Share Market Rally: 5 सेकंड में ही बरसे ₹3 लाख करोड़, IT Sector के जोश पर 400 प्वाइंट्स चढ़ा Sensex

Share Market Rally: लगातार पांच कारोबारी दिनों की बढ़त के बाद एक कारोबारी दिन पहले जो गिरावट आई थी, उससे उबरते हुए आज घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) ने बढ़त के साथ शुरुआत की। अधिकतर एशियाई बाजारों से मजबूत संकेतों के बीच सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 400 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24100 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी खरीदारी का शानदार माहौल है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी आधे फीसदी की बढ़त है।

सेक्टरवाइज सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन निफ्टी आईटी में कुछ अधिक ही जोश दिख रहा है और यह 1% से अधिक मजबूत है। बाकी सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% से कम ही बढ़त है। खरीदारी के इस माहौल में ओवरऑल BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में मार्केट खुलते ही ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:16 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 300.07 प्वाइंट्स यानी 0.39% की बढ़त के साथ 77,102.97 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 86.95 प्वाइंट्स यानी 1.45% के उछाल के साथ 24,100.05 पर है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 420.88 प्वाइंट्स उछलकर 77,223.78 और निफ्टी 120.60 प्वाइंट्स चढ़कर 24,133.70 तक पहुंच गया था।

निवेशकों की दौलत में ₹3.10 लाख करोड़ का उछाल

एक कारोबारी दिन पहले यानी 19 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,76,96,162.72 करोड़ था। आज यानी 22 जून 2026 को मार्केट खुलते ही यह ₹4,80,07,068.95 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी ₹3,10,906.23 करोड़ बढ़ गई है।

Sensex के 22 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें शुरुआती कारोबार में 22 शेयर ग्रीन जोन में हैं। सबसे अधिक तेजी फिलहाल टेक महिंद्रा, इंफोसिस और एचसीएलटेक में है। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट फिलहाल पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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119 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर फिलहाल 3043 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 1979 शेयर मजबूत दिख रहे हैं तो 840 में गिरावट का रुझान है और 224 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। इसके अलावा 119 शेयर एक साल के हाई और 18 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 103 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 63 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : 23800 के ऊपर टिके रहने पर निफ्टी में 24500 का लेवल मुमकिन, 23800 के नीचे जाने पर बढ़ सकती है गिरावट

Trade setup for today : 19 जून को निफ्टी में 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। इसने MACD में बुलिश क्रॉसओवर भी बनाए रखा,हालांकि RSI में थोड़ी नरमी आई। वहीं,शुक्रवार को बढ़त के बावजूद इंडिया VIX निचले स्तर पर ही बना रहा। बाजार जानकारों के मुताबिक,कंसोलिडेशन के दौर में निफ्टी को 23,800 के सपोर्ट जोन (10-दिन और 50-दिन के EMA) को बनाए रखने की जरूरत है। अगर यह लेवल टूटता है,तो इंडेक्स के 23,700–23,600 तक गिरने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि,अगर इंडेक्स 23,800 के ऊपर बना रहता है,तो यह 24,200–24,300 और उसके बाद 24,500 की ओर बढ़ सकता है,जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,932, 23,898 और 23,842

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,043, 24,077 और 24,133

गैप-डाउन ओपनिंग के बाद,डेली चार्ट पर निफ्टी 50 ने निचले शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली बुलिश कैंडल बनाई। इससे पता चलता है कि ऊंचे स्तरों से थोड़ी गिरावट आई है,लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी में भी दिलचस्पी दिखी है। हालांकि,अगले सेशन में इंडेक्स 100-दिन के EMA के ऊपर नहीं टिक पाया,लेकिन यह अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा और ये दोनों ही ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। 10-दिन का EMA भी 50-दिन के EMA के ऊपर जाने की कगार पर है। RSI में थोड़ी नरमी आई लेकिन यह अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना रहा,जबकि MACD ज़ीरो लाइन और सिग्नल लाइन दोनों के ऊपर रहा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार में मोमेंटम में कुछ कमी दिखी। ये सभी बातें बताती हैं कि थोड़े समय के कंसोलिडेशन के बावजूद ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,782, 57,862 और 57,992

