Market Next Week: भारत से अमेरिका तक आ रहे ये आंकड़े, अगले हफ्ते तय करेंगे मार्केट की चाल

Market next week: 31 अगस्त से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की चाल मुख्य तौर पर जीडीपी के घरेलू आंकड़ों, कच्चे तेल के भाव और अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इसके अलावा एनालिस्ट्स के मुताबिक मैक्रोइकनॉमिक रिलीज, ऑटो सेल्स के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले कारोबारी हफ्ते यानी 17-21 अगस्त के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) 276.32 प्वाइंट्स यानी 0.35% गिरा, तो निफ्टी (Nifty) 76.35 प्वाइंट्स यानी 0.31% नीचे आया। लगातार तीसरे हफ्ते ये लाल हुए।

Market next week: क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। जीडीपी के घरेलू आंकड़े और वैश्विक आर्थिक आंकड़े मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था में बात करें तो जून 2026 तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी होंगे। अजीत के मुताबिक निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शंस, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और रुपये की चाल पर भी रहेगी।

अजीत के मुताबिक सबसे बड़ा ट्रिगर तो अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा रहेगा। 4 अगस्त को अगस्त के नॉन-फार्म पेरोल्स का आंकड़ा आएगा। अजीत का मानना है कि यग फेडरल रिजर्व के सितंबर महीने की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स और एमर्जिंग मार्केट्स में फंड्स फ्लो से जुड़ी उम्मीदों पर असर डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में भारतीय इक्विटीज में अब तक ₹30,919 करोड़ का नेट निवेश किया है और लगातार दूसरे महीने उनकी नेट खरीदारी जारी रही।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि घरेलू स्तर पर जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े ब्रोडर रिस्क सेंटिमेंट के लिए अहम होंगे। इससे यह पता चलेगा कि घरेलू अर्थव्यवस्था किस चाल से बढ़ रही है, खासतौर से ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज रॉकेट बने हुए हैं और पश्चिमी एशिया में तनाव अभी भी बना हुआ है।

पोनमुडी का कहना है कि जैक्सन होल में फेड चेयर कैविन वार्श के हॉकिश कमेंट के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कैटेलिस्ट बन गई है। पोनमुडी का कहना है कि मार्केट की नजर अब 4 सितंबर को आने वाले अगस्त की जॉब्स रिपोर्ट के साथ-साथ अगली इनफ्लेशन रीडिंग पर भी नजर रहेगी। इन आंकड़ो से यह तय होगा कि सितंबर में रेट हाइक की हाल में बढ़ी उम्मीदें बनी रहती हैं या कम होती हैं।

रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि सोमवार को भारतीय इकॉनमी के लिए जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े के आंकड़े आएंगे, जिससे घरेलू आर्थिक विकास की दिशा पता चलेगी। वहीं शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा वैश्विक बाजारों के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है। उनका कहना है कि इसके बाद निवेशक फिर से फेडरल रिजर्व की सितंबर की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी उम्मीदों को रिव्यू करेंगे।

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Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Meesho कब आएगी मुनाफे में? शेयर खरीदने से पहले प्वाइंटवाइज चेक करें एक्सपर्ट कैलकुलेशन

Meesho Share Price: दिग्गज ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस मीशो के शेयरों की घरेलू ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा ने खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। वेंचुरा ने इसके शेयरों का जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, उसके मुताबिक मौजूदा लेवल से यह 33% से अधिक ऊपर चढ़ सकता है। अभी की बात करें तो पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार 28 अगस्त को बीएसई पर यह 0.51% की बढ़त के साथ ₹208.60 पर बंद हुआ था। आईपीओ के तहत ₹111 के भाव पर जारी होने के बाद इसके शेयर घरेलू मार्केट में 10 दिसंबर 2025 को लिस्ट हुए थे और लिस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद 18 दिसंबर 2025 को यह ₹254.65 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा था।

Meesho पर क्यों हुआ ब्रोकरेज फिदा

ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑनलाइन खरीदारी का बाजार तेजी से बढ़ने वाला है। वेंचुरा के मुताबिक जैसे-जैसे टियर-2, टियर-3 और गांवों में इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन रिटेल का दायरा बढ़ रहा है, वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2030 के बीच इसकी GMV (ग्रास मर्चेंडाइज वैल्यू) सालाना 20% की रफ्तार से बढ़ सकती है।

वेंचुरा का मानना है कि ग्रोथ के सुनहरे मौके को भुनाने के लिए मीशो ने खुद को मजबूत स्थिति में रख लिया है।

