कच्चे तेल में आएगी गिरावट, सोना और चांदी खरीदने के लिए करें इंतजार : Citi

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों तक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ना है। वहीं, बैंक का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सोने और चांदी में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों की कीमतों में अभी और कमजोरी आ सकती है।

कच्चे तेल पर क्यों है दबाव?

मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। अगर ईरान से जुड़ा कोई समझौता होता है, तो बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ चीन से मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरे देशों का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।

Citi का अनुमान है कि अगर मौजूदा बातचीत सफल रही, तो साल के आखिर तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। लेटन ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसे मुनाफावसूली का मौका मानना चाहिए।

गोल्ड और सिल्वर पर क्या राय?

मैक्स लेटन का कहना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की तेज रैली की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मजबूत खरीदारी थी। अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

उनके मुताबिक, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से फिलहाल सोने में कमजोरी रह सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि अगले दो महीनों में अगर कीमतें गिरती हैं, तो वही खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई के नरम पड़ने से सोने को फिर सहारा मिल सकता है।

मैक्स लेटन का कहना है कि चांदी भी फिलहाल सोने की दिशा में ही चल सकती है। उनके मुताबिक, हालिया तेजी की बड़ी वजह निवेशकों की खरीदारी थी, न कि औद्योगिक मांग। हालांकि, सोलर जैसे सेक्टरों से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों की वजह से दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे शॉर्ट टर्म में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।

AI Stocks: AI शेयरों में मची बिकवाली, Netweb से Black Box तक 10% टूटे; जानिए क्या है वजह

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

₹20 लाख वाली थार लेने की सोच रहे हैं? अपनाएं यह सुपरहिट ’20-4-10′ का फॉर्मूला, जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ

Car Buying Tips: आज के समय में ₹20 लाख के बजट में एक से बढ़कर एक बेहतरीन एसयूवी (SUV) और सेडान कारें बाजार में उपलब्ध हैं। थार को लेकर भी आजकल खूब ट्रेंड चल रहा है। SUV खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन बिना प्लानिंग के लिया गया बड़ा कार लोन आपकी मंथली सेविंग्स और जेब का गणित बिगाड़ सकता है।

अगर आप भी ₹20 लाख वाली थार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का एक सुपरहिट और ग्लोबल नियम आपके बहुत काम आ सकता है। इसे ’20-4-10′ का फॉर्मूला कहा जाता है। आइए समझते हैं कि इस फॉर्मूले के तहत आपको कितनी डाउन पेमेंट करनी चाहिए, लोन कितने साल का होना चाहिए और आपकी EMI कितनी होनी चाहिए।

क्या है कार खरीदने का ’20-4-10′ फॉर्मूला?

यह फाइनेंशियल प्लानिंग का एक ऐसा नियम है जो यह सुनिश्चित करता है कि कार खरीदने के बाद भी आपकी जेब पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और आपके अन्य जरूरी वित्तीय लक्ष्य जैसे- घर, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट प्रभावित न हों।

20% डाउन पेमेंट: कार की ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20% हिस्सा आपको डाउन पेमेंट के रूप में नकद देना चाहिए।

4 साल का लोन: कार लोन की अवधि अधिकतम 4 साल (48 महीने) होनी चाहिए। लोन जितना लंबा होगा, आप उतना ही ज्यादा ब्याज बैंक को चुकाएंगे।

10% ईएमआई लिमिट: आपकी कार की मासिक EMI और कार का रख-रखाव का खर्च आपकी मंथली इन-हैंड सैलरी के 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।

₹20 लाख की कार का पूरा कैलकुलेशन

आइए मान लेते हैं कि कार की ऑन-रोड कीमत ₹20,00000 है। अब इस पर ’20-4-10′ का नियम लागू करके देखते हैं:

1. डाउन पेमेंट

नियम के मुताबिक, आपको ₹20 लाख का 20% यानी ₹4,00,000 डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए।