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,522, 57,441 और 57,311

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी की लगातार छह दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया और प्रॉफ़िट बुकिंग के कारण इसमें 0.5% की गिरावट आई,लेकिन यह पिछले दिन के निचले स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहा। डेली टाइमफ़्रेम पर बैंकिंग इंडेक्स ने छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें नीचे की तरफ़ एक छोटी शैडो थी। यह हल्की गिरावट (करेक्शन)का संकेत है,जबकि कुल मिलाकर ट्रेंड अभी भी बुल्स के पक्ष में है। इंडेक्स अप्रैल के स्विंग हाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक आए करेक्शन के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल से ऊपर बना रहा। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से भी ऊपर रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। RSI गिरकर 67.81 पर आ गया, लेकिन अपनी सिग्नल लाइन से काफी ऊपर बना रहा,जबकि MACD ने अपना बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार थोड़े हल्के पड़ गए। ये सभी बातें बताती हैं कि कुछ प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल बुलिश ट्रेंड बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

लगातार 23 सेशन तक नेट बायर बने रहने के बाद,19 जून को घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने ₹1,159 करोड़ के शेयर बेचे। इसके उलट,विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट बायर बनकर उभरे और उन्होंने ₹4,859 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे विदेशी निवेशकों की फिर से दिलचस्पी का संकेत मिलता है।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 2.35 प्रतिशत बढ़कर 12.97 पर पहुंचने के बावजूद निचले स्तर पर बना रहा। यह इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। मार्केट में तेज़ी के नज़रिए को बनाए रखने के लिए इसके 14 के स्तर से नीचे बने रहना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 19 जून को पिछले सेशन के 1.12 से गिरकर 0.91 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

शिक्षा, परीक्षा दोनों लापता

भारत की शिक्षा प्रणाली और परीक्षा की व्यवस्था को लेकर इन दिनों पूरे देश में चर्चा हो रही है। यह चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि मेडिकल में दाखिले के लिए हुई नीट यूजी के पेपर लीक हो गए और परीक्षा दोबारा करानी पड़ी। 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी और उससे पहले 12 युवाओं ने आत्महत्या करके जान दे दी है। 12वीं की बोर्ड में सीबीएसई ने ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का जो सिस्टम बनाया उसकी गड़बड़ियों से भी लोगों की नजर इसकी ओर गई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये दोनों बड़ी घटनाएं कोई अपवाद हैं। यह भारत में शिक्षा व्यवस्था की मुख्यधारा है। इन दोनों पर ज्यादा ध्यान इसलिए गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक देश, एक कुछ भी कराने की जिद में मेडिकल में दाखिले की सारी परीक्षाएं एक साथ कराने का फैसला किया और इसके लिए एनटीए का गठन हुआ, जिसके नकारेपन की दास्तान पूरे भारत के लोग जानते हैं। उस एक एजेंसी के नकारेपन की वजह से सेना और वायु सेना को नीट यूजी की परीक्षा में शामिल करना पड़ा है।

लेकिन अखिल भारतीय परीक्षाओं के साथ साथ हर राज्य में शिक्षा और परीक्षा को लेकर एक जैसी कहानी है। शिक्षा का सत्र समय से नहीं चलना और परीक्षा समय पर नहीं होना या परीक्षा होने के बाद नतीजों का प्रकाशन समय से नहीं होना या नतीजे आने के बाद भी नियुक्ति नहीं होना, हर राज्य की समस्या है। बिहार में करीब दो साल पहले 70वीं बीपीएससी की परीक्षा हुई थी लेकिन अभी तक नतीजे घोषित नहीं किए गए हैं। नतीजों में देरी से लाखों की संख्या में छात्र अगली परीक्षा होने तक उम्र की सीमा पार कर जाएंगे। परीक्षा के सत्र में देरी से लाखों छात्र प्रतियोगिता परीक्षाओं से वंचित रह जाते हैं। छोटी छोटी परीक्षाओं के रद्द होने पर लोग ध्यान भी देते हैं। दिल्ली में सीयूईटी की परीक्षा में 36 सौ से ज्यादा अभ्यर्थी तकनीकी गड़बड़ी से परीक्षा नहीं दे सके। उनको बाद में फिर परीक्षा के लिए जाना पड़ा। ऐसी गड़बड़ियां आम होती हैं। एक ही दिन दो बड़ी परीक्षा हो जाना भी एक समस्या है, जिससे छात्रों को जूझना पड़ता है।

