्रॉफिट और ब्याज से होने वाली कमाई यानी NII 28% से ज्यादा बढ़ी है। रिटेल लोन बुक गाइडेंस से कहीं बेहतर रही है।

डीमार्ट: Q1 मुनाफे में 11.3% का उछाल

पहली तिमाही में एवेन्यू सुपरमाट्स के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में 11 परसेंट और रेवेन्यू में 15 परसेंट की ग्रोथ रही है। हालांकि मार्जिन बिल्कुल फ्लैट रहे हैं। मेट्रो शहरों के स्टोर्स की ग्रोथ में दबाव दिखा है।

आज आएंगे HCL TECH के नतीजे

निफ्टी में आज HCL TECH के नतीजे आएंगे। इसकी कॉन्सटेंट करेंसी में 1.1 परसेंट और डॉलर आय में 1.3% गिरावट का अनुमान है। हालांकि मार्जिन 30 Bps बढ़ने की उम्मीद है।

SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO का साइज घटा

SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO का साइज घटा है। इश्यू का साइज 11700 करोड़ रुपए से घटकर 9813 करोड़ रुपए हुआ है। इधर दिग्गजों को प्री-IPO स्टेक बेचकर SBI ने 1655 करोड़ रुपए जुटाए हैं। SBI के OFS का हिस्सा घटकर 6.30% से 4.89% पर आ गया है।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07:50 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 195 अंक यानी 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 24,040.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। ये सेंसेक्स-निफ्टी के लिए निगेटिव संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 1.20 फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.20 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.85 फीसदी की तेजी दिख रही है। ताइवान के बाजार में भी 0.82 फीसदी की बढ़त नजर आ रही है। वहीं, कोस्पी करीब 4.75 फीसदी नीचे है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.71 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

शुक्रवार को S&P 500 में 0.42% की बढ़त हुई और यह 7,575.39 के लेवल पर बंद हुआ। यह 2 जून को बने रिकॉर्ड हाई क्लोज़ से अभी भी 0.45% नीचे है। Nasdaq भी 0.29% की बढ़त के साथ यह 26,281.61 के लेवल पर पहुंच गया। जबकि डाओ जोन्स में 0.29% की बढ़त हुई और यह 52,637.01 के स्तर पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुए टकराव से महंगाई का डर बढ़ गया और सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बढ़ गई है। जिसके चलते डॉलर अपनी ज़्यादातर प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 101.17 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में 2 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ये क्रमशः 4.58% और 4.23% पर पहुंच गए हैं।

एशियन करेंसी

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला कारोबार हुआ,रीजनल बाजारों में सतर्कता का माहौल दिखा। इंडोनेशियाई रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है। जिसमें 0.35% की बढ़त हुई। इसके बाद चीनी रेनमिनबी (+0.22%) और ताइवान डॉलर (+0.19%) का स्थान रहा। दूसरी तरफ,साउथ कोरियन वॉन इस इलाके की सबसे कमजोर करेंसी है,जिसमें 0.34% की गिरावट आई,जबकि जापानी येन 0.25% फिसला है जिससे पता चलता है कि नॉर्थ एशिया की मुख्य करेंसी के मुकाबले डॉलर में हल्की मज़बूती आई है। थाई बात(-0.21%),सिंगापुर डॉलर (-0.17%),मलेशियन रिंगिट (-0.17%) और फिलीपीन पेसो (-0.16%) भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

10 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs)ने बिकवाली के एक दिन बाद ₹2,603 ​​करोड़ के शेयर खरीदे और वे नेट खरीदार बन गए। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार तीसरे सेशन में खरीदारी जारी रखी और ₹2,019 करोड़ का निवेश किया।

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Gold Price Diwali Target Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई का डर एक बार फिर बढ़ गया है। इस तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक एक बार फिर बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल ₹1.40 लाख से ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशक और आम खरीदार असमंजस में हैं कि अभी सोना खरीदना चाहिए या नहीं। आइए समझते हैं कि दिवाली तक सोने की चाल कैसी रह सकती है।

क्या सोने की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतों में किसी बड़ी या भारी गिरावट की उम्मीद बहुत कम है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना मौजूदा स्तरों पर अपना एक मजबूत आधार बना चुका है। अगर यहां से कीमतों में कोई गिरावट आती भी है, तो वह महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। घरेलू बाजार में सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट पर है। इसलिए ग्राहकों को बहुत ज्यादा दाम गिरने की उम्मीद में अपनी खरीदारी को टालना नहीं चाहिए।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?

सोने की मौजूदा तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते विवाद ने निवेशकों को शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी जगहों से निकालकर सोने की तरफ आकर्षित किया है।

कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई की चिंता को दोबारा हवा दे दी है, जिससे हेजिंग के लिए सोने की मांग बढ़ी है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही है।

दिवाली तक कहां पहुंच सकता है सोना?

