पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर को लेकर कई बार युद्ध हो चुका है। दोनों देश इस हिमालयी इलाके पर अपना दावा करते हैं। पाकिस्तान ने हमेशा भारत के साथ कश्मीर विवाद को सबसे बड़ा मुद्दा माना। इस वजह से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों की अपनी परेशानियों पर कम ध्यान दिया गया। अब वहां हालात ऐसे हैं कि सरकार के लिए उनकी आवाज दबाना मुश्किल हो रहा है। महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने PoK से उठी सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। PoK में आंदोलन की कमान किसके हाथ में है? PoK में आंदोलन का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। इसका गठन 2023 में हुआ था। इसमें व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता शामिल हैं। शुरुआत में संगठन ने महंगी बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। 2024 और 2025 में हुए प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने बिजली की दरें कम कीं और आटे पर सब्सिडी दी। इसके बाद PoK में आटा पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी सस्ता मिलने लगा। 12 रिजर्व सीटें रद्द करने की मांग पर आंदोलन लॉन्ग मार्च पर रोक, कई नेता गिरफ्तार हुए JAAC ने 9 जून को रावलकोट से राजधानी मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। रावलकोट को JAAC का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। यह जगह LoC से करीब 20 मील दूर है। लॉन्ग मार्च होने से पहले ही 5 जून को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया। कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद आंदोलन नहीं रुका। रावलकोट में समर्थकों ने कई हफ्तों तक धरना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी चलती रही। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक जून की शुरुआत से 27 जुलाई तक प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों समेत कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने LoC को दुनिया के बाकी हिस्से से काटा न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर जब पिछले सप्ताह इलाके में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि पाकिस्तान सरकार ने PoK के कई हिस्सों को लगभग बाहरी दुनिया से काट दिया है। पूरे इलाके में कई हफ्तों से इंटरनेट सेवा बंद थी। इसका असर सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया पर नहीं पड़ा, बल्कि बैंक और ATM सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मुजफ्फराबाद जाने वाली सड़कों पर जगह-जगह पुलिस की चौकियां बनाई गई थीं। नीलम और झेलम नदी के आसपास की ठंडी और हरी-भरी घाटियां, जहां आमतौर पर गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, इस बार लगभग खाली दिखाई दीं। पाकिस्तान के सामने कई संकट PoK में उठा यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पहले से कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सेना लंबे समय से उग्रवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसमें हाल के कुछ साल में हजारों सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। ऐसे माहौल में PoK इनकी तुलना में अब तक शांत माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल चुकी है। जिस PoK को पाकिस्तान हमेशा शांत बताता रहा, वहीं अब उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी का कहना है कि सरकार ने संगठन की लगभग सभी मांगें मान ली थीं। सिर्फ संवैधानिक बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने कहा, “अब यह विरोध प्रदर्शन नहीं रहा। ये लोग अब प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि दंगाई हैं।” पाकिस्तान सरकार का कहना है कि PoK की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव करने से भारत के साथ कश्मीर विवाद पर उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म कर दी गईं, तो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इससे कश्मीर पर उसके दावे को नुकसान पहुंच सकता है। भारत के फैसले के बाद बढ़ा PoK में तनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि PoK में चल रहे आंदोलन की शुरुआत 2019 की घटनाओं के बाद हुई। उसी साल भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके विरोध में PoK में भी प्रदर्शन हुए और लोग नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार रहने वाले कश्मीरियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। मुजफ्फराबाद के राजनीतिक कार्यकर्ता जाहिद अमीन का कहना है कि लोगों की नाराजगी सिर्फ भारत के फैसले से नहीं थी। उन्हें इस बात का भी गुस्सा था कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यहीं से पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़नी शुरू हुई। JAAC बोली- पाकिस्तान से अलग होना नहीं चाहते PoK एक विशेष संवैधानिक व्यवस्था के तहत चलता है। यहां अपना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधानसभा, सुप्रीम कोर्ट और अलग झंडा है। हालांकि रक्षा, विदेश नीति और कई अहम मामलों पर अंतिम फैसला पाकिस्तान की केंद्र सरकार का ही होता है। यहां चुनाव तो होते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को पाकिस्तान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी पड़ती है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर कई लोग मानते हैं कि उनके पास सीमित अधिकार हैं और बड़े फैसले इस्लामाबाद में लिए जाते हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि वह न तो पाकिस्तान से अलग होना चाहती है और न ही भारत में शामिल होना चाहती है। संगठन का कहना है कि उसकी सिर्फ इतनी मांग है कि PoK के लोगों को अपने इलाके के फैसले लेने का ज्यादा अधिकार मिले। इसके लिए वह ज्यादा स्थानीय अधिकार और संवैधानिक बदलाव की मांग कर रहा है। सेना बोली- आंदोलनकारी कानूनी तरीके से मांग उठाएं पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का कहना है कि सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ संयम बरता है। चौधरी ने कहा कि सरकार ने कई बार JAAC से कहा कि वह 27 जुलाई से शुरू हुए स्थानीय चुनाव में हिस्सा ले और अपनी मांगें कानूनी तरीके से उठाए। लेकिन आंदोलनकारी सड़क पर दबाव बनाकर अपनी मांगें मनवाना चाहते हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने स्थानीय चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। संगठन का आरोप है कि आंदोलन से जुड़े कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्र बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिए गए। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है। इस्लामाबाद के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा का कहना है कि 2024 और 2025 के आंदोलनों के दौरान सरकार ने बिजली सस्ती करने और आटे पर सब्सिडी जैसी रियायतें दी थीं। इससे लोगों में यह धारणा बन गई कि सड़क पर उतरकर दबाव बनाने से सरकार झुक जाती है। इसी वजह से JAAC अब राजनीतिक और संवैधानिक मांगों को लेकर भी बड़े आंदोलन कर पा रही है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Apple के iPhone 16 पर Flipkart शानदार ऑफर लेकर आया है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर iPhone 16 के 128GB मॉडल की कीमत सीधे डिस्काउंट के बाद 67,900 रुपए हो गई है। वहीं, अगर ग्राहक एक्सचेंज ऑफर और चुनिंदा बैंक कार्ड के डिस्काउंट का फायदा उठाते हैं, तो इस फोन को प्रभावी तौर पर सिर्फ 40,612 रुप में खरीदा जा सकता है। यह ऑफर फिलहाल White कलर ऑप्शन पर उपलब्ध है। हालांकि, स्टॉक और ऑफर्स के आधार पर दूसरे कलर वेरिएंट पर भी इसी तरह की कीमत मिल सकती है।
iPhone 16 को ₹40,612 में कैसे खरीदें?
Flipkart पर iPhone 16 (128GB) की कीमत 67,900 रुप है। इसकी लॉन्च कीमत 69,900 रुपए थी। यानी फोन की कीमत में पहले ही 2,000 रुपए की कटौती की जा चुकी है। अब ग्राहक अपने पुराने iPhone 13 को एक्सचेंज करके कीमत को और कम कर सकते हैं। Flipkart की लिस्टिंग के मुताबिक, iPhone 13 पर 23,150 रुपए तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। इसके अलावा, योग्य Flipkart Axis Bank Credit Card और Flipkart SBI Credit Card से भुगतान करने पर 4,138 रुपए तक का बैंक डिस्काउंट मिल रहा है।
इस तरह कैलकुलेशन कुछ इस प्रकार है:
- iPhone 16 (128GB) की बिक्री कीमत: 67,900
- रुपए iPhone 13 पर अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू: ₹23,150
- योग्य बैंक डिस्काउंट: 4,138
- रुपए प्रभावी कीमत: 40,612 रुपए
हालांकि, ध्यान रखें कि रुपए 40,612 कोई फ्लैट डिस्काउंट कीमत नहीं है। यह कीमत अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू और बैंक ऑफर को मिलाकर बनती है।