दूसरी ओर परीक्षा का आयोजन सरकार के लिए या परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के लिए कमाई का साधन बन गया है। बेरोजगारी इतनी ज्यादा है कि एक एक नौकरी के लिए हजारों लोग आवेदन दे रहे हैं। बिहार में एक नौकरी के लिए चार हजार पद निकले तो 14 लाख लोगों ने आवेदन किया। सोचें, न्यूनतम फीस भरने पर भी कितने पैसे जमा हुए होंगे? ऐसी परीक्षाओं के लिए सरकारें यातायात की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं करती हैं और परीक्षा के केंद्र अभ्यर्थी के घर से तीन तीन सौ किलोमीटर दूर रखे जाते हैं। बिहार में पिछले ही दिनों रेलवे स्टेशनों की भयावह तस्वीरें सोशल मीडिया पर सारे देश ने देखी। हजारों छात्र परीक्षा केंद्रों पर पहुंच ही नहीं पाए। कई साल पहले रेलवे ने एक लाख पदों की बहाली निकाली थी, जिसके लिए एक करोड़ आठ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। अभी तक वह परीक्षा नहीं हो पाई है।

असल में प्रतियोगिता परीक्षाएं छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक, शारीरिक व मानसिक शोषण का पर्याय बन गई हैं। राहुल गांधी ने पिछले दिनों कोटा में छात्रों के साथ संवाद में एक आंकड़ा देश के सामने रखा। अभी तक उसका खंडन नहीं किया गया और कई जानकार उसकी पुष्टि कर रहे हैं। उस आंकड़े के मुताबिक देश की सिर्फ पांच बड़ी परीक्षाओं नीट, जेईई, एसएससी, यूपीएससी और आरआरबी की तैयारी से लेकर परीक्षा तक देश के छात्रों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपया खर्च होता है। यह बिहार जैसे राज्य के साल भर के बजट से ज्यादा है। केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों के बजट से ज्यादा है यह रकम। सिर्फ नीट की परीक्षा में 23 लाख छात्रों के एक लाख 32 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यह हकीकत भी सामने आई है कि यूपीएससी की परीक्षा में करीब डेढ़ हजार प्रतियोगियों मे से एक को नौकरी मिलती है। बाकियों के लिए संघर्ष ही रास्ता है। शिक्षा की गुणवत्ता में कैसी गिरावट आई है उस पर तो कई ग्रंथ लिखे जा सकते हैं। कोरोना के बाद हुए एक सर्वे में पता चला है कि बिल्कुल प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों के सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है और छठी क्लास के बच्चे अपने से दो क्लास नीचे की किताबें नहीं पढ़ पाते हैं। उच्च शिक्षा और रिसर्च की हालत दुनिया में सबसे खराब है। हाल ही में दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज की क्यूएस रैंकिंग आई है, जिसमें टॉप एक सौ यूनिवर्सिटीज में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है और टॉप दो सौ में तीन को जगह मिली है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जैसे अमेरिका, चीन आदि अपने जीडीपी का तीन से चार फीसदी तक रिसर्च पर खर्च करती हैं। ध्यान रहे अमेरिका की जीडीपी 30 ट्रिलियन डॉलर है, जो भारत से सात गुने से ज्यादा है और चीन की 20 ट्रिलियन डॉलर है। भारत की जीडीपी चार ट्रिलियन डॉलर की है और उसमें से 0.70 फीसदी रिसर्च पर खर्च होता है।

CBSE Class 10 Second Board Result 2026: 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट कभी भी हो सकता है जारी, परिणाम में देरी पर उठ रहे हैं सवाल