फायदा: इससे आपका लोन अमाउंट छोटा हो जाता है और बैंक से लोन आसानी से और कम ब्याज दर पर मिल जाता है।

2. लोन की रकम

डाउन पेमेंट घटाने के बाद आपका कुल लोन अमाउंट ₹16,00,000 बचेगा।

3. लोन की अवधि और EMI का गणित

मान लेते हैं कि आपको बैंक से 9% की सालाना ब्याज दर पर कार लोन मिल रहा है। अब लोन की अवधि के हिसाब से EMI को समझते हैं:

लोन की अवधि मासिक EMI (अनुमानित) 4 साल में चुकाया गया कुल ब्याज
4 साल (48 महीने)₹39,811₹3,11,000
5 साल (60 महीने)₹33,212₹3,93,000
7 साल (84 महीने)₹25,720₹5,60,000

अगर आप 7 साल के लिए लोन लेते हैं, तो आपकी EMI तो घटकर ₹25,720 हो जाएगी, लेकिन आप बैंक को ₹5.60 लाख सिर्फ ब्याज के रूप में दे देंगे। वहीं 4 साल के लोन में आप करीब ₹2.5 लाख का शुद्ध ब्याज बचा लेंगे।

आपकी सैलरी कितनी होनी चाहिए?

नियम के तीसरे हिस्से ‘10%’ के अनुसार, अगर आपकी कार की EMI करीब ₹40,000 4 साल के लोन के लिए आ रही है, तो आदर्श रूप से आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी ₹4 लाख प्रति माह होनी चाहिए।

अगर सैलरी कम है तो क्या करें?

अगर आपकी सैलरी ₹1.5 लाख से ₹2 लाख के बीच है, तो आपके पास दो रास्ते हैं:

डाउन पेमेंट बढ़ाएं: आप 20% की जगह 50% डाउन पेमेंट यानी ₹10 लाख खुद कैश दें, जिससे लोन सिर्फ ₹10 लाख का रह जाएगा और EMI घटकर आपके बजट में आ जाएगी।

लोन की अवधि 5 साल करें: हालांकि 4 साल सबसे बेस्ट है, लेकिन बजट संतुलित करने के लिए आप इसे अधिकतम 5 साल कर सकते हैं, जिससे EMI थोड़ी कम (₹33,212) हो जाएगी।

इन ‘छिपे हुए खर्चों’ को न भूलें

कार की फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय सिर्फ EMI पर ध्यान न दें। हर महीने कार पर होने वाले अन्य खर्चों को भी बजट में जोड़ें:

फ्यूल और मेंटेनेंस: पेट्रोल/डीजल/इलेक्ट्रिक का खर्च और हर 6 महीने या सालभर में होने वाली सर्विसिंग।

इंश्योरेंस रिन्यूअल: हर साल कार के इंश्योरेंस का प्रीमियम चुकाना होगा, जो ₹20 लाख की कार के लिए सालाना ₹30,000 से ₹50,000 के बीच हो सकता है।

कुल मिलाकर ₹20 लाख की कार लेना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है, बशर्ते आप कम से कम ₹4 से ₹5 लाख की डाउन पेमेंट की तैयारी पहले से कर लें और लोन की अवधि को जितना हो सके छोटा रखें।

Gold Price Today: चांदी 5000 रुपये सस्ती हुई, सोने के भी गिरे दाम; चेक करें लेटेस्ट प्राइस

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में 24 कैरेट सोना 150 रुपये सस्ता होकर 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। शुक्रवार को चांदी 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने और चांदी के भाव?

