RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

भारत में अब मुफ्त UPI नहीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन

MDR charge on UPI payment

मंगलवार को संसद में देश के भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए जाने के साथ ही भारत अपने लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए गए लेन-देन पर मर्चेंट शुल्क को फिर से लागू करने के एक कदम और करीब पहुंच गया है। ALSO READ: UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक यूपीआई ने जुलाई में 29.9 ट्रिलियन रुपये ($313.5 बिलियन) मूल्य के 23.6 बिलियन लेन-देन संसाधित किए। वॉलमार्ट का फोनपे और अल्फाबेट का गूगल पे यूपीआई के माध्यम से होने वाले भुगतान में अपना दबदबा बनाए हुए हैं।

उद्योग जगत के अधिकारियों ने लंबे समय से यह तर्क दिया है कि डिजिटल भुगतान में वृद्धि को बनाए रखना कठिन हो गया है क्योंकि भुगतान कंपनियों को यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं मिलता है, जिससे इस पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में निवेश करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।

 

उद्योग और नियामक स्रोतों के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए भारत के भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुरू करने की अनुमति मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि यह बदलाव एमडीआर वसूलने का एक कानूनी आधार तैयार करता है, लेकिन शुल्क के स्तर या वे कहाँ लागू होंगे, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

 

एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारियों द्वारा डिजिटल लेन-देन को संसाधित करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाता है। हालांकि भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का एमडीआर लगता है, लेकिन वर्तमान में व्यापारियों के लिए यूपीआई लेन-देन मुफ़्त है।

 

दो दृष्टिकोणों पर विचार किया जा रहा है

नीति निर्माता दो व्यापक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं: एक निश्चित सीमा (थ्रेसहोल्ड) से ऊपर के लेन-देन पर एमडीआर लगाना या व्यापारी के वार्षिक टर्नओवर के आधार पर शुल्क वसूलना। एक प्रस्ताव में केवल बड़े व्यापारियों पर शुल्क लागू करने की बात कही गई है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ़्त रहेगा।

 

सरकार 1.5 करोड़ रुपये (15 मिलियन रुपये) से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये ($20.97) से अधिक के लेन-देन पर 0.3% से 0.5% का एमडीआर लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मंगलवार को जेफरीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन व्यापारी भुगतान मात्रा (वॉल्यूम) का केवल 4% हिस्सा हैं, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य (वैल्यू) का लगभग 67% हिस्सा हैं।

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर उम्मीद जताई और 2026-27 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया। वहीं, महंगाई के अनुमान में कटौती की गई है। RBI ने कहा कि देश में घरेलू मांग मज़बूत है,एक्सपोर्ट बढ़ा है,निवेश गतिविधि भी अच्छी है और ग्लोबल फ्रंट में बनी अनिश्चितताओं में कमी आ रही है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के फैसलों के बारे में बताते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष,ट्रेड टेंशन और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल माहौल में अस्थिर के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत कायम हैं।

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान हुई मजबूत

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती घरेलू मांग,मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज एक्टिविटी में लगातार बनी तेजी और मज़बूत एक्सपोर्ट से इकोनॉमी को सपोर्ट मिल रहा है,जिससे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी के तौर पर भारत की पहचान और मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इंडियन इकॉनमी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसको ध्यान में रखते हुए आरबीआई में 2026-27 के अपने रियल GDP ग्रोथ अनुमान को बदलकर 6.7 फीसदी कर दिया है। RBI को उम्मीद है कि पहली तिमाही में ग्रोथ रेट 7.0 फीसदी,दूसरी तिमाही में 6.4 फीसदी,तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहेगी। हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी कायम

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में तेजी, मज़बूत डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन,इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हो रहे सरकारी खर्च, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट में बढ़त से इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में डाइवर्सिफिकेशन,बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट और मार्केट डाइवर्सिफिकेशन से भी एक्सटर्नल डिमांड को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