CBSE Class 10 Second Board Result 2026: सीबीएसई बोर्ड से 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा दे चुके तकरीबन 6.5 लाख छात्र अपने रिजल्ट का बेसब्री से रास्ता देख रहे हैं। लेकिन 21 मई के बाद से अब लगभग एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तरफ से 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट पर कोई अपडेट नहीं है। मीडिया में आ रही है कई खबरों में कहा जा रहा है कि सीबीएसई 10वीं कक्षा दूसरी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट 2026 जून के आखिर तक आ सकते हैं।

यह इंतजार छात्रों और अभिभावकों के बीच चर्चा का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। खासकर इसलिए क्योंकि यह सीबीएसई के नए दो-बोर्ड-एग्जाम सिस्टम का पहला साल है। रिजल्ट जारी होने के बाद, छात्र बोर्ड के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल के जरिए अपना रिजल्ट देख सकेंगे।

दूसरा परीक्षा साइकिल 15 मई से 21 मई, 2026 तक हुआ था। सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, तकरीबन 6.5 लाख छात्र इस एग्जाम में शामिल हुए थे। ये परीक्षा बोर्ड के संशाधित मूल्यांकन व्यवस्था के तहत शुरू की गई थी, जो 10वीं कक्षा के छात्रों को अपने स्कोर सुधारने या उन विषयों को पास करने का एक और मौका देता है जिनमें वे साल की शुरुआत में हुए मेन बोर्ड एग्जाम के दौरान क्वालिफाई नहीं कर पाए थे।

नए फॉर्मेट के तहत, फरवरी बोर्ड एग्जाम अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा एग्जाम वैकल्पिक है। दूसरे फेज में छात्र ज्यादा से ज्यादा तीन विषयों की परीक्षा दे सकते हैं। सीबीएसई उन्हें दोनों एग्जाम में मिले बेहतर स्कोर को बनाए रखने की इजाजत देता है। खबर है कि 5 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने इम्प्रूवमेंट कैटेगरी में रजिस्टर किया, जबकि हजारों दूसरे कंपार्टमेंट एग्जाम में शामिल हुए। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपडेट के लिए सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहें। रिजल्ट जारी होने के बाद अस्थायी मार्कशीट भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी।

सीबीएसई 10वीं कक्षा सेकंड बोर्ड रिजल्ट 2026 कैसे चेक करें

  • ऑफिशियल सीबीएसई रिजल्ट वेबसाइट पर जाएं।
  • सीबीएसई 10वीं सेकंड बोर्ड रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना रोल नंबर और दूसरे ज़रूरी क्रेडेंशियल डालें।
  • डिटेल्स सबमिट करें।
  • आगे के लिए रिजल्ट देखें और डाउनलोड करें।

रिजल्ट कहां चेक करें

स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट इन तरीकों से देख पाएंगे:

  • cbseresults.nic.in
  • results.cbse.nic.in
  • cbse.gov.in
  • DigiLocker
  • UMANG App

उम्मीद है कि ऑफिशियल वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने पर सीबीएसई छात्रों को अपने स्कोरकार्ड आसानी से देखने में मदद करने के लिए दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रिजल्ट उपलब्ध कराएगा।

NEET UG 2026 Guidelines: रविवार की परीक्षा के लिए एनटीए भेज रहा एसएमएस, व्हॉट्सएप मेसेज और ईमेल, फ्रॉड से बचने के लिए जान लें ऑफिशियल आईडी

Market cues : कुल मिलाकर बाजार का ट्रेंड पॉजिटिव, लेकिन प्रॉफिट बुकिंग की वजह से हल्का कंसोलिडेशन मुमकिन