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नरमी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की। इसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।

ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब भी बना हुआ है। दूसरी तरफ मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई (Inflation) के आंकड़ों पर है। निवेशकों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

इसके अलावा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

स्पॉट गोल्ड घटकर 4,160.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 62.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से गोल्ड में हल्की गिरावट आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग PMI, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI और फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी। इन आंकड़ों से डॉलर और सोने की कीमतों को नई दिशा मिल सकती है। उनके मुताबिक, इन अहम आर्थिक आंकड़ों के आने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

*एजेंसी इनपुट के साथ

सोना खरीदने की क्या जरूरत? इन 5 सरकारी और प्राइवेट Gold ETF ने 3 साल में दिया 34% तक का छप्परफाड़ रिटर्न

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF Interest Credit: बड़ी खुशखबरी! EPFO ने 8 करोड़ PF खाते में ब्याज जमा करने का दिया आदेश; इन 4 तरीकों से करें चेक

EPF Interest Rate: करीब 8 करोड़ EPF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सदस्यों के खातों में ब्याज की रकम जमा करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

EPFO ने अपने हालिया सर्कुलर में कहा है कि केंद्र सरकार ने Employees’ Provident Fund Scheme, 1952 के पैरा 60(1) के तहत 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। अब सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द यह ब्याज सदस्यों के EPF खातों में जमा करें।

इस बार जल्दी आएगा ब्याज

इस बार EPFO ने अपने डेटाबेस का कंसालिडेशन (Database Consolidation) किया है। साथ ही सॉफ्टवेयर सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है।

इसी वजह से ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और आसान रहने की उम्मीद है। पहले सभी खातों में ब्याज जमा होने में एक से दो महीने तक लग जाते थे। लेकिन इस बार प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।

लंबे समय से इंतजार कर रहे थे सदस्य

EPF सदस्य काफी समय से अपने खातों में ब्याज आने का इंतजार कर रहे थे। दरअसल, मार्च 2026 में EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया।

नियमों के मुताबिक, CBT की मंजूरी के बाद प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास जाता है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही ब्याज खातों में जमा किया जाता है।

लगातार तीसरे साल नहीं बदली ब्याज दर

वित्त मंत्रालय ने जून 2026 में 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही लगातार तीसरे साल EPF पर ब्याज दर 8.25% ही रखी गई है। अब औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद EPFO ने ब्याज की रकम खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

यानी अगर आपका भी EPF खाता है, तो आने वाले दिनों में आपके खाते में वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज दिखाई देने लगेगा।

EPF खाते में ब्याज आया या नहीं? ऐसे करें चेक

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके EPF खाते में 8.25% ब्याज जमा हुआ है या नहीं, तो इन आसान तरीकों से चेक कर सकते हैं।

1. EPFO Member Passbook से चेक करें

  • EPFO Member Passbook पोर्टल पर जाएं।
  • अपना UAN और पासवर्ड डालकर लॉग इन करें।
  • अपना EPF खाता चुनें।
  • पासबुक खोलें।
  • यहां Interest Update या नई एंट्री में जमा हुआ ब्याज दिखाई देगा।

2. UMANG ऐप से चेक करें

  • मोबाइल में UMANG ऐप खोलें।
  • EPFO सेक्शन में जाएं।
  • View Passbook पर टैप करें।
  • UAN और OTP की मदद से लॉग इन करें।
  • पासबुक में ब्याज की एंट्री चेक करें।

3. SMS से बैलेंस जानें

  • अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर यह SMS भेजें:
  • EPFOHO UAN ENG
  • अगर हिंदी में जानकारी चाहिए, तो ENG की जगह HIN लिखें।
  • कुछ ही देर में EPF बैलेंस और ब्याज की जानकारी SMS के जरिए मिल जाएगी।

4. मिस्ड कॉल देकर चेक करें

  • अपने UAN से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें।
  • कुछ सेकंड में SMS आएगा।
  • इसमें EPF बैलेंस और खाते की जानकारी मिल जाएगी।

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

Stock Market News: कच्चा तेल, मानसून और तिमाही नतीजे; इन बातों से तय होगी Sensex-Nifty की चाल

Stock Market Trend This Week: 6 जुलाई से शुरू हो रहे इस कारोबारी हफ्ते शेयर मार्केट में मार्केट सेंटिमेंट कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कॉरपोरेट आय सीजन की शुरुआत पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली से भी बाजार की दिशा तय होगी। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स 663.44 प्वाइंट्स यानी 0.86% की बढ़त के साथ 77,763.91 तो निफ्टी 214.85 प्वाइंट्स यानी 0.89% के उछाल के साथ 24270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट की चाल पर क्या है एक्सपर्ट्स का रुझान