दूसरे फेज की महंगाई बढ़ने को जोखिम कायम

RBI ने अपने महंगाई के अनुमान में भी बदलाव किया। उसका मनना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में रिटेल महंगाई 5.0 फीसदी रह सकती है। पहली तिमाही में महंगाई पहले के अनुमान से कम रही है, इसके चलते आगे के लिए भी अच्छे संकेत मिल रहे है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई में हाल में देखने को मिली बढ़ोतरी की मेन वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में आई तेजी है,न कि बड़े पैमाने पर आई डिमांड।

RBI को उम्मीद है कि खुदरा महंगाई इस फाइनेंशियल ईयर के तीसरे क्वार्टर में पीक पर होगी और उसके बाद कम हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि एल नीनो,कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाएं महंगाई के अनुमान पर असर डाल रहे हैं,जबकि खाने की चीजो,फ्यूल और दूसरी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी से दूसरे दौर के असर एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं।

कच्चे तेल के शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वेस्ट एशिया संघर्ष से सप्लाई में आई रुकावटें जून के बाद कम हो गई थीं, लेकिन जुलाई की शुरुआत से फिर से बढ़ी मुश्किलों ने एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है।

कच्चे तेल पर RBI ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें अभी भी बहुत वोलेटाइल हैं। जून में इंडियन बास्केट क्रूड में तेज गिरावट आई थी,लेकिन वेस्ट एशिया में फिर से तनाव बढ़ने की वजह से जुलाई में कच्चे तेल कीमतें काफी बढ़ गईं,जिससे इसके शॉर्ट-टर्म आउटलुक का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से इनपुट कॉस्ट बढ़ सकता है। इससे दूसरे दौर का महंगाई का दबाव बन सकता है।

ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता का दिख सकता है असर

गवर्नर ने ग्लोबल ट्रेड में जारी अनिश्चितता की ओर इशारा करते हुए कहा कि नए US टैरिफ,ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ में कमी और जियोपॉलिटिकल तनाव से बाहरी माहौल पर असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि,भारत को हाल ही में हुए बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट,हेल्दी सर्विसेज एक्सपोर्ट और मजबूत इनवर्ड रेमिटेंस से सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती

RBI ने कहा कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फ्लो में मजबूती बनी हई है। हाल के महीनों में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट में भी सुधार देखने को मिला है। इससे डेट मार्केट में कैपिटल लाने के लिए पॉलिसीगत उपायों से मदद मिली है। नतीजतन,इस साल बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में अच्छा सरप्लस हासिल होने की उम्मीद है।

भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व अच्छी स्थिति में

RBI गवर्नर ने कहा कि भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगभग 693 अरब डॉलर की अच्छी स्थिति में है। यह दस महीने से ज्यादा का इम्पोर्ट कवर दे सकता है। RBI की एक्सचेंज-रेट पॉलिसी पर उन्होंने कहा कि हम अपनी पॉलिसी जारी रखेंगे कि यह मार्केट की ताकतों के हिसाब से तय होगी। हालांकि एक्सेंज रेट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर हस्तक्षेप किया जाएगा,सट्टेबाजी पर रोक लगेगी और गलत हरकतों को रोकेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि इकोनॉमिक एक्टिविटी में कोई बाधा न आए।

अपने संबोधन के खत्म करते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि भारत के मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स ग्लोबल झटकों के खिलाफ सपोर्ट देते रहेंगे। हालांकि पॉलिसी बनाने वाले भविष्य में कोई भी पॉलिसी एक्शन लेने से पहले महंगाई,कच्चे तेल की कीमतों,मौसम की स्थिति और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखेंगे।

 

 

RBI Policy Highlights : रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव, जानिए महंगाई और ग्रोथ पर क्या है RBI गवर्नर की राय

RBI ने इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं किया, अब होम लोन और कार लोन के ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

आरबीआई ने 5 अगस्त को मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। यह 5.25 फीसदी पर बना हुआ है। जो लोग होम लोन और कार लोन ले चुके हैं, उनकी EMI में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। अगर आप होम लोन और कार लोन लेने का प्लान बना रहे हैं तो आपको मौजूदा इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल जाएगा।

