Gold Silver Price Today: एक ही दिन में चांदी ₹8500 महंगी हुई, सोना ₹1.49 लाख के पार

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार में बढ़ी खरीदारी की वजह से सोना ₹1,900 चढ़कर ₹1,49,600 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह करीब दो हफ्ते का सबसे ऊंचा स्तर है।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, मंगलवार को सोना ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इससे पहले 7 जुलाई को इसकी कीमत ₹1,49,250 प्रति 10 ग्राम थी।

चांदी ने भी लगाई लंबी छलांग

चांदी ने लगातार छह दिन की गिरावट पर ब्रेक लगा दिया। इसकी कीमत ₹8,500 बढ़कर ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई। एक दिन पहले यह ₹2,21,500 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

सोना-चांदी में तेजी क्यों आई?

बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में लगातार तीसरे दिन तेजी आई है। इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है। विदेशी बाजार में मजबूती रही। घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ी। हाल की गिरावट के बाद निवेशकों ने भी खरीदारी का मौका देखा।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेत और फिजिकल डिमांड बढ़ने से सोना दो हफ्ते के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि गोल्ड ETF में दोबारा निवेश बढ़ने से भी बाजार को सहारा मिला है।

ग्लोबल मार्केट में क्या हो रहा है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.16% बढ़कर 4,125.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 1% चढ़कर 59.32 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला ने बताया कि कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 4,140 डॉलर प्रति औंस के दो हफ्ते के उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं, चांदी भी 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद दोनों कीमती धातुओं में मजबूती बनी हुई है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत की गुंजाइश तो है, लेकिन फिलहाल ईरान गंभीर नहीं दिख रहा। इसलिए निवेशक इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं।

वहीं, Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि सोने को तीन चीजों से सहारा मिल रहा है। पहली, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद। दूसरी, ट्रंप प्रशासन की ओर से फिर टैरिफ लगाने की शुरुआत। तीसरी, सोने का 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहना।

अब बाजार की नजर अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी। ब्याज दरों को लेकर जो संकेत मिलेंगे, वही आगे सोना और चांदी की चाल तय करेंगे।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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Silver Gold Price Today : सोना दो हफ्तों के हाई के आसपास, चांदी 1.7% भागी, जानिए कमोडिटी में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : बुधवार,22 जुलाई को सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड लगभग दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुच गया है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों के लिए अगले हफ्ते होने वाली US फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी मीटिंग पर भी बाजार की नजर है। ऐसे में सोने के सपोर्ट मिल रहा है।

COMEX पर गोल्ड फ़्यूचर्स 1.17% बढ़कर 4,124 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि, इंट्राडे में इसने $4,128.40 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था। चांदी का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। COMEX सिल्वर 1.70% बढ़कर 60.115 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

घरेलू बाजार में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में तेजी आने के एक दिन बाद विदेशी बाजारो में भी इनमें तेजी आई है। दिल्ली में सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम हो गई है।

लोकल सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक मंगलवार, 21 जुलाई को ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और फिजिकल डिमांड के कारण चांदी की कीमत ₹2.21 लाख प्रति किलोग्राम पर सपाट रही।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें ?

इसकी सबसे बड़ी वजह’सेफ़-हेवन'(सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग है। पश्चिम एशिया को लेकर तब नई चिंताएं पैदा हो गईं, जब ऐसी खबरें आईं कि सऊदी अरब से एशिया जा रहे दो तेल टैंकरों को यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद लाल सागर में अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं और निवेशकों का रुझान सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की ओर बढ़ा।

हालांकि, इस तनाव को कम करने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी हैं और ईरान बातचीत को आसान बनाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांग रहा है। फिर भी मार्केट आगे तनाव बढ़ने की संभावना को लेकर सतर्क हैं।

सोने को आमतौर पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के समय में फायदा होता है क्योंकि जब ग्लोबल ग्रोथ या फाइनेंशियल मार्केट के लिए रिस्क बढ़ता है तो इसमें इन्वेस्टर्स की रुचि बढ़ जाती है।

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फेड की पॉलिसी पर नजर

भू-राजनीतिक घटनाओं के अलावा,निवेशक अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले भी अपनी पोजीशन बना रहे हैं। बाजार में आम धारणा है कि फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि,ट्रेडर मॉनेटरी पॉलिसी की भविष्य की दिशा के संकेत पाने के लिए सेंट्रल बैंक की टिप्पणी और आगे के आर्थिक अनुमानों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