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशकों की नजर 9 जुलाई को टीसीएस के कारोबारी नतीजे पर रहेगी। अजीत के मुताबिक निवेशकों का ध्यान खास तौर पर डिमांड ट्रेंड, डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग और एआई से जुड़े बिजनेस मौकों को लेकर मैनेजमेंट की बातों पर रहेगा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का भी कहना है कि घरेलू स्तर पर निवेशकों का ध्यान 9 जुलाई से शुरू होने रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन पर रहेगा। उनका मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री से डिमांड के माहौल, मार्जिन के रुझानों और अर्निंग्स विलिबिलिटी को लेकर अहम संकेत मिलेगा। प्रवेश के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून और खरीफ की बुवाई भी गांवों में मांग, महंगाई की रफ्तार और ओवरऑल इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर अहम संकेत देगा।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि बैठक की जगह के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सप्लाई को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल $68-$69 के आसपास स्थिर हो गए हैं और अब इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स यानी बैठक के ब्यौरे पर रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट रुझान मिल सकें।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, घरेलू अर्निंग्स सीजन की शुरुआत और मानसून की दिशा से तय होगी।

Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलेनियर, Tesla-SpaceX की बिकवाली से लगा करंट, एक्सपर्ट ने किया सतर्क

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Personal Loan: पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं? अप्लाई करने से पहले इन 6 बातों को नहीं जाना, तो भुगतना पड़ेगा भारी नुकसान

Personal Loan Checklist Before Applying: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो पर्सनल लोन सबसे आसान और तुरंत मिलने वाला जरिया नजर आता है। आजकल बैंक और डिजिटल लेंडर्स मिनटों में इंस्टेंट अप्रूवल और बिना किसी खास कागजी कार्रवाई के लोन ऑफर कर देते हैं। इस चक्कर में कई बार लोग बिना सोचे-समझे पहला ही ऑफर स्वीकार कर लेते हैं।

लेकिन पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, जिसकी ब्याज दरें काफी ऊंची होती हैं। इसलिए लोन के लिए हां कहने से पहले आपको इसकी कुल लागत, रीपेमेंट की शर्तों और अपनी मंथली ईएमआई (EMI) के गणित को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। आइए जानते हैं वो 6 जरूरी बातें, जिन्हें लोन लेने से पहले चेक करना बेहद जरूरी है।

1. लोन लेने का असली मकसद क्या है?

लोन अप्लाई करने से पहले खुद से यह सवाल जरूर पूछें कि आपको इन पैसों की जरूरत क्यों है? अगर आप किसी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या बहुत जरूरी काम के लिए लोन ले रहे हैं, तो यह समझ आता है। लेकिन अगर आप सिर्फ अपनी लग्जरी, महंगे गैजेट्स खरीदने या घूमने-फिरने के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं, तो यह आगे चलकर आपकी जेब पर भारी वित्तीय तनाव पैदा कर सकता है।

2. सिर्फ ब्याज दर न देखें, कुल लागत समझें

ज्यादातर लोग पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर की तुलना करते हैं। हालांकि कम ब्याज दर जरूरी है, लेकिन यह लोन की कुल लागत का सिर्फ एक हिस्सा है। आपको लोन लेते समय इन छिपे हुए खर्चों को भी देखना चाहिए:

  1. प्रोसेसिंग फीस: यह लोन अमाउंट का 1% से 3% तक हो सकती है।
  2. फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट चार्ज: समय से पहले लोन बंद करने पर लगने वाली पेनल्टी।
  3. लेट पेमेंट फीस: ईएमआई बाउंस होने पर लगने वाला भारी जुर्माना।