एक्सचेंज ऑफर में इन बातों का रखें ध्यान
पुराने iPhone की एक्सचेंज वैल्यू उसके कंडीशन, उम्र और काम करने की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर फोन की हालत खराब है या उसमें कोई तकनीकी समस्या है, तो एक्सचेंज वैल्यू कम हो सकती है। इसी तरह बैंक डिस्काउंट भी कार्ड की पात्रता और लागू नियम एवं शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए खरीदारी पूरी करने से पहले Flipkart के checkout page पर मिलने वाली final payable amount जरूर चेक करें।
iPhone 16 के स्पेसिफिकेशंस
iPhone 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन में Apple का A18 चिपसेट मिलता है। इसका बेस मॉडल 128GB इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 48MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 12MP का सेकेंडरी कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 12MP का फ्रंट कैमरा मिलता है।
iPhone 16 में वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है। इसके अलावा फोन Apple के लेटेस्ट सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस, फोटोग्राफी, गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए कई फीचर्स के साथ आता है। हैंडसेट और बॉक्स में मिलने वाले एक्सेसरीज पर 1 साल की वारंटी भी दी जाती है।
खरीदने से पहले जरूर देखें अंतिम कीमत
iPhone 16 को 40,612 रुपए में खरीदने के लिए तीन फायदे एक साथ मिलने जरूरी हैं—67,900 रुपए की मौजूदा बिक्री कीमत, iPhone 13 पर 23,150 रुपए तक का एक्सचेंज और योग्य क्रेडिट कार्ड पर 4,138 रुपए का बैंक डिस्काउंट। चूंकि एक्सचेंज वैल्यू फोन की स्थिति के अनुसार बदल सकती है और बैंक ऑफर भी समय के साथ अपडेट हो सकते हैं, इसलिए ऑर्डर प्लेस करने से पहले checkout page पर मिलने वाली अंतिम कीमत की जांच जरूर करें।
CIBIL Score: अगर आपके पास कई बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड हैं और उनमें से कुछ का इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो उन्हें बंद करने का विचार आना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसा करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इसका आपके CIBIL Score पर क्या असर पड़ सकता है।
पुराने क्रेडिट कार्ड को बंद करना सही है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराने क्रेडिट कार्ड को बंद करने से CIBIL स्कोर पर असर पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो है। मतलब कि आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट कितनी है और आप उसका कितना प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं।
मान लीजिए आपके सभी क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट ₹1 लाख है और आपने ₹20,000 खर्च किए हैं। ऐसे में आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो 20% होगा। लेकिन अगर ₹25,000 लिमिट वाला एक क्रेडिट कार्ड बंद कर देते हैं, तो आपकी कुल क्रेडिट लिमिट घटकर ₹75,000 रह जाएगी।
अब वही ₹20,000 खर्च आपकी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ाकर 26.7% कर देगा। यानी बिना खर्च बढ़ाए भी आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाएगा, जिसे बैंक आमतौर पर अच्छा नहीं मानते।
बैंक अकाउंट बंद करने से क्या होगा?
सेविंग या करंट अकाउंट बंद करने का आपके CIBIL स्कोर पर सीधा असर नहीं पड़ता। इसकी वजह यह है कि बैंक अकाउंट की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को नहीं भेजी जाती।
हालांकि, अगर उसी अकाउंट से किसी लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का ऑटो-डेबिट जुड़ा है और अकाउंट बंद करने से भुगतान रुक जाता है, तो EMI मिस हो सकती है। इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल खराब हो सकती है।
पुरानी क्रेडिट हिस्ट्री क्यों जरूरी है?
CIBIL Score तय करने में क्रेडिट हिस्ट्री की अवधि भी अहम भूमिका निभाती है। जितना पुराना और बेहतर रिकॉर्ड होगा, बैंक उतना ज्यादा भरोसा करते हैं।
यही वजह है कि कई साल पुराने और अच्छी तरह मैनेज क्रेडिट कार्ड को बंद करने से बचना चाहिए। अगर उस पर कोई एनुअल फीस नहीं है, तो बीच-बीच में छोटा ट्रांजैक्शन करके उसे चालू रखना बेहतर विकल्प हो सकता है।
कितने क्रेडिट कार्ड होना सही है?