Trade setup for today : 18 जून को निफ्टी पिछले स्विंग-हाई लेवल और शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। यह 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। लगातार पांचवें सेशन में भी तेजी का ट्रेंड बना रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और VIX के निचले स्तर पर रहने से मार्केट सेंटीमेंट को सपोर्ट मिला,जबकि मोमेंटम इंडिकेटर्स में मजबूती रही। इन सभी बातों से लगता है कि कुल मिलाकर ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि प्रॉफिट बुकिंग की वजह से कुछ कंसोलिडेशन और रिट्रेसमेंट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 24,200 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है, इसके बाद 24,500 एक अहम रेजिस्टेंस हो सकता है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर प्रॉफ़िट बुकिंग होती है, तो 24,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है और इसके बाद 23,800 का स्तर अहम सपोर्ट लेवल हो सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,073, 24,037 और 23,979

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,190, 24,225 और 24,284

निफ्टी ने डेली टाइमफ्रेम पर ‘हायर हाई-हायर लो’पैटर्न के साथ एक बुलिश कैंडल बनाई,जो पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत है। शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे,जबकि इंडेक्स 23 फरवरी के बाद पहली बार 100-दिन के EMA के ऊपर बंद हुआ। RSI लगातार दूसरे सेशन में 60 के लेवल से ऊपर बना रहा और बढ़कर 62.43 पर पहुंच गया। MACD ने जीरो लाइन के ऊपर बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा और ग्रीन हिस्टोग्राम बार में और बढ़ोतरी देखी गई। ये सभी इंडिकेटर बुलिश मोमेंटम के मज़बूत होने का संकेत देते हैं और मौजूदा ट्रेंड के जारी रहने का समर्थन करते हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,023, 58,127 और 58,294

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,689, 57,585 और 57,418

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक ग्रीन कैंडल बनाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक के करेक्शन के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के ऊपर बना रहा,जो एक अच्छे ट्रेंड का संकेत है। 10-दिन का EMA दूसरे अमह मूविंग एवरेज (20-, 50-, 100- और 200-दिन के EMA) से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था,जबकि वे सभी ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। बैंक निफ्टी ने 9 मार्च के ‘बेयरिश गैप’को भी भर दिया और लगातार दूसरे सेशन में पिछले’स्विंग हाई’से ऊपर बना रहा। RSI बढ़कर 70.97 पर पहुंच गया,जबकि MACD ने लगातार बढ़ते हरे हिस्टोग्राम बार के साथ मज़बूत’बुलिश क्रॉसओवर’बनाए रखा। ये सभी बातें लगातार खरीदारी की दिलचस्पी दिखाती हैं और संकेत देती हैं कि बैंकिंग इंडेक्स से निकट भविष्य में अपनी तेजी को बनाए रखने की संभावना है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया और सेशन के दौरान ₹3,516 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX कल 3.91 प्रतिशत गिरकर 12.67 पर आ गया। यह 18 फरवरी के बाद का सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है। इसने लगातार छठे सेशन में अपनी गिरावट जारी रखी,जो बताता है कि बुल अब ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। मार्केट में तेजी के सेंटीमेंट को बनाए रखने के लिए VIX का निचले लेवल पर बने रहना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 18 जून को बढ़कर 1.12 हो गया, पिछले सेशन में यह 1.1 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

जनभावना का ध्यान रखने की जरुरत नहीं!

क्या भारतीय जनता पार्टी इतनी बड़ी और इतनी ताकतवर हो गई है उसे चुनाव जीतने के लिए जनभावना का ध्यान रखने की भी जरुरत नहीं है? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और अमित शाह का प्रबंधन इस स्तर तक पहुंच गया है कि जनभावना विपरीत होने के बावजूद वे भाजपा को चुनाव जिता दें? यह सवाल इसलिए है क्योंकि कई बार भारतीय जनता पार्टी जनभावना के खिलाफ काम करती दिखती है। ऐसे मुद्दों पर भी, जिन पर एक खास किस्म की जनभावना का निर्माण स्वंय भाजपा ने किया है। नागरिक इस बात को समझते भी हैं और सार्वजनिक विमर्श में इसकी चर्चा भी होती है। लोग सवाल भी उठाते हैं लेकिन मतदान के समय उनकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और वे भाजपा के विरोध की मनःस्थिति के बावजूद उसी को वोट करते हैं। यह स्टॉकहोम सिंड्रोम है या नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कुछ ऐसे मुद्दे लोगों के अवचेतन में बैठा दिए हैं, जो मतदान के समय उनकी मनःस्थिति को प्रभावित करने वाले तात्कालिक मुद्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं? यह गहरे विश्लेषण का विषय है। इसके तत्व धर्म, जाति और सांप्रदायिक आधार पर गहरे राजनीतिक व सामाजिक विभाजन में खोजे जा सकते हैं।

