Gold Rate Today: कच्चे तेल में उबाल से वैश्विक बाजार में भी लुढ़का सोना, ​मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा रहा महंगाई की चिंता

देश के साथ-साथ देश के बाहर भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,014.53 डॉलर प्रति औंस पर है। अगस्त में डिलीवरी वाला ​US गोल्ड फ्यूचर्स गिरकर 4,019.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। इससे महंगाई को लेकर चिंता ने फिर जोर पकड़ लिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि कीमतों के दबाव को रोकने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।

ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक अन्य स्त्रोतों से बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। इसलिए ब्याज दरों का बढ़ना सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर होता है। अमेरिका ने ईरान पर लगातार नौवीं रात हमले किए हैं। जॉर्डन पर ईरानी हमलों में कम से कम दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इजराइली सेना ने रविवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने उसके पड़ोसी देश जॉर्डन की तरफ कई मिसाइलें दागी हैं।

चांदी की कीमत कहां

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी वैश्विक बाजारों में गिरावट बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।

Gold Price Today: सप्ताह के पहले दिन सोना हुआ और सस्ता, दिल्ली में ₹130790 पर आया 22 कैरेट; चांदी भी टूटी

देश में सोने की कीमत में गिरावट कायम है। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को ज्यादातर शहरों में भाव और नीचे आया है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 143430 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। देश के बाहर भी सोना ​टूटा है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,000.55 डॉलर प्रति औंस पर है। अगस्त में डिलीवरी वाला ​US गोल्ड फ्यूचर्स गिरकर 4,005.9 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है।

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। इससे महंगाई को लेकर चिंता ने फिर जोर पकड़ लिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि कीमतों के दबाव को रोकने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक अन्य स्त्रोतों से बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। इसलिए ब्याज दरों का बढ़ना सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर होता है।

अमेरिका ने ईरान पर लगातार नौवीं रात हमले किए हैं। जॉर्डन पर ईरानी हमलों में कम से कम दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इजराइली सेना ने रविवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने उसके पड़ोसी देश जॉर्डन की तरफ कई मिसाइलें दागी हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131440 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143280 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131440143430
मुंबई131340143280
अहमदाबाद131390143330
चेन्नई131340143280
कोलकाता131340143280
हैदराबाद131340143280
जयपुर131440143430
भोपाल131390143330
लखनऊ131440143430
चंडीगढ़131440143430

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट बनी हुई है। 20 जुलाई की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.42 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।

Gold Rate Today: सोना लगातार दूसरे दिन सस्ता, दिल्ली में ₹130790 पर आया 22 कैरेट; चांदी भी टूटी

देश में सोने की कीमत में गिरावट बनी हुई है। 18 जुलाई की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 142670 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में भाव 142520 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 800 रुपये घटकर 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 3,992 डॉलर प्रति औंस पर है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ते तनाव ने ऊर्जा की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंता और बढ़ गई। इसके चलते अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा बेंचमार्क ब्याज दरों में इजाफा किए जाने के अनुमानों को बल मिला है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक अन्य स्त्रोतों से बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। इसलिए ब्याज दरों का बढ़ना सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक निगेटिव फैक्टर होता है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 130790 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 130640 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 142520 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 142900 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 130990 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 142520 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 130640 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली130790142670
मुंबई130640142520
अहमदाबाद130690142570
चेन्नई130990142900
कोलकाता130640142520
हैदराबाद130640142520
जयपुर130790142670
भोपाल130690142570
लखनऊ130790142670
चंडीगढ़130790142670

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट बरकरार है। 18 जुलाई की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। इसके अलावा लगातार प्रॉफिट-बुकिंग के कारण भी यह नीचे आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 55.37 डॉलर प्रति औंस है।

Market Outlook : अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए भारतीय इक्विटी इंडेक्स, जानिए 20 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 17 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,300 के ऊपर रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक या 1.25 प्रतिशत बढ़कर 78,151.45 पर और निफ्टी 261.55 अंक या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ। लगभग 1632 शेयरों में बढ़त हुई, 2419 शेयरों में गिरावट आई और 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,टेक महिंद्रा,TCS,जियो फाइनेंशियल और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में हिंडाल्को,डॉ. रेड्डीज़ लैब्स,विप्रो,सन फार्मा और मैक्स हेल्थकेयर शामिल रहे। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2 प्रतिशत की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी बैंक रहा,जिसमें 1.6 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी IT में 1.7 प्रतिशत की तेजी आई।