बैंकों के कार लोन और होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब बैंकों के होम लोन और कार लोन रेपो रेट जैसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड हैं। इससे रेपो रेट बढ़ने पर बैंक होम लोन और कार लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं। रेपो रेट घटने पर आरबीआई उम्मीद करता है कि बैंक कार लोन और होम लोन के इंटरेस्ट रेट में कमी करेंगे।

2025 की शुरुआत से रेपो रेट 125 बेसिस प्वाइंट्स घटा चुका है आरबीआई

अगस्त की पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया। लेकिन, 2025 की शुरुआत से उसने इंटरेस्ट रेट घटाना शुरू किया था। वह इस बीच रेपो रेट में 1.25 फीसदी यानी 125 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर चुका है। इससे खासकर होम लोन के ग्राहकों को काफी राहत मिली है। या तो उनकी EMI कम हुई है या लोन रीपेमेंट पीरियड कम हुआ है।

रेपो रेट में कमी से होम लोन के ग्राहकों को मिली है बड़ी राहत

एक अनुमान के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लिया था तो रेपो रेट घटने से कुल इंटरेस्ट में उसे 9 लाख के फायदा का रास्ता खुला है। हर महीने की EMI में करीब 3,800-4000 रुपये की कमी आई है। यह होम लोन के ग्राहकों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट लगातार बढ़ाया था।

home loan table

फिलहाल होम लोन और कार लोन की EMI घटने की उम्मीद नहीं

बैंकिंग मामलों के जानकारों का कहना है कि होम लोन और कार लोन के पुराने ग्राहकों को फिलहाल EMI कम होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्हें आगे ज्यादा EMI चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसकी वजह यह है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ी है। इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है। अगर क्रूड ऑयल की कीमतें जल्द नीचे नहीं आती हैं तो महंगाई और बढ़ेगी। इससे कंट्रोल में करने के लिए आरबीआई को रेपो रेट बढ़ाना होगा। इससे होम लोन और कार लोन की EMI बढ़ेगी।

EMI घटाने के लिए आप इस तरीके का कर सकते हैं इस्तेमाल

अगर आप होम लोन और कार लोन की EMI में कमी करना चाहते हैं तो आपके लिए दूसरे रास्ते हैं। अगर आपके पास पैसा है तो आप लोन अमाउंट के कुछ हिस्से का प्रीपेमेंट कर सकते हैं। जिन लोगों को इस साल बोनस मिला है वे इस पैसे का इस्तेमाल लोन के प्रीपेमेंट के लिए कर सकते हैं। ऐसा कर आप या तो अपना EMI अमाउंट घटा सकते हैं या लोन के पीरियड में कमी ला सकते हैं। अगर आपकी सैलरी इंक्रीमेंट के बाद बढ़ी है तो आप बैंक को अपना EMI अमाउंट बढ़ाने के लिए कह सकते हैं। इससे इंटरेस्ट के मामले में आप काफी पैसे बचा सकेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

RBI MPC Meeting Aug 2026: महंगाई कितना करेगी परेशान! आरबीआई की इस बात से कहीं खुशी-कहीं गम

RBI MPC Meeting Aug 2026: केंद्रीय बैंक आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई की रफ्तार का अनुमान घटा दिया है। इस बार की मौद्रिक नीति में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और अपना न्यूट्रल नजरिया बरकरार रखा है तो साथ ही वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन यानी कि महंगाई बढ़ने की रफ्तार के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। सिर्फ यही नहीं इस तिमाही यानी चालू वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर 2026 के इनफ्लेशन का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया है। बता दें कि आरबीआई गवर्वर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को MPC (मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी) की अहम नीतिगत फैसलों का ऐलान किया है।

इनफ्लेशन को लेकर अब RBI का ये है कैलकुलेशन

आरबीआई की एमपीसी ने वित्त वर्ष 2027 के इनफ्लेशन के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है तो सितंबर 2026 के अनुमान को 5.1% से कम कर 4.7% किया है। हालांकि तीसरी तिमाही में इनफ्लेशन के अनुमान को 5.9% स्थिर रखा है तो चौथी तिमाही के लिए अनुमान 5.4% से बढ़ाकर 5.5% कर दिया है। इससे पहले पिछली बैठक में आरबीआई ने जून तिमाही के इनफ्लेशन के अनुमान को 4% से बढ़ाकर 4.2% कर दिया था तो सितंबर तिमाही के लिए इसे 4.4% से 5.1%, तीसरी तिमाही के लिए 5.2% से 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 4.7% से 5.4% कर दिया था।