ये सभी चार्जेस मिलकर आपके लोन को काफी महंगा बना देते हैं।

3. अपनी रीपेमेंट क्षमता का आकलन करें

कोई लोन आज आपकी सैलरी के हिसाब से भले ही किफायती लग रहा हो, लेकिन भविष्य में वित्तीय उतार-चढ़ाव के कारण उसकी ईएमआई चुकाना भारी पड़ सकता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आपकी कुल मंथली इनकम का 50% से अधिक हिस्सा सभी लोन की ईएमआई चुकाने में नहीं जाना चाहिए। अपनी क्षमता से अधिक कर्ज लेना आपको डिफॉल्टर बना सकता है और मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

4. अपना क्रेडिट स्कोर जरूर जांचें

पर्सनल लोन अप्रूवल और उसकी ब्याज दरें काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती हैं। लोन अप्लाई करने से पहले अपना सिबिल स्कोर मुफ्त में ऑनलाइन जरूर चेक करें। अगर आपका स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो आप बैंकों से कम ब्याज दरों और बेहतर शर्तों पर लोन के लिए मोलभाव कर सकते हैं। पहले से स्कोर चेक करने पर अगर उसमें कोई गड़बड़ी दिखती है, तो आप उसे समय रहते ठीक भी करवा सकते हैं।

5. लोन की अवधि को समझदारी से चुनें

लोन चुकाने की अवधि का सीधा असर आपकी ईएमआई और कुल ब्याज पर पड़ता है:

लंबी अवधि: इसमें आपकी हर महीने की ईएमआई तो छोटी हो जाएगी, लेकिन आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे लोन की कुल लागत बहुत बढ़ जाएगी।

कम अवधि: इसमें हर महीने जाने वाली ईएमआई बड़ी होगी, लेकिन आप जल्दी कर्जमुक्त हो जाएंगे और आपकी जेब से ब्याज के रूप में बहुत कम पैसा जाएगा। अपनी मंथली इनकम के बजट के हिसाब से ही सही अवधि का चुनाव करें।

6. लोन एग्रीमेंट के ‘नियम व शर्तें’ ध्यान से पढ़ें

लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों में लिखे नियम और शर्तों को पढ़े बिना कभी भी हस्ताक्षर या डिजिटल सबमिट न करें। इसमें लोन रीपेमेंट के नियम, पेनल्टी क्लॉज और छिपे हुए नियम लिखे होते हैं। एग्रीमेंट को अच्छी तरह समझ लेने से भविष्य में किसी भी तरह के धोखे या पछतावे से बचा जा सकता है।

सिर्फ ₹6000 की SIP से हर महीने पाएं ₹6 लाख की पेंशन, साथ में ₹2.64 करोड़ का बोनस! ये है सीक्रेट फॉर्मूला

₹4000 तक बढ़ेगी टेक-होम सैलरी, लेकिन रिटायरमेंट पर होगा ₹80 लाख का भारी नुकसान! एक्सपर्ट से समझिए नए EPF नियम का पूरा गणित

New EPF Rules Take Home Salary vs Retirement: नए लेबर कोड के तहत मिलने वाली फ्लैक्सिबिलिटी के कारण अब कई कंपनियों में कर्मचारियों को भविष्य निधि (EPF) में अपना योगदान घटाकर न्यूनतम वैधानिक सीमा पर लाने का विकल्प मिल सकता है। ऐसा करने से आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी तो तुरंत बढ़ जाएगी, लेकिन वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि यह तात्कालिक खुशी आपके रिटायरमेंट के बड़े फंड को भारी चपत लगा सकती है।

यह फैसला पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप हर महीने बचने वाले एक्स्ट्रा पैसे का क्या करेंगे? उसे अनुशासन के साथ सही जगह निवेश करेंगे या सिर्फ खर्च कर देंगे? आइए एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं कि पीएफ में कटौती करने का यह नया नियम क्या है और इसके दूरगामी वित्तीय परिणाम क्या हो सकते हैं।

क्या बदल गया है ईपीएफ का नया फ्रेमवर्क?