दूसरे बढ़त वाले सेक्टरों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी में 1.3-1.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1 प्रतिशत और निफ्टी FMCG में 0.7 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा में 1.4 प्रतिशत और मेटल में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार के लिए पहली तिमाही के नतीजे मेन ट्रिगर होंगे,जिससे अलग-अलग सेक्टर और शेयरों में हलचल दिखेगी। हालांकि,मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अहम डिसाइडिंग फैक्टर बने रहेंगे। इनसे ब्याज दरों,कंपनियों की अर्निंग, महंगाई और देश के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक के अनुमानों पर असर पड़ने की संभावना है।

टाटा म्यूचुअल फंड को उम्मीद है कि बेहतर होते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल के दम पर FY27 में निफ्टी की अर्निंग्स में 15-17% की बढ़ोतरी होगी। इसका कहना है कि निफ्टी का वैल्यूएशन अपने लान्ग टर्म एवरेज से नीचे आ गया है,जो अगले 12-18 महीनों में इक्विटी रिटर्न के लिए एक अच्छा माहौल बनाता है। भारत का लॉन्ग-टर्म इक्विटी आउटलुक, बेहतर होते इन्वेस्टमेंट साइकल,क्रेडिट ग्रोथ,मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहे सपोर्ट,रियल एस्टेट में रिकवरी और मज़बूत बैंकिंग फंडामेंटल्स की वजह से अच्छा बना हुआ है। FII की लगातार बिकवाली के बावजूद,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मज़बूत निवेश भारतीय इक्विटी को सपोर्ट कर रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि मार्केट की चाल में बदलाव दिख रहा है, जिसमें IT और बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में लार्ज-कैप शेयरों की ओर जबरदस्त रुझान है। बिजनेस अपडेट्स और Q1 की कमाई की उम्मीदों को लेकर अच्छे माहौल से इसे सपोर्ट मिल रहा है। यह ट्रेंड मुख्य रूप से घरेलू संस्थागत निवेशकों की वजह से दिख रहा है,जो महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों से निकलकर बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल और आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

साथ ही,FY27 की दूसरी छमाही (H2) में घरेलू मांग अच्छी रहने की उम्मीद में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी खरीदारी का रुझान दिख रहा है। कुल मिलाकर भारत के लिए बेहतर होते आउटलुक के बीच चुनिंदा शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग और खरीदारी के साथ ब्रॉडर मार्केट का रुख पॉजिटिव बना हुआ है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स पांच दिन के कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकल गया है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बढ़ते भरोसे का संकेत है। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है क्योंकि इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा,RSI बुलिश क्रॉसओवर में आ गया है,जिससे पॉजिटिव मोमेंटम और मजबूत हुआ है। आने वाले समय में निफ्टी के मजबूत बने रहने और 24,800 के लेवल की ओर बढ़ने की संभावना है। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है तो कंसोलिडेशन का दौर शुरू हो सकता है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार रिलायंस इंडस्ट्रीज,HDFC बैंक और ICICI बैंक के Q1FY27 नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा। इनसे बाजार की निकट भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर,बाजार के स्टॉक-स्पेसिफ़क रहने की संभावना है। अच्छी कमाई करने वाली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

 

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Silver outlook: ₹5000 सस्ती हुई चांदी, क्या कीमतों में आने वाली है और बड़ी गिरावट, जानें क्या कहते है बाजार जानकार

Silver Outlook: घरेलू और इंटरनेशनल दोनों ही बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में सोना जहां 4 महीनें के निचले स्तरों पर पहुंचा है। वहीं चांदी $56 के नीचे फिसली है। शुक्रवार को फ्यूचर ट्रेड में चांदी की कीमतें 1,258 रुपये गिरकर 2,14,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट 1,258 रुपये या 0.58 प्रतिशत गिरकर 2,14,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,563 लॉट का कारोबार हुआ।