जून महीने की बात करें तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें अधिक रहने और कई कैटेगरी में कीमतों का दबाव बढ़ने की वजह से जून में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई। यह 17 महीनों में पहली बार है जब यह आरबीआई के 4% के मीडियम-टर्म टारगेट से ऊपर गई है।

Repo Rate को लेकर क्या हुआ है फैसला

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने अपने रिव्यू बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी न्यूट्रल पर बनाए रखा है। रेपो रेट को स्थिर रखने का मतलब है कि आम लोगों के लोन की किश्तों में किसी बदलाव के आसार नहीं हैं।

आरबीआई की एमपीसी बैठक से जुड़े अहम अपडेट्स यहां पढ़ें

RBI Monetary Policy: आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाया, नहीं बढ़ेगी आपके होम लोन और कार लोन की EMI

आरबीआई ने रेपो रेट का ऐलान कर दिया है। उसने इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि होम लोन और कार लोन की ईएमआई बढ़ने नहीं जा रही है। इसका अनुमान पहले से था। जानकारों का कहना था कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा जुलाई की पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेंगे।

मनीकंट्रोल के पाल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स और एनालिस्ट्स का मानना था कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखेगा। उसका रुख भी न्यूट्रल बना रहेगा। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन, ग्रोथ और कैपिटल फ्लो पर आरबीआई की कमेंट्री पर नजर रखने की जरूरत है।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक 3 जुलाई को शुरू हुई थी। इसके नतीजे आज आए। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने तीन दिन की बैठक में केंद्रीय बैेंक ने घरेलू इकोनॉमी के साथ ही वैश्विक इकोनॉमी के हालात पर चर्चा की। खासकर उसकी नजरें जियोपॉलिटिकल स्थिति पर थी।

आरबीआई ने हाल में देश में पूंजी की आवक बढ़ाने के लिए कुछ उपाय किए थे। इसका फायदा मिला है। FCNR(B) जुलाई के अंत में 60 अरब डॉलर के पार हो गया। इसका सबसे हिस्सा यानी 4.12 अरब डॉलर एसबीआई के पास आया है।

इनफ्लेशन

आरबीआई पॉलिसी में इनफ्लेशन के अपने अनुमान में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। फिर भी, उसकी कमेंट्री पर नजर रखनी होगी। इसकी वजह यह है कि जून की पॉलिसी में क्रूड में उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इनफ्लेशन के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया था।

ग्रोथ के अनुमान

आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ के लिए 6.6 फीसदी का अनुमान दिया है। लेकिन, एसबीआई रिसर्च का मानना है कि अप्रैल-जून तिमाही में ग्रोथ करीब 7 फीसदी रह सकती है। जून की पॉलिसी में केंद्रीय बैंक ने ग्रोथ के अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था।

क्रूड ऑयल

क्रूड ऑयल की कीमतों पर अभी आरबीआई की सबसे ज्यादा नजरें हैं। इसकी वजह यह है कि अब भी कीमतें लड़ाई से पहले के लेवल से काफी ज्यादा है। यह भारत के लिए चिंताजनक है।

रेपो रेट का अनुमान

जानकारों का कहना है कि भले ही आज आरबीआई रेपो रेट नहीं बढ़ाएगा। लेकिन, महंगाई बढ़ने पर वह आगे रेट बढ़ा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे होगा। साथ ही पहले लोन ले चुके लोगों की EMI भी बढ़ जाएगी।

REPO Rate के ऐलान से पहले Sensex में 600 अंकों का उछाल, 5 वजहों से Nifty पहुंचा 24600 के पार