अगर जनभावना की बात करें तो सबसे पहले उदाहरण के लिए भ्रष्टाचार का मुद्दा लिया जा सकता है। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमत बनाया था और नारा दिया था कि ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’। लेकिन भाजपा भ्रष्टाचार के आरोपियों को खुले दिल से पार्टी में शामिल करती है और उन्हें उच्च पद पर बैठाती है। महाराष्ट्र में अजित पवार के ऊपर भाजपा ने 70 हजार करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया था और कोऑपरेटिव बैंक व चीनी मिल से जुड़े कई घोटाले से थे। अमित शाह ने कहा था कि अजित पवार जेल जाएंगे और चक्की पीसेंगे। लेकिन वही अजित पवार भाजपा के साथ आ गए। उनको उप मुख्यमंत्री बना दिया गया और चुनाव में भाजपा को इसका फायदा भी मिला। यह कहानी एक के बाद एक कई राज्य में दोहराई गई। हिमंत बिस्वा सरमा के ऊपर कई गंभीर आरोप लगे थे। सीबीआई ने उनकी जांच की थी। वे भाजपा के मुख्यमंत्री हैं। सुवेंदु अधिकारी एक स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे पर पैसे लेते पकड़े गए थे। लेकिन वे भी भाजपा के मुख्यमंत्री हैं। अभी ही तृणमूल कांग्रेस के जो सांसद सरोगेट तरीके से भाजपा से जुड़ रहे हैं उनमें कई भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों के आरोपी हैं और उन्हीं के खिलाफ बंगाल के लोगों ने गुस्सा निकाला। लेकिन भाजपा को इसकी परवाह नहीं है। ऐसी अनगिनत मिसाले हैं। आम आदमी पार्टी के जिस सांसद के यहां ईडी ने छापा मार उसने 10 दिन के बाद ही भाजपा के बड़े नेताओं के सामने पार्टी ज्वाइन कर ली। ऐसा लग रहा है जैसे भाजपा भ्रष्टाचार को नापंसद करने वाले अपने समर्थकों को चिढ़ाने के लिए ऐसा काम कर रही है।

भ्रष्टाचार के बाद भाजपा और नरेंद्र मोदी का दूसरा बड़ा मुद्दा वंशवाद का था। उन्होंने जिस तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ जनभावना का निर्माण किया वैसे ही वंशवाद के खिलाफ भी किया। परिवारवाद को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। लेकिन बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से लेकर आंध्र प्रदेश तक परिवारवादी पार्टियों को अपने साथ जोड़ा, उन्हें प्रश्रय दिया, उनको अपनी सरकार में मंत्री बनाया और राज्यों में सत्ता का सुख भोगने के बंदोबस्त किए। अपनी पार्टी में भी दूसरी या तीसरी पीढ़ी के नेताओं के आगे बढ़ाया।

ऐसे ही महंगाई का मामला है। 2014 में प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने ‘बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा दिया। लेकिन सरकार में आने के बाद पिछले 12 साल में महंगाई बेतहाशा बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमतें तो अब बढ़ी हैं, जब आपूर्ति प्रभावित हुई। परंतु भारत में तो पेट्रोल की कीमत एक सौ रुपए की मनोवैज्ञानिक सीमा पांच साल पहले ही पार कर गई थी। भाजपा ने 60 रुपए लीटर पेट्रोल को महंगा बताया था लेकिन उसकी सरकार ने 2021 में पेट्रोल की कीमत सौ रुपए लीटर कर दी। भाजपा ने चार सौ रुपए के रसोई गैस सिलेंडर के खिलाफ अभियान चलाया था लेकिन सरकार में आने के थोड़े दिन बाद ही उसने इसकी कीमत नौ सौ रुपए कर दी। मोदी के अनेक वीडियो आज भी शेयर किए जाते हैं, जिसमें 60 रुपए में एक डॉलर की कीमत को देश की प्रतिष्ठा के साथ जोड़ रहे थे। लेकिन आज 96 रुपए का डॉलर मिल रहा है फिर भी देश की प्रतिष्ठा बढ़ रही है!