वहीं COMEX पर चांदी की कीमतें 0.63% गिरकर $55.83 प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही हैं। चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल है और ग्लोबल टेक शेयरों में आई गिरावट का इस पर असर देखा जा रहा है। भारत में चांदी की कीमत में आज 2.3% की बड़ी गिरावट आई है और यह 2,15,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। कल चांदी की कीमत प्रति किलो 2.20 लाख रुपये थी। यानी कि कल के मुकाबले आज चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई है।

मजबूत डॉलर कर रहा परेशान

इस बीच, शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.78 हो गया, जिससे विदेशी करेंसी में खरीदारों के लिए बुलियन महंगा हो गया। कच्चे तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल के करीब ट्रेड करती रहीं।

यूएस- ईरान तनाव और क्रूड बढ़ा रही चिंता

सोने और चांदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती US-ईरान तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और महंगाई का डर फिर से बढ़ गया है, जिससे आने वाले समय में US फेडरल रिजर्व द्वारा रेट बढ़ाने का डर बढ़ गया है।

US फेडरल रिजर्व के चेयर वार्श ने 14 जुलाई और 15 जुलाई को US हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी और सीनेट बैंकिंग कमेटी के सामने अपनी पहली गवाही में दोहराया कि कीमतों में स्थिरता सेंट्रल बैंक का मुख्य मकसद है। उन्होंने जून की उम्मीद से कम रीडिंग को सिर्फ़ एक डेटा पॉइंट बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 63 महीनों से महंगाई फेडरल रिजर्व के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर रही है।

फेड गवर्नर वॉलर ने बढ़े हुए कोर CPI का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा था कि सेंट्रल बैंक को रेट बढ़ाने की ज़रूरत है क्योंकि महंगाई अभी भी ज़्यादा है। वहीं न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने बुधवार को कहा कि महंगाई अभी भी ज़्यादा है, लेकिन उनका मानना ​​है कि यह अपने पीक पर पहुच गई है और 2028 तक बैंक के टारगेट को पूरा कर लेगी। उन्होंने आगे कहा कि अभी के रेट सही जगह पर हैं।

क्या आगे कीमतों में दिखेगा दबाव

Kedia Advisory के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि आनेवाले 10-12 दिन सोने -चांदी की कीमतों के लिए काफी अहम होंगे। क्योंकि बाजार उम्मीद लगा रहा है कि सितंबर होने वाली फेड मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। चांदी  में टेक्निकली $50 प्रति औंस का सपोर्ट दिख रहा है। मेरा मानना है कि $53- 54 प्रति औंस एक सेफ जोन है। जिसके चलते एग्रेसिव होकर बिकवाली की राय नहीं होगी। हमारी सलाह है कि अगस्त में चांदी में एक्यूमुलेशन के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए।हालांकि कच्चा तेल, जियोपॉलिटिकल टेंशन और महंगाई की चिंता चांदी के लिए थोड़ी क्रिटिकल हो सकती है।

इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, “मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे महंगाई का दबाव और ब्याज दरों की चिंताएं सबसे ऊपर हैं, इसलिए सोना गिर रहा है।”

त्रिवेदी ने बताया, “US ने इस हफ़्ते ईरान पर कई हमले किए, जबकि ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि US देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। ईरान ने पड़ोसी देशों में US के ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया, जिससे तनाव और बढ़ने और इलाके से एनर्जी सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की आशंका बढ़ गई।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन को उम्मीद है कि आज सोने और चांदी की कीमतें ऊपर-नीचे रहेंगी। उनका कहना है कि आज के MCX पर सोने को $3,955 और $3,910 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,034 और $4,080 प्रति ट्रॉय औंस पर है, और चांदी को $55.50 और $54.40 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $57.50 और $58.80 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Dollar Vs INR : रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब रुपया, एक्सपर्ट्स से जानें आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Dollar Vs Rupee : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। जानकारों का मानना ​​है कि इस गिरावट की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,विदेशी निवेश में कमी,डॉलर की मजबूत मांग और अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल असंतुलन जैसे कई कारण हैं। 20 मई को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, आज शुक्रवार को यह 96.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर से सिर्फ 0.55 प्रतिशत दूर दिख रहा है।