Share Market Rally: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट आई तो बाजारों में रौनक छा गई। घरेलू स्टॉक मार्केट में भी सेंसेक्स 600 प्वाइंट्स से ऊपर चढ़ गया और निफ्टी भी 24600 के पार चला गया। मार्केट में यह रौनक उस दिन आई है, जब आरबीआई (RBI) रेपो रेट (REPO Rate) को लेकर ऐलान करने वाला है। ब्रोडर लेवल पर भी आज शानदार रौनक दिखी और स्मॉलकैप स्पेस में थोड़ी अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 371.98 प्वाइंट्स यानी 0.47% की बढ़त के साथ 78,800.93 और निफ्टी (Nifty) 7.95 प्वाइंट्स यानी 0.03% के उछाल के साथ 24,622.85 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 626.43 प्वाइंट्स चढ़कर 79,055.38 और निफ्टी 62.70 प्वाइंट्स उछलकर 24,677.60 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका-ईरान के बीच जल्द सौदे की उम्मीद

अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा है कि ईरान के साथ बहुत जल्द डील फाइनल हो सकती है। इसने जियो-पॉलिटिकल टेंशन के हल्के होने के आसार बढ़ा दिए हैं जिससे भारत समेत अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक छा गई।

कच्चे तेल में गिरावट

होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट आई है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल 5% से ज्यादा गिरकर $79 के पास आ गया है। इससे मार्केट को शानदार सपोर्ट मिला है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी

विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने 4 अगस्त को लगातार छठे सेशन में अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा और ₹2,446 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

सरकारी बैंकों और ऑटो सेक्टर से मजबूत सपोर्ट

मार्केट को ऑटो और सरकारी बैंकों से मजबूत सपोर्ट मिला है जिनके निफ्टी इंडेक्स में 1-1% से अधिक की बढ़त है। जुलाई महीने के मजबूत सेल्स डेटा पर ऑटो सेक्टर और आरबीआई की मौद्रिक नीतियों के ऐलान से पहले सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी है।

डॉलर इंडेक्स में नरमी

मिडिल ईस्ट को लेकर नई उम्मीदों के चलते डॉलर छह हफ्ते के निचले स्तर के पास बना रहा। छह बड़ी करेंसी के मुकाबले अमेरिकी करेंसी को ट्रैक करने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स सोमवार को छह हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद पर 99.85 पर दिख रहा है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

MDR Charges on UPI payment

सरकार ने संसद में ऐसा बिल पेश किया है जिससे 2000 रुपए से ऊपर के UPI बिजनेस ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR चार्ज लगाने का रास्ता खुल सकता है। यह चार्ज व्यक्ति से व्यक्ति के ट्रांसफर पर यह लागू नहीं होगा। प्रस्तावित चार्ज केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों की जेब से पैसे नहीं कटेंगे। ALSO READ: योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

 

निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया बिल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर एमडीआर लगाने के प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इसे कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

 

क्या है MDR? 

एमडीआर वह फीस है जो मर्चेंट यानी दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा के लिए बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक एमडीआर फ्रेमवर्क को रेगुलेट करता है। जनवरी 2020 से सरकार ने डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने के लिए यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर जरूरी कर दिया है। ALSO READ: Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

 

बड़े व्यापारियों के लिए मुफ्त नहीं रहेगा UPI

यूपीआई भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जहां हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं। ऐसे में सिस्टम को मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकार और रेगुलेटर्स नए विकल्प तलाश रहे हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम यूजर्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़े व्यापारियों के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त नहीं रहेगा।

 

95 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा MDR?

दावा किया जा रहा है कि 2000 की सीमा कुल यूपीआई लेनदेन का सिर्फ 5 फीसदी कवर करेगी, लेकिन इन लेनदेन का मूल्य कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का 65 फीसदी है। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना या ऑटो-टैक्सी के भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा। जुलाई में 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपए रही। कहा जा रहा है कि अगर लागू भी हुआ तो 95 फीसदी लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी बिजनेस इस फीस को ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, जो बहुत छोटी राशि होगी।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या बाजार में भरेगी जोश, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा हैं संकेत, RBI की पॉलिसी पर नजर