प्रधानमंत्री ‘परीक्षा पर चर्चा’ करते हैं। उन्होंने ‘एग्जाम वॉरियर्स’ नाम से किताब लिखी है। आज नीट यूजी पेपर लीक और दोबारा परीक्षा के कारण 23 लाख और सीबीएसई की गड़बड़ियों के कारण 18 लाख छात्र परेशान हैं। परंतु प्रधानमंत्री ने एक शब्द नहीं कहा है। लाखों छात्र और करोड़ों अभिभावकों में असंतोष और गुस्सा है। प्रतियोगिता परीक्षाओं में गड़बड़ी और नौकरी की कमी से लोग नाराज हैं। सड़कों पर भी लोगों का गुस्सा निकल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी फल फूल रही है। इसके बावजूद भाजपा और उसकी सरकार को इसकी परवाह नहीं है। नरेंद्र मोदी ने हर साल दो करोड़ नौकरी का वादा किया था। आज चार हजार पद के लिए 14 लाख लोग आवेदन कर रहे हैं। आठवीं पास की योग्यता जिस नौकरी के लिए चाहिए उसमें एमए पास लोग लाइन लगा कर खड़े होते हैं। रेलवे की एक लाख नौकरी के लिए एक करोड़ आठ लाख लोगों ने आवेदन किया और कई साल बीत जाने के बाद भी उसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

सो, भ्रष्टाचार हो, परिवारवाद हो, महंगाई हो या नौकरी और रोजगार का मामला हो, हर मामले में जनभावना सरकार के विरूद्ध दिखती है। इसके बावजूद भाजपा चुनाव जीत रही है तो इसका मतलब यह है कि सामान्य दिनों में जनभावना का ज्वार और मतदान के दिन की प्राथमिकता दोनों में समानता नहीं भी हो सकती है। पहले ऐसा होता था कि अगर लोगों में गुस्सा था तो वह मतदान में और चुनाव नतीजों में प्रकट होता था। आज ऐसा नहीं होता है। इसका कारण यह है कि अपने जीवन से जुड़ी रोजमर्रा की चीजों पर सरकार से नाराज होने के बावजूद किसी बड़ी प्रत्याशा में या किसी बड़े नैरेटिव के असर में लोग भाजपा को वोट दे रहे हैं। जैसे जैसे यह धारणा स्थापित होती जा रही है वैसे वैसे भाजपा जनभावना का ख्याल करना बंद या कम करती जा रही है। वह सरेआम ऐसे तमाम काम कर रही है, जिसके खिलाफ उसने खुद जनभावना का निर्माण किया है।

लगातार पांचवे दिन Sensex मजबूत, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी दौलत, Indigo-Trent रहे टॉप गेनर

Share Market Rally: कच्चे तेल की फिसलन पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार पांचवे दिन रौनक रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इंट्रा-डे में सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के एकदम करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में भी अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर हुआ। हालांकि फार्मा, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर ने इसे संभाल लिया जिनके निफ्टी इंडेक्स आधे-आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुए। निफ्टी प्राइवेट बैंक भी आधा फीसदी मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 254.36 प्वाइंट्स यानी 0.33% के उछाल के साथ 77,409.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 82.30 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168.00 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स आज 336.71 प्वाइंट्स उछलकर 77,492.33 और निफ्टी 103.55 प्वाइंट्स चढ़कर 24,189.25 तक पहुंच गया।

₹3.10 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,58,056.752 करोड़ था। आज यानी 18 जून 2026 को यह उछलकर ₹4,77,68,135.83 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,10,079.078 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 20 स्टॉक्स आज ग्रीन बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टेक महिंद्रा और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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162 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4419 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2419 शेयर मजबूत हुए तो 1814 में गिरावट रही जबकि 186 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 162 शेयर एक साल के हाई और 46 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 7 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 7 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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Market cues : बाजार में तेजी जारी रहने के संकेत, 24100 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में जल्द ही 24500 का लेवल मुमकिन