रुपए की हालिया गिरावट ने 5 जून के बाद हुई करेंसी की रिकवरी को खत्म कर दिया है,जिससे रुपया इस महीने एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो गया है।

तेल की कीमतों में उछाल से अर्थव्यवस्था की स्ट्रक्चरल कमजोरियां सामने आईं

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के कोर एनालिटिकल ग्रुप के डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये के कमजोर होने में एक ट्रिगर का काम किया है,लेकिन यह इसकी मुख्य वजह नहीं है। नियोगी के मुताबिक,मज़बूत अमेरिकी डॉलर,टैरिफ की वजह से एक्सपोर्ट में आ रही मुश्किलें, चीन की आक्रामक डंपिंग और कमजोर ग्लोबल आउटलुक, इन सभी का असर रुपये पर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि करीब एक दशक तक भारत को कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा मिला,जिससे इन दबावों को झेलने में मदद मिली। लेकिन,हाल ही में तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने यह सहारा छीन लिया और अर्थव्यवस्था को कई मौजूदा ढ़ाचागत कमजेरियां उभर कर सामने आ गईं।

बंधन AMC के सीनियर इकोनॉमिस्ट श्रीजीत बालासुब्रमण्यन का कहना है कि रुपए में हाल में आई गिरावट को भारत के स्ट्रक्चरल करंट अकाउंट डेफिसिट के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। असल में भारत करंट अकाउंट डेफिसिट वाला देश है। हम एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई कि तुलना में इंपोर्ट पर ज्यादा खर्च करते हैं,और जब हमें बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में सरप्लस मिलता भी है,तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैपिटल इनफ्लो करंट अकाउंट डेफिसिट से ज़्यादा होता है। उन्होंने आगे कहा कि ढ़ाचागत रूप से,पिछले 10-15 सालों में रुपये की कीमत में सालाना लगभग 3-4 प्रतिशत की गिरावट आई है।

डॉलर की आवक में कमजोरी, इसकी निकासी की भरपाई करने में रही नाकाम

RBI के 5 जून के उपायों ने (जिनमें फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक (FCNR-B) डिपॉजिट के लिए इंसेंटिव भी शामिल थे) शुरुआत में बाजार का मूड बेहतर किया था। हालांकि,डॉलर की आवक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। यह उम्मीद से कम ही रही।

आरित्या ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड में रिसर्च हेड गौरव अरोड़ा ने बताया कि इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से 36 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाली है,जो पिछले साल की निकासी से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपिटल तेजी से AI और सेमीकंडक्टर-आधारित बाज़ारों,जैसे कि अमेरिका,ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर शिफ्ट हो रहा है।

गौरव अरोड़ा ने जून में भारत के 30.43 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की ओर भी इशारा किया। यह घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल,इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात के कारण हुआ। साथ ही इसमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर कोई खास जल्दबाजी न दिखाने का भी असर रहा।

बार्कलेज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक FCNR(B) के तहत केवल 5-6 अरब डॉलर का ही विदेशी निवेश आया है,जो शुरुआती अनुमानों से काफी कम है। इससे रुपये को मिलने वाला शॉर्ट टर्म सपोर्ट कम हो गया है।

डॉलर की बढ़ती मांग ने बनाया दबाव

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP में ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि डॉलर की मांग बढ़ने के मुख्य कारणों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के अलावा,रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने को लेकर बनी नई चिंताएं,विदेशी पोर्टफोलियो से पैसे की निकासी,रक्षा भुगतान,सरकारी कर्ज की अदायगी और विदेशों में कंपनियों के अधिग्रहण भी शामिल हैं।

भंसाली ने आगे कहा कि करेंसी में डॉलर का इनफ्लो बहुत कम है,जबकि एक्सपोर्टर अपनी डॉलर की कमाई को रोककर रख रहे हैं और इंपोर्टर तत्काल पेमेंट के लिए डॉलर खरीद रहे हैं और रुपया मजबूत होने पर फ़ॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक कर रहे हैं। इससे रुपए पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा भारत में महंगाई बढ़ने लगी है,जबकि अमेरिका में महंगाई कम हुई है। इससे रुपये को पहले जो वैल्यूएशन का फायदा मिल रहा था,वह अब खत्म हो गया है।