टैक्सस्पैनर(Taxspanner) के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक के मुताबिक, ईपीएफ योगदान का मूल सिद्धांत अभी भी 12 प्रतिशत ही है, लेकिन असली पेंच उस ‘वेतन आधार’ का है जिस पर यह 12% लागू होता है।

पहले का नियम: कई कंपनियां या तो वास्तविक बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ काटती थीं या इसे ₹15000 प्रति माह की वैधानिक सीमा पर सीमित रखती थीं, जिससे न्यूनतम अनिवार्य पीएफ योगदान ₹1800 प्रति माह होता था।

नया नियम: नए लेबर कोड के तहत, केवल वैधानिक वेतन सीमा (₹15000) तक ही 12% का अनिवार्य योगदान लागू रहेगा। इस सीमा से अधिक वेतन पर पीएफ काटना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा, जो कंपनी और कर्मचारी की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब है कि अगर आप वर्तमान में अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर अधिक पीएफ कटवा रहे हैं, तो आप और आपकी कंपनी आपसी सहमति से इसे घटाकर केवल अनिवार्य ₹1800 प्रति माह के स्तर पर ला सकते हैं। इससे आपकी मंथली टेक-होम सैलरी तो बढ़ जाएगी, लेकिन रिटायरमेंट फंड छोटा हो जाएगा।

ITR Filing 2026: सैलरी ₹12 लाख है और नहीं कटा TDS, तो भी भरना पड़ सकता है टैक्स! समझिए ITR का यह पेचीदा नियम

किन्हें पीएफ योगदान घटाने की गलती ‘बिल्कुल नहीं’ करनी चाहिए?

प्रोमोर फिनटेक की को-फाउंडर और डायरेक्टर निशा संघवी के अनुसार, यह विकल्प ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए सही नहीं है। इन 5 तरह के लोगों को पीएफ कम करने से बचना चाहिए:

जिनकी मुख्य बचत सिर्फ ईपीएफ है: अधिकांश वेतनभोगियों के लिए पीएफ ही एकमात्र ऐसी बचत है जो हर महीने ऑटोमैटिक होती है। बिना निवेश अनुशासन के, हाथ में आने वाला एक्स्ट्रा पैसा सिर्फ खर्चों में उड़ जाएगा।

कंपनी का मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन खोने का डर: अगर कंपनी आपकी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% योगदान दे रही है और आपने अपना स्वैच्छिक हिस्सा घटा लिया, तो मुमकिन है कि कंपनी भी वैधानिक सीमा से ऊपर अपना योगदान बंद कर दे। यानी आप कंपनी की तरफ से मिलने वाला फ्री रिटायरमेंट बेनिफिट खो देंगे।

40 और 50 की उम्र वाले कर्मचारी: जिनके पास नौकरी के कम साल बचे हैं, उन्हें कंपाउंडिंग का फायदा कम मिलता है। इसलिए योगदान घटाने से उनके रिटायरमेंट फंड पर बहुत बड़ा और बुरा असर पड़ेगा।

रूढ़िवादी या सेफ इन्वेस्टर्स: वित्तीय वर्ष 2026 के लिए ईपीएफ 8.25% की सरकारी गारंटीड ब्याज दर दे रहा है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री है। इतनी सुरक्षा के साथ इतना बढ़िया रिटर्न किसी अन्य फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट में मिलना नामुमकिन है।

टेक-होम सैलरी बढ़ाने का लॉन्ग-टर्म नुकसान

एक्सपर्ट निशा संघवी ने एक आसान उदाहरण से इसके वित्तीय नुकसान को समझाया है:

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹50000 है। अभी 12% के हिसाब से उसका पीएफ योगदान ₹6000 प्रति माह जाता है।

नए नियमों के तहत अगर वह न्यूनतम अनिवार्य सीमा चुनता है, तो उसका पीएफ केवल ₹1800 कटेगा, जिससे उसकी टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹4200 बढ़ जाएंगे।