Trade setup for today : निफ्टी 50 ने लगातार चौथे सेशन में अपनी बढ़त बनाए रखी। यह सोमवार से ही 50-डे EMA के ऊपर टिका हुआ है। 17 जून को US फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों से पहले यह 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इस बैठक में सेंट्रल बैंक ने फेडरल फंड्स रेट में कोई बदलाव नहीं किया। इंडेक्स ने 24,100 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के पास बंद होकर’लोअर हाई-लो’स्ट्रक्चर को खत्म कर दिया। उधर शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। इन्हें अच्छे मोमेंटम इंडिकेटर्स,गिरते VIX और वेस्ट एशिया में तनाव कम होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला।

तेजड़ियों के लिए,इंडेक्स को 24,500 के रेजिस्टेंस लेवल (जो 200-दिन के DEMA के पास है) तक ले जाने के लिए 24,100 के लेवल को पार करना और उसके ऊपर बने रहना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नीचे की तरफ 23,900–23,800 के जोन में तत्काल सपोर्ट मिल सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,002, 23,969 और 23,916

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,107, 24,140 और 24,193

निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक बुलिश कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ छोटी शैडो (shadows) थीं। इससे संकेत मिलता है कि 24,100 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के आसपास पॉजिटिव रुख के साथ इंडेक्स एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स लगातार तीसरे सेशन में 50-डे EMA के ऊपर बना रहा और 100-डे EMA के करीब पहुंच गया,जबकि शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। RSI बढ़कर 60.87 हो गया,जबकि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का पॉज़िटिव गैप और बढ़ गया। बढ़ते हुए हरे हिस्टोग्राम बार से ये बातें पता चलती हैं। ये सभी इंडिकेटर निकट भविष्य में बुलिश मोमेंटम के मज़बूत होने का संकेत दे रहे हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,646, 57,746 और 57,908

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,323, 57,223 और 57,061

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,617, 55,897

बैंकिंग इंडेक्स में 0.5% की बढ़त हुई और डेली टाइमफ्रेम पर इसने’लोअर शैडो’के साथ एक’बुलिश कैंडल’बनाई। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव संकेत बने रहने के संकेत हैं। इंडेक्स अप्रैल के अपने उच्चतम स्तर से ऊपर बंद हुआ और सभी अहम’मूविंग एवरेज’से काफी ऊपर टिका रहा। 20-दिन का EMA, 50-दिन के EMA के ऊपर चला गया है,जबकि 10-दिन का EMA, 200-दिन के EMA के ऊपर जाने की कगार पर है। RSI बढ़कर 69.15 पर पहुंच गया और MACD में बुलिश क्रॉसओवर बना रहा,साथ ही हरे हिस्टोग्राम बार भी बढ़ते रहे। ये सभी इंडिकेटर बैंकिंग इंडेक्स में लगातार मजबूती और पॉजिटिव मोमेंटम की ओर इशारा करते हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

17 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट खरीदार रहे। इन्होनें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट खरीदार बने रहे और उन्होंने सेशन के दौरान 1,561 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया।

इंडिया VIX

मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाले India VIX में 1.31% की गिरावट आई और यह 13.19 पर बंद हुआ। यह 26 फरवरी के बाद का इसका सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है,जो दिखाता है कि तेजी की उम्मीद रखने वाले निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। VIX में लगातार गिरावट से बाजार के लोगों का भरोसा और बढ़ने और अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 17 जून को पिछले सेशन के 1.08 से बढ़कर 1.1 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

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नीतिगत चुस्ती संग चुनौतियों से निपटेगा भारत

ट्रंप शुल्क और व्यापारिक उथल-पुथल के कारण पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत नीतिगत चुस्ती और दीर्घकालिक नजरिये के साथ चुनौतियों से निपटेगा। यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कही। सीतारमण ने शुल्क जंग के कारण पैदा हुए […]