उधर बालासुब्रमण्यन ने कहा कि मार्केट की स्थिति ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि जब मार्केट को उम्मीद होती है कि रुपया कमजोर होगा तो एक्सपोर्टर कम हेजिंग करते हैं क्योंकि कमजोर करेंसी से उन्हें फायदा होता है। जबकि दूसरी तरफ इम्पोर्टर ज्यादा आक्रामक तरीके से हेजिंग करते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और एक ऐसा चक्र बन जाता है जो रुपये पर और दबाव डालता है।

आगे का आउटलुक

जानकारों का मानना ​​है कि नियर टर्म दबाव के बावजूद आने वाले महीनों में FCNR(B) के तहत आने वाले फंड में बढ़ोतरी से रुपये को सहारा मिलेगा। बालासुब्रमण्यन को उम्मीद है कि ज्यादातर फंड अगस्त और सितंबर के दौरान आएगा,जिससे भारत को सितंबर तिमाही में बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स में सरप्लस हासिल करने में मदद मिलेगी।

नियोगी ने कहा कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होते हैं तो FCNR(B) और दूसरे कैपिटल फ्लो की वजह से रुपये में मजबूती आ सकती है और यह साल के बाकी समय में औसतन 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे आ सकता है।

द वेल्थ कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रैटेजी हेड,अक्षय चिंचालकर ने कहा कि रुपये के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.96 से सुधरकर 94.14 पर आने से बाजार की घबराहट तो कम हुई है,लेकिन इससे मेन ट्रेंड में कोई बदलाव नहीं आया है। डेली,वीकली और मंथली चार्ट पर टेक्निकल सेटअप मजबूती से डॉलर के पक्ष में बना हुआ है और एक साल तक एक ही दायरे में रहने के बाद डॉलर इंडेक्स का ऊपर की ओर बढ़ना (अपसाइड ब्रेकआउट) एक बहुत बड़ा सपोर्ट साबित हो रहा है।

चिंचालकर के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के आस-पास अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर को फिर से छू सकता है। गिरावट का यह ट्रेंड तभी खत्म होगा जब रुपया 94.96 के स्तर से ऊपर मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि अगर रुपया 97 के आसपास कोई सपोर्ट नहीं बना पाता है तो इसका अगला टारगेट 98 के आसपास हो सकता है। अगर रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से नीचे गिरता है तो यह 98.70 के स्तर तक जा सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: 4 दिनों में ₹12,500 सस्ती हुई चांदी, आज भी गिरे दाम, जानिए आपके अपने शहर में क्या है भाव

Silver Price Today:  देश में चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। आज 17 जुलाई को  चांदी का सितंबर वायदा भाव आज सुबह 10 बजे 858  रुपये गिरावट के साथ 2,15,335 रुपये प्रति किलो हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,16,013 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। इसके अलावा लगातार प्रॉफिट-बुकिंग के कारण भी इसकी कीमतें नीचे आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 56.79 डॉलर प्रति औंस है।

आपके शहर में क्या है कीमते

बुलियन्स के अनुसार चांदी की कीमत घटकर 2,16,040 रुपये प्रति किलो हो गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार शुक्रवार सुबह तक 2,17,434 रुपये किलो हो गया। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक 2,35,000 रुपये प्रति किलो पर है। उधर अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार दिल्ली में चांदी टूटकर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) के स्तर पर आ गई।

ऐसे में अगर आप चांदी के गहने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में चल रहे ताजा रेट जरूर चेक कर लें।

 