मीशो का मार्केटप्लेस मॉडल ऐसा है कि पूंजी की जरूरत कम से कम पड़ती है और दुकानदारों को अपना सामान सस्ते में बेचने की सहूलियत मिलती है जिससे दाम देखने वाले ग्राहकों के बीच इसे कॉम्पटीटिव एडवांटेज मिल रहा है।

वेंचुरा के मुताबिक अभी मीशो का फोकस ग्राहक और ऑर्डर्स बढ़ाने पर है लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ेगा, हर ऑर्डर और ग्राहक से कमाई ज्यादा हो सकती है।

कमाई में उछाल के उम्मीद की वजह ये है कि अधिक ऑर्डर्स होने से प्री-ऑर्डर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम हो सकती है, एआई की मदद को ग्राहकों को सही प्रोडक्ट्स दिखाए जा सकते हैं, वाल्मो (Valmo) के जरिए लॉजिस्टिक्स अधिक बेहतर हो सकती है, सेलर्स से एडवरटाइजिंग और दूसरी सर्विसेज की कमाई बढ़ सकती है, और फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सॉल्यूशंस जैसे रेवेन्यू के नए रास्ते तैयार हो सकते हैं।

वेंचुरा के मुताबिक कुल मिलाकर मीशो को सिर्फ सामान बेचने से नहीं बल्कि ऐड, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और सेलर सर्विसेज से भी कमाई हो सकेगी।

मीशो के ATU (एनुअल ट्रांजैक्टिंग यूजर्स) यानी साल में कम-से-कम एक बार मीशो पर खरीदारी करने वाले यूजर्स की संख्या अभी 27.4 करोड़ है और वेंचुरा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक यह 40.9 करोड़ पर पहुंच सकता है तो ऑर्डर्स की संख्या सालाना करीब 28.2% की रफ्तार से वित्त वर्ष 2029 में 561.9 करोड़ तक पहुंच सकता है।

वेंचुरा का अनुमान है कि मीशो का रेवेन्यू 26.2% की रफ्तार से ₹25,403 करोड़ पर पहुंच सकता है। वहीं ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2028 तक ऑपरेटिंग लेवल पर प्रॉफिटेबल हो सकती है और शुद्ध मुनाफा हासिल हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक वित्त वर्ष 2029 तक कंपनी ₹1,404 करोड़ के EBITDA और ₹1,702 करोड़ के शुद्ध मुनाफे में पहुंच सकता है।

इन सब बातों को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने खरीदारी की रेटिंग और ₹278 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है।

अब रिस्क की बात करें तो यूजर्स के बढ़ने की रफ्तार उम्मीद से कम होने और कॉम्पटीशन बढ़ने से मीशो के कारोबार को झटका लग सकता है।

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Ashoka Buildcon को RVNL से मिला ₹602 करोड़ का प्रोजेक्ट, अब 31 अगस्त को रहेगी शेयरों पर नजर

Ashoka Buildcon Shares: दिग्गज सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी अशोक बिल्डकॉन को रेलव विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से ₹602.16 करोड़ (जीएसटी मिलाकर) का एक कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने इसकी जानकारी आज 29 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में दी है। ऐसे में अशोका बिल्डकॉन के शेयरों पर इसका असर सोमवार 31 अगस्त को मार्केट खुलने पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 28 अगस्त को बीएसई पर यह 0.22% की गिरावट के साथ ₹112.70 पर बंद हुआ है। एक साल में शेयरों के चाल की बात करें तो पिछले साल 4 नवंबर 2025 को यह एक साल के निचले स्तर ₹214.35 पर था जिससे 4 महीने में यह 52.88% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹101.00 पर आ गया था।

कैसा ऑर्डर मिला है Ashoka Buildcon को RVNL से?

अशोक बिल्डकॉन को रेल विकास निगम लिमिटेड से उत्तराखंड में बन रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन की चार सुरंगों के लिए ₹602.16 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर प्रोजेक्ट के E-4 पैकेज के तहत आने वाली सुरंगों T-13, T-14, T-15 और T-16 से जुड़ा है। इसके तहत कंपनी को सुरंगों के लिए जरूरी इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सिस्टम की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम करना है। इनमें सब-स्टेशन, हाई-टेंशन और लो-टेंशन केबल, डीजल जनरेटर सेट, लाइटिंग, यूपीएस सिस्टम, वेंटिलेशन और फायर-फाइटिंग सिस्टम शामिल हैं।

कंपनी को 30 महीने के भीतर यह कॉन्ट्रैक्ट पूरा करना है। इसके अलावा कंपनी को रेल विकास निगम के पास ₹25.51 करोड़ की परफॉरमेंस बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी। इसमें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड दो साल है यानी काम पूरा होने के बाद दो साल तक तय शर्तों के अनुसार किसी कमी या खराबी की जिम्मेदारी कंपनी की रहेगी।