क्रेडिट कार्ड की कोई तय आदर्श संख्या नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि जितने कार्ड हों, उनका भुगतान समय पर किया जाए और उनका इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। जरूरत से ज्यादा कार्ड रखने से भुगतान की तारीखें बढ़ जाती हैं और गलती की आशंका भी बढ़ सकती है।
ऐसे में आपको उतने ही क्रेडिट कार्ड लेने चाहिए, जिन्हें आप आसानी से संभाल पाएं। छोटे-मोटे ऑफर के चक्कर में क्रेडिट कार्ड जमा करना कई बार सिरदर्द बढ़ा देता है।
ये गलतियां करने से बचें
- सबसे पुराना क्रेडिट कार्ड जल्दबाजी में बंद न करें। इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है।
- कार्ड बंद करने से पहले सभी बकाया का पूरा भुगतान करें। कोई ड्यू बाकी न रहने दें।
- ऑटो-डेबिट अपडेट करना न भूलें। अगर उसी कार्ड या बैंक अकाउंट से EMI या बिल कटता है, तो पहले उसे दूसरे अकाउंट में शिफ्ट करें।
- एनुअल फीस नहीं है, तो कार्ड चालू रखना बेहतर हो सकता है। बीच-बीच में छोटा ट्रांजैक्शन करते रहें।
- एक साथ कई क्रेडिट कार्ड बंद करने से बचें। इससे आपकी कुल क्रेडिट लिमिट घट सकती है और क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ सकता है।
- CIBIL रिपोर्ट चेक करें। कार्ड बंद होने के बाद यह सुनिश्चित करें कि उसकी स्थिति क्रेडिट रिपोर्ट में सही तरीके से अपडेट हुई है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
Share Market Crash: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के नए सिस्टम को लेकर मार्केट में काफी अनिश्चितता फैली है। ब्रोकरेजेज ने भी रिटेलर्स को सतर्क किया है। इसका असर आज मार्केट में दिखा और कच्चे तेल के भाव में उछाल ने इस दबाव को और बढ़ाया। इस दबाव में सेंसेक्स इंट्रा-डे हाई से 700 प्वाइंट्स से अधिक फिसल गया तो भी निफ्टी भी टूटकर 24500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का तेज दबाव दिखा और स्मॉलकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी फिसल गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की गिरावट है।
अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 01:07 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 249.56 प्वाइंट्स यानी 0.32% की गिरावट के साथ 78,389.47 और निफ्टी (Nifty) 283.30 प्वाइंट्स यानी 1.14% की फिसलन के साथ 24,491.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 504.12 प्वाइंट्स उछलकर 79,143.15 तक पहुंचा था जिससे फिर यह 781.36 प्वाइंट्स टूटकर 78,361.79 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी 291.10 प्वाइंट्स गिरकर 24,483.20 तक आ गया था।
Share Market Crash: ये है वजह
CAS सिस्टम
कई ब्रोकर्स ने खुदरा निवेशकों को दोपहर 3 बजे तक अपनी पोजिशन स्क्वेयर ऑफ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेजेज ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि जब तक नए मैकेनिज्म CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) में मार्केट ढल नहीं जाता है, अपनी पोजिशन 3:00 PM और 3:05 PM के बीच बंद कर दें। इससे मार्केट में बेयरेश माहौल बना है क्योंकि एक तरह से शेयरों के लेन-देन का समय कम हुआ है।
आईटी और प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स में दबाव
मार्केट पर आज आईटी और हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग स्टॉक्स ने काफी दबाव बनाया जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी कमजोर हुए। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक, निफ्टी एफएमसीजी में 1% से अधिक तो ऑटो और सरकारी बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी की गिरावट है।
कच्चे तेल में उछाल
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर प्रति बैरल $85 के करीब पहुंचा तो मार्केट पर इसकी आंच महसूस हुई।
India VIX में उछाल
मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में उछाल ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 2.41% के उछाल के साथ 12.21 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।
Nifty की एक्सपायरी
आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है जिसके चलते मार्केट में तेज उठा-पटक दिख रही है।
3 बजे तक कर दें स्क्वेयर ऑफ, इस कारण ब्रोकर्स ने दी रिटेल क्लाइंट्स को सलाह
Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।
इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग
गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।
बदला खरीदारी का तरीका
ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।
बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।
बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।
गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।
सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
EPF Account: रिटायरमेंट के तुरंत बाद PF का पूरा पैसा निकालना बड़ी भूल!