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2350₹23500₹235000
मुंबई₹2350₹23500₹235000
अहमदाबाद₹2,349₹23,4902,34,900
चेन्नई₹2400₹24000₹240000
पटना₹2350₹23500₹235000
अयोध्या₹2350₹23500₹235000
लखनऊ₹2350₹23,500₹2,35,000
कानपुर₹2350₹23,500₹2,35,000
मेरठ₹2350₹23500₹235000
गाजियाबाद₹2350₹23500₹235000
नोएडा₹2350₹23500₹235000
गुरुग्राम₹2350₹23500₹235000
चंडीगढ़₹2350₹23500₹235000
जयपुर₹2350₹23500₹235000
लुधियाना₹2350₹23500₹235000
गुवाहाटी₹2350₹23500₹235000
इंदौर₹2350₹23500₹235000

पिछले दिन क्या रहा चांदी का भाव

दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को वैश्विक बाजार में सुस्ती के कारण चांदी में 1,500 रुपये की गिरावट आई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार चांदी लगातार चौथे दिन दबाव में रही और 1,500 रुपये टूटकर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) के स्तर पर आ गई, जो 2 सप्ताह से अधिक का निचला स्तर है।

4 दिन में ₹12,500 टूटी चांदी

पिछले चार दिन में इसमें 12,500 रुपये यानी 5.3 फीसदी की गिरावट आई है। 10 जुलाई को इसका भाव 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। वैश्विक बाजार में, हाजिर चांदी 1.7 प्रतिशत टूटकर 56.79 डॉलर प्रति औंस रह गई। वहीं बुधवार को यह 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। चांदी का भाव आखिरी बार 29 जून को इस स्तर के आसपास था, जब यह 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

चांदी की शुद्धता

चांदी की शुद्धता की बात करें तो 999 फाइन सिल्वर (99.9%) सबसे शुद्ध माना जाता है। जबकि 925 स्टर्लिंग सिल्वर (92.5%) का इस्तेमाल सबसे ज्यादा आभूषण और घरेलू सामान बनाने में होता है। खरीदारी के समय ग्राहकों को BIS हॉलमार्क और शुद्धता का निशान (999 या 925) जरूर जांचना चाहिए। ताकि असली चांदी की पहचान सुनिश्चित हो सके।

गिरावट से खरीदारी का मौका

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ा रही है जिसके कारण कमोडिटी बाजार में गिरावट देखी जा रही है। लेकिन आम खरीदारों और रिटेल निवेशकों के लिए यह बेहतर खरीदारी का मौका हो सकता है। परिवारों में शादी ब्याह और ऐसे ही अन्य लोगों के लिए सोना चांदी खरीदा जाता है तो वह इस समय खरीदारी करके पैसा बचा सकते हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: चांदी 4 दिन में ₹12500 सस्ती हुई, सोना लगातार दूसरे दिन सपाट

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन स्थिर रही। 24 कैरेट वाला सोना ₹1,46,300 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। वहीं, चांदी ₹1,500 टूटकर ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह स्तर दो हफ्ते से ज्यादा समय का निचला स्तर है।

4 दिन में ₹12,500 टूटी चांदी

चांदी में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। 10 जुलाई को चांदी ₹2,37,000 प्रति किलो पर थी, जो अब घटकर ₹2,24,500 प्रति किलो रह गई है। यानी सिर्फ चार कारोबारी सत्र में चांदी ₹12,500 या 5.3% टूट चुकी है।

सोना सीमित दायरे में क्यों?

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहे। वहीं, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इन दोनों वजहों का असर एक-दूसरे को संतुलित करता रहा। इसलिए सोना लगातार दूसरे दिन सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।

चांदी पर क्यों बना दबाव?

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ी है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) के ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना बनी हुई है। इसी कारण चांदी में मुनाफावसूली और कमजोर औद्योगिक मांग का दबाव देखा गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 61 डॉलर यानी 1.68% गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 3% गिरकर 56 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?