सोने की कीमतों पर असर डालने वाले सबसे बड़े फैक्टर्स में से एक ब्याज दरें भी हैं। चूंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती,इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर फिक्स्ड-इनकम एसेट्स (जैसे बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट) से मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है,जिससे सोने का आकर्षण आम तौर पर कम हो जाता है। इसके उलट,ब्याज दरें घटने की उम्मीद या नरम नीतिगत रुख से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

फिजिकल डिमांड बढ़ने से भी मिल रहा सपोर्ट

जानकारों का कहना है कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों के अलावा फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में हुई बढ़त से भी सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है।

सोने की कीमतों में बढ़त के बावजूद इसके बड़े कंज्यूमर देशों, खासकर चीन से मज़बूत मांग बनी हुई है। साथ ही,पिछले कुछ महीनों में सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने बुलियन की कीमतों एडिशनल सपोर्ट दिया है।

इसके अलावा चांदी को भी इंडस्ट्रियल मेटल्स के लिए बेहतर होते सेंटीमेंट का फायदा मिला है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स,सोलर पैनल और क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर होता है।

जानकारों की राय

LKP सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) और वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे कीमतें तेजी से वापस ऊपर आईं। अमेरिका-ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर सोने की नई खरीदारी से कीमतों में यह उछाल आया।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख की उम्मीदों के बावजूद,जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने निवेशकों की सोने में दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी है। टेक्निकल नज़रिए से,उन्हें उम्मीद है कि MCX गोल्ड अगले कुछ सेशन में ₹1.41 प्रति 10 ग्राम से ₹1.45 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा।

वहीं,HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि हालिया बढ़त को मजबूत फिजिकल डिमांड और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी का भी सपोर्ट मिला है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं केडिया एडवाइजरी (Kedia Advisory) के अजय केडिया। इनकी आज एमसीएक्स गोल्ड में 142500 रुपए के आसपास, 141500 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 144000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर में इनकी 223000 रुपए के आसपास, 221000 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Rate Today: आज का चांदी का भाव! लगातार छठे दिन गिरावट, जानिए आज 1 किलो सिल्वर का ताजा भाव

Silver Price Today: अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र है, जब चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

बाजार के जानकारों के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक चांदी की कीमत में कुल 15,500 रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निवेशक वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में हल्की तेजी दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 1,618 रुपये (0.75%) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

दिल्ली में 1 किलो सिल्वर ₹2,35,100

अगर आप आज चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जान लेना आपके लिए जरूरी है। आज दिल्ली में चांदी की कीमत ₹235.10 प्रति ग्राम और ₹2,35,100 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। दिल्ली देश के सबसे बड़े सर्राफा बाजारों में से एक है। यहां चांदी की मांग हमेशा ऊंची रहती है। निवेश के साथ-साथ लोग चांदी का इस्तेमाल आभूषण, बर्तन, सजावटी सामान, सिक्के और उपहार के रूप में भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसी वजह से दिल्ली में चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की लगातार नजर रहती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अपने शहर का ताज़ा रेट जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आप निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अधिकृत ज्वेलर्स या सर्राफा बाजार से मौजूदा कीमत की पुष्टि करने के बाद ही खरीदारी करें।

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Silver Gold Price:चढ़ गया सोने-चांदी का भाव, क्या अब भी कर रहे है सही मौके की तलाश, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय की राय

Silver Gold Price: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 21 जुलाई को सुबह के कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दरअसल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि भले ही US में ज़्यादा ब्याज दरों की उम्मीदों ने बढ़त को सीमित रखा। COMEX सोना $4,041 प्रति औंस के इंट्राडे हाई को छूने के बाद 0.34% बढ़कर $4,029.60 प्रति औंस हो गया, जबकि COMEX चांदी 0.13% बढ़कर $57.145 प्रति औंस हो गई।

कीमती धातुओं का बाजार 2 अलग-अलग वजहों को बैलेंस कर रहा है। एक तरफ, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह उम्मीद मज़बूत हो रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

सोने के लिए तेल क्यों ज़रूरी है

US और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिशों की खबरों से कुछ समय के लिए सीज़फ़ायर की उम्मीद बढ़ने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आई। ब्रेंट क्रूड 0.4% गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US WTI क्रूड $82.47 के करीब ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी देने के बाद जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बढ़े हुए हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता बढ़ गई है। US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों ने भी बाज़ारों को किनारे पर रखा है।

कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर महंगाई ज़्यादा बनी रहती है, तो फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों को ज़्यादा समय तक बनाए रख सकता है या फिर से दरें बढ़ा सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका असर आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज़ वाले एसेट्स पर पड़ता है।

फेड की उम्मीदों ने बुलियन की बढ़त को रोका

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP, कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,020 प्रति औंस के करीब है, जबकि सिल्वर $57 प्रति औंस से ऊपर रिकवर हो गया है, लेकिन बढ़त सीमित है क्योंकि मार्केट ने साल के आखिर तक कम से कम एक और फेडरल रिजर्व रेट हाइक को काफी हद तक तय कर लिया है।

उन्होंने कहा कि US पॉलिसीमेकर्स के सख्त कमेंट्स और तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जिससे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से बीच-बीच में मिल रहे सपोर्ट के बावजूद बुलियन की अपील कम हो गई है।

आखिर कहां तक जाएगी कीमतें

LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि US में नरम महंगाई के आंकड़ों से गोल्ड में रिकवरी हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मजबूत US डॉलर और फेड रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों को लेकर चिंताएं बढ़त को रोक रही हैं। घरेलू बाज़ार में, उन्हें MCX गोल्ड के लिए तुरंत सपोर्ट के तौर पर ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम दिख रहा है, जबकि आने वाले सेशन में ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम रेजिस्टेंस लेवल हो सकता है।

इस बीच, चांदी ने हाल के निचले स्तरों से उबरने के बाद ज़्यादा मज़बूती दिखाई है, हालांकि दोनों कीमती धातुएं ग्लोबल तेल बाज़ारों में हो रहे बदलावों, पश्चिम एशिया संघर्ष और US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के प्रति सेंसिटिव बनी हुई हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Gold Silver Price Today: पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना ₹1,400 चढ़कर करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को चांदी ₹1,000 सस्ती हो गई और यह लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।

सोने का ताजा भाव

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना सोमवार को ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत ₹1,400 बढ़ गई।

चांदी में लगातार छठे दिन गिरावट

दूसरी ओर, चांदी की कीमत ₹1,000 घटकर ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,22,500 प्रति किलो था।

अगर 10 जुलाई से अब तक की बात करें, तो चांदी की कीमत में कुल ₹15,500 यानी करीब 6.5% की गिरावट आ चुकी है।

क्यों बढ़ा सोने का भाव?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने सस्ते भाव पर सोने की खरीदारी शुरू की। इसी वजह से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत और डॉलर में नरमी की वजह से सोने को समर्थन मिला। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना कुछ सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 2% की बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है।

कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भूराजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

हालांकि बाद में ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका की ब्याज दरों और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि MCX पर सोने में करीब ₹900 की तेजी आई है और यह ₹1,41,850 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 3,975 डॉलर के सपोर्ट से उछलकर करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, जून के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से सोने को शुरुआती समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर या दिसंबर में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

गोल्ड के लिए अहम लेवल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगे कच्चे तेल की वजह से फिलहाल सोने की तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी स्तर पर MCX गोल्ड के लिए ₹1,40,000 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ₹1,42,500 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस स्तर हो सकता है।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

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Gold-Silver Price : MCX पर सोने-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Gold-Silver Price : सोमवार,20 जुलाई को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह हाजिर बाजार में मजबूत मांग और चांदी के लिए ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव रुझान के बीच ट्रेडर्स का नई पोजीशन बनाना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर,अगस्त डिलीवरी वाले फ्यूचर्स में ₹294 या 0.21% की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 720 लॉट का कारोबार हुआ। एनालिस्ट्स ने इस बढ़ोतरी की वजह मार्केट में नई खरीदारी को बताया है।

सिल्वर फ्यूचर्स में भी तेजी आई है। MCX पर सितंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट ₹1,618 या 0.75% बढ़कर ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है, जिसमें 1,371 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहीं। Comex सिल्वर फ्यूचर्स 1.21% बढ़कर $56.59 प्रति औंस पर आ गया है। हालांकि,न्यूयॉर्क में गोल्ड फ्यूचर्स में थोड़ी गिरावट देखी गई और ये 0.17% गिरकर $4,011 प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा।

सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की क्या है वजह ?