दिवाली पर सोने के भाव को लेकर विश्लेषकों ने दो तरह की संभावनाएं जताई हैं:

पहली स्थिति: अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और स्थितियां सामान्य होती हैं, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें छलांग लगाते हुए ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकती हैं।

दूसरी स्थिति: अगर तनाव और अनिश्चितता का माहौल आगे भी बरकरार रहता है, तो सोने के दाम ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख के सीमित दायरे में ही बने रहेंगे।

ग्लोबल टारगेट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को $3,800 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि लंबी अवधि के लिए $5,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्वैलरी मार्केट में लौटी रौनक, खरीदारी का अच्छा मौका

सोने की कीमतों में आई हालिया मामूली गिरावट ने ज्वैलरी बाजार में ग्राहकों की डिमांड को फिर से जिंदा कर दिया है। जब कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई पर थीं, तब बिक्री में भारी गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार हो रहा है। अगस्त और सितंबर से शुरू होने वाले आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल दिवाली पर सोने की मांग पिछले साल के मुकाबले बेहतर या उसके बराबर रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Home Loan Rates: नया घर खरीदने का है प्लान? देखें जुलाई 2026 में सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की ताजा ब्याज दरें

Home Loan Interest Rates July 2026 Comparison: अगर आप अपने सपनों का आशियाना खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। होम लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि मामूली सा अंतर भी आपकी मंथली ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज के खर्च को लाखों रुपये कम कर सकता है।

वर्तमान में कई सरकारी बैंक 7.10% की शुरुआती दर पर होम लोन की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि, आपको किस दर पर लोन मिलेगा, यह आपके क्रेडिट स्कोर, लोन की राशि, आपकी आय और रीपेमेंट हिस्ट्री जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) की जुलाई 2026 की ताजा ब्याज दरें।

RBI की नीति और होम लोन का कनेक्शन

होम लोन की ब्याज दरें सीधे तौर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति से जुड़ी होती हैं. आरबीआई ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, जिसके चलते मार्केट में लोन की दरें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं.

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

सरकारी बैंक आमतौर पर सबसे किफायती दरों पर लोन ऑफर करते हैं. यहां प्रमुख सरकारी बैंकों की ब्याज दरों की लिस्ट दी गई है:

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 9.15%
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.10% से 9.90%
  • बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 10.25%
  • यूको बैंक (UCO Bank): 7.15% से 9.25%
  • इंडियन बैंक: 7.15% से 9.55%
  • यूनियन Bank ऑफ इंडिया: 7.15% से 9.60%

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

प्राइवेट सेक्टर के बैंक बेहतर और फास्ट सर्विस के साथ इन दरों पर होम लोन दे रहे हैं:

  • साउथ इंडियन बैंक: 7.20% से शुरुआत
  • फेडरल बैंक: 7.35% से 10.25%
  • HSBC बैंक: 7.45% से शुरुआत
  • कर्नाटक बैंक: 7.49% से 11.72%
  • ICICI बैंक: 7.55% से शुरुआत
  • कोटक महिंद्रा बैंक: 7.60% से शुरुआत

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

अगर आप बैंकों के बजाय हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का रुख करना चाहते हैं, तो उनकी दरें इस प्रकार हैं:

  • LIC हाउसिंग फाइनेंस: 7.15% से शुरुआत
  • बजाज हाउसिंग फाइनेंस: 7.25% से शुरुआत
  • PNB हाउसिंग फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • ICICI होम फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस: 7.65% से शुरुआत
  • आदित्य बिड़ला कैपिटल: 7.75% से शुरुआत

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

सबसे सस्ता लोन पाने के लिए ‘क्रेडिट स्कोर’ है सबसे जरूरी

अगर आप बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही सबसे न्यूनतम ब्याज दर (जैसे- 7.10%) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर 800 या उससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा ब्याज दरें इस बात पर भी निर्भर करती हैं कि आवेदन करने वाला व्यक्ति नौकरीपेशा है या सेल्फ-एंप्लॉयड। नौकरीपेशा लोगों को बैंक अक्सर ब्याज दरों में थोड़ी एक्स्ट्रा छूट देते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPF vs VPF: नौकरी जॉइन करते ही करें ये काम, 5 गुना बढ़ जाएगा आपका पीएफ फंड! जानें EPF और VPF का पूरा गणित

EPF vs VPF Retirement Corpus Comparison: जब भी कोई नई नौकरी मिलती है, तो हमारा पूरा ध्यान सालाना CTC पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सीटीसी का एक छोटा सा हिस्सा, जो प्रोविडेंट फंड (EPF) में जाता है, आपके रिटायरमेंट की पूरी तस्वीर बदल सकता है?