कंपाउंडिंग का नुकसान: अगर यह ₹4200 पीएफ खाते में ही रहते और 8.25% की दर से बढ़ते, तो 25 सालों में यह रकम करीब ₹41 से ₹42 लाख बन जाती।

डबल झटका: अगर आपकी देखा-देखी आपकी कंपनी ने भी एक्स्ट्रा हिस्से पर अपना मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया, तो आपके रिटायरमेंट कॉर्पस में सीधे ₹80 लाख से ज्यादा का बड़ा नुकसान होगा।

इसके अलावा, जो एक्स्ट्रा पैसा आपकी टेक-होम सैलरी में जुड़ेगा, वह आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा, जबकि पीएफ में रहने पर यह टैक्स-फ्री कंपाउंड होता। यहां आपको बता दें कि सालाना ₹2.5 लाख से अधिक के कर्मचारी योगदान के ब्याज पर ही टैक्स लगता है।

किन्हें चुनना चाहिए कम पीएफ का विकल्प?

यह विकल्प केवल दो ही परिस्थितियों में फायदेमंद हो सकता है:

महंगे लोन चुकाने के लिए: अगर आप 12 से 14 प्रतिशत की भारी ब्याज दर वाला पर्सनल या क्रेडिट कार्ड लोन चुका रहे हैं, तो पीएफ घटाकर लोन का प्री-पेमेंट करना 8.25% के पीएफ रिटर्न से बेहतर परिणाम देगा।

अनुशासित इक्विटी निवेशक: जो लोग हाथ में आने वाले इस अतिरिक्त पैसे को बिना चूके हर महीने लंबी अवधि के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में डाइवर्ट करने का पक्का अनुशासन रखते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह है कि कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी कंपनी की ईपीएफ पॉलिसी जांचें। अगर अतिरिक्त पैसा केवल रोजमर्रा के सामान्य खर्चों या लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने में जाने वाला है, तो पीएफ योगदान को बिल्कुल न छुएं। आज की थोड़ी सी नकदी का आराम, कल के बुढ़ापे के बड़े फंड को दांव पर लगाने जैसा है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, 24 और 22 कैरेट दोनों का चढ़ा भाव

देश में सोने की कीमत और बढ़ गई है। 4 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत में इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,000 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत में मजबूती और डॉलर के कमजोर होने के कारण सोने की मांग में तेजी आई।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने बाजार के अनुमानों के मुकाबले कम सख्त रुख की बात कही है, जिससे ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं। इसके अलावा अमेरिका में नौकरियों का डेटा उम्मीद से कमजोर रहना भी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होने का एक कारण है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का कहना है कि जून में नॉन-फार्म पेरोल में 57,000 नौकरियां बढ़ीं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134910 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149570 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 134760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली134910147160
मुंबई134760147010
अहमदाबाद134810147060
चेन्नई137010149570
कोलकाता134760147010
हैदराबाद134760147010
जयपुर134910147160
भोपाल134810147060
लखनऊ134910147160
चंडीगढ़134910147160

 