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Prashant Kishor Investment Portfolio: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बंपर जीत हासिल की है। बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाते हुए उन्होंने नीरज कुमार को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। इस सियासी जीत के साथ ही प्रशांत किशोर की संपत्ति और उनके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की चर्चा तेज हो गई है।
चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत संपत्ति ₹96.06 करोड़ है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास ₹101.93 करोड़ की संपत्ति है। यानी परिवार की कुल कुल संपत्ति करीब ₹198 करोड़ रुपये से अधिक है।
अनलिस्टेड इक्विटी में बड़ा दांव: वेधास वेंचर्स में 100% हिस्सेदारी
प्रशांत किशोर के पर्सनल वेल्थ मॉडल का सबसे बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट शेयरहोल्डिंग से आता है। प्रशांत किशोर की कुल संपत्ति में सबसे बड़ा योगदान उनकी अनलिस्टेड कंपनी ‘वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Vedhas Ventures Pvt Ltd) का है। इस कंपनी में उनकी 100% कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है, जिसकी बुक वैल्यू लगभग ₹95.26 करोड़ आंकी गई है। यह उनके कुल मूवेबल पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा एसेट क्लास है।
₹7.36 करोड़ की कराई हुई है FD
शेयर बाजार की अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव से बचने के लिए प्रशांत किशोर ने सेफ और फिक्स्ड-रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स में भारी निवेश कर रखा है:
HDFC बैंक में एफडी: प्रशांत किशोर के नाम पर एचडीएफसी बैंक में 5 मुख्य फिक्स्ड डिपॉजिट हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹7.36 करोड़ के करीब है।
पारिवारिक होल्डिंग: उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास 4 एफडी हैं और उनके बेटे दैविक्ष भारद्वाज के नाम पर भी एचडीएफसी बैंक में 2 फिक्स्ड डिपॉजिट मौजूद हैं।
बाजार के जोखिम और भू-राजनीतिक तनावों के बीच एफडी जैसे सुरक्षित विकल्पों में फंड रखना पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करता है।
डायरेक्ट इक्विटी, म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड्स
अनलिस्टेड शेयर्स और एफडी के अलावा प्रशांत किशोर और उनके परिवार ने डाइवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन अपनाया है। स्टॉक मार्केट व म्यूचुअल फंड: प्रशांत किशोर का मार्केट इन्वेस्टमेंट्स और बैंक एफडी मिलाकर कुल निवेश ₹8 करोड़ से अधिक का है। उनके हलफनामे में लिस्टेड कंपनियों के शेयर, डेट बॉन्ड्स और म्यूचुअल फंड स्कीम्स में भी बैलेंस्ड एक्सपोजर दर्ज किया गया है।
पटना से दिल्ली तक अचल संपत्ति
प्रशांत किशोर के पोर्टफोलियो में अचल संपत्तियों का भी बड़ा योगदान है। प्रशांत किशोर के पास कुल ₹73.87 करोड़ की अचल संपत्ति है। इसमें पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी का आवासीय मकान, गाजियाबाद और नई दिल्ली के वसंत विहार स्थित प्राइम प्रॉपर्टीज शामिल हैं। इसके अलावा रोहतास और बक्सर में पैतृक व कृषि भूमि भी दर्ज है। उनकी पत्नी के पास ₹12.42 करोड़ की अचल संपत्ति है, जिसमें असम (गुवाहाटी) और नोएडा (जेपी ग्रींस) में प्रॉपर्टीज शामिल हैं।
Market Trend : नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के शुरू होने के एक दिन बाद मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले खुले। निफ्टी पर हिंडाल्को,अदाणी पोर्ट्स, ट्रेंट,जियो फाइनेंशियल और अदाणी एंटरप्राइजेज टॉप गेनर्स में शामिल हैं। जबकि ग्रासिम,टाइटन कंपनी,SBI लाइफ इंश्योरेंस,बजाज ऑटो और इंफोसिस टॉप लूजर्स में हैं। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.2% फिसला है। जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.5% बढ़ा है।
उधर ग्लोबल मार्केट में भी सतर्कता का रुख बना हुआ है। निवेशकों की नजर पिछले हफ्ते के फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले के बाद अब लेटेस्ट यूएस कॉर्पोरेट अर्निंग्स और इंटरेस्ट रेट्स के आउटलुक पर बनी हुई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओवर नाइट कोई बड़ा नेगेटिव ग्लोबल ट्रिगर नहीं होने के कारण घरेलू मार्केट में स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन देखने को मिल सकता है।
निफ्टी व्यू