अक्सर कंपनियां ईपीएफ योगदान की गणना के लिए एक बेसिक सैलरी की सीमा तय कर देती हैं, जिससे आपका रिटायरमेंट फंड बहुत छोटा रह जाता है। लेकिन अगर आप सही प्लानिंग के साथ EPF और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का सही तालमेल बिठाएं, तो बुढ़ापे में मिलने वाला फंड 5 गुना तक बढ़ सकता है और आप आसानी से करोड़ों रुपये के मालिक बन सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

कैसे मामूली अंतर से बन जाएगा ₹1.9 करोड़ का फंड?

मान लीजिए एक कर्मचारी की सालाना सीटीसी ₹12 लाख है। अब ईपीएफ योगदान दो अलग-अलग तरीकों से तय होता है:

केस 1: न्यूनतम सीमा पर योगदान

ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी की सरकारी सीमा यानी ₹15,000 प्रति महीने पर ही 12% ईपीएफ काटती हैं। इस स्थिति में आपके और कंपनी के हिस्से को मिलाकर हर महीने कुल ₹3,600 ईपीएफ में जमा होंगे। अगर वर्तमान ब्याज दर 8.25% और निवेश की अवधि 30 साल मान लें, तो रिटायरमेंट पर आपको मिलेंगे करीब ₹57 लाख।

केस 2: वास्तविक बेसिक सैलरी पर योगदान

अब मान लीजिए आपकी कंपनी आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी जो सीटीसी का 50% यानी ₹50,000 महीना है उस पर 12% पीएफ काटती है। ऐसे में आपका और कंपनी का मिलाकर हर महीने कुल योगदान ₹12,000 हो जाता है। इसी 8.25% ब्याज दर और 30 साल की अवधि में आपका कुल फंड बढ़कर ₹1.9 करोड़ हो जाएगा!

यानी सिर्फ बेसिक सैलरी पर पीएफ कैलकुलेट करवाने से आपकी जेब में बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ₹1.3 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त फंड जुड़ जाता है। यह है कंपाउंडिंग की असली ताकत।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

अगर आप अपने बुढ़ापे को और भी सुरक्षित और आलीशान बनाना चाहते हैं, तो आप VPF का विकल्प चुन सकते हैं। वीपीएफ आपको अनिवार्य 12% की सीमा से अधिक अपनी मर्जी से पीएफ में निवेश करने की छूट देता है। ऊपर दिए गए उदाहरण में अगर आप ईपीएफ के ₹12,000 के योगदान के साथ हर महीने वीपीएफ के जरिए ₹8,000 अतिरिक्त निवेश करते हैं, तो आपकी कुल मासिक बचत ₹20,000 हो जाएगी।

30 साल बाद 8.25% ब्याज के हिसाब से आपका यह फंड बढ़कर करीब ₹3.2 करोड़ हो जाएगा! यह शुरुआती ₹57 लाख के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा है।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

नौकरी बदलते या जॉइन करते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

हर कंपनी का पीएफ काटने का नियम अलग होता है। इसलिए सैलरी डिस्कशन के समय ये बातें जरूर जांचें:

पीएफ कैलकुलेशन का आधार: कंपनी से साफ पूछें कि वे पीएफ का योगदान ₹15,000 की न्यूनतम सीमा पर कर रहे हैं या आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी पर।

बेसिक सैलरी का हिस्सा: आपकी सीटीसी में बेसिक सैलरी का हिस्सा कितना है, क्योंकि पीएफ इसी से तय होता है।

VPF की सुविधा: क्या कंपनी आपको VPF के जरिए अतिरिक्त निवेश करने की अनुमति देती है।

टेक होम सैलरी में लगेगी चपत

ज्यादा पीएफ और वीपीएफ काटने का एक ही नुकसान है कि इससे आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाती है। इसलिए निवेश बढ़ाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके पास इमरजेंसी फंड तैयार है और आपके मंथली खर्चे आसानी से पूरे हो रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Price Today: आज चांदी की कीमतों में बड़ा उलटफेर! खरीदारी से पहले जानें 10 जुलाई का रेट

Silver Price Today: देशभर में आज 10 जुलाई 2026 को चांदी की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव करीब ₹234.90 से ₹235 प्रति ग्राम और ₹2,34,900 से ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में आई गिरावट के बाद आज बाजार में कीमतें लगभग स्थिर रहीं। स्पॉट चांदी 0.8% बढ़कर $60.46 प्रति औंस हो गई है।

रिकवरी के बावजूद, मेटल हफ्ते में गिरावट के रास्ते पर बना रहा क्योंकि निवेशक बढ़ती ब्याज दर की उम्मीदों के असर का अंदाजा लगाते रहे। चांदी खरीदने से पहले अपने नजदीकी ज्वेलर या बुलियन डीलर से ताजा रेट की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि मेकिंग चार्ज और जीएसटी के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