भू-राजनीतिक तनाव,महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों से जुड़ी उम्मीदे जैसे ग्लोबल संकेतों के कारण हाल के दिनों में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर,इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड के प्रेसिडेंट और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि पिछले हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। इसमें भी चांदी में ज्यादा गिरावट आई।

उन्होंने आगे कहा कि एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है,जिसमें वेस्ट एशिया में तनाव ने कीमती धातुओं को पुश करने के बजाय उन पर दबाव बनाया है। US-ईरान के बीच टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर बन चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं,जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गईं और सितंबर में US फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना और मजबूत हो गई है।

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल

पृथ्वीराज कोठारी की राय है कि सेंट्रल बैंक की खरीदारी(खासकर चीन की तरफ से) सोने की कीमतों को सपोर्ट देती रही है,जबकि वेस्टर्न एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और भारतीय रिटेल निवेशकों की तरफ से मांग में कमी के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है। इस समय सोने की फेयर वैल्यू 4,100 डॉलर प्रति औंस के आस-पास है। अगर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इसके भाव 3,900 डॉलर प्रति औंस की ओर गिर सकते हैं। वहीं,अगर यह 4,200 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना रहता है,तो इसके 4,500 डॉलर तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।

 

 

Gold-Silver Outlook: गोल्ड-सिल्वर मार्केट में मचा हाहाकार! भारी मंदी के बीच रॉबर्ट कियोसाकी ने कर दी ये बड़ी भविष्यवाणी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

Gold Price : सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई है। निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर लगी है। मिडिल ईस्ट का संकट गहराने से तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। साथ ही,अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक और पॉलिसी मेकर ने संकेत दिया है कि बढ़ती महंगाई के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल हाजिर बाजार में सोने का भाव 0.3% गिरकर 4,004.63 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है। अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर 4,008.70 डॉलर पर आ गया है।

सोमवार को लगातार नौवें दिन अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेजी आई है। फिर से शुरू हुई लड़ाई में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों संख्या बढ़कर तीन हो गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं।

गोल्डसिल्वर सेंट्रल के मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रायन लैन का कहना है कि युद्ध अभी भी जारी है। ऐसे में बाजार की फोकस तेल की बढ़ती कीमतों पर बना हुआ है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और सोने पर दबाव बना हुआ है। हालांकि,गोल्ड के लिए 4,000 डॉलर का स्तर काफी अहम रहा है और यह दिखाता है कि जब भी गोल्ड स्तर से नीचे गिरता है तो उसे सपोर्ट मिलता है।

तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने के डर और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहने की आशंका को मजबूत कर रही हैं। हालांकि सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव (हेज) के रूप में देखा जाता है,लेकिन ऊंची ब्याज दरें बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) में बने रहने की अवसर लागत (opportunity cost) को बढ़ा देती हैं।

क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने उन पॉलिसी मेकर्स का सपोर्ट किया है जिनका तर्क है कि महंगाई में बढ़त को रोकने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। ऐसे में 29 जुलाई को फेड की अगली बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना दिख रही है।

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स अब दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 82% संभावना देख रहे हैं, जबकि पिछले सप्ताह यह 73% थी। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग की राय है कि लंबे समय के नजरिए से वे सोने को लेकर अधिक सतर्क है और 3,886 डॉलर के अहम लेवल पर नजर रखे हुए हैं। अगर यह स्तर नीचे की ओर टूटता है,तो सोने में और कमजोरी आ सकती है और यह 3,500 डॉलर की गिर सकता है।

वहीं दूसरी ओर,स्पॉट सिल्वर की प्राइस 1.3% बढ़कर 56.61 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। जबकि प्लेटिनम 0.3% गिरकर 1,587.20 डॉलर पर आ गया गया है। पैलेडियम 0.3% घटकर 1,243.99 डॉलर पर पहुंच गया है।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि आज के सेशन में सोने के लिए 3,989 डॉलर और 3,945 डॉलर पर सपोर्ट है,जबकि 4,040 डॉलर और 4,074 डॉलरप्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है। वहीं,चांदी के लिए 55.50 डॉलर और 54.40 डॉलर पर सपोर्ट है और 57.50 डॉलर और 58.80 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस है।

मनोज कुमार जैन का सुझाव है कि लॉन्ग-टर्म निवेशक बाजार में इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी जमा कर सकते हैं,लेकिन ट्रेडर्स को लॉन्ग पोजीशन में क्लोजिंग के आधार पर सोने के लिए 1,39,650 रुपए और चांदी के लिए 2,14,000 रुपए पर स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए और हर बढ़त पर मुनाफा बुक करना चाहिए।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।