ऐसे में बाजार के ट्रेंड पर बात करते हुए मानस जायसवाल.com के मानस जायसवाल ने कहा कि निफ्टी ने कल ट्रायंगुलर फॉर्मेशन के ब्रेकआउट का अपर बैंड ब्रेक करते हुए एक कंफर्मेशन दिया है। निफ्टी आराम से अपने 200 मूविंग एवरेज के ऊपर ट्रेड करता रहा। ऐसा लगता है कि निफ्टी अब 25,000 के लेवल को टेस्ट करने के लिए तैयार है। आज अगर इसमें कोई डिप देखने को मिले या यह 24,600 से लेकर 24,550 की रेंज ट्रेड करने लगे तो वहां पर खरीदारी करने की राय रहेगी। आपके स्टॉप लॉसेस 24,400 के नीचे रहेंगे। इसके लिए आपको पोजीशनल टारगेट सेट करने हैं 25,000 के आसपास के।
बैंक निफ्टी व्यू
मानस जायसवाल ने आगे कहा कि बैंक निफ्टी में भी ट्रेंड काफी पॉजिटिव बना हुआ है। उम्मीद है कि इस बार बैंक निफ्टी 58,800 के लेवल को टेस्ट कर लेगा। ऐसे में आज अगर यह किसी डिप में 57,800 के आसपास आए तो वहां पर 57,500 के स्टॉप लॉस से खरीदारी करने की राय रहेगी। आपके टारगेट 58,800 के आसपास के रहने चाहिए। ध्यान रखें कि ये दोनों ही पोजीशनल ट्रेड है। इसके लिए जो प्राइस बताए गए हैं वो 3:15 का जो लास्ट ट्रेड प्राइस था उसके हिसाब से बताए गए हैं।
मानस जायसवाल की टॉप पिक्स
आज के लिए इनकी पहली पसंद है इंडिगो यानी इंटरग्लोब एविएशन। इस शेयर ने 5250 से लेकर 5325 रुपए तक की अपनी रेजिस्टेंस रेंज ब्रेक कर दी है। इस शेयर में 5339 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 5500 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह होगी। दूसरा स्टॉक है LTM। इस शेयर में पहले से ही हायर टॉप और हायर बॉटम्स बन रहे थे। कल इसने अपने 200 डे मूविंग एवरेज को भी फिर से हासिल कर लिया। यह पर रैली कंटिन्यू हो सकती है। इस शेयर में भी4590 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 4850 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह होगी।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Market view : पिछले कई दिनों की तेजी के बाद बाजार में अब थोड़ा ठहराव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निफ्टी और बैंक निफ्टी का आगे की चाल पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24736-24778/24809 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24858-24897/24934 पर है। इसके लिए पहला बेस 24489-24551 पर और बड़ा बेस 24419-24457 पर है। आज की पूरी कमेंट्री निफ्टी फ्यूचर्स के भाव पर आधारित है।
कल लॉन्ग पोजिशन कैरी करने की सलाह सही साबित हुई। FIIs की कैश में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इंडेक्स में शॉर्ट कवरिंग हुई। नेट शॉर्ट घटकर अब 1.50 लाख पर आ गया है। 24800 पहली बाधा है। 24950-25000 पर ऑप्शन बाधा है। 24600-24500 पर पुट राइटिंग का सपोर्ट है। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। 24736 पहली रुकावट है, इसके बाद 24778-24809 का जोन मुमकिन है। 24809 के ऊपर टिकने पर रजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है। ऑप्शन राइटर्स 3:00-3:10 बजे से पहले पोजिशन कवर करने पर ध्यान दें।
बैंक निफ्टी पर रणनीति
वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 58097-58221 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58389-58486/58571 पर है। इसके लिए पहला बेस 57523-57610 पर और बड़ा बेस 57210-57331 पर है। बैंक निफ्टी में तेजी बरकरार है। लेकिन 58000 बड़ा ऑप्शन बाधा है। RBI पॉलिसी से पहले बैंक निफ्टी की चाल अहम रहेगी। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। रेजिस्टेंस-1 पर मुनाफावसूली और सौदों पर नजर रखें। रेजिस्टेंस-1 के ऊपर टिकने पर रेजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है।
चकाचक चार्ट वाले शेयर
चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री। इनकी आज नेशनल एल्युमीनियम में 365 रुपए के आसपास, 359 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,377 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है। HONASA में भी इनकी 458 रुपए के आसपास, 452 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,475 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है।
बाजार की सोमवार की चाल पर एक नजर
भारतीय इक्विटी मार्केट में 3 अगस्त को लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 24,700 के ऊपर बंद हुआ। मीडिया स्टॉक्स को छोड़कर,सभी सेक्टर्स में हुई खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी आई
ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी बढ़कर 78,639.03 पर और निफ्टी 390.70 अंक या 1.60 फीसदी बढ़कर 24,774.30 पर सेटल हुआ था।
ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी खरीदारी आई। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की बढ़त देखने को मिली।
निफ्टी 50 स्टॉक्स की बात करें तो इंटरग्लोब एविएशन,TCS,इंफोसिस,श्रीराम फाइनेंस और ग्रासिम इंडस्ट्रीज टॉप गेनर्स रहे,जबकि सन फार्मा,अपोलो हॉस्पिटल्स,मारुति सुजुकी,ONGC और टेक महिंद्रा टॉप लूजर्स रहे।