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। वॉल स्ट्रीट के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने , कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण एशियाई बाजारों में तेजी के बाद GIFT निफ्टी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहा है। आज सबकी नजरें RBI के पॉलिसी फ़ैसले पर होंगी, जिससे बैंकों, NBFCs, ऑटो और रियल्टी जैसे ब्याज दरों से असर पड़ने वाले सेक्टर के शेयरों पर ध्यान रहेगा।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 165 अंक या 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 24,745 पर ट्रेड कर रहा था, जो यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,614.90 के क्लोजिंग स्तर से काफी ऊपर खुल सकता है। बाजार के सकारात्मक शुरुआत के संकेत तब आए हैं जब भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने मंगलवार को लगातार चार सत्रों की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया था। सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 78,428.95 पर आ गया, जबकि निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। RBI के पॉलिसी फैसले और साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

एशियाई बाजारों में तेजी, वॉल स्ट्रीट रिकॉर्ड ऊंचाई पर

बुधवार को एशियाई इक्विटी में वैश्विक तेजी जारी रही, क्योंकि टेक्नोलॉजी कंपनियों की अच्छी कमाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति की उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। जापान का निक्केई 225 3 फीसदी बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4 फीसदी चढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 1.5 फीसदी ऊपर चढ़ा।

शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी फ्यूचर्स मिले-जुले रहे, जिसमें बेंचमार्क के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी ऊपर चढ़े।

अमेरिकी इक्विटी में रात भर आई तेजी के बाद वैश्विक धारणा में काफी सुधार हुआ। अच्छी कॉर्पोरेट कमाई और जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। डॉव 1.71 प्रतिशत चढ़ा, जबकि S&P 500 में 1.79 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 2.59 फीसदी की बढ़त हुई। पैलांटिर टेक्नोलॉजीज और कैटरपिलर जैसी AI से जुड़ी कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों और सालाना अनुमानों में बढ़ोतरी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ावा दिया।

तेल की कीमतों में गिरावट जारी

पिछले सेशन में 5 प्रतिशत से ज़्यादा गिरने के बाद कच्चे तेल की कीमतें दबाव में रहीं, क्योंकि US-ईरान विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट के डर को कम कर दिया। ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर $79.02 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.5 फीसदी गिरकर $75.35 पर आ गया।

RBI के पॉलिसी फैसले पर नज़र

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीद और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार के निकट-अवधि के नजरिए को मजबूत किया है, जबकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से भी बाजार की धारणा को मजबूती मिल रही है।

पोनमुडी ने कहा कि निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से बुधवार को आने वाले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर है। बाजार के प्रतिभागी महंगाई, लिक्विडिटी, ग्रोथ और व्यापक पॉलिसी आउटलुक पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

Stock Market Live Update: GIFT निफ्टी, जो निफ्टी 50 के परफॉर्मेंस का शुरुआती इंडिकेटर है, 24,744.50 पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि F&O एक्सपायरी के आसपास उतार-चढ़ाव का असर इक्विटी पर पड़ा, जबकि बुधवार को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी फ़ैसले से पहले निवेशक सतर्क रहे। निफ्टी 50 159.40 अंक या 0.64% गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27% गिरकर 78,428.95 पर बंद हुआ।

ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के सर्वे के अनुसार, RBI के रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने और अपनी न्यूट्रल पॉलिसी का रुख जारी रखने की उम्मीद है।

महंगाई पर सेंट्रल बैंक के आकलन पर सबकी नज़र रहेगी, खासकर इसलिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से एनर्जी की कीमतें ज़्यादा बनी हुई हैं। पॉलिसी बनाने वालों की नज़र इस बात पर होगी कि क्या ईंधन की ज़्यादा कीमतों का असर दूसरी चीज़ों की कीमतों पर भी पड़ता है। हालांकि, महंगाई RBI की 2% से 6% की टॉलरेंस रेंज के अंदर ही बनी हुई है।

आज सबकी नज़रें RBI के पॉलिसी फ़ैसले पर होंगी, जिससे बैंक, NBFC, ऑटो और रियल्टी जैसे रेट-सेंसिटिव स्टॉक्स फोकस में रहेंगे। साथ ही ICICI लोम्बार्ड, गो डिजिट और न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों पर भी नज़र रखें।