ऑर्डर बुक में सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों का

इस महीने की शुरुआत में अशोक बिल्डकॉन ने आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी से महाराष्ट्र में एक ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिलने की बात कही थी। इस प्रोजेक्ट में सालाना लगभग ₹126.5 करोड़ का ट्रांसमिशन चार्जेज है। इस प्रोजेक्ट के तहत महाराष्ट्र के भंडारा जिले में सकोली सबस्टेशन बनाया जाएगा। इस कंपनी को 24 महीने के भीतर काम पूरा करना है और इसके बाद 35 वर्षों तक O&M (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) का काम संभालना है।

इससे पहले जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹15,251 करोड़ था। इसमें तिमाही के बाद मिले ₹451 करोड़ के ऑर्डर शामिल नहीं हैं। ऑर्डर बुक में सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों का था, जिसमें रोड ईपीसी ₹6,783 करोड़ और रोड एचएएम ₹1,519 करोड़ है और कुल मिलाकर ये ऑर्डर बुक का करीब 54.5% हिस्सा हैं। रेलवे के ₹1,346 करोड़ के ऑर्डर्स को मिलाकर सड़क और रेलवे कंपनी का ऑर्डर बुक का करीब 63% हिस्सा हैं। ऑर्डर बुक में ₹5,066 करोड़ यानी 33.2% हिस्सा पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन तो ₹536 करोड़ यानी 3.5% हिस्सा बिल्डिंग ईपीसी की है।

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CBSE Class 12 Supplementary Result 2026: 12वीं के सप्लिमेंट्री परीक्षा रिजल्ट के बाद रि-इवैल्युएशन की प्रक्रिया शुरू, जानें कब से करें आवेदन

CBSE Class 12 Supplementary Result 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12 की पूरक परीक्षा (Supplementary exam) 2026 में हिस्सा लेने वाले छात्रों के लिए अहम घोषणा की है। इस परीक्षा में हिस्सा लेने वाले छात्रों का रिजल्ट जारी हो चुका है। इसके बाद अब बोर्ड ने छात्रों के लिए रिजल्ट के बाद मिलने वाली सुविधाओं का शेड्यूल घोषित कर दिया है। यह नोटिस 27 अगस्त को जारी किया गया है।

नोटिस के मुताबिक, उम्मीदवार पहले अपनी मूल्यांकन की हुई आंसर बुक की स्कैन कॉपी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद अंकों का सत्यापन, री-इवैल्यूएशन, या दोनों करवा सकते हैं। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे बताए गए कार्यक्रम और निर्देशों का ध्यान से पालन करें, क्योंकि डेडलाइन के बाद या ऑफलाइन मोड से जमा किए गए आवेदन स्वीकार एक्सेप्ट नहीं किए जाएंगे।

सीबीएसई कक्षा 12 सप्लीमेंट्री 2026: जरूरी तारीखें और फीस

नोटिस के एनेक्सर I में दिए गए शेड्यूल के मुताबिक, छात्र 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 तक अपनी मूलयांकन की हुई आंसर बुक की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकते हैं। फीस 100 रुपये प्रति विषय है। जिन उम्मीदवारों को स्कैन कॉपी मिलेगी, वे फिर मार्क्स के वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन, या दोनों के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

स्कैन की हुई आंसर बुक : 31 अगस्त से 1 सितंबर

स्कैन की हुई कॉपी की फीस : हर विषय के लिए 100 रुपये

मार्क्स का वेरिफिकेशन : 7 से 8 सितंबर

री-इवैल्यूएशन : 7 से 8 सितंबर

वेरिफिकेशन फीस : हर आंसर बुक के लिए 100 रुपये

री-इवैल्यूएशन फीस : हर सवाल के लिए 100 रुपये

सीबीएसई सप्लीमेंट्री रिजल्ट 2026: छात्र मार्क्स को कैसे चैलेंज कर सकते हैं?

छात्रों को सबसे पहले मूल्यांकन की हुई आंसर बुक की स्कैन की हुई कॉपी लेनी होगी। इसे मिलने के बाद, वे मूल्यांकन, टोटलिंग या कवर पेज पर डाले गए अंकों में अंतर चेक कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन रिक्वेस्ट सिर्फ थ्योरी वाले हिस्से और पूरे सवाल के लिए स्वीकार की जाएंगी, किसी सवाल के हिस्से के लिए नहीं।

सभी आवेदन और शुल्क भुगतान सिर्फ तय प्रक्रिया के जरिए ऑनलाइन एक्सेप्ट किए जाएंगे। सीबीएसई ने यह भी कहा है कि एक भी अंक की कमी को ध्यान में रखा जाएगा। री-इवैल्यूएशन का नतीजा फाइनल होगा, जिसमें आगे कोई अपील या रिव्यू नहीं होगा।

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Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते गिरे, क्या बाजार के अच्छे दिन अभी दूर हैं?