निफ्टी मीडिया को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए। निफ्टी IT इंडेक्स में सबसे अधिक बढ़त रही। यह 3% से ज्यादा की बढ़त लेकर बंद हुआ था।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में बहुत कम बदलाव के साथ शुरुआत होने की संभावना है। सोमवार को Nifty के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल में CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) की वजह से आई तेजी के बाद GIFT Nifty सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। नए शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले दिन बेंचमार्क इंडेक्स में ज़बरदस्त तेजी देखी गई थी, लेकिन GIFT Nifty से मिल रहे संकेत बताते हैं कि ग्लोबल मार्केट से सपोर्ट मिलने के बावजूद, मार्केट की शुरुआत उस ऑक्शन से तय क्लोजिंग लेवल से नीचे हो सकती है। निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में आने वाले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी फ़ैसले और जून तिमाही के जारी नतीजों (अर्निंग्स सीज़न) पर भी कड़ी नज़र रखेंगे।
सुबह करीब 8:10 बजे GIFT Nifty, NSE IFSC पर पिछले सेशन की क्लोजिंग से लगभग 10 अंक नीचे 24,655 पर ट्रेड कर रहा था। इससे सोमवार की जबरदस्त रैली के बाद Nifty 50 की शुरुआत के ज़्यादातर फ़्लैट रहने का संकेत मिलता है। यह शुरुआती स्तर Nifty के 24,774.30 के ऑफिशियल क्लोजिंग लेवल से भी नीचे था, जो क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के पहले दिन से प्रभावित था।
सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार चौथे सेशन में तेज़ी जारी रही। अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर हुई खरीदारी के सपोर्ट से Sensex 544.39 अंक या 0.70 प्रतिशत बढ़कर 78,639.03 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 390.70 अंक या 1.60 प्रतिशत बढ़कर 24,774.30 पर बंद हुआ।
Wall Street में तेजी, एशियाई बाजारों में गिरावट
मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से ऑयल की कीमतें तेज़ी से गिरीं और रिस्क लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिससे US इक्विटी मार्केट ने अगस्त की शुरुआत मज़बूती के साथ की और ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने रहे। Dow Jones Industrial Average 1.32 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 1.48 प्रतिशत और Nasdaq Composite में 2.13 प्रतिशत की बढ़त हुई।
यह रैली US-Iran संघर्ष में तनाव कम होने के संकेतों के बाद आई। इससे ट्रेज़री यील्ड में भी गिरावट आई और अर्निंग्स व इकोनॉमिक डेटा के लिहाज़ से व्यस्त हफ़्ते से पहले निवेशकों का भरोसा बढ़ा। मंगलवार को ग्लोबल रैली के बाद एशियाई बाज़ारों में पॉज़िटिव लेकिन सतर्क रुख देखा गया। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई, जिसमें दक्षिण कोरिया में 2.1 प्रतिशत तक की तेज़ी का अहम योगदान रहा। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.3 प्रतिशत गिर गया, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स में मामूली बढ़त देखी गई।
तेज गिरावट के बाद तेल की कीमतों में सुधार
पिछले सेशन में भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली सुधार हुआ। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.7 प्रतिशत बढ़कर 84.39 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.7 प्रतिशत बढ़कर 80.95 डॉलर पर पहुंच गया। यह सुधार सोमवार को ब्रेंट क्रूड में 7 प्रतिशत की गिरावट के बाद आया है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक प्रोग्रेस की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को कम कर दिया है। हालांकि कीमतों में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन ये अभी भी पिछले हफ़्ते के हाई लेवल से काफी नीचे हैं।
इंडेक्स पर क्या होनी चाहिए रणनीति
आज निफ्टी 50 के आउटलुक पर बात करते हुए, रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी 50 ने 24,400 के अहम रेजिस्टेंस ज़ोन (जो 200-दिन के DEMA के बराबर है) को साफ़ तौर पर पार करके अपने तेज़ी वाले स्ट्रक्चर को मज़बूत किया है। यह ब्रेकआउट जारी रिकवरी को और मज़बूत करता है और जल्द ही 25,000–25,200 ज़ोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोलता है। नीचे की तरफ़, अगर प्रॉफ़िट-बुकिंग होती है, तो 24,350–24,500 का इलाका तुरंत सपोर्ट का काम कर सकता है।
आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी R का मानना है कि बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को आगे बढ़ा रहा है और अपने 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है, जो बैंकिंग सेक्टर में लगातार मज़बूती दिखाता है। टेक्निकली, 58,000 ज़ोन से ऊपर लगातार बने रहने से खरीदारी की रफ़्तार बढ़ सकती है और इंडेक्स 58,300–58,500 के इलाके की ओर बढ़ सकता है।