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 6 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 3 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,250 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 261.79 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 77,763.91 पर और निफ्टी 95.15 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ। आज लगभग 2182 शेयरों में बढ़त हुई,1879 शेयरों में गिरावट आई और 188 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,मैक्स हेल्थकेयर,बजाज फिनसर्व,अपोलो हॉस्पिटल्स और डॉ.रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि, गिरावट वाले शेयरों में एक्सिस बैंक,M&M, SBI,L&T और टेक महिंद्रा शामिल रहे।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। निफ्टी रियल्टी सबसे ज़्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद निफ्टी IT(1.7 प्रतिशत),निफ्टी फार्मा (1.7 प्रतिशत)और निफ्टी मेटल (0.7 प्रतिशत) की बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर निफ्टी PSU बैंक में सबसे ज़्यादा गिरावट (1.5 प्रतिशत) आई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी (-1.30 प्रतिशत),निफ्टी ऑटो (-0.4 प्रतिशत),निफ्टी मीडिया (-0.4 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.3 प्रतिशत) और निफ्टी बैंक (-0.16 प्रतिशत) का नंबर रहा।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट स्तर पर बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव और प्रॉफ़िट-बुकिंग के बावजूद,घरेलू बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार को अच्छे ग्लोबल संकेतों से मदद मिली। US लेबर मार्केट के नरम आंकड़ों के बाद ब्याज दरों के माहौल में नरमी आने की उम्मीदें बढ़ीं हैं। भारत-जापान समिट के अच्छे नतीजों और IT सेक्टर में लगातार रिकवरी से भी बाजार का मूड बेहतर हुआ। घरेलू मोर्चे पर,कच्चे तेल की कीमतों में नरमी एक अहम पॉजिटिव फ़ैक्टर है। आगे चलकर बाजार का फोकस वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के नतीजों और कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर रहेगा। मॉनसून पर भी बाजार की नजर रहेगी। आगे बाजार में गिरावट पर खरीदारी का रुख बने रहने की संभावना है।

निफ्टी व्यू

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले का कहना है कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में अच्छी बढ़त रही। निफ्टी 0.89 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ है। जबकि सेंसेक्स में 663 अंकों की तेजी रही। सेक्टरों की बात करें तो रियल्टी इंडेक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 7.20 प्रतिशत की बढ़त हुई,जबकि एनर्जी इंडेक्स में 1.40 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक्निकल नज़रिए से देखें तो शॉर्ट-टर्म करेक्शन के बाद निफ्टी ने एक बार फिर 23,800 के आसपास सपोर्ट लिया और तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा। वीकली चार्ट पर, इसने एक बुलिश कैंडल बनाया है और’हायर बॉटम’फॉर्मेशन भी बनाए रखा है,जो काफी हद तक पॉजिटिव संकेत है।

शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का मिजाज पॉजिटिव है,लेकिन ट्रेडर्स के लिए सबसे अच्छी रणनीति गिरावट पर खरीदारी और तेज़ी पर बिकवाली की होगी। नीचे की तरफ,24,150-24,000 अहम सपोर्ट जोन होंगे। जबकि बुल्स के लिए 24,500-24,700 अहम रेजिस्टेंस एरिया होंगे। हालांकि,24,000 के नीचे जाने पर मार्केट का सेंटीमेंट बदल सकता है। 24,000 के नीचे गिरावट आने पर 23,800-23,750 के लेवल दोबारा टेस्ट हो सकते हैं।

बैंक निफ्टी व्यू

एलकेपी सिक्योरिटीज में तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने वीकली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाकर हफ़्ते की क्लोजिंग की। जबकि डेली चार्ट हालिया तेजी के बाद एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (रेंज-बाउंड कंसोलिडेशन) का संकेत दे रहा है। इस कंसोलिडेशन के बावजूद,मार्केट का ओवरऑल रुख बुलिश बना हुआ है। इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। यह बड़ा पॉजिटिव संकेत है।

इंडेक्स के लिए तत्काल सपोर्ट 57,500–57,200 के लेवल पर हैं। जबकि रेजिस्टेंस 58,500–58,800 के आसपास दिख रहा है। अच्छे रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो के लिए ट्रेडर्स सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं। जब इंडेक्स रेजिस्टेंस जोन के पास पहुेचे तो प्रॉफ़िट बुकिंग करने की सलाह होगी।

अमोल अठावले का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए हायर बॉटम सपोर्ट 57,500 के आस-पास है। इस लेवल के ऊपर,पॉजिटिव मोमेंटम 58,700-59,000 की तरफ जारी रह सकता है। इसके विपरीत,57,500 के नीचे गिरावट आने पर अपट्रेंड कमजोर पड़ सकता है। इस लेवल के नीचे,ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजीशन से बाहर निकलना पसंद कर सकते हैं।

 

Gold-Silver ETFs : गोल्ड और सिल्वर ETF 3% तक भागे, US में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद ने भरा जोश

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।