आज के राष्ट्रीय चांदी के रेट

1 ग्राम: ₹234.90–₹235

10 ग्राम: ₹2,349–₹2,350

100 ग्राम: ₹23,490–₹23,500

1 किलोग्राम: ₹2,34,900–₹2,35,000

बाजार का रुख

बुलियन बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल के दिनों में मुनाफावसूली (Profit Booking) और घरेलू बाजार में मांग में नरमी के कारण चांदी की कीमतों में गिरावट आई थी। हालांकि, आज कीमतों में स्थिरता देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट के संकेत और एमसीएक्स (MCX) में होने वाली गतिविधियां आगे कीमतों की दिशा तय करेंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में मांग में बदलाव और भारतीय रुपये की मजबूती के कारण चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में हल्की नरमी देखने को मिली है। वहीं, वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से कीमतों को कुछ समर्थन मिला है। थोक बाजार और वायदा कारोबार (MCX) में चांदी की कीमतों पर निवेशकों की लगातार नजर बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर आगे कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है।

खरीदारों के लिए सलाह

अगर आप चांदी के आभूषण, सिक्के या बार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार या अधिकृत ज्वेलर से ताजा रेट की पुष्टि जरूर कर लें। स्थानीय टैक्स, GST और मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों से महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बात की आशंका भी बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, इसलिए सोने की ट्रेडिंग सावधानी के साथ हो रही है।

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हालांकि, इंटरनेशनल राजनीतिक तनाव आमतौर पर सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट्स) को बढ़ावा देते हैं। लेकिन सख्त मौद्रिक नीति और मजबूत अमेरिकी डॉलर की संभावनाओं ने सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखा है।

सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा

Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।

क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को ‘खत्म’ घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर

जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।

US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।

क्या हैं सोने के नए टार्गेट?

डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:

तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।

मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।

भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने का आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि ‘निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।’ शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

EPF Interest Credit: 15 जुलाई तक PF खाताधारकों के अकाउंट में आएगा ब्याज, जानें ₹10, 50 लाख और 1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई

EPFO Credit FY26 Interest Update: अगर आप भी अपने पीएफ खाते में ब्याज का पैसा ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज का पैसा 15 जुलाई तक देश के करीब 34 करोड़ खाताधारकों के अकाउंट में क्रेडिट करने जा रहा है।

आमतौर पर पीएफ का ब्याज अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता था, लेकिन इस बार नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम की बदौलत यह काम काफी पहले होने जा रहा है। इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ब्याज राशि बांटी जा रही है। वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने ही 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दी है, जो लगातार तीसरे साल भी बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से आपको कितने रुपये का फायदा होने वाला है।

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

8.25% की ब्याज दर सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन असल में आपके खाते में कितने रुपये आएंगे? इसे आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

ध्यान दें: यह गणना इस अनुमान पर आधारित है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पीएफ बैलेंस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। असल में पीएफ ब्याज की गणना हर महीने के रनिंग बैलेंस पर की जाती है, जो आपके मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन या विड्रॉल के हिसाब से बदल सकती है।

बिना किसी रिस्क के बंपर और टैक्स-फ्री कमाई

इस कैलकुलेशन से साफ है कि पीएफ पर मिलने वाला फायदा बेहद शानदार है। उदाहरण के लिए, जिस कर्मचारी के खाते में ₹50 लाख का कॉर्पस है, उसे बिना किसी मार्केट रिस्क और बिना एक भी रुपया निकाले सीधे ₹4 लाख से ज्यादा की कमाई होगी। वहीं, ₹1 करोड़ का बैलेंस रखने वालों को ₹8.25 लाख का ब्याज मिलेगा, जो कई लोगों की शुरुआती सालाना सैलरी से भी कहीं ज्यादा है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाला निवेश है।

KYC अपडेट रखें, वरना फंस सकता है पैसा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका केवाईसी डिटेल्स जैसे पैन या बैंक अकाउंट की जानकारी पुरानी या अधूरी है, तो उसे तुरंत ठीक कर लें। पीएफ ब्याज का पैसा अटकने या क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह अधूरा केवाईसी ही होती है। आप ईपीएफओ पोर्टल या उमंग ऐप के जरिए इसे चेक कर सकते हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे चेक करें अपना ईपीएफ बैलेंस?

यह जांचने के लिए कि आपके खाते में ब्याज का पैसा आया है या नहीं, आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट होना चाहिए। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:

स्टेप 1: सबसे पहले ईपीएफओ के ‘Member Passbook’ पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपना UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, उसे दर्ज कर अपनी पहचान वेरिफाई करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आपको अपना लेटेस्ट पीएफ बैलेंस और वित्त वर्ष 2025-26 का क्रेडिट हुआ ब्याज दिख जाएगा।

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