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट आई। बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी दिखा। यह बीते पांच महीनों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला रहा। हालांकि, 28 अगस्त को यानी हफ्ते के अंतिम दिन सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए।

इस हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में 0.47 फीसदी तक गिरावट आई

28 अगस्त को निफ्टी 0.35 फीसदी यानी 84 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। Sensex 0.43 फीसदी यानी 330 अंक चढ़कर 77,264 पर क्लोज हुआ। बीते एक हफ्ते में सेंसेक्स 0.44 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान 0.47 फीसदी यानी 114 प्वाइंट्स गिरा है। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट ने इनवेस्टर्स को चिंतित कर दिया है।

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख करोड़ घटा

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस हफ्ते करीब 1 लाख करोड़ रुपये घटा है। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा हाथ रहा। उधर, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोपॉलिटिकल स्थितियां अब भी चिंताजनक

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्थितियां अभी भी चिंताजनक बनी हुई हैं। खासकर मिडिलईस्ट में हालात में बदलाव नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, ईरान और ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बातचीत हुई है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। यह चिंता की बात है।

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आसार

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद 28 अगस्त को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। वॉर्श ने यह साफ कर दिया है कि फेड का फोकस फिलहाल महंगाई को बढ़ने से रोकने पर होगा। इसका मतलब है कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का एलान कर सकता है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो उसका असर भारत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा। भारत में भी इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है।

क्रूड में तेजी जारी रही तो बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतें अगर नीचे नहीं आती हैं तो इनफ्लेशन बढ़ना जारी रहेगा। इस बीच इनवेस्टर्स की नजरें अगस्त के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ता है तो अक्तूबर में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर पड़ेगा।

निफ्टी-सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे आए हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने का संकेत मिलता है। लेकिन, शेयरों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी दिखेगी, जब क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी। इस बीच निफ्टी और सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड बता रहा है कि सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स में नरमिी है। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजज से नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।

IPO News: SEBI की हरी झंडी, दो कंपनियों के आईपीओ के रास्ते का एक बड़ा पड़ाव पार

IPO News: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने पारस हेल्थकेयर और एमके सन्स के आईपीओ प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। सेबी की साइट पर मौजूद डिटेल्स के मुताबिक अब ये दोनों कंपनियों अपनी आईपीओ योजना पर आगे बढ़ सकती हैं। इन दोनों ने इस साल की शुरुआत में सेबी के पास आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल किया था। अब इन्हें हरी झंडी मिल चुकी है लेकिन अभी तक आईपीओ खुलने की तारीख या प्राइस बैंड का ऐलान नहीं हुआ है। आईपीओ की सफलता के बाद इनके शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

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पारस हेल्थकेयर ने ₹1,800 करोड़ तक का आईपीओ लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनी की योजना ₹500 करोड़ तक के नए इक्विटी शेयर जारी करने की है को ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1,300 करोड़ तक के शेयरों की बिक्री हो सकती है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने में करेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना आईपीओ के पैसों को सब्सिडियरी PMHPL में भी निवेश की है ताकि इसका भी कर्ज हल्का हो सकते है। इसके अलावा आईपीओ के बाकी पैसों का इस्तेमाल आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।

पारस हेल्थकेयर पारस हेल्थ ब्रांड के तहत काम करती है और टर्शियरी और क्वाटर्नरी हेल्थकेयर सर्विसेज देती है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में कुल 2,211 बेड की क्षमता वाले आठ अस्पताल चला रही थी। इसके अस्पताल हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में हैं।

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एमके सन्स फाइन ज्वेल्स रिटेल-फोकस्ड ज्वैलरी कंपनी है। इसकी योजना आईपीओ के तहत 1.36 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की है और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत प्रमोटर शेयरहोल्डर रामचंद मुरलीधर रायमलानी अधिकतम 34 लाख शेयरों की बिक्री कर सकते हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी महाराष्ट्र में एक नया शोरूम खोलने, गुजरात में अपने मौजूदा शोरूम को बड़ा करने, कर्ज हल्का करने और आम कॉर्रपोरेट उद्देश्यों में करेगी। एमके सन्स फाइन ज्वेल्स अपने शोरूम के जरिए सोने, हीरे और क्यूबिक जिर्कोनिया के गहने बेचती है। अभी मुंबई और अहमदाबाद में इसके पांच शोरूम हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।