नीचे की तरफ़, 57,300–57,400 का स्तर शॉर्ट-टर्म सपोर्ट का काम करता है, जिसे ठीक नीचे 57,000 के राउंड नंबर का सहारा मिलता है। इंडेक्स को इस दायरे से ऊपर बनाए रखने से तेज़ी का मौजूदा ट्रेंड बना रहता है, जबकि 57,000 से नीचे जाने पर शॉर्ट-टर्म में प्रॉफ़िट-बुकिंग हो सकती है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक पॉज़िटिव बना हुआ है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Trade setup for today : कल 3 अगस्त को निफ्टी में 1.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। जिससे नए हफ्ते की शुरुआत मज़बूती के साथ। लगातार चौथे सेशन में बाजार में तेजी आगे बढ़ती नजर आई। निफ्टी ने 24,600 पर स्थित अप्रैल के स्विंग हाई को पार कर लिया और 23.6 फीसदी फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से ऊपर बंद हुआ। मोमेंटम इंडिकेटर्स में भी बुलिश क्रॉसओवर दिखे। तेल की गिरती कीमतों और इंडिया VIX में नरमी ने भी इस तेजी में अच्छा रोल निभाया। हालिया तेजी के बाद अब निफ्टी में कुछ कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। निफ्टी के लिए 24,600-24,500 के जोन में तत्काल सपोर्ट है। हालांकि,आगे 24,774 के लेवल से ऊपर की टिकाऊ तेजी नफ्टी के लिए 24,850 का दरवाज़ा खोल सकती है,जिसके बाद 25,000-25,150 के जोन में अगला रेजिस्टेंस होगा।
यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।
Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल
पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,589, 24,528, और 24,429
पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,787, 24,848 और 24,947
निफ्टी ने कल डेली चार्ट पर एक लॉन्ग बुलिश कैंडल बनाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक के करेक्शन के 23.6 फीसदी फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से काफी ऊपर बंद हुआ। यह एक मजबूत बुलिश ट्रेंड का संकेत है। इंडेक्स आसानी से अप्रैल और जुलाई के पिछले स्विंग हाई को जोड़ने वाली डाउनवर्ड स्लोपिंग ट्रेंडलाइन से भी ऊपर चला गया,जिससे आगे सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। निफ्टी अपने सभी अहम एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से ऊपर बने रहने में कामयाब रहा और शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज का ट्रेंड भी ऊपर की ओर बना रहा। RSI पॉजिटिव क्रॉसओवर के साथ 66.87 पर पहुंच गया, जबकि MACD ने बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा,जिसमें फैलते हुए हरे हिस्टोग्राम बार मज़बूत बुलिश मोमेंटम का संकेत देते नजर आए।
बैंक निफ्टी
पिवट प्वांइट के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,286, 58,471 और 58,769
पिवट प्वांइट के आधार पर सपोर्ट: 57,689, 57,504 और 57,205
फिबोनाची रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,247, 61,787
फिबोनाची रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,305, 56,441
बैंक निफ्टी 1.72 फीसदी चढ़ा और गैप-अप ओपनिंग के बाद डेली टाइमफ्रेम पर एक लॉन्ग बुलिश कैंडल बनाया। यह अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। इससे पता चलता है कि बुल्स मजबूत हो रहे हैं,हालांकि मोमेंटम इंडिकेटर्स में अभी और मजबूती दिखनी बाकी है। पिछले पांच सेशन में कंसोलिडेट होने के बाद इंडेक्स मई के लो से जून के हाई तक की रैली के 23.6 फीसदी फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से भी ऊपर चला गया। RSI पॉजिटिव क्रॉसओवर के साथ 58.63 पर पहुंच गया,जबकि MACD बुलिश क्रॉसओवर की कगार पर है,जिसमें फीके पड़ते लाल हिस्टोग्राम बार कमजोर होते बेयरिश मोमेंटम को दिखा रहे हैं।
एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

इंडिया VIX
मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX सोमवार को 1.45 फीसदी बढ़कर 11.925 पर पहुंचने के बावजूद निचले जोन में ही रहा। इंडेक्स अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से भी काफी नीचे रहा। यह तेजड़ियों के लिए अच्छा संकेत है।
पुट कॉल रेशियो
बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 3 अगस्त को पिछले सेशन के 1.39 से बढ़कर 1.4 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।
F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक
F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।
एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं
एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: कोई नहीं
एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