Mirae Asset Sharekhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, ईरान की ओर से बातचीत की संभावना जताए जाने के बाद सोने में गिरावट सीमित रही।

वहीं, Lemonn Markets Desk के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग का कहना है कि अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रिटेल सेल्स और जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़ों पर रहेगी। इनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेड की ब्याज दरों की अगली दिशा का संकेत मिल सकता है।

MCX पर गोल्ड का हाल

LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, सोने की कीमतों पर अभी दबाव बना हुआ है। MCX पर गोल्ड करीब ₹950 गिरकर ₹1,40,900 पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX में सोना करीब 60 डॉलर टूटकर 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हाल में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े नरम रहे, क्योंकि मई-जून में ऊर्जा की कीमतें कम थीं। लेकिन अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो महंगाई फिर बढ़ सकती है। इसका असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के फैसले पर भी पड़ सकता है।

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। तकनीकी रूप से MCX Gold के ₹1,40,000 से ₹1,43,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। साथ ही, बाजार में उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है।

Gold Silver Prices Today: गोल्ड 4000 डॉलर से नीचे फिसला, चांदी में भी बड़ी गिरावट

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सस्ते ब्याज पर चाहिए? अप्लाई करने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना आज पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और NBFC कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर करने का दावा करते हैं। लेकिन जल्दी में लिया गया पर्सनल लोन आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।

पर्सनल लोन पर ब्याज दरें होम लोन या कार लोन से ज्यादा होती हैं। ऐसे में अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए, तो हजारों रुपये बचाए जा सकते हैं। आइए जानते हैं पर्सनल लोन लेने से पहले किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. सबसे पहले अपना CIBIL स्कोर सुधारें

अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो बैंक आपको कम ब्याज पर लोन देने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, कम स्कोर होने पर ब्याज दर बढ़ सकती है या लोन भी रिजेक्ट हो सकता है।

मान लीजिए दो लोगों ने 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया। एक को 11% और दूसरे को 15% ब्याज मिला। यानी सिर्फ 4% ज्यादा ब्याज की वजह से आपको करीब ₹62,000 अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

ब्याज दरअनुमानित EMIकुल ब्याज
11%करीब ₹10,870करीब ₹1.52 लाख
15%करीब ₹11,895करीब ₹2.14 लाख

2. पहले कई बैंकों का ऑफर तुलना करें

जिस बैंक का पहला ऑफर मिले, उसी पर हामी मत भरिए। कम से कम 3-4 बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और बाकी शर्तों की तुलना करें।

कई बार आपका सैलरी बैंक भी सबसे सस्ता लोन नहीं देता। ऑनलाइन तुलना करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इससे अच्छी बचत हो सकती है।

3. जितनी जरूरत हो, उतना ही लोन लें

बैंक अगर ₹10 लाख का लोन देने को तैयार है, तो जरूरी नहीं कि आप पूरा पैसा लें।

अगर आपकी जरूरत ₹6 लाख की है, तो उतना ही लोन लें। ज्यादा रकम का मतलब ज्यादा EMI और ज्यादा ब्याज। इससे आप पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है।

4. सिर्फ ब्याज नहीं, बाकी चार्ज भी देखें

कई लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला कर लेते हैं। लेकिन प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरी फीस भी आपकी जेब पर असर डालती हैं।

लोन लेने से पहले पूछ लें कि कुल कितना खर्च आएगा। तभी आपको लोन की असली कीमत पता चलेगी।

5. EMI अपनी कमाई के हिसाब से रखें

ऐसी EMI चुनें जिसे आप हर महीने आराम से भर सकें। कोशिश करें कि सभी EMI मिलाकर आपकी मंथली इनकम के 35% से 40% से ज्यादा न हों।

अगर EMI बहुत ज्यादा होगी, तो भविष्य में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है। इससे आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है।

पर्सनल लोन के लिए सबसे जरूरी बात

पर्सनल लोन बिना गारंटी मिलता है। इसलिए इसकी ब्याज दर भी ज्यादा होती है। अगर आप अच्छा CIBIL स्कोर बनाए रखें, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें और जरूरत के हिसाब से ही लोन लें, तो कम ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लोन लेने में जल्दबाजी नहीं, सही तुलना करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Market Outlook : सपाट बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 17 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 16 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट बंद हुए हैं। IT और कंज्यूमर सेंट्रिक शेयरों में बढ़त का असर बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में कमजोरी से खत्म हो गया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1.44 अंक बढ़कर 77,186.87 पर और निफ्टी 5.75 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 24,072.75 पर बंद हुआ। लगभग 1947 शेयरों में बढ़त हुई, 2119 शेयरों में गिरावट आई और 194 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

अलग-अलग शेयरों में मिला-जुला असर दिखा। इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहा, जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद विप्रो (+1.7%), बजाज फाइनेंस (+1.6%), HCL टेक्नोलॉजीज (+1.6%) और मारुति सुजुकी (+1.4%) रहे। गिरावट वाले शेयरों में, एटरनल 2.8% गिरा, जबकि SBI लाइफ इंश्योरेंस में 2.3% की गिरावट आई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 0.9% गिरा, HDFC बैंक 0.8% टूटा और श्रीराम फाइनेंस में 0.8% की गिरावट आई।

सेक्टर इंडेक्स में, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.5% की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी मीडिया (+1%), निफ्टी IT (+0.7%) और निफ्टी ऑटो (+0.4%) रहे। निफ्टी FMCG (+0.25%) भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

गिरावट वाले सेक्टरों में, निफ्टी रियल्टी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 1% की गिरावट आई। निफ्टी PSU बैंक 0.5% गिरा, इसके बाद निफ्टी मेटल (-0.3%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.3%) और निफ्टी बैंक (-0.3%) रहे।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 में 0.4% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एशियाई बाजार के कमजोर रुझानों के बीच निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने से भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती रही। महंगाई की चिंताओं ने फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर पर दबाव डाला, वहीं कुछ पेट्रोकेमिकल्स पर इंपोर्ट ड्यूटी फिर से लागू होने और मज़बूत कमाई के दम पर केमिकल सेक्टर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा। उधर उम्मीद से कम अमेरिकी महंगाई दर ने ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं को कम किया और बाजार को कुछ सहारा दिया। आगे बाजार की नजर कंपनियों के नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों के साथ-साथ मॉनसून की प्रगति पर रहेगी। इसके अलावा ग्लोबल स्थिति और महंगाई से जुड़ी घटनाएं बाजार की चाल पर असर डालती रहेंगी।

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी एक सीमित दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो न्यूट्रल रुख के साथ कंसोलिडेशन का संकेत है। टेक्निकल तौर पर इंडेक्स को 23,950–24,000 के जोन में मज़बूत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 24,250–24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। इसके बाद 24,500 के आसपास एक बड़ी रुकावट हो सकती है।

ऑप्शन चेन डेटा भी 24,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा ‘पुट राइटिंग’ का संकेत दे रहा है, जो इसे एक अहम सपोर्ट लेवल के तौर पर मजबूत करता है। मौजूदा टेक्निकल सेटअप को देखते हुए, सपोर्ट के पास गिरावट पर खरीदारी और रेजिस्टेंस के पास उछाल पर बिकवाली की रणनीति सही रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक निफ्टी इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाई है, जो अनिश्चितता का संकेत है क्योंकि इंडेक्स कंसोलिडेशन रेंज में ट्रेड कर रहा है। RSI न्यूट्रल जोन के पास स्थिर है, जो मज़बूत डायरेक्शनल मोमेंटम की कमी का संकेत है। टेक्निकल तौर पर 56,800–57,000 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। जबकि 58,200 का लेवल अहम रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, तब तक रुख न्यूट्रल रहने की उम्मीद है। इस स्थिति में सपोर्ट के पास ‘बाय-ऑन-डिप्स’ और रेजिस्टेंस के पास ‘सेल-ऑन-राइज़’ की रणनीति फायदेमंद रहेगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए 23960-23930 के पास स्थित 50-डे का EMA जोन तत्काल सपोर्ट का काम करेगा । अगर यह 23930 के लेवल से नीचे जाता है और वहां बना रहता है तो और ज्यादा प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और इंडेक्स 23780 के लेवल तक गिर सकता है, जो अगला अहम सपोर्ट जोन बन सकता है।

ऊपर की तरफ, 24160-24200 की रेंज एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बनी हुई है। अगर इंडेक्स इस दीवार को पार कर जाता है, तो मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है और और ऊपर जाने का रास्ता खुल सकता है। तब तक, इंडेक्स में एक तय रेंज के अंदर ही ट्रेडिंग होने की संभावना है।

 

 

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